Cripps Mission - 1942

 क्रिप्स मिशन- 1942.

द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की भागीदारी और मदद मांगने के लिए मार्च 1942 में ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की सरकार में मंत्री सर स्टेफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में क्रिप्स मिशन भारत आया| इसकी दो अन्य सदस्य - ए०बी० अलेक्जेंडर तथा लॉर्ड पैथिक लोरेंस थे|
           22 मार्च 1942 को यह मिशन भारत आया और 29 दिन के प्रवास के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों से मिला और अपना मसौदा प्रस्तुत किया-
  1. युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन राज्य का दर्जा दिया जाएगा जो कि किसी बाहरी सत्ता के अधीन नहीं होगा|
  2. भारतीयों का अपना संविधान निर्मित करने का अधिकार दिया जाएगा , जिसके लिए युद्ध के बाद एक संविधान निर्मात्री परिषद बनेगी,  जिसमें भारत के प्रांतों के निर्वाचित सदस्य और देसी रजवाड़ों के प्रतिनिधि शामिल होंगे|
  3. ब्रिटिश भारत का कोई प्रांत यदि नए संविधान को स्वीकार नहीं करना चाहे तो उसे वर्तमान संवैधानिक स्थिति बनाए रखने का अधिकार होगा | अगर यह प्रांत चाहे तो अलग संविधान बना सकते हैं|
  4. युद्ध के दौरान वायसराय की कार्यकारिणी में भारतीय जनता के प्रमुख वर्गों को शामिल किया जाएगा , लेकिन रक्षा मंत्रालय ब्रिटिश नेतृत्व के पास रहेगा|
    क्रिप्स मिशन के साथ कांग्रेस के आधिकारिक वार्ताकार पंडित जवाहरलाल नेहरू,  मौलाना आजाद नियुक्त हुए | इस मिशन ने डोमिनियन स्टेट देने की बात की | जबकि कांग्रेस पूर्ण स्वाधीनता की मांग की | इसलिए कांग्रेस ने इस मिशन को ठुकरा दिया |  महात्मा गांधी ने दिवालिया बैंक के नाम से भविष्य की तिथि मे भुनने वाला चेक कहा | डॉक्टर पट्टाभि सीतारमैय्या ने अगस्त प्रस्ताव का परिवर्तित संकरण मात्र कहा| मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान देश न माने जाने पर इस मिशन को अस्वीकार कर दिया |

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