गवर्नर जनरल लार्ड नार्थ ब्रुक| लार्ड लिटन |वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट |लार्ड रिपन |इल्बर्ट बिल |लार्ड डफरिन |gk questions |
लार्ड नार्थ ब्रुक (1872 से 1876)
- पंजाब का प्रसिद्ध कूका आन्दोलन- गुरु रामसिंह जी ने 1872 मे किया |
- स्वेज नहर से व्यापार शुरू हुआ |
-लार्ड नार्थ ब्रुक के अनुसार :-मेरा उद्देश्य करो को हटाना तथा अनावश्यक वैधानिक कार्यवाहियों को बन्द करना है।
लार्ड लिटन (1876 से 1880)
लॉर्ड लिटन एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, निबंध लेखक एवं साहित्यकार था
1876 में लिटन के वायसराय बनकर कर आने पर अफगानिस्तान प्रति अपनाई गई नीति में परिवर्तन आया। कुशल आकर्मण्यता की नीति के स्थान पर अग्रगामी नीति का अनुशरण होने लगा। मार्च 1878 में लिटन ने भारतीय समाचार पत्र अधिनियम ( वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट) पारित कर भारतीय समाचार पत्रों पर कठोर प्रतिबन्ध लगा दिए| ( विशेषकर राष्ट्रवादी समाचार पत्र 'सोम प्रकाश ' को प्रतिबंधित करने के लिए |
-पायनियर अखबार ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 का समर्थन किया।
लॉर्ड लिटन के समय में ही 1878ई0 में भारतीय शास्त्र अधिनियम पारित हुआ, जिसमे तहत शस्त्र रखने एवं व्यापार करने के लिए लाइसेंस को अनिवार्य बना दिया गया |
लार्ड रिपन (1880-1884)
-रिपन ने सर्वप्रथम समाचार पत्रों की स्वतंत्रता को बहाल करते हुए सन 1872 का वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट को समाप्त कर दिया |
-भारत में 1881 ई० में सर्वप्रथम नियमित जनगणना करवाई गई तब से लेकर अब तक प्रत्येक 10 वर्ष के अन्तराल पर जनगणना की जाती है।
-भारत में पहली बार जनगणना सन् 1872 में हुई।
- रिपन के कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण कार्य स्थानीय स्वशासन पर सरकारी प्रस्ताव (18 मई 1882) था। रिपन देश की नगरपालिकाओं को विकसित करना चाहता है। 1884 में मद्रास में स्थानीय बोर्ड कानून बना (प्रथम) जिसके द्वारा पहली बार स्थानीय बोर्डों को सड़कों की सफाई, प्रकाश, प्राथमिक शिक्षा जल व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य के देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गयी
- इल्बर्ट बिल- सर पी. सी. एल्बर्ट जो वायसराय परिषद के विधि सदस्य थे इन्होंने 2 फरवरी 1883 को विधान परिषद में एक विधेयक प्रस्तुत किया जिसे इल्बर्ट बिल की संज्ञा दी जाती है। इस विधेयक का उद्देश्य था कि जाति भेद पर आधारित सभी न्यायिक अयोग्यताएँ तुरंत समाप्त कर दी जाये। इसका काफी विरोध हुआ तथा विल वापस ले लिया गया ।
-22जनवरी 1884 को एक नया बना तथा यह निश्चित किया गया कि भारतीय न्यायाधीश अंग्रेज अपराधियों के मुकदमें का निर्णय तो कर सकते थे, परन्तु उन्हें जूरी मण्डल का परामर्श लेना आवश्यक है जिसमें 12 सदस्य हो उन 12 सदस्य में से कम से कम 7 सदस्य यूरोपीय हो ।
-भारत का मुक्तिदाता रिपन को फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने कहा |
तथा उसके प्रशासन काल को स्वर्णयुग का आरम्भिक बिन्दु माना जाता है।
लार्ड डफरिन (1884-1888)
- लॉर्ड डफरिन के समय आंग्ल वर्मा युद्ध (1885-88) हुआ जिसमें वर्मा पराजित हुआ।
- प्रथम-आंग्ल वर्मा युद्ध- 1824-26 लार्ड एमहर्स्ट के समय में हुआ था
- द्वितीय आंग्ल वर्मा युद्ध - 1852 लार्ड डलहौजी के समय में हुआ था
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