चंपारण किसान आंदोलन|अवध किसान आंदोलन|मोपला विद्रोह| history samany gyan|

 चंपारण किसान आंदोलन 1917

चंपारण में बिद्रोह का कारण था तिनकठिया पद्धति, जिसके तहत किसान नील की खेती करने को बाध्य थे अर्थात 3/20 वे भाग पर नील की खेती करना आवश्यक था| 
चंपारण के राजकुमार शुक्ला नामक व्यक्ति ने गांधी जी को यहां के किसानों के पक्ष में संघर्ष के लिए बुलाया | उनके सहयोगी बृज किशोर, राजेंद्र प्रसाद, महादेव देसाई, नरहरी पारेख,जी बी कृपलानी थे अंत में तिनकठिया पद्धति समाप्त कर दी गई और बागान मालिकों को अवैध वसूली की 25% रकम का किसानों को वापस लौटाने को भी बाध्य होना पड़ा|


खेड़ा सत्याग्रह 1918

-  खेड़ा सत्याग्रह महात्मा गांधी जी ने 1918 मे किया था और इस सत्याग्रह में इनके सहयोगी सरदार वल्लभभाई पटेल तथा इंदूलाल याग्निक थे |


अवध किसान आंदोलन 1918

- फरवरी 1918 में उत्तर प्रदेश किसान सभा का गठन किया गया,| इसकी स्थापना मदन मोहन मालवीय ,गौरी शंकर मिश्रा, इंदु नारायण द्विवेदी ने मिलकर की थी |
                  17 अक्टूबर 1920 को अवध किसान सभा का गठन किया गया जिसमें उत्तर प्रदेश किसान सभा का विलय हो गया ,इस नए संगठन में गौरी शंकर मिश्र ,जवाहरलाल नेहरू, माता बदल पांडे ,बाबा रामचंद्र और देव नारायण पांडे जैसे नेताओं के प्रयास से यह पूरा आंदोलन एकजुट हो गया |इसका परिणाम अवध मालगुजारी अधिनियम संशोधन पारित करके किसानों को राहत दी|


मोपला विद्रोह 1921

- मोपला विद्रोह दक्षिणी मालाबार क्षेत्र केरल में अगस्त 1921 ईस्वी में फैला था| यह विद्रोह भी जमीदारो के विरुद्ध किसानों का असंतोष था |
20 अगस्त 1921 ईस्वी में मोपला किसानों के नेता अली मुसलियार को गिरफ्तार करने के लिए छापा मारा पर वह नहीं मिला ,इसमें सैकड़ों मुसलमानों ने हिंदुओं को खूब सताया |

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