BUILDING MATERIAL CIVIL ENGINEERING JUNIOR ENGINEER J.E MCQ AND PYQ AND DETAIL ANSWER
चैप्टर 1: सीमेंट (Cement) - महत्वपूर्ण PYQ (Q1 - Q10)
📌 Exam Tags: UPSSSC JE 2016, SSC JE 2017, RRB JE 2015
Q1: ली-चैटेलियर उपकरण (Le-Chatelier apparatus) का उपयोग सीमेंट के किस परीक्षण के लिए किया जाता है?
- A) प्रारंभिक जमाव काल (Initial setting time)
- ✅ B) निर्दोषता (Soundness) (सही उत्तर)
- C) संपीडन सामर्थ्य (Compressive strength)
- D) सूक्ष्मता (Fineness)
💡 डिटेल Explanation:
ली-चैटेलियर उपकरण का उपयोग सीमेंट की निर्दोषता (Soundness) मापने के लिए किया जाता है। यह परीक्षण मुख्य रूप से स्वतंत्र चूने (Free Lime) की उपस्थिति के कारण होने वाले आयतन विस्तार (Volume expansion) का पता लगाता है। ली-चैटेलियर उपकरण में विस्तार 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: यदि soundness मैग्नीशिया (Magnesia) के कारण मापनी हो, तो ऑटोक्लेव (Autoclave) परीक्षण किया जाता है।
ली-चैटेलियर उपकरण का उपयोग सीमेंट की निर्दोषता (Soundness) मापने के लिए किया जाता है। यह परीक्षण मुख्य रूप से स्वतंत्र चूने (Free Lime) की उपस्थिति के कारण होने वाले आयतन विस्तार (Volume expansion) का पता लगाता है। ली-चैटेलियर उपकरण में विस्तार 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: यदि soundness मैग्नीशिया (Magnesia) के कारण मापनी हो, तो ऑटोक्लेव (Autoclave) परीक्षण किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPSSSC JE 2015, UPPCL JE 2019
Q2: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का प्रारंभिक जमाव काल (Initial setting time) कितना होना चाहिए?
- A) 10 मिनट से कम नहीं
- ✅ B) 30 मिनट से कम नहीं (सही उत्तर)
- C) 60 मिनट से कम नहीं
- D) 600 मिनट से कम नहीं
💡 डिटेल Explanation:
OPC (Ordinary Portland Cement) के लिए प्रारंभिक जमाव काल 30 मिनट से कम नहीं होना चाहिए और अंतिम जमाव काल (Final setting time) 10 घंटे (600 मिनट) से अधिक नहीं होना चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: जमाव काल (Setting time) का परीक्षण विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) द्वारा किया जाता है। इसके लिए मानक गाढ़ापन के लिए आवश्यक पानी का 0.85P भाग पानी मिलाया जाता है।
OPC (Ordinary Portland Cement) के लिए प्रारंभिक जमाव काल 30 मिनट से कम नहीं होना चाहिए और अंतिम जमाव काल (Final setting time) 10 घंटे (600 मिनट) से अधिक नहीं होना चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: जमाव काल (Setting time) का परीक्षण विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) द्वारा किया जाता है। इसके लिए मानक गाढ़ापन के लिए आवश्यक पानी का 0.85P भाग पानी मिलाया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, RRB JE 2019, DMRC JE 2017
Q3: सीमेंट में प्रारंभिक सामर्थ्य (Early strength) के लिए कौन सा बोग्स यौगिक (Bogue's compound) मुख्य रूप से उत्तरदायी है?
- ✅ A) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S) (सही उत्तर)
- B) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- C) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
- C3S (Alite): सीमेंट में पहले 7 दिनों की सामर्थ्य (Early strength) के लिए यही जिम्मेदार होता है।
- C2S (Belite): यह सीमेंट की अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength - 28 दिन या उसके बाद) के लिए उत्तरदायी होता है।
- C3A (Celite): यह पानी मिलाते ही तुरंत प्रतिक्रिया करता है और फ्लैश सेट (Flash set) का कारण बनता है।
📌 Exam Tags: UPSSSC JE 2016, SSC JE 2017, LMRC JE 2018
Q4: सीमेंट के निर्माण के दौरान क्लिंकर (Clinker) में जिप्सम (Gypsum) क्यों मिलाया जाता है?
- ✅ A) सीमेंट को जल्दी जमने (Flash setting) से रोकने के लिए (सही उत्तर)
- B) सामर्थ्य बढ़ाने के लिए
- C) रंग प्रदान करने के लिए
- D) ऊष्मा कम करने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
जिप्सम (CaSO4·2H2O) एक मंदक (Retarder) के रूप में कार्य करता है। इसे पीसते समय 2% से 3% की मात्रा में मिलाया जाता है। यह C3A की तेजी से होने वाली प्रतिक्रिया को धीमा करता है, जिससे सीमेंट तुरंत जमता नहीं है और कंक्रीट/मोर्टार को काम करने (Placement and Compaction) का पर्याप्त समय मिल जाता है।
जिप्सम (CaSO4·2H2O) एक मंदक (Retarder) के रूप में कार्य करता है। इसे पीसते समय 2% से 3% की मात्रा में मिलाया जाता है। यह C3A की तेजी से होने वाली प्रतिक्रिया को धीमा करता है, जिससे सीमेंट तुरंत जमता नहीं है और कंक्रीट/मोर्टार को काम करने (Placement and Compaction) का पर्याप्त समय मिल जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2020, UPSSSC JE 2018, DMRC JE 2017
Q5: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) सामान्यतः कितना होता है?
- A) 2.65
- ✅ B) 3.15 (सही उत्तर)
- C) 1.44
- D) 2.15
💡 डिटेल Explanation:
OPC का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) 3.15 होता है। इसका परीक्षण ली-चैटेलियर फ्लास्क (Le-Chatelier Flask) का उपयोग करके किया जाता है, जिसमें केरोसिन (Kerosene) तरल का उपयोग होता है क्योंकि सीमेंट केरोसिन के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता।
कंफ्यूजन पॉइंट: परीक्षा में अक्सर 1.44 का विकल्प होता है। याद रखें, 1440 kg/m³ सीमेंट का थोक घनत्व (Bulk Density) होता है, विशिष्ट गुरुत्व नहीं। एक सीमेंट बैग का वजन 50 kg होता है और इसका आयतन 0.0347 m³ या 34.7 लीटर होता है।
OPC का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) 3.15 होता है। इसका परीक्षण ली-चैटेलियर फ्लास्क (Le-Chatelier Flask) का उपयोग करके किया जाता है, जिसमें केरोसिन (Kerosene) तरल का उपयोग होता है क्योंकि सीमेंट केरोसिन के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता।
कंफ्यूजन पॉइंट: परीक्षा में अक्सर 1.44 का विकल्प होता है। याद रखें, 1440 kg/m³ सीमेंट का थोक घनत्व (Bulk Density) होता है, विशिष्ट गुरुत्व नहीं। एक सीमेंट बैग का वजन 50 kg होता है और इसका आयतन 0.0347 m³ या 34.7 लीटर होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPSSSC JE 2016, UKPSC JE 2013
Q6: रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) की तुलना में बहुत जल्दी सामर्थ्य प्राप्त कर लेता है। इसका मुख्य तकनीकी कारण क्या है?
- A) C2S की अधिक मात्रा और मोटी पिसाई
- ✅ B) C3S की अधिक मात्रा और अत्यधिक बारीक पिसाई (सही उत्तर)
- C) जिप्सम की अधिक मात्रा
- D) C3A की कम मात्रा
💡 डिटेल Explanation:
RHC मात्र 3 दिन में उतनी सामर्थ्य प्राप्त कर लेता है जितनी OPC 7 दिन में करता है। इसका मुख्य कारण इसमें C3S (ट्राईकैल्शियम सिलिकेट) का अनुपात अधिक होना है। साथ ही, इसे OPC की तुलना में बहुत अधिक बारीक पीसा (Fine grinding) जाता है। बारीक पिसाई से हाइड्रेशन के लिए सतही क्षेत्रफल (Surface area) बढ़ जाता है, जिससे प्रतिक्रिया तेजी से होती है।
RHC मात्र 3 दिन में उतनी सामर्थ्य प्राप्त कर लेता है जितनी OPC 7 दिन में करता है। इसका मुख्य कारण इसमें C3S (ट्राईकैल्शियम सिलिकेट) का अनुपात अधिक होना है। साथ ही, इसे OPC की तुलना में बहुत अधिक बारीक पीसा (Fine grinding) जाता है। बारीक पिसाई से हाइड्रेशन के लिए सतही क्षेत्रफल (Surface area) बढ़ जाता है, जिससे प्रतिक्रिया तेजी से होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UJVNL JE 2016, UPSSSC JE
Q7: ब्लेन वायु पारगम्यता उपकरण (Blaine's Air Permeability Apparatus) द्वारा सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) किस इकाई (unit) में मापी जाती है, और OPC के लिए इसका न्यूनतम मान क्या होना चाहिए?
- A) kg/m³, 1440
- ✅ B) cm²/gm, 2250 (सही उत्तर)
- C) mm/gm, 1000
- D) cm²/gm, 3000
💡 डिटेल Explanation:
ब्लेन परीक्षण सीमेंट के विशिष्ट सतही क्षेत्रफल (Specific Surface Area) को मापता है, जिसकी इकाई cm²/gm या m²/kg होती है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह मान 2250 cm²/gm (या 225 m²/kg) से कम नहीं होना चाहिए。
अतिरिक्त फैक्ट: रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) के लिए यह मान 3250 cm²/gm से कम नहीं होना चाहिए।
ब्लेन परीक्षण सीमेंट के विशिष्ट सतही क्षेत्रफल (Specific Surface Area) को मापता है, जिसकी इकाई cm²/gm या m²/kg होती है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह मान 2250 cm²/gm (या 225 m²/kg) से कम नहीं होना चाहिए。
अतिरिक्त फैक्ट: रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) के लिए यह मान 3250 cm²/gm से कम नहीं होना चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2015, RRB JE 2019
Q8: समुद्री जल (Marine environment) और सीवेज संरचनाओं (Sewage pipes) में कंक्रीट के निर्माण के लिए किस प्रकार के सीमेंट का उपयोग सर्वोत्तम माना जाता है?
- A) क्विक सेटिंग सीमेंट (Quick Setting Cement)
- B) लो हीट सीमेंट (Low Heat Cement)
- ✅ C) सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट (Sulphate Resisting Cement) (सही उत्तर)
- D) वाइट सीमेंट (White Cement)
💡 डिटेल Explanation:
समुद्री जल, सीवेज और क्षारीय मिट्टी में सल्फेट्स (Sulphates) होते हैं। ये सल्फेट्स सीमेंट में मौजूद C3A के साथ प्रतिक्रिया करके कंक्रीट में भारी विस्तार करते हैं, जिससे दरारें आ जाती हैं। सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट में C3A की मात्रा को 5% से कम रखा जाता है, जिससे यह सल्फेट हमले से सुरक्षित रहता है।
समुद्री जल, सीवेज और क्षारीय मिट्टी में सल्फेट्स (Sulphates) होते हैं। ये सल्फेट्स सीमेंट में मौजूद C3A के साथ प्रतिक्रिया करके कंक्रीट में भारी विस्तार करते हैं, जिससे दरारें आ जाती हैं। सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट में C3A की मात्रा को 5% से कम रखा जाता है, जिससे यह सल्फेट हमले से सुरक्षित रहता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, DMRC JE 2018, UPSSSC JE
Q9: विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का उपयोग करके सीमेंट का प्रारंभिक जमाव काल निकालते समय प्लंजर/सुई (Needle) का आकार क्या होता है?
- A) 10 mm व्यास का बेलनाकार प्लंजर
- ✅ B) 1 mm² अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाली वर्गाकार सुई (सही उत्तर)
- C) 5 mm व्यास वाली सुई जिसमें एक एनुलर कॉलर लगा हो
- D) 2 mm व्यास वाली गोल सुई
💡 डिटेल Explanation:
विकाट परीक्षण में तीन अलग-अलग अटैचमेंट उपयोग होते हैं:
विकाट परीक्षण में तीन अलग-अलग अटैचमेंट उपयोग होते हैं:
- मानक गाढ़ापन (Standard Consistency): 10 mm व्यास और 50 mm लंबाई का बेलनाकार प्लंजर।
- प्रारंभिक जमाव (Initial Setting): 1 mm² क्षेत्रफल वाली वर्गाकार सुई (Square Needle)।
- अंतिम जमाव (Final Setting): 5 mm व्यास वाली सुई जिसमें एक पीतल का कॉलर (Annular Collar) लगा होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2019, UPSSSC JE 2015, MP Vyapam 2016
Q10: बड़े बांधों (Massive Dams) और भारी कंक्रीट संरचनाओं के निर्माण के लिए किस सीमेंट को प्राथमिकता दी जाती है और क्यों?
- A) रैपिड हार्डनिंग सीमेंट - क्योंकि यह जल्दी जमता है
- ✅ B) लो हीट सीमेंट - क्योंकि यह हाइड्रेशन की ऊष्मा कम उत्पन्न करता है (सही उत्तर)
- C) हाई एलुमिना सीमेंट - क्योंकि इसकी प्रारंभिक सामर्थ्य अधिक होती है
- D) क्विक सेटिंग सीमेंट - ताकि पानी के बहाव से बचा जा सके
💡 डिटेल Explanation:
बड़े बांधों में अगर बहुत अधिक ऊष्मा (Heat of Hydration) निकले, तो संरचना के अंदर का कंक्रीट गर्म होकर फैल सकता है और बाहर का कंक्रीट ठंडा होकर सिकुड़ सकता है। इस तापमान अंतर के कारण दरारें (Thermal Cracks) आ जाती हैं। इसे रोकने के लिए लो हीट सीमेंट (Low Heat Portland Cement) का उपयोग किया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: इसमें ऊष्मा उत्पन्न करने वाले C3S और C3A की मात्रा बहुत कम कर दी जाती है और C2S (जो सबसे कम ऊष्मा निकालता है) की मात्रा बढ़ा दी जाती है (लगभग 46%)।
बड़े बांधों में अगर बहुत अधिक ऊष्मा (Heat of Hydration) निकले, तो संरचना के अंदर का कंक्रीट गर्म होकर फैल सकता है और बाहर का कंक्रीट ठंडा होकर सिकुड़ सकता है। इस तापमान अंतर के कारण दरारें (Thermal Cracks) आ जाती हैं। इसे रोकने के लिए लो हीट सीमेंट (Low Heat Portland Cement) का उपयोग किया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: इसमें ऊष्मा उत्पन्न करने वाले C3S और C3A की मात्रा बहुत कम कर दी जाती है और C2S (जो सबसे कम ऊष्मा निकालता है) की मात्रा बढ़ा दी जाती है (लगभग 46%)।
चैप्टर 2: ईंटें (Bricks) - महत्वपूर्ण PYQ
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2015, DMRC JE 2018
Q11: भारत में एक मानक ईंट (Standard / Modular Brick) का आकार (Size) क्या होता है?
- A) 20 × 10 × 10 cm
- ✅ B) 19 × 9 × 9 cm (सही उत्तर)
- C) 19 × 9 × 10 cm
- D) 22.5 × 11.4 × 7.5 cm
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS code) के अनुसार एक मॉड्यूलर या मानक ईंट का आकार 19 × 9 × 9 cm होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: यदि इसमें मोर्टार (मसाले) की मोटाई भी जोड़ दी जाए, तो इसे Nominal Size (नामित आकार) कहते हैं, जो 20 × 10 × 10 cm होता है। पारंपरिक ईंट (Traditional / Non-modular brick) का आकार सामान्यतः 23 × 11.4 × 7.6 cm (या 9" × 4.5" × 3") होता है।
भारतीय मानक (IS code) के अनुसार एक मॉड्यूलर या मानक ईंट का आकार 19 × 9 × 9 cm होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: यदि इसमें मोर्टार (मसाले) की मोटाई भी जोड़ दी जाए, तो इसे Nominal Size (नामित आकार) कहते हैं, जो 20 × 10 × 10 cm होता है। पारंपरिक ईंट (Traditional / Non-modular brick) का आकार सामान्यतः 23 × 11.4 × 7.6 cm (या 9" × 4.5" × 3") होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE 2019
Q12: एक अच्छी ईंट की मिट्टी (Good Brick Earth) में सबसे अधिक मात्रा में कौन सा घटक होना चाहिए?
- A) एल्युमिना (Alumina)
- B) चूना (Lime)
- ✅ C) सिलिका (Silica) (सही उत्तर)
- D) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide)
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में घटकों का सही अनुपात होना बहुत जरूरी है:
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में घटकों का सही अनुपात होना बहुत जरूरी है:
- सिलिका (Silica): 50-60% (यह ईंट को उसका आकार देता है और सिकुड़ने, फटने या मुड़ने से रोकता है।)
- एल्युमिना (Alumina): 20-30% (यह मिट्टी को प्लास्टिसिटी/लचीलापन प्रदान करता है ताकि उसे ईंट के सांचे में ढाला जा सके।)
- चूना (Lime): < 5% (यह सिलिका को पिघलने में मदद करता है, लेकिन अधिक होने पर ईंट पिघल कर अपना आकार खो सकती है।)
📌 Exam Tags: SSC JE 2019, UPSSSC JE 2015, UPPCL JE 2019
Q13: ईंट के ऊपरी हिस्से पर बनाए गए गड्ढे जिसे 'फ्रॉग' (Frog) कहा जाता है, उसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A) ईंट का वजन कम करना
- B) निर्माता का नाम छापना
- ✅ C) मोर्टार (Mortar) के लिए 'शियर की' (Shear key) प्रदान करना (सही उत्तर)
- D) ईंट को जल्दी सूखने में मदद करना
💡 डिटेल Explanation:
फ्रॉग एक छोटा सा गड्ढा (indentation) होता है जो ईंट के सबसे बड़े फलक (face) पर बनाया जाता है। इसका तकनीकी उद्देश्य ऊपर और नीचे की ईंटों के बीच मोर्टार (मसाले) को फंसाकर एक Interlocking (Shear Key) बनाना है, जिससे दीवार की मजबूती बढ़ती है।
अतिरिक्त फैक्ट: फ्रॉग का मानक आकार 10 × 4 × 1 cm से 10 × 4 × 2 cm के बीच होता है। चिनाई (Masonry) करते समय फ्रॉग हमेशा ऊपर की ओर रखा जाता है।
फ्रॉग एक छोटा सा गड्ढा (indentation) होता है जो ईंट के सबसे बड़े फलक (face) पर बनाया जाता है। इसका तकनीकी उद्देश्य ऊपर और नीचे की ईंटों के बीच मोर्टार (मसाले) को फंसाकर एक Interlocking (Shear Key) बनाना है, जिससे दीवार की मजबूती बढ़ती है।
अतिरिक्त फैक्ट: फ्रॉग का मानक आकार 10 × 4 × 1 cm से 10 × 4 × 2 cm के बीच होता है। चिनाई (Masonry) करते समय फ्रॉग हमेशा ऊपर की ओर रखा जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2017, RRB JE 2015, UKPSC JE 2013
Q14: प्रथम श्रेणी की ईंट (First Class Brick) को 24 घंटे ठंडे पानी में डुबो कर रखने पर, उसका जल अवशोषण (Water Absorption) उसके शुष्क भार (Dry weight) के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 15%
- ✅ B) 20% (सही उत्तर)
- C) 22%
- D) 25%
💡 डिटेल Explanation:
ईंटों का जल अवशोषण उनकी सरंध्रता (porosity) और गुणवत्ता को दर्शाता है। IS Code 1077 के अनुसार:
ईंटों का जल अवशोषण उनकी सरंध्रता (porosity) और गुणवत्ता को दर्शाता है। IS Code 1077 के अनुसार:
- प्रथम श्रेणी (First Class): 20% से अधिक नहीं।
- द्वितीय श्रेणी (Second Class): 22% से अधिक नहीं।
- तृतीय श्रेणी (Third Class): 25% से अधिक नहीं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2016, MP Sub Engineer 2017
Q15: ईंटों पर सफेद या धूसर रंग के धब्बे (White patches) पड़ जाने की घटना को क्या कहते हैं, और यह किस कारण होती है?
- A) ब्लोटिंग (Bloating), अधिक सल्फर के कारण
- ✅ B) उत्फुल्लन (Efflorescence), घुलनशील लवणों (Soluble Salts) के कारण (सही उत्तर)
- C) स्पॉलिंग (Spalling), पाले (Frost) के कारण
- D) चफ्स (Chuffs), बारिश की बूंदों के कारण
💡 डिटेल Explanation:
जब ईंट की मिट्टी या पानी में क्षारीय घुलनशील लवण (Alkalies / Soluble salts) मौजूद होते हैं, तो वे नमी के साथ ईंट की सतह पर आ जाते हैं। पानी के वाष्पीकरण के बाद ये लवण सफेद पाउडर या धब्बों के रूप में सतह पर जम जाते हैं। इस दोष को Efflorescence (उत्फुल्लन) कहते हैं। इसे रोकने के लिए मिट्टी को अच्छी तरह से धोना (Weathering) आवश्यक है।
जब ईंट की मिट्टी या पानी में क्षारीय घुलनशील लवण (Alkalies / Soluble salts) मौजूद होते हैं, तो वे नमी के साथ ईंट की सतह पर आ जाते हैं। पानी के वाष्पीकरण के बाद ये लवण सफेद पाउडर या धब्बों के रूप में सतह पर जम जाते हैं। इस दोष को Efflorescence (उत्फुल्लन) कहते हैं। इसे रोकने के लिए मिट्टी को अच्छी तरह से धोना (Weathering) आवश्यक है।
चैप्टर 2: ईंटें (Bricks & Masonry) - महत्वपूर्ण PYQ (Q16 - Q20)
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE 2017
Q16: प्रथम श्रेणी की ईंट (First Class Brick) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Minimum Compressive Strength) कितनी होनी चाहिए?
- A) 3.5 N/mm2
- B) 7.0 N/mm2
- ✅ C) 10.5 N/mm2 (सही उत्तर)
- D) 14.0 N/mm2
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS 1077) के अनुसार ईंटों की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य इस प्रकार होती है:
भारतीय मानक (IS 1077) के अनुसार ईंटों की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य इस प्रकार होती है:
- प्रथम श्रेणी (First Class): 10.5 N/mm2 (या 105 kg/cm2)
- द्वितीय श्रेणी (Second Class): 7.0 N/mm2 (या 70 kg/cm2)
- तृतीय श्रेणी/सामान्य ईंट: 3.5 N/mm2 (या 35 kg/cm2)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2016, LMRC JE 2018
Q17: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में सबसे मजबूत बॉन्ड (Strongest Bond) कौन सा माना जाता है?
- A) स्ट्रेचर बॉन्ड (Stretcher Bond)
- B) हेडर बॉन्ड (Header Bond)
- ✅ C) इंग्लिश बॉन्ड (English Bond) (सही उत्तर)
- D) फ्लेमिश बॉन्ड (Flemish Bond)
💡 डिटेल Explanation:
इंग्लिश बॉन्ड चिनाई में सबसे मजबूत बॉन्ड होता है। इसमें एक रद्दा (Course) पूरा हेडर्स (Headers) का और अगला रद्दा पूरा स्ट्रेचर्स (Stretchers) का रखा जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: फ्लेमिश बॉन्ड दिखने में सबसे सुंदर (Pleasing appearance) होता है, लेकिन यह इंग्लिश बॉन्ड से कम मजबूत होता है। इसमें एक ही रद्दे में एकांतर (alternate) रूप से हेडर और स्ट्रेचर रखे जाते हैं।
इंग्लिश बॉन्ड चिनाई में सबसे मजबूत बॉन्ड होता है। इसमें एक रद्दा (Course) पूरा हेडर्स (Headers) का और अगला रद्दा पूरा स्ट्रेचर्स (Stretchers) का रखा जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: फ्लेमिश बॉन्ड दिखने में सबसे सुंदर (Pleasing appearance) होता है, लेकिन यह इंग्लिश बॉन्ड से कम मजबूत होता है। इसमें एक ही रद्दे में एकांतर (alternate) रूप से हेडर और स्ट्रेचर रखे जाते हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, RRB JE 2015, UPSSSC JE 2016
Q18: ईंट निर्माण प्रक्रिया में 'पग मिल' (Pug Mill) का उपयोग किस चरण में किया जाता है?
- ✅ A) मिट्टी को गूंथने (Tempering) के लिए (सही उत्तर)
- B) ईंटों को पकाने (Burning) के लिए
- C) ईंटों को सुखाने (Drying) के लिए
- D) मिट्टी खोदने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
ईंट बनाने की मिट्टी में सही मात्रा में पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह से गूंथने (Kneading) की प्रक्रिया को टेम्परिंग (Tempering) कहते हैं। इससे मिट्टी में एक समान लचीलापन (Plasticity) आ जाता है। बड़े पैमाने पर ईंटों के निर्माण के लिए यह काम एक मशीन द्वारा किया जाता है जिसे पग मिल (Pug Mill) कहते हैं।
ईंट बनाने की मिट्टी में सही मात्रा में पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह से गूंथने (Kneading) की प्रक्रिया को टेम्परिंग (Tempering) कहते हैं। इससे मिट्टी में एक समान लचीलापन (Plasticity) आ जाता है। बड़े पैमाने पर ईंटों के निर्माण के लिए यह काम एक मशीन द्वारा किया जाता है जिसे पग मिल (Pug Mill) कहते हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPPCL JE 2019, MP Vyapam 2016
Q19: ईंटों को पकाने (Burning) के दौरान, ईंट के पिघलने और अपना आकार खोने (Distortion) का मुख्य कारण किस घटक की अधिकता होती है?
- A) सिलिका (Silica)
- B) एल्युमिना (Alumina)
- ✅ C) चूना (Lime) (सही उत्तर)
- D) मैग्नीशिया (Magnesia)
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी में चूना (Lime) 5% से कम होना चाहिए। यह पकाने के दौरान एक फ्लक्स (Flux) का काम करता है और सिलिका को पिघलने में मदद करता है। लेकिन यदि चूने की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो ईंट बहुत कम तापमान पर ही पूरी तरह से पिघल जाती है और अपना आकार (Shape) खो देती है।
ईंट की मिट्टी में चूना (Lime) 5% से कम होना चाहिए। यह पकाने के दौरान एक फ्लक्स (Flux) का काम करता है और सिलिका को पिघलने में मदद करता है। लेकिन यदि चूने की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो ईंट बहुत कम तापमान पर ही पूरी तरह से पिघल जाती है और अपना आकार (Shape) खो देती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPSSSC JE 2015, RRB JE 2019
Q20: ईंट की चिनाई में, यदि किसी ईंट को उसकी लंबाई के अनुदिश (Longitudinally) आधा काटा जाता है, तो उसे क्या कहते हैं?
- A) किंग क्लोज़र (King closer)
- ✅ B) क्वीन क्लोज़र (Queen closer) (सही उत्तर)
- C) बैट (Bat)
- D) बेवेल्ड क्लोज़र (Beveled closer)
💡 डिटेल Explanation:
चिनाई में जोड़ों (Joints) को एक सीध में आने से रोकने के लिए ईंटों को काटा जाता है:
चिनाई में जोड़ों (Joints) को एक सीध में आने से रोकने के लिए ईंटों को काटा जाता है:
- क्वीन क्लोज़र: जब ईंट को उसकी लंबाई में बीच से आधा काटा जाता है (लंबवत)।
- किंग क्लोज़र: जब ईंट को एक कोने से उसकी चौड़ाई और लंबाई के मध्य बिंदु (center) तक तिरछा काटा जाता है।
- बैट (Bat): जब ईंट को उसकी चौड़ाई (width) के आर-पार काटा जाता है (जैसे हाफ बैट)।
चैप्टर 3: लकड़ी / टिम्बर (Timber) - महत्वपूर्ण PYQ (Q21 - Q25)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2015, DMRC JE 2018
Q21: किसी पेड़ (Tree) की आयु (Age) का पता कैसे लगाया जाता है?
- A) तने की ऊंचाई नापकर
- B) कैम्बियम परत (Cambium layer) से
- ✅ C) वार्षिक वलय (Annual rings) गिनकर (सही उत्तर)
- D) मेडलरी रेज़ (Medullary rays) से
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ के क्रॉस-सेक्शन में दिखाई देने वाले कंसेंट्रिक (concentric) छल्लों को वार्षिक वलय (Annual rings या Annular rings) कहा जाता है। हर साल पेड़ के तने में एक नया वलय जुड़ता है। इन छल्लों को गिनकर पेड़ की सटीक आयु का पता लगाया जा सकता है।
पेड़ के क्रॉस-सेक्शन में दिखाई देने वाले कंसेंट्रिक (concentric) छल्लों को वार्षिक वलय (Annual rings या Annular rings) कहा जाता है। हर साल पेड़ के तने में एक नया वलय जुड़ता है। इन छल्लों को गिनकर पेड़ की सटीक आयु का पता लगाया जा सकता है।
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Q22: भारत में भवन निर्माण कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली एक अच्छी तरह से सूखी हुई लकड़ी (Well-seasoned timber) में नमी की मात्रा (Moisture content) सामान्यतः कितनी होनी चाहिए?
- A) 5% से 8%
- ✅ B) 10% से 12% (सही उत्तर)
- C) 15% से 20%
- D) 2% से 5%
💡 डिटेल Explanation:
सीज़निंग (Seasoning) वह प्रक्रिया है जिसमें लकड़ी से अतिरिक्त नमी (Sap) को निकाला जाता है ताकि वह सिकुड़े या मुड़े नहीं। भारतीय मानक (IS code) के अनुसार, संरचनात्मक कार्यों (structural works) के लिए लकड़ी में नमी 10% से 12% के बीच होनी चाहिए।
सीज़निंग (Seasoning) वह प्रक्रिया है जिसमें लकड़ी से अतिरिक्त नमी (Sap) को निकाला जाता है ताकि वह सिकुड़े या मुड़े नहीं। भारतीय मानक (IS code) के अनुसार, संरचनात्मक कार्यों (structural works) के लिए लकड़ी में नमी 10% से 12% के बीच होनी चाहिए।
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Q23: लकड़ी में 'ड्राई रॉट' (Dry Rot) नामक दोष (Defect) का मुख्य कारण क्या होता है?
- A) दीमक (Termites) का हमला
- ✅ B) वायु संचार की कमी (Lack of ventilation) (सही उत्तर)
- C) पानी में लगातार डूबे रहना
- D) एकांतर रूप से गीला और सूखा होना
💡 डिटेल Explanation:
ड्राई रॉट (Dry Rot) एक फंगस (कवक) के कारण होता है, जो लकड़ी को खाकर पाउडर में बदल देता है। यह फंगस मुख्य रूप से वहाँ पनपता है जहाँ हवा का आवागमन (Ventilation) नहीं होता और थोड़ी नमी (dampness) होती है। इससे बचने के लिए लकड़ी के आसपास खुला वायु संचार होना चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: एकांतर रूप से गीला और सूखा (Alternate wet and dry) होने से 'वेट रॉट' (Wet Rot) होता है।
ड्राई रॉट (Dry Rot) एक फंगस (कवक) के कारण होता है, जो लकड़ी को खाकर पाउडर में बदल देता है। यह फंगस मुख्य रूप से वहाँ पनपता है जहाँ हवा का आवागमन (Ventilation) नहीं होता और थोड़ी नमी (dampness) होती है। इससे बचने के लिए लकड़ी के आसपास खुला वायु संचार होना चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: एकांतर रूप से गीला और सूखा (Alternate wet and dry) होने से 'वेट रॉट' (Wet Rot) होता है।
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Q24: प्लाईवुड (Plywood) को सामान्य लकड़ी की तुलना में अधिक प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि:
- A) यह बहुत सस्ती होती है
- ✅ B) इसकी सामर्थ्य (Strength) सभी दिशाओं में समान होती है (सही उत्तर)
- C) इसे आसानी से जलाया जा सकता है
- D) यह केवल एक दिशा में बहुत मजबूत होती है
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड का निर्माण विनियर (Veneers - लकड़ी की पतली परतें) को एक-दूसरे के समकोण (Right angles - 90°) पर रखकर चिपका कर किया जाता है। इस क्रॉस-लेयरिंग के कारण प्लाईवुड में सभी दिशाओं (all directions) में एक समान सामर्थ्य (Strength) होती है और इसके सिकुड़ने या फूलने (swelling/shrinking) की संभावना बहुत कम हो जाती है।
प्लाईवुड का निर्माण विनियर (Veneers - लकड़ी की पतली परतें) को एक-दूसरे के समकोण (Right angles - 90°) पर रखकर चिपका कर किया जाता है। इस क्रॉस-लेयरिंग के कारण प्लाईवुड में सभी दिशाओं (all directions) में एक समान सामर्थ्य (Strength) होती है और इसके सिकुड़ने या फूलने (swelling/shrinking) की संभावना बहुत कम हो जाती है।
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Q25: एक पेड़ के तने के क्रॉस-सेक्शन में सबसे भीतरी केंद्रीय भाग (Innermost central part) को क्या कहा जाता है?
- A) हार्ट वुड (Heart wood)
- B) सैप वुड (Sap wood)
- ✅ C) पिथ (Pith / Medulla) (सही उत्तर)
- D) कैम्बियम लेयर (Cambium layer)
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ के तने का सबसे भीतरी और केंद्रीय हिस्सा पिथ (Pith) या मेडुला (Medulla) कहलाता है। जब पेड़ युवा होता है तो यह उसे पोषण देता है, लेकिन पेड़ के पुराने होने पर यह सूख जाता है और डेड (dead) हो जाता है। इसके चारों ओर हार्ट वुड (Heart wood) होता है, जो गहरे रंग का होता है और पेड़ को सबसे ज्यादा मजबूती प्रदान करता है।
पेड़ के तने का सबसे भीतरी और केंद्रीय हिस्सा पिथ (Pith) या मेडुला (Medulla) कहलाता है। जब पेड़ युवा होता है तो यह उसे पोषण देता है, लेकिन पेड़ के पुराने होने पर यह सूख जाता है और डेड (dead) हो जाता है। इसके चारों ओर हार्ट वुड (Heart wood) होता है, जो गहरे रंग का होता है और पेड़ को सबसे ज्यादा मजबूती प्रदान करता है।
चैप्टर 4: कंक्रीट (Concrete Technology) - महत्वपूर्ण PYQ (Q26 - Q30)
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Q26: कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'स्लंप कोण' (Slump Cone) का मानक आकार (ऊपरी व्यास × निचला व्यास × ऊंचाई) क्या होता है?
- ✅ A) 10 cm × 20 cm × 30 cm (सही उत्तर)
- B) 10 cm × 15 cm × 30 cm
- C) 20 cm × 10 cm × 30 cm
- D) 15 cm × 20 cm × 25 cm
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट के स्लंप टेस्ट (Slump test) में धातु का एक छिन्नक (Frustum of a cone) उपयोग किया जाता है। इसका ऊपरी व्यास 10 cm, निचला व्यास 20 cm और ऊंचाई 30 cm होती है।
अतिरिक्त फैक्ट: कंक्रीट को इस सांचे में 4 परतों में भरा जाता है और प्रत्येक परत को 16 mm व्यास वाली टैंपिंग रॉड (Tamping rod) से 25 बार कूटा (Tamp) जाता है।
कंक्रीट के स्लंप टेस्ट (Slump test) में धातु का एक छिन्नक (Frustum of a cone) उपयोग किया जाता है। इसका ऊपरी व्यास 10 cm, निचला व्यास 20 cm और ऊंचाई 30 cm होती है।
अतिरिक्त फैक्ट: कंक्रीट को इस सांचे में 4 परतों में भरा जाता है और प्रत्येक परत को 16 mm व्यास वाली टैंपिंग रॉड (Tamping rod) से 25 बार कूटा (Tamp) जाता है।
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Q27: M20 ग्रेड की कंक्रीट तैयार करने के लिए सीमेंट, बालू (Fine Aggregate) और गिट्टी (Coarse Aggregate) का मानक अनुपात (Nominal Mix Ratio) क्या है?
- A) 1 : 2 : 4
- ✅ B) 1 : 1.5 : 3 (सही उत्तर)
- C) 1 : 1 : 2
- D) 1 : 3 : 6
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के अनुसार विभिन्न कंक्रीट ग्रेड के नॉमिनल मिक्स अनुपात (Cement : Sand : Aggregate) इस प्रकार हैं:
IS 456 के अनुसार विभिन्न कंक्रीट ग्रेड के नॉमिनल मिक्स अनुपात (Cement : Sand : Aggregate) इस प्रकार हैं:
- M10 → 1 : 3 : 6
- M15 → 1 : 2 : 4
- M20 → 1 : 1.5 : 3
- M25 → 1 : 1 : 2
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Q28: एब्रम के नियम (Abram's Law) के अनुसार, पूर्ण रूप से संघनित (fully compacted) कंक्रीट की संपीडन सामर्थ्य मुख्य रूप से किस पर निर्भर करती है?
- A) सीमेंट की मात्रा (Amount of cement)
- B) एग्रीगेट का आकार (Size of aggregate)
- ✅ C) जल-सीमेंट अनुपात (Water-Cement Ratio) (सही उत्तर)
- D) कंक्रीट की आयु (Age of concrete)
💡 डिटेल Explanation:
प्रोफेसर डफ एब्रम (Duff Abrams) के नियम के अनुसार, "यदि कंक्रीट पूरी तरह से कॉम्पैक्ट (संघनित) है, तो उसकी सामर्थ्य मुख्य रूप से केवल जल-सीमेंट अनुपात (Water-Cement Ratio) पर निर्भर करती है।" पानी की मात्रा जितनी अधिक होगी, कंक्रीट की सामर्थ्य उतनी ही कम हो जाएगी (व्युत्क्रमानुपाती संबंध)।
प्रोफेसर डफ एब्रम (Duff Abrams) के नियम के अनुसार, "यदि कंक्रीट पूरी तरह से कॉम्पैक्ट (संघनित) है, तो उसकी सामर्थ्य मुख्य रूप से केवल जल-सीमेंट अनुपात (Water-Cement Ratio) पर निर्भर करती है।" पानी की मात्रा जितनी अधिक होगी, कंक्रीट की सामर्थ्य उतनी ही कम हो जाएगी (व्युत्क्रमानुपाती संबंध)।
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Q29: IS 456:2000 के अनुसार, कंक्रीट की आनमन तनन सामर्थ्य (Flexural Tensile Strength) की गणना के लिए कौन सा सूत्र उपयोग किया जाता है?
- A) 0.5 √fck
- ✅ B) 0.7 √fck (सही उत्तर)
- C) 0.87 fy
- D) 5000 √fck
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की संपीडन सामर्थ्य (Compressive strength) बहुत अच्छी होती है, लेकिन तनन सामर्थ्य (Tensile strength) बहुत कम होती है। IS 456 के अनुसार कंक्रीट की फ्लेक्सुरल तनन सामर्थ्य (fcr) का अनुमान fcr = 0.7 √fck सूत्र द्वारा लगाया जाता है। जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की अभिलाक्षणिक संपीडन सामर्थ्य है।
कंक्रीट की संपीडन सामर्थ्य (Compressive strength) बहुत अच्छी होती है, लेकिन तनन सामर्थ्य (Tensile strength) बहुत कम होती है। IS 456 के अनुसार कंक्रीट की फ्लेक्सुरल तनन सामर्थ्य (fcr) का अनुमान fcr = 0.7 √fck सूत्र द्वारा लगाया जाता है। जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की अभिलाक्षणिक संपीडन सामर्थ्य है।
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Q30: कंक्रीट में 'सेग्रीगेशन' (Segregation) का मुख्य अर्थ क्या है?
- A) कंक्रीट की सतह पर पानी का आना (Bleeding)
- ✅ B) कंक्रीट के मिश्रण से मोटे एग्रीगेट (Coarse aggregates) का अलग होना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट का सिकुड़ना (Shrinkage)
- D) कंक्रीट में हवा के बुलबुले रह जाना
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट मिश्रण से उसके भारी घटकों (मुख्य रूप से गिट्टी / Coarse Aggregates) का अलग हो जाना सेग्रीगेशन (Segregation - पृथक्करण) कहलाता है। यह मुख्य रूप से कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई (1.5 मीटर से अधिक) से गिराने या बहुत ज्यादा कंपन (over-vibration) करने के कारण होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: यदि कंक्रीट से पानी अलग होकर सतह पर आ जाए, तो उसे ब्लीडिंग (Bleeding) कहते हैं।
कंक्रीट मिश्रण से उसके भारी घटकों (मुख्य रूप से गिट्टी / Coarse Aggregates) का अलग हो जाना सेग्रीगेशन (Segregation - पृथक्करण) कहलाता है। यह मुख्य रूप से कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई (1.5 मीटर से अधिक) से गिराने या बहुत ज्यादा कंपन (over-vibration) करने के कारण होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: यदि कंक्रीट से पानी अलग होकर सतह पर आ जाए, तो उसे ब्लीडिंग (Bleeding) कहते हैं।
कंक्रीट टेक्नोलॉजी एवं एग्रीगेट/पेंट - महत्वपूर्ण PYQ (Q31 - Q35)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2018, DMRC JE
Q31: कंक्रीट का प्वाइजन अनुपात (Poisson's Ratio) सामान्यतः किस सीमा (Range) में होता है?
- ✅ A) 0.10 से 0.20 (सही उत्तर)
- B) 0.20 से 0.30
- C) 0.30 से 0.40
- D) 0.40 से 0.50
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट का प्वाइजन अनुपात (पार्श्व विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात) सामान्यतः 0.1 से 0.2 के बीच होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: उच्च शक्ति (High Strength) वाली कंक्रीट के लिए यह मान कम (लगभग 0.1) होता है, और कमजोर कंक्रीट (Low Strength) के लिए यह मान अधिक (लगभग 0.2) होता है।
कंक्रीट का प्वाइजन अनुपात (पार्श्व विकृति और अनुदैर्ध्य विकृति का अनुपात) सामान्यतः 0.1 से 0.2 के बीच होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: उच्च शक्ति (High Strength) वाली कंक्रीट के लिए यह मान कम (लगभग 0.1) होता है, और कमजोर कंक्रीट (Low Strength) के लिए यह मान अधिक (लगभग 0.2) होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPSSSC JE 2015, RRB JE 2019
Q32: IS 456:2000 के अनुसार, कंक्रीट के प्रत्यास्थता मापांक (Modulus of Elasticity, Ec) की गणना किस सूत्र से की जाती है?
- A) Ec = 5700 √fck
- ✅ B) Ec = 5000 √fck (सही उत्तर)
- C) Ec = 0.7 √fck
- D) Ec = 0.87 fy
💡 डिटेल Explanation:
नए IS 456:2000 कोड के अनुसार कंक्रीट का शॉर्ट-टर्म प्रत्यास्थता मापांक Ec = 5000 √fck होता है। जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की संपीडन सामर्थ्य है।
कंफ्यूजन पॉइंट: पुराने कोड (IS 456:1978) में यह मान 5700 √fck था, जो अब मान्य नहीं है।
नए IS 456:2000 कोड के अनुसार कंक्रीट का शॉर्ट-टर्म प्रत्यास्थता मापांक Ec = 5000 √fck होता है। जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की संपीडन सामर्थ्य है।
कंफ्यूजन पॉइंट: पुराने कोड (IS 456:1978) में यह मान 5700 √fck था, जो अब मान्य नहीं है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, MP Sub Engineer 2016
Q33: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का उपयोग करके बनाई गई कंक्रीट की तराई (Curing) के लिए न्यूनतम अवधि कितनी होनी चाहिए (सामान्य मौसम में)?
- A) 3 दिन
- ✅ B) 7 दिन (सही उत्तर)
- C) 14 दिन
- D) 28 दिन
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के अनुसार सामान्य मौसम में OPC कंक्रीट के लिए न्यूनतम Curing अवधि 7 दिन है। कंक्रीट में रासायनिक प्रतिक्रिया (Hydration) के लिए पानी की आवश्यकता होती है।
अतिरिक्त फैक्ट: सूखे और गर्म मौसम में, या यदि खनिज मिश्रण (mineral admixtures जैसे फ्लाई ऐश) का उपयोग किया गया हो, तो यह न्यूनतम अवधि 10 से 14 दिन तक बढ़ा दी जाती है।
IS 456 के अनुसार सामान्य मौसम में OPC कंक्रीट के लिए न्यूनतम Curing अवधि 7 दिन है। कंक्रीट में रासायनिक प्रतिक्रिया (Hydration) के लिए पानी की आवश्यकता होती है।
अतिरिक्त फैक्ट: सूखे और गर्म मौसम में, या यदि खनिज मिश्रण (mineral admixtures जैसे फ्लाई ऐश) का उपयोग किया गया हो, तो यह न्यूनतम अवधि 10 से 14 दिन तक बढ़ा दी जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2016, UPPCL JE 2018
Q34: एग्रीगेट (मिलावा) का 'इम्पैक्ट टेस्ट' (Aggregate Impact Test) गिट्टी के किस गुण को मापने के लिए किया जाता है?
- A) कठोरता (Hardness)
- ✅ B) चिमड़पन (Toughness) (सही उत्तर)
- C) सामर्थ्य (Strength)
- D) टिकाऊपन (Soundness)
💡 डिटेल Explanation:
इम्पैक्ट टेस्ट एग्रीगेट के चिमड़पन (Toughness) को मापता है। इसका मतलब है कि एग्रीगेट अचानक लगने वाले झटके (Sudden impact or dynamic load) को सह सकता है या नहीं (जैसे सड़क पर दौड़ते वाहन का झटका)।
अतिरिक्त फैक्ट: कठोरता (Hardness / Resistance to wear and tear) मापने के लिए 'लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट' (Los Angeles Abrasion Test) किया जाता है।
इम्पैक्ट टेस्ट एग्रीगेट के चिमड़पन (Toughness) को मापता है। इसका मतलब है कि एग्रीगेट अचानक लगने वाले झटके (Sudden impact or dynamic load) को सह सकता है या नहीं (जैसे सड़क पर दौड़ते वाहन का झटका)।
अतिरिक्त फैक्ट: कठोरता (Hardness / Resistance to wear and tear) मापने के लिए 'लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट' (Los Angeles Abrasion Test) किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2015, LMRC JE 2017
Q35: सफेद पेंट (White Paint) के निर्माण में 'बेस' (Base) के रूप में मुख्य रूप से किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
- A) रेड लेड (Red Lead)
- B) जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide)
- ✅ C) वाइट लेड (White Lead) (सही उत्तर)
- D) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'बेस' (Base) एक ठोस पदार्थ होता है जो पेंट की मुख्य परत (body) बनाता है और सतह को छुपाने की क्षमता (Hiding power) देता है। सफेद रंग के पेंट के लिए मुख्य रूप से वाइट लेड (White Lead) या टाइटेनियम वाइट का उपयोग किया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: लोहे की सतहों (Iron surfaces) को जंग से बचाने वाले प्राइमर के लिए 'रेड लेड' (Red Lead) का उपयोग बेस के रूप में होता है।
पेंट में 'बेस' (Base) एक ठोस पदार्थ होता है जो पेंट की मुख्य परत (body) बनाता है और सतह को छुपाने की क्षमता (Hiding power) देता है। सफेद रंग के पेंट के लिए मुख्य रूप से वाइट लेड (White Lead) या टाइटेनियम वाइट का उपयोग किया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: लोहे की सतहों (Iron surfaces) को जंग से बचाने वाले प्राइमर के लिए 'रेड लेड' (Red Lead) का उपयोग बेस के रूप में होता है।
चैप्टर 5: पेंट, एग्रीगेट और वार्निश - महत्वपूर्ण PYQ (Q36 - Q40)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2016, RRB JE 2015
Q36: पेंट (Paint) में 'वाहक' (Vehicle) या 'बाइंडर' (Binder) के रूप में मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?
- A) तारपीन का तेल (Turpentine Oil)
- ✅ B) अलसी का तेल (Linseed Oil) (सही उत्तर)
- C) स्पिरिट (Spirit)
- D) कोपाल (Copal)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'Vehicle' (वाहक) तरल पदार्थ होता है जो पेंट के सभी ठोस घटकों (Base, Pigment) को घोलकर रखता है और उन्हें सतह पर एक समान रूप से फैलाने में मदद करता है। अलसी का तेल (Linseed Oil) भवन निर्माण में उपयोग होने वाले पेंट्स के लिए सबसे अच्छा और सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला वाहन (Vehicle) है।
पेंट में 'Vehicle' (वाहक) तरल पदार्थ होता है जो पेंट के सभी ठोस घटकों (Base, Pigment) को घोलकर रखता है और उन्हें सतह पर एक समान रूप से फैलाने में मदद करता है। अलसी का तेल (Linseed Oil) भवन निर्माण में उपयोग होने वाले पेंट्स के लिए सबसे अच्छा और सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला वाहन (Vehicle) है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, DMRC JE 2017
Q37: पेंट में 'थिनर' (Thinner) या 'विलायक' (Solvent) मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) पेंट को जल्दी सूखने में मदद करना
- B) सतह को जंग से बचाना
- ✅ C) पेंट की श्यानता (Viscosity) कम करके उसे सुकार्य (Workable) बनाना (सही उत्तर)
- D) पेंट को अलग-अलग रंग देना
💡 डिटेल Explanation:
'थिनर' (Thinner) पेंट को पतला करता है (श्यानता कम करता है) ताकि ब्रश से पेंट करना आसान हो जाए और पेंट सतह के रोमछिद्रों (pores) में गहराई तक जा सके। पेंट करने के कुछ समय बाद थिनर हवा में उड़ (Evaporate) जाता है। तारपीन का तेल (Turpentine Oil) और नेफ्था (Naphtha) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
'थिनर' (Thinner) पेंट को पतला करता है (श्यानता कम करता है) ताकि ब्रश से पेंट करना आसान हो जाए और पेंट सतह के रोमछिद्रों (pores) में गहराई तक जा सके। पेंट करने के कुछ समय बाद थिनर हवा में उड़ (Evaporate) जाता है। तारपीन का तेल (Turpentine Oil) और नेफ्था (Naphtha) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPSSSC JE 2015, UKPSC JE
Q38: एग्रीगेट (गिट्टी) के 'फ्लेकीनेस इंडेक्स' (Flakiness Index) परीक्षण के लिए किस आकार से छोटे एग्रीगेट का उपयोग नहीं किया जाता है?
- ✅ A) 6.3 mm (सही उत्तर)
- B) 10.0 mm
- C) 12.5 mm
- D) 20.0 mm
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS 2386) के अनुसार, फ्लेकीनेस (चपटापन) और एलॉन्गेशन (लंबापन) इंडेक्स का परीक्षण 6.3 mm से छोटे आकार के एग्रीगेट (Fine Aggregates) पर लागू नहीं होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: एक एग्रीगेट को 'फ्लेकी' (चपटा) तब कहा जाता है, जब उसकी सबसे कम मोटाई उसके औसत आयाम (Mean dimension) के 0.6 गुना (या 3/5) से कम होती है।
भारतीय मानक (IS 2386) के अनुसार, फ्लेकीनेस (चपटापन) और एलॉन्गेशन (लंबापन) इंडेक्स का परीक्षण 6.3 mm से छोटे आकार के एग्रीगेट (Fine Aggregates) पर लागू नहीं होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: एक एग्रीगेट को 'फ्लेकी' (चपटा) तब कहा जाता है, जब उसकी सबसे कम मोटाई उसके औसत आयाम (Mean dimension) के 0.6 गुना (या 3/5) से कम होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam 2016
Q39: प्रसिद्ध 'फ्रेंच पॉलिश' (French Polish) लकड़ी पर की जाने वाली एक प्रकार की वार्निश है, इसमें विलायक (Solvent) के रूप में किसका उपयोग होता है?
- A) पानी (Water)
- B) तारपीन का तेल (Turpentine)
- ✅ C) स्पिरिट (Spirit) (सही उत्तर)
- D) अलसी का तेल (Linseed Oil)
💡 डिटेल Explanation:
फ्रेंच पॉलिश एक प्रकार की 'स्पिरिट वार्निश' (Spirit Varnish) है। इसे लाख (Shellac) रेज़िन (Resin) को मिथाइलेटेड स्पिरिट (Methylated Spirit) में घोलकर बनाया जाता है। यह लकड़ी को बहुत चमकदार और खूबसूरत फिनिश देती है, लेकिन यह बाहरी मौसम (Outdoors) के लिए उपयुक्त नहीं होती।
फ्रेंच पॉलिश एक प्रकार की 'स्पिरिट वार्निश' (Spirit Varnish) है। इसे लाख (Shellac) रेज़िन (Resin) को मिथाइलेटेड स्पिरिट (Methylated Spirit) में घोलकर बनाया जाता है। यह लकड़ी को बहुत चमकदार और खूबसूरत फिनिश देती है, लेकिन यह बाहरी मौसम (Outdoors) के लिए उपयुक्त नहीं होती।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, LMRC JE 2018, RRB JE 2019
Q40: पेंट की गई सतह पर नमी (Moisture) के फंस जाने के कारण सतह का फूल जाना या बुलबुले बन जाना कौन सा दोष कहलाता है?
- A) फ्लेकिंग (Flaking)
- B) पीलिंग (Peeling)
- ✅ C) ब्लिस्टरिंग (Blistering / फफोले पड़ना) (सही उत्तर)
- D) चॉकिंग (Chalking)
💡 डिटेल Explanation:
ब्लिस्टरिंग (Blistering) मुख्य रूप से तब होता है जब लकड़ी या दीवार की सतह में नमी (Dampness) रह जाती है और ऊपर से पेंट कर दिया जाता है। बाद में जब यह नमी वाष्प (Vapor) बनकर बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो यह पेंट की परत को बाहर की तरफ धकेलती है जिससे फफोले (बुलबुले) बन जाते हैं।
ब्लिस्टरिंग (Blistering) मुख्य रूप से तब होता है जब लकड़ी या दीवार की सतह में नमी (Dampness) रह जाती है और ऊपर से पेंट कर दिया जाता है। बाद में जब यह नमी वाष्प (Vapor) बनकर बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो यह पेंट की परत को बाहर की तरफ धकेलती है जिससे फफोले (बुलबुले) बन जाते हैं।
चैप्टर 6: लोहा, इस्पात और धातुएं - महत्वपूर्ण PYQ (Q41 - Q45)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q41: लोहे का सबसे शुद्ध रूप (Purest form of iron) कौन सा है जिसमें कार्बन की मात्रा सबसे कम होती है?
- A) कच्चा लोहा (Pig Iron)
- B) ढलवां लोहा (Cast Iron)
- ✅ C) पिटवां लोहा (Wrought Iron) (सही उत्तर)
- D) इस्पात (Steel)
💡 डिटेल Explanation:
पिटवां लोहा (Wrought Iron) लोहे का सबसे शुद्ध रूप है। इसमें लोहे की शुद्धता लगभग 99% से अधिक होती है और कार्बन की मात्रा 0.15% से भी कम होती है। यह बहुत ही आघातवर्ध्य (Malleable) और तन्य (Ductile) होता है, जिसके कारण इससे तार या पतली चादरें आसानी से बनाई जा सकती हैं।
पिटवां लोहा (Wrought Iron) लोहे का सबसे शुद्ध रूप है। इसमें लोहे की शुद्धता लगभग 99% से अधिक होती है और कार्बन की मात्रा 0.15% से भी कम होती है। यह बहुत ही आघातवर्ध्य (Malleable) और तन्य (Ductile) होता है, जिसके कारण इससे तार या पतली चादरें आसानी से बनाई जा सकती हैं।
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Q42: इस्पात (Steel) का प्रत्यास्थता मापांक (Modulus of Elasticity, E) सामान्यतः कितना माना जाता है?
- ✅ A) 2 × 105 N/mm2 (सही उत्तर)
- B) 2 × 104 N/mm2
- C) 2.1 × 106 N/mm2
- D) 1.5 × 105 N/mm2
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS 800 और IS 456) के अनुसार सभी प्रकार के इस्पात (चाहे वह माइल्ड स्टील हो या हाई स्ट्रेंथ स्टील) के लिए प्रत्यास्थता मापांक (Young's Modulus) का मान 2 × 105 MPa (या N/mm2) लिया जाता है।
भारतीय मानक (IS 800 और IS 456) के अनुसार सभी प्रकार के इस्पात (चाहे वह माइल्ड स्टील हो या हाई स्ट्रेंथ स्टील) के लिए प्रत्यास्थता मापांक (Young's Modulus) का मान 2 × 105 MPa (या N/mm2) लिया जाता है।
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Q43: लोहे या इस्पात को जंग (Corrosion) से बचाने के लिए उस पर जस्ते (Zinc) की परत चढ़ाने की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
- A) टिनिंग (Tinning)
- ✅ B) गैल्वेनाइजेशन (Galvanization) (सही उत्तर)
- C) एनोडाइजिंग (Anodizing)
- D) टेम्परिंग (Tempering)
💡 डिटेल Explanation:
लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर पिघले हुए जिंक (Zinc / जस्ता) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। इस प्रक्रिया को गैल्वेनाइजेशन (यशदीकरण) कहते हैं। जिंक एक बलिदानी एनोड (Sacrificial anode) के रूप में कार्य करता है और लोहे से पहले खुद को ऑक्सीकृत (oxidize) कर लेता है, जिससे लोहा सुरक्षित रहता है।
लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर पिघले हुए जिंक (Zinc / जस्ता) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। इस प्रक्रिया को गैल्वेनाइजेशन (यशदीकरण) कहते हैं। जिंक एक बलिदानी एनोड (Sacrificial anode) के रूप में कार्य करता है और लोहे से पहले खुद को ऑक्सीकृत (oxidize) कर लेता है, जिससे लोहा सुरक्षित रहता है।
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Q44: निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले माइल्ड स्टील (Mild Steel) का प्रति घन मीटर भार (Unit Weight / Density) कितना होता है?
- A) 1440 kg/m3
- B) 2400 kg/m3
- ✅ C) 7850 kg/m3 (सही उत्तर)
- D) 8500 kg/m3
💡 डिटेल Explanation:
स्टील का मानक घनत्व (Unit weight) 7850 kg/m3 (या 78.5 kN/m3) लिया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: विकल्प A (1440) सीमेंट का थोक घनत्व है, और विकल्प B (2400) सादे कंक्रीट (PCC) का घनत्व है।
स्टील का मानक घनत्व (Unit weight) 7850 kg/m3 (या 78.5 kN/m3) लिया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: विकल्प A (1440) सीमेंट का थोक घनत्व है, और विकल्प B (2400) सादे कंक्रीट (PCC) का घनत्व है।
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Q45: ढलवां लोहे (Cast Iron) में कार्बन की मात्रा सामान्यतः कितने प्रतिशत के बीच होती है?
- A) 0.1% से 0.15%
- B) 0.15% से 1.5%
- ✅ C) 2% से 4% (सही उत्तर)
- D) 5% से 8%
💡 डिटेल Explanation:
ढलवां लोहे (Cast Iron) में कार्बन की मात्रा सबसे अधिक (2% से 4% के बीच) होती है। अधिक कार्बन होने के कारण यह बहुत भंगुर (Brittle) होता है और इसे पीटा या खींचा नहीं जा सकता। यह संपीडन (Compression) में तो मजबूत होता है, लेकिन तनन (Tension) में कमजोर होता है।
ढलवां लोहे (Cast Iron) में कार्बन की मात्रा सबसे अधिक (2% से 4% के बीच) होती है। अधिक कार्बन होने के कारण यह बहुत भंगुर (Brittle) होता है और इसे पीटा या खींचा नहीं जा सकता। यह संपीडन (Compression) में तो मजबूत होता है, लेकिन तनन (Tension) में कमजोर होता है।
विविध (कांच, प्लास्टिक, एस्बेस्टस आदि) - महत्वपूर्ण PYQ (Q46 - Q50)
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Q46: बुलेटप्रूफ कांच (Bullet-proof glass) बनाने के लिए मुख्य रूप से किस प्रकार के कांच का उपयोग किया जाता है?
- A) वायर ग्लास (Wire Glass)
- B) ग्राउंड ग्लास (Ground Glass)
- ✅ C) लेमिनेटेड ग्लास (Laminated Glass) (सही उत्तर)
- D) फ्लिंट ग्लास (Flint Glass)
💡 डिटेल Explanation:
बुलेटप्रूफ कांच बनाने के लिए लेमिनेटेड ग्लास (Laminated Glass) का उपयोग किया जाता है। इसे कांच की दो या दो से अधिक परतों के बीच पारदर्शी प्लास्टिक (जैसे पॉलीविनाइल ब्यूटिरल - PVB) की परत दबाकर बनाया जाता है। गोली लगने पर यह टूटता तो है, लेकिन प्लास्टिक की परत के कारण इसके टुकड़े बिखरते नहीं हैं।
बुलेटप्रूफ कांच बनाने के लिए लेमिनेटेड ग्लास (Laminated Glass) का उपयोग किया जाता है। इसे कांच की दो या दो से अधिक परतों के बीच पारदर्शी प्लास्टिक (जैसे पॉलीविनाइल ब्यूटिरल - PVB) की परत दबाकर बनाया जाता है। गोली लगने पर यह टूटता तो है, लेकिन प्लास्टिक की परत के कारण इसके टुकड़े बिखरते नहीं हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPSSSC JE 2015, MP Sub Engineer
Q47: एस्बेस्टस (Asbestos) का सबसे महत्वपूर्ण गुण क्या है, जिसके कारण इसका उपयोग भवन निर्माण में किया जाता है?
- A) उच्च जल अवशोषण (High water absorption)
- ✅ B) अग्निरोधक और ऊष्मा रोधी (Fire and heat resistant) (सही उत्तर)
- C) विद्युत का सुचालक (Good conductor of electricity)
- D) बहुत अधिक पारदर्शिता (High transparency)
💡 डिटेल Explanation:
एस्बेस्टस एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेशेदार सिलिकेट खनिज (Fibrous silicate mineral) है। यह अग्निरोधक (Incombustible) होता है और ऊष्मा, बिजली तथा अम्लों (acids) का उत्कृष्ट कुचालक होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से एस्बेस्टस सीमेंट (AC) शीट (छत बनाने के लिए) और अग्नि-रोधी कपड़ों में होता है।
एस्बेस्टस एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रेशेदार सिलिकेट खनिज (Fibrous silicate mineral) है। यह अग्निरोधक (Incombustible) होता है और ऊष्मा, बिजली तथा अम्लों (acids) का उत्कृष्ट कुचालक होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से एस्बेस्टस सीमेंट (AC) शीट (छत बनाने के लिए) और अग्नि-रोधी कपड़ों में होता है।
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Q48: निम्नलिखित में से कौन सा एक 'थर्मोसेटिंग प्लास्टिक' (Thermosetting plastic) का उदाहरण है, जिसे गर्म करने पर दोबारा आकार नहीं दिया जा सकता?
- A) पीवीसी (PVC)
- B) पॉलीथीन (Polythene)
- ✅ C) बेकेलाइट (Bakelite) (सही उत्तर)
- D) टेफ्लॉन (Teflon)
💡 डिटेल Explanation:
प्लास्टिक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
प्लास्टिक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
- थर्मोप्लास्टिक (Thermoplastic): इन्हें गर्म करके बार-बार नया आकार दिया जा सकता है (जैसे- PVC, पॉलीथीन)।
- थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (Thermosetting plastic): ये एक बार सेट हो जाने के बाद गर्म करने पर मुलायम नहीं होते बल्कि जल जाते हैं (जैसे- बेकेलाइट)। इसका उपयोग बिजली के स्विच बनाने में किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, LMRC JE 2018, UPSSSC JE
Q49: बिटुमेन (Bitumen) किस विलायक (Solvent) में पूरी तरह से घुलनशील होता है?
- A) पानी (Water)
- ✅ B) कार्बन डाइसल्फाइड (Carbon disulphide) (सही उत्तर)
- C) अल्कोहल (Alcohol)
- D) हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl)
💡 डिटेल Explanation:
बिटुमेन पेट्रोलियम के डिस्टिलेशन (आसवन) से प्राप्त होता है। यह कार्बन डाइसल्फाइड (CS2) और कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4) में पूरी तरह से घुलनशील होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: डामर (Tar) कोयले या लकड़ी के भंजक आसवन से प्राप्त होता है, और यह कार्बन डाइसल्फाइड में पूरी तरह से घुलनशील नहीं होता है।
बिटुमेन पेट्रोलियम के डिस्टिलेशन (आसवन) से प्राप्त होता है। यह कार्बन डाइसल्फाइड (CS2) और कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4) में पूरी तरह से घुलनशील होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: डामर (Tar) कोयले या लकड़ी के भंजक आसवन से प्राप्त होता है, और यह कार्बन डाइसल्फाइड में पूरी तरह से घुलनशील नहीं होता है।
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Q50: 'प्लास्टर ऑफ पेरिस' (Plaster of Paris) का निर्माण किस खनिज को गर्म करके किया जाता है?
- A) चूना पत्थर (Limestone)
- ✅ B) जिप्सम (Gypsum) (सही उत्तर)
- C) बॉक्साइट (Bauxite)
- D) मैग्नेसाइट (Magnesite)
💡 डिटेल Explanation:
प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (CaSO4·0.5H2O) है। इसे जिप्सम (Gypsum) को लगभग 150°C तक गर्म करके बनाया जाता है। गर्म करने पर जिप्सम अपने पानी के अणुओं का तीन-चौथाई हिस्सा खो देता है और POP में बदल जाता है। इसमें पानी मिलाते ही यह वापस कठोर होकर सेट हो जाता है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (CaSO4·0.5H2O) है। इसे जिप्सम (Gypsum) को लगभग 150°C तक गर्म करके बनाया जाता है। गर्म करने पर जिप्सम अपने पानी के अणुओं का तीन-चौथाई हिस्सा खो देता है और POP में बदल जाता है। इसमें पानी मिलाते ही यह वापस कठोर होकर सेट हो जाता है।
चैप्टर 7: भवन पत्थर (Building Stones) - महत्वपूर्ण PYQ (Q51 - Q55)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q51: संगमरमर (Marble) भूवैज्ञानिक वर्गीकरण (Geological Classification) के आधार पर किस प्रकार की चट्टान का उदाहरण है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous Rock)
- B) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
- ✅ C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) (सही उत्तर)
- D) स्तरित चट्टान (Stratified Rock)
💡 डिटेल Explanation:
संगमरमर (Marble) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण अवसादी चट्टान 'चूना पत्थर' (Limestone) पर अत्यधिक ताप (Temperature) और दाब (Pressure) पड़ने के कारण होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: रासायनिक रूप से इसे 'कैल्केरियस रॉक' (Calcareous Rock) भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें मुख्य घटक कैल्शियम कार्बोनेट होता है। ग्रेनाइट (Granite) एक आग्नेय चट्टान है।
संगमरमर (Marble) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण अवसादी चट्टान 'चूना पत्थर' (Limestone) पर अत्यधिक ताप (Temperature) और दाब (Pressure) पड़ने के कारण होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: रासायनिक रूप से इसे 'कैल्केरियस रॉक' (Calcareous Rock) भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें मुख्य घटक कैल्शियम कार्बोनेट होता है। ग्रेनाइट (Granite) एक आग्नेय चट्टान है।
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Q52: एक अच्छे भवन पत्थर (Good Building Stone) की न्यूनतम संपीडन/कुचलने की सामर्थ्य (Crushing Strength) कितनी होनी चाहिए?
- A) 50 MPa
- ✅ B) 100 MPa (सही उत्तर)
- C) 150 MPa
- D) 200 MPa
💡 डिटेल Explanation:
भवन निर्माण में उपयोग किए जाने वाले किसी भी अच्छे पत्थर की संपीडन सामर्थ्य 100 N/mm² (MPa) या 1000 kg/cm² से कम नहीं होनी चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: बेसाल्ट (Basalt) और ग्रेनाइट (Granite) की संपीडन सामर्थ्य बहुत अधिक (लगभग 150 से 190 MPa तक) होती है, इसलिए इन्हें भारी इंजीनियरिंग कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है।
भवन निर्माण में उपयोग किए जाने वाले किसी भी अच्छे पत्थर की संपीडन सामर्थ्य 100 N/mm² (MPa) या 1000 kg/cm² से कम नहीं होनी चाहिए।
अतिरिक्त फैक्ट: बेसाल्ट (Basalt) और ग्रेनाइट (Granite) की संपीडन सामर्थ्य बहुत अधिक (लगभग 150 से 190 MPa तक) होती है, इसलिए इन्हें भारी इंजीनियरिंग कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है।
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Q53: 24 घंटे पानी में डुबोने के बाद, एक अच्छे भवन पत्थर का जल अवशोषण (Water Absorption) उसके शुष्क भार के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- ✅ A) 5% (सही उत्तर)
- B) 10%
- C) 15%
- D) 20%
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छा भवन पत्थर सघन (dense) होना चाहिए और उसकी सरंध्रता (porosity) कम होनी चाहिए। भारतीय मानक के अनुसार, एक अच्छे पत्थर का जल अवशोषण 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि जल अवशोषण 10% से अधिक है, तो उस पत्थर को भवन निर्माण के लिए अस्वीकार (Reject) कर दिया जाता है।
एक अच्छा भवन पत्थर सघन (dense) होना चाहिए और उसकी सरंध्रता (porosity) कम होनी चाहिए। भारतीय मानक के अनुसार, एक अच्छे पत्थर का जल अवशोषण 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि जल अवशोषण 10% से अधिक है, तो उस पत्थर को भवन निर्माण के लिए अस्वीकार (Reject) कर दिया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2018, DMRC JE 2017
Q54: अधिकांश अच्छे भवन पत्थरों का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) सामान्यतः किस सीमा (Range) में होता है?
- A) 1.2 से 1.6
- B) 2.0 से 2.4
- ✅ C) 2.6 से 2.8 (सही उत्तर)
- D) 3.1 से 3.5
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व जितना अधिक होगा, वह उतना ही भारी और मजबूत होगा। भवन निर्माण में प्रयुक्त होने वाले अधिकांश ठोस और भारी पत्थरों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट, सैंडस्टोन) का विशिष्ट गुरुत्व 2.6 से 2.8 के बीच पाया जाता है।
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व जितना अधिक होगा, वह उतना ही भारी और मजबूत होगा। भवन निर्माण में प्रयुक्त होने वाले अधिकांश ठोस और भारी पत्थरों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट, सैंडस्टोन) का विशिष्ट गुरुत्व 2.6 से 2.8 के बीच पाया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2018, LMRC JE 2018, UPSSSC JE
Q55: सड़क निर्माण (Road metal) में उपयोग होने वाले पत्थर का अपघर्षण/घिसाव (Wear / Abrasion resistance) जांचने के लिए मुख्य रूप से कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) स्मिथ परीक्षण (Smith's Test)
- ✅ B) डोरी परीक्षण (Dorry's Test) (सही उत्तर)
- C) ब्रिनेल परीक्षण (Brinell Test)
- D) मोहस स्केल (Mohs Scale)
💡 डिटेल Explanation:
सड़क पर यातायात के कारण पत्थरों के आपस में घिसने की दर को मापने के लिए डोरी एब्रेशन टेस्ट (Dorry's Abrasion Test) या लॉस एंजिल्स परीक्षण किया जाता है।
अन्य विकल्प:
सड़क पर यातायात के कारण पत्थरों के आपस में घिसने की दर को मापने के लिए डोरी एब्रेशन टेस्ट (Dorry's Abrasion Test) या लॉस एंजिल्स परीक्षण किया जाता है।
अन्य विकल्प:
- स्मिथ परीक्षण: पत्थर में घुलनशील मिट्टी/अशुद्धियों का पता लगाने के लिए।
- मोहस स्केल: पत्थर की खरोंच कठोरता (Scratch Hardness) मापने के लिए (1 से 10 तक पैमाना)।
चैप्टर 8: चूना और गारा (Lime & Mortar) - महत्वपूर्ण PYQ (Q56 - Q60)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2016, DMRC JE
Q56: पानी के अंदर (Underwater) या लगातार नम रहने वाले स्थानों पर चिनाई कार्यों के लिए किस प्रकार के चूने का उपयोग किया जाता है?
- A) फैट लाइम (Fat Lime)
- ✅ B) हाइड्रोलिक लाइम (Hydraulic Lime) (सही उत्तर)
- C) पुअर लाइम (Poor Lime)
- D) क्विक लाइम (Quick Lime)
💡 डिटेल Explanation:
हाइड्रोलिक चूना (जलीय चूना) पानी के अंदर या नम स्थितियों में भी सेट (Set) और कठोर (Hard) हो सकता है। इसमें मिट्टी (Clay) की मात्रा 5% से 30% तक होती है, जो इसे यह विशेष गुण प्रदान करती है। इसलिए इसे संरचनात्मक कार्यों और पानी के अंदर चिनाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
हाइड्रोलिक चूना (जलीय चूना) पानी के अंदर या नम स्थितियों में भी सेट (Set) और कठोर (Hard) हो सकता है। इसमें मिट्टी (Clay) की मात्रा 5% से 30% तक होती है, जो इसे यह विशेष गुण प्रदान करती है। इसलिए इसे संरचनात्मक कार्यों और पानी के अंदर चिनाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, RRB JE 2015
Q57: सफेदी (White washing) और प्लास्टर (Plastering) कार्यों के लिए कौन सा चूना सबसे उपयुक्त माना जाता है?
- ✅ A) फैट लाइम (Fat Lime) (सही उत्तर)
- B) हाइड्रोलिक लाइम (Hydraulic Lime)
- C) डोलोमाइट लाइम (Dolomite Lime)
- D) लीन लाइम (Lean Lime)
💡 डिटेल Explanation:
फैट लाइम (शुद्ध चूना) में कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) की मात्रा 95% से अधिक होती है। यह बहुत सफेद होता है, धीरे-धीरे जमता है (Slow setting), और पानी मिलाने पर अपने मूल आयतन से 2 से 2.5 गुना तक फूल जाता है। इसकी उच्च सुकार्यता (Workability) और सफेदी के कारण यह वाइट-वॉशिंग और प्लास्टर के लिए बेहतरीन है।
फैट लाइम (शुद्ध चूना) में कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) की मात्रा 95% से अधिक होती है। यह बहुत सफेद होता है, धीरे-धीरे जमता है (Slow setting), और पानी मिलाने पर अपने मूल आयतन से 2 से 2.5 गुना तक फूल जाता है। इसकी उच्च सुकार्यता (Workability) और सफेदी के कारण यह वाइट-वॉशिंग और प्लास्टर के लिए बेहतरीन है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2018, UKPSC JE
Q58: अनबुझे चूने (Quick Lime - CaO) में पानी मिलाने की प्रक्रिया, जिससे बहुत अधिक ऊष्मा (Heat) उत्पन्न होती है, क्या कहलाती है?
- A) कैल्सिनेशन (Calcination)
- B) हाइड्रेशन (Hydration)
- ✅ C) स्लेकिंग (Slaking) (सही उत्तर)
- D) सेटिंग (Setting)
💡 डिटेल Explanation:
क्विक लाइम (CaO) में पानी मिलाने की रासायनिक प्रक्रिया को स्लेकिंग (चूना बुझाना) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2] बनता है जिसे 'बुझा हुआ चूना' (Slaked Lime) कहते हैं। यह एक उष्माक्षेपी (Exothermic) प्रतिक्रिया है जिसमें बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है।
क्विक लाइम (CaO) में पानी मिलाने की रासायनिक प्रक्रिया को स्लेकिंग (चूना बुझाना) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2] बनता है जिसे 'बुझा हुआ चूना' (Slaked Lime) कहते हैं। यह एक उष्माक्षेपी (Exothermic) प्रतिक्रिया है जिसमें बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2019, LMRC JE 2018, MP Vyapam
Q59: मोर्टार (मसाले) में बालू (Sand / Fine Aggregate) मिलाने का मुख्य तकनीकी उद्देश्य क्या होता है?
- A) मोर्टार की संपीडन सामर्थ्य को बढ़ाना
- ✅ B) सूखने पर होने वाले सिकुड़न (Shrinkage) को रोकना (सही उत्तर)
- C) मोर्टार को जल्दी सेट होने में मदद करना
- D) मोर्टार का रंग सुधारना
💡 डिटेल Explanation:
बालू (Sand) एक अक्रिय (Inert) पदार्थ है, जो सीमेंट या चूने के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता है। मोर्टार में बालू मिलाने का प्राथमिक कारण पेस्ट (सीमेंट/चूना + पानी) के सूखने पर होने वाले सिकुड़न (Shrinkage) और दरारों को रोकना है। यह मसाले के आयतन को बढ़ाकर निर्माण की लागत (Cost) भी कम करता है।
बालू (Sand) एक अक्रिय (Inert) पदार्थ है, जो सीमेंट या चूने के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता है। मोर्टार में बालू मिलाने का प्राथमिक कारण पेस्ट (सीमेंट/चूना + पानी) के सूखने पर होने वाले सिकुड़न (Shrinkage) और दरारों को रोकना है। यह मसाले के आयतन को बढ़ाकर निर्माण की लागत (Cost) भी कम करता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2018, UPSSSC JE 2015, RRB JE 2019
Q60: चूना पत्थर (Limestone - CaCO3) को हवा की उपस्थिति में लाल होने तक गर्म करने की प्रक्रिया, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) बाहर निकल जाती है, क्या कहलाती है?
- ✅ A) कैल्सिनेशन / निस्तापन (Calcination) (सही उत्तर)
- B) स्लेकिंग (Slaking)
- C) रोस्टिंग (Roasting)
- D) कार्बोनेशन (Carbonation)
💡 डिटेल Explanation:
चूना पत्थर (CaCO3) को भट्टों (Kilns) में लगभग 800°C से 900°C पर गर्म किया जाता है, जिससे वह टूटकर क्विक लाइम (CaO) और CO2 गैस में बदल जाता है। इस रासायनिक विघटन की प्रक्रिया को कैल्सिनेशन (निस्तापन) कहा जाता है।
चूना पत्थर (CaCO3) को भट्टों (Kilns) में लगभग 800°C से 900°C पर गर्म किया जाता है, जिससे वह टूटकर क्विक लाइम (CaO) और CO2 गैस में बदल जाता है। इस रासायनिक विघटन की प्रक्रिया को कैल्सिनेशन (निस्तापन) कहा जाता है।
टिम्बर, प्लाईवुड और विविध - एडवांस PYQ (Q61 - Q65)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2015, DMRC JE 2018
Q61: लकड़ी (Timber) में 'गांठ' (Knot) नामक दोष मुख्य रूप से किस कारण से उत्पन्न होता है?
- A) फफूंदी (Fungi) के हमले के कारण
- ✅ B) पेड़ की शाखाओं के टूटने या कटने के कारण (Base of cut branches) (सही उत्तर)
- C) अनुचित सीज़निंग (Improper seasoning) के कारण
- D) दीमक (Termites) के कारण
💡 डिटेल Explanation:
जब पेड़ के बढ़ते समय उसकी कोई शाखा (Branch) टूट जाती है या काट दी जाती है, तो तने के उस हिस्से में रेशों (Fibers) का विकास अनियमित हो जाता है। इस जगह पर एक गहरे रंग का, कठोर और गोलाकार निशान बन जाता है जिसे गांठ (Knot) कहते हैं। यह लकड़ी की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) को कम कर देता है।
जब पेड़ के बढ़ते समय उसकी कोई शाखा (Branch) टूट जाती है या काट दी जाती है, तो तने के उस हिस्से में रेशों (Fibers) का विकास अनियमित हो जाता है। इस जगह पर एक गहरे रंग का, कठोर और गोलाकार निशान बन जाता है जिसे गांठ (Knot) कहते हैं। यह लकड़ी की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) को कम कर देता है।
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Q62: प्लाईवुड (Plywood) बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली लकड़ी की पतली परतों 'विनियर' (Veneers) की मोटाई सामान्यतः किस सीमा में होती है?
- ✅ A) 0.4 mm से 6 mm (सही उत्तर)
- B) 10 mm से 15 mm
- C) 20 mm से 25 mm
- D) 50 mm से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
विनियर (Veneer) लकड़ी की बहुत पतली परत होती है जिसे रोटरी कटिंग (Rotary cutting) या स्लाइसिंग (Slicing) द्वारा प्राप्त किया जाता है। भारतीय मानकों के अनुसार, इनकी मोटाई 0.4 mm से 6 mm के बीच होती है। इन्हीं विनियर को एक-दूसरे के समकोण (Right angles) पर ग्लू (Glue) से चिपकाकर प्लाईवुड तैयार किया जाता है।
विनियर (Veneer) लकड़ी की बहुत पतली परत होती है जिसे रोटरी कटिंग (Rotary cutting) या स्लाइसिंग (Slicing) द्वारा प्राप्त किया जाता है। भारतीय मानकों के अनुसार, इनकी मोटाई 0.4 mm से 6 mm के बीच होती है। इन्हीं विनियर को एक-दूसरे के समकोण (Right angles) पर ग्लू (Glue) से चिपकाकर प्लाईवुड तैयार किया जाता है।
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Q63: सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाले बिटुमेन (Bitumen) की कठोरता (Hardness) या ग्रेड मापने के लिए मुख्य रूप से कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) डक्टिलिटी टेस्ट (Ductility test)
- B) फ्लैश और फायर पॉइंट टेस्ट (Flash and fire point test)
- ✅ C) पेनेट्रेशन टेस्ट (Penetration test) (सही उत्तर)
- D) विस्कोसिटी टेस्ट (Viscosity test)
💡 डिटेल Explanation:
बिटुमेन की कठोरता या मुलामपन मापने के लिए पेनेट्रेशन टेस्ट (भेदन परीक्षण) किया जाता है। इस परीक्षण में एक मानक सुई (Standard Needle) पर 100 ग्राम का भार लगाकर उसे 25°C तापमान पर 5 सेकंड के लिए बिटुमेन में धंसने दिया जाता है। सुई जितनी गहराई (1/10 mm की इकाइयों में) तक जाती है, वही उसका पेनेट्रेशन मान (Grade) होता है। (जैसे 80/100 ग्रेड)
बिटुमेन की कठोरता या मुलामपन मापने के लिए पेनेट्रेशन टेस्ट (भेदन परीक्षण) किया जाता है। इस परीक्षण में एक मानक सुई (Standard Needle) पर 100 ग्राम का भार लगाकर उसे 25°C तापमान पर 5 सेकंड के लिए बिटुमेन में धंसने दिया जाता है। सुई जितनी गहराई (1/10 mm की इकाइयों में) तक जाती है, वही उसका पेनेट्रेशन मान (Grade) होता है। (जैसे 80/100 ग्रेड)
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, RRB JE 2015, UPPCL JE 2018
Q64: लकड़ी की सीज़निंग (Seasoning of Timber) के लिए सबसे तेज़ और आधुनिक विधि कौन सी है, जिसमें नमी को नियंत्रित तरीके से हटाया जाता है?
- A) जल सीज़निंग (Water seasoning)
- ✅ B) भट्ठा सीज़निंग (Kiln seasoning) (सही उत्तर)
- C) प्राकृतिक सीज़निंग (Natural seasoning)
- D) रासायनिक सीज़निंग (Chemical seasoning)
💡 डिटेल Explanation:
भट्ठा सीज़निंग (Kiln Seasoning) एक कृत्रिम (Artificial) विधि है। इसमें लकड़ी को एक बड़े ओवन (भट्ठे) में रखकर उसमें गर्म हवा प्रवाहित की जाती है। इस विधि में तापमान और आर्द्रता (Humidity) को पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। यह प्राकृतिक सीज़निंग (जिसमें महीनों लगते हैं) की तुलना में बहुत तेज़ है और कुछ ही दिनों में लकड़ी को सुखा देती है।
भट्ठा सीज़निंग (Kiln Seasoning) एक कृत्रिम (Artificial) विधि है। इसमें लकड़ी को एक बड़े ओवन (भट्ठे) में रखकर उसमें गर्म हवा प्रवाहित की जाती है। इस विधि में तापमान और आर्द्रता (Humidity) को पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। यह प्राकृतिक सीज़निंग (जिसमें महीनों लगते हैं) की तुलना में बहुत तेज़ है और कुछ ही दिनों में लकड़ी को सुखा देती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, LMRC JE 2018, UPSSSC JE 2018
Q65: पेंट की गई सतह पर पेंट का सफेद पाउडर बनकर झड़ने लगने के दोष (Defect) को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
- ✅ A) चॉकिंग (Chalking) (सही उत्तर)
- B) सग्गिंग (Sagging)
- C) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- D) फ्लेकिंग (Flaking)
💡 डिटेल Explanation:
चॉकिंग (Chalking) वह दोष है जिसमें पेंट की सतह धीरे-धीरे घिसकर या पाउडर (Chalk) में बदलकर झड़ने लगती है। यह मुख्य रूप से पेंट में तेल (Vehicle/Binder) की कमी होने के कारण होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: पेंट की पपड़ी बनकर उखड़ने को फ्लेकिंग (Flaking) कहा जाता है, जो खराब आसंजन (Poor adhesion) के कारण होता है।
चॉकिंग (Chalking) वह दोष है जिसमें पेंट की सतह धीरे-धीरे घिसकर या पाउडर (Chalk) में बदलकर झड़ने लगती है। यह मुख्य रूप से पेंट में तेल (Vehicle/Binder) की कमी होने के कारण होता है।
अतिरिक्त फैक्ट: पेंट की पपड़ी बनकर उखड़ने को फ्लेकिंग (Flaking) कहा जाता है, जो खराब आसंजन (Poor adhesion) के कारण होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (विविध / मिक्स) - महत्वपूर्ण PYQ (Q66 - Q70)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2016, RRB JE 2015
Q66: लकड़ी (Timber) को दीमक और फंगस से बचाने के लिए सबसे प्रभावी परिरक्षक (Preservative) कौन सा माना जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed oil)
- ✅ B) क्रियोसोट तेल (Creosote oil) (सही उत्तर)
- C) तारपीन का तेल (Turpentine oil)
- D) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish)
💡 डिटेल Explanation:
क्रियोसोट तेल (Creosote oil) लकड़ी का एक बहुत ही प्रभावी परिरक्षक (preservative) है। यह कोयले या लकड़ी के तारकोल (Tar) के आसवन से प्राप्त होता है। यह गहरे भूरे या काले रंग का होता है और इसकी गंध बहुत तीखी होती है, जिसके कारण दीमक (Termites) और फंगस लकड़ी के पास नहीं आते। इसका उपयोग मुख्य रूप से रेलवे स्लीपर और लकड़ी के खंभों पर किया जाता है।
क्रियोसोट तेल (Creosote oil) लकड़ी का एक बहुत ही प्रभावी परिरक्षक (preservative) है। यह कोयले या लकड़ी के तारकोल (Tar) के आसवन से प्राप्त होता है। यह गहरे भूरे या काले रंग का होता है और इसकी गंध बहुत तीखी होती है, जिसके कारण दीमक (Termites) और फंगस लकड़ी के पास नहीं आते। इसका उपयोग मुख्य रूप से रेलवे स्लीपर और लकड़ी के खंभों पर किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, LMRC JE 2017
Q67: ठंडे मौसम में कंक्रीट के जमाव (Setting time) को तेज करने के लिए किस 'त्वरक' (Accelerator) का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है?
- A) जिप्सम (Gypsum)
- B) कैल्शियम सल्फेट (Calcium Sulphate)
- ✅ C) कैल्शियम क्लोराइड (Calcium Chloride) (सही उत्तर)
- D) सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride)
💡 डिटेल Explanation:
एडमिक्सचर (Admixtures) कंक्रीट के गुणों को बदलने के लिए मिलाए जाते हैं। कैल्शियम क्लोराइड (CaCl2) सबसे सस्ता और अधिक उपयोग होने वाला त्वरक (Accelerator) है। यह कंक्रीट को जल्दी जमने और प्रारंभिक सामर्थ्य प्राप्त करने में मदद करता है।
अतिरिक्त फैक्ट: जिप्सम एक मंदक (Retarder) है जो जमाव को धीमा करता है।
एडमिक्सचर (Admixtures) कंक्रीट के गुणों को बदलने के लिए मिलाए जाते हैं। कैल्शियम क्लोराइड (CaCl2) सबसे सस्ता और अधिक उपयोग होने वाला त्वरक (Accelerator) है। यह कंक्रीट को जल्दी जमने और प्रारंभिक सामर्थ्य प्राप्त करने में मदद करता है।
अतिरिक्त फैक्ट: जिप्सम एक मंदक (Retarder) है जो जमाव को धीमा करता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q68: भट्टियों (Furnaces) के अंदर उच्च तापमान सहने के लिए किस प्रकार की ईंटों का उपयोग किया जाता है?
- A) सिलिका ब्रिक्स (Silica Bricks)
- ✅ B) फायर ब्रिक्स (Fire Bricks / Refractory Bricks) (सही उत्तर)
- C) फ्लाई ऐश ब्रिक्स (Fly Ash Bricks)
- D) बुलनोज़ ब्रिक्स (Bullnose Bricks)
💡 डिटेल Explanation:
भट्टियों, चिमनियों और ओवन की आंतरिक दीवारों पर फायर ब्रिक्स (Refractory Bricks) का उपयोग होता है, जो 1700°C से भी अधिक तापमान बिना पिघले सह सकती हैं। इन्हें 'फायर क्ले' से बनाया जाता है जिसमें सिलिका और एल्युमिना की मात्रा सामान्य ईंटों की तुलना में बहुत अधिक होती है।
भट्टियों, चिमनियों और ओवन की आंतरिक दीवारों पर फायर ब्रिक्स (Refractory Bricks) का उपयोग होता है, जो 1700°C से भी अधिक तापमान बिना पिघले सह सकती हैं। इन्हें 'फायर क्ले' से बनाया जाता है जिसमें सिलिका और एल्युमिना की मात्रा सामान्य ईंटों की तुलना में बहुत अधिक होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam 2016
Q69: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) में ली-चैटेलियर परीक्षण (Le-Chatelier Test) के दौरान अधिकतम विस्तार (Maximum Expansion) कितना अनुमत है?
- A) 5 mm
- ✅ B) 10 mm (सही उत्तर)
- C) 15 mm
- D) 20 mm
💡 डिटेल Explanation:
ली-चैटेलियर उपकरण का उपयोग सीमेंट की 'Soundness' (निर्दोषता) मापने के लिए किया जाता है, जो मुख्य रूप से अनबुझे चूने (Free Lime) के कारण होती है। IS कोड के अनुसार, OPC और अन्य अधिकांश सीमेंट्स के लिए ली-चैटेलियर मोल्ड के संकेतकों (indicators) के बीच का विस्तार 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
ली-चैटेलियर उपकरण का उपयोग सीमेंट की 'Soundness' (निर्दोषता) मापने के लिए किया जाता है, जो मुख्य रूप से अनबुझे चूने (Free Lime) के कारण होती है। IS कोड के अनुसार, OPC और अन्य अधिकांश सीमेंट्स के लिए ली-चैटेलियर मोल्ड के संकेतकों (indicators) के बीच का विस्तार 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2018, UPSSSC JE 2016, UKPSC JE
Q70: बालू का फूलना (Bulking of Sand) किस नमी की मात्रा (Moisture content) पर अधिकतम होता है?
- A) 1% से 2%
- ✅ B) 4% से 5% (सही उत्तर)
- C) 8% से 10%
- D) 12% से 15%
💡 डिटेल Explanation:
बालू के कणों के चारों ओर नमी (पानी) की एक पतली फिल्म बन जाती है, जो कणों को एक-दूसरे से दूर धकेलती है। इससे बालू का आयतन (Volume) 20% से 30% तक बढ़ जाता है। इसे Bulking of Sand कहते हैं। यह प्रभाव तब सबसे अधिक (Maximum) होता है जब बालू में नमी की मात्रा 4% से 5% के बीच होती है। जैसे-जैसे पानी और बढ़ाया जाता है, यह फिल्म टूट जाती है और बालू वापस अपने मूल आयतन में आ जाती है।
बालू के कणों के चारों ओर नमी (पानी) की एक पतली फिल्म बन जाती है, जो कणों को एक-दूसरे से दूर धकेलती है। इससे बालू का आयतन (Volume) 20% से 30% तक बढ़ जाता है। इसे Bulking of Sand कहते हैं। यह प्रभाव तब सबसे अधिक (Maximum) होता है जब बालू में नमी की मात्रा 4% से 5% के बीच होती है। जैसे-जैसे पानी और बढ़ाया जाता है, यह फिल्म टूट जाती है और बालू वापस अपने मूल आयतन में आ जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (महत्वपूर्ण मिक्स PYQ) - भाग 15 (Q71 - Q75)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q71: सीमेंट के बोग्स यौगिकों (Bogue's Compounds) में हाइड्रेशन की ऊष्मा (Heat of Hydration) का सही घटता हुआ क्रम (Descending order) क्या है?
- A) C3S > C2S > C3A > C4AF
- ✅ B) C3A > C3S > C4AF > C2S (सही उत्तर)
- C) C3A > C4AF > C3S > C2S
- D) C4AF > C3A > C3S > C2S
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में पानी मिलाने पर सबसे अधिक ऊष्मा C3A (ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट) उत्पन्न करता है (लगभग 865 J/g)। इसके बाद C3S (500 J/g), फिर C4AF (420 J/g) और सबसे कम ऊष्मा C2S (260 J/g) उत्पन्न करता है। इसलिए बड़े बांधों में C2S की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
सीमेंट में पानी मिलाने पर सबसे अधिक ऊष्मा C3A (ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट) उत्पन्न करता है (लगभग 865 J/g)। इसके बाद C3S (500 J/g), फिर C4AF (420 J/g) और सबसे कम ऊष्मा C2S (260 J/g) उत्पन्न करता है। इसलिए बड़े बांधों में C2S की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, MP Vyapam 2016
Q72: IS 456 के अनुसार, सामान्य RCC कार्यों (जैसे स्लैब, बीम और कॉलम) के लिए कंक्रीट का अनुशंसित 'स्लंप मान' (Slump Value) कितना होना चाहिए?
- A) 25 - 50 mm
- ✅ B) 50 - 100 mm (सही उत्तर)
- C) 100 - 150 mm
- D) 10 - 25 mm
💡 डिटेल Explanation:
सामान्य प्रबलित कंक्रीट (RCC) संरचनाओं में जहाँ सुदृढीकरण (Reinforcement) का जाल बिछा होता है, वहाँ कंक्रीट को आसानी से प्रवाहित होने के लिए मध्यम सुकार्यता (Medium Workability) की आवश्यकता होती है। इसके लिए आदर्श स्लंप मान 50 mm से 100 mm के बीच रखा जाता है।
सामान्य प्रबलित कंक्रीट (RCC) संरचनाओं में जहाँ सुदृढीकरण (Reinforcement) का जाल बिछा होता है, वहाँ कंक्रीट को आसानी से प्रवाहित होने के लिए मध्यम सुकार्यता (Medium Workability) की आवश्यकता होती है। इसके लिए आदर्श स्लंप मान 50 mm से 100 mm के बीच रखा जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q73: लकड़ी (Timber) में पाए जाने वाले उस दोष को क्या कहते हैं जिसमें दरारें छाल (Bark) से शुरू होकर केंद्र (Pith) की ओर बढ़ती हैं?
- ✅ A) स्टार शेक्स (Star Shakes) (सही उत्तर)
- B) हार्ट शेक्स (Heart Shakes)
- C) कप शेक्स (Cup Shakes)
- D) रिंग शेक्स (Ring Shakes)
💡 डिटेल Explanation:
स्टार शेक्स (Star Shakes) वे दरारें होती हैं जो पेड़ के बाहरी हिस्से (Sapwood/Bark) में चौड़ी होती हैं और अंदर केंद्र (Pith) की तरफ जाते-जाते पतली हो जाती हैं। यह मुख्य रूप से पेड़ के बाहरी हिस्से के बहुत तेज़ी से सूखने (Severe frost या धूप) के कारण होता है।
कंफ्यूजन पॉइंट: हार्ट शेक्स (Heart Shakes) इसके ठीक विपरीत होते हैं, जो केंद्र में चौड़े और बाहर की तरफ पतले होते हैं।
स्टार शेक्स (Star Shakes) वे दरारें होती हैं जो पेड़ के बाहरी हिस्से (Sapwood/Bark) में चौड़ी होती हैं और अंदर केंद्र (Pith) की तरफ जाते-जाते पतली हो जाती हैं। यह मुख्य रूप से पेड़ के बाहरी हिस्से के बहुत तेज़ी से सूखने (Severe frost या धूप) के कारण होता है।
कंफ्यूजन पॉइंट: हार्ट शेक्स (Heart Shakes) इसके ठीक विपरीत होते हैं, जो केंद्र में चौड़े और बाहर की तरफ पतले होते हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, UKPSC JE
Q74: निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होने वाली 'महीन बालू' (Fine Sand) का सूक्ष्मता मापांक (Fineness Modulus - FM) किस सीमा में होता है?
- A) 1.5 - 2.2
- ✅ B) 2.2 - 2.6 (सही उत्तर)
- C) 2.6 - 2.9
- D) 2.9 - 3.2
💡 डिटेल Explanation:
सूक्ष्मता मापांक (Fineness Modulus) एग्रीगेट के औसत आकार को दर्शाता है। IS कोड के अनुसार बालू का वर्गीकरण इस प्रकार है:
सूक्ष्मता मापांक (Fineness Modulus) एग्रीगेट के औसत आकार को दर्शाता है। IS कोड के अनुसार बालू का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- महीन बालू (Fine Sand): 2.2 से 2.6
- मध्यम बालू (Medium Sand): 2.6 से 2.9
- मोटी बालू (Coarse Sand): 2.9 से 3.2
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, LMRC JE 2018, UPSSSC JE 2015
Q75: सीमेंट की तनन सामर्थ्य (Tensile Strength) मापने के लिए ब्रिकेट परीक्षण (Briquette Test) में सीमेंट और बालू (Sand) का अनुपात कितना रखा जाता है?
- A) 1 : 2
- ✅ B) 1 : 3 (सही उत्तर)
- C) 1 : 4
- D) 1 : 6
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) प्रत्यक्ष रूप से नहीं नापी जाती, बल्कि इसे सीमेंट मोर्टार के ब्रिकेट्स (Briquettes) बनाकर नापा जाता है। इस परीक्षण में 1 भाग सीमेंट और 3 भाग मानक बालू (Ennore Sand) का उपयोग किया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट की 3 दिन की तनन सामर्थ्य कम से कम 2.0 N/mm2 और 7 दिन की तनन सामर्थ्य 2.5 N/mm2 होनी चाहिए।
सीमेंट की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) प्रत्यक्ष रूप से नहीं नापी जाती, बल्कि इसे सीमेंट मोर्टार के ब्रिकेट्स (Briquettes) बनाकर नापा जाता है। इस परीक्षण में 1 भाग सीमेंट और 3 भाग मानक बालू (Ennore Sand) का उपयोग किया जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट की 3 दिन की तनन सामर्थ्य कम से कम 2.0 N/mm2 और 7 दिन की तनन सामर्थ्य 2.5 N/mm2 होनी चाहिए।
बिल्डिंग मटेरियल (महत्वपूर्ण मिक्स PYQ) - भाग 16 (Q76 - Q80)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2016, DMRC JE
Q76: सीमेंट के पूर्ण जलयोजन (Complete Hydration) के लिए वजन के अनुसार लगभग कितने प्रतिशत पानी की आवश्यकता होती है?
- A) 15% - 20%
- B) 23% - 25%
- ✅ C) 38% - 40% (सही उत्तर)
- D) 50% - 60%
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट के पूर्ण रासायनिक हाइड्रेशन के लिए उसके वजन का लगभग 23% पानी आवश्यक होता है (इसे बाउंड वाटर कहते हैं)। इसके अलावा, सीमेंट जेल के छिद्रों (Gel pores) को भरने के लिए लगभग 15% अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए, पूर्ण जलयोजन के लिए कुल 38% (23% + 15%) पानी की आवश्यकता होती है।
सीमेंट के पूर्ण रासायनिक हाइड्रेशन के लिए उसके वजन का लगभग 23% पानी आवश्यक होता है (इसे बाउंड वाटर कहते हैं)। इसके अलावा, सीमेंट जेल के छिद्रों (Gel pores) को भरने के लिए लगभग 15% अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए, पूर्ण जलयोजन के लिए कुल 38% (23% + 15%) पानी की आवश्यकता होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2018, UPSSSC JE 2015, RRB JE
Q77: प्लाईवुड (Plywood) के निर्माण में, दो आसन्न (Adjacent) विनियर परतों के रेशे (Grains) एक-दूसरे के सापेक्ष किस कोण (Angle) पर रखे जाते हैं?
- A) 45 डिग्री पर
- B) 60 डिग्री पर
- ✅ C) 90 डिग्री (समकोण) पर (सही उत्तर)
- D) एक-दूसरे के समानांतर (Parallel)
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड में विनियर (लकड़ी की पतली परतों) को इस तरह से चिपकाया जाता है कि हर अगली परत के रेशे (Grains) पिछली परत के रेशों के ठीक समकोण (90°) पर हों। इस क्रॉस-बैंडिंग (Cross-banding) तकनीक के कारण प्लाईवुड सभी दिशाओं में एक समान रूप से मजबूत होता है और इसके मुड़ने (Warping) की संभावना खत्म हो जाती है।
प्लाईवुड में विनियर (लकड़ी की पतली परतों) को इस तरह से चिपकाया जाता है कि हर अगली परत के रेशे (Grains) पिछली परत के रेशों के ठीक समकोण (90°) पर हों। इस क्रॉस-बैंडिंग (Cross-banding) तकनीक के कारण प्लाईवुड सभी दिशाओं में एक समान रूप से मजबूत होता है और इसके मुड़ने (Warping) की संभावना खत्म हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, LMRC JE 2018, MP Vyapam
Q78: ईंट पकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'हॉफमैन का भट्ठा' (Hoffman's Kiln) और 'बुल्स ट्रेंच भट्ठा' (Bull's Trench Kiln) किस प्रकार के भट्ठे के उदाहरण हैं?
- ✅ A) निरंतर भट्ठे (Continuous Kilns) (सही उत्तर)
- B) आंतरायिक भट्ठे (Intermittent Kilns)
- C) क्लैंप (Clamps)
- D) डाउन-ड्राफ्ट भट्ठे (Down-draft kilns)
💡 डिटेल Explanation:
हॉफमैन का भट्ठा और बुल्स ट्रेंच भट्ठा निरंतर भट्ठे (Continuous Kilns) हैं। इनमें ईंटों को पकाने की प्रक्रिया बिना रुके (लगातार) चलती रहती है। इनमें आग एक हिस्से से दूसरे हिस्से में बढ़ती रहती है और एक ही समय में एक हिस्से में ईंटें लोड की जा रही होती हैं, दूसरे में पक रही होती हैं और तीसरे हिस्से से पकी हुई ईंटें निकाली जा रही होती हैं।
हॉफमैन का भट्ठा और बुल्स ट्रेंच भट्ठा निरंतर भट्ठे (Continuous Kilns) हैं। इनमें ईंटों को पकाने की प्रक्रिया बिना रुके (लगातार) चलती रहती है। इनमें आग एक हिस्से से दूसरे हिस्से में बढ़ती रहती है और एक ही समय में एक हिस्से में ईंटें लोड की जा रही होती हैं, दूसरे में पक रही होती हैं और तीसरे हिस्से से पकी हुई ईंटें निकाली जा रही होती हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2018, UKPSC JE
Q79: भवन निर्माण के लिए पत्थरों की 'ड्रेसिंग' (Dressing of stone) का कार्य सामान्यतः किस चरण में किया जाना सबसे उपयुक्त होता है?
- ✅ A) खदान से निकालने के तुरंत बाद (Quarrying के तुरंत बाद) (सही उत्तर)
- B) पत्थर की सीज़निंग के बाद
- C) भवन निर्माण से ठीक पहले
- D) पत्थर को दीवार में लगाने के बाद
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर को खदान (Quarry) से निकालने के तुरंत बाद उसकी ड्रेसिंग (उसे सही आकार देना) की जानी चाहिए। खदान से ताजा निकले पत्थर में 'क्वैरी सैप' (Quarry Sap - प्राकृतिक नमी) मौजूद होता है, जिससे पत्थर अपेक्षाकृत मुलायम होता है और उसे काटना या आकार देना बहुत आसान होता है। सूखने (Seasoning) के बाद पत्थर बहुत कठोर हो जाता है।
पत्थर को खदान (Quarry) से निकालने के तुरंत बाद उसकी ड्रेसिंग (उसे सही आकार देना) की जानी चाहिए। खदान से ताजा निकले पत्थर में 'क्वैरी सैप' (Quarry Sap - प्राकृतिक नमी) मौजूद होता है, जिससे पत्थर अपेक्षाकृत मुलायम होता है और उसे काटना या आकार देना बहुत आसान होता है। सूखने (Seasoning) के बाद पत्थर बहुत कठोर हो जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, UPPCL JE 2018, RRB JE
Q80: दीवारों पर सफेदी या रंगाई के लिए प्रयुक्त होने वाला 'डिस्टेंपर' (Distemper) मुख्य रूप से क्या होता है?
- A) तेल आधारित पेंट (Oil Paint)
- ✅ B) पानी आधारित पेंट (Water Paint) (सही उत्तर)
- C) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish)
- D) बिटुमिनस पेंट (Bituminous Paint)
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर मूलतः एक पानी आधारित पेंट (Water-bound Paint) है। इसमें बेस (Base) के रूप में पिसा हुआ चॉक (Chalk) होता है और बाइंडर के रूप में ग्लू (Glue/गोंद) या कैसीन (Casein) मिलाया जाता है, जिसे पानी में घोला जाता है। चूँकि यह पानी आधारित है, इसलिए इसे बाहरी सतहों (Outdoor surfaces) पर उपयोग नहीं किया जाता है जहाँ बारिश का प्रभाव पड़ता हो।
डिस्टेंपर मूलतः एक पानी आधारित पेंट (Water-bound Paint) है। इसमें बेस (Base) के रूप में पिसा हुआ चॉक (Chalk) होता है और बाइंडर के रूप में ग्लू (Glue/गोंद) या कैसीन (Casein) मिलाया जाता है, जिसे पानी में घोला जाता है। चूँकि यह पानी आधारित है, इसलिए इसे बाहरी सतहों (Outdoor surfaces) पर उपयोग नहीं किया जाता है जहाँ बारिश का प्रभाव पड़ता हो।
बिल्डिंग मटेरियल (महत्वपूर्ण मिक्स PYQ) - भाग 17 (Q81 - Q85)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2015, RRB JE
Q81: भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, लकड़ी (Timber) के विभिन्न सामर्थ्य परीक्षणों (Strength tests) के लिए मानक नमी की मात्रा (Standard Moisture Content) कितनी मानी जाती है?
- A) 8%
- B) 10%
- ✅ C) 12% (सही उत्तर)
- D) 15%
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी की सामर्थ्य उसमें मौजूद नमी की मात्रा पर बहुत निर्भर करती है। इसलिए सभी प्रकार के टिम्बर के परीक्षणों की तुलना करने के लिए एक मानक नमी निर्धारित की गई है। भारतीय मानक (IS 1708) के अनुसार, टिम्बर के सभी सामर्थ्य परीक्षण 12% नमी (Moisture content) पर किए जाने चाहिए।
लकड़ी की सामर्थ्य उसमें मौजूद नमी की मात्रा पर बहुत निर्भर करती है। इसलिए सभी प्रकार के टिम्बर के परीक्षणों की तुलना करने के लिए एक मानक नमी निर्धारित की गई है। भारतीय मानक (IS 1708) के अनुसार, टिम्बर के सभी सामर्थ्य परीक्षण 12% नमी (Moisture content) पर किए जाने चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, DMRC JE 2017
Q82: IS 456:2000 के अनुसार, समुद्री जल (Sea Water) के सीधे संपर्क में आने वाले RCC (प्रबलित कंक्रीट) कार्यों के लिए कंक्रीट का न्यूनतम ग्रेड (Minimum Grade) क्या होना चाहिए?
- A) M20
- B) M25
- ✅ C) M30 (सही उत्तर)
- D) M35
💡 डिटेल Explanation:
समुद्री जल के संपर्क में आने वाली संरचनाओं को 'गंभीर' (Severe) एक्सपोज़र की स्थिति में माना जाता है। IS 456 के अनुसार, समुद्री जल में PCC (सादे कंक्रीट) के लिए न्यूनतम ग्रेड M20 और RCC (प्रबलित कंक्रीट) के लिए न्यूनतम ग्रेड M30 होना चाहिए, ताकि कंक्रीट के अंदर का स्टील जंग (Corrosion) से बचा रहे।
समुद्री जल के संपर्क में आने वाली संरचनाओं को 'गंभीर' (Severe) एक्सपोज़र की स्थिति में माना जाता है। IS 456 के अनुसार, समुद्री जल में PCC (सादे कंक्रीट) के लिए न्यूनतम ग्रेड M20 और RCC (प्रबलित कंक्रीट) के लिए न्यूनतम ग्रेड M30 होना चाहिए, ताकि कंक्रीट के अंदर का स्टील जंग (Corrosion) से बचा रहे।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2016, UPSSSC JE 2015, MP Vyapam
Q83: अच्छी गुणवत्ता वाली ईंटों को भट्टे (Kiln) में पकाने (Burning) के लिए सामान्यतः किस तापमान सीमा (Temperature range) की आवश्यकता होती है?
- A) 500°C - 700°C
- B) 700°C - 900°C
- ✅ C) 900°C - 1200°C (सही उत्तर)
- D) 1200°C - 1500°C
💡 डिटेल Explanation:
ईंटों को पकने और कठोर (Hard) होने के लिए मिट्टी में मौजूद सिलिका और एल्युमिना का आपस में पिघलकर जुड़ना जरूरी है। यह प्रक्रिया सामान्यतः 900°C से 1200°C (विशेष रूप से 1100°C के आसपास) के तापमान पर होती है। यदि तापमान इससे अधिक हो जाए, तो ईंटें पिघल कर अपना आकार खो देती हैं (Over-burnt bricks)।
ईंटों को पकने और कठोर (Hard) होने के लिए मिट्टी में मौजूद सिलिका और एल्युमिना का आपस में पिघलकर जुड़ना जरूरी है। यह प्रक्रिया सामान्यतः 900°C से 1200°C (विशेष रूप से 1100°C के आसपास) के तापमान पर होती है। यदि तापमान इससे अधिक हो जाए, तो ईंटें पिघल कर अपना आकार खो देती हैं (Over-burnt bricks)।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, LMRC JE 2018, UKPSC JE
Q84: खिड़कियों के शीशे फिक्स करने या सतह के छेद भरने के लिए उपयोग की जाने वाली 'पुट्टी' (Putty) मुख्य रूप से किन दो पदार्थों का मिश्रण होती है?
- A) सफेद सीसा (White lead) और तारपीन का तेल
- ✅ B) पिसा हुआ चॉक (Powdered Chalk) और कच्चा अलसी का तेल (Raw Linseed Oil) (सही उत्तर)
- C) लाल सीसा (Red lead) और पानी
- D) जिप्सम (Gypsum) और स्पिरिट
💡 डिटेल Explanation:
ग्लेजिंग पुट्टी (Glazing Putty) का उपयोग शीशे (Glass panes) को खिड़कियों के फ्रेम में फिक्स करने के लिए किया जाता है। इसे पिसे हुए चॉक (Whiting) और कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed Oil) को गूंध कर बनाया जाता है। यह हवा के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे कठोर हो जाती है।
ग्लेजिंग पुट्टी (Glazing Putty) का उपयोग शीशे (Glass panes) को खिड़कियों के फ्रेम में फिक्स करने के लिए किया जाता है। इसे पिसे हुए चॉक (Whiting) और कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed Oil) को गूंध कर बनाया जाता है। यह हवा के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे कठोर हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2019, UPSSSC JE 2015, UPPCL JE 2019
Q85: रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) का प्रारंभिक (Initial) और अंतिम जमाव काल (Final setting time) सामान्यतः कितना होता है?
- A) 5 मिनट और 30 मिनट
- ✅ B) 30 मिनट और 600 मिनट (10 घंटे) (सही उत्तर)
- C) 60 मिनट और 600 मिनट
- D) 10 मिनट और 10 घंटे
💡 डिटेल Explanation:
छात्र अक्सर RHC (Rapid Hardening Cement) और क्विक सेटिंग सीमेंट (Quick Setting Cement) में भ्रमित हो जाते हैं।
छात्र अक्सर RHC (Rapid Hardening Cement) और क्विक सेटिंग सीमेंट (Quick Setting Cement) में भ्रमित हो जाते हैं।
- रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC): इसका जमाव काल साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के बिल्कुल बराबर होता है (Initial: 30 मिनट, Final: 10 घंटे)। यह केवल सामर्थ्य (Strength) जल्दी प्राप्त करता है, जमता जल्दी नहीं है।
- क्विक सेटिंग सीमेंट: इसका Initial time 5 मिनट और Final time 30 मिनट होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (महत्वपूर्ण मिक्स PYQ) - भाग 18 (Q86 - Q90)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2016, DMRC JE
Q86: द्वितीय श्रेणी की ईंटों (Second Class Bricks) के लिए जल अवशोषण (Water Absorption) उनके शुष्क भार के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 15%
- B) 20%
- ✅ C) 22% (सही उत्तर)
- D) 25%
💡 डिटेल Explanation:
IS Code 1077 के अनुसार, ईंटों को 24 घंटे ठंडे पानी में डुबोने के बाद उनका जल अवशोषण इस प्रकार होना चाहिए:
IS Code 1077 के अनुसार, ईंटों को 24 घंटे ठंडे पानी में डुबोने के बाद उनका जल अवशोषण इस प्रकार होना चाहिए:
- प्रथम श्रेणी (First Class): 20% से अधिक नहीं
- द्वितीय श्रेणी (Second Class): 22% से अधिक नहीं
- तृतीय श्रेणी (Third Class): 25% से अधिक नहीं
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, RRB JE 2019
Q87: IS 456:2000 के अनुसार, स्लैब (Slab) के नीचे के प्रॉप्स (Props) को हटाने की न्यूनतम अवधि क्या है, यदि स्पैन 4.5 मीटर तक हो?
- A) 3 दिन
- ✅ B) 7 दिन (सही उत्तर)
- C) 14 दिन
- D) 21 दिन
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की फॉर्मवर्क (Formwork/शटरिंग) हटाने का समय कंक्रीट द्वारा प्राप्त सामर्थ्य पर निर्भर करता है। IS 456 के अनुसार:
कंक्रीट की फॉर्मवर्क (Formwork/शटरिंग) हटाने का समय कंक्रीट द्वारा प्राप्त सामर्थ्य पर निर्भर करता है। IS 456 के अनुसार:
- ऊर्ध्वाधर (Vertical) फॉर्मवर्क (कॉलम/दीवार): 16-24 घंटे
- स्लैब के नीचे के प्रॉप्स (स्पैन 4.5m तक): 7 दिन
- स्लैब के नीचे के प्रॉप्स (स्पैन 4.5m से अधिक): 14 दिन
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, LMRC JE
Q88: सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) का परीक्षण छलनी विधि (Sieve Analysis) द्वारा करते समय, किस आकार की IS चालनी (IS Sieve) का उपयोग किया जाता है?
- A) 150 माइक्रोन (Micron)
- ✅ B) 90 माइक्रोन (IS Sieve No. 9) (सही उत्तर)
- C) 75 माइक्रोन
- D) 45 माइक्रोन
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट की सूक्ष्मता नापने का यह एक सरल तरीका है। इसमें 100 ग्राम सीमेंट को 90 माइक्रोन (IS Sieve No. 9) की छलनी से 15 मिनट तक छाना जाता है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए छलनी पर बचा हुआ अवशेष (Residue) सीमेंट के कुल वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।
सीमेंट की सूक्ष्मता नापने का यह एक सरल तरीका है। इसमें 100 ग्राम सीमेंट को 90 माइक्रोन (IS Sieve No. 9) की छलनी से 15 मिनट तक छाना जाता है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए छलनी पर बचा हुआ अवशेष (Residue) सीमेंट के कुल वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPSSSC JE 2015, UKPSC JE
Q89: लकड़ी (Timber) के फलक (Board) के सिरे से सिरे तक अनुदैर्ध्य (Longitudinal) दिशा में मुड़ जाने के दोष को क्या कहते हैं?
- A) कप (Cup)
- ✅ B) बो (Bow) (सही उत्तर)
- C) ट्विस्ट (Twist)
- D) स्प्लिट (Split)
💡 डिटेल Explanation:
यह दोष आमतौर पर गलत तरीके से लकड़ी सुखाने (Seasoning) के कारण होता है।
यह दोष आमतौर पर गलत तरीके से लकड़ी सुखाने (Seasoning) के कारण होता है।
- बो (Bow): जब लकड़ी अपनी लंबाई की दिशा में धनुष की तरह मुड़ जाती है।
- कप (Cup): जब लकड़ी अपनी चौड़ाई की दिशा में प्याले (Cup) की तरह मुड़ जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2016, MP Vyapam 2016
Q90: निरंतर स्थिर भार (Constant sustained loading) के कारण कंक्रीट में समय के साथ होने वाले क्रमिक प्लास्टिक विरूपण (Gradual plastic deformation) को क्या कहा जाता है?
- A) श्रिंकेज (Shrinkage)
- B) फटीग (Fatigue)
- ✅ C) क्रीप (Creep) (सही उत्तर)
- D) रिलैक्सेशन (Relaxation)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट पर जब एक स्थिर भार (Dead load) लंबे समय तक लगा रहता है, तो उसमें समय के साथ धीरे-धीरे विरूपण (Deformation / झुकाव) बढ़ता रहता है, जो कि प्रत्यास्थ (Elastic) नहीं होता। इस समय-निर्भर (Time-dependent) घटना को क्रीप (Creep) कहा जाता है। कंक्रीट की आयु बढ़ने के साथ क्रीप की दर कम होती जाती है।
कंक्रीट पर जब एक स्थिर भार (Dead load) लंबे समय तक लगा रहता है, तो उसमें समय के साथ धीरे-धीरे विरूपण (Deformation / झुकाव) बढ़ता रहता है, जो कि प्रत्यास्थ (Elastic) नहीं होता। इस समय-निर्भर (Time-dependent) घटना को क्रीप (Creep) कहा जाता है। कंक्रीट की आयु बढ़ने के साथ क्रीप की दर कम होती जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (महत्वपूर्ण मिक्स PYQ) - भाग 19 (Q91 - Q95)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q91: कंक्रीट की 'अप्रत्यक्ष तनन सामर्थ्य' (Indirect Tensile Strength) मापने के लिए कौन सा मानक परीक्षण (Standard Test) किया जाता है?
- A) फ्लेक्सुरल परीक्षण (Flexural test)
- ✅ B) स्प्लिट सिलेंडर परीक्षण (Split Cylinder Test) (सही उत्तर)
- C) डायरेक्ट टेंशन परीक्षण (Direct tension test)
- D) वेन शियर परीक्षण (Vane shear test)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट को सीधे खींचकर (Direct tension) उसकी तनन सामर्थ्य मापना बहुत कठिन है, क्योंकि ग्रिप्स (grips) के पास कंक्रीट टूट सकती है। इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से तनन सामर्थ्य मापने के लिए स्प्लिट सिलेंडर टेस्ट किया जाता है। इसमें कंक्रीट के एक सिलेंडर (150 mm व्यास × 300 mm लंबाई) को क्षैतिज रूप से (Horizontally) रखकर उस पर संपीडन भार लगाया जाता है, जिससे वह बीच से फट जाता है।
कंक्रीट को सीधे खींचकर (Direct tension) उसकी तनन सामर्थ्य मापना बहुत कठिन है, क्योंकि ग्रिप्स (grips) के पास कंक्रीट टूट सकती है। इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से तनन सामर्थ्य मापने के लिए स्प्लिट सिलेंडर टेस्ट किया जाता है। इसमें कंक्रीट के एक सिलेंडर (150 mm व्यास × 300 mm लंबाई) को क्षैतिज रूप से (Horizontally) रखकर उस पर संपीडन भार लगाया जाता है, जिससे वह बीच से फट जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2019, UPSSSC JE 2016, UKPSC JE
Q92: पेड़ के तने (Tree trunk) में 'मेडलरी रेज़' (Medullary Rays) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- ✅ A) वार्षिक वलयों (Annual rings) को एक साथ बांध कर रखना (सही उत्तर)
- B) पेड़ की आयु (Age) का निर्धारण करना
- C) पेड़ को दीमक से बचाना
- D) पेड़ की पत्तियों तक पानी पहुँचाना
💡 डिटेल Explanation:
मेडलरी रेज़ (Medullary Rays) पेड़ के तने में केंद्र (Pith) से बाहर छाल (Bark) की ओर त्रिज्यीय (Radially) दिशा में जाने वाली कोशिकाएँ होती हैं। इनका मुख्य कार्य वार्षिक वलयों (Annual Rings) को आपस में कसकर बांधे रखना और त्रिज्यीय दिशा में रस (Sap/पोषण) पहुँचाना होता है।
मेडलरी रेज़ (Medullary Rays) पेड़ के तने में केंद्र (Pith) से बाहर छाल (Bark) की ओर त्रिज्यीय (Radially) दिशा में जाने वाली कोशिकाएँ होती हैं। इनका मुख्य कार्य वार्षिक वलयों (Annual Rings) को आपस में कसकर बांधे रखना और त्रिज्यीय दिशा में रस (Sap/पोषण) पहुँचाना होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, LMRC JE 2018
Q93: भारत में उपयोग की जाने वाली एक मानक/मॉड्यूलर ईंट (Standard Brick) का औसत वजन लगभग कितना होता है?
- A) 1.5 kg से 2.0 kg
- B) 2.0 kg से 2.5 kg
- ✅ C) 3.0 kg से 3.5 kg (सही उत्तर)
- D) 4.5 kg से 5.0 kg
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी गुणवत्ता वाली मानक ईंट (Standard size: 19 × 9 × 9 cm) का औसत वजन लगभग 3.0 kg (या 3 kg से 3.5 kg के बीच) होता है। ईंटों का घनत्व (Density) सामान्यतः 1800 से 2000 kg/m3 के बीच होता है।
एक अच्छी गुणवत्ता वाली मानक ईंट (Standard size: 19 × 9 × 9 cm) का औसत वजन लगभग 3.0 kg (या 3 kg से 3.5 kg के बीच) होता है। ईंटों का घनत्व (Density) सामान्यतः 1800 से 2000 kg/m3 के बीच होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2017, UPSSSC JE 2015, RRB JE
Q94: पेंट (Paint) की सतह पर साबुन के झाग (soapy patches) जैसे धब्बे बन जाने के दोष (Defect) को क्या कहते हैं, जो सतह में मौजूद क्षार (Alkalies) की प्रतिक्रिया के कारण होता है?
- A) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- ✅ B) सापोनिफिकेशन (Saponification) (सही उत्तर)
- C) चॉकिंग (Chalking)
- D) ब्लीडिंग (Bleeding)
💡 डिटेल Explanation:
सापोनिफिकेशन (Saponification - साबुनीकरण) तब होता है जब नई प्लास्टर की गई दीवार (जिसमें क्षार/Alkalies मौजूद होते हैं) पर पेंट कर दिया जाता है। दीवार के क्षार, पेंट में मौजूद तेल (Oil/Vehicle) के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करके साबुन (Soap) बना लेते हैं, जिससे पेंट की सतह चिपचिपी और झागदार हो जाती है।
सापोनिफिकेशन (Saponification - साबुनीकरण) तब होता है जब नई प्लास्टर की गई दीवार (जिसमें क्षार/Alkalies मौजूद होते हैं) पर पेंट कर दिया जाता है। दीवार के क्षार, पेंट में मौजूद तेल (Oil/Vehicle) के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करके साबुन (Soap) बना लेते हैं, जिससे पेंट की सतह चिपचिपी और झागदार हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPPCL JE 2018, MP Vyapam 2016
Q95: भूवैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, बेसाल्ट (Basalt) और ट्रैप (Trap) किस प्रकार की चट्टान के उदाहरण हैं?
- A) इंट्रूसिव आग्नेय चट्टान (Intrusive Igneous Rock)
- ✅ B) एक्सट्रूसिव आग्नेय चट्टान (Extrusive Igneous Rock) (सही उत्तर)
- C) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
- D) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock)
💡 डिटेल Explanation:
ज्वालामुखी से निकलने वाले पिघले हुए मैग्मा (Magma) के ठंडे होने से आग्नेय चट्टानें बनती हैं।
ज्वालामुखी से निकलने वाले पिघले हुए मैग्मा (Magma) के ठंडे होने से आग्नेय चट्टानें बनती हैं।
- Extrusive (बाह्य): जब मैग्मा पृथ्वी की सतह के ऊपर आकर तेज़ी से ठंडा होता है, तो बेसाल्ट (Basalt) और ट्रैप (Trap) बनते हैं। इनकी संरचना बहुत महीन होती है।
- Intrusive (आंतरिक): जब मैग्मा पृथ्वी की सतह के अंदर ही धीरे-धीरे ठंडा होता है, तो ग्रेनाइट (Granite) बनता है।
बिल्डिंग मटेरियल (अंतिम भाग) - महत्वपूर्ण PYQ (Q96 - Q100)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2018, LMRC JE
Q96: सीमेंट में स्वतंत्र चूने (Free Lime) और मैग्नीशिया (Magnesia) दोनों के कारण होने वाली 'निर्दोषता' (Soundness) को मापने के लिए कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) ली-चैटेलियर परीक्षण (Le-Chatelier Test)
- ✅ B) ऑटोक्लेव परीक्षण (Autoclave Test) (सही उत्तर)
- C) विकाट उपकरण परीक्षण (Vicat Apparatus Test)
- D) ब्लेन पारगम्यता परीक्षण (Blaine's Test)
💡 डिटेल Explanation:
ली-चैटेलियर परीक्षण केवल चूने (Lime) के कारण होने वाले विस्तार (Soundness) को मापता है। लेकिन जब सीमेंट में मैग्नीशिया की मात्रा 3% से अधिक हो जाती है, तो मैग्नीशिया और चूने दोनों के कारण होने वाले आयतन विस्तार को मापने के लिए ऑटोक्लेव परीक्षण (Autoclave Test) का उपयोग किया जाता है।
ली-चैटेलियर परीक्षण केवल चूने (Lime) के कारण होने वाले विस्तार (Soundness) को मापता है। लेकिन जब सीमेंट में मैग्नीशिया की मात्रा 3% से अधिक हो जाती है, तो मैग्नीशिया और चूने दोनों के कारण होने वाले आयतन विस्तार को मापने के लिए ऑटोक्लेव परीक्षण (Autoclave Test) का उपयोग किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, MP Vyapam 2016
Q97: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में, यदि किसी ईंट को उसकी लंबाई के मध्य बिंदु से चौड़ाई के मध्य बिंदु तक तिरछा (Diagonally) काटा जाए, तो उसे क्या कहते हैं?
- A) क्वीन क्लोज़र (Queen closer)
- B) बैट (Bat)
- ✅ C) किंग क्लोज़र (King closer) (सही उत्तर)
- D) माइटरड क्लोज़र (Mitred closer)
💡 डिटेल Explanation:
जब ईंट के एक कोने को इस प्रकार काटा जाता है कि कटान रेखा लंबाई के आधे (Half-length) और चौड़ाई के आधे (Half-width) हिस्से को मिलाती है, तो बचे हुए हिस्से को किंग क्लोज़र (King Closer) कहते हैं। इसका उपयोग चिनाई में जोड़ों (Joints) को एक सीध में आने से रोकने के लिए किया जाता है। (लंबाई में आधा काटने पर क्वीन क्लोज़र बनता है)।
जब ईंट के एक कोने को इस प्रकार काटा जाता है कि कटान रेखा लंबाई के आधे (Half-length) और चौड़ाई के आधे (Half-width) हिस्से को मिलाती है, तो बचे हुए हिस्से को किंग क्लोज़र (King Closer) कहते हैं। इसका उपयोग चिनाई में जोड़ों (Joints) को एक सीध में आने से रोकने के लिए किया जाता है। (लंबाई में आधा काटने पर क्वीन क्लोज़र बनता है)।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2016, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q98: लकड़ी के लट्ठे (Timber log) को चीरने (Sawing) की वह कौन सी विधि है, जिसमें लकड़ी सबसे कम सिकुड़ती है और सबसे मजबूत (Strongest) फलक प्राप्त होते हैं?
- A) साधारण चिराई (Ordinary/Flat Sawing)
- B) स्पर्शरेखीय चिराई (Tangential Sawing)
- ✅ C) त्रिज्यीय चिराई (Radial Sawing) (सही उत्तर)
- D) चौथाई चिराई (Quarter Sawing)
💡 डिटेल Explanation:
त्रिज्यीय चिराई (Radial Sawing) में आरी को मेडलरी किरणों (Medullary rays) के समानांतर चलाया जाता है। इससे कटने वाली लकड़ी सूखते समय सबसे कम सिकुड़ती है और सबसे मजबूत होती है। हालांकि, यह सबसे कम किफायती (Least economical) विधि है क्योंकि इसमें लकड़ी की बर्बादी बहुत होती है।
त्रिज्यीय चिराई (Radial Sawing) में आरी को मेडलरी किरणों (Medullary rays) के समानांतर चलाया जाता है। इससे कटने वाली लकड़ी सूखते समय सबसे कम सिकुड़ती है और सबसे मजबूत होती है। हालांकि, यह सबसे कम किफायती (Least economical) विधि है क्योंकि इसमें लकड़ी की बर्बादी बहुत होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2019, UKPSC JE
Q99: निर्माण कार्यों में सबसे अधिक उपयोग होने वाले 'माइल्ड स्टील' (Mild Steel) में कार्बन की मात्रा लगभग कितने प्रतिशत होती है?
- A) 0.05% से कम
- ✅ B) 0.15% से 0.30% (सही उत्तर)
- C) 0.60% से 1.20%
- D) 2.0% से 4.0%
💡 डिटेल Explanation:
माइल्ड स्टील (लो कार्बन स्टील) बहुत अधिक तन्य (Ductile) होता है और इसे आसानी से मोड़ा जा सकता है। इसमें कार्बन की मात्रा 0.15% से 0.30% के बीच होती है।
अतिरिक्त फैक्ट: कार्बन की मात्रा जितनी कम होती है, इस्पात उतना ही लचीला (Ductile) होता है; और कार्बन जितना अधिक होता है, इस्पात उतना ही कठोर और भंगुर (Brittle) होता जाता है।
माइल्ड स्टील (लो कार्बन स्टील) बहुत अधिक तन्य (Ductile) होता है और इसे आसानी से मोड़ा जा सकता है। इसमें कार्बन की मात्रा 0.15% से 0.30% के बीच होती है।
अतिरिक्त फैक्ट: कार्बन की मात्रा जितनी कम होती है, इस्पात उतना ही लचीला (Ductile) होता है; और कार्बन जितना अधिक होता है, इस्पात उतना ही कठोर और भंगुर (Brittle) होता जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q100: भारतीय मानक (IS 456:2000) के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में RCC (प्रबलित सीमेंट कंक्रीट) कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले कंक्रीट का 'न्यूनतम ग्रेड' (Minimum Grade) क्या है?
- A) M10
- B) M15
- ✅ C) M20 (सही उत्तर)
- D) M25
💡 डिटेल Explanation:
IS 456:2000 कोड के नवीनतम संशोधनों के अनुसार, किसी भी RCC (Reinforced Cement Concrete) कार्य के लिए कंक्रीट का ग्रेड M20 से कम नहीं होना चाहिए। M20 कंक्रीट का अनुपात 1 : 1.5 : 3 (सीमेंट : बालू : गिट्टी) होता है।
नोट: PCC (सादे कंक्रीट) के लिए न्यूनतम ग्रेड M15 लिया जा सकता है।
IS 456:2000 कोड के नवीनतम संशोधनों के अनुसार, किसी भी RCC (Reinforced Cement Concrete) कार्य के लिए कंक्रीट का ग्रेड M20 से कम नहीं होना चाहिए। M20 कंक्रीट का अनुपात 1 : 1.5 : 3 (सीमेंट : बालू : गिट्टी) होता है।
नोट: PCC (सादे कंक्रीट) के लिए न्यूनतम ग्रेड M15 लिया जा सकता है।
🎯 बधाई हो! आपकी बिल्डिंग मटेरियल (Building Materials) की टॉप 100 PYQ सीरीज पूरी हो गई है!
यह सीरीज आगामी UPSSSC JE, SSC JE, और RRB JE परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। अपने रिवीज़न को मजबूत रखें और परीक्षा में सफलता प्राप्त करें।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 21 (Q101 - Q105)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2018
Q101: कंक्रीट में 'वायु-प्रवेशक अभिकर्मक' (Air-Entraining Agents) मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) कंक्रीट की संपीडन सामर्थ्य को बढ़ाना
- ✅ B) सुकार्यता (Workability) और पाले (Freeze-thaw) के प्रति प्रतिरोध बढ़ाना (सही उत्तर)
- C) पारगम्यता (Permeability) को बढ़ाना
- D) कंक्रीट का घनत्व (Density) बढ़ाना
💡 डिटेल Explanation:
Air-entraining agents (जैसे विंसोल रेज़िन, एल्युमिनियम पाउडर) कंक्रीट में लाखों सूक्ष्म हवा के बुलबुले बना देते हैं। ये बुलबुले कंक्रीट में 'बॉल-बियरिंग' की तरह काम करते हैं, जिससे पानी की मात्रा बढ़ाए बिना सुकार्यता (Workability) बढ़ जाती है। साथ ही, यह ठंडे इलाकों में जमने और पिघलने (Freeze-thaw cycle) के कारण होने वाले नुकसान से कंक्रीट को बचाता है। नोट: इससे कंक्रीट की सामर्थ्य (Strength) थोड़ी कम हो जाती है।
Air-entraining agents (जैसे विंसोल रेज़िन, एल्युमिनियम पाउडर) कंक्रीट में लाखों सूक्ष्म हवा के बुलबुले बना देते हैं। ये बुलबुले कंक्रीट में 'बॉल-बियरिंग' की तरह काम करते हैं, जिससे पानी की मात्रा बढ़ाए बिना सुकार्यता (Workability) बढ़ जाती है। साथ ही, यह ठंडे इलाकों में जमने और पिघलने (Freeze-thaw cycle) के कारण होने वाले नुकसान से कंक्रीट को बचाता है। नोट: इससे कंक्रीट की सामर्थ्य (Strength) थोड़ी कम हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q102: IS 2180 के अनुसार, 'भारी ड्यूटी ईंटों' (Heavy Duty Bricks) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Minimum Compressive Strength) कितनी होनी चाहिए?
- A) 10.5 MPa
- B) 17.5 MPa
- ✅ C) 40.0 MPa (सही उत्तर)
- D) 50.0 MPa
💡 डिटेल Explanation:
हैवी ड्यूटी ईंटों का उपयोग पुलों (Bridges), पियर्स (Piers) और भारी मशीनरी की नींव में किया जाता है जहाँ बहुत अधिक भार आता है। इनकी न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य 40 N/mm2 (या 400 kg/cm2) होती है और इनका जल अवशोषण 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।
हैवी ड्यूटी ईंटों का उपयोग पुलों (Bridges), पियर्स (Piers) और भारी मशीनरी की नींव में किया जाता है जहाँ बहुत अधिक भार आता है। इनकी न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य 40 N/mm2 (या 400 kg/cm2) होती है और इनका जल अवशोषण 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।
📌 Exam Tags: UPSSSC JE 2016, RRB JE 2019, UKPSC JE
Q103: प्लाईवुड (Plywood) के निर्माण में परतों (Veneers) की संख्या हमेशा विषम (Odd numbers जैसे 3, 5, 7) क्यों रखी जाती है?
- A) इसे सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए
- ✅ B) सममिति (Symmetry) बनाए रखने और मुड़ने/सिकुड़ने (Warping) को रोकने के लिए (सही उत्तर)
- C) प्लाईवुड का वजन कम करने के लिए
- D) प्लाईवुड को काटने में आसानी के लिए
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड में बाहरी दोनों परतों (Faces) के रेशे (Grains) एक ही दिशा में होने चाहिए ताकि नमी या तापमान में बदलाव होने पर दोनों तरफ से समान खिंचाव (Tension) पड़े। यदि परतें सम (Even) संख्या में होंगी, तो एक तरफ की परत प्लाईवुड को अपनी ओर मोड़ने (Warp) की कोशिश करेगी। विषम संख्या (Odd number) सममिति (Symmetry) सुनिश्चित करती है।
प्लाईवुड में बाहरी दोनों परतों (Faces) के रेशे (Grains) एक ही दिशा में होने चाहिए ताकि नमी या तापमान में बदलाव होने पर दोनों तरफ से समान खिंचाव (Tension) पड़े। यदि परतें सम (Even) संख्या में होंगी, तो एक तरफ की परत प्लाईवुड को अपनी ओर मोड़ने (Warp) की कोशिश करेगी। विषम संख्या (Odd number) सममिति (Symmetry) सुनिश्चित करती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, DMRC JE 2017, MP Vyapam
Q104: पेंट में 'ड्रायर' (Drier / शोषक) के रूप में किस रसायन का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है?
- ✅ A) लिथार्ज (Litharge) (सही उत्तर)
- B) वाइट लेड (White Lead)
- C) तारपीन का तेल (Turpentine)
- D) अलसी का तेल (Linseed Oil)
💡 डिटेल Explanation:
ड्रायर (Driers) पेंट में इसलिए मिलाए जाते हैं ताकि पेंट हवा से ऑक्सीजन सोखकर जल्दी सूख (Oxidize) जाए। लिथार्ज (Litharge - Lead Monoxide), लेड एसीटेट और कोबाल्ट पेंट में उपयोग होने वाले सबसे आम ड्रायर हैं।
नोट: ड्रायर की मात्रा पेंट के कुल वजन के 8% से 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा पेंट बहुत कड़क होकर चटक (Crack) सकता है।
ड्रायर (Driers) पेंट में इसलिए मिलाए जाते हैं ताकि पेंट हवा से ऑक्सीजन सोखकर जल्दी सूख (Oxidize) जाए। लिथार्ज (Litharge - Lead Monoxide), लेड एसीटेट और कोबाल्ट पेंट में उपयोग होने वाले सबसे आम ड्रायर हैं।
नोट: ड्रायर की मात्रा पेंट के कुल वजन के 8% से 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा पेंट बहुत कड़क होकर चटक (Crack) सकता है।
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Q105: सड़क के 'वियरिंग कोर्स' (Wearing Course - सबसे ऊपरी सतह) के लिए उपयोग किए जाने वाले एग्रीगेट का 'लॉस एंजिल्स अपघर्षण मान' (Los Angeles Abrasion Value) कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 10%
- ✅ B) 30% (सही उत्तर)
- C) 45%
- D) 50%
💡 डिटेल Explanation:
लॉस एंजिल्स परीक्षण एग्रीगेट की कठोरता (घिसाव का प्रतिरोध / Hardness) मापता है। IRC (Indian Roads Congress) के अनुसार:
लॉस एंजिल्स परीक्षण एग्रीगेट की कठोरता (घिसाव का प्रतिरोध / Hardness) मापता है। IRC (Indian Roads Congress) के अनुसार:
- सड़क की सबसे ऊपरी सतह (Wearing Course / Bituminous Macadam) के लिए यह मान 30% से अधिक नहीं होना चाहिए।
- निचली सतहों (Base Course / WBM) के लिए यह मान 40% से 50% तक अनुमत है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 22 (Q106 - Q110)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, DMRC JE
Q106: कंक्रीट की बहुत कम सुकार्यता (Very Low Workability), जहाँ स्लंप मान लगभग शून्य (Zero Slump) होता है, उसे मापने के लिए सबसे उपयुक्त परीक्षण कौन सा है?
- A) स्लंप टेस्ट (Slump Test)
- B) कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट (Compacting Factor Test)
- ✅ C) वी-बी कंसिस्टोमीटर टेस्ट (Vee-Bee Consistometer Test) (सही उत्तर)
- D) फ्लो टेबल टेस्ट (Flow Table Test)
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट बहुत अधिक सूखी (Stiff) होती है (जैसे सड़क के पेवमेंट में), तो स्लंप टेस्ट कोई सही परिणाम नहीं देता (Zero Slump)। ऐसी 'वेरी लो' सुकार्यता वाली कंक्रीट के लिए वी-बी कंसिस्टोमीटर परीक्षण किया जाता है। इसमें कंक्रीट को कंपन (Vibration) द्वारा शंक्वाकार (Conical) से बेलनाकार (Cylindrical) आकार में बदलने में लगने वाले समय (Vee-Bee Seconds) को मापा जाता है।
जब कंक्रीट बहुत अधिक सूखी (Stiff) होती है (जैसे सड़क के पेवमेंट में), तो स्लंप टेस्ट कोई सही परिणाम नहीं देता (Zero Slump)। ऐसी 'वेरी लो' सुकार्यता वाली कंक्रीट के लिए वी-बी कंसिस्टोमीटर परीक्षण किया जाता है। इसमें कंक्रीट को कंपन (Vibration) द्वारा शंक्वाकार (Conical) से बेलनाकार (Cylindrical) आकार में बदलने में लगने वाले समय (Vee-Bee Seconds) को मापा जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPPCL JE 2019, MP Vyapam
Q107: ईंट बनाने वाली मिट्टी (Brick earth) में 'आयरन ऑक्साइड' (Iron Oxide) की 5% से 7% मात्रा का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) मिट्टी को प्लास्टिसिटी (लचीलापन) प्रदान करना
- ✅ B) पकाने के बाद ईंट को लाल (Red Cherry) रंग प्रदान करना (सही उत्तर)
- C) ईंट को सिकुड़ने और फटने से रोकना
- D) ईंट का वजन कम करना
💡 डिटेल Explanation:
आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) ईंटों में दो मुख्य कार्य करता है। पहला, यह चूने और सिलिका को पिघलने में मदद करता है। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण, ऑक्सीकरण (Oxidation) के बाद यह ईंट को उसका विशिष्ट लाल रंग (Red Cherry Color) प्रदान करता है। यदि आयरन ऑक्साइड की मात्रा बहुत अधिक हो जाए, तो ईंट का रंग गहरा नीला या काला (Dark blue or black) हो जाता है।
आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) ईंटों में दो मुख्य कार्य करता है। पहला, यह चूने और सिलिका को पिघलने में मदद करता है। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण, ऑक्सीकरण (Oxidation) के बाद यह ईंट को उसका विशिष्ट लाल रंग (Red Cherry Color) प्रदान करता है। यदि आयरन ऑक्साइड की मात्रा बहुत अधिक हो जाए, तो ईंट का रंग गहरा नीला या काला (Dark blue or black) हो जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2015, RRB JE 2019
Q108: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के बाज़ार में उपलब्ध विभिन्न ग्रेड जैसे 33 ग्रेड, 43 ग्रेड और 53 ग्रेड में यह संख्या (33, 43, 53) तकनीकी रूप से क्या दर्शाती है?
- A) 7 दिन की संपीडन सामर्थ्य (N/mm2 में)
- ✅ B) 28 दिन की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (N/mm2 में) (सही उत्तर)
- C) सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity)
- D) सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) का प्रतिशत
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS Codes) के अनुसार, सीमेंट के ग्रेड का नंबर उसकी 28 दिन की क्योरिंग (तलाई) के बाद न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength) को दर्शाता है, जिसे N/mm2 या MPa में मापा जाता है। उदाहरण के लिए, 43 ग्रेड OPC का मतलब है कि 28 दिन बाद इस सीमेंट मोर्टार के क्यूब की सामर्थ्य 43 N/mm2 से कम नहीं होनी चाहिए।
भारतीय मानक (IS Codes) के अनुसार, सीमेंट के ग्रेड का नंबर उसकी 28 दिन की क्योरिंग (तलाई) के बाद न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength) को दर्शाता है, जिसे N/mm2 या MPa में मापा जाता है। उदाहरण के लिए, 43 ग्रेड OPC का मतलब है कि 28 दिन बाद इस सीमेंट मोर्टार के क्यूब की सामर्थ्य 43 N/mm2 से कम नहीं होनी चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, LMRC JE
Q109: लकड़ी (Timber) की अधिकतम सामर्थ्य (Maximum Strength) किस दिशा में होती है?
- A) रेशों के लंबवत दिशा में (Perpendicular to grains)
- ✅ B) रेशों के समानांतर दिशा में (Parallel to grains) (सही उत्तर)
- C) रेशों से 45 डिग्री के कोण पर
- D) सभी दिशाओं में समान होती है
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी एक अनिसोट्रोपिक (Anisotropic) सामग्री है, जिसका अर्थ है कि इसकी सामर्थ्य अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग होती है। लकड़ी की संपीडन और तनन दोनों ही सामर्थ्य रेशों के समानांतर (Parallel to the grains) दिशा में अधिकतम होती है। यही कारण है कि बीम या कॉलम बनाते समय भार हमेशा रेशों के समानांतर लगाया जाता है।
लकड़ी एक अनिसोट्रोपिक (Anisotropic) सामग्री है, जिसका अर्थ है कि इसकी सामर्थ्य अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग होती है। लकड़ी की संपीडन और तनन दोनों ही सामर्थ्य रेशों के समानांतर (Parallel to the grains) दिशा में अधिकतम होती है। यही कारण है कि बीम या कॉलम बनाते समय भार हमेशा रेशों के समानांतर लगाया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UKPSC JE, RRB JE
Q110: औजार और मशीनरी के पुर्जे बनाने के लिए उपयोग होने वाले 'उच्च कार्बन इस्पात' (High Carbon Steel) में कार्बन की मात्रा सामान्यतः कितने प्रतिशत होती है?
- A) 0.05% से 0.15%
- B) 0.15% से 0.30%
- C) 0.30% से 0.60%
- ✅ D) 0.60% से 1.50% (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
स्टील में कार्बन की मात्रा उसकी कठोरता (Hardness) निर्धारित करती है:
स्टील में कार्बन की मात्रा उसकी कठोरता (Hardness) निर्धारित करती है:
- Low Carbon / Mild Steel: 0.15% से 0.30% (निर्माण कार्यों में)
- Medium Carbon Steel: 0.30% से 0.60% (रेल की पटरियों में)
- High Carbon / Hard Steel: 0.60% से 1.50% (काटने वाले औजार और स्प्रिंग बनाने में)
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 23 (Q111 - Q115)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q111: कंक्रीट को ऊंचाई से गिराने पर होने वाले 'सेग्रीगेशन' (Segregation) को रोकने के लिए, भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार कंक्रीट गिराने की अधिकतम ऊंचाई (Maximum height of free fall) कितनी अनुमत है?
- A) 0.5 मीटर
- B) 1.0 मीटर
- ✅ C) 1.5 मीटर (सही उत्तर)
- D) 2.0 मीटर
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से गिराया जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण भारी कण (गिट्टी/Coarse Aggregates) हल्के कणों (सीमेंट पेस्ट) से अलग हो जाते हैं, जिसे पृथक्करण या सेग्रीगेशन कहते हैं। इसे रोकने के लिए IS 456:2000 यह निर्देश देता है कि कंक्रीट को 1.5 मीटर से अधिक ऊंचाई से स्वतंत्र रूप से नहीं गिराया जाना चाहिए।
जब कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से गिराया जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण भारी कण (गिट्टी/Coarse Aggregates) हल्के कणों (सीमेंट पेस्ट) से अलग हो जाते हैं, जिसे पृथक्करण या सेग्रीगेशन कहते हैं। इसे रोकने के लिए IS 456:2000 यह निर्देश देता है कि कंक्रीट को 1.5 मीटर से अधिक ऊंचाई से स्वतंत्र रूप से नहीं गिराया जाना चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, MP Vyapam 2016
Q112: खेल के सामान (Sports goods) जैसे क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, टेनिस रैकेट आदि बनाने के लिए कौन सी लकड़ी (Timber) सबसे उपयुक्त मानी जाती है?
- A) साल (Sal)
- B) सागौन (Teak)
- ✅ C) शहतूत (Mulberry) (सही उत्तर)
- D) देवदार (Deodar)
💡 डिटेल Explanation:
खेल के सामानों में ऐसे झटके (Impact) सहने की क्षमता होनी चाहिए जो टूटे बिना हल्कापन और लचीलापन (Flexibility) बनाए रखें। शहतूत (Mulberry) की लकड़ी में यह गुण सबसे अच्छा होता है, इसलिए इसका उपयोग खेल का सामान बनाने में बहुत अधिक होता है। क्रिकेट बैट के लिए 'विलो' (Willow) लकड़ी भी बहुत प्रसिद्ध है।
खेल के सामानों में ऐसे झटके (Impact) सहने की क्षमता होनी चाहिए जो टूटे बिना हल्कापन और लचीलापन (Flexibility) बनाए रखें। शहतूत (Mulberry) की लकड़ी में यह गुण सबसे अच्छा होता है, इसलिए इसका उपयोग खेल का सामान बनाने में बहुत अधिक होता है। क्रिकेट बैट के लिए 'विलो' (Willow) लकड़ी भी बहुत प्रसिद्ध है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, RRB JE 2015
Q113: भट्ठे में पकाई जा रही गर्म ईंटों पर अचानक बारिश की बूंदें गिरने से ईंटों के आकार के विकृत (Deformed) होने के दोष को क्या कहा जाता है?
- ✅ A) चफ्स (Chuffs) (सही उत्तर)
- B) ब्लोटिंग (Bloating)
- C) नोड्यूल्स (Nodules)
- D) लैमिनेशन (Lamination)
💡 डिटेल Explanation:
पकाई जा रही ईंटें बहुत गर्म होती हैं। जब अचानक इन पर बारिश का ठंडा पानी गिरता है, तो ईंट की सतह तेजी से सिकुड़ती है, जिससे ईंट मुड़ जाती है और उसका आकार विकृत (Deform) हो जाता है। ईंटों के इस दोष को चफ्स (Chuffs) कहा जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: ब्लोटिंग (Bloating) ईंट में अतिरिक्त सल्फर या कार्बनिक पदार्थ के कारण फूलने का दोष है।
पकाई जा रही ईंटें बहुत गर्म होती हैं। जब अचानक इन पर बारिश का ठंडा पानी गिरता है, तो ईंट की सतह तेजी से सिकुड़ती है, जिससे ईंट मुड़ जाती है और उसका आकार विकृत (Deform) हो जाता है। ईंटों के इस दोष को चफ्स (Chuffs) कहा जाता है।
अतिरिक्त फैक्ट: ब्लोटिंग (Bloating) ईंट में अतिरिक्त सल्फर या कार्बनिक पदार्थ के कारण फूलने का दोष है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, LMRC JE 2018, UKPSC JE
Q114: भवन निर्माण में उपयोग होने वाला 'स्नोसेम' (Snowcem) बाजार में उपलब्ध किस प्रकार के पेंट का एक बहुत लोकप्रिय उदाहरण है?
- A) एल्युमिनियम पेंट (Aluminium Paint)
- ✅ B) वाटरप्रूफ सीमेंट पेंट (Waterproof Cement Paint) (सही उत्तर)
- C) ऑयल पेंट (Oil Paint)
- D) सेल्युलोज पेंट (Cellulose Paint)
💡 डिटेल Explanation:
स्नोसेम (Snowcem) एक बहुत ही प्रसिद्ध ब्रांड नाम है जो सीमेंट पेंट (Cement Paint) का उदाहरण है। यह सफेद सीमेंट (White cement), रंगद्रव्य (Pigments) और पानी को विकर्षित करने वाले (Water-repellent) रसायनों का मिश्रण होता है। इसे बाहरी दीवारों (Exterior walls) पर मौसम के प्रभाव और सीलन से बचाने के लिए लगाया जाता है।
स्नोसेम (Snowcem) एक बहुत ही प्रसिद्ध ब्रांड नाम है जो सीमेंट पेंट (Cement Paint) का उदाहरण है। यह सफेद सीमेंट (White cement), रंगद्रव्य (Pigments) और पानी को विकर्षित करने वाले (Water-repellent) रसायनों का मिश्रण होता है। इसे बाहरी दीवारों (Exterior walls) पर मौसम के प्रभाव और सीलन से बचाने के लिए लगाया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE 2019
Q115: कंक्रीट के मिश्रण में पानी की मात्रा (Water-Cement Ratio) बढ़ाने पर, कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) और संपीडन सामर्थ्य (Compressive strength) पर क्रमशः क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) दोनों बढ़ती हैं (Both increase)
- B) दोनों घटती हैं (Both decrease)
- ✅ C) सुकार्यता बढ़ती है, लेकिन सामर्थ्य घटती है (Workability increases, Strength decreases) (सही उत्तर)
- D) सुकार्यता घटती है, लेकिन सामर्थ्य बढ़ती है
💡 डिटेल Explanation:
पानी कंक्रीट में एक स्नेहक (Lubricant) का काम करता है। जब हम पानी मिलाते हैं, तो कंक्रीट अधिक तरल हो जाती है और उसके साथ काम करना आसान हो जाता है, अर्थात सुकार्यता (Workability) बढ़ जाती है। लेकिन, डफ एब्रम्स के नियम (Abram's Law) के अनुसार, जल-सीमेंट अनुपात बढ़ने पर कंक्रीट अधिक छिद्रपूर्ण (Porous) हो जाती है, जिससे उसकी सामर्थ्य (Strength) कम हो जाती है।
पानी कंक्रीट में एक स्नेहक (Lubricant) का काम करता है। जब हम पानी मिलाते हैं, तो कंक्रीट अधिक तरल हो जाती है और उसके साथ काम करना आसान हो जाता है, अर्थात सुकार्यता (Workability) बढ़ जाती है। लेकिन, डफ एब्रम्स के नियम (Abram's Law) के अनुसार, जल-सीमेंट अनुपात बढ़ने पर कंक्रीट अधिक छिद्रपूर्ण (Porous) हो जाती है, जिससे उसकी सामर्थ्य (Strength) कम हो जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 24 (Q116 - Q120)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2016, MP Vyapam 2016
Q116: सीमेंट के विशिष्ट सतही क्षेत्रफल (Specific Surface Area) की गणना करके उसकी 'सूक्ष्मता' (Fineness) मापने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) ली-चैटेलियर उपकरण (Le-Chatelier apparatus)
- B) विकाट उपकरण (Vicat apparatus)
- ✅ C) ब्लेन वायु पारगम्यता उपकरण (Blaine's Air Permeability apparatus) (सही उत्तर)
- D) ऑटोक्लेव (Autoclave)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) मुख्य रूप से दो विधियों से मापी जाती है: 1) छलनी विधि (Sieve Analysis) जो कि बहुत सटीक नहीं है। 2) ब्लेन वायु पारगम्यता विधि (Blaine's Method) या वैगनर टर्बिडमीटर (Wagner's Turbidimeter), जो सीमेंट के विशिष्ट सतही क्षेत्रफल (cm²/gm) को मापती है। यह विधि बहुत अधिक सटीक और मानक मानी जाती है।
सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) मुख्य रूप से दो विधियों से मापी जाती है: 1) छलनी विधि (Sieve Analysis) जो कि बहुत सटीक नहीं है। 2) ब्लेन वायु पारगम्यता विधि (Blaine's Method) या वैगनर टर्बिडमीटर (Wagner's Turbidimeter), जो सीमेंट के विशिष्ट सतही क्षेत्रफल (cm²/gm) को मापती है। यह विधि बहुत अधिक सटीक और मानक मानी जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2018, UKPSC JE, UPPCL JE
Q117: लकड़ी के सूखने (Seasoning) के दौरान, यदि लकड़ी का तख्ता (Board) अपने किनारों के अनुदिश (Along the edges) लंबाई में मुड़कर वक्र (Curved) हो जाए, तो इस दोष को क्या कहा जाता है?
- A) कप (Cup)
- B) बो (Bow)
- ✅ C) स्प्रिंग (Spring) (सही उत्तर)
- D) ट्विस्ट (Twist)
💡 डिटेल Explanation:
सीज़निंग के दौरान लकड़ी में कई प्रकार के घुमाव (Warping defects) आ सकते हैं:
सीज़निंग के दौरान लकड़ी में कई प्रकार के घुमाव (Warping defects) आ सकते हैं:
- स्प्रिंग (Spring): लकड़ी के किनारे (Edge) का उसकी लंबाई के समानांतर मुड़ जाना।
- बो (Bow): लकड़ी के फलक (Face) का लंबाई में मुड़ जाना।
- कप (Cup): लकड़ी की चौड़ाई (Width) के अनुदिश मुड़ जाना।
- ट्विस्ट (Twist): जब लकड़ी सर्पिल (Spiral) आकार में ऐंठ जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, RRB JE 2019, DMRC JE
Q118: ईंट बनाने वाली मिट्टी (Brick earth) में 'एल्युमिना' (Alumina - Al&sub2;O&sub3;) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) ईंट को पकाने पर लाल रंग देना
- B) सिलिका को पिघलने में मदद करना
- ✅ C) मिट्टी को प्लास्टिसिटी (लचीलापन) प्रदान करना ताकि उसे आसानी से ढाला जा सके (सही उत्तर)
- D) ईंट को सूखने पर सिकुड़ने से रोकना
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में एल्युमिना की मात्रा 20% से 30% होनी चाहिए। इसका मुख्य काम मिट्टी को प्लास्टिसिटी (Plasticity) प्रदान करना है, जिससे मिट्टी को मनचाहे आकार (सांचे) में आसानी से ढाला (Mould) जा सके।
नोट: यदि एल्युमिना की मात्रा बहुत अधिक हो जाए, तो ईंटें सूखने पर बहुत ज्यादा सिकुड़ (Shrink) जाती हैं और उनमें दरारें आ जाती हैं।
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में एल्युमिना की मात्रा 20% से 30% होनी चाहिए। इसका मुख्य काम मिट्टी को प्लास्टिसिटी (Plasticity) प्रदान करना है, जिससे मिट्टी को मनचाहे आकार (सांचे) में आसानी से ढाला (Mould) जा सके।
नोट: यदि एल्युमिना की मात्रा बहुत अधिक हो जाए, तो ईंटें सूखने पर बहुत ज्यादा सिकुड़ (Shrink) जाती हैं और उनमें दरारें आ जाती हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPPCL JE 2018, UPSSSC JE 2015
Q119: वार्निश (Varnish) मुख्य रूप से किन दो घटकों (Components) का एक पारदर्शी या अर्ध-पारदर्शी घोल (Solution) होता है?
- ✅ A) रेज़िन (Resin) और विलायक (Solvent/Oil) (सही उत्तर)
- B) चॉक पाउडर और पानी
- C) वाइट लेड और तारपीन का तेल
- D) सीमेंट और अलसी का तेल
💡 डिटेल Explanation:
पेंट के विपरीत, वार्निश में कोई रंगद्रव्य (Pigment) नहीं होता, इसलिए यह पारदर्शी होता है। वार्निश मुख्य रूप से रेज़िन (Resinous substances जैसे कोपाल, लाख/Shellac, एम्बर) को किसी उपयुक्त विलायक (जैसे अलसी का तेल, स्पिरिट या तारपीन) में घोलकर बनाया जाता है। इसका उपयोग लकड़ी की सतह को चमकदार और मौसम से सुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है।
पेंट के विपरीत, वार्निश में कोई रंगद्रव्य (Pigment) नहीं होता, इसलिए यह पारदर्शी होता है। वार्निश मुख्य रूप से रेज़िन (Resinous substances जैसे कोपाल, लाख/Shellac, एम्बर) को किसी उपयुक्त विलायक (जैसे अलसी का तेल, स्पिरिट या तारपीन) में घोलकर बनाया जाता है। इसका उपयोग लकड़ी की सतह को चमकदार और मौसम से सुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है।
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Q120: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) में 'ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट' (C&sub3;A) की मात्रा अधिक होने पर कंक्रीट पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
- ✅ A) कंक्रीट की 'सल्फेट के हमले' (Sulphate attack) के प्रति संवेदनशीलता बहुत बढ़ जाती है (सही उत्तर)
- B) हाइड्रेशन की ऊष्मा (Heat of hydration) कम हो जाती है
- C) कंक्रीट की अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength) बढ़ जाती है
- D) कंक्रीट का जमाव काल (Setting time) बढ़ जाता है
💡 डिटेल Explanation:
C&sub3;A (Celite) पानी के साथ बहुत तेज़ी से प्रतिक्रिया करता है और फ्लैश सेट (Flash set) का कारण बनता है। इसकी सबसे बड़ी खामी यह है कि यह सल्फेट्स (Sulphates) के साथ प्रतिक्रिया करके कंक्रीट में भारी विस्तार (Volume expansion) और दरारें पैदा करता है। इसलिए सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट (SRC) में C&sub3;A की मात्रा जानबूझकर 5% से कम रखी जाती है।
C&sub3;A (Celite) पानी के साथ बहुत तेज़ी से प्रतिक्रिया करता है और फ्लैश सेट (Flash set) का कारण बनता है। इसकी सबसे बड़ी खामी यह है कि यह सल्फेट्स (Sulphates) के साथ प्रतिक्रिया करके कंक्रीट में भारी विस्तार (Volume expansion) और दरारें पैदा करता है। इसलिए सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट (SRC) में C&sub3;A की मात्रा जानबूझकर 5% से कम रखी जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 25 (Q121 - Q125)
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Q121: लकड़ी (Timber) में 'वेट रॉट' (Wet Rot) नामक दोष मुख्य रूप से किस परिस्थिति के कारण उत्पन्न होता है?
- A) हवा के संचार (Ventilation) की पूर्ण कमी के कारण
- ✅ B) लकड़ी के एकांतर रूप से गीला और सूखा (Alternate wet and dry) होने के कारण (सही उत्तर)
- C) दीमक (Termites) के लगातार हमले के कारण
- D) बहुत उच्च तापमान (High temperature) के कारण
💡 डिटेल Explanation:
'वेट रॉट' (Wet Rot) कुछ विशेष प्रकार के कवक (Fungi) के कारण होता है। यह दोष मुख्य रूप से उन लकड़ियों में पाया जाता है जो बार-बार गीली और सूखी (Alternate wetting and drying) होती रहती हैं (जैसे मिट्टी के संपर्क में लगे लकड़ी के खंभे)।
कंफ्यूजन पॉइंट: 'ड्राई रॉट' (Dry Rot) उस लकड़ी में होता है जहाँ हवा का आवागमन (Ventilation) बिल्कुल नहीं होता और नमी फंसी रह जाती है।
'वेट रॉट' (Wet Rot) कुछ विशेष प्रकार के कवक (Fungi) के कारण होता है। यह दोष मुख्य रूप से उन लकड़ियों में पाया जाता है जो बार-बार गीली और सूखी (Alternate wetting and drying) होती रहती हैं (जैसे मिट्टी के संपर्क में लगे लकड़ी के खंभे)।
कंफ्यूजन पॉइंट: 'ड्राई रॉट' (Dry Rot) उस लकड़ी में होता है जहाँ हवा का आवागमन (Ventilation) बिल्कुल नहीं होता और नमी फंसी रह जाती है।
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Q122: भवन निर्माण में खोखली ईंटों (Hollow Bricks / Cavity Bricks) का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
- A) दीवार की भार सहने की क्षमता (Load bearing capacity) बढ़ाने के लिए
- ✅ B) ऊष्मीय और ध्वनि रोधन (Thermal and Sound Insulation) प्रदान करने के लिए (सही उत्तर)
- C) नींव (Foundation) को जलरोधक बनाने के लिए
- D) भूकंप के झटके सहने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
खोखली ईंटों के अंदर हवा फंसी होती है। हवा ऊष्मा (Heat) और ध्वनि (Sound) का कुचालक (Bad conductor) होती है। इसलिए, खोखली ईंटों से बनी दीवारें कमरे को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रखती हैं, तथा बाहर के शोर को अंदर आने से रोकती हैं। ये वजन में भी हल्की होती हैं।
खोखली ईंटों के अंदर हवा फंसी होती है। हवा ऊष्मा (Heat) और ध्वनि (Sound) का कुचालक (Bad conductor) होती है। इसलिए, खोखली ईंटों से बनी दीवारें कमरे को गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रखती हैं, तथा बाहर के शोर को अंदर आने से रोकती हैं। ये वजन में भी हल्की होती हैं।
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Q123: कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) मापने के लिए 'कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट' (Compacting Factor Test) का उपयोग किया जाता है। 'मध्यम सुकार्यता' (Medium Workability) के लिए इस फैक्टर का मान सामान्यतः कितना होता है?
- A) 0.70 से 0.75
- B) 0.78 से 0.85
- ✅ C) 0.85 से 0.92 (सही उत्तर)
- D) 0.95 से 1.00
💡 डिटेल Explanation:
कॉम्पैक्टिंग फैक्टर (C.F.) आंशिक रूप से कॉम्पैक्ट की गई कंक्रीट के वजन और पूरी तरह से कॉम्पैक्ट की गई कंक्रीट के वजन का अनुपात होता है।
कॉम्पैक्टिंग फैक्टर (C.F.) आंशिक रूप से कॉम्पैक्ट की गई कंक्रीट के वजन और पूरी तरह से कॉम्पैक्ट की गई कंक्रीट के वजन का अनुपात होता है।
- Low Workability: C.F. = 0.78 - 0.85 (स्लंप: 25-50 mm)
- Medium Workability: C.F. = 0.85 - 0.92 (स्लंप: 50-100 mm)
- High Workability: C.F. > 0.92 (स्लंप: 100-150 mm)
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, DMRC JE, LMRC JE
Q124: इस्पात (Steel) में कार्बन की मात्रा (Carbon content) बढ़ाने पर उसके यांत्रिक गुणों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) सामर्थ्य और तन्यता दोनों बढ़ जाती हैं
- ✅ B) सामर्थ्य और कठोरता बढ़ती है, लेकिन तन्यता (Ductility) कम हो जाती है (सही उत्तर)
- C) सामर्थ्य कम हो जाती है और तन्यता बढ़ जाती है
- D) सामर्थ्य और कठोरता दोनों कम हो जाती हैं
💡 डिटेल Explanation:
स्टील में कार्बन एक बहुत ही महत्वपूर्ण मिश्रधातु तत्व (Alloying element) है। जैसे-जैसे हम स्टील में कार्बन की मात्रा बढ़ाते हैं, उसकी अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength), कठोरता (Hardness) और भंगुरता (Brittleness) बढ़ जाती है। लेकिन साथ ही उसकी तन्यता (Ductility - तार में खिंचने की क्षमता) और आघातवर्ध्यता (Malleability) कम हो जाती है।
स्टील में कार्बन एक बहुत ही महत्वपूर्ण मिश्रधातु तत्व (Alloying element) है। जैसे-जैसे हम स्टील में कार्बन की मात्रा बढ़ाते हैं, उसकी अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength), कठोरता (Hardness) और भंगुरता (Brittleness) बढ़ जाती है। लेकिन साथ ही उसकी तन्यता (Ductility - तार में खिंचने की क्षमता) और आघातवर्ध्यता (Malleability) कम हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2018, UKPSC JE
Q125: लोहे और स्टील की सतहों को जंग (Corrosion) से बचाने के लिए उन पर लगाए जाने वाले 'प्राइमर' (Primer) में बेस के रूप में मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?
- A) वाइट लेड (White Lead)
- B) जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide)
- ✅ C) रेड लेड (Red Lead) (सही उत्तर)
- D) टाइटेनियम वाइट (Titanium White)
💡 डिटेल Explanation:
रेड लेड (Red Lead - Pb3O4) का उपयोग विशेष रूप से लोहे (Iron) और संरचनात्मक इस्पात (Structural steel) की सतहों पर प्राइमर कोट (Primer coat) के रूप में किया जाता है। यह धातु की सतह पर बहुत अच्छी तरह से चिपक जाता है और जंग (Rusting) को रोकने में अत्यधिक प्रभावी होता है। (जबकि लकड़ी के लिए वाइट लेड का उपयोग किया जाता है)।
रेड लेड (Red Lead - Pb3O4) का उपयोग विशेष रूप से लोहे (Iron) और संरचनात्मक इस्पात (Structural steel) की सतहों पर प्राइमर कोट (Primer coat) के रूप में किया जाता है। यह धातु की सतह पर बहुत अच्छी तरह से चिपक जाता है और जंग (Rusting) को रोकने में अत्यधिक प्रभावी होता है। (जबकि लकड़ी के लिए वाइट लेड का उपयोग किया जाता है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 26 (Q126 - Q130)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2016, UKPSC JE
Q126: लकड़ी के सूखने (Seasoning) के दौरान, यदि लकड़ी की बाहरी सतह अंदरूनी सतह की तुलना में अधिक तेज़ी से सूखती है और सिकुड़ती है, तो उत्पन्न होने वाले दोष (Defect) को क्या कहते हैं?
- A) हनीकॉम्बिंग (Honeycombing)
- ✅ B) केस हार्डनिंग (Case Hardening) (सही उत्तर)
- C) हार्ट शेक (Heart Shake)
- D) स्प्लिटिंग (Splitting)
💡 डिटेल Explanation:
सीज़निंग के दौरान यदि तापमान बहुत अधिक हो और आर्द्रता बहुत कम हो, तो लकड़ी की बाहरी सतह बहुत तेज़ी से सूख कर कठोर (Hard) हो जाती है, जबकि अंदर का हिस्सा नम (Damp) ही रह जाता है। इस दोष को केस हार्डनिंग (Case Hardening) कहते हैं। इससे अंदर की नमी बाहर नहीं आ पाती है और बाद में अंदर दरारें (Honeycombing) पड़ सकती हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2018, UPPCL JE 2019, MP Vyapam
Q127: विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का उपयोग करके सीमेंट का 'मानक गाढ़ापन' (Standard Consistency) ज्ञात करते समय, प्लंजर (Plunger) सांचे के 'निचले सिरे' (Bottom of the mould) से कितनी ऊंचाई पर रुकना चाहिए?
- A) 10 - 15 mm
- B) 20 - 25 mm
- C) 33 - 35 mm
- ✅ D) 5 - 7 mm (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
मानक गाढ़ापन (Standard Consistency - P) वह पानी की मात्रा है जो सीमेंट पेस्ट को इतना गाढ़ा बना दे कि विकाट प्लंजर (10 mm व्यास) सांचे के ऊपरी सिरे (Top) से 33 mm से 35 mm तक धंस जाए। चूँकि विकाट मोल्ड की कुल ऊंचाई 40 mm होती है, इसका मतलब है कि प्लंजर सांचे के निचले सिरे (Bottom) से 5 mm से 7 mm ऊपर रुकना चाहिए। परीक्षा में 'Top' और 'Bottom' शब्द को ध्यान से पढ़ें।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q128: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में सामान्यतः मोर्टार (मसाले) के जोड़ की मोटाई (Thickness of mortar joint) कितनी रखी जाती है?
- A) 5 mm
- ✅ B) 10 mm (सही उत्तर)
- C) 15 mm
- D) 20 mm
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की चिनाई में मोर्टार जॉइंट की मानक मोटाई 10 mm (या 1 cm) मानी जाती है। इसी कारण से 19 × 9 × 9 cm की मॉड्यूलर ईंट का 'नामित आकार' (Nominal size - मोर्टार सहित आकार) 20 × 10 × 10 cm हो जाता है। बहुत अधिक मोटा जोड़ रखने से दीवार की सामर्थ्य कम हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, LMRC JE 2018
Q129: IS 456 के अनुसार, कंक्रीट बनाने और उसकी तराई (Curing) के लिए उपयोग किए जाने वाले पानी का pH मान (pH value) किससे कम नहीं होना चाहिए?
- A) 4.5
- ✅ B) 6.0 (सही उत्तर)
- C) 7.0
- D) 8.5
💡 डिटेल Explanation:
निर्माण कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले पानी में बहुत अधिक अम्लीयता (Acidity) या क्षारीयता (Alkalinity) नहीं होनी चाहिए। IS 456 स्पष्ट रूप से बताता है कि कंक्रीट मिश्रण या तराई (Curing) के लिए उपयोग होने वाले पानी का pH मान 6.0 से कम नहीं होना चाहिए। अम्लीय पानी कंक्रीट के अंदर मौजूद स्टील (Saria) में जंग (Corrosion) लगा सकता है और कंक्रीट की सामर्थ्य को कम कर सकता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, RRB JE
Q130: 'मोहस कठोरता पैमाने' (Mohs scale of hardness) पर किस खनिज (Mineral) की कठोरता सबसे अधिक (10) होती है?
- A) क्वार्ट्ज (Quartz)
- B) पुखराज (Topaz)
- C) कोरंडम (Corundum)
- ✅ D) हीरा (Diamond) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
मोहस पैमाना (Mohs Scale) खनिजों की खरोंच प्रतिरोध (Scratch resistance) को 1 से 10 तक मापता है।
- सबसे मुलायम: टैल्क (Talc) - 1
- क्वार्ट्ज (Quartz): 7
- पुखराज (Topaz): 8
- कोरंडम (Corundum): 9
- सबसे कठोर: हीरा (Diamond) - 10
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 27 (Q131 - Q135)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q131: 1 बैग साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (जिसका वजन 50 kg होता है) का आयतन (Volume) सामान्यतः कितना होता है?
- A) 0.0147 m3
- B) 0.0247 m3
- ✅ C) 0.0347 m3 (सही उत्तर)
- D) 0.0447 m3
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का थोक घनत्व (Bulk Density) 1440 kg/m3 माना जाता है।
चूंकि 1 बैग सीमेंट का वजन = 50 kg होता है।
आयतन (Volume) = द्रव्यमान / घनत्व = 50 / 1440 = 0.0347 m3।
इसे लीटर में बदलने पर यह लगभग 34.7 लीटर होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, RRB JE 2019
Q132: जो ईंटें भट्ठे में बहुत अधिक पक जाती हैं (Over-burnt bricks) और जिनका आकार विकृत (Deformed) हो जाता है, उन्हें किस नाम से जाना जाता है?
- A) पिल्ला ईंटें (Pila bricks)
- ✅ B) झामा ईंटें (Jhama bricks) (सही उत्तर)
- C) बुलनोज़ ईंटें (Bullnose bricks)
- D) स्क्विंट ईंटें (Squint bricks)
💡 डिटेल Explanation:
भट्ठे में अत्यधिक तापमान के कारण जो ईंटें पिघलकर अपना आयताकार स्वरूप खो देती हैं, उन्हें झामा ईंटें (Jhama Bricks) कहा जाता है। ये ईंटें बहुत कठोर (Hard) और गहरे रंग की होती हैं। इनका उपयोग चिनाई (Masonry) में नहीं किया जा सकता, इसलिए इन्हें तोड़कर सड़क निर्माण या नींव में गिट्टी (Aggregate/Ballast) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2016, UKPSC JE
Q133: कंक्रीट में सुदृढीकरण (Reinforcement) के रूप में मुख्य रूप से इस्पात (Steel) का ही उपयोग क्यों किया जाता है?
- A) क्योंकि यह एल्युमिनियम और तांबे से सस्ता होता है
- ✅ B) क्योंकि कंक्रीट और स्टील का तापीय विस्तार गुणांक (Coefficient of thermal expansion) लगभग समान होता है (सही उत्तर)
- C) क्योंकि स्टील में कभी जंग नहीं लगता
- D) क्योंकि यह कंक्रीट का कुल वजन कम करता है
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट और स्टील दोनों का तापीय विस्तार गुणांक (Coefficient of thermal expansion) लगभग समान होता है (लगभग 12 × 10-6 /°C)। इसका फायदा यह होता है कि मौसम के तापमान में बदलाव (सर्दी/गर्मी) होने पर कंक्रीट और स्टील दोनों एक ही दर से फैलते और सिकुड़ते हैं। इससे उनके बीच की पकड़ (Bond) कभी नहीं टूटती और दरारें नहीं आतीं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, DMRC JE 2017, MP Vyapam
Q134: पेंट (Paint) में 'तारपीन के तेल' (Turpentine Oil) का उपयोग किस घटक के रूप में किया जाता है?
- A) बेस (Base)
- B) बाइंडर / वाहक (Vehicle)
- C) ड्रायर (Drier)
- ✅ D) थिनर / विलायक (Thinner / Solvent) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
तारपीन का तेल (Turpentine) एक बहुत ही प्रसिद्ध थिनर (Thinner) है। यह पेंट की श्यानता (Viscosity / गाढ़ापन) को कम करके उसे पतला करता है ताकि पेंट को ब्रश या रोलर से आसानी से सतह पर फैलाया जा सके। पेंट करने के बाद यह हवा में वाष्पित (Evaporate) हो जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPSSSC JE 2018, LMRC JE
Q135: भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, सादे कंक्रीट (PCC) और प्रबलित कंक्रीट (RCC) का इकाई भार (Unit weight) क्रमशः कितना माना जाता है?
- A) 2200 kg/m3 और 2400 kg/m3
- ✅ B) 2400 kg/m3 और 2500 kg/m3 (सही उत्तर)
- C) 2500 kg/m3 और 2800 kg/m3
- D) 2000 kg/m3 और 2200 kg/m3
💡 डिटेल Explanation:
संरचनाओं का खुद का भार (Dead Load) निकालने के लिए कंक्रीट का घनत्व पता होना आवश्यक है:
- PCC (Plain Cement Concrete): इसमें स्टील नहीं होता, इसका घनत्व 2400 kg/m3 (या 24 kN/m3) होता है।
- RCC (Reinforced Cement Concrete): इसमें स्टील (लोहा) मिला होता है, जिससे इसका घनत्व थोड़ा बढ़कर 2500 kg/m3 (या 25 kN/m3) हो जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 28 (Q136 - Q140)
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q136: भारतीय मानक (IS 269) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) कम से कम कितना होना चाहिए?
- A) 10 मिनट
- ✅ B) 30 मिनट (सही उत्तर)
- C) 60 मिनट
- D) 10 घंटे
💡 डिटेल Explanation:
प्रारंभिक जमाव काल वह समय है जिसके बाद सीमेंट अपनी प्लास्टिसिटी (लचीलापन) खोना शुरू कर देता है। OPC (Ordinary Portland Cement) के लिए यह समय 30 मिनट से कम नहीं होना चाहिए, ताकि कंक्रीट को मिलाने, ले जाने और बिछाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इसका 'अंतिम जमाव काल' (Final Setting Time) 10 घंटे (600 मिनट) से अधिक नहीं होना चाहिए।
प्रारंभिक जमाव काल वह समय है जिसके बाद सीमेंट अपनी प्लास्टिसिटी (लचीलापन) खोना शुरू कर देता है। OPC (Ordinary Portland Cement) के लिए यह समय 30 मिनट से कम नहीं होना चाहिए, ताकि कंक्रीट को मिलाने, ले जाने और बिछाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इसका 'अंतिम जमाव काल' (Final Setting Time) 10 घंटे (600 मिनट) से अधिक नहीं होना चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, UPPCL JE 2019, MP Vyapam
Q137: प्राकृतिक लकड़ी (Natural Timber) की तुलना में 'प्लाईवुड' (Plywood) का सबसे बड़ा तकनीकी लाभ क्या है?
- A) यह प्राकृतिक लकड़ी से बहुत सस्ता होता है
- B) यह पूरी तरह से अग्निरोधक (Fireproof) होता है
- ✅ C) इसमें सभी दिशाओं में समान तनन सामर्थ्य (Equal tensile strength) होती है (सही उत्तर)
- D) इसका वजन बहुत कम होता है
💡 डिटेल Explanation:
प्राकृतिक लकड़ी केवल अपने रेशों (Grains) के समानांतर दिशा में मजबूत होती है। लेकिन प्लाईवुड बनाते समय विनियर (परतों) को एक-दूसरे के समकोण (90°) पर चिपकाया जाता है। इस क्रॉस-बैंडिंग के कारण प्लाईवुड एक समदैशिक (Isotropic) सामग्री बन जाता है, जिसमें लंबाई और चौड़ाई दोनों दिशाओं में लगभग समान सामर्थ्य होती है।
प्राकृतिक लकड़ी केवल अपने रेशों (Grains) के समानांतर दिशा में मजबूत होती है। लेकिन प्लाईवुड बनाते समय विनियर (परतों) को एक-दूसरे के समकोण (90°) पर चिपकाया जाता है। इस क्रॉस-बैंडिंग के कारण प्लाईवुड एक समदैशिक (Isotropic) सामग्री बन जाता है, जिसमें लंबाई और चौड़ाई दोनों दिशाओं में लगभग समान सामर्थ्य होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2018, LMRC JE 2018
Q138: ईंटों में मौजूद घुलनशील क्षारों (Soluble Alkalis) के कारण ईंट की सतह पर सफेद पाउडर या धब्बे बन जाने के दोष को क्या कहा जाता है?
- A) ब्लोटिंग (Bloating)
- ✅ B) एफ्लोरेसेंस / उत्फुल्लन (Efflorescence) (सही उत्तर)
- C) चफ्स (Chuffs)
- D) सापोनिफिकेशन (Saponification)
💡 डिटेल Explanation:
यदि ईंट बनाने वाली मिट्टी में क्षारीय लवण (Alkalies) मौजूद हों, तो वे नमी के संपर्क में आकर ईंट की सतह पर आ जाते हैं। पानी के वाष्पित (Evaporate) होने के बाद सतह पर एक सफेद पाउडर की परत रह जाती है। इस दोष को एफ्लोरेसेंस (उत्फुल्लन) कहा जाता है। यह देखने में खराब लगता है और प्लास्टर को उखाड़ सकता है।
यदि ईंट बनाने वाली मिट्टी में क्षारीय लवण (Alkalies) मौजूद हों, तो वे नमी के संपर्क में आकर ईंट की सतह पर आ जाते हैं। पानी के वाष्पित (Evaporate) होने के बाद सतह पर एक सफेद पाउडर की परत रह जाती है। इस दोष को एफ्लोरेसेंस (उत्फुल्लन) कहा जाता है। यह देखने में खराब लगता है और प्लास्टर को उखाड़ सकता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2019, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q139: नई बिछाई गई कंक्रीट की 'तराई' (Curing) करने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) को बढ़ाना
- B) कंक्रीट में पानी और सीमेंट का अनुपात ठीक करना
- ✅ C) जलयोजन (Hydration) की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नमी बनाए रखना (सही उत्तर)
- D) कंक्रीट को सिकुड़ने से पहले ही सुखा देना
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट को अपनी अधिकतम सामर्थ्य प्राप्त करने के लिए पानी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया (Hydration) करनी होती है। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है। तराई (Curing) का मुख्य उद्देश्य कंक्रीट के अंदर की नमी को वाष्पित होने से रोकना है, ताकि हाइड्रेशन की प्रक्रिया बिना रुके पूरी हो सके और कंक्रीट मजबूत बने।
सीमेंट को अपनी अधिकतम सामर्थ्य प्राप्त करने के लिए पानी के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया (Hydration) करनी होती है। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है। तराई (Curing) का मुख्य उद्देश्य कंक्रीट के अंदर की नमी को वाष्पित होने से रोकना है, ताकि हाइड्रेशन की प्रक्रिया बिना रुके पूरी हो सके और कंक्रीट मजबूत बने।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2018, UKPSC JE, RRB JE 2015
Q140: लकड़ी (Timber / Wood) की सतहों पर पेंट करने से पहले लगाए जाने वाले 'प्राइमर' (Primer) में बेस के रूप में मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?
- A) रेड लेड (Red Lead)
- ✅ B) वाइट लेड (White Lead) (सही उत्तर)
- C) जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide)
- D) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide)
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी के कार्यों (Woodwork) के लिए वाइट लेड (White Lead) सबसे उपयुक्त और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला बेस है। यह लकड़ी की सतह के छिद्रों को अच्छी तरह से भरता है और पेंट के लिए एक बेहतरीन आधार (Foundation) तैयार करता है।
ध्यान दें: लोहे और स्टील (Iron & Steel) की सतहों के प्राइमर के लिए 'रेड लेड' का उपयोग किया जाता है।
लकड़ी के कार्यों (Woodwork) के लिए वाइट लेड (White Lead) सबसे उपयुक्त और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला बेस है। यह लकड़ी की सतह के छिद्रों को अच्छी तरह से भरता है और पेंट के लिए एक बेहतरीन आधार (Foundation) तैयार करता है।
ध्यान दें: लोहे और स्टील (Iron & Steel) की सतहों के प्राइमर के लिए 'रेड लेड' का उपयोग किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 29 (Q141 - Q145)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2018, DMRC JE
Q141: तेज़ हवाओं या आंधी के कारण पेड़ के रेशों (Wood fibers) के कुचल जाने या टूट जाने से उत्पन्न होने वाले लकड़ी के दोष को क्या कहते हैं?
- ✅ A) अपसेट्स (Upsets) (सही उत्तर)
- B) रिंड गॉल (Rind gall)
- C) फॉक्सीनेस (Foxiness)
- D) बर्ल (Burl)
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ के विकास के दौरान जब तेज़ आंधी या हवाएं चलती हैं, तो पेड़ अत्यधिक झुक जाता है। इसके कारण लकड़ी के रेशे (Fibers) दबकर या कुचलकर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इस प्राकृतिक दोष को अपसेट्स (Upsets) कहा जाता है, जो लकड़ी की सामर्थ्य को काफी कम कर देता है।
पेड़ के विकास के दौरान जब तेज़ आंधी या हवाएं चलती हैं, तो पेड़ अत्यधिक झुक जाता है। इसके कारण लकड़ी के रेशे (Fibers) दबकर या कुचलकर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इस प्राकृतिक दोष को अपसेट्स (Upsets) कहा जाता है, जो लकड़ी की सामर्थ्य को काफी कम कर देता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, UPPCL JE 2019, RRB JE
Q142: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'मानक गाढ़ापन' (Standard/Normal Consistency) सामान्यतः सीमेंट के वजन के कितने प्रतिशत के बीच होता है?
- A) 10% से 15%
- ✅ B) 25% से 30% (सही उत्तर)
- C) 35% से 40%
- D) 45% से 50%
💡 डिटेल Explanation:
मानक गाढ़ापन (Standard Consistency) ज्ञात करने के लिए विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का प्रयोग किया जाता है। अधिकांश साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह पानी की मात्रा सीमेंट के कुल वजन की 25% से 30% के बीच होती है। इसे 'P' से प्रदर्शित किया जाता है और अन्य सभी परीक्षण (जैसे जमाव काल, निर्दोषता) इसी 'P' के आधार पर किए जाते हैं।
मानक गाढ़ापन (Standard Consistency) ज्ञात करने के लिए विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का प्रयोग किया जाता है। अधिकांश साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह पानी की मात्रा सीमेंट के कुल वजन की 25% से 30% के बीच होती है। इसे 'P' से प्रदर्शित किया जाता है और अन्य सभी परीक्षण (जैसे जमाव काल, निर्दोषता) इसी 'P' के आधार पर किए जाते हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2015, LMRC JE 2018
Q143: कंक्रीट के परिवहन (Transportation) या बिछाने के दौरान मोटे मिलावे (Coarse Aggregates) का सीमेंट पेस्ट से अलग हो जाना क्या कहलाता है?
- A) ब्लीडिंग (Bleeding)
- B) लाटेंस (Laitance)
- ✅ C) सेग्रीगेशन / पृथक्करण (Segregation) (सही उत्तर)
- D) हनीकॉम्बिंग (Honeycombing)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट के घटकों का एक-दूसरे से अलग होना सेग्रीगेशन (Segregation) कहलाता है, जिसमें भारी गिट्टियां (Coarse aggregates) नीचे बैठ जाती हैं। दूसरी ओर, जब कंक्रीट की सतह पर सीमेंट और पानी का घोल तैरकर ऊपर आ जाता है, तो उसे ब्लीडिंग (Bleeding) कहा जाता है।
कंक्रीट के घटकों का एक-दूसरे से अलग होना सेग्रीगेशन (Segregation) कहलाता है, जिसमें भारी गिट्टियां (Coarse aggregates) नीचे बैठ जाती हैं। दूसरी ओर, जब कंक्रीट की सतह पर सीमेंट और पानी का घोल तैरकर ऊपर आ जाता है, तो उसे ब्लीडिंग (Bleeding) कहा जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, MP Vyapam 2016, UKPSC JE
Q144: ईंट बनाने के लिए मिट्टी तैयार करते समय, मिट्टी को पैरों से या 'पग मिल' (Pug Mill) में अच्छी तरह गूंथने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- A) वेदरिंग (Weathering)
- B) ब्लेंडिंग (Blending)
- ✅ C) टेम्परिंग (Tempering) (सही उत्तर)
- D) मोल्डिंग (Moulding)
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी तैयार करने के चरण क्रमानुसार होते हैं: Unsoiling → Digging → Weathering → Blending → Tempering। टेम्परिंग (Tempering) में मिट्टी में उचित मात्रा में पानी मिलाकर उसे गूंथा जाता है ताकि उसमें प्लास्टिसिटी (लचीलापन) आ सके। बड़े पैमाने पर यह काम एक मशीन में किया जाता है जिसे 'पग मिल' (Pug Mill) कहते हैं।
ईंट की मिट्टी तैयार करने के चरण क्रमानुसार होते हैं: Unsoiling → Digging → Weathering → Blending → Tempering। टेम्परिंग (Tempering) में मिट्टी में उचित मात्रा में पानी मिलाकर उसे गूंथा जाता है ताकि उसमें प्लास्टिसिटी (लचीलापन) आ सके। बड़े पैमाने पर यह काम एक मशीन में किया जाता है जिसे 'पग मिल' (Pug Mill) कहते हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q145: 'इनेमल पेंट' (Enamel Paint) में वाहक (Vehicle) या बाइंडर के रूप में सामान्यतः किस पदार्थ का उपयोग किया जाता है?
- A) पानी (Water)
- ✅ B) वार्निश (Varnish) (सही उत्तर)
- C) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- D) तारपीन का तेल (Turpentine Oil)
💡 डिटेल Explanation:
सामान्य ऑयल पेंट्स में वाहक (Vehicle) के रूप में अलसी के तेल का इस्तेमाल होता है, लेकिन इनेमल पेंट (Enamel Paint) में वाहक के रूप में वार्निश (Varnish) का उपयोग किया जाता है। इसमें वाइट लेड या जिंक वाइट मिलाया जाता है। वार्निश के कारण यह पेंट सूखने पर बहुत चिकनी, कठोर और चमकदार (Glossy) सतह प्रदान करता है।
सामान्य ऑयल पेंट्स में वाहक (Vehicle) के रूप में अलसी के तेल का इस्तेमाल होता है, लेकिन इनेमल पेंट (Enamel Paint) में वाहक के रूप में वार्निश (Varnish) का उपयोग किया जाता है। इसमें वाइट लेड या जिंक वाइट मिलाया जाता है। वार्निश के कारण यह पेंट सूखने पर बहुत चिकनी, कठोर और चमकदार (Glossy) सतह प्रदान करता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 30 (Q146 - Q150)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q146: लकड़ी में उत्पन्न होने वाला वह प्राकृतिक दोष क्या कहलाता है, जिसमें लकड़ी के वार्षिक वलय (Annual rings) एक-दूसरे से आंशिक या पूर्ण रूप से अलग हो जाते हैं?
- A) गांठ (Knot)
- ✅ B) शेक्स (Shakes) (सही उत्तर)
- C) रिंड गॉल (Rind gall)
- D) बर्ल (Burl)
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ के बढ़ते समय अत्यधिक ठंड (Frost), तेज हवाओं या पोषण की कमी के कारण वार्षिक वलयों के बीच की पकड़ कमजोर हो जाती है और वे अलग होने लगते हैं। इस दोष को सामूहिक रूप से शेक्स (Shakes) कहा जाता है। इसके कई प्रकार होते हैं जैसे- कप शेक (आंशिक अलगाव) और रिंग शेक (पूर्ण अलगाव)।
पेड़ के बढ़ते समय अत्यधिक ठंड (Frost), तेज हवाओं या पोषण की कमी के कारण वार्षिक वलयों के बीच की पकड़ कमजोर हो जाती है और वे अलग होने लगते हैं। इस दोष को सामूहिक रूप से शेक्स (Shakes) कहा जाता है। इसके कई प्रकार होते हैं जैसे- कप शेक (आंशिक अलगाव) और रिंग शेक (पूर्ण अलगाव)।
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Q147: पानी के अंदर कंक्रीटिंग (Underwater concreting) और बहते पानी में निर्माण के लिए उपयोग होने वाले 'त्वरित जमाव सीमेंट' (Quick Setting Cement) का प्रारंभिक और अंतिम जमाव काल (Setting Time) कितना होता है?
- A) 30 मिनट और 10 घंटे
- ✅ B) 5 मिनट और 30 मिनट (सही उत्तर)
- C) 10 मिनट और 60 मिनट
- D) 60 मिनट और 10 घंटे
💡 डिटेल Explanation:
क्विक सेटिंग सीमेंट का उपयोग वहां किया जाता है जहां कंक्रीट को बहते पानी से बहने से पहले तुरंत सेट होने की आवश्यकता होती है। इसे बनाने के लिए सीमेंट में जिप्सम (Retarder) की मात्रा कम कर दी जाती है और एल्युमिनियम सल्फेट (Accelerator) मिला दिया जाता है। इसका प्रारंभिक जमाव काल 5 मिनट और अंतिम जमाव काल 30 मिनट होता है।
क्विक सेटिंग सीमेंट का उपयोग वहां किया जाता है जहां कंक्रीट को बहते पानी से बहने से पहले तुरंत सेट होने की आवश्यकता होती है। इसे बनाने के लिए सीमेंट में जिप्सम (Retarder) की मात्रा कम कर दी जाती है और एल्युमिनियम सल्फेट (Accelerator) मिला दिया जाता है। इसका प्रारंभिक जमाव काल 5 मिनट और अंतिम जमाव काल 30 मिनट होता है।
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Q148: बहुत अधिक सुकार्यता (Very High Workability) वाले कंक्रीट (जैसे बहने वाला कंक्रीट या सेल्फ-कॉम्पैक्टिंग कंक्रीट) को मापने के लिए इनमें से कौन सा परीक्षण सबसे उपयुक्त माना जाता है?
- A) स्लंप टेस्ट (Slump Test)
- B) कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट (Compacting Factor Test)
- C) वी-बी कंसिस्टोमीटर टेस्ट (Vee-Bee Test)
- ✅ D) फ्लो टेबल टेस्ट (Flow Table Test) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट में पानी बहुत अधिक होता है (Very High Workability), तो स्लंप टेस्ट में कंक्रीट पूरी तरह ढह (Collapse) जाती है और सही माप नहीं देती। ऐसी स्थिति में फ्लो टेबल टेस्ट (Flow Table Test) किया जाता है, जिसमें यह मापा जाता है कि झटके (Jolts) देने पर कंक्रीट कितनी दूर तक क्षैतिज दिशा में फैलती है। (Very Low सुकार्यता के लिए Vee-Bee टेस्ट होता है)।
जब कंक्रीट में पानी बहुत अधिक होता है (Very High Workability), तो स्लंप टेस्ट में कंक्रीट पूरी तरह ढह (Collapse) जाती है और सही माप नहीं देती। ऐसी स्थिति में फ्लो टेबल टेस्ट (Flow Table Test) किया जाता है, जिसमें यह मापा जाता है कि झटके (Jolts) देने पर कंक्रीट कितनी दूर तक क्षैतिज दिशा में फैलती है। (Very Low सुकार्यता के लिए Vee-Bee टेस्ट होता है)।
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Q149: खदान (Quarry) से निकाले गए प्राकृतिक पत्थरों को चिनाई (Masonry) में उपयोग करने से पहले उचित आकार (Shape) और चिकनी सतह प्रदान करने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- A) क्वारीइंग (Quarrying)
- ✅ B) ड्रेसिंग (Dressing) (सही उत्तर)
- C) सीज़निंग (Seasoning)
- D) पिचिंग (Pitching)
💡 डिटेल Explanation:
खदान से निकाले गए पत्थर अनियमित आकार के होते हैं। उन्हें निर्माण में लगाने से पहले छैनी और हथौड़े की मदद से एक निश्चित ज्यामितीय आकार और समतल सतह दी जाती है। इस प्रक्रिया को पत्थर की ड्रेसिंग (Dressing of Stones) कहा जाता है। यह काम खदान से पत्थर निकालने के तुरंत बाद करना सबसे आसान होता है।
खदान से निकाले गए पत्थर अनियमित आकार के होते हैं। उन्हें निर्माण में लगाने से पहले छैनी और हथौड़े की मदद से एक निश्चित ज्यामितीय आकार और समतल सतह दी जाती है। इस प्रक्रिया को पत्थर की ड्रेसिंग (Dressing of Stones) कहा जाता है। यह काम खदान से पत्थर निकालने के तुरंत बाद करना सबसे आसान होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2018, UKPSC JE
Q150: एक अच्छी ईंट बनाने वाली मिट्टी में 'सिलिका' (Silica) की मात्रा 50% से 60% होती है। यदि मिट्टी में सिलिका की मात्रा इससे अधिक हो जाए, तो ईंट पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- A) ईंट सूखने पर बहुत अधिक सिकुड़ जाएगी
- ✅ B) ईंट बहुत अधिक भंगुर (Brittle) हो जाएगी और उसकी सामर्थ्य कम हो जाएगी (सही उत्तर)
- C) ईंट का रंग बहुत अधिक लाल हो जाएगा
- D) ईंट भट्ठे में आसानी से पिघल जाएगी
💡 डिटेल Explanation:
सिलिका (Silica) ईंट को सूखते समय सिकुड़ने, फटने और मुड़ने से रोकता है। लेकिन, यदि मिट्टी में सिलिका की मात्रा 60% से अधिक (Excess of Silica) हो जाती है, तो ईंट के कण आपस में अच्छी तरह से बंध नहीं पाते। इससे ईंट भंगुर (Brittle) हो जाती है, किनारों से टूटने लगती है, और उसकी लोड सहने की क्षमता कम हो जाती है।
सिलिका (Silica) ईंट को सूखते समय सिकुड़ने, फटने और मुड़ने से रोकता है। लेकिन, यदि मिट्टी में सिलिका की मात्रा 60% से अधिक (Excess of Silica) हो जाती है, तो ईंट के कण आपस में अच्छी तरह से बंध नहीं पाते। इससे ईंट भंगुर (Brittle) हो जाती है, किनारों से टूटने लगती है, और उसकी लोड सहने की क्षमता कम हो जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 31 (Q151 - Q155)
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Q151: सड़क निर्माण में प्रयुक्त बिटुमेन (Bitumen) का 'सॉफ्टनिंग पॉइंट' (Softening Point - नरम होने का बिंदु) ज्ञात करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) पेनेट्रोमीटर (Penetrometer)
- B) डक्टिलिटी मशीन (Ductility machine)
- ✅ C) रिंग एंड बॉल उपकरण (Ring and Ball Apparatus) (सही उत्तर)
- D) विस्कोमीटर (Viscometer)
💡 डिटेल Explanation:
रिंग एंड बॉल (Ring and Ball) परीक्षण का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि बिटुमेन किस तापमान पर नरम होकर बहने लगता है। उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में सड़क बनाने के लिए उच्च सॉफ्टनिंग पॉइंट वाले बिटुमेन की आवश्यकता होती है ताकि गर्मियों में सड़क पिघले नहीं।
अतिरिक्त फैक्ट: पेनेट्रोमीटर का उपयोग बिटुमेन की कठोरता (Grade) मापने के लिए किया जाता है।
रिंग एंड बॉल (Ring and Ball) परीक्षण का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि बिटुमेन किस तापमान पर नरम होकर बहने लगता है। उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में सड़क बनाने के लिए उच्च सॉफ्टनिंग पॉइंट वाले बिटुमेन की आवश्यकता होती है ताकि गर्मियों में सड़क पिघले नहीं।
अतिरिक्त फैक्ट: पेनेट्रोमीटर का उपयोग बिटुमेन की कठोरता (Grade) मापने के लिए किया जाता है।
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Q152: ली-चैटेलियर परीक्षण (Le-Chatelier test) द्वारा सीमेंट की 'निर्दोषता' (Soundness) का परीक्षण करते समय, मुख्य रूप से किस घटक के कारण होने वाले आयतन विस्तार (Volume expansion) का पता लगाया जाता है?
- ✅ A) अनबुझा चूना (Free Lime) (सही उत्तर)
- B) मैग्नीशिया (Magnesia)
- C) एल्युमिना (Alumina)
- D) कैल्शियम सल्फेट (Calcium Sulphate)
💡 डिटेल Explanation:
ली-चैटेलियर उपकरण केवल अनबुझे चूने (Free Lime) के कारण सीमेंट में होने वाले अप्रसार (Unsoundness) को मापता है। यदि सीमेंट में मैग्नीशिया (Magnesia) के कारण होने वाले विस्तार को भी मापना हो, तो उसके लिए ऑटोक्लेव (Autoclave) परीक्षण का उपयोग किया जाता है।
ली-चैटेलियर उपकरण केवल अनबुझे चूने (Free Lime) के कारण सीमेंट में होने वाले अप्रसार (Unsoundness) को मापता है। यदि सीमेंट में मैग्नीशिया (Magnesia) के कारण होने वाले विस्तार को भी मापना हो, तो उसके लिए ऑटोक्लेव (Autoclave) परीक्षण का उपयोग किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2015, DMRC JE 2017
Q153: लकड़ी के परिरक्षण (Preservation of timber) के लिए उपयोग की जाने वाली बहुत प्रभावी 'एस्क्यू' (ASCU) विधि में मुख्य रूप से कौन से रसायनों का मिश्रण शामिल होता है?
- A) कॉपर, जिंक और लेड (Copper, Zinc, Lead)
- ✅ B) आर्सेनिक, कॉपर और क्रोमियम (Arsenic, Copper, Chromium) (सही उत्तर)
- C) सोडियम, पोटैशियम और सल्फर (Sodium, Potassium, Sulphur)
- D) क्रियोसोट और कोल टार (Creosote and Coal tar)
💡 डिटेल Explanation:
ASCU लकड़ी का एक बहुत ही लोकप्रिय और गंधहीन जल-घुलनशील (Water-soluble) परिरक्षक है। इसे आर्सेनिक पेंटॉक्साइड (Arsenic pentoxide), कॉपर सल्फेट (Copper sulphate) और पोटेशियम डाइक्रोमेट (Chromium/Potassium dichromate) के पाउडर को पानी में मिलाकर तैयार किया जाता है। यह दीमक और फंगस से लकड़ी को बचाता है।
ASCU लकड़ी का एक बहुत ही लोकप्रिय और गंधहीन जल-घुलनशील (Water-soluble) परिरक्षक है। इसे आर्सेनिक पेंटॉक्साइड (Arsenic pentoxide), कॉपर सल्फेट (Copper sulphate) और पोटेशियम डाइक्रोमेट (Chromium/Potassium dichromate) के पाउडर को पानी में मिलाकर तैयार किया जाता है। यह दीमक और फंगस से लकड़ी को बचाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, LMRC JE 2018, RRB JE 2015
Q154: ईंट के ऊपरी हिस्से पर बने गड्ढे (Indentation) को 'फ्रॉग' (Frog) कहा जाता है। ईंट में फ्रॉग बनाने का मुख्य तकनीकी उद्देश्य क्या होता है?
- A) ईंट का वजन कम करना और मिट्टी बचाना
- B) ईंट पकाने में आसानी होना
- C) ईंट पर निर्माता (Manufacturer) का नाम छापना
- ✅ D) ईंटों की परतों के बीच मोर्टार के लिए 'कुंजी' (Shear Key) प्रदान करना (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
यद्यपि फ्रॉग (Frog) के अंदर निर्माता अपना नाम (Brand name) भी लिखते हैं, लेकिन इसका मुख्य इंजीनियरिंग उद्देश्य ईंट और मोर्टार (मसाले) के बीच एक 'शीयर की' (Shear Key) या इंटरलॉकिंग जोड़ (Interlocking joint) बनाना है। जब इस गड्ढे में मोर्टार भरता है, तो यह ऊपर और नीचे की ईंटों को मजबूती से बांध देता है, जिससे दीवार की सामर्थ्य बढ़ती है।
यद्यपि फ्रॉग (Frog) के अंदर निर्माता अपना नाम (Brand name) भी लिखते हैं, लेकिन इसका मुख्य इंजीनियरिंग उद्देश्य ईंट और मोर्टार (मसाले) के बीच एक 'शीयर की' (Shear Key) या इंटरलॉकिंग जोड़ (Interlocking joint) बनाना है। जब इस गड्ढे में मोर्टार भरता है, तो यह ऊपर और नीचे की ईंटों को मजबूती से बांध देता है, जिससे दीवार की सामर्थ्य बढ़ती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2018, RRB JE 2019
Q155: IS 456:2000 के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) से बने कंक्रीट की सामान्य मौसम की स्थिति में 'न्यूनतम तराई अवधि' (Minimum Curing Period) कितनी होनी चाहिए?
- A) 3 दिन
- ✅ B) 7 दिन (सही उत्तर)
- C) 10 दिन
- D) 14 दिन
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, OPC से बने कंक्रीट को सामान्य मौसम में कम से कम 7 दिनों तक नम (Cured) रखा जाना चाहिए। यदि कंक्रीट में खनिज सम्मिश्रण (Mineral admixtures जैसे फ्लाई ऐश या स्लैग) मिलाए गए हैं, तो यह तराई अवधि कम से कम 10 दिन होनी चाहिए। शुष्क और गर्म मौसम में इन अवधियों को क्रमशः 10 दिन और 14 दिन कर दिया जाता है।
भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, OPC से बने कंक्रीट को सामान्य मौसम में कम से कम 7 दिनों तक नम (Cured) रखा जाना चाहिए। यदि कंक्रीट में खनिज सम्मिश्रण (Mineral admixtures जैसे फ्लाई ऐश या स्लैग) मिलाए गए हैं, तो यह तराई अवधि कम से कम 10 दिन होनी चाहिए। शुष्क और गर्म मौसम में इन अवधियों को क्रमशः 10 दिन और 14 दिन कर दिया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 32 (Q156 - Q160)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2016, UKPSC JE
Q156: निर्माण पत्थरों (Building Stones) में मौजूद मिट्टी या घुलनशील पदार्थ (Earthy or soluble matter) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) एसिड टेस्ट (Acid test)
- B) एट्रिशन टेस्ट (Attrition test)
- ✅ C) स्मिथ्स टेस्ट (Smith's test) (सही उत्तर)
- D) ब्रिनेल टेस्ट (Brinell test)
💡 डिटेल Explanation:
स्मिथ का परीक्षण (Smith's Test) यह जांचने के लिए किया जाता है कि पत्थर में कोई मिट्टी (clay) या घुलनशील पदार्थ तो नहीं है। इसमें पत्थर के टुकड़ों को साफ पानी से भरे गिलास में डाला जाता है। यदि पानी गंदा (muddy) हो जाता है, तो इसका अर्थ है कि पत्थर में मिट्टी के कण मौजूद हैं जो उसकी सामर्थ्य और स्थायित्व को कम कर सकते हैं।
स्मिथ का परीक्षण (Smith's Test) यह जांचने के लिए किया जाता है कि पत्थर में कोई मिट्टी (clay) या घुलनशील पदार्थ तो नहीं है। इसमें पत्थर के टुकड़ों को साफ पानी से भरे गिलास में डाला जाता है। यदि पानी गंदा (muddy) हो जाता है, तो इसका अर्थ है कि पत्थर में मिट्टी के कण मौजूद हैं जो उसकी सामर्थ्य और स्थायित्व को कम कर सकते हैं।
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Q157: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) में वह कौन सा 'बोग्स यौगिक' (Bogue's compound) है जो कंक्रीट की 'प्रारंभिक सामर्थ्य' (Early Strength) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होता है?
- A) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- ✅ B) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S) (सही उत्तर)
- C) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
C3S (एलाईट / Alite) सीमेंट में सबसे अच्छी बाइंडिंग प्रॉपर्टी वाला यौगिक है। यह पानी के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट को शुरुआती 7 दिनों की सामर्थ्य (Early strength) प्रदान करता है। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) में इसी C3S की मात्रा बढ़ा दी जाती है। (नोट: C2S अंतिम सामर्थ्य/Ultimate strength के लिए जिम्मेदार होता है।)
C3S (एलाईट / Alite) सीमेंट में सबसे अच्छी बाइंडिंग प्रॉपर्टी वाला यौगिक है। यह पानी के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट को शुरुआती 7 दिनों की सामर्थ्य (Early strength) प्रदान करता है। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) में इसी C3S की मात्रा बढ़ा दी जाती है। (नोट: C2S अंतिम सामर्थ्य/Ultimate strength के लिए जिम्मेदार होता है।)
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, UPSSSC JE 2015, RRB JE
Q158: लकड़ी (Timber) में 'ड्राई रॉट' (Dry Rot) नामक गंभीर दोष मुख्य रूप से किस कारण से उत्पन्न होता है?
- ✅ A) हवा के अपर्याप्त संचार (Lack of ventilation) और सीलन के कारण कवक (Fungus) का हमला (सही उत्तर)
- B) लकड़ी का बार-बार गीला और सूखा होना
- C) दीमक (Termites) के कारण
- D) अत्यधिक धूप में सूखने के कारण
💡 डिटेल Explanation:
ड्राई रॉट (Dry Rot) एक कवक (Fungus) जनित रोग है। यह तब होता है जब लकड़ी को ऐसी जगह लगाया जाता है जहां सीलन (Dampness) हो लेकिन हवा का आवागमन (Ventilation) बिल्कुल न हो। कवक लकड़ी के रेशों को खाकर उसे सूखे पाउडर (Dry powder) में बदल देता है। इसे रोकने के लिए लकड़ी को हमेशा अच्छी तरह से हवादार जगह पर रखना चाहिए और कॉपर सल्फेट का लेप लगाना चाहिए।
ड्राई रॉट (Dry Rot) एक कवक (Fungus) जनित रोग है। यह तब होता है जब लकड़ी को ऐसी जगह लगाया जाता है जहां सीलन (Dampness) हो लेकिन हवा का आवागमन (Ventilation) बिल्कुल न हो। कवक लकड़ी के रेशों को खाकर उसे सूखे पाउडर (Dry powder) में बदल देता है। इसे रोकने के लिए लकड़ी को हमेशा अच्छी तरह से हवादार जगह पर रखना चाहिए और कॉपर सल्फेट का लेप लगाना चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, DMRC JE 2017
Q159: पेंट की गई सतह पर पेंट के फूलने (Swelling) या उसमें बुलबुले बन जाने के दोष को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
- A) चॉकिंग (Chalking)
- B) फ्लेकिंग (Flaking)
- ✅ C) ब्लिस्टरिंग (Blistering) (सही उत्तर)
- D) ब्लीडिंग (Bleeding)
💡 डिटेल Explanation:
ब्लिस्टरिंग (Blistering) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट की सतह पर छाले या बुलबुले (Blisters) बन जाते हैं। यह तब होता है जब पेंट की गई सतह के नीचे नमी (Moisture) या हवा फंसी रह जाती है। जब यह नमी गर्म होकर वाष्प (Vapor) बनती है, तो यह पेंट की परत को धक्का देकर ऊपर उठा देती है।
ब्लिस्टरिंग (Blistering) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट की सतह पर छाले या बुलबुले (Blisters) बन जाते हैं। यह तब होता है जब पेंट की गई सतह के नीचे नमी (Moisture) या हवा फंसी रह जाती है। जब यह नमी गर्म होकर वाष्प (Vapor) बनती है, तो यह पेंट की परत को धक्का देकर ऊपर उठा देती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, LMRC JE
Q160: IS 456:2000 के अनुसार, कंक्रीट के 'स्थैतिक प्रत्यास्थता मापांक' (Static Modulus of Elasticity - Ec) की गणना करने के लिए किस मानक सूत्र का उपयोग किया जाता है?
- A) Ec = 5700 √fck
- ✅ B) Ec = 5000 √fck (सही उत्तर)
- C) Ec = 0.7 √fck
- D) Ec = 0.85 √fck
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के वर्तमान संशोधन के अनुसार, कंक्रीट का प्रत्यास्थता मापांक (Short term modulus of elasticity) Ec = 5000 √fck सूत्र द्वारा निकाला जाता है, जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की अभिलाक्षणिक संपीडन सामर्थ्य (N/mm2 में) है।
(नोट: IS 456:1978 के पुराने कोड में यह सूत्र 5700 √fck था, लेकिन नए कोड में इसे 5000 कर दिया गया है।)
IS 456 के वर्तमान संशोधन के अनुसार, कंक्रीट का प्रत्यास्थता मापांक (Short term modulus of elasticity) Ec = 5000 √fck सूत्र द्वारा निकाला जाता है, जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की अभिलाक्षणिक संपीडन सामर्थ्य (N/mm2 में) है।
(नोट: IS 456:1978 के पुराने कोड में यह सूत्र 5700 √fck था, लेकिन नए कोड में इसे 5000 कर दिया गया है।)
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 33 (Q161 - Q165)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q161: प्लाईवुड (Plywood) बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली लकड़ी की पतली परतों 'विनियर' (Veneers) की मोटाई सामान्यतः किस सीमा (Range) में होती है?
- A) 0.1 mm से 0.4 mm
- ✅ B) 0.4 mm से 6 mm (सही उत्तर)
- C) 6 mm से 10 mm
- D) 10 mm से 15 mm
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड का निर्माण 'विनियर' (Veneers) को एक-दूसरे के समकोण (90°) पर आपस में चिपकाकर किया जाता है। विनियर लकड़ी की बहुत पतली परतें होती हैं, जिन्हें मशीन द्वारा लकड़ी के लट्ठे (log) को छीलकर (peeling) प्राप्त किया जाता है। इनकी मोटाई सामान्यतः 0.4 mm से 6 mm के बीच रखी जाती है।
प्लाईवुड का निर्माण 'विनियर' (Veneers) को एक-दूसरे के समकोण (90°) पर आपस में चिपकाकर किया जाता है। विनियर लकड़ी की बहुत पतली परतें होती हैं, जिन्हें मशीन द्वारा लकड़ी के लट्ठे (log) को छीलकर (peeling) प्राप्त किया जाता है। इनकी मोटाई सामान्यतः 0.4 mm से 6 mm के बीच रखी जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2019, UPPCL JE 2018, MP Vyapam
Q162: पोर्टलैंड पॉज़ोलाना सीमेंट (PPC) का 'विशिष्ट सतही क्षेत्रफल' (Specific Surface Area), जो उसकी सूक्ष्मता को दर्शाता है, कम से कम कितना होना चाहिए?
- A) 2250 cm²/gm
- B) 2500 cm²/gm
- ✅ C) 3000 cm²/gm (सही उत्तर)
- D) 3250 cm²/gm
💡 डिटेल Explanation:
ब्लेन वायु पारगम्यता परीक्षण (Blaine's Air Permeability Test) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का न्यूनतम विशिष्ट सतही क्षेत्रफल 2250 cm²/gm होता है। लेकिन PPC (Portland Pozzolana Cement) के लिए यह 3000 cm²/gm (या 300 m²/kg) होना चाहिए। इसका सीधा अर्थ है कि PPC, OPC की तुलना में अधिक महीन (Finer) पिसा हुआ होता है।
ब्लेन वायु पारगम्यता परीक्षण (Blaine's Air Permeability Test) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का न्यूनतम विशिष्ट सतही क्षेत्रफल 2250 cm²/gm होता है। लेकिन PPC (Portland Pozzolana Cement) के लिए यह 3000 cm²/gm (या 300 m²/kg) होना चाहिए। इसका सीधा अर्थ है कि PPC, OPC की तुलना में अधिक महीन (Finer) पिसा हुआ होता है।
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Q163: कंक्रीट संरचनाओं में समय के साथ होने वाली 'सिकुड़न' (Drying Shrinkage) का मुख्य कारण क्या होता है?
- A) कंक्रीट पर लगातार भारी लोड का आना
- B) कंक्रीट में पानी का जमना (Freezing of water)
- ✅ C) कंक्रीट से पानी का वाष्पीकरण (Evaporation of water) (सही उत्तर)
- D) कंक्रीट में स्टील का फैलना
💡 डिटेल Explanation:
जैसे-जैसे कंक्रीट पुरानी होती है और बाहरी वातावरण के संपर्क में सूखती है, उसके अंदर मौजूद नमी (पानी) वाष्पीकृत (Evaporate) होकर बाहर निकल जाती है। पानी के निकलने से कंक्रीट के आयतन (Volume) में कमी आती है, जिसे ड्राइंग श्रिंकेज (Drying Shrinkage) कहते हैं। इसी सिकुड़न के कारण कंक्रीट की सतह पर पतली दरारें (Shrinkage Cracks) पड़ जाती हैं।
जैसे-जैसे कंक्रीट पुरानी होती है और बाहरी वातावरण के संपर्क में सूखती है, उसके अंदर मौजूद नमी (पानी) वाष्पीकृत (Evaporate) होकर बाहर निकल जाती है। पानी के निकलने से कंक्रीट के आयतन (Volume) में कमी आती है, जिसे ड्राइंग श्रिंकेज (Drying Shrinkage) कहते हैं। इसी सिकुड़न के कारण कंक्रीट की सतह पर पतली दरारें (Shrinkage Cracks) पड़ जाती हैं।
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Q164: IS 1077 के अनुसार, 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (First Class Brick) को 24 घंटे ठंडे पानी में डुबोने पर, उसका जल अवशोषण (Water absorption) उसके शुष्क भार (Dry weight) के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 15%
- ✅ B) 20% (सही उत्तर)
- C) 22%
- D) 25%
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी गुणवत्ता वाली ईंट बहुत अधिक सरंध्र (Porous) नहीं होनी चाहिए, अन्यथा वह सीलन सोख लेगी। IS कोड के अनुसार, 24 घंटे पानी में डुबोने के बाद प्रथम श्रेणी (First Class) की ईंट का जल अवशोषण 20% से अधिक नहीं होना चाहिए। (याद रखें: द्वितीय श्रेणी के लिए यह सीमा 22% और तृतीय श्रेणी के लिए 25% निर्धारित है)।
एक अच्छी गुणवत्ता वाली ईंट बहुत अधिक सरंध्र (Porous) नहीं होनी चाहिए, अन्यथा वह सीलन सोख लेगी। IS कोड के अनुसार, 24 घंटे पानी में डुबोने के बाद प्रथम श्रेणी (First Class) की ईंट का जल अवशोषण 20% से अधिक नहीं होना चाहिए। (याद रखें: द्वितीय श्रेणी के लिए यह सीमा 22% और तृतीय श्रेणी के लिए 25% निर्धारित है)।
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Q165: प्रबलित कंक्रीट (RCC) और इस्पात संरचनाओं (Steel Structures) के डिज़ाइन में प्रयुक्त होने वाले इस्पात (Steel) का मानक 'इकाई भार' (Unit Weight / Density) कितना माना जाता है?
- A) 2400 kg/m³
- B) 2500 kg/m³
- ✅ C) 7850 kg/m³ (सही उत्तर)
- D) 8500 kg/m³
💡 डिटेल Explanation:
निर्माण कार्यों (जैसे RCC में सरिया या स्टील के गर्डर) के लिए इस्पात का डिज़ाइन करते समय, IS 456 और IS 800 के अनुसार स्टील का घनत्व (Density) या इकाई भार 7850 kg/m³ (या 78.5 kN/m³) माना जाता है। यह मान कंक्रीट के घनत्व (2500 kg/m³) से लगभग 3 गुना अधिक है।
निर्माण कार्यों (जैसे RCC में सरिया या स्टील के गर्डर) के लिए इस्पात का डिज़ाइन करते समय, IS 456 और IS 800 के अनुसार स्टील का घनत्व (Density) या इकाई भार 7850 kg/m³ (या 78.5 kN/m³) माना जाता है। यह मान कंक्रीट के घनत्व (2500 kg/m³) से लगभग 3 गुना अधिक है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 34 (Q166 - Q170)
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q166: निर्माण कार्यों में प्रयुक्त 'साधारण पोर्टलैंड सीमेंट' (OPC) का 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) सामान्यतः कितना माना जाता है?
- A) 2.65
- B) 2.80
- ✅ C) 3.15 (सही उत्तर)
- D) 3.50
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) यह बताता है कि सीमेंट पानी की तुलना में कितना भारी है। OPC के लिए यह मान 3.15 होता है। इसे मापने के लिए 'ली-चैटेलियर फ्लास्क' (Le-Chatelier's Flask) का उपयोग किया जाता है, जिसमें पानी के स्थान पर मिट्टी का तेल (Kerosene) इस्तेमाल होता है क्योंकि सीमेंट मिट्टी के तेल के साथ प्रतिक्रिया (Hydration) नहीं करता है।
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) यह बताता है कि सीमेंट पानी की तुलना में कितना भारी है। OPC के लिए यह मान 3.15 होता है। इसे मापने के लिए 'ली-चैटेलियर फ्लास्क' (Le-Chatelier's Flask) का उपयोग किया जाता है, जिसमें पानी के स्थान पर मिट्टी का तेल (Kerosene) इस्तेमाल होता है क्योंकि सीमेंट मिट्टी के तेल के साथ प्रतिक्रिया (Hydration) नहीं करता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPPCL JE 2019, MP Vyapam
Q167: लकड़ी (Timber) को सुखाने (Seasoning) की वह कौन सी विधि है जो सबसे तेज़ है और जिसमें लकड़ी के नमी स्तर (Moisture content) पर सबसे अधिक नियंत्रण रहता है?
- A) प्राकृतिक संशोषण (Natural/Air Seasoning)
- B) जल संशोषण (Water Seasoning)
- ✅ C) भट्ठा संशोषण (Kiln Seasoning) (सही उत्तर)
- D) रासायनिक संशोषण (Chemical Seasoning)
💡 डिटेल Explanation:
भट्ठा संशोषण (Kiln Seasoning) एक कृत्रिम विधि है जिसमें लकड़ी को एक बड़े ओवन (भट्ठे) में रखकर गर्म हवा से सुखाया जाता है। यह सबसे तेज़ और प्रभावी विधि है क्योंकि इसमें तापमान और आर्द्रता (Humidity) को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे लकड़ी मनचाहे नमी स्तर (जैसे 10% - 12%) तक बहुत जल्दी सूख जाती है।
भट्ठा संशोषण (Kiln Seasoning) एक कृत्रिम विधि है जिसमें लकड़ी को एक बड़े ओवन (भट्ठे) में रखकर गर्म हवा से सुखाया जाता है। यह सबसे तेज़ और प्रभावी विधि है क्योंकि इसमें तापमान और आर्द्रता (Humidity) को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे लकड़ी मनचाहे नमी स्तर (जैसे 10% - 12%) तक बहुत जल्दी सूख जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q168: चिनाई (Masonry) में उपयोग की जाने वाली एक मॉड्यूलर ईंट (Modular Brick) का 'नामित आकार' (Nominal Size - मोर्टार सहित आकार) क्या होता है?
- A) 19 cm × 9 cm × 9 cm
- ✅ B) 20 cm × 10 cm × 10 cm (सही उत्तर)
- C) 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm
- D) 19 cm × 19 cm × 9 cm
💡 डिटेल Explanation:
छात्र अक्सर Standard Size और Nominal Size में भ्रमित होते हैं:
छात्र अक्सर Standard Size और Nominal Size में भ्रमित होते हैं:
- मानक आकार (Standard / Actual Size): यह ईंट का वास्तविक आकार है जो 19 × 9 × 9 cm होता है।
- नामित आकार (Nominal Size): यह ईंट का आकार मसाले (मोर्टार) के जोड़ के साथ होता है। चूँकि जोड़ की मोटाई 1 cm मानी जाती है, इसलिए आकार (19+1) × (9+1) × (9+1) = 20 × 10 × 10 cm हो जाता है। इसका उपयोग चिनाई की गणना (Estimation) के लिए किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, LMRC JE 2018
Q169: एल्युमिनियम पेंट (Aluminium Paint) में 'बेस' (Base) के रूप में मुख्य रूप से किस पदार्थ का उपयोग किया जाता है?
- A) वाइट लेड (White Lead)
- ✅ B) एल्युमिनियम पाउडर (Aluminium Powder) (सही उत्तर)
- C) जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide)
- D) टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide)
💡 डिटेल Explanation:
एल्युमिनियम पेंट में बेस के रूप में बहुत महीन पिसा हुआ एल्युमिनियम पाउडर इस्तेमाल किया जाता है, जिसे स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish) में घोला जाता है। यह पेंट बहुत अच्छी तरह से धूप (Heat) को परावर्तित (Reflect) करता है और इसका उपयोग पानी के पाइप, गैस टैंक और धातु की छतों पर किया जाता है।
एल्युमिनियम पेंट में बेस के रूप में बहुत महीन पिसा हुआ एल्युमिनियम पाउडर इस्तेमाल किया जाता है, जिसे स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish) में घोला जाता है। यह पेंट बहुत अच्छी तरह से धूप (Heat) को परावर्तित (Reflect) करता है और इसका उपयोग पानी के पाइप, गैस टैंक और धातु की छतों पर किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, UKPSC JE
Q170: डफ एब्रम्स (Duff Abrams) के 'जल-सीमेंट अनुपात नियम' (Water-Cement Ratio Law) के अनुसार, पूरी तरह से कॉम्पैक्ट की गई कंक्रीट की सामर्थ्य मुख्य रूप से किस पर निर्भर करती है?
- A) मिलावे (Aggregates) के आकार पर
- B) मिलावे (Aggregates) और सीमेंट के अनुपात पर
- ✅ C) केवल जल और सीमेंट के अनुपात (Water-Cement Ratio) पर (सही उत्तर)
- D) कंक्रीट की तराई अवधि (Curing time) पर
💡 डिटेल Explanation:
प्रोफेसर डफ एब्रम्स के नियम (1918) के अनुसार: "यदि कंक्रीट पूरी तरह से कॉम्पैक्ट (Fully compacted) है, तो उसकी संपीडन सामर्थ्य केवल और केवल जल-सीमेंट अनुपात (Water-Cement Ratio) पर निर्भर करती है, न कि एग्रीगेट के आकार या प्रकार पर।" जल-सीमेंट अनुपात जितना अधिक होगा, कंक्रीट उतनी ही कमज़ोर (Weak) होगी।
प्रोफेसर डफ एब्रम्स के नियम (1918) के अनुसार: "यदि कंक्रीट पूरी तरह से कॉम्पैक्ट (Fully compacted) है, तो उसकी संपीडन सामर्थ्य केवल और केवल जल-सीमेंट अनुपात (Water-Cement Ratio) पर निर्भर करती है, न कि एग्रीगेट के आकार या प्रकार पर।" जल-सीमेंट अनुपात जितना अधिक होगा, कंक्रीट उतनी ही कमज़ोर (Weak) होगी।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 35 (Q171 - Q175)
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2017, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q171: निर्माण कार्यों में 'क्रियोसोट तेल' (Creosote Oil) का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
- A) पेंट को पतला करने के लिए (थिनर के रूप में)
- B) कंक्रीट की तराई (Curing) के लिए
- ✅ C) लकड़ी के परिरक्षण (Preservation of timber) के लिए (सही उत्तर)
- D) ईंटों को सीलन से बचाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
क्रियोसोट तेल (Creosote Oil) कोल टार (Coal tar) के आसवन (Distillation) से प्राप्त होता है। यह एक बहुत ही शक्तिशाली और सस्ता लकड़ी का परिरक्षक (Preservative) है। यह लकड़ी को दीमक और फंगस से बचाता है। इसका सबसे अधिक उपयोग रेलवे के लकड़ी के स्लीपरों (Railway sleepers) और टेलीफोन के खंभों को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है।
क्रियोसोट तेल (Creosote Oil) कोल टार (Coal tar) के आसवन (Distillation) से प्राप्त होता है। यह एक बहुत ही शक्तिशाली और सस्ता लकड़ी का परिरक्षक (Preservative) है। यह लकड़ी को दीमक और फंगस से बचाता है। इसका सबसे अधिक उपयोग रेलवे के लकड़ी के स्लीपरों (Railway sleepers) और टेलीफोन के खंभों को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2018, UPPCL JE 2019, DMRC JE
Q172: यदि किसी बालू (Sand / Fine Aggregate) का 'सूक्ष्मता मापांक' (Fineness Modulus) 2.6 से 2.9 के बीच है, तो उसे किस श्रेणी में रखा जाएगा?
- A) महीन बालू (Fine Sand)
- ✅ B) मध्यम बालू (Medium Sand) (सही उत्तर)
- C) मोटी बालू (Coarse Sand)
- D) बजरी (Gravel)
💡 डिटेल Explanation:
सूक्ष्मता मापांक (Fineness Modulus) एग्रीगेट के औसत आकार को दर्शाता है। यह मान जितना अधिक होगा, बालू उतनी ही मोटी होगी।
सूक्ष्मता मापांक (Fineness Modulus) एग्रीगेट के औसत आकार को दर्शाता है। यह मान जितना अधिक होगा, बालू उतनी ही मोटी होगी।
- महीन बालू (Fine Sand): 2.2 से 2.6
- मध्यम बालू (Medium Sand): 2.6 से 2.9
- मोटी बालू (Coarse Sand): 2.9 से 3.2
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, LMRC JE 2018, UPSSSC JE 2015
Q173: प्रयोगशाला में ईंटों की 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) का परीक्षण करते समय, टेस्टिंग मशीन में भार (Load) किस मानक दर (Rate) से लगाया जाता है?
- ✅ A) 14 N/mm² प्रति मिनट (सही उत्तर)
- B) 24 N/mm² प्रति मिनट
- C) 34 N/mm² प्रति मिनट
- D) 40 N/mm² प्रति मिनट
💡 डिटेल Explanation:
IS 3495 (Part 1) के अनुसार, ईंट की संपीडन सामर्थ्य जांचने के लिए उसे पानी में 24 घंटे भिगोने के बाद, उसके फ्रॉग (गड्ढे) को 1:3 के सीमेंट मोर्टार से भर दिया जाता है। परीक्षण के दौरान यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन (UTM) में भार 14 N/mm² प्रति मिनट (या 140 kg/cm²/min) की एकसमान दर से लगाया जाता है, जब तक कि ईंट टूट न जाए।
IS 3495 (Part 1) के अनुसार, ईंट की संपीडन सामर्थ्य जांचने के लिए उसे पानी में 24 घंटे भिगोने के बाद, उसके फ्रॉग (गड्ढे) को 1:3 के सीमेंट मोर्टार से भर दिया जाता है। परीक्षण के दौरान यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन (UTM) में भार 14 N/mm² प्रति मिनट (या 140 kg/cm²/min) की एकसमान दर से लगाया जाता है, जब तक कि ईंट टूट न जाए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, MP Vyapam 2016, UKPSC JE
Q174: भारी प्रबलित कंक्रीट (Heavily reinforced concrete) संरचनाओं जैसे कि स्लैब, बीम और कॉलम के निर्माण के लिए कंक्रीट का अनुशंसित 'स्लंप' (Slump value) सामान्यतः कितना होता है?
- A) 10 mm - 25 mm
- B) 25 mm - 50 mm
- ✅ C) 50 mm - 100 mm (सही उत्तर)
- D) 100 mm - 150 mm
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के अनुसार विभिन्न कार्यों के लिए सुकार्यता (Workability) अलग-अलग होती है। जहाँ सरियों (Reinforcement) का जाल घना होता है (जैसे बीम, स्लैब, कॉलम), वहाँ कंक्रीट आसानी से बहकर जगह ले सके, इसके लिए मध्यम सुकार्यता की आवश्यकता होती है। इसके लिए स्लंप का मान 50 mm से 100 mm के बीच उपयुक्त माना जाता है।
IS 456 के अनुसार विभिन्न कार्यों के लिए सुकार्यता (Workability) अलग-अलग होती है। जहाँ सरियों (Reinforcement) का जाल घना होता है (जैसे बीम, स्लैब, कॉलम), वहाँ कंक्रीट आसानी से बहकर जगह ले सके, इसके लिए मध्यम सुकार्यता की आवश्यकता होती है। इसके लिए स्लंप का मान 50 mm से 100 mm के बीच उपयुक्त माना जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2018, LMRC JE
Q175: पेंट की गई सतह का समय के साथ चमक खो देना और हाथ फेरने पर पाउडर के रूप में झड़ने लगने के दोष को क्या कहा जाता है?
- ✅ A) चॉकिंग (Chalking) (सही उत्तर)
- B) फ्लेकिंग (Flaking)
- C) क्रैज़िंग (Crazing)
- D) सापोनिफिकेशन (Saponification)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट के सूखने के कुछ समय बाद, यदि पेंट में तेल (Vehicle) की कमी हो जाए या घटिया क्वालिटी का पेंट हो, तो पेंट की परत पाउडर का रूप ले लेती है और सतह की चमक खत्म हो जाती है। इस दोष को चॉकिंग (Chalking) कहा जाता है। (जबकि 'फ्लेकिंग' में पेंट पपड़ी बनकर सतह से अलग होकर गिरने लगता है)।
पेंट के सूखने के कुछ समय बाद, यदि पेंट में तेल (Vehicle) की कमी हो जाए या घटिया क्वालिटी का पेंट हो, तो पेंट की परत पाउडर का रूप ले लेती है और सतह की चमक खत्म हो जाती है। इस दोष को चॉकिंग (Chalking) कहा जाता है। (जबकि 'फ्लेकिंग' में पेंट पपड़ी बनकर सतह से अलग होकर गिरने लगता है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 36 (Q176 - Q180)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q176: यदि कंक्रीट का 'स्लंप' (Slump) मान बढ़ता है, तो उसके 'कॉम्पैक्टिंग फैक्टर' (Compacting Factor) के मान पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- A) घटेगा (Will decrease)
- ✅ B) बढ़ेगा (Will increase) (सही उत्तर)
- C) समान रहेगा (Will remain constant)
- D) पहले घटेगा फिर बढ़ेगा
💡 डिटेल Explanation:
स्लंप परीक्षण (Slump Test) और कॉम्पैक्टिंग फैक्टर परीक्षण दोनों ही कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) को मापते हैं। कंक्रीट में पानी की मात्रा बढ़ने से उसकी सुकार्यता बढ़ती है, जिसका सीधा अर्थ है कि कंक्रीट आसानी से बहेगी। इसलिए, उच्च सुकार्यता वाली कंक्रीट के लिए स्लंप मान और कॉम्पैक्टिंग फैक्टर दोनों का मान अधिक होता है। (जैसे Medium Workability के लिए Slump 50-100mm और C.F. 0.85-0.92 होता है)।
स्लंप परीक्षण (Slump Test) और कॉम्पैक्टिंग फैक्टर परीक्षण दोनों ही कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) को मापते हैं। कंक्रीट में पानी की मात्रा बढ़ने से उसकी सुकार्यता बढ़ती है, जिसका सीधा अर्थ है कि कंक्रीट आसानी से बहेगी। इसलिए, उच्च सुकार्यता वाली कंक्रीट के लिए स्लंप मान और कॉम्पैक्टिंग फैक्टर दोनों का मान अधिक होता है। (जैसे Medium Workability के लिए Slump 50-100mm और C.F. 0.85-0.92 होता है)।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, UPPCL JE 2019, MP Vyapam
Q177: लकड़ी में 'गांठ' (Knot) नामक दोष मुख्य रूप से किस कारण से उत्पन्न होता है?
- A) कवक (Fungi) के हमले के कारण
- ✅ B) पेड़ की शाखाओं (Branches) के कटने या टूटने के आधार (Base) पर (सही उत्तर)
- C) दीमक के लगातार प्रभाव से
- D) बहुत तेजी से लकड़ी को सुखाने के कारण
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ की वृद्धि के दौरान जब कोई शाखा (Branch) टूट जाती है या काट दी जाती है, तो पेड़ का तना उस कटे हुए हिस्से के ऊपर ही बढ़ने लगता है। अंदर दबा हुआ वह शाखा का आधार एक गहरे रंग की और कठोर संरचना बन जाता है, जिसे गांठ (Knot) कहते हैं। ये गांठें लकड़ी के रेशों (Grains) की निरंतरता को तोड़ देती हैं, जिससे लकड़ी कमजोर हो जाती है।
पेड़ की वृद्धि के दौरान जब कोई शाखा (Branch) टूट जाती है या काट दी जाती है, तो पेड़ का तना उस कटे हुए हिस्से के ऊपर ही बढ़ने लगता है। अंदर दबा हुआ वह शाखा का आधार एक गहरे रंग की और कठोर संरचना बन जाता है, जिसे गांठ (Knot) कहते हैं। ये गांठें लकड़ी के रेशों (Grains) की निरंतरता को तोड़ देती हैं, जिससे लकड़ी कमजोर हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, LMRC JE 2018, UPSSSC JE 2016
Q178: भवन निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले एक अच्छे पत्थर (Good building stone) का 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) सामान्यतः किससे अधिक होना चाहिए?
- A) 1.5
- B) 2.2
- ✅ C) 2.7 (सही उत्तर)
- D) 3.5
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व जितना अधिक होता है, वह उतना ही अधिक सघन (Dense), भारी और मजबूत होता है। एक अच्छे निर्माण पत्थर (जैसे ग्रेनाइट या भारी सैंडस्टोन) का विशिष्ट गुरुत्व 2.7 से अधिक होना चाहिए। यदि यह मान 2.4 से कम है, तो पत्थर को भवन निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है।
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व जितना अधिक होता है, वह उतना ही अधिक सघन (Dense), भारी और मजबूत होता है। एक अच्छे निर्माण पत्थर (जैसे ग्रेनाइट या भारी सैंडस्टोन) का विशिष्ट गुरुत्व 2.7 से अधिक होना चाहिए। यदि यह मान 2.4 से कम है, तो पत्थर को भवन निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, RRB JE 2019, UKPSC JE
Q179: सीमेंट के निर्माण के दौरान अंतिम चरण में क्लिंकर (Clinker) को पीसते समय उसमें 2% से 3% 'जिप्सम' (Gypsum) क्यों मिलाया जाता है?
- A) सीमेंट का रंग सुधारने के लिए
- ✅ B) सीमेंट के प्रारंभिक जमाव (Flash Setting) को रोकने के लिए (सही उत्तर)
- C) सीमेंट की अंतिम संपीडन सामर्थ्य बढ़ाने के लिए
- D) सीमेंट को नमी से बचाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में मौजूद C3A (ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट) पानी के संपर्क में आते ही बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट तुरंत जम (Flash set) सकता है। इसे रोकने के लिए क्लिंकर पीसते समय जिप्सम (Gypsum - CaSO4·2H2O) मिलाया जाता है, जो एक मन्दक (Retarder) का काम करता है। यह सीमेंट के प्रारंभिक जमाव काल को 30 मिनट तक बढ़ा देता है, जिससे काम करने का समय मिल जाता है।
सीमेंट में मौजूद C3A (ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट) पानी के संपर्क में आते ही बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट तुरंत जम (Flash set) सकता है। इसे रोकने के लिए क्लिंकर पीसते समय जिप्सम (Gypsum - CaSO4·2H2O) मिलाया जाता है, जो एक मन्दक (Retarder) का काम करता है। यह सीमेंट के प्रारंभिक जमाव काल को 30 मिनट तक बढ़ा देता है, जिससे काम करने का समय मिल जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2018, DMRC JE
Q180: 'डिस्टेंपर' (Distemper) एक बहुत ही सस्ता और लोकप्रिय जल-आधारित पेंट है। इसमें 'बेस' (Base) के रूप में मुख्य रूप से किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
- A) वाइट लेड (White Lead)
- ✅ B) चॉक पाउडर / वाइटिंग (Chalk / Whiting) (सही उत्तर)
- C) एल्युमिनियम पाउडर (Aluminium powder)
- D) रेड लेड (Red Lead)
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर (Distemper) मूल रूप से पानी में घुला हुआ चाक (Chalk/Whiting) होता है। इसलिए, डिस्टेंपर का बेस 'चॉक पाउडर' होता है। इसमें पानी को वाहक (Vehicle) के रूप में और गोंद (Glue/Size) को बाइंडर के रूप में उपयोग किया जाता है। यह काफी सस्ता होता है और मुख्य रूप से प्लास्टर की गई आंतरिक दीवारों (Interior walls) पर किया जाता है।
डिस्टेंपर (Distemper) मूल रूप से पानी में घुला हुआ चाक (Chalk/Whiting) होता है। इसलिए, डिस्टेंपर का बेस 'चॉक पाउडर' होता है। इसमें पानी को वाहक (Vehicle) के रूप में और गोंद (Glue/Size) को बाइंडर के रूप में उपयोग किया जाता है। यह काफी सस्ता होता है और मुख्य रूप से प्लास्टर की गई आंतरिक दीवारों (Interior walls) पर किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 37 (Q181 - Q185)
📌 Exam Tags: SSC JE 2016 & 2018, UPSSSC JE 2015, DMRC JE
Q181: कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'स्लंप कोन' (Slump Cone) के मानक आयाम (ऊपरी व्यास, निचला व्यास और ऊंचाई) क्रमशः क्या होते हैं?
- ✅ A) 10 cm, 20 cm, 30 cm (सही उत्तर)
- B) 20 cm, 10 cm, 30 cm
- C) 10 cm, 15 cm, 30 cm
- D) 15 cm, 20 cm, 30 cm
💡 डिटेल Explanation:
स्लंप कोन एक छिन्नक (Frustum of a cone) के आकार का धातु का सांचा होता है। इसका ऊपरी व्यास (Top diameter) 10 cm (100 mm), निचला व्यास (Bottom diameter) 20 cm (200 mm) और ऊंचाई (Height) 30 cm (300 mm) होती है। यह कंक्रीट की बहने की क्षमता और गाढ़ेपन का परीक्षण करने का सबसे आम तरीका है।
स्लंप कोन एक छिन्नक (Frustum of a cone) के आकार का धातु का सांचा होता है। इसका ऊपरी व्यास (Top diameter) 10 cm (100 mm), निचला व्यास (Bottom diameter) 20 cm (200 mm) और ऊंचाई (Height) 30 cm (300 mm) होती है। यह कंक्रीट की बहने की क्षमता और गाढ़ेपन का परीक्षण करने का सबसे आम तरीका है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, UPPCL JE 2019, MP Vyapam
Q182: बहुत उच्च तापमान (High temperature) का सामना करने वाली भट्ठियों (Furnaces) और चिमनियों के अस्तर (Lining) के लिए किस प्रकार की ईंटों का उपयोग किया जाता है?
- A) फ्लाई ऐश ईंटें (Fly ash bricks)
- B) झामा ईंटें (Jhama bricks)
- ✅ C) रिफ्रैक्टरी ईंटें (Fire bricks / Refractory bricks) (सही उत्तर)
- D) खोखली ईंटें (Hollow bricks)
💡 डिटेल Explanation:
रिफ्रैक्टरी ईंटें (जिन्हें अग्नि-सह ईंटें या Fire bricks भी कहा जाता है) विशेष प्रकार की मिट्टी (Fire clay) से बनी होती हैं, जिसमें सिलिका और एल्युमिना की मात्रा बहुत अधिक होती है। ये ईंटें बिना पिघले या आकार बदले 1700°C तक का अत्यधिक तापमान सह सकती हैं।
रिफ्रैक्टरी ईंटें (जिन्हें अग्नि-सह ईंटें या Fire bricks भी कहा जाता है) विशेष प्रकार की मिट्टी (Fire clay) से बनी होती हैं, जिसमें सिलिका और एल्युमिना की मात्रा बहुत अधिक होती है। ये ईंटें बिना पिघले या आकार बदले 1700°C तक का अत्यधिक तापमान सह सकती हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2018, UKPSC JE, RRB JE
Q183: भारतीय मानक के अनुसार, भवन निर्माण (दरवाजे, खिड़कियां आदि) के लिए उपयोग की जाने वाली लकड़ी (Timber) में नमी की मात्रा (Moisture content) लगभग कितनी होनी चाहिए?
- A) 2% से 5%
- ✅ B) 10% से 12% (सही उत्तर)
- C) 18% से 22%
- D) 25% से 30%
💡 डिटेल Explanation:
ताजी कटी हुई लकड़ी में 50% से 100% तक नमी हो सकती है। लेकिन संरचनात्मक कार्यों (Structural timber) में उपयोग करने के लिए भट्ठा संशोषण (Kiln seasoning) द्वारा इसकी नमी को कम किया जाता है। भारतीय जलवायु के अनुसार, इमारती लकड़ी के लिए 10% से 12% की नमी (Moisture content) सबसे आदर्श मानी जाती है। इसी नमी स्तर पर लकड़ी की मानक सामर्थ्य (Standard strength) भी मापी जाती है।
ताजी कटी हुई लकड़ी में 50% से 100% तक नमी हो सकती है। लेकिन संरचनात्मक कार्यों (Structural timber) में उपयोग करने के लिए भट्ठा संशोषण (Kiln seasoning) द्वारा इसकी नमी को कम किया जाता है। भारतीय जलवायु के अनुसार, इमारती लकड़ी के लिए 10% से 12% की नमी (Moisture content) सबसे आदर्श मानी जाती है। इसी नमी स्तर पर लकड़ी की मानक सामर्थ्य (Standard strength) भी मापी जाती है।
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Q184: साधारण ऑयल पेंट (Oil paint) में 'वाहक' (Vehicle) या 'बाइंडर' के रूप में सबसे अधिक किस तेल का उपयोग किया जाता है?
- A) तारपीन का तेल (Turpentine Oil)
- B) मिट्टी का तेल (Kerosene)
- ✅ C) अलसी का तेल (Linseed Oil) (सही उत्तर)
- D) पाम ऑयल (Palm Oil)
💡 डिटेल Explanation:
ऑयल पेंट्स में 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) सबसे लोकप्रिय और उत्कृष्ट वाहक (Vehicle) है। यह पेंट के सभी घटकों (जैसे Base और Pigment) को अपने अंदर घोलकर सतह पर फैलाता है। जब इसे सतह पर लगाया जाता है, तो यह हवा से ऑक्सीजन सोखकर (Oxidize होकर) एक कठोर और टिकाऊ फिल्म बना लेता है।
ऑयल पेंट्स में 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) सबसे लोकप्रिय और उत्कृष्ट वाहक (Vehicle) है। यह पेंट के सभी घटकों (जैसे Base और Pigment) को अपने अंदर घोलकर सतह पर फैलाता है। जब इसे सतह पर लगाया जाता है, तो यह हवा से ऑक्सीजन सोखकर (Oxidize होकर) एक कठोर और टिकाऊ फिल्म बना लेता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, DMRC JE 2017, RRB JE 2019
Q185: 'ढलवां लोहे' (Cast Iron) में कार्बन की मात्रा (Carbon content) लगभग कितने प्रतिशत होती है, जो इसे अत्यधिक भंगुर (Brittle) बनाती है?
- A) 0.15% से 0.30%
- B) 0.60% से 1.50%
- ✅ C) 2.0% से 4.5% (सही उत्तर)
- D) 5.0% से 8.0%
💡 डिटेल Explanation:
ढलवां लोहे (Cast Iron) में कार्बन की मात्रा 2% से 4.5% के बीच होती है। इतनी अधिक कार्बन मात्रा के कारण यह बहुत कठोर (Hard) और संपीडन (Compression) में मजबूत होता है, लेकिन अत्यधिक भंगुर (Brittle) हो जाता है। यह झटके (Impact) सहने के लिए उपयुक्त नहीं है और इसे माइल्ड स्टील की तरह आसानी से मोड़ा या खींचा नहीं जा सकता।
ढलवां लोहे (Cast Iron) में कार्बन की मात्रा 2% से 4.5% के बीच होती है। इतनी अधिक कार्बन मात्रा के कारण यह बहुत कठोर (Hard) और संपीडन (Compression) में मजबूत होता है, लेकिन अत्यधिक भंगुर (Brittle) हो जाता है। यह झटके (Impact) सहने के लिए उपयुक्त नहीं है और इसे माइल्ड स्टील की तरह आसानी से मोड़ा या खींचा नहीं जा सकता।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 38 (Q186 - Q190)
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Q186: कंक्रीट में सूखने पर होने वाली सिकुड़न (Drying Shrinkage) को रोकने या कम करने के लिए किस विशेष प्रकार के सीमेंट का उपयोग किया जाता है?
- A) रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (Rapid Hardening Cement)
- B) लो हीट सीमेंट (Low Heat Cement)
- ✅ C) एक्सपेंसिव सीमेंट (Expansive Cement) (सही उत्तर)
- D) सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट (Sulphate Resisting Cement)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट सूखने पर सिकुड़ती है, जिससे दरारें आ सकती हैं। इसे रोकने के लिए एक्सपेंसिव सीमेंट (Expansive Cement) का उपयोग किया जाता है। इस सीमेंट में सेट होते समय थोड़ा सा फैलाव (Expansion) होता है, जो कंक्रीट की प्राकृतिक सिकुड़न (Shrinkage) की भरपाई कर देता है। इसका उपयोग दरारों की मरम्मत (Grouting) और पानी रोकने वाली संरचनाओं में किया जाता है।
कंक्रीट सूखने पर सिकुड़ती है, जिससे दरारें आ सकती हैं। इसे रोकने के लिए एक्सपेंसिव सीमेंट (Expansive Cement) का उपयोग किया जाता है। इस सीमेंट में सेट होते समय थोड़ा सा फैलाव (Expansion) होता है, जो कंक्रीट की प्राकृतिक सिकुड़न (Shrinkage) की भरपाई कर देता है। इसका उपयोग दरारों की मरम्मत (Grouting) और पानी रोकने वाली संरचनाओं में किया जाता है।
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Q187: IS 1077 के अनुसार, 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (First Class Brick) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Minimum Compressive Strength) कितनी होनी चाहिए?
- A) 7.5 N/mm² (75 kg/cm²)
- ✅ B) 10.5 N/mm² (105 kg/cm²) (सही उत्तर)
- C) 14.0 N/mm² (140 kg/cm²)
- D) 3.5 N/mm² (35 kg/cm²)
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS Codes) के अनुसार ईंटों की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य इस प्रकार निर्धारित की गई है:
भारतीय मानक (IS Codes) के अनुसार ईंटों की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य इस प्रकार निर्धारित की गई है:
- सामान्य ईंट (Common Brick): न्यूनतम 3.5 N/mm²
- द्वितीय श्रेणी ईंट (Second Class): न्यूनतम 7.5 N/mm²
- प्रथम श्रेणी ईंट (First Class): न्यूनतम 10.5 N/mm²
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Q188: बाजार में 'प्लाईवुड' (Plywood) को मुख्य रूप से किस आधार पर निर्दिष्ट (Specified) किया जाता है?
- A) उसके वजन (Weight) से
- ✅ B) उसकी मोटाई (Thickness) से (सही उत्तर)
- C) उसके आयतन (Volume) से
- D) परतों (Veneers) की संख्या से
💡 डिटेल Explanation:
बाजार में प्लाईवुड को हमेशा उसकी मोटाई (Thickness) के आधार पर बेचा और निर्दिष्ट किया जाता है। जैसे— 3mm, 6mm, 12mm, या 18mm की प्लाईवुड। हालाँकि इसमें परतों (Veneers) की संख्या हमेशा विषम (Odd - 3, 5, 7) होती है, लेकिन इंजीनियरिंग या खरीद में इसका 'Specification' मोटाई से ही होता है।
बाजार में प्लाईवुड को हमेशा उसकी मोटाई (Thickness) के आधार पर बेचा और निर्दिष्ट किया जाता है। जैसे— 3mm, 6mm, 12mm, या 18mm की प्लाईवुड। हालाँकि इसमें परतों (Veneers) की संख्या हमेशा विषम (Odd - 3, 5, 7) होती है, लेकिन इंजीनियरिंग या खरीद में इसका 'Specification' मोटाई से ही होता है।
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Q189: पेंट का सतह के साथ आसंजन (Adhesion) कमजोर होने के कारण, पेंट का पपड़ी (Scales/Flakes) बनकर सतह से अलग होकर गिरने का दोष क्या कहलाता है?
- A) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- B) चॉकिंग (Chalking)
- ✅ C) फ्लेकिंग / पीलिंग (Flaking / Peeling) (सही उत्तर)
- D) क्रैज़िंग (Crazing)
💡 डिटेल Explanation:
जब सतह को पेंट करने से पहले ठीक से साफ न किया गया हो (धूल या ग्रीस लगी हो) या सतह नम (Damp) हो, तो पेंट सतह पर ठीक से चिपक नहीं पाता। कुछ समय बाद यह सूख कर पपड़ी (Flakes) के रूप में उखड़ने लगता है। इस दोष को फ्लेकिंग (Flaking) या पीलिंग (Peeling) कहा जाता है।
जब सतह को पेंट करने से पहले ठीक से साफ न किया गया हो (धूल या ग्रीस लगी हो) या सतह नम (Damp) हो, तो पेंट सतह पर ठीक से चिपक नहीं पाता। कुछ समय बाद यह सूख कर पपड़ी (Flakes) के रूप में उखड़ने लगता है। इस दोष को फ्लेकिंग (Flaking) या पीलिंग (Peeling) कहा जाता है।
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Q190: एक अच्छे निर्माण पत्थर (Good Building Stone) की न्यूनतम संपीडन या कुचलने की सामर्थ्य (Minimum Crushing Strength) किससे कम नहीं होनी चाहिए?
- A) 50 MPa (500 kg/cm²)
- ✅ B) 100 MPa (1000 kg/cm²) (सही उत्तर)
- C) 150 MPa (1500 kg/cm²)
- D) 20 MPa (200 kg/cm²)
💡 डिटेल Explanation:
भवन निर्माण (जैसे रिटेनिंग वॉल, पियर्स, आर्च) में उपयोग किए जाने वाले पत्थर को भारी लोड सहना पड़ता है। एक अच्छे और मजबूत निर्माण पत्थर की कुचलने की सामर्थ्य (Crushing strength) 100 N/mm² (या 100 MPa) से कम नहीं होनी चाहिए। (ग्रेनाइट की सामर्थ्य 100 से 140 MPa तक होती है)।
भवन निर्माण (जैसे रिटेनिंग वॉल, पियर्स, आर्च) में उपयोग किए जाने वाले पत्थर को भारी लोड सहना पड़ता है। एक अच्छे और मजबूत निर्माण पत्थर की कुचलने की सामर्थ्य (Crushing strength) 100 N/mm² (या 100 MPa) से कम नहीं होनी चाहिए। (ग्रेनाइट की सामर्थ्य 100 से 140 MPa तक होती है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 39 (Q191 - Q195)
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Q191: कंक्रीट निर्माण में 'वाटर-सीमेंट अनुपात' (W/C Ratio) को मापने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) स्लंप टेस्ट उपकरण
- B) वी-बी कंसिस्टोमीटर
- C) ब्लेन एयर परमीएबिलिटी उपकरण
- ✅ D) किसी उपकरण की आवश्यकता नहीं (यह डिज़ाइन का हिस्सा है) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
वाटर-सीमेंट अनुपात कोई भौतिक परीक्षण (Physical test) नहीं है जिसे उपकरण से मापा जा सके। यह कंक्रीट 'मिक्स डिज़ाइन' (Mix Design) का एक गणितीय हिस्सा है। इंजीनियर कंक्रीट की अपेक्षित मजबूती के आधार पर इसे स्वयं निर्धारित करते हैं और साइट पर पानी और सीमेंट को तौल कर (Weight batching) मिलाया जाता है।
वाटर-सीमेंट अनुपात कोई भौतिक परीक्षण (Physical test) नहीं है जिसे उपकरण से मापा जा सके। यह कंक्रीट 'मिक्स डिज़ाइन' (Mix Design) का एक गणितीय हिस्सा है। इंजीनियर कंक्रीट की अपेक्षित मजबूती के आधार पर इसे स्वयं निर्धारित करते हैं और साइट पर पानी और सीमेंट को तौल कर (Weight batching) मिलाया जाता है।
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Q192: ईंट की चिनाई में 'किंग क्लोजर' (King Closer) का उपयोग करने का मुख्य कारण क्या होता है?
- A) ईंटों की लागत कम करने के लिए
- ✅ B) вертикаल जॉइंट्स (Vertical joints) को एक सीध में आने से रोकने के लिए (सही उत्तर)
- C) चिनाई को सुंदर बनाने के लिए
- D) ईंटों का वजन कम करने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
अच्छी चिनाई (Good Bond) के लिए यह अनिवार्य है कि दीवार की अलग-अलग परतों के वर्टिकल जॉइंट्स (Vertical Joints) एक ही सीधी रेखा में न आएं (इसे 'Breaking the bond' कहते हैं)। किंग क्लोजर (ईंट का 3/4 भाग) का उपयोग करके हम कोनों पर जोड़ों को आसानी से बदल सकते हैं, जिससे बॉन्डिंग मजबूत हो जाती है।
अच्छी चिनाई (Good Bond) के लिए यह अनिवार्य है कि दीवार की अलग-अलग परतों के वर्टिकल जॉइंट्स (Vertical Joints) एक ही सीधी रेखा में न आएं (इसे 'Breaking the bond' कहते हैं)। किंग क्लोजर (ईंट का 3/4 भाग) का उपयोग करके हम कोनों पर जोड़ों को आसानी से बदल सकते हैं, जिससे बॉन्डिंग मजबूत हो जाती है।
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Q193: कंक्रीट का 'जलयोजन' (Hydration) पानी के साथ कब तक चलता है?
- A) केवल पहले 28 दिनों तक
- B) पहले 1 वर्ष तक
- ✅ C) जब तक कंक्रीट में नमी उपलब्ध रहे (जीवन भर) (सही उत्तर)
- D) जब तक कंक्रीट पूरी तरह सूख न जाए
💡 डिटेल Explanation:
जलयोजन (Hydration) सीमेंट और पानी के बीच की रासायनिक प्रतिक्रिया है। यद्यपि 28 दिनों में कंक्रीट अपनी लगभग 90% सामर्थ्य प्राप्त कर लेती है, लेकिन यह प्रतिक्रिया बहुत धीमी गति से वर्षों तक चलती रहती है, बशर्ते कंक्रीट के अंदर नमी (Water) उपलब्ध हो। इसीलिए कंक्रीट जितनी पुरानी होती है, उसकी ताकत थोड़ी-थोड़ी बढ़ती रहती है।
जलयोजन (Hydration) सीमेंट और पानी के बीच की रासायनिक प्रतिक्रिया है। यद्यपि 28 दिनों में कंक्रीट अपनी लगभग 90% सामर्थ्य प्राप्त कर लेती है, लेकिन यह प्रतिक्रिया बहुत धीमी गति से वर्षों तक चलती रहती है, बशर्ते कंक्रीट के अंदर नमी (Water) उपलब्ध हो। इसीलिए कंक्रीट जितनी पुरानी होती है, उसकी ताकत थोड़ी-थोड़ी बढ़ती रहती है।
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Q194: पत्थरों के लिए 'एसिड परीक्षण' (Acid Test) मुख्य रूप से किस दोष का पता लगाने के लिए किया जाता है?
- ✅ A) कैल्शियम कार्बोनेट की उपस्थिति का (सही उत्तर)
- B) पत्थर की कठोरता का
- C) पानी सोखने की क्षमता का
- D) पत्थर के वजन का
💡 डिटेल Explanation:
यह परीक्षण विशेष रूप से उन पत्थरों (जैसे सैंडस्टोन) के लिए किया जाता है जो शहरों के प्रदूषण (जहां वातावरण में अम्लीय गैसें होती हैं) में उपयोग होने वाले हैं। यदि पत्थर में कैल्शियम कार्बोनेट होता है, तो वह हाइड्रोक्लोरिक एसिड के संपर्क में आते ही प्रतिक्रिया करके बुलबुले छोड़ता है और खराब हो जाता है। अतः, ऐसा पत्थर बाहरी निर्माण के लिए अनुपयुक्त है।
यह परीक्षण विशेष रूप से उन पत्थरों (जैसे सैंडस्टोन) के लिए किया जाता है जो शहरों के प्रदूषण (जहां वातावरण में अम्लीय गैसें होती हैं) में उपयोग होने वाले हैं। यदि पत्थर में कैल्शियम कार्बोनेट होता है, तो वह हाइड्रोक्लोरिक एसिड के संपर्क में आते ही प्रतिक्रिया करके बुलबुले छोड़ता है और खराब हो जाता है। अतः, ऐसा पत्थर बाहरी निर्माण के लिए अनुपयुक्त है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, LMRC JE 2018
Q195: पेंट बनाने के लिए प्रयुक्त 'ड्रायर' (Drier) के रूप में कोबाल्ट (Cobalt) का उपयोग कब किया जाता है?
- ✅ A) जब हल्का या चमकदार पेंट बनाना हो (सही उत्तर)
- B) जब काला या गहरा पेंट बनाना हो
- C) जब बहुत जल्दी सुखाना हो (तत्काल)
- D) जब पेंट को सस्ता बनाना हो
💡 डिटेल Explanation:
ड्रायर के चुनाव का प्रभाव पेंट के रंग पर पड़ता है। कोबाल्ट (Cobalt) एक बहुत शक्तिशाली ड्रायर है जो पेंट के रंग को खराब नहीं करता। इसलिए, जब हमें हल्के रंग के या चमकदार (Light/Glossy) पेंट्स बनाने होते हैं, तो हम कोबाल्ट का उपयोग करते हैं। (इसके विपरीत, लिथार्ज का उपयोग डार्क कलर पेंट्स में किया जाता है क्योंकि वह पेंट के रंग को प्रभावित कर सकता है)।
ड्रायर के चुनाव का प्रभाव पेंट के रंग पर पड़ता है। कोबाल्ट (Cobalt) एक बहुत शक्तिशाली ड्रायर है जो पेंट के रंग को खराब नहीं करता। इसलिए, जब हमें हल्के रंग के या चमकदार (Light/Glossy) पेंट्स बनाने होते हैं, तो हम कोबाल्ट का उपयोग करते हैं। (इसके विपरीत, लिथार्ज का उपयोग डार्क कलर पेंट्स में किया जाता है क्योंकि वह पेंट के रंग को प्रभावित कर सकता है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 40 (Q196 - Q200)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q196: कंक्रीट का 'ब्लीडिंग' (Bleeding) दोष, जिसमें सतह पर पानी ऊपर आ जाता है, सामान्यतः किस प्रकार की कंक्रीट में अधिक होता है?
- A) सूखी (Dry) और कम सुकार्य कंक्रीट
- B) बहुत कठोर (Stiff) कंक्रीट
- ✅ C) बहुत अधिक गीली (Wet) और सुकार्य कंक्रीट (सही उत्तर)
- D) जिसमें मिलावे (Aggregates) का आकार बहुत बड़ा हो
💡 डिटेल Explanation:
ब्लीडिंग (Bleeding) का अर्थ है कंक्रीट की सतह पर पानी का ऊपर आना। यह दोष उन कंक्रीट मिश्रणों में सबसे अधिक होता है जिनमें पानी-सीमेंट अनुपात बहुत अधिक होता है (बहुत अधिक गीली कंक्रीट)। पानी के साथ सीमेंट के बहुत महीन कण भी ऊपर आ जाते हैं, जिसे 'लाटेंस' (Laitance) कहते हैं। यह कंक्रीट की ऊपरी सतह को कमजोर और धूल भरी बना देता है।
ब्लीडिंग (Bleeding) का अर्थ है कंक्रीट की सतह पर पानी का ऊपर आना। यह दोष उन कंक्रीट मिश्रणों में सबसे अधिक होता है जिनमें पानी-सीमेंट अनुपात बहुत अधिक होता है (बहुत अधिक गीली कंक्रीट)। पानी के साथ सीमेंट के बहुत महीन कण भी ऊपर आ जाते हैं, जिसे 'लाटेंस' (Laitance) कहते हैं। यह कंक्रीट की ऊपरी सतह को कमजोर और धूल भरी बना देता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, UPSSSC JE 2016, MP Vyapam
Q197: ईंटों की सतह पर 'एफ्लोरेसेंस' (Efflorescence) दोष को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
- A) ईंटों पर तेल का लेप लगाना
- ✅ B) ईंटों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली क्षारीय-मुक्त मिट्टी का उपयोग करना (सही उत्तर)
- C) ईंटों को बहुत कम तापमान पर पकाना
- D) ईंटों पर चूना पोतना
💡 डिटेल Explanation:
एफ्लोरेसेंस मिट्टी में मौजूद घुलनशील लवणों (Soluble salts/Alkalies) के कारण होता है। चूँकि इसका कारण कच्ची मिट्टी ही है, इसलिए इसे रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि ईंट बनाने के लिए ऐसी मिट्टी का चुनाव किया जाए जिसमें क्षारीय लवण न हों (Alkali-free clay)। यदि मिट्टी में लवण हैं, तो उन्हें रासायनिक रूप से न्यूट्रलाइज करना महंगा होता है।
एफ्लोरेसेंस मिट्टी में मौजूद घुलनशील लवणों (Soluble salts/Alkalies) के कारण होता है। चूँकि इसका कारण कच्ची मिट्टी ही है, इसलिए इसे रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि ईंट बनाने के लिए ऐसी मिट्टी का चुनाव किया जाए जिसमें क्षारीय लवण न हों (Alkali-free clay)। यदि मिट्टी में लवण हैं, तो उन्हें रासायनिक रूप से न्यूट्रलाइज करना महंगा होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, LMRC JE 2018, UPSSSC JE 2015
Q198: कंक्रीट का 'वी-बी कंसिस्टोमीटर टेस्ट' (Vee-Bee Consistometer Test) परिणाम किस इकाई (Unit) में देता है?
- A) मिलीमीटर (mm)
- ✅ B) सेकंड (Seconds) (सही उत्तर)
- C) न्यूटन/मी² (N/mm²)
- D) किलोग्राम/मी³ (kg/m³)
💡 डिटेल Explanation:
वी-बी परीक्षण में कंक्रीट के मिश्रण को कंपन (Vibration) दिया जाता है। इस परीक्षण का परिणाम 'वी-बी सेकंड्स' (Vee-Bee Seconds) में मापा जाता है। यह समय वह अवधि है जो कंक्रीट को शंक्वाकार से बेलनाकार सांचे में बदलने के लिए कंपन के दौरान लगती है। समय जितना कम होगा, कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) उतनी ही अधिक होगी।
वी-बी परीक्षण में कंक्रीट के मिश्रण को कंपन (Vibration) दिया जाता है। इस परीक्षण का परिणाम 'वी-बी सेकंड्स' (Vee-Bee Seconds) में मापा जाता है। यह समय वह अवधि है जो कंक्रीट को शंक्वाकार से बेलनाकार सांचे में बदलने के लिए कंपन के दौरान लगती है। समय जितना कम होगा, कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) उतनी ही अधिक होगी।
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Q199: पत्थर की ड्रेसिंग (Dressing) के दौरान पत्थर की किनारों को सीधा (Straight) बनाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
- A) रफ टूलिंग (Rough Tooling)
- B) फेसलिंग (Faceling)
- ✅ C) क्वॉइनिंग / एजिंग (Quoins / Edging) (सही उत्तर)
- D) सैंडिंग (Sanding)
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर को चिनाई के लिए तैयार करते समय, उसकी सतहों को समतल करने के अलावा उसके किनारों को सीधा करना बहुत जरूरी होता है ताकि चिनाई में जोड़ (Joints) पतले और मजबूत बन सकें। पत्थर के किनारों को सीधा और स्पष्ट करने की इस ड्रेसिंग प्रक्रिया को 'एजिंग' (Edging) कहा जाता है। कोनों (Quoins) पर इसका विशेष ध्यान दिया जाता है।
पत्थर को चिनाई के लिए तैयार करते समय, उसकी सतहों को समतल करने के अलावा उसके किनारों को सीधा करना बहुत जरूरी होता है ताकि चिनाई में जोड़ (Joints) पतले और मजबूत बन सकें। पत्थर के किनारों को सीधा और स्पष्ट करने की इस ड्रेसिंग प्रक्रिया को 'एजिंग' (Edging) कहा जाता है। कोनों (Quoins) पर इसका विशेष ध्यान दिया जाता है।
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Q200: 200 MCQ सीरीज़ पूरी होने की बधाई! एक आखिरी सवाल: ईंट बनाने की किस विधि में मिट्टी को यांत्रिक रूप से गूंथने के लिए 'पग मिल' (Pug Mill) का उपयोग किया जाता है?
- A) सॉफ्ट मड मोल्डिंग (Soft mud moulding)
- B) हैंड मोल्डिंग (Hand moulding)
- ✅ C) स्टिफ मड / मशीन मोल्डिंग (Stiff mud / Machine moulding) (सही उत्तर)
- D) ट्रेंच मोल्डिंग (Trench moulding)
💡 डिटेल Explanation:
पग मिल (Pug Mill) का उपयोग मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर ईंट बनाने के लिए किया जाता है, जिसे स्टिफ मड या मशीन मोल्डिंग विधि कहते हैं। इस मशीन में मिट्टी को यांत्रिक रूप से गूंथा जाता है और फिर एक सांचे (Die) से गुजारकर ईंटों की पट्टियां काटी जाती हैं। यह विधि हस्त-मोल्डिंग (Hand moulding) की तुलना में बहुत तेज़ और एक समान ईंटें देने वाली होती है।
पग मिल (Pug Mill) का उपयोग मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर ईंट बनाने के लिए किया जाता है, जिसे स्टिफ मड या मशीन मोल्डिंग विधि कहते हैं। इस मशीन में मिट्टी को यांत्रिक रूप से गूंथा जाता है और फिर एक सांचे (Die) से गुजारकर ईंटों की पट्टियां काटी जाती हैं। यह विधि हस्त-मोल्डिंग (Hand moulding) की तुलना में बहुत तेज़ और एक समान ईंटें देने वाली होती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 41 (Q201 - Q205)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017, UPSSSC JE 2018, DMRC JE
Q201: कंक्रीट निर्माण में 'कंक्रीट मिक्सर' (Concrete Mixer) में सभी घटकों को उचित प्रकार से मिलाने के लिए सामान्यतः कितना समय (Mixing time) दिया जाता है?
- A) 30 से 60 सेकंड
- ✅ B) 1.5 से 2 मिनट (सही उत्तर)
- C) 3 से 5 मिनट
- D) 10 मिनट
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट मिश्रण में सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी को अच्छी तरह से एकसार (Homogeneous) करने के लिए यांत्रिक मिक्सर में 1.5 से 2 मिनट का समय पर्याप्त होता है। यदि इससे कम समय दिया जाए तो मिश्रण एकसार नहीं बनेगा, और यदि बहुत अधिक समय तक मिलाया जाए तो 'सेग्रीगेशन' (Segregation) का खतरा बढ़ जाता है।
कंक्रीट मिश्रण में सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी को अच्छी तरह से एकसार (Homogeneous) करने के लिए यांत्रिक मिक्सर में 1.5 से 2 मिनट का समय पर्याप्त होता है। यदि इससे कम समय दिया जाए तो मिश्रण एकसार नहीं बनेगा, और यदि बहुत अधिक समय तक मिलाया जाए तो 'सेग्रीगेशन' (Segregation) का खतरा बढ़ जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q202: पत्थर के 'टफनेस टेस्ट' (Toughness Test) के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) लॉस एंजिल्स मशीन
- ✅ B) इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन (Impact Testing Machine) (सही उत्तर)
- C) शेरल मशीन
- D) यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर की 'टफनेस' (Toughness) का अर्थ है उसके झटके (Impact) सहने की क्षमता। इसे मापने के लिए इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन (Impact Testing Machine) का उपयोग होता है, जिसमें पत्थर के बेलनाकार नमूने (Cylindrical specimen) पर एक निश्चित वजन का हथौड़ा गिराया जाता है। इससे मिलने वाले 'इम्पैक्ट वैल्यू' (Impact Value) से पता चलता है कि सड़क निर्माण में वह पत्थर कितना टिकाऊ होगा।
पत्थर की 'टफनेस' (Toughness) का अर्थ है उसके झटके (Impact) सहने की क्षमता। इसे मापने के लिए इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन (Impact Testing Machine) का उपयोग होता है, जिसमें पत्थर के बेलनाकार नमूने (Cylindrical specimen) पर एक निश्चित वजन का हथौड़ा गिराया जाता है। इससे मिलने वाले 'इम्पैक्ट वैल्यू' (Impact Value) से पता चलता है कि सड़क निर्माण में वह पत्थर कितना टिकाऊ होगा।
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Q203: सीमेंट के 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) को नियंत्रित करने के लिए जिप्सम (Gypsum) के अलावा और क्या मिलाया जा सकता है?
- A) कैल्शियम क्लोराइड
- ✅ B) चीनी (Sugar) (सही उत्तर)
- C) सोडा ऐश
- D) एल्युमिनियम सल्फेट
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट के जमाव काल को बढ़ाने (Delayed setting) के लिए जिप्सम सबसे आम है। लेकिन यदि कंक्रीट निर्माण में मन्दक (Retarder) की आवश्यकता हो, तो चीनी (Sugar) का उपयोग किया जा सकता है। बहुत थोड़ी मात्रा में चीनी मिलाने से सीमेंट का जमाव काफी देर तक टल जाता है, जिसका उपयोग कभी-कभी विशेष परिस्थितियों में किया जाता है।
सीमेंट के जमाव काल को बढ़ाने (Delayed setting) के लिए जिप्सम सबसे आम है। लेकिन यदि कंक्रीट निर्माण में मन्दक (Retarder) की आवश्यकता हो, तो चीनी (Sugar) का उपयोग किया जा सकता है। बहुत थोड़ी मात्रा में चीनी मिलाने से सीमेंट का जमाव काफी देर तक टल जाता है, जिसका उपयोग कभी-कभी विशेष परिस्थितियों में किया जाता है।
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Q204: ईंट बनाने की 'ट्रेंच मोल्डिंग' (Trench moulding) विधि मुख्य रूप से किसके लिए उपयोग की जाती है?
- ✅ A) मिट्टी को गीला करने और तैयार करने के लिए (सही उत्तर)
- B) ईंट पकाने के लिए भट्ठा बनाने हेतु
- C) ईंटों को सुखाने के लिए
- D) ईंटों के आकार की जांच के लिए
💡 डिटेल Explanation:
ट्रेंच मोल्डिंग (Trench moulding) कोई ईंट सांचे में डालने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मिट्टी को तैयार करने का एक तरीका है। इसमें ज़मीन में एक लंबी खाई (Trench) खोदकर मिट्टी को पानी के साथ भिगोया जाता है और उसे अच्छी तरह गूंथा जाता है ताकि वह ढलाई के योग्य बन सके। यह छोटे स्तर पर ईंट बनाने की एक पुरानी विधि है।
ट्रेंच मोल्डिंग (Trench moulding) कोई ईंट सांचे में डालने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मिट्टी को तैयार करने का एक तरीका है। इसमें ज़मीन में एक लंबी खाई (Trench) खोदकर मिट्टी को पानी के साथ भिगोया जाता है और उसे अच्छी तरह गूंथा जाता है ताकि वह ढलाई के योग्य बन सके। यह छोटे स्तर पर ईंट बनाने की एक पुरानी विधि है।
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Q205: सीमेंट के 'साउंडनेस' (Soundness) टेस्ट का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) सीमेंट के जमाव काल की जांच करना
- ✅ B) सीमेंट के जमने के बाद होने वाले आयतन परिवर्तन (Volume change) का पता लगाना (सही उत्तर)
- C) सीमेंट की संपीडन सामर्थ्य जांचना
- D) सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) मापना
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का साउंडनेस (Soundness) परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि सीमेंट के जमने और कठोर होने के बाद उसका आयतन (Volume) अनियंत्रित रूप से न बढ़े। यदि ऐसा होता है, तो कंक्रीट संरचना में दरारें आ सकती हैं। यह टेस्ट मुख्य रूप से अनबुझे चूने (Free lime) या मैग्नीशिया (Magnesia) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है।
सीमेंट का साउंडनेस (Soundness) परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि सीमेंट के जमने और कठोर होने के बाद उसका आयतन (Volume) अनियंत्रित रूप से न बढ़े। यदि ऐसा होता है, तो कंक्रीट संरचना में दरारें आ सकती हैं। यह टेस्ट मुख्य रूप से अनबुझे चूने (Free lime) या मैग्नीशिया (Magnesia) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 42 (Q206 - Q210)
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Q206: लकड़ी की 'सीज़निंग' (Seasoning) के लिए 'वॉटर सीज़निंग' (Water Seasoning) विधि का मुख्य लाभ क्या है?
- A) यह सबसे तेज़ विधि है
- B) यह सबसे महंगी विधि है
- ✅ C) यह सैप (Sap) को बाहर निकालने में बहुत प्रभावी है (सही उत्तर)
- D) इसमें किसी कौशल की आवश्यकता नहीं होती
💡 डिटेल Explanation:
वॉटर सीज़निंग में लकड़ी के लट्ठों को बहते पानी में रखा जाता है। पानी के बहाव के कारण, लकड़ी के अंदर मौजूद सैप (Sap - मीठा रस) बाहर बह जाता है, जिससे लकड़ी में दीमक या कवक लगने का खतरा कम हो जाता है। इसके बाद जब लकड़ी को बाहर निकालकर सुखाया जाता है, तो वह जल्दी और बिना दरार पड़े सूखती है।
वॉटर सीज़निंग में लकड़ी के लट्ठों को बहते पानी में रखा जाता है। पानी के बहाव के कारण, लकड़ी के अंदर मौजूद सैप (Sap - मीठा रस) बाहर बह जाता है, जिससे लकड़ी में दीमक या कवक लगने का खतरा कम हो जाता है। इसके बाद जब लकड़ी को बाहर निकालकर सुखाया जाता है, तो वह जल्दी और बिना दरार पड़े सूखती है।
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Q207: ईंट की चिनाई में 'इंग्लिश बॉन्ड' (English Bond) और 'फ्लेमिश बॉन्ड' (Flemish Bond) में से कौन सा बॉन्ड अधिक मजबूत माना जाता है?
- ✅ A) इंग्लिश बॉन्ड (English Bond) (सही उत्तर)
- B) फ्लेमिश बॉन्ड (Flemish Bond)
- C) दोनों की मजबूती समान होती है
- D) पत्थर की चिनाई का उपयोग करना बेहतर है
💡 डिटेल Explanation:
इंग्लिश बॉन्ड में एक परत 'हेडर' (Header) और एक परत 'स्ट्रेचर' (Stretcher) की होती है। यह बॉन्ड संरचनात्मक रूप से (Structurally) सबसे मजबूत माना जाता है और भारी भार वहन करने वाली दीवारों के लिए सबसे उपयुक्त है। इसके विपरीत, फ्लेमिश बॉन्ड देखने में अधिक सुंदर होता है, लेकिन इंग्लिश बॉन्ड की तुलना में कम मजबूत होता है।
इंग्लिश बॉन्ड में एक परत 'हेडर' (Header) और एक परत 'स्ट्रेचर' (Stretcher) की होती है। यह बॉन्ड संरचनात्मक रूप से (Structurally) सबसे मजबूत माना जाता है और भारी भार वहन करने वाली दीवारों के लिए सबसे उपयुक्त है। इसके विपरीत, फ्लेमिश बॉन्ड देखने में अधिक सुंदर होता है, लेकिन इंग्लिश बॉन्ड की तुलना में कम मजबूत होता है।
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Q208: कंक्रीट में 'एडमिक्सचर' (Admixture) के रूप में 'कैल्शियम क्लोराइड' (Calcium Chloride) का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
- A) जमने का समय बढ़ाने के लिए (Retarder)
- ✅ B) जमने का समय घटाने के लिए (Accelerator) (सही उत्तर)
- C) सुकार्यता बढ़ाने के लिए
- D) वजन कम करने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
कैल्शियम क्लोराइड (CaCl2) एक बहुत प्रसिद्ध 'त्वरक' (Accelerator) है। यह सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की गति को तेज कर देता है, जिससे कंक्रीट बहुत जल्दी जम (Set) जाती है। इसका मुख्य उपयोग ठंडे मौसम में कंक्रीट बनाने के लिए किया जाता है ताकि जमने से पहले कंक्रीट में बर्फ न जमे। (नोट: RCC में इसका उपयोग वर्जित है क्योंकि यह सरियों में जंग लगा सकता है।)
कैल्शियम क्लोराइड (CaCl2) एक बहुत प्रसिद्ध 'त्वरक' (Accelerator) है। यह सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की गति को तेज कर देता है, जिससे कंक्रीट बहुत जल्दी जम (Set) जाती है। इसका मुख्य उपयोग ठंडे मौसम में कंक्रीट बनाने के लिए किया जाता है ताकि जमने से पहले कंक्रीट में बर्फ न जमे। (नोट: RCC में इसका उपयोग वर्जित है क्योंकि यह सरियों में जंग लगा सकता है।)
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Q209: पत्थर के 'टफनेस टेस्ट' में, यदि पत्थर की टफनेस इंडेक्स (Toughness Index) 13 से 19 के बीच है, तो उस पत्थर को क्या माना जाता है?
- A) बहुत कम टफ (Low toughness)
- ✅ B) मध्यम टफ (Medium toughness) (सही उत्तर)
- C) अत्यधिक टफ (High toughness)
- D) भंगुर (Brittle)
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर की टफनेस (Toughness) का वर्गीकरण:
पत्थर की टफनेस (Toughness) का वर्गीकरण:
- 13 से कम: कम टफ (Low)
- 13 से 19: मध्यम टफ (Medium)
- 19 से अधिक: अत्यधिक टफ (High)
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Q210: 210 MCQ सीरीज़ पूरी होने की बधाई! अंतिम प्रश्न: कौन सा घटक (Component) पेंट में 'सुखाने की प्रक्रिया' (Drying process) में सहायता करता है?
- A) बेस (Base)
- B) पिगमेंट (Pigment)
- ✅ C) ड्रायर (Drier) (सही उत्तर)
- D) थिनर (Thinner)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'ड्रायर' (Drier) का कार्य पेंट को लगाने के बाद उसकी सूखने (सुखाने) की प्रक्रिया को तेज़ करना है। यह पेंट के वाहक (Vehicle/Oil) के साथ मिलकर ऑक्सीजन को सोखता है (Oxidation) और फिल्म के जमने की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है। प्रमुख ड्रायर में कोबाल्ट, लेड, और मैंगनीज के साल्ट्स शामिल हैं।
पेंट में 'ड्रायर' (Drier) का कार्य पेंट को लगाने के बाद उसकी सूखने (सुखाने) की प्रक्रिया को तेज़ करना है। यह पेंट के वाहक (Vehicle/Oil) के साथ मिलकर ऑक्सीजन को सोखता है (Oxidation) और फिल्म के जमने की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है। प्रमुख ड्रायर में कोबाल्ट, लेड, और मैंगनीज के साल्ट्स शामिल हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 43 (Q211 - Q215)
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Q211: कंक्रीट में 'ब्लीडिंग' (Bleeding) को रोकने या कम करने के लिए किस प्रकार के 'एडमिक्सचर' (Admixture) का उपयोग किया जाता है?
- A) त्वरित एडमिक्सचर (Accelerators)
- B) प्लास्टिकाइज़र (Plasticizers)
- ✅ C) वायु प्रवेशक एडमिक्सचर (Air Entraining Admixtures) (सही उत्तर)
- D) मंदक (Retarders)
💡 डिटेल Explanation:
वायु प्रवेशक (Air Entraining) एडमिक्सचर कंक्रीट में लाखों सूक्ष्म हवा के बुलबुले पैदा करते हैं। ये बुलबुले पानी के प्रवाह को रोकते हैं और कंक्रीट में एक तरह का 'बॉल-बेयरिंग' प्रभाव पैदा करते हैं, जिससे पानी को सतह पर आने से रोका जा सकता है। यह ब्लीडिंग को कम करने और कंक्रीट की ठंडे मौसम के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Frost resistance) को बढ़ाने के लिए बहुत प्रभावी है।
वायु प्रवेशक (Air Entraining) एडमिक्सचर कंक्रीट में लाखों सूक्ष्म हवा के बुलबुले पैदा करते हैं। ये बुलबुले पानी के प्रवाह को रोकते हैं और कंक्रीट में एक तरह का 'बॉल-बेयरिंग' प्रभाव पैदा करते हैं, जिससे पानी को सतह पर आने से रोका जा सकता है। यह ब्लीडिंग को कम करने और कंक्रीट की ठंडे मौसम के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Frost resistance) को बढ़ाने के लिए बहुत प्रभावी है।
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Q212: ईंट की चिनाई में 'हेडर बॉन्ड' (Header Bond) का उपयोग सामान्यतः किस प्रकार की दीवार निर्माण के लिए किया जाता है?
- ✅ A) घुमावदार (Curved) दीवारों के निर्माण के लिए (सही उत्तर)
- B) सीधी (Straight) भारी भार वहन करने वाली दीवारों के लिए
- C) नींव की दीवारों के लिए
- D) केवल आंतरिक विभाजन (Partition) दीवारों के लिए
💡 डिटेल Explanation:
हेडर बॉन्ड में प्रत्येक परत में ईंटों को उनके छोटे सिरे (हेडर) बाहर की ओर रखते हुए बिछाया जाता है। क्योंकि हेडर की लंबाई कम होती है, इसलिए यह बॉन्ड बहुत ही आसानी से घुमावदार (Curved) या वृत्ताकार दीवारों में ईंटों को सेट करने की अनुमति देता है। यह देखने में भी आकर्षक लगता है।
हेडर बॉन्ड में प्रत्येक परत में ईंटों को उनके छोटे सिरे (हेडर) बाहर की ओर रखते हुए बिछाया जाता है। क्योंकि हेडर की लंबाई कम होती है, इसलिए यह बॉन्ड बहुत ही आसानी से घुमावदार (Curved) या वृत्ताकार दीवारों में ईंटों को सेट करने की अनुमति देता है। यह देखने में भी आकर्षक लगता है।
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Q213: लकड़ी के 'परिरक्षण' (Preservation) के लिए 'प्रेशर' या 'वैक्यूम' विधि का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
- A) यह सस्ती और सरल विधि है
- B) इसमें लकड़ी को सुखाने की आवश्यकता नहीं होती
- ✅ C) रसायन लकड़ी के अंदर तक (Deep penetration) प्रवेश कर जाते हैं (सही उत्तर)
- D) यह केवल लकड़ी की ऊपरी सतह पर काम करती है
💡 डिटेल Explanation:
सामान्य ब्रश या छिड़काव विधि से परिरक्षक (Preservative) केवल सतह पर लगता है। लेकिन प्रेशर या वैक्यूम विधि (Pressure/Vacuum method) में लकड़ी को एक एयर-टाइट सिलेंडर में रखा जाता है। इसमें प्रेशर के माध्यम से परिरक्षक को लकड़ी के रोम-रोम (Deep into the fibers) तक पहुँचाया जाता है, जिससे लकड़ी सालों-साल दीमक और फंगस से सुरक्षित रहती है।
सामान्य ब्रश या छिड़काव विधि से परिरक्षक (Preservative) केवल सतह पर लगता है। लेकिन प्रेशर या वैक्यूम विधि (Pressure/Vacuum method) में लकड़ी को एक एयर-टाइट सिलेंडर में रखा जाता है। इसमें प्रेशर के माध्यम से परिरक्षक को लकड़ी के रोम-रोम (Deep into the fibers) तक पहुँचाया जाता है, जिससे लकड़ी सालों-साल दीमक और फंगस से सुरक्षित रहती है।
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Q214: पेंट में 'बेस' (Base) के रूप में 'लिथार्ज' (Litharge) का उपयोग कब किया जाता है?
- A) चमकदार (Glossy) पेंट बनाने के लिए
- B) हल्के रंग के पेंट के लिए
- ✅ C) अंधेरे या गहरे रंग के पेंट के लिए (सही उत्तर)
- D) केवल लकड़ी के फर्नीचर के लिए
💡 डिटेल Explanation:
लिथार्ज (Litharge - PbO/Lead Monoxide) एक बहुत शक्तिशाली 'ड्रायर' और 'बेस' दोनों का काम करता है। यह गहरे रंग का होता है, इसलिए इसका उपयोग केवल ऐसे पेंट के लिए किया जाता है जहां रंग का गहरा होना कोई समस्या न हो, जैसे - लोहे की ग्रिल, खंभों या बाहरी धातुओं के लिए गहरे रंग के पेंट।
लिथार्ज (Litharge - PbO/Lead Monoxide) एक बहुत शक्तिशाली 'ड्रायर' और 'बेस' दोनों का काम करता है। यह गहरे रंग का होता है, इसलिए इसका उपयोग केवल ऐसे पेंट के लिए किया जाता है जहां रंग का गहरा होना कोई समस्या न हो, जैसे - लोहे की ग्रिल, खंभों या बाहरी धातुओं के लिए गहरे रंग के पेंट।
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Q215: एक 'अच्छे कंक्रीट मिक्स' में कौन से गुण (Properties) होने चाहिए?
- A) केवल अधिक सामर्थ्य (Strength)
- B) केवल अच्छी सुकार्यता (Workability)
- ✅ C) अच्छी सुकार्यता, सामर्थ्य और स्थायित्व (Workability, Strength & Durability) (सही उत्तर)
- D) केवल कम लागत (Low Cost)
💡 डिटेल Explanation:
एक 'अच्छी कंक्रीट' के लिए ये तीन गुण अनिवार्य हैं:
एक 'अच्छी कंक्रीट' के लिए ये तीन गुण अनिवार्य हैं:
- सुकार्यता (Workability): ताकि उसे आसानी से सांचे में ढाला जा सके।
- सामर्थ्य (Strength): ताकि वह डिजाइन भार को सह सके।
- स्थायित्व (Durability): ताकि वह मौसम और वातावरण के प्रभाव (जंग, सल्फेट अटैक) के बावजूद सालों तक सुरक्षित रहे।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 44 (Q216 - Q220)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2015, RRB JE
Q216: ईंट बनाने की किस विधि में मिट्टी को 'पाउडर' (Powder) के रूप में तैयार किया जाता है और फिर उच्च दबाव (High Pressure) का उपयोग किया जाता है?
- A) सॉफ्ट मड मोल्डिंग (Soft mud moulding)
- B) स्टिफ मड मोल्डिंग (Stiff mud moulding)
- ✅ C) ड्राई प्रेस मोल्डिंग (Dry press moulding) (सही उत्तर)
- D) हैंड मोल्डिंग (Hand moulding)
💡 डिटेल Explanation:
'ड्राई प्रेस मोल्डिंग' में मिट्टी में बहुत कम या न के बराबर नमी (लगभग 5-10%) रखी जाती है। मिट्टी को पहले सुखाकर उसका बारीक पाउडर बनाया जाता है, फिर सांचे (Steel mould) में भरकर बहुत उच्च हाइड्रोलिक दबाव (High pressure) से ईंट को आकार दिया जाता है। इस विधि से बनी ईंटें बहुत मजबूत और आकार में एकदम सटीक होती हैं।
'ड्राई प्रेस मोल्डिंग' में मिट्टी में बहुत कम या न के बराबर नमी (लगभग 5-10%) रखी जाती है। मिट्टी को पहले सुखाकर उसका बारीक पाउडर बनाया जाता है, फिर सांचे (Steel mould) में भरकर बहुत उच्च हाइड्रोलिक दबाव (High pressure) से ईंट को आकार दिया जाता है। इस विधि से बनी ईंटें बहुत मजबूत और आकार में एकदम सटीक होती हैं।
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Q217: कंक्रीट निर्माण में प्रयुक्त 'प्लास्टिकाइज़र' (Plasticizer) का मुख्य कार्य क्या है?
- A) कंक्रीट की सामर्थ्य बढ़ाना (Strength)
- ✅ B) जल-सीमेंट अनुपात घटाकर सुकार्यता (Workability) बढ़ाना (सही उत्तर)
- C) जमने के समय को कम करना
- D) कंक्रीट को हल्का करना
💡 डिटेल Explanation:
प्लास्टिकाइज़र कंक्रीट में पानी की आवश्यकता को कम कर देते हैं, फिर भी कंक्रीट के मिश्रण को अधिक सुकार्य (Flowable) बनाए रखते हैं। यदि हम बिना प्लास्टिकाइज़र के कम पानी का उपयोग करेंगे, तो कंक्रीट बहुत सख्त हो जाएगी और उसे ढालना मुश्किल होगा। जल-सीमेंट अनुपात घटने से बाद में कंक्रीट की सामर्थ्य (Strength) में काफी वृद्धि होती है।
प्लास्टिकाइज़र कंक्रीट में पानी की आवश्यकता को कम कर देते हैं, फिर भी कंक्रीट के मिश्रण को अधिक सुकार्य (Flowable) बनाए रखते हैं। यदि हम बिना प्लास्टिकाइज़र के कम पानी का उपयोग करेंगे, तो कंक्रीट बहुत सख्त हो जाएगी और उसे ढालना मुश्किल होगा। जल-सीमेंट अनुपात घटने से बाद में कंक्रीट की सामर्थ्य (Strength) में काफी वृद्धि होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, LMRC JE
Q218: लकड़ी के 'हार्ट शेक' (Heart Shake) दोष का मुख्य कारण क्या है?
- ✅ A) पेड़ के केंद्र (Pith) से बाहर की ओर आने वाली दरारें (सही उत्तर)
- B) तेज़ हवाओं के कारण रेशों का कुचलना
- C) कवक द्वारा लकड़ी को खोखला करना
- D) बहुत अधिक नमी के कारण फूलना
💡 डिटेल Explanation:
'हार्ट शेक' एक परिपक्व (Over-matured) पेड़ में होने वाला दोष है। पेड़ का केंद्र (Pith/Heart) जैसे-जैसे बूढ़ा होता है, वह सिकुड़ने लगता है। इस सिकुड़न के कारण केंद्र से बाहर की ओर (अनुदैर्ध्य दिशा में) दरारें पड़ जाती हैं। इसे 'हार्ट शेक' कहते हैं, जो लकड़ी को दो या अधिक टुकड़ों में विभाजित कर सकता है।
'हार्ट शेक' एक परिपक्व (Over-matured) पेड़ में होने वाला दोष है। पेड़ का केंद्र (Pith/Heart) जैसे-जैसे बूढ़ा होता है, वह सिकुड़ने लगता है। इस सिकुड़न के कारण केंद्र से बाहर की ओर (अनुदैर्ध्य दिशा में) दरारें पड़ जाती हैं। इसे 'हार्ट शेक' कहते हैं, जो लकड़ी को दो या अधिक टुकड़ों में विभाजित कर सकता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, UKPSC JE
Q219: पेंट में 'सुखाने' (Drier) के रूप में किस धातु के यौगिकों (Metallic compounds) का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है?
- A) कॉपर और जिंक
- B) आयरन और एल्युमिनियम
- ✅ C) कोबाल्ट, लेड और मैंगनीज (सही उत्तर)
- D) कैल्शियम और मैग्नीशियम
💡 डिटेल Explanation:
पेंट को हवा में जल्दी सुखाने के लिए ड्रायर का उपयोग किया जाता है। इनके रूप में मुख्य रूप से कोबाल्ट (Cobalt), लेड (Lead), और मैंगनीज (Manganese) के साल्ट्स (जैसे Linoleates, Naphthenates) का उपयोग किया जाता है। ये ऑक्सीजन को अवशोषित करने की गति को बढ़ा देते हैं, जिससे पेंट की परत जल्दी सूख कर ठोस हो जाती है।
पेंट को हवा में जल्दी सुखाने के लिए ड्रायर का उपयोग किया जाता है। इनके रूप में मुख्य रूप से कोबाल्ट (Cobalt), लेड (Lead), और मैंगनीज (Manganese) के साल्ट्स (जैसे Linoleates, Naphthenates) का उपयोग किया जाता है। ये ऑक्सीजन को अवशोषित करने की गति को बढ़ा देते हैं, जिससे पेंट की परत जल्दी सूख कर ठोस हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, RRB JE, UPSSSC JE 2018
Q220: एक अच्छी ईंट को पानी में डुबोने के बाद उसका 'क्रशिंग स्ट्रेंथ' (Crushing Strength) उसके ड्राई स्टेट की तुलना में कितना होना चाहिए?
- A) 25% से 30% अधिक
- B) 50% कम
- ✅ C) गीली ईंट की स्ट्रेंथ ड्राई ईंट से कम नहीं होनी चाहिए (सही उत्तर)
- D) हमेशा 10% ज्यादा
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी ईंट की यह विशेषता है कि वह पानी सोखने के बाद भी अपनी संरचनात्मक सामर्थ्य (Structural strength) नहीं खोती। हालांकि, व्यवहारिक रूप से पानी सोखने के बाद ईंट थोड़ी नरम हो सकती है, लेकिन मानकों के अनुसार, गीली ईंट की क्रशिंग स्ट्रेंथ, सूखी ईंट की स्ट्रेंथ के लगभग बराबर या उससे कम नहीं होनी चाहिए।
एक अच्छी ईंट की यह विशेषता है कि वह पानी सोखने के बाद भी अपनी संरचनात्मक सामर्थ्य (Structural strength) नहीं खोती। हालांकि, व्यवहारिक रूप से पानी सोखने के बाद ईंट थोड़ी नरम हो सकती है, लेकिन मानकों के अनुसार, गीली ईंट की क्रशिंग स्ट्रेंथ, सूखी ईंट की स्ट्रेंथ के लगभग बराबर या उससे कम नहीं होनी चाहिए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 45 (Q221 - Q225)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, LMRC JE
Q221: कंक्रीट की तराई (Curing) के लिए 'भाप तराई' (Steam Curing) विधि का मुख्य लाभ क्या है?
- A) कंक्रीट की लागत कम करना
- ✅ B) कंक्रीट की प्रारंभिक सामर्थ्य (Early Strength) में तेजी से वृद्धि करना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट को जलरोधक बनाना
- D) कंक्रीट के वजन को कम करना
💡 डिटेल Explanation:
भाप तराई (Steam Curing) में कंक्रीट को उच्च तापमान और नमी वाली भाप के वातावरण में रखा जाता है। इससे सीमेंट का जलयोजन (Hydration) बहुत तेज़ हो जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से 'प्री-कास्ट' (Pre-cast) कंक्रीट इकाइयों (जैसे स्लीपर, ब्लॉक) के लिए किया जाता है ताकि वे कुछ ही घंटों में पर्याप्त मजबूती प्राप्त कर लें और उन्हें सांचों से जल्दी हटाया जा सके।
भाप तराई (Steam Curing) में कंक्रीट को उच्च तापमान और नमी वाली भाप के वातावरण में रखा जाता है। इससे सीमेंट का जलयोजन (Hydration) बहुत तेज़ हो जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से 'प्री-कास्ट' (Pre-cast) कंक्रीट इकाइयों (जैसे स्लीपर, ब्लॉक) के लिए किया जाता है ताकि वे कुछ ही घंटों में पर्याप्त मजबूती प्राप्त कर लें और उन्हें सांचों से जल्दी हटाया जा सके।
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Q222: ईंट की चिनाई में 'वर्टिकल जॉइंट्स' (Vertical Joints) को एक सीध में आने से रोकने के लिए कौन सी ईंटें या बॉन्ड सबसे अधिक प्रभावी हैं?
- A) क्वीन क्लोजर और किंग क्लोजर
- B) बैट (Bats) का प्रयोग
- ✅ C) उपरोक्त दोनों (सही उत्तर)
- D) केवल स्ट्रेचर बॉन्ड का उपयोग
💡 डिटेल Explanation:
अच्छी चिनाई में 'बॉन्ड' तोड़ने के लिए ईंट के कटे हुए टुकड़ों का प्रयोग अनिवार्य है। क्वीन क्लोजर (ईंट का लंबाई में आधा हिस्सा), किंग क्लोजर (ईंट का 3/4 भाग) और विभिन्न प्रकार के बैट्स (Bats - आधा बैट, पौना बैट) का उपयोग करके हम दीवार की परतों के जोड़ों को एक-दूसरे के ऊपर आने से रोकते हैं, जिससे संरचनात्मक मजबूती बढ़ती है।
अच्छी चिनाई में 'बॉन्ड' तोड़ने के लिए ईंट के कटे हुए टुकड़ों का प्रयोग अनिवार्य है। क्वीन क्लोजर (ईंट का लंबाई में आधा हिस्सा), किंग क्लोजर (ईंट का 3/4 भाग) और विभिन्न प्रकार के बैट्स (Bats - आधा बैट, पौना बैट) का उपयोग करके हम दीवार की परतों के जोड़ों को एक-दूसरे के ऊपर आने से रोकते हैं, जिससे संरचनात्मक मजबूती बढ़ती है।
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Q223: लकड़ी में लगने वाली 'सफेद दीमक' (White Ants/Termites) से बचाव के लिए सबसे प्रभावी और सुरक्षित परिरक्षक (Preservative) कौन सा है?
- A) नमक का घोल
- B) चूना पानी
- ✅ C) डिल्ड्रिन (Dieldrin) या कोल-टार बेस परिरक्षक (सही उत्तर)
- D) केवल पेंट
💡 डिटेल Explanation:
दीमक (Termites) लकड़ी के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इनके बचाव के लिए रासायनिक परिरक्षक जैसे डिल्ड्रिन (Dieldrin), एल्ड्रिन (Aldrin) या कोल-टार (Creosote) आधारित परिरक्षकों का उपयोग किया जाता है। ये रसायन लकड़ी के रेशों में जहरीलापन पैदा कर देते हैं, जिससे दीमक लकड़ी को नहीं खा पाती। आज कल के आधुनिक निर्माण में लकड़ी के नीचे की मिट्टी में भी इनका छिड़काव अनिवार्य है।
दीमक (Termites) लकड़ी के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इनके बचाव के लिए रासायनिक परिरक्षक जैसे डिल्ड्रिन (Dieldrin), एल्ड्रिन (Aldrin) या कोल-टार (Creosote) आधारित परिरक्षकों का उपयोग किया जाता है। ये रसायन लकड़ी के रेशों में जहरीलापन पैदा कर देते हैं, जिससे दीमक लकड़ी को नहीं खा पाती। आज कल के आधुनिक निर्माण में लकड़ी के नीचे की मिट्टी में भी इनका छिड़काव अनिवार्य है।
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Q224: 'ऑयल पेंट' (Oil paint) लगाने के बाद, यदि सतह पर 'पपड़ी' (Scales/Flakes) बन रही हो, तो इसका मुख्य कारण क्या हो सकता है?
- ✅ A) पेंट लगाने से पहले सतह की उचित सफाई न करना (सही उत्तर)
- B) पेंट में थिनर बहुत अधिक मिलाना
- C) ड्रायर का उपयोग न करना
- D) पेंट को बहुत गाढ़ा रखना
💡 डिटेल Explanation:
पेंट के उखड़ने या पपड़ी बनने (Flaking) का सबसे बड़ा कारण पेंट की सतह और पेंट के बीच में धूल, ग्रीस या पुरानी ढीली पेंट की परतों का होना है। पेंट लगाने से पहले सतह को सैंडपेपर (Sandpaper) से घिसकर और अच्छी तरह साफ करके ही पेंट करना चाहिए। यदि सतह पर नमी या गंदगी है, तो पेंट कभी भी मजबूती से नहीं पकड़ेगा।
पेंट के उखड़ने या पपड़ी बनने (Flaking) का सबसे बड़ा कारण पेंट की सतह और पेंट के बीच में धूल, ग्रीस या पुरानी ढीली पेंट की परतों का होना है। पेंट लगाने से पहले सतह को सैंडपेपर (Sandpaper) से घिसकर और अच्छी तरह साफ करके ही पेंट करना चाहिए। यदि सतह पर नमी या गंदगी है, तो पेंट कभी भी मजबूती से नहीं पकड़ेगा।
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Q225: पत्थर की 'ड्रेसिंग' (Dressing) में 'बुश हैमरिंग' (Bush Hammering) का उपयोग क्यों किया जाता है?
- A) पत्थर को काटने के लिए
- ✅ B) सतह को खुरदरी और सजावटी बनाने के लिए (सही उत्तर)
- C) पत्थर का वजन कम करने के लिए
- D) पत्थर की ताकत बढ़ाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
बुश हैमर (Bush Hammer) एक विशेष उपकरण होता है जिसके सिरे पर छोटे-छोटे नुकीले दांत होते हैं। इसका उपयोग पत्थर की सतह पर बार-बार प्रहार करने के लिए किया जाता है। इससे सतह पर छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं, जिससे सतह खुरदरी (Rough) और आकर्षक दिखाई देती है। इसका उपयोग सीढ़ियों के पत्थर या सार्वजनिक भवनों के अग्रभाग (Facade) को सजाने के लिए किया जाता है।
बुश हैमर (Bush Hammer) एक विशेष उपकरण होता है जिसके सिरे पर छोटे-छोटे नुकीले दांत होते हैं। इसका उपयोग पत्थर की सतह पर बार-बार प्रहार करने के लिए किया जाता है। इससे सतह पर छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं, जिससे सतह खुरदरी (Rough) और आकर्षक दिखाई देती है। इसका उपयोग सीढ़ियों के पत्थर या सार्वजनिक भवनों के अग्रभाग (Facade) को सजाने के लिए किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 46 (Q226 - Q230)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, RRB JE
Q226: 'रैपिड हार्डनिंग सीमेंट' (Rapid Hardening Cement) में प्रारंभिक सामर्थ्य (Early Strength) अधिक होने का मुख्य कारण क्या है?
- A) जिप्सम की अधिक मात्रा
- ✅ B) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S) की अधिक मात्रा (सही उत्तर)
- C) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S) की अधिक मात्रा
- D) एल्युमिना की अधिक मात्रा
💡 डिटेल Explanation:
रैपिड हार्डनिंग सीमेंट में OPC की तुलना में C3S (ट्राईकैल्शियम सिलिकेट) का अनुपात अधिक होता है। साथ ही, इसे बहुत अधिक बारीक (Fine) पिसा जाता है, जिससे सतह का क्षेत्रफल (Surface area) बढ़ जाता है और जलयोजन (Hydration) की प्रक्रिया बहुत तेज़ हो जाती है, जो कंक्रीट को शुरुआती दिनों में ही बहुत अधिक ताकत देती है।
रैपिड हार्डनिंग सीमेंट में OPC की तुलना में C3S (ट्राईकैल्शियम सिलिकेट) का अनुपात अधिक होता है। साथ ही, इसे बहुत अधिक बारीक (Fine) पिसा जाता है, जिससे सतह का क्षेत्रफल (Surface area) बढ़ जाता है और जलयोजन (Hydration) की प्रक्रिया बहुत तेज़ हो जाती है, जो कंक्रीट को शुरुआती दिनों में ही बहुत अधिक ताकत देती है।
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Q227: कंक्रीट में 'वॉटर-सीमेंट अनुपात' (W/C Ratio) का 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) W/C अनुपात बढ़ने पर सामर्थ्य बढ़ती है
- ✅ B) W/C अनुपात बढ़ने पर सामर्थ्य घटती है (सही उत्तर)
- C) सामर्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
- D) सामर्थ्य पहले बढ़ती है फिर घटती है
💡 डिटेल Explanation:
यह कंक्रीट इंजीनियरिंग का सबसे महत्वपूर्ण नियम (Abrams' Law) है। कंक्रीट के मिश्रण में पानी की मात्रा (W/C Ratio) जितनी अधिक होगी, कंक्रीट में उतने ही अधिक खाली रिक्त स्थान (Voids) बनेंगे, जिससे उसकी घनत्व (Density) और सामर्थ्य (Strength) कम हो जाएगी। अतः, उच्च सामर्थ्य वाली कंक्रीट के लिए हमेशा न्यूनतम संभव W/C अनुपात का उपयोग किया जाता है।
यह कंक्रीट इंजीनियरिंग का सबसे महत्वपूर्ण नियम (Abrams' Law) है। कंक्रीट के मिश्रण में पानी की मात्रा (W/C Ratio) जितनी अधिक होगी, कंक्रीट में उतने ही अधिक खाली रिक्त स्थान (Voids) बनेंगे, जिससे उसकी घनत्व (Density) और सामर्थ्य (Strength) कम हो जाएगी। अतः, उच्च सामर्थ्य वाली कंक्रीट के लिए हमेशा न्यूनतम संभव W/C अनुपात का उपयोग किया जाता है।
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Q228: लकड़ी के 'केमिकल सीज़निंग' (Chemical Seasoning) में लकड़ी को किस पदार्थ के घोल में डुबोया जाता है?
- A) सल्फ्यूरिक एसिड
- ✅ B) नमक (Common Salt / Sodium Chloride) या यूरिया (सही उत्तर)
- C) ब्लीचिंग पाउडर
- D) एल्युमिनियम सल्फेट
💡 डिटेल Explanation:
केमिकल सीज़निंग में लकड़ी को साधारण नमक (NaCl) या यूरिया जैसे हाइग्रोस्कोपिक रसायनों (Hygroscopic chemicals) के घोल में डुबोया जाता है। ये रसायन लकड़ी की बाहरी सतह से नमी खींच लेते हैं, जिससे सतह जल्दी सूख जाती है। इससे लकड़ी के अंदरूनी और बाहरी हिस्से के सूखने की दर में समानता बनी रहती है और दरारें कम पड़ती हैं।
केमिकल सीज़निंग में लकड़ी को साधारण नमक (NaCl) या यूरिया जैसे हाइग्रोस्कोपिक रसायनों (Hygroscopic chemicals) के घोल में डुबोया जाता है। ये रसायन लकड़ी की बाहरी सतह से नमी खींच लेते हैं, जिससे सतह जल्दी सूख जाती है। इससे लकड़ी के अंदरूनी और बाहरी हिस्से के सूखने की दर में समानता बनी रहती है और दरारें कम पड़ती हैं।
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Q229: पेंट में 'पिगमेंट' (Pigment) का मुख्य कार्य क्या है?
- A) पेंट को पतला करना
- B) पेंट को सुखाना
- ✅ C) पेंट को रंग और ओपेसिटी (Opacity/Covering power) प्रदान करना (सही उत्तर)
- D) पेंट को चमक देना
💡 डिटेल Explanation:
पेंट के अंदर पिगमेंट सूक्ष्म कणों के रूप में होता है। इसका काम पेंट को उसका रंग (Color) प्रदान करना और सतह को पूरी तरह से ढकने की क्षमता (Covering Power/Opacity) देना है। बिना पिगमेंट के पेंट सतह को ढक नहीं पाएगा और वह पारदर्शी (Transparent) दिखेगा।
पेंट के अंदर पिगमेंट सूक्ष्म कणों के रूप में होता है। इसका काम पेंट को उसका रंग (Color) प्रदान करना और सतह को पूरी तरह से ढकने की क्षमता (Covering Power/Opacity) देना है। बिना पिगमेंट के पेंट सतह को ढक नहीं पाएगा और वह पारदर्शी (Transparent) दिखेगा।
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Q230: चिनाई (Masonry) में 'कोयिन' (Quoins) क्या होते हैं?
- A) दीवार के बीच की ईंटें
- B) नींव (Foundation) की ईंटें
- ✅ C) दीवार के बाहरी कोनों (External Corners) की ईंटें (सही उत्तर)
- D) खिड़की के ऊपर की ईंटें
💡 डिटेल Explanation:
चिनाई में 'कोयिन' (Quoins) उन ईंटों या पत्थरों को कहा जाता है जो दीवार के बाहरी कोनों (External corners) पर लगाए जाते हैं। ये कोने दीवार के सबसे महत्वपूर्ण और भार-सहन करने वाले हिस्से होते हैं। इसलिए, यहाँ हमेशा सबसे उच्च गुणवत्ता की ईंटों या पत्थरों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें अक्सर अधिक मजबूती के लिए विशेष रूप से ड्रेसिंग (Dressing) करके लगाया जाता है।
चिनाई में 'कोयिन' (Quoins) उन ईंटों या पत्थरों को कहा जाता है जो दीवार के बाहरी कोनों (External corners) पर लगाए जाते हैं। ये कोने दीवार के सबसे महत्वपूर्ण और भार-सहन करने वाले हिस्से होते हैं। इसलिए, यहाँ हमेशा सबसे उच्च गुणवत्ता की ईंटों या पत्थरों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें अक्सर अधिक मजबूती के लिए विशेष रूप से ड्रेसिंग (Dressing) करके लगाया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 47 (Q231 - Q235)
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Q231: कंक्रीट निर्माण में 'वाइब्रेटर' (Vibrator) का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
- A) कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) बढ़ाने के लिए
- ✅ B) हवा के बुलबुले (Entrapped Air) निकालकर कंक्रीट को सघन (Compact) बनाने के लिए (सही उत्तर)
- C) सीमेंट का जमाव तेज़ करने के लिए
- D) कंक्रीट का रंग एक समान करने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट को सांचे (Formwork) में डालते समय उसमें अनचाही हवा (Entrapped Air) फंस जाती है। यदि यह हवा न निकाली जाए, तो कंक्रीट में छिद्र (Honeycombing) रह जाएंगे और उसकी ताकत कम हो जाएगी। वाइब्रेटर कंक्रीट को कंपित करके इस हवा को बाहर निकालता है और कंक्रीट को पूरी तरह सघन (Compact) बनाता है, जिससे सामर्थ्य और स्थायित्व बढ़ता है।
कंक्रीट को सांचे (Formwork) में डालते समय उसमें अनचाही हवा (Entrapped Air) फंस जाती है। यदि यह हवा न निकाली जाए, तो कंक्रीट में छिद्र (Honeycombing) रह जाएंगे और उसकी ताकत कम हो जाएगी। वाइब्रेटर कंक्रीट को कंपित करके इस हवा को बाहर निकालता है और कंक्रीट को पूरी तरह सघन (Compact) बनाता है, जिससे सामर्थ्य और स्थायित्व बढ़ता है।
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Q232: पत्थर की 'ड्रेसिंग' (Dressing) में 'पील्ड फिनिश' (Pealed Finish) कैसी होती है?
- A) पूरी तरह से चिकनी (Smooth)
- ✅ B) उबड़-खाबड़ (Rough) और प्राकृतिक बनावट वाली (सही उत्तर)
- C) पालिश की हुई (Polished)
- D) बहुत बारीक (Fine)
💡 डिटेल Explanation:
पील्ड या 'रॉक-फेस्ड' (Rock-faced) फिनिश में पत्थर की सतह को बहुत कम ड्रेसिंग की जाती है। इसका उद्देश्य पत्थर को उसकी मूल और प्राकृतिक उबड़-खाबड़ बनावट (Natural rough texture) में रखना होता है। इसका उपयोग अक्सर ग्रामीण इमारतों या भारी रिटेनिंग दीवारों के बाहरी हिस्से को एक देहाती (Rustic) और भव्य लुक देने के लिए किया जाता है।
पील्ड या 'रॉक-फेस्ड' (Rock-faced) फिनिश में पत्थर की सतह को बहुत कम ड्रेसिंग की जाती है। इसका उद्देश्य पत्थर को उसकी मूल और प्राकृतिक उबड़-खाबड़ बनावट (Natural rough texture) में रखना होता है। इसका उपयोग अक्सर ग्रामीण इमारतों या भारी रिटेनिंग दीवारों के बाहरी हिस्से को एक देहाती (Rustic) और भव्य लुक देने के लिए किया जाता है।
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Q233: 'ब्लास्ट फर्नेस स्लैग' (Blast Furnace Slag) का उपयोग करके कौन सा सीमेंट बनाया जाता है?
- A) रैपिड हार्डनिंग सीमेंट
- ✅ B) पोर्टलैंड स्लैग सीमेंट (Portland Slag Cement) (सही उत्तर)
- C) क्विक सेटिंग सीमेंट
- D) हाई-एल्यूमिना सीमेंट
💡 डिटेल Explanation:
ब्लास्ट फर्नेस स्लैग लोहा बनाने की प्रक्रिया में निकलने वाला एक औद्योगिक उप-उत्पाद (Waste product) है। जब इसे पोर्टलैंड सीमेंट क्लिंकर के साथ मिलाकर पीसा जाता है, तो 'पोर्टलैंड स्लैग सीमेंट' (PSC) बनता है। यह सीमेंट सल्फेट अटैक के प्रति बहुत प्रतिरोधी (Resistant) होता है, इसलिए इसका उपयोग समुद्री कार्यों (Marine works) और बांधों में किया जाता है।
ब्लास्ट फर्नेस स्लैग लोहा बनाने की प्रक्रिया में निकलने वाला एक औद्योगिक उप-उत्पाद (Waste product) है। जब इसे पोर्टलैंड सीमेंट क्लिंकर के साथ मिलाकर पीसा जाता है, तो 'पोर्टलैंड स्लैग सीमेंट' (PSC) बनता है। यह सीमेंट सल्फेट अटैक के प्रति बहुत प्रतिरोधी (Resistant) होता है, इसलिए इसका उपयोग समुद्री कार्यों (Marine works) और बांधों में किया जाता है।
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Q234: पेंट बनाने के लिए प्रयुक्त 'सॉल्वेंट' (Solvent) या 'थिनर' (Thinner) का कार्य क्या है?
- A) पेंट को रंग प्रदान करना
- ✅ B) पेंट की सुकार्यता (Workability) बढ़ाना (सही उत्तर)
- C) पेंट की सतह पर परत जमाना
- D) पेंट को कठोर बनाना
💡 डिटेल Explanation:
थिनर (जैसे तारपीन का तेल) पेंट को पतला करने का काम करता है, जिससे वह ब्रश या स्प्रे द्वारा आसानी से लगाया जा सके। यह पेंट के गाढ़ेपन को नियंत्रित करता है। लगाने के बाद यह थिनर हवा में उड़ जाता है (Evaporate), जिससे पेंट की फिल्म पीछे रह जाती है। यह पेंट की सुकार्यता (Workability/Spreadability) को बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।
थिनर (जैसे तारपीन का तेल) पेंट को पतला करने का काम करता है, जिससे वह ब्रश या स्प्रे द्वारा आसानी से लगाया जा सके। यह पेंट के गाढ़ेपन को नियंत्रित करता है। लगाने के बाद यह थिनर हवा में उड़ जाता है (Evaporate), जिससे पेंट की फिल्म पीछे रह जाती है। यह पेंट की सुकार्यता (Workability/Spreadability) को बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q235: ईंटों के निर्माण में 'पग मिल' (Pug Mill) का उपयोग किस स्तर (Stage) पर किया जाता है?
- A) मिट्टी खोदने (Digging) के बाद
- ✅ B) 'टेम्परिंग' (Tempering) के चरण में (सही उत्तर)
- C) ईंटों को भट्ठे में पकाने के लिए
- D) ईंटों के आकार की जांच में
💡 डिटेल Explanation:
ईंट बनाने के मुख्य चरणों में 'टेम्परिंग' एक महत्वपूर्ण चरण है। इस चरण में मिट्टी में पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह गूंथा जाता है ताकि उसमें प्लास्टिसिटी (लचीलापन) आ सके। पग मिल (Pug Mill) एक यांत्रिक उपकरण है जो इसी टेम्परिंग के कार्य को बहुत तेजी से और एक समान (Homogeneous) तरीके से करता है, जिससे सांचे में डालने लायक मिट्टी तैयार होती है।
ईंट बनाने के मुख्य चरणों में 'टेम्परिंग' एक महत्वपूर्ण चरण है। इस चरण में मिट्टी में पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह गूंथा जाता है ताकि उसमें प्लास्टिसिटी (लचीलापन) आ सके। पग मिल (Pug Mill) एक यांत्रिक उपकरण है जो इसी टेम्परिंग के कार्य को बहुत तेजी से और एक समान (Homogeneous) तरीके से करता है, जिससे सांचे में डालने लायक मिट्टी तैयार होती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 48 (Q236 - Q240)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2015, RRB JE
Q236: कंक्रीट में 'वॉटर-सीमेंट अनुपात' (W/C Ratio) को कम करने का सबसे प्रमुख लाभ क्या है?
- A) कंक्रीट की लागत में कमी
- B) सुकार्यता (Workability) में वृद्धि
- ✅ C) संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength) और स्थायित्व (Durability) में वृद्धि (सही उत्तर)
- D) वजन में कमी
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट में जितना कम पानी होगा (इतना कि मिश्रण सही से मिक्स हो सके), सीमेंट पेस्ट उतना ही सघन (Dense) बनेगा। कम W/C अनुपात कंक्रीट के भीतर के रिक्त स्थानों (Voids) को कम करता है, जिससे उसकी ताकत और स्थायित्व काफी बढ़ जाता है। आजकल 'सुपर-प्लास्टिकाइज़र' का उपयोग करके सुकार्यता बनाए रखते हुए W/C अनुपात को कम रखा जाता है।
कंक्रीट में जितना कम पानी होगा (इतना कि मिश्रण सही से मिक्स हो सके), सीमेंट पेस्ट उतना ही सघन (Dense) बनेगा। कम W/C अनुपात कंक्रीट के भीतर के रिक्त स्थानों (Voids) को कम करता है, जिससे उसकी ताकत और स्थायित्व काफी बढ़ जाता है। आजकल 'सुपर-प्लास्टिकाइज़र' का उपयोग करके सुकार्यता बनाए रखते हुए W/C अनुपात को कम रखा जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2019, MP Vyapam, DMRC JE
Q237: लकड़ी में 'कप शेक' (Cup Shake) दोष मुख्य रूप से किसके कारण होता है?
- ✅ A) अत्यधिक ठंड (Frost) और पेड़ का असमान विकास (सही उत्तर)
- B) पेड़ के बहुत पुराने होने के कारण
- C) कवक के हमले के कारण
- D) बहुत अधिक गर्मी के कारण
💡 डिटेल Explanation:
कप शेक (Cup Shake) में लकड़ी के वार्षिक वलय (Annual rings) आंशिक रूप से एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। यह दोष अक्सर उन क्षेत्रों में होता है जहाँ अत्यधिक ठंड या पाला (Frost) पड़ता है। ठंड के कारण पेड़ के अंदर के रस में प्रसार होता है, जिससे रिंग्स के बीच की पकड़ कमजोर होकर अलग हो जाती है।
कप शेक (Cup Shake) में लकड़ी के वार्षिक वलय (Annual rings) आंशिक रूप से एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। यह दोष अक्सर उन क्षेत्रों में होता है जहाँ अत्यधिक ठंड या पाला (Frost) पड़ता है। ठंड के कारण पेड़ के अंदर के रस में प्रसार होता है, जिससे रिंग्स के बीच की पकड़ कमजोर होकर अलग हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, LMRC JE
Q238: ईंटों में 'बर्न ईंटों' (Over-burnt bricks/Jhama bricks) का उपयोग कहाँ करना सबसे उचित रहता है?
- A) दीवार के चिनाई कार्य के लिए
- ✅ B) नींव (Foundation) और सड़क के आधार (Road metal) के लिए (सही उत्तर)
- C) सजावटी कार्य के लिए
- D) केवल प्लास्टर कार्य के लिए
💡 डिटेल Explanation:
झामा या ओवर-बर्न ईंटें बहुत अधिक तापमान पर पकने के कारण विकृत (Deformed) हो जाती हैं, इसलिए इन्हें दीवार की चिनाई में नहीं लगाया जा सकता क्योंकि इनकी सतह समतल नहीं होती। हालांकि, ये बहुत कठोर होती हैं, इसलिए इन्हें सड़क निर्माण में गिट्टी के विकल्प (Road metal) के रूप में या नींव में भराई (Foundation concrete) के लिए उपयोग किया जाता है।
झामा या ओवर-बर्न ईंटें बहुत अधिक तापमान पर पकने के कारण विकृत (Deformed) हो जाती हैं, इसलिए इन्हें दीवार की चिनाई में नहीं लगाया जा सकता क्योंकि इनकी सतह समतल नहीं होती। हालांकि, ये बहुत कठोर होती हैं, इसलिए इन्हें सड़क निर्माण में गिट्टी के विकल्प (Road metal) के रूप में या नींव में भराई (Foundation concrete) के लिए उपयोग किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2019, MP Vyapam 2016, UKPSC JE
Q239: पेंट में 'पिगमेंट' को घोलने और उसके फैलाव को बनाए रखने के लिए कौन सा पदार्थ मुख्य भूमिका निभाता है?
- A) ड्रायर (Drier)
- ✅ B) वाहक / व्हीकल (Vehicle / Oil) (सही उत्तर)
- C) थिनर (Thinner)
- D) इनर्ट फिलर (Inert Filler)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में पिगमेंट (जैसे पिगमेंट पाउडर) ठोस रूप में होते हैं, उन्हें तरल माध्यम में निलंबित (Suspend) रखने और सतह पर एकसमान रूप से फैलाने के लिए 'व्हीकल' या 'वाहक' का उपयोग किया जाता है। अधिकांश ऑयली पेंट्स में 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) ही मुख्य व्हीकल होता है।
पेंट में पिगमेंट (जैसे पिगमेंट पाउडर) ठोस रूप में होते हैं, उन्हें तरल माध्यम में निलंबित (Suspend) रखने और सतह पर एकसमान रूप से फैलाने के लिए 'व्हीकल' या 'वाहक' का उपयोग किया जाता है। अधिकांश ऑयली पेंट्स में 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) ही मुख्य व्हीकल होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q240: 240 MCQ सीरीज़ पूरी होने की बधाई! अंतिम सवाल: कंक्रीट का परीक्षण करने के लिए 'स्लंप टेस्ट' (Slump Test) में कंक्रीट को सांचे में कितनी परतों (Layers) में डाला जाता है?
- A) 2 परतों में
- ✅ B) 4 परतों में (सही उत्तर)
- C) 6 परतों में
- D) किसी भी परत में नहीं
💡 डिटेल Explanation:
स्लंप कोन परीक्षण में कंक्रीट को सांचे में भरते समय, उसे 4 बराबर परतों (Layers) में डाला जाता है। प्रत्येक परत को एक स्टैंडर्ड लोहे की छड़ (Tamping rod, 16mm diameter) से 25 बार अच्छी तरह कुटा (Tamping) जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि कंक्रीट का घनत्व हर जगह एक जैसा हो।
स्लंप कोन परीक्षण में कंक्रीट को सांचे में भरते समय, उसे 4 बराबर परतों (Layers) में डाला जाता है। प्रत्येक परत को एक स्टैंडर्ड लोहे की छड़ (Tamping rod, 16mm diameter) से 25 बार अच्छी तरह कुटा (Tamping) जाता है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि कंक्रीट का घनत्व हर जगह एक जैसा हो।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 49 (Q241 - Q245)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, UKPSC JE
Q241: कंक्रीट में 'सेग्रीगेशन' (Segregation) होने का मुख्य कारण क्या है?
- A) पानी की मात्रा का कम होना
- B) कंक्रीट को बहुत धीरे डालना
- ✅ C) कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से गिराना (सही उत्तर)
- D) सीमेंट की उच्च गुणवत्ता
💡 डिटेल Explanation:
सेग्रीगेशन (Segregation) का अर्थ है कंक्रीट के अवयवों (सीमेंट पेस्ट और एग्रीगेट) का अलग-अलग हो जाना। जब कंक्रीट को 1.5 मीटर से अधिक ऊंचाई से गिराया जाता है, तो भारी गिट्टियाँ (Aggregates) नीचे बैठ जाती हैं और हल्का सीमेंट पेस्ट ऊपर रह जाता है। इसे रोकने के लिए कंक्रीट को हमेशा कम ऊंचाई से डालना चाहिए और सीधे सांचे (Formwork) में रखना चाहिए।
सेग्रीगेशन (Segregation) का अर्थ है कंक्रीट के अवयवों (सीमेंट पेस्ट और एग्रीगेट) का अलग-अलग हो जाना। जब कंक्रीट को 1.5 मीटर से अधिक ऊंचाई से गिराया जाता है, तो भारी गिट्टियाँ (Aggregates) नीचे बैठ जाती हैं और हल्का सीमेंट पेस्ट ऊपर रह जाता है। इसे रोकने के लिए कंक्रीट को हमेशा कम ऊंचाई से डालना चाहिए और सीधे सांचे (Formwork) में रखना चाहिए।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, DMRC JE
Q242: ईंट की चिनाई में 'रैकिंग बैक' (Racking Back) का उपयोग क्यों किया जाता है?
- A) दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के लिए
- ✅ B) पुरानी और नई चिनाई के बीच अच्छी बॉन्डिंग बनाने के लिए (सही उत्तर)
- C) दीवार को सुंदर बनाने के लिए
- D) चिनाई का खर्च घटाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
जब दीवार का निर्माण एक साथ पूरा नहीं हो पाता और हमें काम रोकना पड़ता है, तो अंतिम परतों को 'रैकिंग बैक' (सीढ़ीनुमा) छोड़ा जाता है। यह सीढ़ीनुमा आकार भविष्य में नई चिनाई को पुरानी चिनाई के साथ मजबूती से जोड़ने (Interlocking) में मदद करता है। इसे 'टूथिंग' (Toothing) के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो बॉन्डिंग के लिए ज्यादा सुरक्षित है।
जब दीवार का निर्माण एक साथ पूरा नहीं हो पाता और हमें काम रोकना पड़ता है, तो अंतिम परतों को 'रैकिंग बैक' (सीढ़ीनुमा) छोड़ा जाता है। यह सीढ़ीनुमा आकार भविष्य में नई चिनाई को पुरानी चिनाई के साथ मजबूती से जोड़ने (Interlocking) में मदद करता है। इसे 'टूथिंग' (Toothing) के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो बॉन्डिंग के लिए ज्यादा सुरक्षित है।
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Q243: पत्थर की 'ड्रेसिंग' के लिए उपयोग किया जाने वाला 'मैलेट' (Mallet) क्या होता है?
- A) एक धातु का भारी हथौड़ा
- ✅ B) लकड़ी का बना एक बड़ा हथौड़ा (सही उत्तर)
- C) छैनी (Chisel) का एक प्रकार
- D) पत्थर काटने की आरी
💡 डिटेल Explanation:
मैलेट (Mallet) पूरी तरह से लकड़ी (आमतौर पर कठोर लकड़ी जैसे साल या शीशम) का बना होता है। ड्रेसिंग के दौरान, छैनी (Chisel) पर चोट मारने के लिए धातु के हथौड़े के बजाय लकड़ी के मैलेट का उपयोग किया जाता है। इससे पत्थर पर चोट नियंत्रित होती है, जिससे पत्थर के टूटने या छैनी के खराब होने का डर कम रहता है।
मैलेट (Mallet) पूरी तरह से लकड़ी (आमतौर पर कठोर लकड़ी जैसे साल या शीशम) का बना होता है। ड्रेसिंग के दौरान, छैनी (Chisel) पर चोट मारने के लिए धातु के हथौड़े के बजाय लकड़ी के मैलेट का उपयोग किया जाता है। इससे पत्थर पर चोट नियंत्रित होती है, जिससे पत्थर के टूटने या छैनी के खराब होने का डर कम रहता है।
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Q244: पेंट में 'इनर्ट फिलर' (Inert Filler) का मुख्य उपयोग क्यों किया जाता है?
- A) पेंट को सूखने से रोकने के लिए
- ✅ B) पेंट की लागत कम करने और ड्यूरेबिलिटी बढ़ाने के लिए (सही उत्तर)
- C) पेंट का रंग बदलने के लिए
- D) केवल चमक देने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
फिलर (जैसे जिप्सम, बेरियम सल्फेट) रासायनिक रूप से निष्क्रिय (Inert) होते हैं। इन्हें पेंट में मात्रा (Volume) बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है, जिससे पेंट सस्ता हो जाता है। साथ ही, ये पेंट की फिल्म को और अधिक ठोस (Hard) बनाते हैं, जिससे वह लंबे समय तक टिकती है (Durability)।
फिलर (जैसे जिप्सम, बेरियम सल्फेट) रासायनिक रूप से निष्क्रिय (Inert) होते हैं। इन्हें पेंट में मात्रा (Volume) बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है, जिससे पेंट सस्ता हो जाता है। साथ ही, ये पेंट की फिल्म को और अधिक ठोस (Hard) बनाते हैं, जिससे वह लंबे समय तक टिकती है (Durability)।
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Q245: कंक्रीट निर्माण में 'वाटर-सीमेंट अनुपात' (W/C Ratio) का कंक्रीट के जमने (Setting time) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) अनुपात बढ़ने पर जमने का समय घटता है
- ✅ B) अनुपात बढ़ने पर जमने का समय बढ़ता है (सही उत्तर)
- C) जमने के समय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
- D) बहुत कम होने पर कंक्रीट जमता ही नहीं
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का जलयोजन (Hydration) एक निश्चित मात्रा में पानी की मांग करता है। यदि हम आवश्यकता से अधिक पानी मिलाते हैं (W/C Ratio बढ़ता है), तो सीमेंट के कण एक-दूसरे से अधिक दूर हो जाते हैं। इससे रासायनिक अभिक्रिया की गति धीमी हो जाती है और कंक्रीट के जमने (Setting) में अधिक समय लगता है।
सीमेंट का जलयोजन (Hydration) एक निश्चित मात्रा में पानी की मांग करता है। यदि हम आवश्यकता से अधिक पानी मिलाते हैं (W/C Ratio बढ़ता है), तो सीमेंट के कण एक-दूसरे से अधिक दूर हो जाते हैं। इससे रासायनिक अभिक्रिया की गति धीमी हो जाती है और कंक्रीट के जमने (Setting) में अधिक समय लगता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 50 (Q246 - Q250)
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Q246: कंक्रीट में 'सेग्रीगेशन' (Segregation) को रोकने के लिए, कंक्रीट को सांचे (Formwork) में डालते समय अधिकतम कितनी ऊंचाई से गिराना सुरक्षित माना जाता है?
- A) 0.5 मीटर
- B) 1.0 मीटर
- ✅ C) 1.5 मीटर (सही उत्तर)
- D) 2.5 मीटर
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से गिराने पर भारी गिट्टियाँ पहले गिरती हैं और महीन पेस्ट बाद में, जिससे 'सेग्रीगेशन' होता है। मानक इंजीनियरिंग अभ्यास के अनुसार, कंक्रीट को 1.5 मीटर (लगभग 5 फीट) से अधिक ऊंचाई से स्वतंत्र रूप से नहीं गिराना चाहिए। यदि ऊंचाई इससे अधिक है, तो 'शूट' (Chute) या पाइप का उपयोग किया जाना चाहिए।
कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से गिराने पर भारी गिट्टियाँ पहले गिरती हैं और महीन पेस्ट बाद में, जिससे 'सेग्रीगेशन' होता है। मानक इंजीनियरिंग अभ्यास के अनुसार, कंक्रीट को 1.5 मीटर (लगभग 5 फीट) से अधिक ऊंचाई से स्वतंत्र रूप से नहीं गिराना चाहिए। यदि ऊंचाई इससे अधिक है, तो 'शूट' (Chute) या पाइप का उपयोग किया जाना चाहिए।
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Q247: ईंट चिनाई में 'वर्टिकल जॉइंट्स' को एक सीध में आने देने से क्या हानि होती है?
- ✅ A) दीवार की लोड-वहन क्षमता (Load bearing capacity) कम हो जाती है (सही उत्तर)
- B) चिनाई का रंग बदल जाता है
- C) ईंटें जल्दी सूख जाती हैं
- D) इससे कोई फर्क नहीं पड़ता
💡 डिटेल Explanation:
वर्टिकल जॉइंट्स (Continuous vertical joints) दीवार में कमजोरी की लाइन बनाते हैं। यदि ये जॉइंट्स ऊपर-नीचे एक सीध में आ जाते हैं, तो पूरी दीवार पर आने वाला भार (Load) समान रूप से नहीं बंटता और दीवार के अचानक गिर जाने या उसमें दरारें पड़ने का खतरा बहुत अधिक हो जाता है। इसीलिए 'बॉन्ड' तोड़ना अनिवार्य है।
वर्टिकल जॉइंट्स (Continuous vertical joints) दीवार में कमजोरी की लाइन बनाते हैं। यदि ये जॉइंट्स ऊपर-नीचे एक सीध में आ जाते हैं, तो पूरी दीवार पर आने वाला भार (Load) समान रूप से नहीं बंटता और दीवार के अचानक गिर जाने या उसमें दरारें पड़ने का खतरा बहुत अधिक हो जाता है। इसीलिए 'बॉन्ड' तोड़ना अनिवार्य है।
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Q248: लकड़ी को 'एयर सीज़निंग' (Air Seasoning) करने का सबसे महत्वपूर्ण नियम क्या है?
- A) लकड़ी को धूप में रखना
- B) लकड़ी को पानी में डुबोना
- ✅ C) लकड़ी के बीच हवा के संचार (Air circulation) के लिए स्थान छोड़ना (सही उत्तर)
- D) लकड़ी को पूरी तरह ढक कर रखना
💡 डिटेल Explanation:
एयर सीज़निंग में लकड़ी को खुली हवा में रखा जाता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक लट्ठे या तख्ते के बीच 'स्टैक' (Stack) या 'स्टिकर्स' (Stickers) का उपयोग किया जाए, जिससे हवा का आवागमन होता रहे। यदि हवा नहीं लगेगी, तो लकड़ी के अंदर सीलन बनी रहेगी और कवक (Fungus) लगकर लकड़ी सड़ जाएगी।
एयर सीज़निंग में लकड़ी को खुली हवा में रखा जाता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक लट्ठे या तख्ते के बीच 'स्टैक' (Stack) या 'स्टिकर्स' (Stickers) का उपयोग किया जाए, जिससे हवा का आवागमन होता रहे। यदि हवा नहीं लगेगी, तो लकड़ी के अंदर सीलन बनी रहेगी और कवक (Fungus) लगकर लकड़ी सड़ जाएगी।
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Q249: 'एनामेल पेंट' (Enamel Paint) का मुख्य आधार (Base) क्या होता है?
- A) चॉक पाउडर
- ✅ B) जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड (सही उत्तर)
- C) रेड लेड
- D) बिटुमेन
💡 डिटेल Explanation:
एनामेल पेंट बहुत ही टिकाऊ, चमकदार और नमी प्रतिरोधी होते हैं। इनमें बेस के रूप में मुख्य रूप से जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। साथ ही इसमें वार्निश (Varnish) का उपयोग व्हीकल के रूप में किया जाता है, जिससे यह पेंट सूखने के बाद बहुत ही चिकनी और कांच जैसी चमक (Glossy finish) प्रदान करता है।
एनामेल पेंट बहुत ही टिकाऊ, चमकदार और नमी प्रतिरोधी होते हैं। इनमें बेस के रूप में मुख्य रूप से जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। साथ ही इसमें वार्निश (Varnish) का उपयोग व्हीकल के रूप में किया जाता है, जिससे यह पेंट सूखने के बाद बहुत ही चिकनी और कांच जैसी चमक (Glossy finish) प्रदान करता है।
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Q250: 250 MCQ सीरीज़ का माइलस्टोन! अंतिम प्रश्न: कंक्रीट को जमने (Setting) के दौरान तराई (Curing) क्यों अनिवार्य है?
- A) कंक्रीट का रंग निखारने के लिए
- ✅ B) सीमेंट के जलयोजन (Hydration) के लिए नमी बनाए रखने हेतु (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट की सुकार्यता बढ़ाने के लिए
- D) कंक्रीट को तुरंत कठोर बनाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की ताकत सीमेंट के पानी के साथ रासायनिक क्रिया (जलयोजन) से आती है। तराई (Curing) के दौरान, हम कंक्रीट को लगातार नमी प्रदान करते हैं। यदि तराई न की जाए, तो कंक्रीट का पानी वाष्पित हो जाएगा, हाइड्रेशन रुक जाएगा, और कंक्रीट अपनी पूरी मजबूती प्राप्त नहीं कर पाएगी, जिससे उसमें सिकुड़न की दरारें (Shrinkage cracks) आ जाएंगी।
कंक्रीट की ताकत सीमेंट के पानी के साथ रासायनिक क्रिया (जलयोजन) से आती है। तराई (Curing) के दौरान, हम कंक्रीट को लगातार नमी प्रदान करते हैं। यदि तराई न की जाए, तो कंक्रीट का पानी वाष्पित हो जाएगा, हाइड्रेशन रुक जाएगा, और कंक्रीट अपनी पूरी मजबूती प्राप्त नहीं कर पाएगी, जिससे उसमें सिकुड़न की दरारें (Shrinkage cracks) आ जाएंगी।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 51 (Q251 - Q255)
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Q251: कंक्रीट के 'सेट' (Set) होने के बाद यदि उसमें पानी की अधिकता रह जाए, तो उससे कौन सा दोष उत्पन्न होता है?
- A) सेग्रीगेशन (Segregation)
- ✅ B) हनीकॉम्बिंग (Honeycombing) (सही उत्तर)
- C) ब्लीडिंग (Bleeding)
- D) हाइड्रेशन (Hydration)
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट में पानी बहुत अधिक होता है और वह सूखता है, तो पानी के स्थान पर खाली छेद (Voids) रह जाते हैं। इसके कारण कंक्रीट में मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना बन जाती है, जिसे 'हनीकॉम्बिंग' कहते हैं। यह कंक्रीट की ताकत को काफी हद तक कम कर देता है।
जब कंक्रीट में पानी बहुत अधिक होता है और वह सूखता है, तो पानी के स्थान पर खाली छेद (Voids) रह जाते हैं। इसके कारण कंक्रीट में मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना बन जाती है, जिसे 'हनीकॉम्बिंग' कहते हैं। यह कंक्रीट की ताकत को काफी हद तक कम कर देता है।
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Q252: ईंट की चिनाई में 'फ्लेमिश बॉन्ड' (Flemish Bond) का मुख्य आकर्षण क्या है?
- A) यह सबसे सस्ता होता है
- ✅ B) यह इंग्लिश बॉन्ड की तुलना में अधिक सौंदर्यपरक (Aesthetic) है (सही उत्तर)
- C) यह सबसे अधिक भार सह सकता है
- D) इसे बनाना बहुत आसान है
💡 डिटेल Explanation:
फ्लेमिश बॉन्ड में प्रत्येक परत (Layer) में एक हेडर और एक स्ट्रेचर को बारी-बारी से बिछाया जाता है। इस पैटर्न के कारण यह दीवारें बहुत ही आकर्षक और सुंदर दिखती हैं। हालाँकि मजबूती में यह इंग्लिश बॉन्ड से थोड़ा कमतर हो सकता है, लेकिन सौंदर्य (Aesthetics) के कारण इसे फ्रंट फसाड (Facade) या सजावटी दीवारों के लिए ज्यादा पसंद किया जाता है।
फ्लेमिश बॉन्ड में प्रत्येक परत (Layer) में एक हेडर और एक स्ट्रेचर को बारी-बारी से बिछाया जाता है। इस पैटर्न के कारण यह दीवारें बहुत ही आकर्षक और सुंदर दिखती हैं। हालाँकि मजबूती में यह इंग्लिश बॉन्ड से थोड़ा कमतर हो सकता है, लेकिन सौंदर्य (Aesthetics) के कारण इसे फ्रंट फसाड (Facade) या सजावटी दीवारों के लिए ज्यादा पसंद किया जाता है।
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Q253: लकड़ी के 'केमिकल सीज़निंग' में 'यूरिया' (Urea) का उपयोग मुख्य रूप से क्यों किया जाता है?
- A) लकड़ी को कीड़ों से बचाने के लिए
- B) लकड़ी को आग प्रतिरोधी बनाने के लिए
- ✅ C) नमी को अंदर से बाहर की ओर खींचकर दरारें रोकने के लिए (सही उत्तर)
- D) लकड़ी को चमकदार बनाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी के सूखने पर अंदर और बाहर की नमी के अंतर (Moisture gradient) के कारण दरारें पड़ती हैं। यूरिया एक हाइग्रोस्कोपिक पदार्थ है जो लकड़ी के अंदर नमी को बनाए रखता है और बाहरी सतह को सूखने में मदद करता है। यह सूखने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है जिससे लकड़ी में 'चेक' (Checks) या दरारें नहीं पड़तीं।
लकड़ी के सूखने पर अंदर और बाहर की नमी के अंतर (Moisture gradient) के कारण दरारें पड़ती हैं। यूरिया एक हाइग्रोस्कोपिक पदार्थ है जो लकड़ी के अंदर नमी को बनाए रखता है और बाहरी सतह को सूखने में मदद करता है। यह सूखने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है जिससे लकड़ी में 'चेक' (Checks) या दरारें नहीं पड़तीं।
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Q254: 'एनामेल पेंट' में इस्तेमाल होने वाले 'वार्निश' (Varnish) का मुख्य कार्य क्या है?
- A) रंग प्रदान करना
- B) जल्दी सुखाना
- ✅ C) चमक (Gloss) और सुरक्षात्मक परत देना (सही उत्तर)
- D) पेंट को सस्ता बनाना
💡 डिटेल Explanation:
एनामेल पेंट एक प्रकार का पेंट है जिसमें वार्निश को व्हीकल (Vehicle) के रूप में मिलाया जाता है। वार्निश का काम पेंट के सूखने के बाद एक कठोर, चमकदार और जलरोधी फिल्म (Film) बनाना है। यही वार्निश ही है जो एनामेल पेंट को सामान्य ऑयल पेंट से अधिक टिकाऊ और चमकदार बनाता है।
एनामेल पेंट एक प्रकार का पेंट है जिसमें वार्निश को व्हीकल (Vehicle) के रूप में मिलाया जाता है। वार्निश का काम पेंट के सूखने के बाद एक कठोर, चमकदार और जलरोधी फिल्म (Film) बनाना है। यही वार्निश ही है जो एनामेल पेंट को सामान्य ऑयल पेंट से अधिक टिकाऊ और चमकदार बनाता है।
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Q255: ईंटों के निर्माण में 'पग मिलिंग' (Pug Milling) प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A) मिट्टी से पत्थर अलग करना
- ✅ B) मिट्टी को एकसमान (Homogeneous) और प्लास्टिक बनाना (सही उत्तर)
- C) मिट्टी को सुखाना
- D) ईंटों को पकाकर मजबूत बनाना
💡 डिटेल Explanation:
पग मिलिंग का उद्देश्य मिट्टी को पूरी तरह से एकसार करना है। कच्ची मिट्टी में कंकड़, पत्थर, नमी का असमान वितरण और गांठें हो सकती हैं। पग मिलिंग की प्रक्रिया मिट्टी के कणों को तोड़ती है, पानी के साथ उन्हें अच्छी तरह मिलाती है, और उसमें ऐसी 'प्लास्टिसिटी' पैदा करती है जिससे ईंट को सांचे में ढालने पर वह अपना आकार न खोए।
पग मिलिंग का उद्देश्य मिट्टी को पूरी तरह से एकसार करना है। कच्ची मिट्टी में कंकड़, पत्थर, नमी का असमान वितरण और गांठें हो सकती हैं। पग मिलिंग की प्रक्रिया मिट्टी के कणों को तोड़ती है, पानी के साथ उन्हें अच्छी तरह मिलाती है, और उसमें ऐसी 'प्लास्टिसिटी' पैदा करती है जिससे ईंट को सांचे में ढालने पर वह अपना आकार न खोए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 52 (Q256 - Q260)
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Q256: कंक्रीट का 'कार्यशीलता परीक्षण' (Workability Test) करते समय, यदि स्लंप (Slump) मान 'शून्य' (Zero) प्राप्त होता है, तो कंक्रीट कैसी होती है?
- A) बहुत अधिक सुकार्य (Very High Workable)
- B) मध्यम सुकार्य
- ✅ C) बहुत कठोर या सूखी (Very Stiff/Dry Mix) (सही उत्तर)
- D) कंक्रीट खराब है
💡 डिटेल Explanation:
जीरो स्लंप (Zero Slump) का मतलब है कि सांचा हटाने के बाद कंक्रीट का ढेर बिल्कुल नहीं गिरता। यह संकेत देता है कि कंक्रीट का मिश्रण बहुत सूखा और कठोर है (जैसे रोलर-कॉम्पैक्टेड कंक्रीट में होता है)। इसे हाथ से नहीं, बल्कि भारी मशीनों और रोलर्स से ही कॉम्पैक्ट किया जा सकता है।
जीरो स्लंप (Zero Slump) का मतलब है कि सांचा हटाने के बाद कंक्रीट का ढेर बिल्कुल नहीं गिरता। यह संकेत देता है कि कंक्रीट का मिश्रण बहुत सूखा और कठोर है (जैसे रोलर-कॉम्पैक्टेड कंक्रीट में होता है)। इसे हाथ से नहीं, बल्कि भारी मशीनों और रोलर्स से ही कॉम्पैक्ट किया जा सकता है।
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Q257: ईंट चिनाई में 'किंग क्लोजर' (King Closer) का आकार क्या होता है?
- A) पूरी ईंट का आधा भाग
- ✅ B) पूरी ईंट का 3/4 भाग (एक कोना कटा हुआ) (सही उत्तर)
- C) पूरी ईंट का 1/4 भाग
- D) ईंट की चौड़ाई में आधा
💡 डिटेल Explanation:
किंग क्लोजर को ईंट की लंबाई के मध्य से चौड़ाई के मध्य तक काटकर बनाया जाता है। इसमें ईंट के एक कोने को हटा दिया जाता है। इसका प्रयोग बॉन्ड तोड़ने और कोनों (Corners) पर चिनाई को व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है।
किंग क्लोजर को ईंट की लंबाई के मध्य से चौड़ाई के मध्य तक काटकर बनाया जाता है। इसमें ईंट के एक कोने को हटा दिया जाता है। इसका प्रयोग बॉन्ड तोड़ने और कोनों (Corners) पर चिनाई को व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है।
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Q258: लकड़ी के 'केमिकल सीज़निंग' में 'यूरिया' या 'नमक' के घोल में लकड़ी को डुबोने से क्या होता है?
- A) लकड़ी का वजन बढ़ जाता है
- ✅ B) सतह के सूखने की दर कम हो जाती है, जिससे दरारें नहीं पड़तीं (सही उत्तर)
- C) लकड़ी बहुत जल्दी जलती है
- D) लकड़ी का रंग काला पड़ जाता है
💡 डिटेल Explanation:
केमिकल सीज़निंग का मुख्य सिद्धांत है—बाहर से अंदर की ओर नमी का प्रवाह नियंत्रित करना। जब नमक या यूरिया जैसा पदार्थ सतह पर होता है, तो वह नमी को अपने पास खींचता है, जिससे सतह एकदम से सूखकर सिकुड़ती नहीं है। इससे लकड़ी के अंदरूनी भाग को भी सूखने का समय मिलता है और पूरे लट्ठे में नमी का वितरण एक समान बना रहता है।
केमिकल सीज़निंग का मुख्य सिद्धांत है—बाहर से अंदर की ओर नमी का प्रवाह नियंत्रित करना। जब नमक या यूरिया जैसा पदार्थ सतह पर होता है, तो वह नमी को अपने पास खींचता है, जिससे सतह एकदम से सूखकर सिकुड़ती नहीं है। इससे लकड़ी के अंदरूनी भाग को भी सूखने का समय मिलता है और पूरे लट्ठे में नमी का वितरण एक समान बना रहता है।
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Q259: 'एनामेल पेंट' लगाने के लिए सबसे उपयुक्त सतह कौन सी है?
- A) कच्ची दीवार
- B) नम लकड़ी
- ✅ C) लकड़ी, धातु या प्लास्टर की गई सूखी सतह (सही उत्तर)
- D) केवल पुरानी दीवारें
💡 डिटेल Explanation:
एनामेल पेंट बहुत ही चिकनी और अभेद्य (Impervious) परत बनाते हैं। इसलिए इन्हें ऐसी सतहों पर लगाया जाता है जो पूरी तरह सूखी और सपाट हों (जैसे फिनिशिंग के बाद लकड़ी के दरवाजे, खिड़कियाँ या लोहे की ग्रिल)। यदि सतह नम होगी, तो यह पेंट पपड़ी बनकर उखड़ जाएगा क्योंकि यह नमी को बाहर नहीं आने देगा।
एनामेल पेंट बहुत ही चिकनी और अभेद्य (Impervious) परत बनाते हैं। इसलिए इन्हें ऐसी सतहों पर लगाया जाता है जो पूरी तरह सूखी और सपाट हों (जैसे फिनिशिंग के बाद लकड़ी के दरवाजे, खिड़कियाँ या लोहे की ग्रिल)। यदि सतह नम होगी, तो यह पेंट पपड़ी बनकर उखड़ जाएगा क्योंकि यह नमी को बाहर नहीं आने देगा।
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Q260: 260 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: ईंट के 'फ्रॉग' (Frog) का मुख्य उपयोग क्या है?
- A) ईंट का वजन कम करने के लिए
- B) कंपनी का नाम अंकित करने के लिए
- ✅ C) ऊपर रखी ईंट के साथ 'मोर्टार कीज' (Mortar Keys) बनाकर पकड़ मजबूत करने के लिए (सही उत्तर)
- D) ईंट पकाने के लिए भट्ठे में सहारा देने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
फ्रॉग (Frog) ईंट के ऊपरी सतह पर बना एक छोटा गड्ढा होता है। जब चिनाई की जाती है, तो इसमें मोर्टार (मसाला) भर दिया जाता है। यह मोर्टार ऊपर वाली ईंट के साथ मिलकर एक 'मोर्टार की' (Mortar Key) बनाता है, जो दोनों ईंटों के बीच एक लॉक की तरह काम करता है और दीवार की क्षैतिज मजबूती (Horizontal shear resistance) को बढ़ाता है।
फ्रॉग (Frog) ईंट के ऊपरी सतह पर बना एक छोटा गड्ढा होता है। जब चिनाई की जाती है, तो इसमें मोर्टार (मसाला) भर दिया जाता है। यह मोर्टार ऊपर वाली ईंट के साथ मिलकर एक 'मोर्टार की' (Mortar Key) बनाता है, जो दोनों ईंटों के बीच एक लॉक की तरह काम करता है और दीवार की क्षैतिज मजबूती (Horizontal shear resistance) को बढ़ाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 53 (Q261 - Q265)
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Q261: कंक्रीट का 'वी-बी' (Vee-Bee) परीक्षण किस प्रकार की कंक्रीट के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है?
- A) बहुत सुकार्य (High Workable) कंक्रीट
- B) मध्यम सुकार्य कंक्रीट
- ✅ C) बहुत कम सुकार्य या सूखी (Very Low/Stiff) कंक्रीट (सही उत्तर)
- D) केवल पानी के नीचे डाली जाने वाली कंक्रीट
💡 डिटेल Explanation:
स्लंप टेस्ट केवल उन कंक्रीट के लिए अच्छा है जिनमें कुछ हद तक सुकार्यता (Workability) होती है। लेकिन बहुत सूखी या कंक्रीट (Stiff mix) जिसमें स्लंप न के बराबर होता है, उसके लिए स्लंप टेस्ट काम नहीं करता। ऐसी कंक्रीट के लिए 'वी-बी कंसिस्टोमीटर टेस्ट' सबसे सटीक है, क्योंकि इसमें कंक्रीट को वाइब्रेशन (Vibration) दिया जाता है, जिससे उसकी वास्तविक कार्यशीलता का पता चलता है।
स्लंप टेस्ट केवल उन कंक्रीट के लिए अच्छा है जिनमें कुछ हद तक सुकार्यता (Workability) होती है। लेकिन बहुत सूखी या कंक्रीट (Stiff mix) जिसमें स्लंप न के बराबर होता है, उसके लिए स्लंप टेस्ट काम नहीं करता। ऐसी कंक्रीट के लिए 'वी-बी कंसिस्टोमीटर टेस्ट' सबसे सटीक है, क्योंकि इसमें कंक्रीट को वाइब्रेशन (Vibration) दिया जाता है, जिससे उसकी वास्तविक कार्यशीलता का पता चलता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam
Q262: ईंट की चिनाई में 'कोर्स' (Course) किसे कहते हैं?
- A) दीवार की कुल मोटाई
- B) ईंटों के बीच का मसाला
- ✅ C) ईंटों की एक क्षैतिज परत (Horizontal layer of bricks) (सही उत्तर)
- D) ईंटों को काटने का तरीका
💡 डिटेल Explanation:
चिनाई कार्य में ईंटों की एक पूरी क्षैतिज (Horizontal) पंक्ति या लेयर को 'कोर्स' कहा जाता है। दीवार के निर्माण में कई कोर्स एक के ऊपर एक लगाए जाते हैं। निर्माण कार्यों के बिलिंग और एस्टिमेशन में, दीवार की ऊंचाई 'नंबर ऑफ कोर्स' के आधार पर भी मापी जाती है।
चिनाई कार्य में ईंटों की एक पूरी क्षैतिज (Horizontal) पंक्ति या लेयर को 'कोर्स' कहा जाता है। दीवार के निर्माण में कई कोर्स एक के ऊपर एक लगाए जाते हैं। निर्माण कार्यों के बिलिंग और एस्टिमेशन में, दीवार की ऊंचाई 'नंबर ऑफ कोर्स' के आधार पर भी मापी जाती है।
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Q263: लकड़ी के 'ब्लीडिंग' (Bleeding - जो राल के रूप में बाहर आता है) को रोकने के लिए पेंट से पहले क्या करना चाहिए?
- A) लकड़ी को पानी में भिगोना
- B) लकड़ी को धूप में सुखाना
- ✅ C) 'नॉटिंग' (Knotting) प्रक्रिया अपनाना (सही उत्तर)
- D) केवल ऑयल पेंट लगाना
💡 डिटेल Explanation:
कुछ लकड़ियों (जैसे चीड़) में राल (Resin/Sap) की गांठें होती हैं। पेंट करने के बाद ये गांठें गर्म होकर राल (Sap) बाहर छोड़ती हैं, जिससे पेंट खराब हो जाता है। इसे रोकने के लिए पेंट करने से पहले गांठों पर 'नॉटिंग' (Knotting) की जाती है, जिसमें रेड लेड या अन्य सीलिंग रसायनों का लेप लगाकर गांठों को सील कर दिया जाता है।
कुछ लकड़ियों (जैसे चीड़) में राल (Resin/Sap) की गांठें होती हैं। पेंट करने के बाद ये गांठें गर्म होकर राल (Sap) बाहर छोड़ती हैं, जिससे पेंट खराब हो जाता है। इसे रोकने के लिए पेंट करने से पहले गांठों पर 'नॉटिंग' (Knotting) की जाती है, जिसमें रेड लेड या अन्य सीलिंग रसायनों का लेप लगाकर गांठों को सील कर दिया जाता है।
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Q264: कंक्रीट को अत्यधिक तराई (Over-curing) देने से क्या होगा?
- A) कंक्रीट की शक्ति कम हो जाएगी
- ✅ B) इससे कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, यह लाभदायक है (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट में दरारें आ जाएंगी
- D) कंक्रीट का रंग खराब हो जाएगा
💡 डिटेल Explanation:
तराई (Curing) कंक्रीट को मजबूत बनाने की प्रक्रिया है। 'अत्यधिक तराई' का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता है, बल्कि यह कंक्रीट के हाइड्रेशन के लिए बेहतर ही होता है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से, एक निश्चित समय (जैसे 28 दिन) के बाद तराई जारी रखना आर्थिक रूप से उचित नहीं होता, लेकिन तकनीकी रूप से यह कंक्रीट को और भी टिकाऊ बनाती है।
तराई (Curing) कंक्रीट को मजबूत बनाने की प्रक्रिया है। 'अत्यधिक तराई' का कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता है, बल्कि यह कंक्रीट के हाइड्रेशन के लिए बेहतर ही होता है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से, एक निश्चित समय (जैसे 28 दिन) के बाद तराई जारी रखना आर्थिक रूप से उचित नहीं होता, लेकिन तकनीकी रूप से यह कंक्रीट को और भी टिकाऊ बनाती है।
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Q265: पत्थरों के 'स्प्लिटिंग टेस्ट' (Splitting Test) का उपयोग मुख्य रूप से किस पत्थर के लिए किया जाता है?
- A) ग्रेनाइट
- ✅ B) स्लेट या सैंडस्टोन (स्तरीकृत पत्थर) (सही उत्तर)
- C) संगमरमर
- D) चूना पत्थर
💡 डिटेल Explanation:
स्तरीकृत पत्थर (Stratified stones) जैसे स्लेट, सैंडस्टोन या शेल के अंदर परतें (Layers) होती हैं। स्प्लिटिंग टेस्ट यह जांचता है कि पत्थर अपनी परतों के साथ कितनी आसानी से अलग (Split) हो सकता है। यह परीक्षण उन पत्थरों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें टाइल्स या फ्लोरिंग (Flagstone/Tiles) के रूप में उपयोग करना है, ताकि उनकी मजबूती और स्थायित्व को परखा जा सके।
स्तरीकृत पत्थर (Stratified stones) जैसे स्लेट, सैंडस्टोन या शेल के अंदर परतें (Layers) होती हैं। स्प्लिटिंग टेस्ट यह जांचता है कि पत्थर अपनी परतों के साथ कितनी आसानी से अलग (Split) हो सकता है। यह परीक्षण उन पत्थरों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें टाइल्स या फ्लोरिंग (Flagstone/Tiles) के रूप में उपयोग करना है, ताकि उनकी मजबूती और स्थायित्व को परखा जा सके।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 52 (Q266 - Q270)
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Q266: कंक्रीट में 'प्लास्टिकाइज़र' (Plasticizer) मिलाने से कंक्रीट के घनत्व (Density) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) घनत्व कम हो जाता है
- ✅ B) घनत्व बढ़ जाता है (सही उत्तर)
- C) घनत्व समान रहता है
- D) कंक्रीट छिद्रपूर्ण हो जाती है
💡 डिटेल Explanation:
प्लास्टिकाइज़र कंक्रीट को अधिक सुकार्य (Workable) बनाते हैं, जिससे कंक्रीट को सांचे में आसानी से कॉम्पैक्ट किया जा सकता है। बेहतर कॉम्पैक्शन के कारण कंक्रीट के अंदर की हवा के बुलबुले निकल जाते हैं और मिश्रण बहुत सघन (Dense) हो जाता है, जिससे कंक्रीट का घनत्व (Density) बढ़ जाता है।
प्लास्टिकाइज़र कंक्रीट को अधिक सुकार्य (Workable) बनाते हैं, जिससे कंक्रीट को सांचे में आसानी से कॉम्पैक्ट किया जा सकता है। बेहतर कॉम्पैक्शन के कारण कंक्रीट के अंदर की हवा के बुलबुले निकल जाते हैं और मिश्रण बहुत सघन (Dense) हो जाता है, जिससे कंक्रीट का घनत्व (Density) बढ़ जाता है।
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Q267: 'फ्लेमिश बॉन्ड' (Flemish Bond) के निर्माण में, यदि दीवार की मोटाई एक ईंट से अधिक है, तो उसे क्या कहा जाता है?
- A) सिंगल फ्लेमिश बॉन्ड
- ✅ B) डबल फ्लेमिश बॉन्ड (Double Flemish Bond) (सही उत्तर)
- C) ट्रिपल फ्लेमिश बॉन्ड
- D) स्ट्रेचर बॉन्ड
💡 डिटेल Explanation:
डबल फ्लेमिश बॉन्ड में दीवार के दोनों तरफ (अंदर और बाहर) एक ही जैसा पैटर्न (हेडर और स्ट्रेचर का क्रम) दिखाई देता है। यह देखने में बहुत सुंदर होता है, इसलिए इसे 'डबल' कहा जाता है क्योंकि दोनों तरफ से समान फिनिशिंग मिलती है। सिंगल फ्लेमिश बॉन्ड में केवल बाहर की तरफ यह पैटर्न होता है।
डबल फ्लेमिश बॉन्ड में दीवार के दोनों तरफ (अंदर और बाहर) एक ही जैसा पैटर्न (हेडर और स्ट्रेचर का क्रम) दिखाई देता है। यह देखने में बहुत सुंदर होता है, इसलिए इसे 'डबल' कहा जाता है क्योंकि दोनों तरफ से समान फिनिशिंग मिलती है। सिंगल फ्लेमिश बॉन्ड में केवल बाहर की तरफ यह पैटर्न होता है।
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Q268: लकड़ी के 'ब्लीडिंग' (Resin exudation) को रोकने के लिए 'नॉटिंग' में कौन सा पदार्थ मिलाया जाता है?
- A) केवल तारपीन
- ✅ B) रेड लेड और गोंद का मिश्रण (सही उत्तर)
- C) साधारण मिट्टी का लेप
- D) केवल पानी
💡 डिटेल Explanation:
नॉटिंग (Knotting) के लिए 'रेड लेड' (Red Lead) और 'गोंद' (Glue) का मिश्रण सबसे प्रभावी होता है। यह गांठों (Knots) के ऊपर एक अभेद्य परत बना देता है, जिससे राल (Resin) बाहर नहीं आ पाता और पेंट का रंग या उसकी फिनिश खराब नहीं होती। इसके सूखने के बाद ही पेंट का काम किया जाता है।
नॉटिंग (Knotting) के लिए 'रेड लेड' (Red Lead) और 'गोंद' (Glue) का मिश्रण सबसे प्रभावी होता है। यह गांठों (Knots) के ऊपर एक अभेद्य परत बना देता है, जिससे राल (Resin) बाहर नहीं आ पाता और पेंट का रंग या उसकी फिनिश खराब नहीं होती। इसके सूखने के बाद ही पेंट का काम किया जाता है।
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Q269: पेंट लगाने के लिए सबसे उपयुक्त 'मौसम' कौन सा है?
- A) बहुत नमी वाला मौसम (बरसात)
- ✅ B) साफ और सूखा (Dry) मौसम (सही उत्तर)
- C) भीषण गर्मी का मौसम
- D) कड़ाके की ठंड का मौसम
💡 डिटेल Explanation:
पेंट के सूखने और सतह पर सही फिनिशिंग के लिए 'सूखा' (Dry) मौसम सबसे अच्छा होता है। बरसात या अधिक नमी में पेंट की परत ठीक से नहीं चिपकती, उसमें बुलबुले (Blistering) आ सकते हैं और सूखने में बहुत अधिक समय लगता है। पेंट का काम करने के लिए सामान्य तापमान और कम आर्द्रता (Humidity) आदर्श स्थिति है।
पेंट के सूखने और सतह पर सही फिनिशिंग के लिए 'सूखा' (Dry) मौसम सबसे अच्छा होता है। बरसात या अधिक नमी में पेंट की परत ठीक से नहीं चिपकती, उसमें बुलबुले (Blistering) आ सकते हैं और सूखने में बहुत अधिक समय लगता है। पेंट का काम करने के लिए सामान्य तापमान और कम आर्द्रता (Humidity) आदर्श स्थिति है।
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Q270: 270 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: ईंट बनाने की 'वायर कट' (Wire Cut) विधि में मिट्टी को सांचे से बाहर निकालने के लिए क्या उपयोग किया जाता है?
- A) तेज चाकू
- B) यांत्रिक प्रेस
- ✅ C) धात्विक तार (Metallic wire) (सही उत्तर)
- D) गरम भाप
💡 डिटेल Explanation:
वायर कट विधि (Wire Cut Brick moulding) में मिट्टी को एक मशीन से गुजारकर एक लंबी आयताकार पट्टी (Column) की तरह बाहर निकाला जाता है। इस पट्टी को बराबर ईंटों के आकार में काटने के लिए 'तनावयुक्त तारों' (Taut metallic wires) का उपयोग किया जाता है। यह विधि बहुत ही सटीकता से और बहुत तेज़ी से ईंटों को आकार देती है।
वायर कट विधि (Wire Cut Brick moulding) में मिट्टी को एक मशीन से गुजारकर एक लंबी आयताकार पट्टी (Column) की तरह बाहर निकाला जाता है। इस पट्टी को बराबर ईंटों के आकार में काटने के लिए 'तनावयुक्त तारों' (Taut metallic wires) का उपयोग किया जाता है। यह विधि बहुत ही सटीकता से और बहुत तेज़ी से ईंटों को आकार देती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 55 (Q271 - Q275)
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Q271: सीमेंट के 'साउंडनेस' (Soundness) का परीक्षण, जो मुख्य रूप से 'स्वतंत्र चूने' (Free Lime) के कारण होने वाले फैलाव को मापता है, किस उपकरण द्वारा किया जाता है?
- A) विकाट उपकरण (Vicat apparatus)
- ✅ B) ले-चेटेलियर उपकरण (Le Chatelier apparatus) (सही उत्तर)
- C) ब्लेन उपकरण (Blaine's apparatus)
- D) स्लंप कोन (Slump cone)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में 'साउंडनेस' दो कारणों से होती है: स्वतंत्र चूना (Free Lime) और मैग्नीशिया (Magnesia)। ले-चेटेलियर उपकरण (Le Chatelier apparatus) का उपयोग विशेष रूप से स्वतंत्र चूने के कारण होने वाले आयतन परिवर्तन (Volume expansion) को मापने के लिए किया जाता है। (साधारण पोर्टलैंड सीमेंट के लिए यह फैलाव 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए)। मैग्नीशिया के लिए 'ऑटोक्लेव टेस्ट' किया जाता है।
सीमेंट में 'साउंडनेस' दो कारणों से होती है: स्वतंत्र चूना (Free Lime) और मैग्नीशिया (Magnesia)। ले-चेटेलियर उपकरण (Le Chatelier apparatus) का उपयोग विशेष रूप से स्वतंत्र चूने के कारण होने वाले आयतन परिवर्तन (Volume expansion) को मापने के लिए किया जाता है। (साधारण पोर्टलैंड सीमेंट के लिए यह फैलाव 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए)। मैग्नीशिया के लिए 'ऑटोक्लेव टेस्ट' किया जाता है।
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Q272: भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (First Class Brick) को 24 घंटे ठंडे पानी में डुबोने पर उसका जल अवशोषण (Water absorption) उसके सूखे वजन के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 15%
- ✅ B) 20% (सही उत्तर)
- C) 22%
- D) 25%
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की गुणवत्ता मापने का यह एक प्रमुख मानदंड है। भारतीय मानक के अनुसार जल अवशोषण सीमाएँ इस प्रकार हैं:
ईंट की गुणवत्ता मापने का यह एक प्रमुख मानदंड है। भारतीय मानक के अनुसार जल अवशोषण सीमाएँ इस प्रकार हैं:
- प्रथम श्रेणी ईंट (First class) - अधिकतम 20%
- द्वितीय श्रेणी ईंट (Second class) - अधिकतम 22%
- तृतीय श्रेणी ईंट (Third class) - अधिकतम 25%
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Q273: लकड़ी के सूखने (Seasoning) के दौरान, यदि लकड़ी की बाहरी सतह तेजी से सूख कर कठोर हो जाती है जबकि अंदर नमी बनी रहती है, तो इस दोष (Defect) को क्या कहते हैं?
- A) हनीकॉम्बिंग (Honeycombing)
- ✅ B) केस हार्डनिंग (Case Hardening) (सही उत्तर)
- C) बोइंग (Bowing)
- D) हार्ट शेक (Heart Shake)
💡 डिटेल Explanation:
यदि लकड़ी को भट्ठे (Kiln) में बहुत तेजी से सुखाया जाता है, तो उसकी बाहरी सतह तेजी से सिकुड़ कर एक कठोर आवरण (Case) बना लेती है, जबकि अंदर का हिस्सा गीला रहता है। इस अवस्था को 'केस हार्डनिंग' (Case Hardening) कहते हैं। बाद में जब अंदर का हिस्सा सूखने की कोशिश करता है, तो बाहर की सख्त सतह के कारण अंदर दरारें पड़ जाती हैं जिसे 'हनीकॉम्बिंग' कहते हैं।
यदि लकड़ी को भट्ठे (Kiln) में बहुत तेजी से सुखाया जाता है, तो उसकी बाहरी सतह तेजी से सिकुड़ कर एक कठोर आवरण (Case) बना लेती है, जबकि अंदर का हिस्सा गीला रहता है। इस अवस्था को 'केस हार्डनिंग' (Case Hardening) कहते हैं। बाद में जब अंदर का हिस्सा सूखने की कोशिश करता है, तो बाहर की सख्त सतह के कारण अंदर दरारें पड़ जाती हैं जिसे 'हनीकॉम्बिंग' कहते हैं।
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Q274: आग से बचाव (Fire resistance) के लिए लकड़ी या धातु की सतहों पर मुख्य रूप से किस प्रकार के पेंट का उपयोग किया जाता है?
- A) एल्युमिनियम पेंट (Aluminium Paint)
- B) एनामेल पेंट (Enamel Paint)
- ✅ C) एस्बेस्टस पेंट (Asbestos Paint) (सही उत्तर)
- D) सेल्युलोज पेंट (Cellulose Paint)
💡 डिटेल Explanation:
एस्बेस्टस एक प्राकृतिक रूप से आग प्रतिरोधी (Fireproof) खनिज है। एस्बेस्टस पेंट का निर्माण इसी सामग्री का उपयोग करके किया जाता है। जब इसे लकड़ी या धातु की सतह पर लगाया जाता है, तो यह आग लगने पर सतह को कुछ समय तक उच्च तापमान से बचाता है और आग फैलने से रोकता है।
एस्बेस्टस एक प्राकृतिक रूप से आग प्रतिरोधी (Fireproof) खनिज है। एस्बेस्टस पेंट का निर्माण इसी सामग्री का उपयोग करके किया जाता है। जब इसे लकड़ी या धातु की सतह पर लगाया जाता है, तो यह आग लगने पर सतह को कुछ समय तक उच्च तापमान से बचाता है और आग फैलने से रोकता है।
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Q275: भूगर्भीय वर्गीकरण (Geological classification) के अनुसार, 'संगमरमर' (Marble) किस प्रकार की चट्टान का उदाहरण है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous rock)
- B) अवसादी चट्टान (Sedimentary rock)
- ✅ C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic rock) (सही उत्तर)
- D) ज्वालामुखी चट्टान (Volcanic rock)
💡 डिटेल Explanation:
भूवैज्ञानिक रूप से, चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं: आग्नेय, अवसादी और कायांतरित। संगमरमर (Marble) एक कायांतरित (Metamorphic) चट्टान है जो चूना पत्थर (Limestone - अवसादी चट्टान) पर पृथ्वी के अंदर लाखों वर्षों तक अत्यधिक दबाव और गर्मी (Heat and pressure) के प्रभाव से बनती है।
भूवैज्ञानिक रूप से, चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं: आग्नेय, अवसादी और कायांतरित। संगमरमर (Marble) एक कायांतरित (Metamorphic) चट्टान है जो चूना पत्थर (Limestone - अवसादी चट्टान) पर पृथ्वी के अंदर लाखों वर्षों तक अत्यधिक दबाव और गर्मी (Heat and pressure) के प्रभाव से बनती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 56 (Q276 - Q280)
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Q276: कंक्रीट को 'पंप' (Pumping) के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए, कंक्रीट का 'स्लंप मान' (Slump Value) लगभग कितना होना चाहिए?
- A) 10 से 25 mm
- ✅ B) 50 से 100 mm (सही उत्तर)
- C) 150 से 200 mm
- D) 0 mm (शून्य)
💡 डिटेल Explanation:
पंपिंग के लिए कंक्रीट को न तो बहुत अधिक सख्त होना चाहिए और न ही बहुत अधिक तरल। 50 से 100 मिमी (Medium workability) का स्लंप मान सबसे आदर्श माना जाता है। इससे कंक्रीट पाइपों के माध्यम से बिना रुके आसानी से बहती है और 'सेग्रीगेशन' (गिट्टी और पेस्ट का अलग होना) का खतरा भी नहीं रहता।
पंपिंग के लिए कंक्रीट को न तो बहुत अधिक सख्त होना चाहिए और न ही बहुत अधिक तरल। 50 से 100 मिमी (Medium workability) का स्लंप मान सबसे आदर्श माना जाता है। इससे कंक्रीट पाइपों के माध्यम से बिना रुके आसानी से बहती है और 'सेग्रीगेशन' (गिट्टी और पेस्ट का अलग होना) का खतरा भी नहीं रहता।
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Q277: ईंट की चिनाई में उपयोग किए जाने वाले 'मोर्टार' (Mortar/मसाला) का सबसे प्रमुख कार्य क्या है?
- A) दीवार का वजन बढ़ाना
- B) दीवार को सुंदर बनाना
- ✅ C) ईंटों को एक साथ बांधना और भार को एकसमान वितरित करना (सही उत्तर)
- D) ईंटों को पानी सोखने से रोकना
💡 डिटेल Explanation:
मोर्टार (सीमेंट, रेत और पानी का मिश्रण) ईंटों के बीच एक 'बाइंडिंग सामग्री' (Binding material) का काम करता है। यह दो ईंटों को आपस में मजबूती से जोड़ता है और दीवार पर आने वाले भार को नीचे की परतों में एकसमान रूप से वितरित (Distribute) करता है, ताकि दीवार में कहीं भी असमान स्ट्रेस (Stress) न आए।
मोर्टार (सीमेंट, रेत और पानी का मिश्रण) ईंटों के बीच एक 'बाइंडिंग सामग्री' (Binding material) का काम करता है। यह दो ईंटों को आपस में मजबूती से जोड़ता है और दीवार पर आने वाले भार को नीचे की परतों में एकसमान रूप से वितरित (Distribute) करता है, ताकि दीवार में कहीं भी असमान स्ट्रेस (Stress) न आए।
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Q278: इमारती लकड़ी (Timber) में 'फफूंदी' (Fungi) पनपने के लिए, लकड़ी में नमी की मात्रा (Moisture content) कम से कम कितनी होनी चाहिए?
- A) 5% से अधिक
- B) 10% से अधिक
- ✅ C) 20% से अधिक (सही उत्तर)
- D) 50% से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
फफूंदी (Fungi) केवल उसी लकड़ी पर पनपती और हमला करती है जिसमें नमी की मात्रा 20% से अधिक हो और साथ ही हवा तथा उचित तापमान उपलब्ध हो। यदि लकड़ी को सुखाकर (Seasoning द्वारा) उसकी नमी 20% से कम (आदर्श रूप से 10-12%) कर दी जाए, तो वह फफूंदी के हमले से पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।
फफूंदी (Fungi) केवल उसी लकड़ी पर पनपती और हमला करती है जिसमें नमी की मात्रा 20% से अधिक हो और साथ ही हवा तथा उचित तापमान उपलब्ध हो। यदि लकड़ी को सुखाकर (Seasoning द्वारा) उसकी नमी 20% से कम (आदर्श रूप से 10-12%) कर दी जाए, तो वह फफूंदी के हमले से पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।
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Q279: लोहे (Iron/Steel) की सतहों पर जंग (Rust) लगने से रोकने के लिए, प्राइमर कोट (Primer coat) के रूप में मुख्य रूप से किस पेंट का उपयोग किया जाता है?
- A) एल्युमिनियम पेंट
- ✅ B) रेड लेड पेंट (Red Lead paint) (सही उत्तर)
- C) डिस्टेंपर (Distemper)
- D) एनामेल पेंट
💡 डिटेल Explanation:
लोहे या इस्पात की सतहों के लिए 'रेड लेड पेंट' (Red Lead - Pb3O4) सबसे उत्कृष्ट और पारंपरिक एंटी-कोरोसिव (Anti-corrosive) प्राइमर है। यह लोहे की सतह पर बहुत अच्छी तरह चिपकता है और एक अभेद्य परत बनाता है जो नमी तथा ऑक्सीजन को सतह तक पहुँचने से रोककर जंग लगने से बचाती है।
लोहे या इस्पात की सतहों के लिए 'रेड लेड पेंट' (Red Lead - Pb3O4) सबसे उत्कृष्ट और पारंपरिक एंटी-कोरोसिव (Anti-corrosive) प्राइमर है। यह लोहे की सतह पर बहुत अच्छी तरह चिपकता है और एक अभेद्य परत बनाता है जो नमी तथा ऑक्सीजन को सतह तक पहुँचने से रोककर जंग लगने से बचाती है।
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Q280: 280 MCQ सीरीज़ पूरी होने की बधाई! एक आखिरी सवाल: 'ग्रेनाइट' (Granite) पत्थर का निर्माण मुख्य रूप से किन खनिजों (Minerals) से मिलकर होता है?
- ✅ A) क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार और माइका (Quartz, Feldspar, Mica) (सही उत्तर)
- B) कैल्साइट और डोलोमाइट
- C) जिप्सम और सिलिका
- D) एल्युमिना और आयरन ऑक्साइड
💡 डिटेल Explanation:
ग्रेनाइट एक आग्नेय चट्टान (Igneous rock) है, जो मुख्य रूप से तीन खनिजों से बनी होती है: क्वार्ट्ज (Quartz - जो इसे अत्यधिक कठोरता देता है), फेल्डस्पार (Feldspar - जो पत्थर का रंग निर्धारित करता है), और माइका (Mica - अभ्रक)। इन्हीं खनिजों के बेहतरीन मिश्रण के कारण ग्रेनाइट निर्माण कार्यों के लिए बहुत कठोर और टिकाऊ माना जाता है।
ग्रेनाइट एक आग्नेय चट्टान (Igneous rock) है, जो मुख्य रूप से तीन खनिजों से बनी होती है: क्वार्ट्ज (Quartz - जो इसे अत्यधिक कठोरता देता है), फेल्डस्पार (Feldspar - जो पत्थर का रंग निर्धारित करता है), और माइका (Mica - अभ्रक)। इन्हीं खनिजों के बेहतरीन मिश्रण के कारण ग्रेनाइट निर्माण कार्यों के लिए बहुत कठोर और टिकाऊ माना जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 57 (Q281 - Q285)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPSSSC JE 2016, LMRC JE
Q281: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) में पानी मिलाने पर 'फ्लैश सेट' (Flash Set - तुरंत जमना) के लिए मुख्य रूप से कौन सा यौगिक जिम्मेदार होता है?
- A) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S)
- B) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- ✅ C) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) (सही उत्तर)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में पानी मिलाते ही ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) सबसे पहले और सबसे तेजी से प्रतिक्रिया करता है। इसकी वजह से सीमेंट बहुत जल्दी (फ्लैश सेट) जमने लगता है, जो निर्माण कार्य के लिए हानिकारक है। इसी फ्लैश सेट को रोकने (Retard करने) के लिए सीमेंट पीसते समय उसमें 2-3% जिप्सम (Gypsum) मिलाया जाता है।
सीमेंट में पानी मिलाते ही ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) सबसे पहले और सबसे तेजी से प्रतिक्रिया करता है। इसकी वजह से सीमेंट बहुत जल्दी (फ्लैश सेट) जमने लगता है, जो निर्माण कार्य के लिए हानिकारक है। इसी फ्लैश सेट को रोकने (Retard करने) के लिए सीमेंट पीसते समय उसमें 2-3% जिप्सम (Gypsum) मिलाया जाता है।
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Q282: IS 456:2000 के अनुसार, समुद्री जल (Sea Water) के संपर्क में आने वाले 'प्रबलित कंक्रीट' (RCC) निर्माण के लिए कंक्रीट का न्यूनतम ग्रेड (Minimum Grade) क्या होना चाहिए?
- A) M20
- B) M25
- ✅ C) M30 (सही उत्तर)
- D) M35
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक IS 456 के अनुसार, समुद्री जल का वातावरण 'गंभीर' (Severe) एक्सपोजर स्थिति के अंतर्गत आता है। ऐसे वातावरण में सरियों (Reinforcement) को जंग और सल्फेट अटैक से बचाने के लिए RCC में कम से कम M30 ग्रेड की कंक्रीट का उपयोग करना अनिवार्य है। (वहीं समुद्री जल में PCC के लिए न्यूनतम ग्रेड M20 है)।
भारतीय मानक IS 456 के अनुसार, समुद्री जल का वातावरण 'गंभीर' (Severe) एक्सपोजर स्थिति के अंतर्गत आता है। ऐसे वातावरण में सरियों (Reinforcement) को जंग और सल्फेट अटैक से बचाने के लिए RCC में कम से कम M30 ग्रेड की कंक्रीट का उपयोग करना अनिवार्य है। (वहीं समुद्री जल में PCC के लिए न्यूनतम ग्रेड M20 है)।
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Q283: इमारती लकड़ी (Timber) में 'ड्राई रॉट' (Dry Rot) नामक दोष मुख्य रूप से किसके कारण होता है?
- ✅ A) हवा के अपर्याप्त संचार (Lack of ventilation) और फफूंदी (Fungi) के हमले के कारण (सही उत्तर)
- B) दीमक (Termites) के कारण
- C) लकड़ी के बहुत अधिक सूखने के कारण
- D) अत्यधिक गर्मी के कारण
💡 डिटेल Explanation:
ड्राई रॉट (Dry Rot) लकड़ी को पूरी तरह से खोखला करके सूखे पाउडर में बदल देता है। इसका मुख्य कारण फफूंदी (Fungi) है। यह फफूंदी उन जगहों पर पनपती है जहाँ लकड़ी को बिना हवा (Ventilation) के अंधेरी और नम जगह (Damp condition) पर रखा जाता है। इसके बचाव के लिए लकड़ी को उचित हवा और परिरक्षक (Preservative) देना जरूरी है।
ड्राई रॉट (Dry Rot) लकड़ी को पूरी तरह से खोखला करके सूखे पाउडर में बदल देता है। इसका मुख्य कारण फफूंदी (Fungi) है। यह फफूंदी उन जगहों पर पनपती है जहाँ लकड़ी को बिना हवा (Ventilation) के अंधेरी और नम जगह (Damp condition) पर रखा जाता है। इसके बचाव के लिए लकड़ी को उचित हवा और परिरक्षक (Preservative) देना जरूरी है।
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Q284: भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, एक मानक या 'मॉड्यूलर ईंट' (Standard/Modular Brick) का वास्तविक आकार क्या होता है?
- ✅ A) 19 cm × 9 cm × 9 cm (सही उत्तर)
- B) 20 cm × 10 cm × 10 cm
- C) 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm
- D) 19 cm × 19 cm × 9 cm
💡 डिटेल Explanation:
भारत में ईंटों के आकार के दो मुख्य प्रकार हैं:
भारत में ईंटों के आकार के दो मुख्य प्रकार हैं:
- मानक/मॉड्यूलर ईंट (Standard Modular Brick) का वास्तविक आकार: 19 cm × 9 cm × 9 cm
- नॉमिनल आकार (मोर्टार सहित): 20 cm × 10 cm × 10 cm
- पारंपरिक ईंट (Traditional Brick - आमतौर पर उपयोग होने वाली): लगभग 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm
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Q285: 285 MCQ सीरीज़ का माइलस्टोन! प्रश्न: 'डिस्टेंपर' (Distemper) पेंट बनाने में 'बेस' (Base) के रूप में मुख्य रूप से किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
- A) जिंक ऑक्साइड
- B) व्हाइट लेड (White Lead)
- ✅ C) चॉक या व्हाइटिंग (Chalk / Whiting) (सही उत्तर)
- D) रेड लेड
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर मूल रूप से एक सस्ता वाटर-पेंट (Water Paint) है। इसमें चॉक (Chalk) का उपयोग बेस के रूप में किया जाता है, जबकि पानी का उपयोग व्हीकल (Vehicle) के रूप में होता है। इसे टिकाऊ बनाने के लिए इसमें 'साइज' (Size/गोंद) मिलाया जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से आंतरिक सतहों (Inner Plastered surfaces) पर किया जाता है।
डिस्टेंपर मूल रूप से एक सस्ता वाटर-पेंट (Water Paint) है। इसमें चॉक (Chalk) का उपयोग बेस के रूप में किया जाता है, जबकि पानी का उपयोग व्हीकल (Vehicle) के रूप में होता है। इसे टिकाऊ बनाने के लिए इसमें 'साइज' (Size/गोंद) मिलाया जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से आंतरिक सतहों (Inner Plastered surfaces) पर किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 58 (Q286 - Q290)
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Q286: सीमेंट की 'सूक्ष्मता' (Fineness) का परीक्षण करने के लिए मुख्य रूप से किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) विकाट उपकरण (Vicat Apparatus)
- B) ले-चेटेलियर उपकरण (Le Chatelier Apparatus)
- ✅ C) ब्लेन एयर परमीएबिलिटी उपकरण (Blaine's Air Permeability Apparatus) (सही उत्तर)
- D) स्लंप कोन (Slump Cone)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) उसकी हाइड्रेशन दर और प्रारंभिक ताकत को प्रभावित करती है। इसे मापने के लिए 'ब्लेन एयर परमीएबिलिटी उपकरण' (Blaine's Air Permeability Apparatus) का उपयोग किया जाता है, जो सीमेंट का 'विशिष्ट सतह क्षेत्रफल' (Specific Surface Area) cm²/gm या m²/kg में मापता है। इसके अलावा 90 माइक्रोन की छलनी (Sieve test) का भी उपयोग किया जाता है।
सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) उसकी हाइड्रेशन दर और प्रारंभिक ताकत को प्रभावित करती है। इसे मापने के लिए 'ब्लेन एयर परमीएबिलिटी उपकरण' (Blaine's Air Permeability Apparatus) का उपयोग किया जाता है, जो सीमेंट का 'विशिष्ट सतह क्षेत्रफल' (Specific Surface Area) cm²/gm या m²/kg में मापता है। इसके अलावा 90 माइक्रोन की छलनी (Sieve test) का भी उपयोग किया जाता है।
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Q287: ईंट बनाने की मिट्टी में 'एल्यूमिना' (Alumina) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) ईंट को लाल रंग प्रदान करना
- B) ईंट को सूखते समय सिकुड़ने से बचाना
- C) सिलिका को पिघलने में मदद करना
- ✅ D) मिट्टी को 'प्लास्टिसिटी' (Plasticity) प्रदान करना ताकि उसे सांचे में ढाला जा सके (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में लगभग 20-30% एल्यूमिना (Alumina) होता है। इसका मुख्य कार्य मिट्टी में 'सुघट्यता' (Plasticity) उत्पन्न करना है, जिसके कारण मिट्टी को मनचाहे आकार (सांचे) में आसानी से ढाला जा सकता है। यदि यह अधिक हो जाए तो ईंटें सूखने पर सिकुड़ कर चटक जाती हैं।
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में लगभग 20-30% एल्यूमिना (Alumina) होता है। इसका मुख्य कार्य मिट्टी में 'सुघट्यता' (Plasticity) उत्पन्न करना है, जिसके कारण मिट्टी को मनचाहे आकार (सांचे) में आसानी से ढाला जा सकता है। यदि यह अधिक हो जाए तो ईंटें सूखने पर सिकुड़ कर चटक जाती हैं।
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Q288: 'प्लाईवुड' (Plywood) के निर्माण में, लकड़ी की पतली परतों (Veneers) को एक दूसरे के ऊपर किस दिशा में रखकर चिपकाया जाता है?
- A) रेशों को एक दूसरे के समानांतर (Parallel) रखकर
- ✅ B) रेशों को एक दूसरे के समकोण (Right angles / 90°) पर रखकर (सही उत्तर)
- C) रेशों को 45 डिग्री के कोण पर रखकर
- D) किसी भी यादृच्छिक (Random) दिशा में
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड को विनियर (Veneers) की कई परतों को चिपका कर बनाया जाता है। प्रत्येक परत को इस प्रकार रखा जाता है कि उसके रेशे (Grains) नीचे वाली परत के रेशों के ठीक 'समकोण' (90 डिग्री) पर हों। ऐसा करने से प्लाईवुड को सभी दिशाओं में एक समान मजबूती (Uniform strength) मिलती है और लकड़ी में सिकुड़न कम होती है।
प्लाईवुड को विनियर (Veneers) की कई परतों को चिपका कर बनाया जाता है। प्रत्येक परत को इस प्रकार रखा जाता है कि उसके रेशे (Grains) नीचे वाली परत के रेशों के ठीक 'समकोण' (90 डिग्री) पर हों। ऐसा करने से प्लाईवुड को सभी दिशाओं में एक समान मजबूती (Uniform strength) मिलती है और लकड़ी में सिकुड़न कम होती है।
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Q289: कंक्रीट निर्माण में 'पोंडिंग' (Ponding) विधि का उपयोग मुख्य रूप से किस कार्य के लिए किया जाता है?
- A) कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) बढ़ाने के लिए
- ✅ B) क्षैतिज सतहों (Horizontal surfaces) जैसे स्लैब या फर्श की तराई (Curing) के लिए (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट में मिलावट की जांच करने के लिए
- D) कंक्रीट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
'पोंडिंग' (Ponding) तराई (Curing) करने की सबसे प्रभावी विधियों में से एक है। इसमें कंक्रीट की क्षैतिज सतह (जैसे छत या फर्श) पर मिट्टी या मोर्टार की छोटी-छोटी क्यारियां (Berms) बनाकर उनमें पानी भर दिया जाता है। यह विधि कंक्रीट को लगातार नमी प्रदान करती है जिससे अच्छी मजबूती मिलती है।
'पोंडिंग' (Ponding) तराई (Curing) करने की सबसे प्रभावी विधियों में से एक है। इसमें कंक्रीट की क्षैतिज सतह (जैसे छत या फर्श) पर मिट्टी या मोर्टार की छोटी-छोटी क्यारियां (Berms) बनाकर उनमें पानी भर दिया जाता है। यह विधि कंक्रीट को लगातार नमी प्रदान करती है जिससे अच्छी मजबूती मिलती है।
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Q290: 290 MCQ सीरीज़ का माइलस्टोन! अंतिम सवाल: 'ऑयल पेंट' (Oil Paint) में पिगमेंट को निलंबन (Suspension) में रखने के लिए प्रयुक्त 'वाहन' (Vehicle / Drying Oil) कौन सा है?
- A) तारपीन का तेल (Turpentine Oil)
- ✅ B) अलसी का तेल (Linseed Oil) (सही उत्तर)
- C) मिट्टी का तेल (Kerosene)
- D) कोबाल्ट (Cobalt)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'वाहन' (Vehicle) तरल पदार्थ होता है जो पिगमेंट को घोलता है और सतह पर पेंट को फैलाने में मदद करता है। ऑयल पेंट में 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला वाहन (Drying Oil) है। यह हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके पेंट को एक मजबूत फिल्म के रूप में जमने में भी मदद करता है। तारपीन का तेल तो थिनर (Thinner) के रूप में काम आता है।
पेंट में 'वाहन' (Vehicle) तरल पदार्थ होता है जो पिगमेंट को घोलता है और सतह पर पेंट को फैलाने में मदद करता है। ऑयल पेंट में 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला वाहन (Drying Oil) है। यह हवा की ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करके पेंट को एक मजबूत फिल्म के रूप में जमने में भी मदद करता है। तारपीन का तेल तो थिनर (Thinner) के रूप में काम आता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 59 (Q291 - Q295)
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Q291: सीमेंट के 'प्रारंभिक' और 'अंतिम जमाव काल' (Initial and Final Setting Time) को ज्ञात करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) ले-चेटेलियर उपकरण (Le Chatelier Apparatus)
- ✅ B) विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) (सही उत्तर)
- C) ब्लेन उपकरण (Blaine's Apparatus)
- D) स्लंप कोन (Slump Cone)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट की कंसिस्टेंसी (Consistency) और सेटिंग टाइम दोनों को मापने के लिए विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का प्रयोग किया जाता है। प्रारंभिक जमाव काल के लिए 1 mm² की सुई (Needle) और अंतिम जमाव काल के लिए 5 mm व्यास वाले एनुलर कॉलर (Annular Collar) का उपयोग किया जाता है।
सीमेंट की कंसिस्टेंसी (Consistency) और सेटिंग टाइम दोनों को मापने के लिए विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का प्रयोग किया जाता है। प्रारंभिक जमाव काल के लिए 1 mm² की सुई (Needle) और अंतिम जमाव काल के लिए 5 mm व्यास वाले एनुलर कॉलर (Annular Collar) का उपयोग किया जाता है।
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Q292: ईंट की चिनाई में 'क्वीन क्लोजर' (Queen Closer) का निर्माण कैसे किया जाता है?
- A) ईंट को चौड़ाई के समानांतर आधा काटकर
- ✅ B) ईंट को लंबाई (Length) के समानांतर दो बराबर हिस्सों में काटकर (सही उत्तर)
- C) ईंट के एक कोने को काटकर
- D) ईंट को तीन चौथाई (3/4) काटकर
💡 डिटेल Explanation:
जब पूरी ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर (Longitudinally) बीच से काटकर दो लंबे और पतले हिस्से बनाए जाते हैं, तो प्रत्येक हिस्से को क्वीन क्लोजर कहते हैं। इसका उपयोग दीवार के कोनों (Quoins) पर ऊर्ध्वाधर जोड़ों (Vertical Joints) को एक सीध में आने से रोकने (Bonding) के लिए किया जाता है।
जब पूरी ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर (Longitudinally) बीच से काटकर दो लंबे और पतले हिस्से बनाए जाते हैं, तो प्रत्येक हिस्से को क्वीन क्लोजर कहते हैं। इसका उपयोग दीवार के कोनों (Quoins) पर ऊर्ध्वाधर जोड़ों (Vertical Joints) को एक सीध में आने से रोकने (Bonding) के लिए किया जाता है।
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Q293: लकड़ी में 'स्टार शेक' (Star Shake) दोष का मुख्य कारण क्या होता है?
- A) दीमक और कीड़ों का हमला
- ✅ B) अत्यधिक गर्मी या ठंड के कारण पेड़ की बाहरी सतह (Bark) का तेजी से सिकुड़ना (सही उत्तर)
- C) कवक (Fungus) का प्रभाव
- D) पेड़ के बहुत पुराने होने के कारण केंद्र का सड़ना
💡 डिटेल Explanation:
स्टार शेक (Star Shake) दरारें होती हैं जो पेड़ की बाहरी छाल (Bark) से शुरू होकर अंदर केंद्र (Sapwood/Heartwood) की ओर बढ़ती हैं। जब पेड़ अत्यधिक गर्मी (Severe heat) या पाले (Frost) का सामना करता है, तो बाहरी सतह अंदर की तुलना में अधिक तेजी से सूखती और सिकुड़ती है, जिससे तारे के आकार (Star-like) की दरारें पड़ जाती हैं।
स्टार शेक (Star Shake) दरारें होती हैं जो पेड़ की बाहरी छाल (Bark) से शुरू होकर अंदर केंद्र (Sapwood/Heartwood) की ओर बढ़ती हैं। जब पेड़ अत्यधिक गर्मी (Severe heat) या पाले (Frost) का सामना करता है, तो बाहरी सतह अंदर की तुलना में अधिक तेजी से सूखती और सिकुड़ती है, जिससे तारे के आकार (Star-like) की दरारें पड़ जाती हैं।
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Q294: पेंटिंग कार्य में 'प्राइमर' (Primer Coat) लगाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) पेंट को सूखने से रोकना
- B) सतह को चमकदार बनाना
- ✅ C) सतह और पेंट के बीच अच्छी पकड़ (Adhesion) बनाना और छिद्रों को भरना (सही उत्तर)
- D) पेंट का रंग बदलना
💡 डिटेल Explanation:
प्राइमर पेंटिंग प्रक्रिया का पहला कोट (First coat) होता है। इसका मुख्य कार्य सतह (Surface) को सील करना है ताकि वह बाद में लगाए जाने वाले पेंट को न सोखे। साथ ही, यह सतह और फिनिशिंग पेंट के बीच एक मजबूत बॉन्ड (Adhesion) बनाता है, जिससे पेंट की उम्र और टिकाऊपन बढ़ जाता है।
प्राइमर पेंटिंग प्रक्रिया का पहला कोट (First coat) होता है। इसका मुख्य कार्य सतह (Surface) को सील करना है ताकि वह बाद में लगाए जाने वाले पेंट को न सोखे। साथ ही, यह सतह और फिनिशिंग पेंट के बीच एक मजबूत बॉन्ड (Adhesion) बनाता है, जिससे पेंट की उम्र और टिकाऊपन बढ़ जाता है।
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Q295: 295 MCQ सीरीज़ का माइलस्टोन! अंतिम सवाल: अच्छे भवन निर्माण पत्थरों (Good Building Stones) का 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) सामान्यतः किस सीमा के बीच होना चाहिए?
- A) 1.5 से 2.0
- B) 2.0 से 2.4
- ✅ C) 2.5 से 3.0 (सही उत्तर)
- D) 3.5 से 4.5
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) उसके घनत्व और भारीपन को दर्शाता है। भारी और सघन पत्थर अधिक मजबूत होते हैं। सामान्यतः एक अच्छे भवन निर्माण पत्थर (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) का विशिष्ट गुरुत्व 2.5 से 3.0 के बीच होना चाहिए। यदि यह 2.4 से कम है, तो पत्थर को भारी इंजीनियरिंग कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है।
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) उसके घनत्व और भारीपन को दर्शाता है। भारी और सघन पत्थर अधिक मजबूत होते हैं। सामान्यतः एक अच्छे भवन निर्माण पत्थर (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) का विशिष्ट गुरुत्व 2.5 से 3.0 के बीच होना चाहिए। यदि यह 2.4 से कम है, तो पत्थर को भारी इंजीनियरिंग कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 60 (Q296 - Q300)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q296: IS 456:2000 के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) से बनी कंक्रीट के लिए सामान्य मौसम में 'न्यूनतम तराई अवधि' (Minimum Curing Period) कितनी होनी चाहिए?
- A) 3 दिन
- ✅ B) 7 दिन (सही उत्तर)
- C) 14 दिन
- D) 21 दिन
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक IS 456:2000 के अनुसार, OPC से बनी कंक्रीट के लिए सामान्य वातावरणीय परिस्थितियों में कम से कम 7 दिन तक लगातार तराई (Curing) करना अनिवार्य है। यदि मौसम बहुत सूखा या गर्म (Dry and hot weather) है, तो यह अवधि कम से कम 10 दिन होनी चाहिए। खनिज मिश्रण वाले सीमेंट (जैसे PPC) के लिए यह अवधि 10 से 14 दिन होती है।
भारतीय मानक IS 456:2000 के अनुसार, OPC से बनी कंक्रीट के लिए सामान्य वातावरणीय परिस्थितियों में कम से कम 7 दिन तक लगातार तराई (Curing) करना अनिवार्य है। यदि मौसम बहुत सूखा या गर्म (Dry and hot weather) है, तो यह अवधि कम से कम 10 दिन होनी चाहिए। खनिज मिश्रण वाले सीमेंट (जैसे PPC) के लिए यह अवधि 10 से 14 दिन होती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2015, MP Vyapam
Q297: वृक्षों के इंजीनियरिंग वर्गीकरण के अनुसार, 'बांस' (Bamboo) और 'बेंत' (Cane) किस प्रकार के वृक्षों के उदाहरण हैं?
- A) बहिर्जात वृक्ष (Exogenous trees)
- ✅ B) अंतर्जात वृक्ष (Endogenous trees) (सही उत्तर)
- C) पर्णपाती वृक्ष (Deciduous trees)
- D) शंकुधारी वृक्ष (Coniferous trees)
💡 डिटेल Explanation:
इंजीनियरिंग उपयोग के लिए पेड़ों को दो भागों में बांटा जाता है। अंतर्जात वृक्ष (Endogenous trees) वे होते हैं जो अंदर की ओर बढ़ते हैं (जैसे बांस, ताड़, और बेंत)। इनके तने में अनुदैर्ध्य (Longitudinal) रेशे होते हैं। दूसरी ओर, बहिर्जात (Exogenous) वृक्ष बाहर की ओर (वार्षिक वलय बनाकर) बढ़ते हैं, जिनसे हमें मुख्य इमारती लकड़ी (Timber) प्राप्त होती है।
इंजीनियरिंग उपयोग के लिए पेड़ों को दो भागों में बांटा जाता है। अंतर्जात वृक्ष (Endogenous trees) वे होते हैं जो अंदर की ओर बढ़ते हैं (जैसे बांस, ताड़, और बेंत)। इनके तने में अनुदैर्ध्य (Longitudinal) रेशे होते हैं। दूसरी ओर, बहिर्जात (Exogenous) वृक्ष बाहर की ओर (वार्षिक वलय बनाकर) बढ़ते हैं, जिनसे हमें मुख्य इमारती लकड़ी (Timber) प्राप्त होती है।
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Q298: अच्छी ईंट बनाने की मिट्टी (Brick earth) में 'सिलिका' (Silica) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) ईंट को लाल रंग प्रदान करना
- B) मिट्टी को ढालने योग्य (Plasticity) बनाना
- ✅ C) ईंटों को सूखने और पकने के दौरान सिकुड़ने और फटने (Shrinkage & Cracking) से बचाना (सही उत्तर)
- D) ईंट के पिघलने के तापमान को कम करना
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी में सबसे अधिक मात्रा सिलिका (50-60%) की होती है। इसका मुख्य काम ईंट को आकार (Shape) में बनाए रखना और उसे सूखने तथा भट्ठे में पकने के दौरान सिकुड़ने, मुड़ने (Warping) या फटने (Cracking) से रोकना है। यदि सिलिका अधिक हो जाए, तो ईंटें बहुत भुरभुरी (Brittle) हो जाती हैं।
ईंट की मिट्टी में सबसे अधिक मात्रा सिलिका (50-60%) की होती है। इसका मुख्य काम ईंट को आकार (Shape) में बनाए रखना और उसे सूखने तथा भट्ठे में पकने के दौरान सिकुड़ने, मुड़ने (Warping) या फटने (Cracking) से रोकना है। यदि सिलिका अधिक हो जाए, तो ईंटें बहुत भुरभुरी (Brittle) हो जाती हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, LMRC JE, UPSSSC JE 2016
Q299: लकड़ी के फर्नीचर को चमकदार बनाने के लिए प्रयुक्त 'फ्रेंच पॉलिश' (French Polish) किस प्रकार के वार्निश का एक उदाहरण है?
- A) ऑयल वार्निश (Oil Varnish)
- B) वॉटर वार्निश (Water Varnish)
- ✅ C) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish) (सही उत्तर)
- D) टर्पेन्टाइन वार्निश (Turpentine Varnish)
💡 डिटेल Explanation:
फ्रेंच पॉलिश एक प्रकार का स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish) है। इसे 'शेलैक' (Shellac - एक प्रकार की राल) को मिथाइलेटेड स्पिरिट (Alcohol) में घोलकर बनाया जाता है। यह बहुत तेज़ी से सूखता है और महंगी लकड़ी के फर्नीचर पर अत्यधिक चमकदार (High-gloss) और आकर्षक परत बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
फ्रेंच पॉलिश एक प्रकार का स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish) है। इसे 'शेलैक' (Shellac - एक प्रकार की राल) को मिथाइलेटेड स्पिरिट (Alcohol) में घोलकर बनाया जाता है। यह बहुत तेज़ी से सूखता है और महंगी लकड़ी के फर्नीचर पर अत्यधिक चमकदार (High-gloss) और आकर्षक परत बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
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Q300: 300 MCQ का महा-माइलस्टोन! प्रश्न: पत्थर (Stone) में मौजूद धूल, मिट्टी और 'घुलनशील पदार्थों' (Soluble matter) की उपस्थिति का पता लगाने के लिए कौन सा परीक्षण (Test) किया जाता है?
- A) एट्रिशन टेस्ट (Attrition Test)
- ✅ B) स्मिथ टेस्ट (Smith's Test) (सही उत्तर)
- C) ब्राड टेस्ट (Brard's Test)
- D) इम्पैक्ट टेस्ट (Impact Test)
💡 डिटेल Explanation:
स्मिथ टेस्ट (Smith's Test) का उपयोग पत्थर में मिट्टी या अन्य पानी में घुलनशील अशुद्धियों (Earthy or soluble matter) की जांच के लिए किया जाता है। इसमें पत्थर के कुछ टुकड़ों को साफ पानी के जार में डालकर हिलाया जाता है और 1 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। यदि पानी गंदला (Dirty) हो जाता है, तो इसका मतलब है कि पत्थर में बहुत अधिक मिट्टी और घुलनशील पदार्थ मौजूद हैं।
स्मिथ टेस्ट (Smith's Test) का उपयोग पत्थर में मिट्टी या अन्य पानी में घुलनशील अशुद्धियों (Earthy or soluble matter) की जांच के लिए किया जाता है। इसमें पत्थर के कुछ टुकड़ों को साफ पानी के जार में डालकर हिलाया जाता है और 1 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है। यदि पानी गंदला (Dirty) हो जाता है, तो इसका मतलब है कि पत्थर में बहुत अधिक मिट्टी और घुलनशील पदार्थ मौजूद हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 61 (Q301 - Q305)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q301: कंक्रीट मिक्स डिज़ाइन में 'टारगेट मीन स्ट्रेंथ' (Target Mean Strength - fm) की गणना करने के लिए IS 456:2000 द्वारा कौन सा सूत्र (Formula) दिया गया है?
- A) fm = fck + 1.5 σ
- ✅ B) fm = fck + 1.65 σ (सही उत्तर)
- C) fm = fck - 1.65 σ
- D) fm = fck + 0.87 σ
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट डिज़ाइन करते समय हम अभिलाक्षणिक सामर्थ्य (fck) से थोड़ी अधिक सामर्थ्य का लक्ष्य लेकर चलते हैं। इसे 'टारगेट मीन स्ट्रेंथ' कहते हैं। इसका सूत्र है fm = fck + 1.65 σ, जहाँ σ (सिग्मा) मानक विचलन (Standard Deviation) है। यह सुनिश्चित करता है कि साइट पर कंक्रीट के फेल होने की संभावना 5% से अधिक न हो।
कंक्रीट डिज़ाइन करते समय हम अभिलाक्षणिक सामर्थ्य (fck) से थोड़ी अधिक सामर्थ्य का लक्ष्य लेकर चलते हैं। इसे 'टारगेट मीन स्ट्रेंथ' कहते हैं। इसका सूत्र है fm = fck + 1.65 σ, जहाँ σ (सिग्मा) मानक विचलन (Standard Deviation) है। यह सुनिश्चित करता है कि साइट पर कंक्रीट के फेल होने की संभावना 5% से अधिक न हो।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, 2019, MP Vyapam, DMRC JE
Q302: प्राकृतिक लकड़ी (Natural Timber) की तुलना में 'प्लाईवुड' (Plywood) का सबसे बड़ा संरचनात्मक लाभ क्या है?
- A) यह प्राकृतिक लकड़ी से बहुत सस्ता होता है
- ✅ B) इसकी तनन सामर्थ्य (Tensile Strength) सभी दिशाओं में एक समान होती है (सही उत्तर)
- C) इसमें कभी दीमक नहीं लगती
- D) यह 100% जलरोधी (Waterproof) होता है
💡 डिटेल Explanation:
प्राकृतिक लकड़ी केवल रेशों की दिशा (Along the grains) में मजबूत होती है, लेकिन रेशों के लंबवत (Across the grains) कमजोर होती है। प्लाईवुड में विनियर (Veneers) की परतों को एक-दूसरे के समकोण (90°) पर रखा जाता है। इसके कारण प्लाईवुड सभी दिशाओं में समान रूप से मजबूत (Uniform tensile strength) हो जाता है और इसमें सिकुड़न भी न्यूनतम होती है।
प्राकृतिक लकड़ी केवल रेशों की दिशा (Along the grains) में मजबूत होती है, लेकिन रेशों के लंबवत (Across the grains) कमजोर होती है। प्लाईवुड में विनियर (Veneers) की परतों को एक-दूसरे के समकोण (90°) पर रखा जाता है। इसके कारण प्लाईवुड सभी दिशाओं में समान रूप से मजबूत (Uniform tensile strength) हो जाता है और इसमें सिकुड़न भी न्यूनतम होती है।
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Q303: ईंट की सतह पर सफेद पाउडर या धब्बे (White Patches) पड़ जाने के दोष (Defect) को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
- A) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- ✅ B) एफ्लोरेसेंस (Efflorescence / उत्फुल्लन) (सही उत्तर)
- C) लामिनेशन (Lamination)
- D) चफ्स (Chuffs)
💡 डिटेल Explanation:
एफ्लोरेसेंस (Efflorescence) ईंट की मिट्टी में मौजूद घुलनशील क्षारों (Soluble Alkalis - जैसे सोडियम और पोटेशियम के सल्फेट) के कारण होता है। जब ईंट पानी सोखती है और फिर वाष्पीकरण होता है, तो ये क्षार सतह पर आकर सफेद पाउडर के रूप में जम जाते हैं। यह ईंट को कमजोर और भद्दा बनाता है।
एफ्लोरेसेंस (Efflorescence) ईंट की मिट्टी में मौजूद घुलनशील क्षारों (Soluble Alkalis - जैसे सोडियम और पोटेशियम के सल्फेट) के कारण होता है। जब ईंट पानी सोखती है और फिर वाष्पीकरण होता है, तो ये क्षार सतह पर आकर सफेद पाउडर के रूप में जम जाते हैं। यह ईंट को कमजोर और भद्दा बनाता है।
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Q304: बांध (Dams) जैसे बड़े निर्माण कार्यों के लिए 'लो हीट सीमेंट' (Low Heat Cement) का उपयोग किया जाता है। इसमें किस 'बोग्स कंपाउंड' (Bogue's Compound) की मात्रा काफी कम कर दी जाती है?
- A) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- ✅ B) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) (सही उत्तर)
- C) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
- D) जिप्सम
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में सबसे अधिक और सबसे तेज़ 'जलयोजन की ऊष्मा' (Heat of Hydration) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) उत्पन्न करता है। भारी कंक्रीट संरचनाओं (Mass concreting) में इस ऊष्मा के कारण दरारें (Thermal cracks) आ सकती हैं। इसलिए 'लो हीट सीमेंट' बनाने के लिए C3A और C3S की मात्रा कम कर दी जाती है और C2S की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
सीमेंट में सबसे अधिक और सबसे तेज़ 'जलयोजन की ऊष्मा' (Heat of Hydration) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) उत्पन्न करता है। भारी कंक्रीट संरचनाओं (Mass concreting) में इस ऊष्मा के कारण दरारें (Thermal cracks) आ सकती हैं। इसलिए 'लो हीट सीमेंट' बनाने के लिए C3A और C3S की मात्रा कम कर दी जाती है और C2S की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
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Q305: 305 MCQ का पड़ाव पार! प्रश्न: खिड़कियों के शीशे (Glass panels) को लकड़ी या धातु के फ्रेम में फिक्स करने के लिए उपयोग की जाने वाली 'पुट्टी' (Putty) मुख्य रूप से किन सामग्रियों का मिश्रण होती है?
- A) व्हाइट लेड और तारपीन का तेल
- ✅ B) चॉक पाउडर (Whiting) और कच्चा अलसी का तेल (Raw Linseed Oil) (सही उत्तर)
- C) रेड लेड और वार्निश
- D) जिप्सम पाउडर और पानी
💡 डिटेल Explanation:
ग्लेजिंग पुट्टी (Glazing Putty) का उपयोग शीशों को फ्रेम में सील करने के लिए किया जाता है। इसे बनाने के लिए बारीक पिसे हुए चॉक पाउडर (Whiting) को कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed Oil) के साथ गूंथा जाता है। सूखने के बाद यह कठोर होकर शीशे को फ्रेम के साथ मजबूती से जकड़ लेती है।
ग्लेजिंग पुट्टी (Glazing Putty) का उपयोग शीशों को फ्रेम में सील करने के लिए किया जाता है। इसे बनाने के लिए बारीक पिसे हुए चॉक पाउडर (Whiting) को कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed Oil) के साथ गूंथा जाता है। सूखने के बाद यह कठोर होकर शीशे को फ्रेम के साथ मजबूती से जकड़ लेती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 62 (Q306 - Q310)
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Q306: सीमेंट के परीक्षण में 'ऑटोक्लेव टेस्ट' (Autoclave Test) का उपयोग किस कारण से होने वाली 'साउंडनेस' (Unsoundness/Volume expansion) का पता लगाने के लिए किया जाता है?
- A) केवल स्वतंत्र चूना (Free Lime)
- B) केवल मैग्नीशिया (Magnesia)
- ✅ C) चूना और मैग्नीशिया दोनों (Both Lime and Magnesia) (सही उत्तर)
- D) सल्फर (Sulphur)
💡 डिटेल Explanation:
ले-चेटेलियर (Le Chatelier) उपकरण केवल 'स्वतंत्र चूने' के कारण होने वाले फैलाव को मापता है, जबकि 'ऑटोक्लेव टेस्ट' (Autoclave Test) अत्यधिक संवेदनशील होता है। यह चूना और मैग्नीशिया दोनों की उपस्थिति के कारण होने वाली अनसाउंडनेस (अवांछित फैलाव) का सटीक पता लगाता है, जो कंक्रीट में दरारों का कारण बन सकती है।
ले-चेटेलियर (Le Chatelier) उपकरण केवल 'स्वतंत्र चूने' के कारण होने वाले फैलाव को मापता है, जबकि 'ऑटोक्लेव टेस्ट' (Autoclave Test) अत्यधिक संवेदनशील होता है। यह चूना और मैग्नीशिया दोनों की उपस्थिति के कारण होने वाली अनसाउंडनेस (अवांछित फैलाव) का सटीक पता लगाता है, जो कंक्रीट में दरारों का कारण बन सकती है।
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Q307: 'चीड़' (Pine) और 'देवदार' (Deodar) के वृक्ष निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली किस प्रकार की लकड़ी (Timber) के प्रमुख उदाहरण हैं?
- A) कठोर लकड़ी (Hardwood / पर्णपाती वृक्ष)
- ✅ B) मुलायम लकड़ी (Softwood / शंकुधारी वृक्ष) (सही उत्तर)
- C) कृत्रिम लकड़ी (Artificial Wood)
- D) अत्यधिक भारी लकड़ी (Very Heavy Wood)
💡 डिटेल Explanation:
चीड़ और देवदार शंकुधारी वृक्ष (Coniferous trees) हैं, जिनकी पत्तियां सुई के आकार की होती हैं। इनसे प्राप्त लकड़ी को 'मुलायम लकड़ी' (Softwood) कहा जाता है। यह वजन में हल्की, हल्के रंग की और तनन (Tension) में मजबूत होती है। (इसके विपरीत शीशम, साल, और सागौन 'कठोर लकड़ी' के उदाहरण हैं)।
चीड़ और देवदार शंकुधारी वृक्ष (Coniferous trees) हैं, जिनकी पत्तियां सुई के आकार की होती हैं। इनसे प्राप्त लकड़ी को 'मुलायम लकड़ी' (Softwood) कहा जाता है। यह वजन में हल्की, हल्के रंग की और तनन (Tension) में मजबूत होती है। (इसके विपरीत शीशम, साल, और सागौन 'कठोर लकड़ी' के उदाहरण हैं)।
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Q308: एक मानक ईंट (Standard brick) के शीर्ष पर बने गड्ढे यानी 'फ्रॉग' (Frog) का सामान्य आकार (Size) कितना होता है?
- A) 5 cm × 2 cm × 1 cm
- ✅ B) 10 cm × 4 cm × 1 to 2 cm (सही उत्तर)
- C) 15 cm × 5 cm × 2 cm
- D) 8 cm × 3 cm × 1 cm
💡 डिटेल Explanation:
फ्रॉग (Frog) ईंट के ऊपर बना एक गड्ढा होता है जो मोर्टार (मसाले) के लिए 'की' (Key) का काम करता है, जिससे चिनाई की क्षैतिज पकड़ मजबूत होती है। भारतीय मानकों के अनुसार इसका सामान्य आकार 10 cm लंबा, 4 cm चौड़ा और 1 से 2 cm गहरा होता है। चिनाई करते समय फ्रॉग को हमेशा ऊपर की ओर रखा जाता है।
फ्रॉग (Frog) ईंट के ऊपर बना एक गड्ढा होता है जो मोर्टार (मसाले) के लिए 'की' (Key) का काम करता है, जिससे चिनाई की क्षैतिज पकड़ मजबूत होती है। भारतीय मानकों के अनुसार इसका सामान्य आकार 10 cm लंबा, 4 cm चौड़ा और 1 से 2 cm गहरा होता है। चिनाई करते समय फ्रॉग को हमेशा ऊपर की ओर रखा जाता है।
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Q309: पेंट की गई सतह पर 'ब्लिस्टरिंग' (Blistering - बुलबुले उठना) नामक दोष मुख्य रूप से किस कारण उत्पन्न होता है?
- A) पेंट में ड्रायर का बहुत अधिक उपयोग करने से
- ✅ B) सतह के नीचे फंसी हुई नमी (Trapped Moisture) के कारण (सही उत्तर)
- C) पेंट को बहुत अधिक पतला करने से
- D) खराब गुणवत्ता वाले पिगमेंट का उपयोग करने से
💡 डिटेल Explanation:
ब्लिस्टरिंग (Blistering) तब होती है जब पेंट की गई सतह (विशेषकर लकड़ी या प्लास्टर) के भीतर नमी (Moisture) फंसी रह जाती है और ऊपर से पेंट की फिल्म सूख जाती है। जब यह नमी वाष्प (Vapor) बनकर बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो वह पेंट की फिल्म को धक्का देकर फुला देती है, जिससे सतह पर बुलबुले बन जाते हैं।
ब्लिस्टरिंग (Blistering) तब होती है जब पेंट की गई सतह (विशेषकर लकड़ी या प्लास्टर) के भीतर नमी (Moisture) फंसी रह जाती है और ऊपर से पेंट की फिल्म सूख जाती है। जब यह नमी वाष्प (Vapor) बनकर बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो वह पेंट की फिल्म को धक्का देकर फुला देती है, जिससे सतह पर बुलबुले बन जाते हैं।
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Q310: 310 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: कंक्रीट संरचनाओं में 'क्रीप' (Creep) की घटना को कैसे परिभाषित किया जाता है?
- A) तापमान में बदलाव के कारण कंक्रीट का सिकुड़ना
- ✅ B) समय के साथ निरंतर भार (Sustained Load) के कारण होने वाला स्थायी विरूपण (सही उत्तर)
- C) पानी के वाष्पीकरण के कारण सतह पर दरारें पड़ना
- D) रसायनों के कारण कंक्रीट की सतह का क्षरण (Erosion)
💡 डिटेल Explanation:
'क्रीप' (Creep) कंक्रीट की एक समय-निर्भर (Time-dependent) प्रक्रिया है। जब कंक्रीट पर एक ही भार (Dead Load) लंबे समय तक लगातार लगा रहता है, तो कंक्रीट धीरे-धीरे विरूपित (Deform) होने लगती है। प्रारंभिक अवस्था में क्रीप की दर अधिक होती है और समय बीतने के साथ यह दर धीरे-धीरे कम होती जाती है।
'क्रीप' (Creep) कंक्रीट की एक समय-निर्भर (Time-dependent) प्रक्रिया है। जब कंक्रीट पर एक ही भार (Dead Load) लंबे समय तक लगातार लगा रहता है, तो कंक्रीट धीरे-धीरे विरूपित (Deform) होने लगती है। प्रारंभिक अवस्था में क्रीप की दर अधिक होती है और समय बीतने के साथ यह दर धीरे-धीरे कम होती जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 63 (Q311 - Q315)
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Q311: अच्छी तरह से सूखी हुई (Well-seasoned) इमारती लकड़ी (Timber) में नमी की मात्रा (Moisture content) आदर्श रूप से कितनी होनी चाहिए?
- A) 4% से 6%
- ✅ B) 10% से 12% (सही उत्तर)
- C) 15% से 20%
- D) 25% से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, निर्माण कार्यों के लिए लकड़ी में नमी की मात्रा 10% से 12% के बीच होनी चाहिए। इस स्तर की नमी वाली लकड़ी में फफूंदी (Fungus) नहीं लगती, दरारें नहीं पड़तीं और भविष्य में इसका आकार स्थिर (Dimensionally stable) रहता है।
भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, निर्माण कार्यों के लिए लकड़ी में नमी की मात्रा 10% से 12% के बीच होनी चाहिए। इस स्तर की नमी वाली लकड़ी में फफूंदी (Fungus) नहीं लगती, दरारें नहीं पड़तीं और भविष्य में इसका आकार स्थिर (Dimensionally stable) रहता है।
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Q312: कंक्रीट की 'सुकार्यता' (Workability) मापने के लिए निम्नलिखित में से किस परीक्षण का उपयोग किया जाता है?
- A) स्लंप टेस्ट (Slump Test)
- B) कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट (Compacting Factor Test)
- C) वी-बी कंसिस्टोमीटर टेस्ट (Vee-Bee Test)
- ✅ D) उपरोक्त सभी (All of the above) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की सुकार्यता मापने के लिए इन तीनों टेस्ट का उपयोग किया जाता है। स्लंप टेस्ट मध्यम सुकार्यता के लिए, कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट कम सुकार्यता के लिए और वी-बी टेस्ट बहुत कम (सूखी/Stiff) सुकार्यता वाली कंक्रीट के लिए प्रयोग होता है।
कंक्रीट की सुकार्यता मापने के लिए इन तीनों टेस्ट का उपयोग किया जाता है। स्लंप टेस्ट मध्यम सुकार्यता के लिए, कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट कम सुकार्यता के लिए और वी-बी टेस्ट बहुत कम (सूखी/Stiff) सुकार्यता वाली कंक्रीट के लिए प्रयोग होता है।
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Q313: सीमेंट में 'अंतिम सामर्थ्य' (Ultimate/Later Strength) के लिए मुख्य रूप से कौन सा 'बोग्स कंपाउंड' (Bogue's Compound) जिम्मेदार होता है?
- A) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S)
- ✅ B) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S) (सही उत्तर)
- C) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S) का जलयोजन (Hydration) बहुत धीमा होता है। यह सीमेंट को 28 दिनों के बाद और कई वर्षों तक निरंतर सामर्थ्य (Ultimate strength) प्रदान करता है। यह रसायन रासायनिक हमलों के प्रति भी कंक्रीट को प्रतिरोधी बनाता है। (प्रारंभिक ताकत C3S से मिलती है)।
डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S) का जलयोजन (Hydration) बहुत धीमा होता है। यह सीमेंट को 28 दिनों के बाद और कई वर्षों तक निरंतर सामर्थ्य (Ultimate strength) प्रदान करता है। यह रसायन रासायनिक हमलों के प्रति भी कंक्रीट को प्रतिरोधी बनाता है। (प्रारंभिक ताकत C3S से मिलती है)।
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Q314: ईंट को पकाने पर उसे अपना विशिष्ट 'लाल रंग' (Cherry Red Colour) किस घटक की उपस्थिति के कारण मिलता है?
- A) सिलिका (Silica)
- B) एल्यूमिना (Alumina)
- C) मैग्नीशिया (Magnesia)
- ✅ D) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड (लगभग 5-6%) होता है। जब ईंट को भट्ठे में उच्च तापमान पर पकाया जाता है, तो यह आयरन ऑक्साइड ईंट को उसका गहरा लाल (चेरी रेड) रंग प्रदान करता है। इसके साथ ही यह ईंट को कुछ हद तक मजबूती और कठोरता भी देता है।
ईंट की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड (लगभग 5-6%) होता है। जब ईंट को भट्ठे में उच्च तापमान पर पकाया जाता है, तो यह आयरन ऑक्साइड ईंट को उसका गहरा लाल (चेरी रेड) रंग प्रदान करता है। इसके साथ ही यह ईंट को कुछ हद तक मजबूती और कठोरता भी देता है।
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Q315: 315 MCQ का पड़ाव पार! प्रश्न: भूगर्भीय वर्गीकरण (Geological classification) के अनुसार, 'क्वार्टजाइट' (Quartzite) किस प्रकार की चट्टान का उदाहरण है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous rock)
- B) अवसादी चट्टान (Sedimentary rock)
- ✅ C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic rock) (सही उत्तर)
- D) रासायनिक चट्टान (Chemical rock)
💡 डिटेल Explanation:
क्वार्टजाइट एक कायांतरित (Metamorphic) चट्टान है। इसका निर्माण अवसादी चट्टान 'सैंडस्टोन' (Sandstone / बलुआ पत्थर) पर अत्यधिक गर्मी और दबाव पड़ने के कारण होता है। यह निर्माण कार्यों के लिए बहुत ही कठोर, सघन और टिकाऊ पत्थर माना जाता है।
क्वार्टजाइट एक कायांतरित (Metamorphic) चट्टान है। इसका निर्माण अवसादी चट्टान 'सैंडस्टोन' (Sandstone / बलुआ पत्थर) पर अत्यधिक गर्मी और दबाव पड़ने के कारण होता है। यह निर्माण कार्यों के लिए बहुत ही कठोर, सघन और टिकाऊ पत्थर माना जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 64 (Q316 - Q320)
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Q316: लकड़ी में 'गांठ' (Knot) नामक दोष (Defect) मुख्य रूप से कैसे उत्पन्न होता है?
- A) फफूंदी (Fungus) के हमले से
- ✅ B) पेड़ से शाखाओं (Branches) के टूटने या कटने के कारण (सही उत्तर)
- C) दीमक के कारण
- D) अत्यधिक नमी के कारण
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी में गांठें (Knots) तने के उस हिस्से में बनती हैं जहाँ से कोई शाखा (Branch) निकलती है या टूट कर गिर जाती है। तने की लकड़ी उस टूटे हुए हिस्से के चारो ओर बढ़ती रहती है, जिससे वहां रेशों की निरंतरता (Continuity of grains) टूट जाती है। यह लकड़ी को उस स्थान पर कमजोर बनाता है, विशेष रूप से तनन (Tension) में।
लकड़ी में गांठें (Knots) तने के उस हिस्से में बनती हैं जहाँ से कोई शाखा (Branch) निकलती है या टूट कर गिर जाती है। तने की लकड़ी उस टूटे हुए हिस्से के चारो ओर बढ़ती रहती है, जिससे वहां रेशों की निरंतरता (Continuity of grains) टूट जाती है। यह लकड़ी को उस स्थान पर कमजोर बनाता है, विशेष रूप से तनन (Tension) में।
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Q317: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) कम से कम कितना होना चाहिए?
- A) 10 मिनट
- ✅ B) 30 मिनट (सही उत्तर)
- C) 60 मिनट
- D) 600 मिनट
💡 डिटेल Explanation:
IS Code 269 के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का न्यूनतम प्रारंभिक जमाव काल 30 मिनट होना चाहिए। इसका मतलब है कि सीमेंट में पानी मिलाने के 30 मिनट तक उसे सांचे में ढाला जा सकता है और उसकी सुकार्यता बनी रहती है। इसका अधिकतम 'अंतिम जमाव काल' (Final setting time) 600 मिनट (10 घंटे) होता है।
IS Code 269 के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का न्यूनतम प्रारंभिक जमाव काल 30 मिनट होना चाहिए। इसका मतलब है कि सीमेंट में पानी मिलाने के 30 मिनट तक उसे सांचे में ढाला जा सकता है और उसकी सुकार्यता बनी रहती है। इसका अधिकतम 'अंतिम जमाव काल' (Final setting time) 600 मिनट (10 घंटे) होता है।
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Q318: भारतीय मानक (IS 1077) के अनुसार, 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (First Class Brick) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Minimum Compressive Strength) कितनी होनी चाहिए?
- A) 3.5 N/mm²
- B) 7.0 N/mm²
- ✅ C) 10.5 N/mm² (सही उत्तर)
- D) 14.0 N/mm²
💡 डिटेल Explanation:
प्रथम श्रेणी की ईंटें सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली होती हैं, जिनका आकार, किनारे और रंग पूरी तरह से एकसमान होते हैं। इनकी न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य 10.5 N/mm² (या 105 kg/cm²) होनी चाहिए। द्वितीय श्रेणी के लिए यह 7.0 N/mm² और सामान्य चिनाई की ईंटों (Minimum standard) के लिए 3.5 N/mm² होती है।
प्रथम श्रेणी की ईंटें सबसे अच्छी गुणवत्ता वाली होती हैं, जिनका आकार, किनारे और रंग पूरी तरह से एकसमान होते हैं। इनकी न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य 10.5 N/mm² (या 105 kg/cm²) होनी चाहिए। द्वितीय श्रेणी के लिए यह 7.0 N/mm² और सामान्य चिनाई की ईंटों (Minimum standard) के लिए 3.5 N/mm² होती है।
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Q319: कंक्रीट का 'स्प्लिट टेन्साइल स्ट्रेंथ' (Split Tensile Strength) परीक्षण करने के लिए सामान्यतः किस आकार (Shape) के नमूने (Specimen) का उपयोग किया जाता है?
- A) घन (Cube)
- ✅ B) बेलन (Cylinder) (सही उत्तर)
- C) प्रिज्म (Prism)
- D) चपटा स्लैब (Flat Slab)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) ज्ञात करने के लिए प्रत्यक्ष परीक्षण बहुत कठिन है, इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से 'स्प्लिटिंग टेस्ट' किया जाता है। इसके लिए 150 mm व्यास (Diameter) और 300 mm लंबाई वाले 'बेलनाकार' (Cylindrical) नमूने का उपयोग किया जाता है। इसे मशीन में क्षैतिज (Horizontally) रखकर इस पर तब तक दबाव डाला जाता है जब तक कि यह बीच से फट (Split) न जाए।
कंक्रीट की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) ज्ञात करने के लिए प्रत्यक्ष परीक्षण बहुत कठिन है, इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से 'स्प्लिटिंग टेस्ट' किया जाता है। इसके लिए 150 mm व्यास (Diameter) और 300 mm लंबाई वाले 'बेलनाकार' (Cylindrical) नमूने का उपयोग किया जाता है। इसे मशीन में क्षैतिज (Horizontally) रखकर इस पर तब तक दबाव डाला जाता है जब तक कि यह बीच से फट (Split) न जाए।
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Q320: 320 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पेंट की गई सतह पर 'सैपोनिफिकेशन' (Saponification) नामक दोष किस कारण उत्पन्न होता है?
- A) नमी और सीलन के कारण
- B) सूरज की यूवी (UV) किरणों के कारण
- ✅ C) सतह पर मौजूद 'क्षार' (Alkalis) की रासायनिक क्रिया के कारण (सही उत्तर)
- D) पेंट को बहुत गाढ़ा लगाने के कारण
💡 डिटेल Explanation:
सैपोनिफिकेशन (Saponification) एक रासायनिक प्रक्रिया है। जब ऑयल पेंट को ताज़ा प्लास्टर या नई कंक्रीट जैसी क्षारीय (Alkaline) सतह पर लगाया जाता है, तो पेंट में मौजूद 'ऑयल' (Drying oil) सतह के 'क्षारों' (Alkalis) के साथ प्रतिक्रिया करके 'साबुन' (Soap) जैसा एक चिपचिपा पदार्थ बना लेता है। इससे पेंट की परत खराब हो जाती है और उखड़ने लगती है।
सैपोनिफिकेशन (Saponification) एक रासायनिक प्रक्रिया है। जब ऑयल पेंट को ताज़ा प्लास्टर या नई कंक्रीट जैसी क्षारीय (Alkaline) सतह पर लगाया जाता है, तो पेंट में मौजूद 'ऑयल' (Drying oil) सतह के 'क्षारों' (Alkalis) के साथ प्रतिक्रिया करके 'साबुन' (Soap) जैसा एक चिपचिपा पदार्थ बना लेता है। इससे पेंट की परत खराब हो जाती है और उखड़ने लगती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 65 (Q321 - Q325)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, RRB JE
Q321: कंक्रीट निर्माण में 'सुपर-प्लास्टिकाइज़र' (Super-plasticizers) का उपयोग करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A) सीमेंट की मात्रा बढ़ाना
- ✅ B) पानी-सीमेंट (W/C) अनुपात को कम करते हुए सुकार्यता (Workability) बनाए रखना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट के जमने का समय (Setting time) बढ़ाना
- D) कंक्रीट का रंग गहरा करना
💡 डिटेल Explanation:
सुपर-प्लास्टिकाइज़र, जिसे 'हाई-रेंज वॉटर रिड्यूसर' भी कहते हैं, कंक्रीट के मिश्रण से 15-30% तक पानी कम करने में मदद करते हैं, जबकि कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) वैसी ही बनी रहती है। इससे उच्च सामर्थ्य (High Strength) और टिकाऊ (Durable) कंक्रीट प्राप्त होती है, जो आधुनिक निर्माण कार्यों में बहुत उपयोगी है।
सुपर-प्लास्टिकाइज़र, जिसे 'हाई-रेंज वॉटर रिड्यूसर' भी कहते हैं, कंक्रीट के मिश्रण से 15-30% तक पानी कम करने में मदद करते हैं, जबकि कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) वैसी ही बनी रहती है। इससे उच्च सामर्थ्य (High Strength) और टिकाऊ (Durable) कंक्रीट प्राप्त होती है, जो आधुनिक निर्माण कार्यों में बहुत उपयोगी है।
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Q322: ईंट की चिनाई में 'इंग्लिश बॉन्ड' (English Bond) की क्या विशेषता है?
- A) इसमें केवल स्ट्रेचर ईंटों का उपयोग होता है
- B) यह सबसे कमजोर बॉन्ड माना जाता है
- ✅ C) इसमें स्ट्रेचर और हेडर की वैकल्पिक परतें (Alternate courses) होती हैं (सही उत्तर)
- D) यह केवल सजावटी दीवारों के लिए है
💡 डिटेल Explanation:
इंग्लिश बॉन्ड में एक परत में पूरी तरह से 'स्ट्रेचर' (Stretcher) और उसके ऊपर वाली परत में पूरी तरह से 'हेडर' (Header) ईंटें बिछाई जाती हैं। इसे सबसे मजबूत बॉन्ड (Strongest bond) माना जाता है, इसलिए भारी लोड-बेयरिंग दीवारों के निर्माण में इसका सर्वाधिक उपयोग किया जाता है।
इंग्लिश बॉन्ड में एक परत में पूरी तरह से 'स्ट्रेचर' (Stretcher) और उसके ऊपर वाली परत में पूरी तरह से 'हेडर' (Header) ईंटें बिछाई जाती हैं। इसे सबसे मजबूत बॉन्ड (Strongest bond) माना जाता है, इसलिए भारी लोड-बेयरिंग दीवारों के निर्माण में इसका सर्वाधिक उपयोग किया जाता है।
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Q323: लकड़ी के संरक्षण (Preservation) के लिए 'क्रियोसोट ऑयल' (Creosote Oil) का मुख्य गुण क्या है?
- A) यह लकड़ी को सुगंधित बनाता है
- B) यह लकड़ी के वजन को कम करता है
- ✅ C) यह लकड़ी को फफूंदी और कीड़ों (Termites) से सुरक्षा प्रदान करता है (सही उत्तर)
- D) यह लकड़ी को आग से बचाता है
💡 डिटेल Explanation:
क्रियोसोट ऑयल (Creosote Oil) कोलतार (Coal tar) से प्राप्त होता है। यह लकड़ी के लिए सबसे प्रसिद्ध परिरक्षक (Preservative) है। इसकी तीखी गंध और विषाक्त गुण फफूंदी, कीड़ों और विशेष रूप से दीमक (Termites) को लकड़ी से दूर रखते हैं। इसका उपयोग अक्सर रेलवे स्लीपरों और बिजली के खंभों में किया जाता है।
क्रियोसोट ऑयल (Creosote Oil) कोलतार (Coal tar) से प्राप्त होता है। यह लकड़ी के लिए सबसे प्रसिद्ध परिरक्षक (Preservative) है। इसकी तीखी गंध और विषाक्त गुण फफूंदी, कीड़ों और विशेष रूप से दीमक (Termites) को लकड़ी से दूर रखते हैं। इसका उपयोग अक्सर रेलवे स्लीपरों और बिजली के खंभों में किया जाता है।
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Q324: 'इनेमल पेंट' (Enamel Paint) का उपयोग अक्सर उन स्थानों पर क्यों किया जाता है जो नमी (Moisture) या बार-बार सफाई के संपर्क में आते हैं?
- A) यह सस्ता होता है
- B) यह जल्दी सूखता है
- ✅ C) यह जलरोधी (Water-resistant) और धोने योग्य (Washable) फिल्म बनाता है (सही उत्तर)
- D) यह बहुत सुंदर रंग देता है
💡 डिटेल Explanation:
इनेमल पेंट में वार्निश का उपयोग होता है जो सूखने के बाद एक बहुत कठोर, चिकनी और अभेद्य (Impervious) परत बनाता है। इस कारण यह पानी को सोखता नहीं है। रसोई घर, स्नानघर, या दरवाजों पर जहां बार-बार सफाई की आवश्यकता होती है, वहां इस पेंट का उपयोग सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि इसे गीले कपड़े से आसानी से साफ किया जा सकता है।
इनेमल पेंट में वार्निश का उपयोग होता है जो सूखने के बाद एक बहुत कठोर, चिकनी और अभेद्य (Impervious) परत बनाता है। इस कारण यह पानी को सोखता नहीं है। रसोई घर, स्नानघर, या दरवाजों पर जहां बार-बार सफाई की आवश्यकता होती है, वहां इस पेंट का उपयोग सबसे उपयुक्त होता है क्योंकि इसे गीले कपड़े से आसानी से साफ किया जा सकता है।
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Q325: 325 MCQ का मील का पत्थर! प्रश्न: एक अच्छे भवन निर्माण पत्थर (Good Stone) की 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) सामान्यतः कितनी होनी चाहिए?
- A) 20 N/mm² से कम
- B) 50 N/mm²
- ✅ C) 100 N/mm² से अधिक (सही उत्तर)
- D) 200 N/mm² से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
निर्माण कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले पत्थरों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) में बहुत उच्च संपीडन सामर्थ्य होनी चाहिए ताकि वे संरचना के भार को सह सकें। एक आदर्श भवन निर्माण पत्थर की संपीडन सामर्थ्य 100 N/mm² (1000 kg/cm²) से अधिक होनी चाहिए। यदि इससे कम है, तो पत्थर का उपयोग बड़े भार-वहन कार्यों में नहीं किया जाना चाहिए।
निर्माण कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले पत्थरों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) में बहुत उच्च संपीडन सामर्थ्य होनी चाहिए ताकि वे संरचना के भार को सह सकें। एक आदर्श भवन निर्माण पत्थर की संपीडन सामर्थ्य 100 N/mm² (1000 kg/cm²) से अधिक होनी चाहिए। यदि इससे कम है, तो पत्थर का उपयोग बड़े भार-वहन कार्यों में नहीं किया जाना चाहिए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 66 (Q326 - Q330)
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Q326: कंक्रीट निर्माण में 'एडमिक्सचर' (Admixture) के रूप में 'एक्सेलरेटर' (Accelerator) का कार्य क्या होता है?
- A) जमने का समय बढ़ाना
- ✅ B) जमने का समय घटाकर शुरुआती सामर्थ्य (Early Strength) बढ़ाना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट का रंग हल्का करना
- D) जल अवशोषण कम करना
💡 डिटेल Explanation:
एक्सेलरेटर (जैसे कैल्शियम क्लोराइड) कंक्रीट की रासायनिक प्रतिक्रिया की गति को बढ़ा देते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से उन परिस्थितियों में किया जाता है जहाँ कंक्रीट को जल्दी जमाना हो (जैसे मरम्मत कार्य या ठंड के मौसम में)। यह जमने का समय (Setting Time) कम कर देता है और शुरुआती मजबूती (Early Strength) प्रदान करता है।
एक्सेलरेटर (जैसे कैल्शियम क्लोराइड) कंक्रीट की रासायनिक प्रतिक्रिया की गति को बढ़ा देते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से उन परिस्थितियों में किया जाता है जहाँ कंक्रीट को जल्दी जमाना हो (जैसे मरम्मत कार्य या ठंड के मौसम में)। यह जमने का समय (Setting Time) कम कर देता है और शुरुआती मजबूती (Early Strength) प्रदान करता है।
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Q327: ईंट की चिनाई में 'हार्डर' (Header) का अर्थ क्या है?
- A) ईंट का सबसे बड़ा वाला हिस्सा (Face)
- B) ईंट का सबसे छोटा वाला हिस्सा (Side)
- ✅ C) ईंट का वह हिस्सा जो दीवार के सामने (Face) पर दिखाई देता है (सही उत्तर)
- D) ईंट का कटा हुआ सिरा
💡 डिटेल Explanation:
हेडर (Header) ईंट का वह छोटा आयताकार हिस्सा होता है जो दीवार के सामने (Face) पर दिखाई देता है। ईंट की लंबाई का सिरा दीवार के अंदर की ओर रहता है। स्ट्रेचर (Stretcher) ईंट का लंबा हिस्सा होता है जो सामने (Face) दिखाई देता है। ये बॉन्ड बनाने के काम आते हैं।
हेडर (Header) ईंट का वह छोटा आयताकार हिस्सा होता है जो दीवार के सामने (Face) पर दिखाई देता है। ईंट की लंबाई का सिरा दीवार के अंदर की ओर रहता है। स्ट्रेचर (Stretcher) ईंट का लंबा हिस्सा होता है जो सामने (Face) दिखाई देता है। ये बॉन्ड बनाने के काम आते हैं।
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Q328: 'प्लाईवुड' (Plywood) के निर्माण में विनियर को चिपकाने के लिए आमतौर पर किस प्रकार के 'गोंद' (Glue/Adhesive) का उपयोग किया जाता है?
- A) फेविकोल (PVA Glue)
- ✅ B) सिंथेटिक रेजिन गोंद (Synthetic Resin Glue) (सही उत्तर)
- C) साधारण आटा गोंद
- D) केवल पानी आधारित गोंद
💡 डिटेल Explanation:
अच्छी गुणवत्ता वाली प्लाईवुड में परतों को चिपकाने के लिए 'सिंथेटिक रेजिन' (जैसे फेनोल-फॉर्मलडिहाइड - PF Resin) का उपयोग किया जाता है। यह गोंद बहुत मजबूत होता है और पानी (Moisture) या गर्मी (Heat) के प्रभाव में अपनी पकड़ नहीं छोड़ता, जिससे प्लाईवुड लंबे समय तक टिका रहता है।
अच्छी गुणवत्ता वाली प्लाईवुड में परतों को चिपकाने के लिए 'सिंथेटिक रेजिन' (जैसे फेनोल-फॉर्मलडिहाइड - PF Resin) का उपयोग किया जाता है। यह गोंद बहुत मजबूत होता है और पानी (Moisture) या गर्मी (Heat) के प्रभाव में अपनी पकड़ नहीं छोड़ता, जिससे प्लाईवुड लंबे समय तक टिका रहता है।
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Q329: 'एल्मल्शन पेंट' (Emulsion Paint) का मुख्य आधार (Base) क्या होता है?
- A) अलसी का तेल
- ✅ B) सिंथेटिक रेजिन / एक्रिलिक पॉलीमर (Synthetic Resin / Acrylic Polymer) (सही उत्तर)
- C) चॉक पाउडर
- D) रेड लेड
💡 डिटेल Explanation:
एल्मल्शन पेंट आजकल दीवारों के लिए सबसे लोकप्रिय हैं। इसमें बेस के रूप में सिंथेटिक रेजिन या एक्रिलिक पॉलीमर का उपयोग किया जाता है। ये पेंट पानी में घुलनशील (Water-based) होते हैं, जल्दी सूखते हैं, इनमें कोई तीव्र गंध नहीं होती और ये धुलने योग्य (Washable) व लंबे समय तक टिकाऊ होते हैं।
एल्मल्शन पेंट आजकल दीवारों के लिए सबसे लोकप्रिय हैं। इसमें बेस के रूप में सिंथेटिक रेजिन या एक्रिलिक पॉलीमर का उपयोग किया जाता है। ये पेंट पानी में घुलनशील (Water-based) होते हैं, जल्दी सूखते हैं, इनमें कोई तीव्र गंध नहीं होती और ये धुलने योग्य (Washable) व लंबे समय तक टिकाऊ होते हैं।
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Q330: 330 MCQ का पड़ाव पार! प्रश्न: पत्थर के 'एट्रिशन टेस्ट' (Attrition Test - घिसाव परीक्षण) में मुख्य रूप से किसका पता लगाया जाता है?
- A) पत्थर की मजबूती (Strength)
- ✅ B) पत्थर के घिसने के प्रतिरोध (Resistance to Abrasion/Wear) का (सही उत्तर)
- C) पत्थर का पानी सोखने की दर
- D) पत्थर में मौजूद अशुद्धियाँ
💡 डिटेल Explanation:
एट्रिशन टेस्ट (जैसे 'डेवल परीक्षण' - Deval Attrition Test) मुख्य रूप से सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले एग्रीगेट्स (पत्थरों) के लिए किया जाता है। यह परीक्षण मापता है कि यातायात के घर्षण (Abrasion/Wear) के कारण पत्थर कितनी आसानी से घिसकर धूल (Dust/Loss of wear) में बदल सकता है। जितना कम घिसाव (Loss), पत्थर उतना ही बेहतर होता है।
एट्रिशन टेस्ट (जैसे 'डेवल परीक्षण' - Deval Attrition Test) मुख्य रूप से सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले एग्रीगेट्स (पत्थरों) के लिए किया जाता है। यह परीक्षण मापता है कि यातायात के घर्षण (Abrasion/Wear) के कारण पत्थर कितनी आसानी से घिसकर धूल (Dust/Loss of wear) में बदल सकता है। जितना कम घिसाव (Loss), पत्थर उतना ही बेहतर होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 67 (Q331 - Q335)
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Q331: कंक्रीट में 'ब्लीडिंग' (Bleeding) होने से क्या नुकसान होता है?
- A) कंक्रीट की ताकत बढ़ जाती है
- ✅ B) सतह पर पानी की परत बनने से कमजोर और छिद्रपूर्ण सतह (Laitance) का निर्माण होता है (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट जल्दी जम जाता है
- D) कंक्रीट का रंग निखर जाता है
💡 डिटेल Explanation:
ब्लीडिंग (Bleeding) में कंक्रीट के अंदर का अतिरिक्त पानी ऊपर की सतह पर आ जाता है। यह पानी अपने साथ सीमेंट के महीन कणों को भी ऊपर ले आता है, जिससे सतह पर एक कमजोर और पपड़ीदार परत बन जाती है जिसे 'लेटेन्स' (Laitance) कहते हैं। यह कंक्रीट की सतह के घिसाव प्रतिरोध (Wear resistance) को कम कर देता है।
ब्लीडिंग (Bleeding) में कंक्रीट के अंदर का अतिरिक्त पानी ऊपर की सतह पर आ जाता है। यह पानी अपने साथ सीमेंट के महीन कणों को भी ऊपर ले आता है, जिससे सतह पर एक कमजोर और पपड़ीदार परत बन जाती है जिसे 'लेटेन्स' (Laitance) कहते हैं। यह कंक्रीट की सतह के घिसाव प्रतिरोध (Wear resistance) को कम कर देता है।
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Q332: ईंट की चिनाई में 'टूथिंग' (Toothing) क्यों छोड़ी जाती है?
- A) दीवार को सुंदर बनाने के लिए
- ✅ B) भविष्य में नई दीवार को पुरानी दीवार से जोड़ने के लिए (सही उत्तर)
- C) ईंट की लागत बचाने के लिए
- D) पानी की निकासी के लिए
💡 डिटेल Explanation:
टूथिंग (Toothing) में दीवार के सिरे पर ईंटों को एक-छोड़कर बाहर की ओर सीढ़ीनुमा छोड़ा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जब दूसरी दीवार का निर्माण शुरू हो, तो वह इस टूथिंग में 'लॉक' (Interlock) हो सके, जिससे दोनों दीवारों के बीच एक मजबूत बॉन्ड और जोड़ों की पकड़ बनी रहे।
टूथिंग (Toothing) में दीवार के सिरे पर ईंटों को एक-छोड़कर बाहर की ओर सीढ़ीनुमा छोड़ा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि जब दूसरी दीवार का निर्माण शुरू हो, तो वह इस टूथिंग में 'लॉक' (Interlock) हो सके, जिससे दोनों दीवारों के बीच एक मजबूत बॉन्ड और जोड़ों की पकड़ बनी रहे।
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Q333: लकड़ी के 'हनीकॉम्बिंग' (Honeycombing) दोष का मुख्य कारण क्या है?
- A) बहुत धीमी गति से सुखाना (Seasoning)
- ✅ B) बहुत तेजी से सुखाने (Kiln seasoning) के कारण आंतरिक तनाव (Internal stress) (सही उत्तर)
- C) लकड़ी को पानी में रखना
- D) पेड़ की आयु कम होना
💡 डिटेल Explanation:
हनीकॉम्बिंग लकड़ी के अंदर होने वाली आंतरिक दरारें हैं। जब लकड़ी को भट्टे में बहुत तेजी से सुखाया जाता है, तो बाहरी परत जल्दी सख्त हो जाती है, जबकि अंदर का हिस्सा गीला रहता है। जब यह आंतरिक हिस्सा बाद में सूखता है, तो बाहर का सख्त आवरण (Case hardening) उसे फैलने नहीं देता, जिससे अंदर ही अंदर दरारें पड़ जाती हैं, जो देखने में मधुमक्खी के छत्ते जैसी लगती हैं।
हनीकॉम्बिंग लकड़ी के अंदर होने वाली आंतरिक दरारें हैं। जब लकड़ी को भट्टे में बहुत तेजी से सुखाया जाता है, तो बाहरी परत जल्दी सख्त हो जाती है, जबकि अंदर का हिस्सा गीला रहता है। जब यह आंतरिक हिस्सा बाद में सूखता है, तो बाहर का सख्त आवरण (Case hardening) उसे फैलने नहीं देता, जिससे अंदर ही अंदर दरारें पड़ जाती हैं, जो देखने में मधुमक्खी के छत्ते जैसी लगती हैं।
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Q334: पेंट में प्रयुक्त 'ड्रायर' (Drier) का मुख्य कार्य क्या है?
- A) रंग को गहरा करना
- ✅ B) पेंट के सूखने की प्रक्रिया (Oxidation) को गति देना (सही उत्तर)
- C) पेंट की चमक बढ़ाना
- D) पेंट को पतला करना
💡 डिटेल Explanation:
ऑयल पेंट में 'ड्रायर' (Drier) एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करता है। यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन के अवशोषण को तेज करता है, जिससे पेंट की फिल्म जल्दी सूखकर कठोर हो जाती है। सबसे आम ड्रायर 'लिथार्ज' (Litharge) या 'कोबाल्ट' आधारित होते हैं। (नोट: ड्रायर का बहुत अधिक उपयोग करने से पेंट की फिल्म समय के साथ क्रैक होकर उखड़ सकती है)।
ऑयल पेंट में 'ड्रायर' (Drier) एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करता है। यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन के अवशोषण को तेज करता है, जिससे पेंट की फिल्म जल्दी सूखकर कठोर हो जाती है। सबसे आम ड्रायर 'लिथार्ज' (Litharge) या 'कोबाल्ट' आधारित होते हैं। (नोट: ड्रायर का बहुत अधिक उपयोग करने से पेंट की फिल्म समय के साथ क्रैक होकर उखड़ सकती है)।
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Q335: 335 MCQ का मील का पत्थर! प्रश्न: पत्थर की 'टफनेस' (Toughness - चिमड़पन) ज्ञात करने के लिए कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) स्मिथ टेस्ट
- ✅ B) इम्पैक्ट टेस्ट (Impact Test) (सही उत्तर)
- C) जल अवशोषण टेस्ट
- D) कठोरता परीक्षण
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर की 'टफनेस' का मतलब है कि वह अचानक लगने वाले झटकों (Impact loads) या हथौड़े की चोट को कितनी सहन कर सकता है। इसे मापने के लिए 'इम्पैक्ट टेस्ट' (Impact Test) किया जाता है। सड़क निर्माण में एग्रीगेट्स की टफनेस जानने के लिए 'एग्रीगेट इम्पैक्ट वैल्यू' (Aggregate Impact Value) टेस्ट किया जाता है। यदि पत्थर की टफनेस अच्छी है, तो वह झटकों के दौरान जल्दी नहीं टूटेगा।
पत्थर की 'टफनेस' का मतलब है कि वह अचानक लगने वाले झटकों (Impact loads) या हथौड़े की चोट को कितनी सहन कर सकता है। इसे मापने के लिए 'इम्पैक्ट टेस्ट' (Impact Test) किया जाता है। सड़क निर्माण में एग्रीगेट्स की टफनेस जानने के लिए 'एग्रीगेट इम्पैक्ट वैल्यू' (Aggregate Impact Value) टेस्ट किया जाता है। यदि पत्थर की टफनेस अच्छी है, तो वह झटकों के दौरान जल्दी नहीं टूटेगा।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 68 (Q336 - Q340)
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Q336: कंक्रीट निर्माण में 'एडमिक्सचर' (Admixture) के रूप में 'रिटार्डर' (Retarder) का मुख्य कार्य क्या है?
- A) कंक्रीट को जल्दी सुखाना
- ✅ B) कंक्रीट के जमने की प्रक्रिया को धीमा करना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट की सुकार्यता कम करना
- D) कंक्रीट का घनत्व बढ़ाना
💡 डिटेल Explanation:
रिटार्डर (जैसे जिप्सम या चीनी) कंक्रीट के जमने (Setting time) की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। इनका उपयोग तब किया जाता है जब हमें कंक्रीट को दूर के स्थानों पर ले जाना हो (Transit mix) या गर्म मौसम में काम करना हो जहाँ कंक्रीट बहुत जल्दी जम सकती है। यह कंक्रीट को लंबे समय तक कार्यशील (Workable) बनाए रखता है।
रिटार्डर (जैसे जिप्सम या चीनी) कंक्रीट के जमने (Setting time) की प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं। इनका उपयोग तब किया जाता है जब हमें कंक्रीट को दूर के स्थानों पर ले जाना हो (Transit mix) या गर्म मौसम में काम करना हो जहाँ कंक्रीट बहुत जल्दी जम सकती है। यह कंक्रीट को लंबे समय तक कार्यशील (Workable) बनाए रखता है।
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Q337: ईंट चिनाई में 'स्ट्रेचर' (Stretcher) ईंट का कौन सा हिस्सा होता है?
- A) ईंट का छोटा और संकरा हिस्सा
- ✅ B) ईंट का लंबा और चौड़ा हिस्सा जो सामने (Face) दिखता है (सही उत्तर)
- C) ईंट का सबसे ऊपरी हिस्सा
- D) ईंट का कटा हुआ कोना
💡 डिटेल Explanation:
स्ट्रेचर ईंट का वह लंबा और बड़ा चेहरा है जिसे हम दीवार के सामने (Face) देखते हैं। जब ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर दीवार के फेस पर लगाया जाता है, तो उसे 'स्ट्रेचर बॉन्ड' कहते हैं। यह आमतौर पर आधी ईंट की मोटाई वाली दीवारों (Half-brick wall) के लिए उपयोग किया जाता है।
स्ट्रेचर ईंट का वह लंबा और बड़ा चेहरा है जिसे हम दीवार के सामने (Face) देखते हैं। जब ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर दीवार के फेस पर लगाया जाता है, तो उसे 'स्ट्रेचर बॉन्ड' कहते हैं। यह आमतौर पर आधी ईंट की मोटाई वाली दीवारों (Half-brick wall) के लिए उपयोग किया जाता है।
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Q338: लकड़ी के संरक्षण (Preservation) में 'रैपिड सीजनिंग' (Rapid Seasoning) का एक प्रमुख उदाहरण कौन सी विधि है?
- A) एयर सीजनिंग (Air Seasoning)
- B) प्राकृतिक सीजनिंग
- ✅ C) किल्न सीजनिंग (Kiln Seasoning) (सही उत्तर)
- D) वाटर सीजनिंग (Water Seasoning)
💡 डिटेल Explanation:
किल्न सीजनिंग (Kiln Seasoning) एक कृत्रिम विधि है जिसमें एक बंद कक्ष (भट्ठी) में नियंत्रित तापमान और आर्द्रता का उपयोग करके लकड़ी को बहुत तेजी से सुखाया जाता है। एयर सीजनिंग में महीनों लग सकते हैं, जबकि किल्न सीजनिंग में कुछ दिनों के भीतर ही लकड़ी को उपयोग योग्य (10-12% नमी) बनाया जा सकता है।
किल्न सीजनिंग (Kiln Seasoning) एक कृत्रिम विधि है जिसमें एक बंद कक्ष (भट्ठी) में नियंत्रित तापमान और आर्द्रता का उपयोग करके लकड़ी को बहुत तेजी से सुखाया जाता है। एयर सीजनिंग में महीनों लग सकते हैं, जबकि किल्न सीजनिंग में कुछ दिनों के भीतर ही लकड़ी को उपयोग योग्य (10-12% नमी) बनाया जा सकता है।
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Q339: पेंट बनाने में 'थिनर' (Thinner/Vehicle solvent) का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) पेंट को चमकदार बनाना
- B) पेंट को सुखाना
- ✅ C) पेंट की गाढ़ेपन (Consistency) को कम करके उसे लगाने योग्य (Apply) बनाना (सही उत्तर)
- D) पेंट को कीड़ों से बचाना
💡 डिटेल Explanation:
पेंट (विशेषकर ऑयल पेंट) बहुत गाढ़ा होता है, जिसे ब्रश से लगाना मुश्किल होता है। थिनर (जैसे टर्पेन्टाइन ऑयल/तारपीन) को पेंट में मिलाकर उसे पतला किया जाता है, जिससे वह सतह पर आसानी से फैल (Spread) सके और ब्रश से पेंटिंग करना आसान हो जाए। पेंट के सूखने के बाद थिनर वाष्पित (Evaporate) हो जाता है।
पेंट (विशेषकर ऑयल पेंट) बहुत गाढ़ा होता है, जिसे ब्रश से लगाना मुश्किल होता है। थिनर (जैसे टर्पेन्टाइन ऑयल/तारपीन) को पेंट में मिलाकर उसे पतला किया जाता है, जिससे वह सतह पर आसानी से फैल (Spread) सके और ब्रश से पेंटिंग करना आसान हो जाए। पेंट के सूखने के बाद थिनर वाष्पित (Evaporate) हो जाता है।
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Q340: 340 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पत्थर की 'ड्यूरेबिलिटी' (Durability - टिकाऊपन) ज्ञात करने के लिए 'ब्राड टेस्ट' (Brard's Test) किस कारक का उपयोग करता है?
- A) गर्म पानी का प्रभाव
- B) अम्ल (Acid) का प्रभाव
- ✅ C) सोडियम सल्फेट (Sodium Sulphate) क्रिस्टलीकरण (सही उत्तर)
- D) हवा के दबाव का प्रभाव
💡 डिटेल Explanation:
ब्राड टेस्ट (Brard's Test) पत्थर के 'फ्रॉस्ट रेजिस्टेंस' (Frost resistance) या मौसम के थपेड़ों को सहने की क्षमता को मापता है। इसमें पत्थर के नमूने को सोडियम सल्फेट के घोल में उबाला जाता है और फिर सुखाया जाता है। सोडियम सल्फेट के क्रिस्टल पत्थर के सूक्ष्म छिद्रों (Pores) में बनकर दबाव डालते हैं, जो सर्दियों में पाले (Frost) द्वारा होने वाले नुकसान का अनुकरण (Simulate) करते हैं।
ब्राड टेस्ट (Brard's Test) पत्थर के 'फ्रॉस्ट रेजिस्टेंस' (Frost resistance) या मौसम के थपेड़ों को सहने की क्षमता को मापता है। इसमें पत्थर के नमूने को सोडियम सल्फेट के घोल में उबाला जाता है और फिर सुखाया जाता है। सोडियम सल्फेट के क्रिस्टल पत्थर के सूक्ष्म छिद्रों (Pores) में बनकर दबाव डालते हैं, जो सर्दियों में पाले (Frost) द्वारा होने वाले नुकसान का अनुकरण (Simulate) करते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 69 (Q341 - Q345)
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Q341: कंक्रीट में 'वॉटर-सीमेंट अनुपात' (W/C Ratio) का कंक्रीट की 'मजबूती' (Strength) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) W/C अनुपात बढ़ने पर मजबूती बढ़ती है
- ✅ B) W/C अनुपात बढ़ने पर मजबूती घटती है (सही उत्तर)
- C) मजबूती पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
- D) केवल पानी कम होने पर मजबूती घटती है
💡 डिटेल Explanation:
अब्राहम्स लॉ (Abrams' Law) के अनुसार, कंक्रीट की मजबूती मुख्य रूप से वॉटर-सीमेंट अनुपात (W/C Ratio) पर निर्भर करती है। यदि कंक्रीट में पानी की मात्रा अधिक होगी (W/C Ratio अधिक), तो कंक्रीट के अंदर बड़े छिद्र (Voids) रह जाएंगे और कंक्रीट कमजोर होगी। इसीलिए मजबूती पाने के लिए न्यूनतम संभव पानी का उपयोग करना चाहिए।
अब्राहम्स लॉ (Abrams' Law) के अनुसार, कंक्रीट की मजबूती मुख्य रूप से वॉटर-सीमेंट अनुपात (W/C Ratio) पर निर्भर करती है। यदि कंक्रीट में पानी की मात्रा अधिक होगी (W/C Ratio अधिक), तो कंक्रीट के अंदर बड़े छिद्र (Voids) रह जाएंगे और कंक्रीट कमजोर होगी। इसीलिए मजबूती पाने के लिए न्यूनतम संभव पानी का उपयोग करना चाहिए।
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Q342: ईंट की चिनाई में 'किंग क्लोजर' का उपयोग किस स्थान पर किया जाता है?
- A) दीवार के बीच में
- ✅ B) दीवार के कोनों (Quoins) या जंक्शन पर (सही उत्तर)
- C) नींव (Foundation) के नीचे
- D) खिड़कियों के ऊपर
💡 डिटेल Explanation:
किंग क्लोजर का आकार पूरी ईंट का 3/4 भाग (एक कोना कटा हुआ) होता है। इसका उपयोग चिनाई में बॉन्ड तोड़ने (Breaking the bond) और कोनों (Quoins) या जंक्शन पर ईंटों की पंक्ति को व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है ताकि वर्टिकल जॉइंट्स एक सीध में न आएँ और मजबूती बनी रहे।
किंग क्लोजर का आकार पूरी ईंट का 3/4 भाग (एक कोना कटा हुआ) होता है। इसका उपयोग चिनाई में बॉन्ड तोड़ने (Breaking the bond) और कोनों (Quoins) या जंक्शन पर ईंटों की पंक्ति को व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है ताकि वर्टिकल जॉइंट्स एक सीध में न आएँ और मजबूती बनी रहे।
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Q343: लकड़ी की 'सीज़निंग' (Seasoning) के लिए 'वाटर सीजनिंग' (Water Seasoning) विधि का मुख्य लाभ क्या है?
- A) लकड़ी बहुत जल्दी सूख जाती है
- ✅ B) लकड़ी के सैप (Sap/Resin) को पानी बाहर निकाल देता है (सही उत्तर)
- C) लकड़ी बहुत कठोर हो जाती है
- D) यह सबसे सस्ती और तेज़ विधि है
💡 डिटेल Explanation:
वाटर सीजनिंग में लकड़ी के लट्ठों को बहते पानी में रखा जाता है। पानी, लकड़ी के अंदर मौजूद स्टार्च, शर्करा और अन्य पोषक तत्वों (Sap) को बाहर निकाल देता है, जो फफूंदी और कीड़ों को आकर्षित करते हैं। इस प्रकार यह लकड़ी को सुरक्षित (Preserve) करता है। हालांकि, पानी से निकालने के बाद लकड़ी को सामान्य तरीके से सुखाना पड़ता है।
वाटर सीजनिंग में लकड़ी के लट्ठों को बहते पानी में रखा जाता है। पानी, लकड़ी के अंदर मौजूद स्टार्च, शर्करा और अन्य पोषक तत्वों (Sap) को बाहर निकाल देता है, जो फफूंदी और कीड़ों को आकर्षित करते हैं। इस प्रकार यह लकड़ी को सुरक्षित (Preserve) करता है। हालांकि, पानी से निकालने के बाद लकड़ी को सामान्य तरीके से सुखाना पड़ता है।
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Q344: 'एल्युमिनियम पेंट' (Aluminium Paint) को अक्सर धातु की सतहों और तेल के टैंकों (Oil tanks) पर क्यों किया जाता है?
- ✅ A) यह गर्मी और प्रकाश को परावर्तित (Reflect) करता है (सही उत्तर)
- B) यह लोहे को बहुत चमकदार बनाता है
- C) यह पेंट को सस्ता बनाता है
- D) यह पेंट को जलरोधी बनाता है
💡 डिटेल Explanation:
एल्युमिनियम पेंट में महीन एल्युमिनियम पाउडर मिला होता है। जब यह सूखता है, तो एल्युमिनियम के कण सतह पर एक साथ मिलकर एक परावर्तक परत (Reflective film) बना लेते हैं। यह धूप और गर्मी को परावर्तित कर देता है, जिससे तेल या ईंधन के टैंकों के अंदर तापमान नहीं बढ़ता, जिससे वाष्पीकरण (Evaporation) कम होता है।
एल्युमिनियम पेंट में महीन एल्युमिनियम पाउडर मिला होता है। जब यह सूखता है, तो एल्युमिनियम के कण सतह पर एक साथ मिलकर एक परावर्तक परत (Reflective film) बना लेते हैं। यह धूप और गर्मी को परावर्तित कर देता है, जिससे तेल या ईंधन के टैंकों के अंदर तापमान नहीं बढ़ता, जिससे वाष्पीकरण (Evaporation) कम होता है।
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Q345: 345 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पत्थर की 'ड्यूरेबिलिटी' (Durability) का पता लगाने के लिए 'फ्रॉस्ट रेजिस्टेंस' (Frost Resistance) किस कारण से की जाती है?
- A) पत्थर के रंग की जांच के लिए
- B) पत्थर की चमक के लिए
- ✅ C) छिद्रों में पानी जमने से होने वाली दरारों का पता लगाने के लिए (सही उत्तर)
- D) पत्थर की मजबूती के लिए
💡 डिटेल Explanation:
फ्रॉस्ट रेजिस्टेंस (पाले के प्रति प्रतिरोध) ठंडे देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब पत्थर के छिद्रों (Pores) में पानी भर जाता है और तापमान 0 डिग्री से नीचे चला जाता है, तो पानी बर्फ बनकर फैलता है। यह दबाव पत्थर में आंतरिक दरारें डाल सकता है। इसे 'फ्रॉस्ट एक्शन' कहते हैं, और एक अच्छे पत्थर को इसे झेलने में सक्षम होना चाहिए।
फ्रॉस्ट रेजिस्टेंस (पाले के प्रति प्रतिरोध) ठंडे देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब पत्थर के छिद्रों (Pores) में पानी भर जाता है और तापमान 0 डिग्री से नीचे चला जाता है, तो पानी बर्फ बनकर फैलता है। यह दबाव पत्थर में आंतरिक दरारें डाल सकता है। इसे 'फ्रॉस्ट एक्शन' कहते हैं, और एक अच्छे पत्थर को इसे झेलने में सक्षम होना चाहिए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 70 (Q346 - Q350)
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Q346: कंक्रीट में 'वॉटर-सीमेंट अनुपात' (W/C Ratio) को मापने के लिए सबसे सटीक तरीका क्या है?
- A) केवल अनुमान लगाना
- ✅ B) वजन (Weight) द्वारा (सही उत्तर)
- C) आयतन (Volume) द्वारा
- D) बाल्टी के माप द्वारा
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट मिश्रण में पानी और सीमेंट का अनुपात हमेशा वजन (Weight) के आधार पर मापा जाना चाहिए। आयतन (Volume) के आधार पर मापने में गलती की संभावना अधिक होती है क्योंकि सीमेंट की सघनता (Bulk density) बदलने से उसका आयतन बदल सकता है। सटीक और मजबूत कंक्रीट के लिए वजन द्वारा बैचिंग (Batching) सर्वोत्तम विधि है।
कंक्रीट मिश्रण में पानी और सीमेंट का अनुपात हमेशा वजन (Weight) के आधार पर मापा जाना चाहिए। आयतन (Volume) के आधार पर मापने में गलती की संभावना अधिक होती है क्योंकि सीमेंट की सघनता (Bulk density) बदलने से उसका आयतन बदल सकता है। सटीक और मजबूत कंक्रीट के लिए वजन द्वारा बैचिंग (Batching) सर्वोत्तम विधि है।
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Q347: 'फ्लेमिश बॉन्ड' (Flemish Bond) का एक बड़ा नुकसान क्या है?
- A) यह देखने में बहुत भद्दा लगता है
- ✅ B) इसमें इंग्लिश बॉन्ड की तुलना में मजबूती कम होती है (सही उत्तर)
- C) इसे बनाना बहुत कठिन है
- D) इसमें ईंटें ज्यादा खर्च होती हैं
💡 डिटेल Explanation:
फ्लेमिश बॉन्ड (Flemish Bond) अपनी सुंदरता (Aesthetics) के लिए जाना जाता है, लेकिन इसमें 'कंटीन्यूअस वर्टिकल जॉइंट्स' की अधिकता होती है जो बॉन्ड की समग्र मजबूती को कम कर देती है। इसकी तुलना में, 'इंग्लिश बॉन्ड' (English Bond) अपनी बेहतर बनावट और मजबूती के कारण लोड-बेयरिंग दीवारों के लिए ज्यादा उपयुक्त और मजबूत माना जाता है।
फ्लेमिश बॉन्ड (Flemish Bond) अपनी सुंदरता (Aesthetics) के लिए जाना जाता है, लेकिन इसमें 'कंटीन्यूअस वर्टिकल जॉइंट्स' की अधिकता होती है जो बॉन्ड की समग्र मजबूती को कम कर देती है। इसकी तुलना में, 'इंग्लिश बॉन्ड' (English Bond) अपनी बेहतर बनावट और मजबूती के कारण लोड-बेयरिंग दीवारों के लिए ज्यादा उपयुक्त और मजबूत माना जाता है।
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Q348: लकड़ी को संरक्षित करने की 'तपिश विधि' (Heat method) का क्या अर्थ है?
- A) लकड़ी को उबालना
- ✅ B) सतह को थोड़ा झुलसाकर (Charring) सुरक्षा परत बनाना (सही उत्तर)
- C) लकड़ी को भाप देना
- D) लकड़ी को धूप में सुखाना
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी को आग से बचाने की एक पुरानी विधि 'चारिंग' (Charring) है। इसमें लकड़ी के निचले हिस्से (जो जमीन के संपर्क में आता है) को हल्की आग से जलाकर उसकी सतह को काला (झुलसा) कर दिया जाता है। झुलसने के बाद कार्बन की एक परत बन जाती है, जो लकड़ी को नमी, कीड़ों और फफूंदी से बचाती है। यह खंभों (Posts) के लिए प्रभावी है।
लकड़ी को आग से बचाने की एक पुरानी विधि 'चारिंग' (Charring) है। इसमें लकड़ी के निचले हिस्से (जो जमीन के संपर्क में आता है) को हल्की आग से जलाकर उसकी सतह को काला (झुलसा) कर दिया जाता है। झुलसने के बाद कार्बन की एक परत बन जाती है, जो लकड़ी को नमी, कीड़ों और फफूंदी से बचाती है। यह खंभों (Posts) के लिए प्रभावी है।
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Q349: पेंट में 'पिगमेंट' (Pigment) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- ✅ A) पेंट को 'रंग' और 'ओपेसिटी' (Opacity) प्रदान करना (सही उत्तर)
- B) पेंट को जल्दी सुखाना
- C) पेंट की चिपचिपाहट कम करना
- D) पेंट को कीड़ों से बचाना
💡 डिटेल Explanation:
पिगमेंट (Pigment) बारीक पाउडर होता है जो पेंट को उसका विशिष्ट रंग प्रदान करता है। इसके अलावा, पिगमेंट पेंट की 'ओपेसिटी' (Opacity) या छुपाने की क्षमता (Hiding power) को बढ़ाता है, जिससे सतह पर पेंट की एक पतली परत ही पिछली सतह के रंग को पूरी तरह से ढक लेती है।
पिगमेंट (Pigment) बारीक पाउडर होता है जो पेंट को उसका विशिष्ट रंग प्रदान करता है। इसके अलावा, पिगमेंट पेंट की 'ओपेसिटी' (Opacity) या छुपाने की क्षमता (Hiding power) को बढ़ाता है, जिससे सतह पर पेंट की एक पतली परत ही पिछली सतह के रंग को पूरी तरह से ढक लेती है।
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Q350: 350 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पत्थर के 'इम्पैक्ट टेस्ट' (Impact Test) में पत्थर के नमूने को किस पर रखा जाता है?
- A) रबर की मैट पर
- B) लकड़ी के तख्ते पर
- ✅ C) एक इस्पात (Steel) के आधार प्लेट पर (सही उत्तर)
- D) रेत की परत पर
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर (एग्रीगेट्स) के इम्पैक्ट टेस्ट के लिए एक 'इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन' का उपयोग होता है। पत्थर के नमूने को एक बेलनाकार कप (Cylindrical cup) में भरा जाता है, जिसे मशीन की एक भारी इस्पात (Steel) की आधार प्लेट पर रखा जाता है। इसके बाद एक निश्चित ऊंचाई से हथौड़ा (Hammer) गिराकर पत्थर पर झटके दिए जाते हैं।
पत्थर (एग्रीगेट्स) के इम्पैक्ट टेस्ट के लिए एक 'इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन' का उपयोग होता है। पत्थर के नमूने को एक बेलनाकार कप (Cylindrical cup) में भरा जाता है, जिसे मशीन की एक भारी इस्पात (Steel) की आधार प्लेट पर रखा जाता है। इसके बाद एक निश्चित ऊंचाई से हथौड़ा (Hammer) गिराकर पत्थर पर झटके दिए जाते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 71 (Q351 - Q355)
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Q351: कंक्रीट में 'क्रीप' (Creep) मुख्य रूप से किस पर निर्भर करता है?
- A) केवल कंक्रीट की उम्र पर
- ✅ B) भार लगाने की आयु और वॉटर-सीमेंट अनुपात पर (सही उत्तर)
- C) केवल कंक्रीट के रंग पर
- D) केवल एग्रीगेट के आकार पर
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट में क्रीप (समय के साथ विरूपण) कई कारकों पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से, यदि कम उम्र में कंक्रीट पर भार लगाया जाए तो क्रीप अधिक होता है। साथ ही, उच्च वॉटर-सीमेंट अनुपात वाली कंक्रीट में अधिक क्रीप होता है, क्योंकि इसमें सीमेंट पेस्ट अधिक होता है जो क्रीप के लिए जिम्मेदार है।
कंक्रीट में क्रीप (समय के साथ विरूपण) कई कारकों पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से, यदि कम उम्र में कंक्रीट पर भार लगाया जाए तो क्रीप अधिक होता है। साथ ही, उच्च वॉटर-सीमेंट अनुपात वाली कंक्रीट में अधिक क्रीप होता है, क्योंकि इसमें सीमेंट पेस्ट अधिक होता है जो क्रीप के लिए जिम्मेदार है।
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Q352: ईंट की चिनाई में 'डेन्टिल्ड बॉन्ड' (Dentiled Bond) का उपयोग मुख्य रूप से किस उद्देश्य के लिए किया जाता है?
- A) मजबूती बढ़ाने के लिए
- ✅ B) सजावटी कार्यों (Ornamental/Decorative) के लिए (सही उत्तर)
- C) दीवार को हल्का बनाने के लिए
- D) नींव को मजबूत करने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
डेन्टिल्ड बॉन्ड (Dentiled Bond) में ईंटों को इस तरह से बाहर-अंदर करके लगाया जाता है कि दीवार के चेहरे पर एक दांतों (Teeth-like) जैसी आकृति बनती है। यह संरचनात्मक रूप से बहुत मजबूत नहीं होता, बल्कि इसका उपयोग केवल दीवारों को आकर्षक और 'सजावटी' (Architectural) लुक देने के लिए किया जाता है।
डेन्टिल्ड बॉन्ड (Dentiled Bond) में ईंटों को इस तरह से बाहर-अंदर करके लगाया जाता है कि दीवार के चेहरे पर एक दांतों (Teeth-like) जैसी आकृति बनती है। यह संरचनात्मक रूप से बहुत मजबूत नहीं होता, बल्कि इसका उपयोग केवल दीवारों को आकर्षक और 'सजावटी' (Architectural) लुक देने के लिए किया जाता है।
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Q353: 'पाइन' (Pine) लकड़ी की मुख्य विशेषता क्या है?
- A) यह बहुत भारी और कठोर होती है
- B) इसमें रेशे बहुत टेढ़े-मेढ़े होते हैं
- ✅ C) यह हल्की होती है और आसानी से काम में लाई जा सकती है (सही उत्तर)
- D) यह बहुत महंगी लकड़ी है
💡 डिटेल Explanation:
पाइन (Pine) एक सॉफ्टवुड (Softwood) है। यह वजन में हल्की, सीधा रेशा (Straight grain) रखने वाली और काटने/आकार देने में बहुत आसान (Easy to work) होती है। इसी वजह से इसका उपयोग पैकिंग केस, शटरिंग, और फर्नीचर के अंदरूनी हिस्सों को बनाने में बहुत अधिक होता है।
पाइन (Pine) एक सॉफ्टवुड (Softwood) है। यह वजन में हल्की, सीधा रेशा (Straight grain) रखने वाली और काटने/आकार देने में बहुत आसान (Easy to work) होती है। इसी वजह से इसका उपयोग पैकिंग केस, शटरिंग, और फर्नीचर के अंदरूनी हिस्सों को बनाने में बहुत अधिक होता है।
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Q354: पेंटिंग में 'फ्लैकिंग' (Flaking) दोष क्या है?
- A) पेंट का रंग उड़ जाना
- ✅ B) पेंट की परत का पपड़ी बनकर सतह से अलग होना (सही उत्तर)
- C) सतह पर छोटे-छोटे छेद होना
- D) पेंट में दरारें पड़ना
💡 डिटेल Explanation:
फ्लैकिंग (Flaking) तब होता है जब पेंट और सतह (Surface) के बीच पकड़ (Adhesion) कमजोर होती है। यह अक्सर खराब सतह की तैयारी (जैसे पेंट से पहले सफाई न करना) या खराब गुणवत्ता वाले प्राइमर के कारण होता है। समय के साथ, पेंट की परत पपड़ी (Flakes) बनकर झड़ने लगती है।
फ्लैकिंग (Flaking) तब होता है जब पेंट और सतह (Surface) के बीच पकड़ (Adhesion) कमजोर होती है। यह अक्सर खराब सतह की तैयारी (जैसे पेंट से पहले सफाई न करना) या खराब गुणवत्ता वाले प्राइमर के कारण होता है। समय के साथ, पेंट की परत पपड़ी (Flakes) बनकर झड़ने लगती है।
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Q355: 355 MCQ का मील का पत्थर! प्रश्न: पत्थर के 'कम्प्रेसिव स्ट्रेंथ' परीक्षण में नमूने का आकार क्या होता है?
- A) 50 mm क्यूब
- ✅ B) 40 mm क्यूब (सही उत्तर)
- C) 100 mm क्यूब
- D) 150 mm क्यूब
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर की कंप्रेसिव स्ट्रेंथ ज्ञात करने के लिए मानक आकार का 40 mm x 40 mm x 40 mm का घन (Cube) उपयोग किया जाता है। नमूने के सभी फलक (Faces) पूरी तरह से समतल (Smooth/True) होने चाहिए ताकि भार (Load) समान रूप से वितरित हो सके। यह परीक्षण पत्थर की संरचनात्मक मजबूती को मापने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।
पत्थर की कंप्रेसिव स्ट्रेंथ ज्ञात करने के लिए मानक आकार का 40 mm x 40 mm x 40 mm का घन (Cube) उपयोग किया जाता है। नमूने के सभी फलक (Faces) पूरी तरह से समतल (Smooth/True) होने चाहिए ताकि भार (Load) समान रूप से वितरित हो सके। यह परीक्षण पत्थर की संरचनात्मक मजबूती को मापने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 72 (Q356 - Q360)
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Q356: कंक्रीट निर्माण में 'सीग्रीगेशन' (Segregation) का मुख्य कारण क्या है?
- A) पानी की उचित मात्रा
- B) कंक्रीट की सही मिक्सिंग
- ✅ C) कंक्रीट को अत्यधिक ऊंचाई से गिराना (सही उत्तर)
- D) अच्छी तराई करना
💡 डिटेल Explanation:
सीग्रीगेशन का मतलब है कंक्रीट के अवयवों (जैसे सीमेंट पेस्ट और एग्रीगेट्स) का अलग-अलग हो जाना। यदि कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से (आमतौर पर 1.5 मीटर से अधिक) नीचे गिराया जाता है, तो भारी गिट्टी (Coarse Aggregate) अलग हो जाती है और पेस्ट अलग, जिससे कंक्रीट की मजबूती कम हो जाती है। इसे रोकने के लिए पाइप या शूट (Chute) का उपयोग करना चाहिए।
सीग्रीगेशन का मतलब है कंक्रीट के अवयवों (जैसे सीमेंट पेस्ट और एग्रीगेट्स) का अलग-अलग हो जाना। यदि कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से (आमतौर पर 1.5 मीटर से अधिक) नीचे गिराया जाता है, तो भारी गिट्टी (Coarse Aggregate) अलग हो जाती है और पेस्ट अलग, जिससे कंक्रीट की मजबूती कम हो जाती है। इसे रोकने के लिए पाइप या शूट (Chute) का उपयोग करना चाहिए।
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Q357: ईंट चिनाई में 'हेडर बॉन्ड' (Header Bond) का उपयोग आमतौर पर किस प्रकार की दीवारों के लिए किया जाता है?
- ✅ A) घुमावदार दीवारें (Curved walls) (सही उत्तर)
- B) सीधी load-bearing दीवारें
- C) नींव की दीवारें
- D) केवल आंतरिक विभाजन (Partition)
💡 डिटेल Explanation:
हेडर बॉन्ड में ईंटों को उनका छोटा सिरा (Header) सामने रखकर जोड़ा जाता है। चूंकि इसमें ईंटें कम चौड़ी होती हैं, इसलिए यह घुमावदार (Curved) या गोलाकार (Circular) दीवारों के निर्माण में ईंटों को आसानी से घुमाव देने में बहुत मददगार होता है। सीधी दीवारों के लिए इसे बहुत मजबूत नहीं माना जाता है।
हेडर बॉन्ड में ईंटों को उनका छोटा सिरा (Header) सामने रखकर जोड़ा जाता है। चूंकि इसमें ईंटें कम चौड़ी होती हैं, इसलिए यह घुमावदार (Curved) या गोलाकार (Circular) दीवारों के निर्माण में ईंटों को आसानी से घुमाव देने में बहुत मददगार होता है। सीधी दीवारों के लिए इसे बहुत मजबूत नहीं माना जाता है।
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Q358: 'साल' (Sal) की लकड़ी का मुख्य उपयोग किस निर्माण कार्य में होता है?
- A) कागज बनाने में
- ✅ B) भारी निर्माण कार्य जैसे बीम, खंभे और पुल (सही उत्तर)
- C) केवल फर्नीचर बनाने में
- D) माचिस बनाने में
💡 डिटेल Explanation:
साल (Sal) एक बहुत ही कठोर, भारी और टिकाऊ लकड़ी (Hardwood) है। इसमें दीमक और फफूंदी के प्रति बहुत अधिक प्रतिरोध क्षमता होती है। इसी मजबूती के कारण इसका उपयोग भारी संरचनात्मक कार्यों (Structural works) जैसे बीम, पिलर, रेल स्लीपर और पुलों के निर्माण में किया जाता है।
साल (Sal) एक बहुत ही कठोर, भारी और टिकाऊ लकड़ी (Hardwood) है। इसमें दीमक और फफूंदी के प्रति बहुत अधिक प्रतिरोध क्षमता होती है। इसी मजबूती के कारण इसका उपयोग भारी संरचनात्मक कार्यों (Structural works) जैसे बीम, पिलर, रेल स्लीपर और पुलों के निर्माण में किया जाता है।
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Q359: 'डिस्टेंपर' (Distemper) का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
- ✅ A) यह बहुत सस्ता होता है और लगाने में आसान है (सही उत्तर)
- B) यह पूर्णतः जलरोधी है
- C) यह बाहर (Exterior) की दीवारों के लिए सबसे अच्छा है
- D) इसमें वार्निश की जरूरत नहीं पड़ती
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर (Distemper) उन जगहों पर उपयोग किया जाता है जहाँ बजट कम हो। यह मुख्य रूप से आंतरिक दीवारों पर सफेदी (Whitewash) से बेहतर लुक देता है लेकिन ऑइल पेंट की तुलना में बहुत सस्ता पड़ता है। इसे पानी के साथ मिलाकर ब्रश से आसानी से लगाया जा सकता है, जो समय और श्रम दोनों बचाता है।
डिस्टेंपर (Distemper) उन जगहों पर उपयोग किया जाता है जहाँ बजट कम हो। यह मुख्य रूप से आंतरिक दीवारों पर सफेदी (Whitewash) से बेहतर लुक देता है लेकिन ऑइल पेंट की तुलना में बहुत सस्ता पड़ता है। इसे पानी के साथ मिलाकर ब्रश से आसानी से लगाया जा सकता है, जो समय और श्रम दोनों बचाता है।
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Q360: 360 MCQ का मील का पत्थर! प्रश्न: पत्थर के 'एब्रेशन' (Abrasion) परीक्षण के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) इम्पैक्ट मशीन
- B) क्रशिंग मशीन
- ✅ C) लॉस एंजिल्स एब्रेशन मशीन (Los Angeles Abrasion Machine) (सही उत्तर)
- D) सीव (Sieve) शेकर
💡 डिटेल Explanation:
लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट (Los Angeles Abrasion Test) एग्रीगेट्स की घिसाव प्रतिरोधक क्षमता (Resistance to wear) मापने के लिए सबसे आम परीक्षण है। इसमें पत्थरों के नमूने को एक स्टील के ड्रम में लोहे के गोलों (Steel balls) के साथ घुमाया जाता है। घर्षण के कारण पत्थरों के वजन में होने वाली कमी ही उनकी एब्रेशन वैल्यू होती है।
लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट (Los Angeles Abrasion Test) एग्रीगेट्स की घिसाव प्रतिरोधक क्षमता (Resistance to wear) मापने के लिए सबसे आम परीक्षण है। इसमें पत्थरों के नमूने को एक स्टील के ड्रम में लोहे के गोलों (Steel balls) के साथ घुमाया जाता है। घर्षण के कारण पत्थरों के वजन में होने वाली कमी ही उनकी एब्रेशन वैल्यू होती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 73 (Q361 - Q365)
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Q361: बहते हुए पानी (Running water) या पानी के नीचे (Underwater) निर्माण कार्यों के लिए आमतौर पर किस प्रकार के सीमेंट का उपयोग किया जाता है?
- A) साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC)
- B) रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (Rapid Hardening Cement)
- ✅ C) क्विक सेटिंग सीमेंट (Quick Setting Cement) (सही उत्तर)
- D) लो हीट सीमेंट (Low Heat Cement)
💡 डिटेल Explanation:
क्विक सेटिंग सीमेंट (Quick Setting Cement) बहुत तेजी से जमता है (इसका प्रारंभिक जमाव काल केवल 5 मिनट और अंतिम जमाव काल 30 मिनट होता है)। इसे बनाने के लिए सीमेंट में एल्युमीनियम सल्फेट मिलाया जाता है और जिप्सम की मात्रा कम कर दी जाती है। यह पानी के नीचे कंक्रीट डालने के लिए आदर्श है, क्योंकि यह पानी में बहने से पहले ही जम (Set) जाता है।
क्विक सेटिंग सीमेंट (Quick Setting Cement) बहुत तेजी से जमता है (इसका प्रारंभिक जमाव काल केवल 5 मिनट और अंतिम जमाव काल 30 मिनट होता है)। इसे बनाने के लिए सीमेंट में एल्युमीनियम सल्फेट मिलाया जाता है और जिप्सम की मात्रा कम कर दी जाती है। यह पानी के नीचे कंक्रीट डालने के लिए आदर्श है, क्योंकि यह पानी में बहने से पहले ही जम (Set) जाता है।
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Q362: भारतीय मानक (IS Code 1077) के अनुसार, 'द्वितीय श्रेणी की ईंट' (Second Class Brick) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Minimum Compressive Strength) कितनी होती है?
- A) 3.5 N/mm² (35 kg/cm²)
- ✅ B) 7.0 N/mm² (70 kg/cm²) (सही उत्तर)
- C) 10.5 N/mm² (105 kg/cm²)
- D) 14.0 N/mm² (140 kg/cm²)
💡 डिटेल Explanation:
ईंटों को उनकी संपीडन सामर्थ्य के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है: प्रथम श्रेणी (First class) के लिए यह न्यूनतम 10.5 N/mm² है, द्वितीय श्रेणी (Second class) के लिए न्यूनतम 7.0 N/mm² है, और सामान्य चिनाई वाली ईंटों (Minimum standard) के लिए 3.5 N/mm² होती है।
ईंटों को उनकी संपीडन सामर्थ्य के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है: प्रथम श्रेणी (First class) के लिए यह न्यूनतम 10.5 N/mm² है, द्वितीय श्रेणी (Second class) के लिए न्यूनतम 7.0 N/mm² है, और सामान्य चिनाई वाली ईंटों (Minimum standard) के लिए 3.5 N/mm² होती है।
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Q363: व्यावसायिक रूप से 'प्लाईवुड' (Plywood) सामान्यतः किस मोटाई (Thickness) की रेंज में उपलब्ध होता है?
- A) 1 mm से 2 mm
- ✅ B) 3 mm से 25 mm (सही उत्तर)
- C) 30 mm से 50 mm
- D) 50 mm से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड को विनियर (Veneers) की विषम संख्या (Odd numbers जैसे 3, 5, 7, 9, 11) की परतों को चिपकाकर बनाया जाता है। व्यावसायिक (Commercial) उपयोग के लिए इसकी मोटाई 3 mm (3-ply) से शुरू होकर 25 mm (मल्टी-प्लाई) तक होती है। इसका उपयोग दरवाजे, फर्नीचर और शटरिंग में किया जाता है।
प्लाईवुड को विनियर (Veneers) की विषम संख्या (Odd numbers जैसे 3, 5, 7, 9, 11) की परतों को चिपकाकर बनाया जाता है। व्यावसायिक (Commercial) उपयोग के लिए इसकी मोटाई 3 mm (3-ply) से शुरू होकर 25 mm (मल्टी-प्लाई) तक होती है। इसका उपयोग दरवाजे, फर्नीचर और शटरिंग में किया जाता है।
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Q364: वार्निश (Varnish) बनाने में 'कोपल' (Copal) नामक सामग्री का उपयोग किस रूप में किया जाता है?
- A) ड्रायर (Drier)
- B) थिनर (Thinner)
- ✅ C) बेस / रेजिन (Base / Resin) (सही उत्तर)
- D) पिगमेंट (Pigment)
💡 डिटेल Explanation:
वार्निश में कोई पिगमेंट (रंग) नहीं होता, यह लकड़ी को चमकदार और पारदर्शी फिनिश देने के लिए उपयोग होता है। कोपल (Copal) एक बहुत ही कठोर प्राकृतिक रेजिन (Resin) है, जो ऑयल वार्निश में 'बेस' (Solid Base) का काम करता है। इसे अलसी के तेल (Linseed oil) में पिघलाकर मिलाया जाता है, जिससे अत्यधिक टिकाऊ और चमकदार सतह प्राप्त होती है।
वार्निश में कोई पिगमेंट (रंग) नहीं होता, यह लकड़ी को चमकदार और पारदर्शी फिनिश देने के लिए उपयोग होता है। कोपल (Copal) एक बहुत ही कठोर प्राकृतिक रेजिन (Resin) है, जो ऑयल वार्निश में 'बेस' (Solid Base) का काम करता है। इसे अलसी के तेल (Linseed oil) में पिघलाकर मिलाया जाता है, जिससे अत्यधिक टिकाऊ और चमकदार सतह प्राप्त होती है।
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Q365: 365 MCQ का माइलस्टोन (1 साल के दिनों के बराबर)! प्रश्न: रासायनिक वर्गीकरण (Chemical Classification) के अनुसार, 'सैंडस्टोन' (Sandstone - बलुआ पत्थर) मुख्य रूप से किस प्रकार की चट्टान है?
- ✅ A) सिलिसियस चट्टान (Siliceous rock) (सही उत्तर)
- B) आर्गिलेशियस चट्टान (Argillaceous rock)
- C) कैल्केरियस चट्टान (Calcareous rock)
- D) आग्नेय चट्टान (Igneous rock)
💡 डिटेल Explanation:
रासायनिक संरचना के आधार पर, सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) एक सिलिसियस चट्टान (Siliceous rock) है क्योंकि इसका मुख्य घटक 'सिलिका' (Silica - SiO₂) या रेत (Sand) होता है। यद्यपि भूवैज्ञानिक रूप से यह एक अवसादी (Sedimentary) चट्टान है। सिलिसियस चट्टानें बहुत कठोर और टिकाऊ होती हैं (जैसे ग्रेनाइट, क्वार्टजाइट और सैंडस्टोन)।
रासायनिक संरचना के आधार पर, सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) एक सिलिसियस चट्टान (Siliceous rock) है क्योंकि इसका मुख्य घटक 'सिलिका' (Silica - SiO₂) या रेत (Sand) होता है। यद्यपि भूवैज्ञानिक रूप से यह एक अवसादी (Sedimentary) चट्टान है। सिलिसियस चट्टानें बहुत कठोर और टिकाऊ होती हैं (जैसे ग्रेनाइट, क्वार्टजाइट और सैंडस्टोन)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 74 (Q366 - Q370)
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Q366: भारी कंक्रीट निर्माण (Mass Concreting) जैसे बांध (Dams) या भारी नींव के लिए कंक्रीट का अनुशंसित 'स्लंप' (Slump) मान कितना होना चाहिए?
- ✅ A) 25 से 50 mm (Low Workability) (सही उत्तर)
- B) 50 से 100 mm (Medium Workability)
- C) 100 से 150 mm (High Workability)
- D) 150 mm से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
भारी कंक्रीट संरचनाओं (Mass concrete) में बहुत अधिक कंक्रीट डाली जाती है। यदि पानी ज्यादा होगा, तो जलयोजन की ऊष्मा (Heat of hydration) और सिकुड़न (Shrinkage) के कारण दरारें पड़ सकती हैं। इसलिए इसमें बहुत कम पानी का उपयोग किया जाता है और इसे वाइब्रेटर से अच्छी तरह कॉम्पैक्ट किया जाता है। इसका आदर्श स्लंप 25 से 50 mm (निम्न सुकार्यता) होता है।
भारी कंक्रीट संरचनाओं (Mass concrete) में बहुत अधिक कंक्रीट डाली जाती है। यदि पानी ज्यादा होगा, तो जलयोजन की ऊष्मा (Heat of hydration) और सिकुड़न (Shrinkage) के कारण दरारें पड़ सकती हैं। इसलिए इसमें बहुत कम पानी का उपयोग किया जाता है और इसे वाइब्रेटर से अच्छी तरह कॉम्पैक्ट किया जाता है। इसका आदर्श स्लंप 25 से 50 mm (निम्न सुकार्यता) होता है।
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Q367: ईंट या पत्थर की चिनाई में 'पॉइंटिंग' (Pointing) कार्य के लिए सीमेंट और रेत (Cement : Sand) के मोर्टार का सामान्य अनुपात क्या होता है?
- A) 1:1 से 1:1.5
- ✅ B) 1:2 से 1:3 (सही उत्तर)
- C) 1:4 से 1:5
- D) 1:6 से 1:8
💡 डिटेल Explanation:
पॉइंटिंग (टीप करना) चिनाई के बाहरी जोड़ों (Joints) को मौसम के प्रभाव (बारिश, धूल) से बचाने और दीवार को सुंदर दिखाने के लिए की जाती है। क्योंकि बाहरी सतह को मजबूत होना चाहिए, इसलिए इसमें रिच मोर्टार (1:2 या 1:3) का उपयोग किया जाता है, जबकि सामान्य चिनाई 1:4 या 1:6 के अनुपात में की जाती है।
पॉइंटिंग (टीप करना) चिनाई के बाहरी जोड़ों (Joints) को मौसम के प्रभाव (बारिश, धूल) से बचाने और दीवार को सुंदर दिखाने के लिए की जाती है। क्योंकि बाहरी सतह को मजबूत होना चाहिए, इसलिए इसमें रिच मोर्टार (1:2 या 1:3) का उपयोग किया जाता है, जबकि सामान्य चिनाई 1:4 या 1:6 के अनुपात में की जाती है।
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Q368: इमारती लकड़ी (Timber) के सूखने के दौरान उसमें 'बोइंग' (Bowing) नामक दोष (Defect) उत्पन्न होने का क्या अर्थ है?
- A) लकड़ी के रेशों का बीच से फट जाना
- ✅ B) लकड़ी के तख्ते (Board) का उसकी लंबाई की दिशा (Longitudinally) में मुड़ जाना (सही उत्तर)
- C) लकड़ी के बोर्ड का उसकी चौड़ाई की दिशा (Transversely) में मुड़ना
- D) लकड़ी का ऐंठ जाना (Twisting)
💡 डिटेल Explanation:
सीजनिंग (Seasoning) के दौरान लकड़ी में असमान सिकुड़न (Unequal shrinkage) के कारण कई रूप बदल जाते हैं। जब लकड़ी का तख्ता (Board) अपनी लंबाई (Length) के अनुदिश एक धनुष (Bow) के आकार में मुड़ जाता है, तो इस दोष को 'बोइंग' (Bowing) कहते हैं। वहीं अगर यह चौड़ाई के अनुदिश मुड़ता है तो उसे 'कप' (Cupping) कहते हैं।
सीजनिंग (Seasoning) के दौरान लकड़ी में असमान सिकुड़न (Unequal shrinkage) के कारण कई रूप बदल जाते हैं। जब लकड़ी का तख्ता (Board) अपनी लंबाई (Length) के अनुदिश एक धनुष (Bow) के आकार में मुड़ जाता है, तो इस दोष को 'बोइंग' (Bowing) कहते हैं। वहीं अगर यह चौड़ाई के अनुदिश मुड़ता है तो उसे 'कप' (Cupping) कहते हैं।
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Q369: 'डिस्टेंपर' (Distemper) या वाटर पेंट्स में पिगमेंट को सतह पर फैलाने के लिए 'वाहन' (Vehicle / Liquid medium) के रूप में मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- B) तारपीन का तेल (Turpentine Oil)
- ✅ C) पानी (Water) (सही उत्तर)
- D) स्पिरिट (Spirit)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'वाहन' (Vehicle) वह तरल पदार्थ होता है जो पेंट के अन्य घटकों को घोलकर सतह पर लगाने योग्य बनाता है। ऑयल पेंट में यह अलसी का तेल होता है, जबकि डिस्टेंपर (Distemper) एक 'वाटर पेंट' है। इसलिए, डिस्टेंपर में चॉक (बेस) और साइज (बाइंडर) को मिलाने और फैलाने के लिए पानी (Water) का उपयोग वाहन के रूप में किया जाता है।
पेंट में 'वाहन' (Vehicle) वह तरल पदार्थ होता है जो पेंट के अन्य घटकों को घोलकर सतह पर लगाने योग्य बनाता है। ऑयल पेंट में यह अलसी का तेल होता है, जबकि डिस्टेंपर (Distemper) एक 'वाटर पेंट' है। इसलिए, डिस्टेंपर में चॉक (बेस) और साइज (बाइंडर) को मिलाने और फैलाने के लिए पानी (Water) का उपयोग वाहन के रूप में किया जाता है।
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Q370: 370 MCQ का पड़ाव पार! प्रश्न: निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले अच्छे 'ग्रेनाइट' (Granite) पत्थर का औसत विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) कितना होता है?
- A) 1.8 से 2.0
- B) 2.2 से 2.4
- ✅ C) 2.6 से 2.8 (सही उत्तर)
- D) 3.1 से 3.5
💡 डिटेल Explanation:
विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) किसी सामग्री के घनत्व और भारीपन को दर्शाता है। ग्रेनाइट एक बहुत सघन और भारी आग्नेय चट्टान (Igneous rock) है। एक अच्छे ग्रेनाइट पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व 2.6 से 2.8 के बीच (औसतन 2.65) होता है। यही कारण है कि यह भारी संरचनात्मक कार्यों, बांधों, और पुलों के पियर्स में अत्यधिक उपयोग होता है।
विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) किसी सामग्री के घनत्व और भारीपन को दर्शाता है। ग्रेनाइट एक बहुत सघन और भारी आग्नेय चट्टान (Igneous rock) है। एक अच्छे ग्रेनाइट पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व 2.6 से 2.8 के बीच (औसतन 2.65) होता है। यही कारण है कि यह भारी संरचनात्मक कार्यों, बांधों, और पुलों के पियर्स में अत्यधिक उपयोग होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 75 (Q371 - Q375)
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Q371: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए 'ले-चेटेलियर' (Le-Chatelier) परीक्षण द्वारा मापी गई 'अनसाउंडनेस' (Unsoundness / फैलाव) की अधिकतम अनुमेय सीमा कितनी होती है?
- A) 5 mm
- ✅ B) 10 mm (सही उत्तर)
- C) 15 mm
- D) 20 mm
💡 डिटेल Explanation:
ले-चेटेलियर उपकरण का उपयोग सीमेंट में 'स्वतंत्र चूने' (Free Lime) के कारण होने वाले फैलाव (Soundness) को मापने के लिए किया जाता है। भारतीय मानकों (IS Code) के अनुसार, OPC, PPC और रैपिड हार्डनिंग सीमेंट के लिए यह फैलाव 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह 10 mm से अधिक है, तो सीमेंट अमान्य (Unsound) माना जाता है।
ले-चेटेलियर उपकरण का उपयोग सीमेंट में 'स्वतंत्र चूने' (Free Lime) के कारण होने वाले फैलाव (Soundness) को मापने के लिए किया जाता है। भारतीय मानकों (IS Code) के अनुसार, OPC, PPC और रैपिड हार्डनिंग सीमेंट के लिए यह फैलाव 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह 10 mm से अधिक है, तो सीमेंट अमान्य (Unsound) माना जाता है।
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Q372: ईंटों को भट्ठे (Kiln) में पकाने के दौरान, यदि ईंटें बहुत अधिक तापमान पर पक जाती हैं और पिघलकर अपना आकार (Shape) खो देती हैं, तो उन्हें क्या कहा जाता है?
- A) पिल्ला ईंटें (Pila Bricks)
- B) प्रथम श्रेणी की ईंटें (First Class Bricks)
- ✅ C) झामा ईंटें (Jhama Bricks / Overburnt Bricks) (सही उत्तर)
- D) चफ्स (Chuffs)
💡 डिटेल Explanation:
अत्यधिक पकी हुई (Overburnt) ईंटों को 'झामा ईंटें' (Jhama Bricks) कहा जाता है। ये ईंटें बहुत कठोर और गहरे रंग की होती हैं, लेकिन आकार में विकृत (Distorted) हो जाने के कारण इनका उपयोग सामान्य चिनाई (Masonry) में नहीं किया जा सकता। इन्हें तोड़कर कंक्रीट या सड़क की नींव (Foundation) में गिट्टी (Aggregate) के रूप में उपयोग किया जाता है।
अत्यधिक पकी हुई (Overburnt) ईंटों को 'झामा ईंटें' (Jhama Bricks) कहा जाता है। ये ईंटें बहुत कठोर और गहरे रंग की होती हैं, लेकिन आकार में विकृत (Distorted) हो जाने के कारण इनका उपयोग सामान्य चिनाई (Masonry) में नहीं किया जा सकता। इन्हें तोड़कर कंक्रीट या सड़क की नींव (Foundation) में गिट्टी (Aggregate) के रूप में उपयोग किया जाता है।
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Q373: 'प्लाईवुड' (Plywood) के निर्माण में उपयोग की जाने वाली लकड़ी की पतली परतों (Veneers) की सामान्य मोटाई (Thickness) कितनी होती है?
- A) 0.1 mm से कम
- ✅ B) 0.4 mm से 6 mm (सही उत्तर)
- C) 10 mm से 15 mm
- D) 20 mm से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड बनाने के लिए लकड़ी के लट्ठों (Logs) को छीलकर बहुत पतली परतें निकाली जाती हैं, जिन्हें 'विनियर' (Veneer) कहते हैं। इन विनियर की मोटाई सामान्यतः 0.4 mm से लेकर 6 mm तक होती है। इन्हीं विनियर को एक-दूसरे के समकोण पर रखकर (Cross-graining) ग्लू (गोंद) से चिपकाया जाता है।
प्लाईवुड बनाने के लिए लकड़ी के लट्ठों (Logs) को छीलकर बहुत पतली परतें निकाली जाती हैं, जिन्हें 'विनियर' (Veneer) कहते हैं। इन विनियर की मोटाई सामान्यतः 0.4 mm से लेकर 6 mm तक होती है। इन्हीं विनियर को एक-दूसरे के समकोण पर रखकर (Cross-graining) ग्लू (गोंद) से चिपकाया जाता है।
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Q374: पेंटिंग कार्य में, 'प्राइमर कोट' (Primer coat) के बाद और अंतिम 'फिनिशिंग कोट' (Finishing coat) से ठीक पहले लगाए जाने वाले पेंट की परत को क्या कहा जाता है?
- A) बेस कोट (Base coat)
- ✅ B) अंडरकोट (Undercoat) (सही उत्तर)
- C) ग्लॉस कोट (Gloss coat)
- D) सीलर (Sealer)
💡 डिटेल Explanation:
पेंटिंग की प्रक्रिया में तीन मुख्य चरण होते हैं। सबसे पहले सतह को सील करने के लिए 'प्राइमर' लगाया जाता है। उसके बाद पेंट की अच्छी मोटाई (Build) और सही रंग का आधार बनाने के लिए 'अंडरकोट' (Undercoat) लगाया जाता है। सबसे अंत में चमक और सुरक्षा के लिए अंतिम कोट यानी 'फिनिशिंग कोट' लगाया जाता है।
पेंटिंग की प्रक्रिया में तीन मुख्य चरण होते हैं। सबसे पहले सतह को सील करने के लिए 'प्राइमर' लगाया जाता है। उसके बाद पेंट की अच्छी मोटाई (Build) और सही रंग का आधार बनाने के लिए 'अंडरकोट' (Undercoat) लगाया जाता है। सबसे अंत में चमक और सुरक्षा के लिए अंतिम कोट यानी 'फिनिशिंग कोट' लगाया जाता है।
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Q375: 375 MCQ (सीरीज़ का आधा पड़ाव) पार! 🎉 प्रश्न: भूवैज्ञानिक (Geological) वर्गीकरण के अनुसार 'मार्बल' (Marble - संगमरमर) किस प्रकार की चट्टान का उदाहरण है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous Rock)
- B) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
- ✅ C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) (सही उत्तर)
- D) रासायनिक चट्टान (Chemical Rock)
💡 डिटेल Explanation:
मार्बल (संगमरमर) एक 'कायांतरित चट्टान' (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी (Heat) और दबाव (Pressure) के कारण अवसादी चट्टान 'लाइमस्टोन' (Limestone / चूना पत्थर) के प्राकृतिक रूपांतरण से होता है। यह एक उच्च कोटि का सजावटी और कीमती पत्थर है।
मार्बल (संगमरमर) एक 'कायांतरित चट्टान' (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी (Heat) और दबाव (Pressure) के कारण अवसादी चट्टान 'लाइमस्टोन' (Limestone / चूना पत्थर) के प्राकृतिक रूपांतरण से होता है। यह एक उच्च कोटि का सजावटी और कीमती पत्थर है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 76 (Q376 - Q380)
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Q376: भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का न्यूनतम 'विशिष्ट सतह क्षेत्रफल' (Specific Surface Area) कितना होना चाहिए?
- ✅ A) 2250 cm²/gm (या 225 m²/kg) (सही उत्तर)
- B) 3000 cm²/gm
- C) 2500 cm²/gm
- D) 3250 cm²/gm
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) को उसके विशिष्ट सतह क्षेत्रफल द्वारा मापा जाता है। 'ब्लेन एयर परमीएबिलिटी टेस्ट' (Blaine's Air Permeability Test) के अनुसार OPC के लिए यह 2250 cm²/gm से कम नहीं होना चाहिए। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) के लिए यह 3250 cm²/gm होता है।
सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) को उसके विशिष्ट सतह क्षेत्रफल द्वारा मापा जाता है। 'ब्लेन एयर परमीएबिलिटी टेस्ट' (Blaine's Air Permeability Test) के अनुसार OPC के लिए यह 2250 cm²/gm से कम नहीं होना चाहिए। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) के लिए यह 3250 cm²/gm होता है।
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Q377: IS 1077 के अनुसार, 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (First Class Brick) को 24 घंटे तक पानी में डुबो कर रखने पर, उसका जल अवशोषण (Water Absorption) उसके सूखे वजन के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 15%
- ✅ B) 20% (सही उत्तर)
- C) 22%
- D) 25%
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की गुणवत्ता उसकी जल अवशोषण क्षमता पर निर्भर करती है। प्रथम श्रेणी की ईंटों के लिए यह 20%, द्वितीय श्रेणी के लिए 22%, और तृतीय श्रेणी (Third class) के लिए 25% से अधिक नहीं होना चाहिए। अत्यधिक पानी सोखने वाली ईंटें कमजोर होती हैं और उनमें एफ्लोरेसेंस (Efflorescence) का खतरा रहता है।
ईंट की गुणवत्ता उसकी जल अवशोषण क्षमता पर निर्भर करती है। प्रथम श्रेणी की ईंटों के लिए यह 20%, द्वितीय श्रेणी के लिए 22%, और तृतीय श्रेणी (Third class) के लिए 25% से अधिक नहीं होना चाहिए। अत्यधिक पानी सोखने वाली ईंटें कमजोर होती हैं और उनमें एफ्लोरेसेंस (Efflorescence) का खतरा रहता है।
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Q378: इमारती लकड़ी (Timber) में 'फफूंदी' (Fungus) लगने और उसे सड़ाने (Decay) के लिए लकड़ी में नमी (Moisture content) कम से कम कितने प्रतिशत होनी चाहिए?
- A) 5%
- B) 12%
- ✅ C) 20% (सही उत्तर)
- D) 35%
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी में फफूंदी (Fungi) केवल तभी पनप सकती है जब लकड़ी में नमी की मात्रा 20% या उससे अधिक हो और उसे पर्याप्त हवा और गर्मी मिले। यदि लकड़ी को सुखाकर (Seasoning द्वारा) उसमें नमी की मात्रा 20% से नीचे (आदर्श रूप से 10-12%) ला दी जाए, तो वह फफूंदी के हमले से पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।
लकड़ी में फफूंदी (Fungi) केवल तभी पनप सकती है जब लकड़ी में नमी की मात्रा 20% या उससे अधिक हो और उसे पर्याप्त हवा और गर्मी मिले। यदि लकड़ी को सुखाकर (Seasoning द्वारा) उसमें नमी की मात्रा 20% से नीचे (आदर्श रूप से 10-12%) ला दी जाए, तो वह फफूंदी के हमले से पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2014 & 2017, LMRC JE, RRB JE
Q379: पेंट में 'तारपीन का तेल' (Turpentine Oil) मुख्य रूप से किस रूप में कार्य करता है?
- A) बेस (Base)
- B) पिगमेंट (Pigment)
- ✅ C) थिनर / सॉल्वेंट (Thinner / Solvent) (सही उत्तर)
- D) ड्रायर (Drier)
💡 डिटेल Explanation:
तारपीन का तेल (Turpentine Oil) पेंट में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला थिनर (विलायक) है। यह पेंट की चिपचिपाहट (Viscosity) को कम करके उसे पतला करता है, जिससे पेंट सतह पर आसानी से ब्रश द्वारा फैलाया जा सकता है। पेंट लगाने के बाद यह तेल वाष्पित (Evaporate) हो जाता है।
तारपीन का तेल (Turpentine Oil) पेंट में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला थिनर (विलायक) है। यह पेंट की चिपचिपाहट (Viscosity) को कम करके उसे पतला करता है, जिससे पेंट सतह पर आसानी से ब्रश द्वारा फैलाया जा सकता है। पेंट लगाने के बाद यह तेल वाष्पित (Evaporate) हो जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q380: 380 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: कंक्रीट की 'तराई' (Curing) करने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) कंक्रीट का रंग निखारना
- ✅ B) जलयोजन (Hydration) के लिए नमी बनाए रखना और वाष्पीकरण को रोकना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट का वजन कम करना
- D) कंक्रीट की सेटिंग को धीमा करना
💡 डिटेल Explanation:
तराई (Curing) का मुख्य उद्देश्य कंक्रीट के भीतर आवश्यक नमी (Moisture) बनाए रखना है ताकि सीमेंट का जलयोजन (Hydration) ठीक से पूरा हो सके। इससे कंक्रीट अपनी अधिकतम सामर्थ्य (Strength) प्राप्त करती है, अधिक टिकाऊ (Durable) बनती है और पानी के जल्दी उड़ने से होने वाली दरारें (Shrinkage cracks) भी रुकती हैं।
तराई (Curing) का मुख्य उद्देश्य कंक्रीट के भीतर आवश्यक नमी (Moisture) बनाए रखना है ताकि सीमेंट का जलयोजन (Hydration) ठीक से पूरा हो सके। इससे कंक्रीट अपनी अधिकतम सामर्थ्य (Strength) प्राप्त करती है, अधिक टिकाऊ (Durable) बनती है और पानी के जल्दी उड़ने से होने वाली दरारें (Shrinkage cracks) भी रुकती हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 77 (Q381 - Q385)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q381: सीमेंट में 'फ्लैश सेटिंग' (Flash Setting - पानी मिलाते ही तुरंत जमना) के लिए मुख्य रूप से कौन सा 'बोग्स कंपाउंड' (Bogue's Compound) जिम्मेदार होता है?
- A) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S)
- B) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- ✅ C) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) (सही उत्तर)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) पानी के साथ सबसे तेज़ी से प्रतिक्रिया करता है, जिससे बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा (Heat of hydration) निकलती है और सीमेंट तुरंत जमने (Flash set) लगता है। इस त्वरित जमाव को रोकने और काम करने का समय (Setting time) बढ़ाने के लिए ही सीमेंट पीसते समय उसमें 2-3% जिप्सम (Gypsum) मिलाया जाता है।
ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) पानी के साथ सबसे तेज़ी से प्रतिक्रिया करता है, जिससे बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा (Heat of hydration) निकलती है और सीमेंट तुरंत जमने (Flash set) लगता है। इस त्वरित जमाव को रोकने और काम करने का समय (Setting time) बढ़ाने के लिए ही सीमेंट पीसते समय उसमें 2-3% जिप्सम (Gypsum) मिलाया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam
Q382: भारतीय मानक (IS 1077) के अनुसार, एक 'मॉड्यूलर ईंट' (Standard/Modular Brick) का वास्तविक मानक आकार (Standard Size) क्या होता है?
- ✅ A) 19 cm × 9 cm × 9 cm (सही उत्तर)
- B) 20 cm × 10 cm × 10 cm
- C) 21 cm × 10 cm × 10 cm
- D) 19 cm × 19 cm × 9 cm
💡 डिटेल Explanation:
भारत में एक मॉड्यूलर ईंट का वास्तविक आकार 19 cm x 9 cm x 9 cm होता है। चिनाई करते समय मोर्टार (मसाला) की मोटाई को जोड़ने के बाद इसे 'नाममात्र आकार' (Nominal size) कहा जाता है, जो 20 cm x 10 cm x 10 cm हो जाता है। (पारंपरिक ईंटों का आकार इससे अलग होता है)।
भारत में एक मॉड्यूलर ईंट का वास्तविक आकार 19 cm x 9 cm x 9 cm होता है। चिनाई करते समय मोर्टार (मसाला) की मोटाई को जोड़ने के बाद इसे 'नाममात्र आकार' (Nominal size) कहा जाता है, जो 20 cm x 10 cm x 10 cm हो जाता है। (पारंपरिक ईंटों का आकार इससे अलग होता है)।
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Q383: एक वृक्ष के तने (Cross-section) में सबसे अंदर के केंद्रीय भाग (Central part) को तकनीकी रूप से क्या कहा जाता है?
- A) हार्टवुड (Heartwood)
- B) सैपवुड (Sapwood)
- ✅ C) पिथ या मज्जा (Pith / Medulla) (सही उत्तर)
- D) कैंबियम लेयर (Cambium layer)
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ के तने का सबसे भीतरी और केंद्रीय हिस्सा पिथ (Pith) या मज्जा कहलाता है। जब पौधा छोटा होता है, तो पिथ उसे पोषण देता है, लेकिन पेड़ के बड़ा होने पर यह हिस्सा पूरी तरह से मृत और अक्सर सड़ने (Decay) के प्रति संवेदनशील हो जाता है। पिथ के चारों ओर की मृत लकड़ी को 'हार्टवुड' कहते हैं, जो इंजीनियरिंग के लिए सबसे मजबूत हिस्सा है।
पेड़ के तने का सबसे भीतरी और केंद्रीय हिस्सा पिथ (Pith) या मज्जा कहलाता है। जब पौधा छोटा होता है, तो पिथ उसे पोषण देता है, लेकिन पेड़ के बड़ा होने पर यह हिस्सा पूरी तरह से मृत और अक्सर सड़ने (Decay) के प्रति संवेदनशील हो जाता है। पिथ के चारों ओर की मृत लकड़ी को 'हार्टवुड' कहते हैं, जो इंजीनियरिंग के लिए सबसे मजबूत हिस्सा है।
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Q384: पेंट की गई सतह पर पेंट के सूखने के बाद बारीक 'पाउडर' (Powder) बनकर झड़ने या उड़ने के दोष (Defect) को क्या कहा जाता है?
- A) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- B) फ्लैकिंग (Flaking)
- ✅ C) चॉकिंग (Chalking) (सही उत्तर)
- D) ब्लूमिंग (Blooming)
💡 डिटेल Explanation:
चॉकिंग (Chalking) वह दोष है जिसमें पेंट की सतह (Binder) मौसम और सूर्य की यूवी (UV) किरणों के प्रभाव से नष्ट हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पेंट का पिगमेंट (रंग) बारीक पाउडर के रूप में सतह पर आ जाता है, जो हाथ लगाने पर चॉक की तरह लगता है। इसे रोकने के लिए पेंट में पर्याप्त मात्रा में तेल (Vehicle) होना चाहिए।
चॉकिंग (Chalking) वह दोष है जिसमें पेंट की सतह (Binder) मौसम और सूर्य की यूवी (UV) किरणों के प्रभाव से नष्ट हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पेंट का पिगमेंट (रंग) बारीक पाउडर के रूप में सतह पर आ जाता है, जो हाथ लगाने पर चॉक की तरह लगता है। इसे रोकने के लिए पेंट में पर्याप्त मात्रा में तेल (Vehicle) होना चाहिए।
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Q385: 385 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पत्थरों और खनिजों के परीक्षण में 'मोह्स स्केल' (Mohs Scale) का उपयोग किस गुण (Property) को मापने के लिए किया जाता है?
- A) टफनेस (Toughness - चिमड़पन)
- ✅ B) कठोरता (Hardness - खरोंच का प्रतिरोध) (सही उत्तर)
- C) संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength)
- D) जल अवशोषण (Water absorption)
💡 डिटेल Explanation:
मोह्स स्केल (Mohs Scale of Hardness) का उपयोग खनिजों और पत्थरों की 'कठोरता' (खरोंच लगने के प्रति प्रतिरोध) को मापने के लिए किया जाता है। इस स्केल में 1 से 10 तक नंबर होते हैं। सबसे नरम खनिज 'टैल्क' (Talc) का नंबर 1 है, जबकि सबसे कठोर 'हीरा' (Diamond) का नंबर 10 है। एक अच्छे भवन निर्माण पत्थर की कठोरता आमतौर पर 7 से अधिक होनी चाहिए।
मोह्स स्केल (Mohs Scale of Hardness) का उपयोग खनिजों और पत्थरों की 'कठोरता' (खरोंच लगने के प्रति प्रतिरोध) को मापने के लिए किया जाता है। इस स्केल में 1 से 10 तक नंबर होते हैं। सबसे नरम खनिज 'टैल्क' (Talc) का नंबर 1 है, जबकि सबसे कठोर 'हीरा' (Diamond) का नंबर 10 है। एक अच्छे भवन निर्माण पत्थर की कठोरता आमतौर पर 7 से अधिक होनी चाहिए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 78 (Q386 - Q390)
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Q386: कंक्रीट में 'एयर-एंट्रेनिंग एजेंट' (Air-entraining agents) मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A) कंक्रीट की ताकत (Strength) बढ़ाना
- B) जमने का समय (Setting time) कम करना
- ✅ C) सुकार्यता (Workability) और 'फ्रीजिंग-थॉविंग' (Freezing-Thawing) के प्रति प्रतिरोध बढ़ाना (सही उत्तर)
- D) कंक्रीट का घनत्व बढ़ाना
💡 डिटेल Explanation:
एयर-एंट्रेनिंग एजेंट कंक्रीट के अंदर हवा के लाखों सूक्ष्म बुलबुले (Microscopic bubbles) बना देते हैं। ये बुलबुले कंक्रीट में एक 'लुब्रिकेंट' (Lubricant) का काम करते हैं जिससे सुकार्यता (Workability) बढ़ती है। साथ ही, ठंडे मौसम में जब कंक्रीट के अंदर का पानी जमता है, तो ये बुलबुले बर्फ को फैलने के लिए जगह देते हैं, जिससे कंक्रीट में दरारें नहीं पड़तीं।
एयर-एंट्रेनिंग एजेंट कंक्रीट के अंदर हवा के लाखों सूक्ष्म बुलबुले (Microscopic bubbles) बना देते हैं। ये बुलबुले कंक्रीट में एक 'लुब्रिकेंट' (Lubricant) का काम करते हैं जिससे सुकार्यता (Workability) बढ़ती है। साथ ही, ठंडे मौसम में जब कंक्रीट के अंदर का पानी जमता है, तो ये बुलबुले बर्फ को फैलने के लिए जगह देते हैं, जिससे कंक्रीट में दरारें नहीं पड़तीं।
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Q387: ईंट की चिनाई में 'क्लोजर' (Closer) शब्द का क्या अर्थ है?
- A) दो ईंटों के बीच का मसाला
- ✅ B) ईंट का कटा हुआ टुकड़ा जिसका उपयोग वर्टिकल जॉइंट्स को तोड़ने के लिए किया जाता है (सही उत्तर)
- C) दीवार को सहारा देने वाली बल्ली
- D) ईंट काटने का उपकरण
💡 डिटेल Explanation:
क्लोजर (जैसे क्वीन क्लोजर या किंग क्लोजर) ईंट के विशेष रूप से काटे गए टुकड़े होते हैं। इन्हें चिनाई के कोनों (Quoins) या सिरों पर रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि एक परत (Course) के ऊर्ध्वाधर जोड़ (Vertical joints) दूसरी परत के जोड़ों के ठीक ऊपर न आएं, जिससे दीवार की मजबूती (Bonding) बनी रहे।
क्लोजर (जैसे क्वीन क्लोजर या किंग क्लोजर) ईंट के विशेष रूप से काटे गए टुकड़े होते हैं। इन्हें चिनाई के कोनों (Quoins) या सिरों पर रखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि एक परत (Course) के ऊर्ध्वाधर जोड़ (Vertical joints) दूसरी परत के जोड़ों के ठीक ऊपर न आएं, जिससे दीवार की मजबूती (Bonding) बनी रहे।
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Q388: किसी वृक्ष (Tree) की आयु (Age) का अनुमान लगाने का सबसे सटीक तरीका क्या है?
- A) पेड़ की ऊंचाई नापना
- B) तने की मोटाई (Girth) मापना
- ✅ C) तने के अनुप्रस्थ काट (Cross-section) में 'वार्षिक वलय' (Annual Rings) को गिनना (सही उत्तर)
- D) पेड़ की छाल का रंग देखना
💡 डिटेल Explanation:
बहिर्जात वृक्षों (Exogenous trees) के तने में हर साल कैंबियम लेयर (Cambium layer) लकड़ी की एक नई परत या घेरा बनाती है, जिसे 'एनुअल रिंग' (Annual Ring) या वार्षिक वलय कहते हैं। जब पेड़ को काटा जाता है, तो इन वलयों की संख्या को गिनकर पेड़ की आयु (Age) का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।
बहिर्जात वृक्षों (Exogenous trees) के तने में हर साल कैंबियम लेयर (Cambium layer) लकड़ी की एक नई परत या घेरा बनाती है, जिसे 'एनुअल रिंग' (Annual Ring) या वार्षिक वलय कहते हैं। जब पेड़ को काटा जाता है, तो इन वलयों की संख्या को गिनकर पेड़ की आयु (Age) का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।
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Q389: ऑयल पेंट में 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) मुख्य रूप से किस रूप में कार्य करता है?
- A) बेस (Base)
- B) थिनर (Thinner)
- C) ड्रायर (Drier)
- ✅ D) वाहन / बाइंडर (Vehicle / Binder) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
अलसी का तेल (Linseed oil) पेंट में सबसे आम 'वाहन' (Vehicle) या 'बाइंडर' (Binder) है। यह पेंट के बेस और पिगमेंट (रंग) को आपस में बांध कर रखता है और उन्हें सतह पर फैलने में मदद करता है। जब यह हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में आता है, तो सूखकर एक कठोर और जलरोधी फिल्म (Film) बना लेता है।
अलसी का तेल (Linseed oil) पेंट में सबसे आम 'वाहन' (Vehicle) या 'बाइंडर' (Binder) है। यह पेंट के बेस और पिगमेंट (रंग) को आपस में बांध कर रखता है और उन्हें सतह पर फैलने में मदद करता है। जब यह हवा (ऑक्सीजन) के संपर्क में आता है, तो सूखकर एक कठोर और जलरोधी फिल्म (Film) बना लेता है।
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Q390: 390 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: 'स्लेट' (Slate) और 'मार्बल' (Marble) किस प्रकार की चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं?
- A) आग्नेय चट्टानें (Igneous rocks)
- B) अवसादी चट्टानें (Sedimentary rocks)
- ✅ C) कायांतरित चट्टानें (Metamorphic rocks) (सही उत्तर)
- D) ज्वालामुखीय चट्टानें (Volcanic rocks)
💡 डिटेल Explanation:
स्लेट (जो अवसादी चट्टान 'शेल' से बनता है) और मार्बल (जो 'लाइमस्टोन' से बनता है) दोनों ही कायांतरित (Metamorphic) चट्टानें हैं। इनका निर्माण पृथ्वी के अंदर मौजूद चट्टानों पर अत्यधिक दबाव (Pressure) और तापमान (Heat) के कारण उनके रासायनिक और भौतिक गुणों में बदलाव (रूप परिवर्तन) से होता है।
स्लेट (जो अवसादी चट्टान 'शेल' से बनता है) और मार्बल (जो 'लाइमस्टोन' से बनता है) दोनों ही कायांतरित (Metamorphic) चट्टानें हैं। इनका निर्माण पृथ्वी के अंदर मौजूद चट्टानों पर अत्यधिक दबाव (Pressure) और तापमान (Heat) के कारण उनके रासायनिक और भौतिक गुणों में बदलाव (रूप परिवर्तन) से होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 79 (Q391 - Q395)
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Q391: कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) मापने के लिए 'कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट' (Compacting Factor Test) का उपयोग मुख्य रूप से किस प्रकार की कंक्रीट के लिए किया जाता है?
- A) बहुत अधिक सुकार्यता वाली (High workability)
- B) मध्यम सुकार्यता वाली (Medium workability)
- ✅ C) कम सुकार्यता वाली (Low workability) (सही उत्तर)
- D) अत्यधिक गीली कंक्रीट (Flowing concrete)
💡 डिटेल Explanation:
स्लंप टेस्ट मध्यम से उच्च सुकार्यता के लिए अच्छा होता है, लेकिन जब कंक्रीट बहुत सूखी या कम सुकार्यता (Low workability) वाली होती है, तो स्लंप टेस्ट सटीक परिणाम नहीं देता। ऐसी स्थिति में 'कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट' को सबसे उपयुक्त और अधिक सटीक (More accurate) माना जाता है।
स्लंप टेस्ट मध्यम से उच्च सुकार्यता के लिए अच्छा होता है, लेकिन जब कंक्रीट बहुत सूखी या कम सुकार्यता (Low workability) वाली होती है, तो स्लंप टेस्ट सटीक परिणाम नहीं देता। ऐसी स्थिति में 'कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट' को सबसे उपयुक्त और अधिक सटीक (More accurate) माना जाता है।
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Q392: ईंट की चिनाई में 'क्वीन क्लोजर' (Queen Closer) कैसे प्राप्त किया जाता है?
- A) ईंट को चौड़ाई के समानांतर आधा काटकर
- ✅ B) ईंट को लंबाई के समानांतर बीच से आधा काटकर (Half longitudinally) (सही उत्तर)
- C) ईंट का एक कोना काटकर
- D) ईंट को तिरछा (Diagonally) काटकर
💡 डिटेल Explanation:
जब एक पूरी ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर (Longitudinally) बीच से दो बराबर हिस्सों में काटा जाता है, तो प्राप्त टुकड़े को 'क्वीन क्लोजर' (Queen Closer) कहते हैं। इसका उपयोग ईंट की चिनाई में कोनों (Quoins) पर वर्टिकल जॉइंट्स को एक सीध में आने से रोकने के लिए किया जाता है ताकि दीवार की मजबूती बनी रहे।
जब एक पूरी ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर (Longitudinally) बीच से दो बराबर हिस्सों में काटा जाता है, तो प्राप्त टुकड़े को 'क्वीन क्लोजर' (Queen Closer) कहते हैं। इसका उपयोग ईंट की चिनाई में कोनों (Quoins) पर वर्टिकल जॉइंट्स को एक सीध में आने से रोकने के लिए किया जाता है ताकि दीवार की मजबूती बनी रहे।
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Q393: इमारती लकड़ी (Timber) में 'हार्ट शेक' (Heart Shake) नामक दोष (Defect) की क्या पहचान है?
- ✅ A) ये दरारें केंद्र (Pith) से शुरू होकर बाहर (Sapwood) की ओर जाती हैं (सही उत्तर)
- B) ये दरारें छाल (Bark) से शुरू होकर केंद्र की ओर जाती हैं
- C) ये वार्षिक वलयों (Annual rings) के समानांतर गोल होती हैं
- D) ये लकड़ी के रेशों को पूरी तरह मरोड़ देती हैं
💡 डिटेल Explanation:
हार्ट शेक (Heart Shake) वे दरारें (Cracks) होती हैं जो पेड़ के केंद्र (मज्जा या Pith) से शुरू होती हैं और बाहर की ओर फैलती हैं। ये दरारें केंद्र में अधिक चौड़ी और बाहर की तरफ संकरी होती हैं। यह आमतौर पर पेड़ के बहुत अधिक पुराना होने (Over-maturity) या केंद्र के हिस्से के सूखने के कारण उत्पन्न होता है।
हार्ट शेक (Heart Shake) वे दरारें (Cracks) होती हैं जो पेड़ के केंद्र (मज्जा या Pith) से शुरू होती हैं और बाहर की ओर फैलती हैं। ये दरारें केंद्र में अधिक चौड़ी और बाहर की तरफ संकरी होती हैं। यह आमतौर पर पेड़ के बहुत अधिक पुराना होने (Over-maturity) या केंद्र के हिस्से के सूखने के कारण उत्पन्न होता है।
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Q394: बाहरी लकड़ी के कार्यों (जैसे दरवाजे और खिड़कियां) पर सर्वोत्तम फिनिश और मौसम से सुरक्षा (Weather resistance) के लिए किस प्रकार के वार्निश का उपयोग किया जाता है?
- A) वाटर वार्निश (Water Varnish)
- B) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish)
- ✅ C) ऑयल वार्निश / कॉपल वार्निश (Oil Varnish / Copal Varnish) (सही उत्तर)
- D) टर्पेन्टाइन वार्निश (Turpentine Varnish)
💡 डिटेल Explanation:
बाहरी उपयोग (Exterior use) और मौसम की मार झेलने वाले लकड़ी के कार्यों के लिए ऑयल वार्निश (Oil Varnish) सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसमें कठोर रेजिन (जैसे Copal) को अलसी के तेल (Linseed oil) में घोला जाता है। यह सूखने में 24 घंटे तक का समय लेता है लेकिन सबसे टिकाऊ, कठोर और मौसम प्रतिरोधी परत बनाता है।
बाहरी उपयोग (Exterior use) और मौसम की मार झेलने वाले लकड़ी के कार्यों के लिए ऑयल वार्निश (Oil Varnish) सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसमें कठोर रेजिन (जैसे Copal) को अलसी के तेल (Linseed oil) में घोला जाता है। यह सूखने में 24 घंटे तक का समय लेता है लेकिन सबसे टिकाऊ, कठोर और मौसम प्रतिरोधी परत बनाता है।
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Q395: 395 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: खदान (Quarry) से निकाले गए ताज़ा पत्थर को उसी समय आकार देने की प्रक्रिया (Dressing of stone) क्यों की जानी चाहिए?
- A) ताकि पत्थर का वजन तुरंत बढ़ जाए
- B) ताकि पत्थर का रंग पक्का हो जाए
- ✅ C) क्योंकि ताज़ा पत्थर में प्राकृतिक नमी (Quarry sap) होती है, जिससे इसे काटना और आकार देना आसान होता है (सही उत्तर)
- D) ताकि पत्थर की कठोरता तुरंत दोगुनी हो जाए
💡 डिटेल Explanation:
खदान से ताज़ा निकाले गए पत्थर में प्राकृतिक नमी होती है जिसे 'क्वेरी सैप' (Quarry Sap) कहा जाता है। इस नमी के कारण पत्थर अपेक्षाकृत नरम होता है और उसे मनचाहे आकार में काटना (Dressing) आसान होता है। सूखने के बाद यह नमी उड़ जाती है और पत्थर कठोर हो जाता है, जिससे ड्रेसिंग करना मुश्किल और खर्चीला हो जाता है।
खदान से ताज़ा निकाले गए पत्थर में प्राकृतिक नमी होती है जिसे 'क्वेरी सैप' (Quarry Sap) कहा जाता है। इस नमी के कारण पत्थर अपेक्षाकृत नरम होता है और उसे मनचाहे आकार में काटना (Dressing) आसान होता है। सूखने के बाद यह नमी उड़ जाती है और पत्थर कठोर हो जाता है, जिससे ड्रेसिंग करना मुश्किल और खर्चीला हो जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 80 (Q396 - Q400)
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Q396: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का उपयोग करके बनाई गई कंक्रीट संरचनाओं के लिए, सामान्य मौसम में न्यूनतम 'तराई अवधि' (Minimum Curing Period) कितनी अनुशंसित है?
- A) 3 दिन
- ✅ B) 7 दिन (सही उत्तर)
- C) 14 दिन
- D) 28 दिन
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, सामान्य मौसम (Normal weather) में OPC कंक्रीट के लिए कम से कम 7 दिन तक तराई (Curing) की जानी चाहिए। यदि मौसम बहुत गर्म और सूखा है, या कंक्रीट में फ्लाई ऐश जैसे खनिज मिश्रण (Mineral Admixtures) का उपयोग किया गया है, तो यह अवधि बढ़ाकर 10 से 14 दिन कर दी जाती है।
भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, सामान्य मौसम (Normal weather) में OPC कंक्रीट के लिए कम से कम 7 दिन तक तराई (Curing) की जानी चाहिए। यदि मौसम बहुत गर्म और सूखा है, या कंक्रीट में फ्लाई ऐश जैसे खनिज मिश्रण (Mineral Admixtures) का उपयोग किया गया है, तो यह अवधि बढ़ाकर 10 से 14 दिन कर दी जाती है।
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Q397: ईंट निर्माण प्रक्रिया में 'पग मिल' (Pug Mill) का उपयोग मुख्य रूप से किस कार्य के लिए किया जाता है?
- A) मिट्टी खोदने के लिए (Digging)
- B) ईंटों को सुखाने के लिए (Drying)
- ✅ C) मिट्टी को पानी के साथ अच्छी तरह गूंथने (Tempering) के लिए (सही उत्तर)
- D) ईंटों को पकाने (Burning) के लिए
💡 डिटेल Explanation:
ईंट बनाने के लिए मिट्टी तैयार करने की प्रक्रिया में गूंथना (Tempering) सबसे महत्वपूर्ण चरण है ताकि मिट्टी प्लास्टिक (सुघट्य) अवस्था में आ जाए। बड़े पैमाने पर ईंट निर्माण में, मिट्टी को पानी के साथ अच्छी तरह से मिलाने और गूंथने के लिए 'पग मिल' (Pug Mill) नामक मशीन का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को पगिंग (Pugging) भी कहते हैं।
ईंट बनाने के लिए मिट्टी तैयार करने की प्रक्रिया में गूंथना (Tempering) सबसे महत्वपूर्ण चरण है ताकि मिट्टी प्लास्टिक (सुघट्य) अवस्था में आ जाए। बड़े पैमाने पर ईंट निर्माण में, मिट्टी को पानी के साथ अच्छी तरह से मिलाने और गूंथने के लिए 'पग मिल' (Pug Mill) नामक मशीन का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को पगिंग (Pugging) भी कहते हैं।
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Q398: इमारती लकड़ी (Timber) में 'स्टार शेक' (Star Shake) दोष की क्या पहचान है?
- A) ये दरारें केंद्र (Pith) से शुरू होकर बाहर की ओर जाती हैं
- ✅ B) ये दरारें बाहरी छाल (Bark) से शुरू होकर अंदर केंद्र (Pith) की ओर जाती हैं (सही उत्तर)
- C) ये वार्षिक वलयों के समानांतर गोल होती हैं
- D) ये लकड़ी के रेशों को पूरी तरह मरोड़ देती हैं
💡 डिटेल Explanation:
'स्टार शेक' (Star Shake) वे दरारें हैं जो पेड़ की बाहरी छाल (Bark) से शुरू होकर अंदर सैपवुड से होते हुए हार्टवुड की ओर जाती हैं। ये दरारें बाहर की तरफ चौड़ी और अंदर की तरफ संकरी होती हैं (तारे जैसी आकृति)। यह अक्सर पेड़ के अत्यधिक गर्मी या गंभीर पाले (Severe frost) के संपर्क में आने के कारण होता है। (ध्यान दें: Heart shake अंदर से बाहर जाता है, Star shake बाहर से अंदर आता है)।
'स्टार शेक' (Star Shake) वे दरारें हैं जो पेड़ की बाहरी छाल (Bark) से शुरू होकर अंदर सैपवुड से होते हुए हार्टवुड की ओर जाती हैं। ये दरारें बाहर की तरफ चौड़ी और अंदर की तरफ संकरी होती हैं (तारे जैसी आकृति)। यह अक्सर पेड़ के अत्यधिक गर्मी या गंभीर पाले (Severe frost) के संपर्क में आने के कारण होता है। (ध्यान दें: Heart shake अंदर से बाहर जाता है, Star shake बाहर से अंदर आता है)।
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Q399: 'सफेद पेंट' (White Paint) बनाने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला 'बेस' (Base) कौन सा है?
- A) रेड लेड (Red Lead)
- B) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide)
- ✅ C) व्हाइट लेड (White Lead) (सही उत्तर)
- D) एल्युमीनियम पाउडर
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'बेस' पेंट की मुख्य ठोस परत (Body) बनाता है। सफेद रंग के पेंट और विशेष रूप से लकड़ी के कार्यों के लिए 'व्हाइट लेड' (White Lead) सबसे अच्छा और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला बेस है। यह पेंट को बहुत अच्छी ओपेसिटी (कवर करने की क्षमता) देता है। (वहीं रेड लेड का उपयोग लोहे के कार्यों पर प्राइमर के रूप में किया जाता है)।
पेंट में 'बेस' पेंट की मुख्य ठोस परत (Body) बनाता है। सफेद रंग के पेंट और विशेष रूप से लकड़ी के कार्यों के लिए 'व्हाइट लेड' (White Lead) सबसे अच्छा और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला बेस है। यह पेंट को बहुत अच्छी ओपेसिटी (कवर करने की क्षमता) देता है। (वहीं रेड लेड का उपयोग लोहे के कार्यों पर प्राइमर के रूप में किया जाता है)।
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Q400: 400 MCQ का महा-पड़ाव पार! 🎉 प्रश्न: 'ग्रेनाइट' (Granite) पत्थर का निर्माण पिघले हुए मैग्मा के बहुत गहराई में ठंडा होने से होता है। इसका भूवैज्ञानिक (Geological) नाम क्या है?
- ✅ A) प्लूटोनिक आग्नेय चट्टान (Plutonic Igneous Rock) (सही उत्तर)
- B) ज्वालामुखीय आग्नेय चट्टान (Volcanic Igneous Rock)
- C) हाइपाबिसल चट्टान (Hypabyssal Rock)
- D) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
💡 डिटेल Explanation:
जब पिघला हुआ मैग्मा पृथ्वी की सतह के बहुत नीचे (काफी गहराई में) धीरे-धीरे ठंडा होकर ठोस बनता है, तो ऐसी चट्टानों को 'प्लूटोनिक आग्नेय चट्टानें' (Plutonic Igneous Rocks) या 'डीप-सीटेड रॉक' कहा जाता है। गहराई में बहुत धीमे ठंडे होने के कारण इनमें बड़े-बड़े रवे (Crystals) बनते हैं। ग्रेनाइट इसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।
जब पिघला हुआ मैग्मा पृथ्वी की सतह के बहुत नीचे (काफी गहराई में) धीरे-धीरे ठंडा होकर ठोस बनता है, तो ऐसी चट्टानों को 'प्लूटोनिक आग्नेय चट्टानें' (Plutonic Igneous Rocks) या 'डीप-सीटेड रॉक' कहा जाता है। गहराई में बहुत धीमे ठंडे होने के कारण इनमें बड़े-बड़े रवे (Crystals) बनते हैं। ग्रेनाइट इसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 81 (Q401 - Q405)
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Q401: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) में पहले 1 से 7 दिनों की प्रारंभिक सामर्थ्य (Early Strength) मुख्य रूप से किस बोग्स कंपाउंड (Bogue's Compound) के कारण होती है?
- A) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- B) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A)
- ✅ C) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S) (सही उत्तर)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S) जिसे 'एलाइट' (Alite) भी कहा जाता है, पानी के साथ जल्दी प्रतिक्रिया करता है। यह सीमेंट को शुरुआती ताकत (प्रारंभिक सामर्थ्य) और ठंड के मौसम में जल्दी सेट होने का गुण देता है। इसके विपरीत, C2S (बेलाइट) सीमेंट को अंतिम (Ultimate) सामर्थ्य प्रदान करता है जो 28 दिनों के बाद विकसित होती है।
ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S) जिसे 'एलाइट' (Alite) भी कहा जाता है, पानी के साथ जल्दी प्रतिक्रिया करता है। यह सीमेंट को शुरुआती ताकत (प्रारंभिक सामर्थ्य) और ठंड के मौसम में जल्दी सेट होने का गुण देता है। इसके विपरीत, C2S (बेलाइट) सीमेंट को अंतिम (Ultimate) सामर्थ्य प्रदान करता है जो 28 दिनों के बाद विकसित होती है।
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Q402: एक अच्छी ईंट की मिट्टी (Brick earth) में 'एल्युमिना' (Alumina) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) ईंट को लाल रंग देना
- ✅ B) मिट्टी को सुघट्यता (Plasticity) प्रदान करना (सही उत्तर)
- C) ईंट को सिकुड़ने से रोकना
- D) ईंट को पिघलाकर कठोर बनाना
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी में एल्युमिना की आदर्श मात्रा 20-30% होनी चाहिए। यह मिट्टी को 'सुघट्यता' (Plasticity) प्रदान करता है, जिससे मिट्टी को आसानी से सांचे (Mould) में ढालकर मनचाहा आकार दिया जा सके। यदि एल्युमिना बहुत अधिक हो जाए, तो ईंट सूखने पर सिकुड़ और फट (Shrink & crack) सकती है।
ईंट की मिट्टी में एल्युमिना की आदर्श मात्रा 20-30% होनी चाहिए। यह मिट्टी को 'सुघट्यता' (Plasticity) प्रदान करता है, जिससे मिट्टी को आसानी से सांचे (Mould) में ढालकर मनचाहा आकार दिया जा सके। यदि एल्युमिना बहुत अधिक हो जाए, तो ईंट सूखने पर सिकुड़ और फट (Shrink & crack) सकती है।
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Q403: इमारती लकड़ी (Timber) में 'ड्राई रॉट' (Dry Rot - सूखा रोग) नामक दोष मुख्य रूप से किस कारण उत्पन्न होता है?
- A) दीमक (Termites) के हमले से
- B) लकड़ी के लगातार पानी में डूबे रहने से
- ✅ C) हवा के अपर्याप्त संचार (Lack of ventilation) के कारण फफूंदी के हमले से (सही उत्तर)
- D) अत्यधिक धूप के कारण
💡 डिटेल Explanation:
ड्राई रॉट (Dry Rot) लकड़ी को नुकसान पहुंचाने वाली एक फफूंदी (Fungus) के कारण होता है। यह अक्सर उन स्थानों पर पनपता है जहाँ हवा का प्रवाह (Ventilation) बिल्कुल नहीं होता और जगह में सीलन (Dampness) होती है। यह फफूंदी लकड़ी के तंतुओं को खाकर उसे भुरभुरे सूखे पाउडर में बदल देती है।
ड्राई रॉट (Dry Rot) लकड़ी को नुकसान पहुंचाने वाली एक फफूंदी (Fungus) के कारण होता है। यह अक्सर उन स्थानों पर पनपता है जहाँ हवा का प्रवाह (Ventilation) बिल्कुल नहीं होता और जगह में सीलन (Dampness) होती है। यह फफूंदी लकड़ी के तंतुओं को खाकर उसे भुरभुरे सूखे पाउडर में बदल देती है।
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Q404: यदि किसी सतह पर पेंट की बहुत गाढ़ी परत (Thick coat) लगा दी जाए, तो सूखने पर उसमें लहरदार सिकुड़न आ जाती है। पेंट के इस दोष को क्या कहते हैं?
- A) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- B) फ्लैकिंग (Flaking)
- C) चॉकिंग (Chalking)
- ✅ D) रिंकलिंग (Wrinkling) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
जब पेंट को सतह पर बहुत गाढ़ा (Thick) लगाया जाता है, तो पेंट की ऊपरी परत तो जल्दी सूख जाती है, लेकिन उसके नीचे की परत गीली रहती है। इस असमान सूखने के कारण पेंट की फिल्म सिकुड़ कर लहरदार (Wave-like) या झुर्रीदार हो जाती है। इस दोष को 'रिंकलिंग' (Wrinkling) या झुर्रियां पड़ना कहा जाता है।
जब पेंट को सतह पर बहुत गाढ़ा (Thick) लगाया जाता है, तो पेंट की ऊपरी परत तो जल्दी सूख जाती है, लेकिन उसके नीचे की परत गीली रहती है। इस असमान सूखने के कारण पेंट की फिल्म सिकुड़ कर लहरदार (Wave-like) या झुर्रीदार हो जाती है। इस दोष को 'रिंकलिंग' (Wrinkling) या झुर्रियां पड़ना कहा जाता है।
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Q405: 405 MCQ का पड़ाव पार! प्रश्न: भारतीय मानक (IS 456:2000) के अनुसार, प्रबलित कंक्रीट (Reinforced Cement Concrete - RCC) कार्यों के लिए कंक्रीट का न्यूनतम ग्रेड (Minimum Grade) क्या होना चाहिए?
- A) M10
- B) M15
- ✅ C) M20 (सही उत्तर)
- D) M25
💡 डिटेल Explanation:
IS 456:2000 कोड के अनुसार, संरचनात्मक मजबूती और टिकाऊपन (Durability) सुनिश्चित करने के लिए किसी भी RCC (लोहे की छड़ वाली कंक्रीट) कार्य में 'M20' से कम ग्रेड की कंक्रीट का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। (यहाँ M का अर्थ Mix और 20 का अर्थ 28 दिन की संपीडन सामर्थ्य 20 N/mm² है)। सादी कंक्रीट (PCC) के लिए न्यूनतम ग्रेड M15 होता है।
IS 456:2000 कोड के अनुसार, संरचनात्मक मजबूती और टिकाऊपन (Durability) सुनिश्चित करने के लिए किसी भी RCC (लोहे की छड़ वाली कंक्रीट) कार्य में 'M20' से कम ग्रेड की कंक्रीट का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। (यहाँ M का अर्थ Mix और 20 का अर्थ 28 दिन की संपीडन सामर्थ्य 20 N/mm² है)। सादी कंक्रीट (PCC) के लिए न्यूनतम ग्रेड M15 होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 82 (Q406 - Q410)
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Q406: सीमेंट के 'ऑटोक्लेव परीक्षण' (Autoclave Test) का उपयोग मुख्य रूप से किस कारण से होने वाले फैलाव (Unsoundness) का पता लगाने के लिए किया जाता है?
- A) केवल स्वतंत्र चूना (Free Lime) के कारण
- B) केवल मैग्नीशिया (Magnesia) के कारण
- ✅ C) दोनों स्वतंत्र चूना (Free Lime) और मैग्नीशिया (Magnesia) के कारण (सही उत्तर)
- D) केवल सल्फर (Sulphur) के कारण
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में फैलाव (Unsoundness) मुख्य रूप से चूने (Lime) और मैग्नीशिया की अधिकता के कारण होता है। 'ले-चेटेलियर' (Le-Chatelier) परीक्षण केवल चूने के कारण होने वाले फैलाव को मापता है, जबकि 'ऑटोक्लेव टेस्ट' चूना और मैग्नीशिया दोनों के कारण होने वाले फैलाव (Unsoundness) का एक साथ सटीक पता लगाता है।
सीमेंट में फैलाव (Unsoundness) मुख्य रूप से चूने (Lime) और मैग्नीशिया की अधिकता के कारण होता है। 'ले-चेटेलियर' (Le-Chatelier) परीक्षण केवल चूने के कारण होने वाले फैलाव को मापता है, जबकि 'ऑटोक्लेव टेस्ट' चूना और मैग्नीशिया दोनों के कारण होने वाले फैलाव (Unsoundness) का एक साथ सटीक पता लगाता है।
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Q407: ईंट के ऊपरी हिस्से (Top face) में छोड़े गए गड्ढे जिसे 'फ्रॉग' (Frog) कहा जाता है, का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) ईंट का वजन कम करना
- B) निर्माता का नाम या लोगो छापना
- ✅ C) ईंट और मोर्टार (मसाले) के बीच 'की जॉइंट' (Key joint) बनाना (सही उत्तर)
- D) ईंट को तेजी से और समान रूप से पकाना
💡 डिटेल Explanation:
हालांकि फ्रॉग में निर्माता का नाम भी छपा होता है, लेकिन इसका मुख्य इंजीनियरिंग उद्देश्य चिनाई (Masonry) की परतों के बीच मोर्टार के लिए एक 'लॉक' (Key) बनाना है। जब फ्रॉग में मसाला भर जाता है, तो यह ऊपर और नीचे की ईंटों के बीच कतरनी सामर्थ्य (Shear strength) और बॉन्ड को बहुत मजबूत कर देता है।
हालांकि फ्रॉग में निर्माता का नाम भी छपा होता है, लेकिन इसका मुख्य इंजीनियरिंग उद्देश्य चिनाई (Masonry) की परतों के बीच मोर्टार के लिए एक 'लॉक' (Key) बनाना है। जब फ्रॉग में मसाला भर जाता है, तो यह ऊपर और नीचे की ईंटों के बीच कतरनी सामर्थ्य (Shear strength) और बॉन्ड को बहुत मजबूत कर देता है।
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Q408: इमारती लकड़ी (Timber) में 'वेट रॉट' (Wet Rot) नामक दोष (Defect) किस स्थिति में उत्पन्न होता है?
- A) हवा के बिल्कुल न होने पर
- B) लकड़ी के लगातार पानी में पूरी तरह डूबे रहने से
- ✅ C) लकड़ी के बार-बार भीगने और सूखने (Alternate wetting and drying) से (सही उत्तर)
- D) बहुत अधिक सूखी जगह पर रखने से
💡 डिटेल Explanation:
वेट रॉट (Wet Rot) एक फफूंदी (Fungus) का संक्रमण है जो लकड़ी के तंतुओं को नष्ट कर देता है और उसे भूरे रंग के पाउडर में बदल देता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लकड़ी लगातार 'बार-बार भीगने और सूखने' (Alternate wet and dry conditions) का सामना करती है। यदि लकड़ी पूरी तरह से पानी में डूबी रहे (जैसे पाइल्स), तो वहां फफूंदी नहीं लगती क्योंकि उसे ऑक्सीजन नहीं मिलती।
वेट रॉट (Wet Rot) एक फफूंदी (Fungus) का संक्रमण है जो लकड़ी के तंतुओं को नष्ट कर देता है और उसे भूरे रंग के पाउडर में बदल देता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लकड़ी लगातार 'बार-बार भीगने और सूखने' (Alternate wet and dry conditions) का सामना करती है। यदि लकड़ी पूरी तरह से पानी में डूबी रहे (जैसे पाइल्स), तो वहां फफूंदी नहीं लगती क्योंकि उसे ऑक्सीजन नहीं मिलती।
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Q409: पेंटिंग कार्य और शीशे लगाने में उपयोग होने वाली 'पुट्टी' (Putty) मुख्य रूप से किन दो सामग्रियों का मिश्रण होती है?
- A) व्हाइट लेड और तारपीन का तेल
- ✅ B) चॉक पाउडर (Powdered Chalk) और कच्चा अलसी का तेल (Raw Linseed Oil) (सही उत्तर)
- C) रेड लेड और पानी
- D) जिप्सम और पानी
💡 डिटेल Explanation:
पारंपरिक 'ग्रेज़ियर पुट्टी' (Glazier's Putty) या लकड़ी/दीवार की दरारों को भरने वाली पुट्टी को बारीक पिसे हुए चॉक पाउडर (Whiting) और कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed oil) को आपस में गूंथकर (Dough की तरह) बनाया जाता है। सूखने के बाद यह बहुत कठोर हो जाती है।
पारंपरिक 'ग्रेज़ियर पुट्टी' (Glazier's Putty) या लकड़ी/दीवार की दरारों को भरने वाली पुट्टी को बारीक पिसे हुए चॉक पाउडर (Whiting) और कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed oil) को आपस में गूंथकर (Dough की तरह) बनाया जाता है। सूखने के बाद यह बहुत कठोर हो जाती है।
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Q410: 410 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: एक अच्छे भवन निर्माण पत्थर (Good building stone) का जल अवशोषण (Water absorption) उसके सूखे वजन के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- ✅ A) 5% (सही उत्तर)
- B) 10%
- C) 15%
- D) 20%
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी गुणवत्ता वाला भवन निर्माण पत्थर सघन (Dense) होना चाहिए। IS मानकों के अनुसार, 24 घंटे पानी में डुबो कर रखने पर एक अच्छे पत्थर का जल अवशोषण उसके सूखे वजन के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि पत्थर 10% से अधिक पानी सोखता है, तो उसे निर्माण कार्यों (विशेषकर बाहरी सतहों पर) के लिए अयोग्य (Reject) माना जाता है।
एक अच्छी गुणवत्ता वाला भवन निर्माण पत्थर सघन (Dense) होना चाहिए। IS मानकों के अनुसार, 24 घंटे पानी में डुबो कर रखने पर एक अच्छे पत्थर का जल अवशोषण उसके सूखे वजन के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि पत्थर 10% से अधिक पानी सोखता है, तो उसे निर्माण कार्यों (विशेषकर बाहरी सतहों पर) के लिए अयोग्य (Reject) माना जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 83 (Q411 - Q415)
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Q411: सीमेंट के प्रयोगशाला परीक्षणों में 'विकाट उपकरण' (Vicat Apparatus) का उपयोग मुख्य रूप से क्या मापने के लिए किया जाता है?
- A) सीमेंट की संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength)
- ✅ B) मानक गाढ़ापन (Standard Consistency) और जमाव काल (Setting Time) (सही उत्तर)
- C) सीमेंट का फैलाव या निर्दोषता (Soundness)
- D) सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness)
💡 डिटेल Explanation:
विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) सीमेंट परीक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक है। इसका उपयोग सबसे पहले सीमेंट का मानक गाढ़ापन (Normal/Standard Consistency) ज्ञात करने के लिए किया जाता है। इसके बाद इसी उपकरण में अलग-अलग सुइयों (Needles) का उपयोग करके 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) और 'अंतिम जमाव काल' (Final Setting Time) मापा जाता है।
विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) सीमेंट परीक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक है। इसका उपयोग सबसे पहले सीमेंट का मानक गाढ़ापन (Normal/Standard Consistency) ज्ञात करने के लिए किया जाता है। इसके बाद इसी उपकरण में अलग-अलग सुइयों (Needles) का उपयोग करके 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) और 'अंतिम जमाव काल' (Final Setting Time) मापा जाता है।
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Q412: ईंट बनाने की प्रक्रिया में, मिट्टी को पानी और अन्य सामग्रियों के साथ मिलाकर 'सुघट्य अवस्था' (Plastic state) तक गूंथने की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
- A) वेदरिंग (Weathering)
- B) ब्लेंडिंग (Blending)
- ✅ C) टेम्परिंग (Tempering) (सही उत्तर)
- D) मोल्डिंग (Moulding)
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी तैयार करते समय, साफ की गई मिट्टी में पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह गूंथा जाता है ताकि वह एक समान सुघट्य (Plastic) मिश्रण बन जाए। इस गूंथने की प्रक्रिया को टेम्परिंग (Tempering) कहा जाता है। छोटे पैमाने पर यह पैरों से रौंदकर किया जाता है, जबकि बड़े पैमाने पर इसके लिए 'पग मिल' (Pug Mill) का उपयोग किया जाता है।
ईंट की मिट्टी तैयार करते समय, साफ की गई मिट्टी में पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह गूंथा जाता है ताकि वह एक समान सुघट्य (Plastic) मिश्रण बन जाए। इस गूंथने की प्रक्रिया को टेम्परिंग (Tempering) कहा जाता है। छोटे पैमाने पर यह पैरों से रौंदकर किया जाता है, जबकि बड़े पैमाने पर इसके लिए 'पग मिल' (Pug Mill) का उपयोग किया जाता है।
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Q413: भवन निर्माण कार्यों के लिए 'अच्छी तरह से सीज़न' (Well-seasoned) की गई इमारती लकड़ी (Timber) में नमी की मात्रा (Moisture content) सामान्यतः कितनी होनी चाहिए?
- A) 2% से 5%
- ✅ B) 10% से 12% (सही उत्तर)
- C) 15% से 20%
- D) 25% से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
ताजी कटी हुई लकड़ी में नमी की मात्रा 50% से 100% तक हो सकती है। इसे सुखाकर (Seasoning) निर्माण योग्य बनाने के लिए इसकी नमी को कम किया जाता है। भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुसार, दरवाजों, खिड़कियों और फर्नीचर के लिए लकड़ी में नमी का मानक स्तर 10% से 12% के बीच माना जाता है। इससे लकड़ी में सिकुड़न और फफूंदी लगने का खतरा खत्म हो जाता है।
ताजी कटी हुई लकड़ी में नमी की मात्रा 50% से 100% तक हो सकती है। इसे सुखाकर (Seasoning) निर्माण योग्य बनाने के लिए इसकी नमी को कम किया जाता है। भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुसार, दरवाजों, खिड़कियों और फर्नीचर के लिए लकड़ी में नमी का मानक स्तर 10% से 12% के बीच माना जाता है। इससे लकड़ी में सिकुड़न और फफूंदी लगने का खतरा खत्म हो जाता है।
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Q414: 'डिस्टेंपर' (Distemper) एक प्रकार का पेंट है, जिसे तकनीकी रूप से क्या माना जाता है?
- A) ऑयल पेंट (Oil paint)
- ✅ B) वाटर पेंट (Water paint) (सही उत्तर)
- C) इनेमल पेंट (Enamel paint)
- D) सेल्युलोज पेंट (Cellulose paint)
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर (Distemper) मूल रूप से एक वाटर पेंट (Water Paint) है, जिसे चॉक (बेस) और पानी (वाहन) के मिश्रण से बनाया जाता है। इसमें सतह पर चिपकने के लिए एक बाइंडर (जैसे गोंद/साइज या कैसिइन) मिलाया जाता है। यह ऑइल पेंट की तुलना में सस्ता होता है और मुख्य रूप से प्लास्टर की हुई आंतरिक दीवारों (Interior walls) पर किया जाता है।
डिस्टेंपर (Distemper) मूल रूप से एक वाटर पेंट (Water Paint) है, जिसे चॉक (बेस) और पानी (वाहन) के मिश्रण से बनाया जाता है। इसमें सतह पर चिपकने के लिए एक बाइंडर (जैसे गोंद/साइज या कैसिइन) मिलाया जाता है। यह ऑइल पेंट की तुलना में सस्ता होता है और मुख्य रूप से प्लास्टर की हुई आंतरिक दीवारों (Interior walls) पर किया जाता है।
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Q415: 415 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: 'बेसाल्ट' (Basalt) और 'ट्रैप' (Trap) पत्थर किस प्रकार की चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं?
- ✅ A) आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks) (सही उत्तर)
- B) अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks)
- C) कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks)
- D) कैल्केरियस चट्टानें (Calcareous Rocks)
💡 डिटेल Explanation:
बेसाल्ट और ट्रैप भूवैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks) हैं। विशेष रूप से, ये 'ज्वालामुखीय आग्नेय चट्टानें' (Volcanic Igneous Rocks) हैं, जिनका निर्माण पृथ्वी की सतह पर लावा के बहुत तेजी से ठंडे होने से होता है। ये अत्यधिक कठोर, सघन और गहरे रंग की होती हैं, जिनका उपयोग सड़क निर्माण और कंक्रीट एग्रीगेट के रूप में बहुतायत से होता है।
बेसाल्ट और ट्रैप भूवैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks) हैं। विशेष रूप से, ये 'ज्वालामुखीय आग्नेय चट्टानें' (Volcanic Igneous Rocks) हैं, जिनका निर्माण पृथ्वी की सतह पर लावा के बहुत तेजी से ठंडे होने से होता है। ये अत्यधिक कठोर, सघन और गहरे रंग की होती हैं, जिनका उपयोग सड़क निर्माण और कंक्रीट एग्रीगेट के रूप में बहुतायत से होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 84 (Q416 - Q420)
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Q416: सीमेंट की 'सूक्ष्मता' (Fineness) बढ़ाने का उसकी सामर्थ्य (Strength) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) प्रारंभिक सामर्थ्य घट जाती है
- ✅ B) प्रारंभिक सामर्थ्य (Early strength) बढ़ जाती है (सही उत्तर)
- C) अंतिम सामर्थ्य घट जाती है
- D) कोई प्रभाव नहीं पड़ता
💡 डिटेल Explanation:
अधिक सूक्ष्म सीमेंट के कणों का सतह क्षेत्रफल (Surface area) अधिक होता है। इससे जलयोजन (Hydration) की दर तेज हो जाती है, जिससे कंक्रीट तेजी से जमती है और उसकी 'प्रारंभिक सामर्थ्य' (Early strength) बढ़ जाती है। हालाँकि, इससे कंक्रीट की अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength) पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है।
अधिक सूक्ष्म सीमेंट के कणों का सतह क्षेत्रफल (Surface area) अधिक होता है। इससे जलयोजन (Hydration) की दर तेज हो जाती है, जिससे कंक्रीट तेजी से जमती है और उसकी 'प्रारंभिक सामर्थ्य' (Early strength) बढ़ जाती है। हालाँकि, इससे कंक्रीट की अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength) पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है।
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Q417: ईंट की चिनाई में, यदि एक ईंट को उसकी चौड़ाई (Width) के समानांतर (Transversely) बीच से आधा काटा जाए, तो प्राप्त टुकड़े को क्या कहते हैं?
- A) क्वीन क्लोजर (Queen Closer)
- B) किंग क्लोजर (King Closer)
- ✅ C) हाफ बैट (Half Bat) (सही उत्तर)
- D) कॉर्निस (Cornice)
💡 डिटेल Explanation:
जब ईंट को उसकी लंबाई के अनुदिश (Longitudinally) काटा जाता है तो उसे 'क्लोजर' कहते हैं (जैसे क्वीन क्लोजर), लेकिन जब ईंट को उसकी चौड़ाई के अनुदिश (Transversely) काटा जाता है, तो प्राप्त टुकड़ों को 'बैट' (Bat) कहा जाता है। बीच से ठीक आधा काटने पर यह 'हाफ बैट' (Half Bat) और तीन-चौथाई काटने पर 'थ्री-क्वार्टर बैट' (3/4 Bat) कहलाता है।
जब ईंट को उसकी लंबाई के अनुदिश (Longitudinally) काटा जाता है तो उसे 'क्लोजर' कहते हैं (जैसे क्वीन क्लोजर), लेकिन जब ईंट को उसकी चौड़ाई के अनुदिश (Transversely) काटा जाता है, तो प्राप्त टुकड़ों को 'बैट' (Bat) कहा जाता है। बीच से ठीक आधा काटने पर यह 'हाफ बैट' (Half Bat) और तीन-चौथाई काटने पर 'थ्री-क्वार्टर बैट' (3/4 Bat) कहलाता है।
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Q418: लकड़ी के संरक्षण (Timber Preservation) में उपयोग होने वाला 'ASCU' (ऐस्कू) क्या है?
- A) लकड़ी को सुखाने की भट्टी
- B) एक प्रकार का अग्नि-प्रतिरोधक (Fire retardant)
- ✅ C) एक रासायनिक लकड़ी परिरक्षक (Chemical Wood Preservative) (सही उत्तर)
- D) एक प्रकार का वार्निश
💡 डिटेल Explanation:
ASCU एक बहुत ही प्रभावी और प्रसिद्ध जल-घुलनशील लकड़ी परिरक्षक (Wood Preservative) है, जिसे वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून द्वारा विकसित किया गया था। इसमें आर्सेनिक पेंटोक्साइड, कॉपर सल्फेट और सोडियम/पोटेशियम डाइक्रोमेट का मिश्रण होता है जो लकड़ी को दीमक (Termites) और फफूंदी से लंबे समय तक बचाता है।
ASCU एक बहुत ही प्रभावी और प्रसिद्ध जल-घुलनशील लकड़ी परिरक्षक (Wood Preservative) है, जिसे वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून द्वारा विकसित किया गया था। इसमें आर्सेनिक पेंटोक्साइड, कॉपर सल्फेट और सोडियम/पोटेशियम डाइक्रोमेट का मिश्रण होता है जो लकड़ी को दीमक (Termites) और फफूंदी से लंबे समय तक बचाता है।
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Q419: पेंट की गई सतह पर नमी (Moisture) या हवा के फंस जाने के कारण पेंट का फूल जाना या छाले पड़ जाना क्या कहलाता है?
- A) फ्लैकिंग (Flaking)
- ✅ B) ब्लिस्टरिंग (Blistering) (सही उत्तर)
- C) चॉकिंग (Chalking)
- D) रिंकलिंग (Wrinkling)
💡 डिटेल Explanation:
यदि पेंट करने से पहले सतह में नमी (Moisture) रह जाए या लकड़ी में मौजूद रस (Sap) ठीक से न सूखा हो, तो वह भाप बनकर बाहर निकलने की कोशिश करता है। इससे पेंट की परत सतह से अलग होकर फूल जाती है। इस 'छाले पड़ने' वाले दोष को 'ब्लिस्टरिंग' (Blistering) कहा जाता है।
यदि पेंट करने से पहले सतह में नमी (Moisture) रह जाए या लकड़ी में मौजूद रस (Sap) ठीक से न सूखा हो, तो वह भाप बनकर बाहर निकलने की कोशिश करता है। इससे पेंट की परत सतह से अलग होकर फूल जाती है। इस 'छाले पड़ने' वाले दोष को 'ब्लिस्टरिंग' (Blistering) कहा जाता है।
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Q420: 420 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भूवैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, हवा, पानी या बर्फ द्वारा ढोए गए कणों के जमा होने (Deposition) से कौन सी चट्टान बनती है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous Rock)
- ✅ B) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock) (सही उत्तर)
- C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock)
- D) ज्वालामुखीय चट्टान (Volcanic Rock)
💡 डिटेल Explanation:
जब पुरानी चट्टानों के कण (Sediments) हवा या बहते पानी द्वारा टूटकर किसी स्थान (जैसे नदी के तल या समुद्र) पर परत-दर-परत जमा (Deposit) होते रहते हैं, तो लाखों वर्षों में अत्यधिक दबाव के कारण वे ठोस चट्टान का रूप ले लेते हैं। इस प्रकार बनी चट्टान को 'अवसादी चट्टान' (Sedimentary Rock) कहते हैं। इसके सबसे अच्छे उदाहरण सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) और लाइमस्टोन (चूना पत्थर) हैं।
जब पुरानी चट्टानों के कण (Sediments) हवा या बहते पानी द्वारा टूटकर किसी स्थान (जैसे नदी के तल या समुद्र) पर परत-दर-परत जमा (Deposit) होते रहते हैं, तो लाखों वर्षों में अत्यधिक दबाव के कारण वे ठोस चट्टान का रूप ले लेते हैं। इस प्रकार बनी चट्टान को 'अवसादी चट्टान' (Sedimentary Rock) कहते हैं। इसके सबसे अच्छे उदाहरण सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) और लाइमस्टोन (चूना पत्थर) हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 85 (Q421 - Q425)
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Q421: सीमेंट की 'सूक्ष्मता' (Fineness) मापने के लिए 'सीव टेस्ट' (Sieve Test) में किस आकार की चलनी (IS Sieve) का उपयोग किया जाता है?
- A) 45 माइक्रोन (IS Sieve No. 4)
- ✅ B) 90 माइक्रोन (IS Sieve No. 9) (सही उत्तर)
- C) 150 माइक्रोन (IS Sieve No. 15)
- D) 212 माइक्रोन
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट के कणों की मोटाई (Fineness) जांचने के लिए 90 माइक्रोन (IS Sieve No. 9) की चलनी का उपयोग किया जाता है। भारतीय मानकों के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के 100 ग्राम नमूने को 15 मिनट तक छानने के बाद, चलनी के ऊपर बचने वाला अवशेष (Residue) उसके कुल वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।
सीमेंट के कणों की मोटाई (Fineness) जांचने के लिए 90 माइक्रोन (IS Sieve No. 9) की चलनी का उपयोग किया जाता है। भारतीय मानकों के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के 100 ग्राम नमूने को 15 मिनट तक छानने के बाद, चलनी के ऊपर बचने वाला अवशेष (Residue) उसके कुल वजन के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए।
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Q422: ईंट की चिनाई में 'बुलनोज़ ईंट' (Bullnose Brick) का उपयोग मुख्य रूप से कहाँ किया जाता है?
- A) दीवार की नींव (Foundation) में
- B) मेहराब (Arches) बनाने के लिए
- ✅ C) तीखे कोनों को गोल (Rounded corners) बनाने के लिए (सही उत्तर)
- D) चिनाई के ऊर्ध्वाधर जोड़ों (Vertical joints) को तोड़ने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
बुलनोज़ ईंट (Bullnose Brick) वह ईंट होती है जिसका एक या अधिक किनारा गोल (Rounded) आकार में ढाला गया होता है। इसका उपयोग इमारतों के बाहरी कोनों, खंभों (Pillars), और सीढ़ियों के किनारों पर किया जाता है ताकि तीखे कोनों से लगने वाली चोट से बचा जा सके और कोनों के टूटने (Chipping) का खतरा कम हो।
बुलनोज़ ईंट (Bullnose Brick) वह ईंट होती है जिसका एक या अधिक किनारा गोल (Rounded) आकार में ढाला गया होता है। इसका उपयोग इमारतों के बाहरी कोनों, खंभों (Pillars), और सीढ़ियों के किनारों पर किया जाता है ताकि तीखे कोनों से लगने वाली चोट से बचा जा सके और कोनों के टूटने (Chipping) का खतरा कम हो।
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Q423: इमारती लकड़ी (Timber) में 'गांठ' (Knot) नामक दोष (Defect) कैसे उत्पन्न होता है?
- A) लकड़ी में फफूंदी (Fungus) लगने से
- ✅ B) पेड़ के तने से शाखाओं (Branches) के कटने या टूटने के स्थान पर (सही उत्तर)
- C) लकड़ी के बहुत तेजी से सूखने के कारण
- D) दीमक (Termites) के खाने से
💡 डिटेल Explanation:
गांठें (Knots) लकड़ी में पाए जाने वाले सबसे आम प्राकृतिक दोष हैं। ये तने के उन हिस्सों में बनती हैं जहाँ से कोई शाखा (Branch) निकलती है। जब शाखा टूट जाती है या काट दी जाती है, तो पेड़ उसके ऊपर से अपनी वृद्धि जारी रखता है, जिससे तने के अंदर एक गहरे रंग का, कठोर और अक्सर अलग हो जाने वाला गोल हिस्सा बन जाता है। यह लकड़ी की तन्यता सामर्थ्य (Tensile strength) को कम करता है।
गांठें (Knots) लकड़ी में पाए जाने वाले सबसे आम प्राकृतिक दोष हैं। ये तने के उन हिस्सों में बनती हैं जहाँ से कोई शाखा (Branch) निकलती है। जब शाखा टूट जाती है या काट दी जाती है, तो पेड़ उसके ऊपर से अपनी वृद्धि जारी रखता है, जिससे तने के अंदर एक गहरे रंग का, कठोर और अक्सर अलग हो जाने वाला गोल हिस्सा बन जाता है। यह लकड़ी की तन्यता सामर्थ्य (Tensile strength) को कम करता है।
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Q424: ऑयल पेंट को जल्दी सुखाने के लिए उसमें 'ड्रायर' (Drier) के रूप में सबसे आम सामग्री कौन सी उपयोग की जाती है?
- A) व्हाइट लेड (White Lead)
- B) टर्पेन्टाइन (Turpentine)
- C) कोपल (Copal)
- ✅ D) लिथार्ज (Litharge) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'ड्रायर' एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करता है जो हवा से ऑक्सीजन सोखकर तेल (Vehicle) के सूखने (Oxidation) की प्रक्रिया को तेज कर देता है। लिथार्ज (Litharge - Lead Monoxide), लेड एसीटेट और कोबाल्ट पेंट में इस्तेमाल होने वाले सबसे आम ड्रायर हैं। (नोट: पेंट में ड्रायर की मात्रा बहुत कम होनी चाहिए, अन्यथा पेंट की फिल्म चटक सकती है)।
पेंट में 'ड्रायर' एक उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करता है जो हवा से ऑक्सीजन सोखकर तेल (Vehicle) के सूखने (Oxidation) की प्रक्रिया को तेज कर देता है। लिथार्ज (Litharge - Lead Monoxide), लेड एसीटेट और कोबाल्ट पेंट में इस्तेमाल होने वाले सबसे आम ड्रायर हैं। (नोट: पेंट में ड्रायर की मात्रा बहुत कम होनी चाहिए, अन्यथा पेंट की फिल्म चटक सकती है)।
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Q425: 425 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: रासायनिक वर्गीकरण (Chemical Classification) के अनुसार 'आर्गिलेशियस चट्टानों' (Argillaceous rocks) का मुख्य घटक (Principal constituent) क्या होता है?
- A) सिलिका (Silica)
- B) चूना (Lime)
- ✅ C) मिट्टी / क्ले (Clay / Alumina) (सही उत्तर)
- D) कार्बन (Carbon)
💡 डिटेल Explanation:
रासायनिक वर्गीकरण में चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं: 1. सिलिसियस (Siliceous) - मुख्य घटक सिलिका (रेत) होता है। (जैसे- ग्रेनाइट, क्वार्टजाइट)। 2. आर्गिलेशियस (Argillaceous) - मुख्य घटक 'मिट्टी' (Clay / Alumina) होता है। (जैसे- स्लेट, लेटराइट)। ये चट्टानें कठोर लेकिन भंगुर (Brittle) होती हैं। 3. कैल्केरियस (Calcareous) - मुख्य घटक 'चूना' (Lime) होता है। (जैसे- मार्बल, लाइमस्टोन)।
रासायनिक वर्गीकरण में चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं: 1. सिलिसियस (Siliceous) - मुख्य घटक सिलिका (रेत) होता है। (जैसे- ग्रेनाइट, क्वार्टजाइट)। 2. आर्गिलेशियस (Argillaceous) - मुख्य घटक 'मिट्टी' (Clay / Alumina) होता है। (जैसे- स्लेट, लेटराइट)। ये चट्टानें कठोर लेकिन भंगुर (Brittle) होती हैं। 3. कैल्केरियस (Calcareous) - मुख्य घटक 'चूना' (Lime) होता है। (जैसे- मार्बल, लाइमस्टोन)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 86 (Q426 - Q430)
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Q426: भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) कम से कम कितना होना चाहिए?
- A) 10 मिनट
- ✅ B) 30 मिनट (सही उत्तर)
- C) 60 मिनट
- D) 600 मिनट
💡 डिटेल Explanation:
प्रारंभिक जमाव काल वह समय है जब सीमेंट में पानी मिलाने के बाद वह अपनी सुघट्यता (Plasticity) खोना शुरू कर देता है। OPC के लिए यह न्यूनतम 30 मिनट होना चाहिए। यह 30 मिनट का समय कंक्रीट को मिलाने, ढोने और सांचे में डालने (Placing) के लिए पर्याप्त होता है। इसका अंतिम जमाव काल (Final Setting Time) अधिकतम 10 घंटे (600 मिनट) होता है।
प्रारंभिक जमाव काल वह समय है जब सीमेंट में पानी मिलाने के बाद वह अपनी सुघट्यता (Plasticity) खोना शुरू कर देता है। OPC के लिए यह न्यूनतम 30 मिनट होना चाहिए। यह 30 मिनट का समय कंक्रीट को मिलाने, ढोने और सांचे में डालने (Placing) के लिए पर्याप्त होता है। इसका अंतिम जमाव काल (Final Setting Time) अधिकतम 10 घंटे (600 मिनट) होता है।
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Q427: ईंटों में 'एफ्लोरेसेंस' (Efflorescence - सतह पर सफेद धब्बे) दोष मुख्य रूप से किस कारण से उत्पन्न होता है?
- A) मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की अधिकता के कारण
- ✅ B) मिट्टी या पानी में घुलनशील क्षारीय लवणों (Alkalis) की उपस्थिति के कारण (सही उत्तर)
- C) ईंटों को बहुत अधिक तापमान पर पकाने से
- D) मिट्टी में सिलिका की कमी के कारण
💡 डिटेल Explanation:
यदि ईंट बनाने वाली मिट्टी में या निर्माण के समय उपयोग किए गए पानी में घुलनशील क्षारीय लवण (Soluble Alkalis) मौजूद होते हैं, तो वे पानी के साथ ईंट की सतह पर आ जाते हैं। जब पानी वाष्पित (Evaporate) हो जाता है, तो सतह पर सफेद या भूरे रंग का पाउडर (नमक) जमा हो जाता है। इस दोष को ही एफ्लोरेसेंस (लोना लगना) कहा जाता है।
यदि ईंट बनाने वाली मिट्टी में या निर्माण के समय उपयोग किए गए पानी में घुलनशील क्षारीय लवण (Soluble Alkalis) मौजूद होते हैं, तो वे पानी के साथ ईंट की सतह पर आ जाते हैं। जब पानी वाष्पित (Evaporate) हो जाता है, तो सतह पर सफेद या भूरे रंग का पाउडर (नमक) जमा हो जाता है। इस दोष को ही एफ्लोरेसेंस (लोना लगना) कहा जाता है।
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Q428: प्राकृतिक लकड़ी (Natural Timber) की तुलना में 'प्लाईवुड' (Plywood) का सबसे बड़ा यांत्रिक लाभ क्या है?
- A) यह पूरी तरह से अग्निरोधी (Fireproof) होता है
- B) यह प्राकृतिक लकड़ी से बहुत सस्ता होता है
- ✅ C) इसमें सभी दिशाओं में लगभग समान तनन सामर्थ्य (Uniform tensile strength) होती है (सही उत्तर)
- D) इसका वजन प्राकृतिक लकड़ी से दोगुना होता है
💡 डिटेल Explanation:
प्राकृतिक लकड़ी की मजबूती उसके रेशों (Grains) की दिशा पर निर्भर करती है (रेशों के समानांतर अधिक मजबूत, लंबवत कमजोर)। लेकिन प्लाइवुड बनाते समय प्रत्येक परत (Veneer) के रेशों को एक-दूसरे के समकोण (Right angles) पर रखा जाता है। इस क्रॉस-ग्रेनिंग के कारण प्लाइवुड में सभी दिशाओं में समान मजबूती होती है और यह आसानी से फटता (Split) नहीं है।
प्राकृतिक लकड़ी की मजबूती उसके रेशों (Grains) की दिशा पर निर्भर करती है (रेशों के समानांतर अधिक मजबूत, लंबवत कमजोर)। लेकिन प्लाइवुड बनाते समय प्रत्येक परत (Veneer) के रेशों को एक-दूसरे के समकोण (Right angles) पर रखा जाता है। इस क्रॉस-ग्रेनिंग के कारण प्लाइवुड में सभी दिशाओं में समान मजबूती होती है और यह आसानी से फटता (Split) नहीं है।
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Q429: यदि ऑयल पेंट को किसी 'क्षारीय सतह' (Alkaline surface) जैसे ताजे कंक्रीट या प्लास्टर पर लगाया जाता है, तो पेंट नष्ट होकर साबुन जैसा बन जाता है। इस रासायनिक दोष को क्या कहते हैं?
- A) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- B) ब्लूमिंग (Blooming)
- ✅ C) सैपोनिफिकेशन (Saponification) (सही उत्तर)
- D) फ्लैकिंग (Flaking)
💡 डिटेल Explanation:
ताजे सीमेंट प्लास्टर या कंक्रीट में मुक्त क्षार (Free alkalis) और नमी होती है। जब ऑयल पेंट (जिसमें अलसी का तेल होता है) इस सतह पर लगाया जाता है, तो क्षार और तेल के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिससे साबुन (Soap) का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया को 'सैपोनिफिकेशन' (Saponification) कहते हैं, जो पेंट की परत को पूरी तरह नष्ट कर देता है। इसीलिए नए प्लास्टर पर पेंट करने से पहले 3-6 महीने रुकने की सलाह दी जाती है।
ताजे सीमेंट प्लास्टर या कंक्रीट में मुक्त क्षार (Free alkalis) और नमी होती है। जब ऑयल पेंट (जिसमें अलसी का तेल होता है) इस सतह पर लगाया जाता है, तो क्षार और तेल के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है जिससे साबुन (Soap) का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया को 'सैपोनिफिकेशन' (Saponification) कहते हैं, जो पेंट की परत को पूरी तरह नष्ट कर देता है। इसीलिए नए प्लास्टर पर पेंट करने से पहले 3-6 महीने रुकने की सलाह दी जाती है।
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Q430: 430 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: संरचनात्मक कार्यों (Structural works) के लिए उपयोग किए जाने वाले एक 'अच्छे भवन निर्माण पत्थर' (Good building stone) की 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) सामान्यतः किससे कम नहीं होनी चाहिए?
- A) 25 N/mm² (250 kg/cm²)
- B) 50 N/mm² (500 kg/cm²)
- ✅ C) 100 N/mm² (1000 kg/cm²) (सही उत्तर)
- D) 150 N/mm² (1500 kg/cm²)
💡 डिटेल Explanation:
भवन निर्माण के लिए पत्थर सघन, कठोर और मजबूत होना चाहिए। IS मानकों के अनुसार, भारी संरचनात्मक कार्यों के लिए उपयोग होने वाले एक अच्छे पत्थर की क्रशिंग या संपीडन सामर्थ्य (Compressive strength) 100 N/mm² (या 100 MPa) से कम नहीं होनी चाहिए। ग्रेनाइट और बेसाल्ट जैसे आग्नेय पत्थरों की सामर्थ्य इससे भी बहुत अधिक (150-300 N/mm²) होती है।
भवन निर्माण के लिए पत्थर सघन, कठोर और मजबूत होना चाहिए। IS मानकों के अनुसार, भारी संरचनात्मक कार्यों के लिए उपयोग होने वाले एक अच्छे पत्थर की क्रशिंग या संपीडन सामर्थ्य (Compressive strength) 100 N/mm² (या 100 MPa) से कम नहीं होनी चाहिए। ग्रेनाइट और बेसाल्ट जैसे आग्नेय पत्थरों की सामर्थ्य इससे भी बहुत अधिक (150-300 N/mm²) होती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 87 (Q431 - Q435)
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Q431: कंक्रीट का 'ब्लीडिंग' (Bleeding) दोष क्या है?
- A) कंक्रीट का बहुत जल्दी सूख जाना
- ✅ B) कंक्रीट की सतह पर पानी का ऊपर आना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट के बड़े पत्थरों का नीचे बैठना
- D) कंक्रीट का रंग बदलना
💡 डिटेल Explanation:
ब्लीडिंग (Bleeding) कंक्रीट का एक ऐसा दोष है जिसमें सीमेंट पेस्ट और एग्रीगेट के बीच पानी का घनत्व कम होने से पानी कंक्रीट की सतह पर ऊपर आ जाता है। यह अक्सर कंक्रीट में बहुत अधिक पानी मिलाने (High W/C ratio) से होता है। इससे सतह पर 'लैटेंस' (Laitance) की परत बन जाती है, जिससे ऊपरी सतह कमजोर हो जाती है।
ब्लीडिंग (Bleeding) कंक्रीट का एक ऐसा दोष है जिसमें सीमेंट पेस्ट और एग्रीगेट के बीच पानी का घनत्व कम होने से पानी कंक्रीट की सतह पर ऊपर आ जाता है। यह अक्सर कंक्रीट में बहुत अधिक पानी मिलाने (High W/C ratio) से होता है। इससे सतह पर 'लैटेंस' (Laitance) की परत बन जाती है, जिससे ऊपरी सतह कमजोर हो जाती है।
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Q432: ईंटों को भट्ठे में पकाने के दौरान 'होल्डिंग' (Holding) का क्या अर्थ है?
- A) ईंटों को भट्ठे में लोड करना
- ✅ B) एक निश्चित तापमान को कुछ समय के लिए बनाए रखना (सही उत्तर)
- C) ईंटों को धीरे-धीरे ठंडा करना
- D) भट्ठे की हवा रोकना
💡 डिटेल Explanation:
पकाने की प्रक्रिया के दौरान, एक निश्चित तापमान (आमतौर पर 900°C - 1100°C) तक पहुँचने के बाद, उसे कुछ समय के लिए स्थिर रखा जाता है ताकि ईंटों के अंदरूनी हिस्से तक ऊष्मा समान रूप से पहुँच सके। तापमान को इस स्थिर स्तर पर बनाए रखने की क्रिया को 'होल्डिंग' (Holding) या 'सोकिंग' (Soaking) कहा जाता है।
पकाने की प्रक्रिया के दौरान, एक निश्चित तापमान (आमतौर पर 900°C - 1100°C) तक पहुँचने के बाद, उसे कुछ समय के लिए स्थिर रखा जाता है ताकि ईंटों के अंदरूनी हिस्से तक ऊष्मा समान रूप से पहुँच सके। तापमान को इस स्थिर स्तर पर बनाए रखने की क्रिया को 'होल्डिंग' (Holding) या 'सोकिंग' (Soaking) कहा जाता है।
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Q433: लकड़ी के 'सीजनिंग' (Seasoning) के लिए सबसे पुरानी और प्राकृतिक विधि कौन सी है?
- ✅ A) वायु सीजनिंग (Air Seasoning) (सही उत्तर)
- B) किल्न सीजनिंग (Kiln Seasoning)
- C) रासायनिक सीजनिंग (Chemical Seasoning)
- D) विद्युत सीजनिंग (Electrical Seasoning)
💡 डिटेल Explanation:
वायु सीजनिंग (Air Seasoning) या प्राकृतिक सीजनिंग सबसे पुरानी और सरल विधि है। इसमें लकड़ी के लट्ठों को खुले हवादार शेड में स्टैक बनाकर रख दिया जाता है ताकि प्राकृतिक हवा और धूप से उनकी नमी धीरे-धीरे निकल जाए। यह विधि सस्ती है लेकिन इसमें समय (महीनों) बहुत अधिक लगता है।
वायु सीजनिंग (Air Seasoning) या प्राकृतिक सीजनिंग सबसे पुरानी और सरल विधि है। इसमें लकड़ी के लट्ठों को खुले हवादार शेड में स्टैक बनाकर रख दिया जाता है ताकि प्राकृतिक हवा और धूप से उनकी नमी धीरे-धीरे निकल जाए। यह विधि सस्ती है लेकिन इसमें समय (महीनों) बहुत अधिक लगता है।
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Q434: पेंट में 'पिगमेंट' (Pigment) के साथ मिलाने पर, वह पदार्थ जो पेंट को सतह पर चिपके रहने में मदद करता है, उसे क्या कहते हैं?
- A) थिनर (Thinner)
- B) ड्रायर (Drier)
- ✅ C) बाइंडर (Binder / Vehicle) (सही उत्तर)
- D) बेस (Base)
💡 डिटेल Explanation:
बाइंडर (Binder), जिसे वाहन (Vehicle) भी कहते हैं, पेंट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पिगमेंट और बेस को सतह पर चिपका कर रखता है। सूखने के बाद यही वह पदार्थ है जो एक कठोर, सुरक्षात्मक और चमकदार परत (Film) बनाता है। अलसी का तेल (Linseed Oil) इसका सबसे आम उदाहरण है।
बाइंडर (Binder), जिसे वाहन (Vehicle) भी कहते हैं, पेंट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पिगमेंट और बेस को सतह पर चिपका कर रखता है। सूखने के बाद यही वह पदार्थ है जो एक कठोर, सुरक्षात्मक और चमकदार परत (Film) बनाता है। अलसी का तेल (Linseed Oil) इसका सबसे आम उदाहरण है।
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Q435: 435 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: किस खनिज का उपयोग 'जिप्सम' (Gypsum) के रूप में सीमेंट में 'सेटिंग टाइम' (Setting time) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है?
- ✅ A) कैल्शियम सल्फेट (Calcium Sulphate - CaSO₄.2H₂O) (सही उत्तर)
- B) मैग्नीशियम सल्फेट (Magnesium Sulphate)
- C) आयरन सल्फेट (Iron Sulphate)
- D) एल्युमीनियम सल्फेट (Aluminium Sulphate)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में जिप्सम का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट (CaSO₄.2H₂O) है। सीमेंट बनाते समय इसे 2-3% की मात्रा में मिलाया जाता है। इसका एकमात्र कार्य सीमेंट में मौजूद ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) की तीव्र प्रतिक्रिया को धीमा करना है, जिससे सीमेंट तुरंत न जम (Flash set) जाए और उसे काम में लेने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
सीमेंट में जिप्सम का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट (CaSO₄.2H₂O) है। सीमेंट बनाते समय इसे 2-3% की मात्रा में मिलाया जाता है। इसका एकमात्र कार्य सीमेंट में मौजूद ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) की तीव्र प्रतिक्रिया को धीमा करना है, जिससे सीमेंट तुरंत न जम (Flash set) जाए और उसे काम में लेने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 88 (Q436 - Q440)
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Q436: परिवेश के तापमान (Ambient Temperature) में वृद्धि का कंक्रीट के 'जमाव काल' (Setting time) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) जमाव काल बढ़ जाता है (देर से जमती है)
- ✅ B) जमाव काल कम हो जाता है (जल्दी जमती है) (सही उत्तर)
- C) जमाव काल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
- D) कंक्रीट जमना बंद कर देती है
💡 डिटेल Explanation:
तापमान में वृद्धि होने पर सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की रासायनिक प्रतिक्रिया तेज हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, कंक्रीट तेजी से अपनी सुघट्यता (Plasticity) खोने लगती है और उसका जमाव काल (Setting time) कम हो जाता है। यही कारण है कि गर्मियों में कंक्रीट जल्दी जम जाती है और उसमें दरारें पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
तापमान में वृद्धि होने पर सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की रासायनिक प्रतिक्रिया तेज हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, कंक्रीट तेजी से अपनी सुघट्यता (Plasticity) खोने लगती है और उसका जमाव काल (Setting time) कम हो जाता है। यही कारण है कि गर्मियों में कंक्रीट जल्दी जम जाती है और उसमें दरारें पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
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Q437: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में 'परपेन्ड्स' (Perpends) शब्द का क्या अर्थ है?
- A) क्षैतिज जोड़ (Horizontal joints)
- ✅ B) ऊर्ध्वाधर जोड़ (Vertical joints) (सही उत्तर)
- C) दीवार के कोने (Corners)
- D) ईंट का सामने वाला हिस्सा
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की चिनाई में जो ऊर्ध्वाधर जोड़ (Vertical joints) होते हैं, उन्हें तकनीकी भाषा में 'परपेन्ड्स' (Perpends) कहा जाता है। एक अच्छी चिनाई और मजबूत बॉन्ड (जैसे इंग्लिश बॉन्ड) की पहचान यह है कि एकान्तर परतों (Alternate courses) के परपेन्ड्स एक ही ऊर्ध्वाधर रेखा (Vertical line) में ठीक एक-दूसरे के ऊपर होने चाहिए।
ईंट की चिनाई में जो ऊर्ध्वाधर जोड़ (Vertical joints) होते हैं, उन्हें तकनीकी भाषा में 'परपेन्ड्स' (Perpends) कहा जाता है। एक अच्छी चिनाई और मजबूत बॉन्ड (जैसे इंग्लिश बॉन्ड) की पहचान यह है कि एकान्तर परतों (Alternate courses) के परपेन्ड्स एक ही ऊर्ध्वाधर रेखा (Vertical line) में ठीक एक-दूसरे के ऊपर होने चाहिए।
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Q438: इमारती लकड़ी (Timber) में 'वार्षिक वलयों' (Annual rings) के एक-दूसरे से अलग होने या फटने के कारण उत्पन्न होने वाले दोष को क्या कहते हैं?
- A) गांठें (Knots)
- ✅ B) शेक्स (Shakes) (सही उत्तर)
- C) रिंड गॉल (Rind gall)
- D) फॉक्सीनेस (Foxiness)
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी के तंतुओं (Fibers) या वार्षिक वलयों के एक-दूसरे से अलग होने के कारण पड़ने वाली दरारों को 'शेक्स' (Shakes) कहा जाता है। ये कई प्रकार के होते हैं, जैसे कप शेक (Cup shake), रिंग शेक, हार्ट शेक और स्टार शेक। शेक्स लकड़ी की कतरनी सामर्थ्य (Shear strength) को बहुत कम कर देते हैं।
लकड़ी के तंतुओं (Fibers) या वार्षिक वलयों के एक-दूसरे से अलग होने के कारण पड़ने वाली दरारों को 'शेक्स' (Shakes) कहा जाता है। ये कई प्रकार के होते हैं, जैसे कप शेक (Cup shake), रिंग शेक, हार्ट शेक और स्टार शेक। शेक्स लकड़ी की कतरनी सामर्थ्य (Shear strength) को बहुत कम कर देते हैं।
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Q439: पेंट में 'वाहन' (Vehicle / Drying Oil) मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) पेंट को मनचाहा रंग प्रदान करना
- B) पेंट को जल्दी सुखाना
- ✅ C) पेंट के घटकों को तरल अवस्था में बांधे रखना और सतह पर फैलने में मदद करना (सही उत्तर)
- D) पेंट की कीमत कम करना
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में 'वाहन' (जैसे अलसी का तेल) एक तरल माध्यम (Liquid medium) के रूप में कार्य करता है। यह पेंट के ठोस कणों (बेस और पिगमेंट) को अपने अंदर निलंबन (Suspension) में रखता है, जिससे पेंट को ब्रश की मदद से सतह पर आसानी से और समान रूप से फैलाया जा सकता है। सूखने पर यह एक मजबूत फिल्म बनाता है।
पेंट में 'वाहन' (जैसे अलसी का तेल) एक तरल माध्यम (Liquid medium) के रूप में कार्य करता है। यह पेंट के ठोस कणों (बेस और पिगमेंट) को अपने अंदर निलंबन (Suspension) में रखता है, जिससे पेंट को ब्रश की मदद से सतह पर आसानी से और समान रूप से फैलाया जा सकता है। सूखने पर यह एक मजबूत फिल्म बनाता है।
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Q440: 440 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: निम्नलिखित में से किस भवन निर्माण पत्थर की 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) सबसे अधिक होती है?
- A) सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर)
- B) लाइमस्टोन (चूना पत्थर)
- ✅ C) ग्रेनाइट (Granite) (सही उत्तर)
- D) लेटराइट (Laterite)
💡 डिटेल Explanation:
दिए गए विकल्पों में ग्रेनाइट (Granite) सबसे मजबूत पत्थर है। यह एक आग्नेय चट्टान (Igneous rock) है जो अत्यधिक सघन (Dense) होती है। ग्रेनाइट की संपीडन सामर्थ्य सामान्यतः 100 N/mm² से 250 N/mm² के बीच होती है, जो इसे भारी इंजीनियरिंग कार्यों (जैसे बांध, पुल के पियर्स) के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।
दिए गए विकल्पों में ग्रेनाइट (Granite) सबसे मजबूत पत्थर है। यह एक आग्नेय चट्टान (Igneous rock) है जो अत्यधिक सघन (Dense) होती है। ग्रेनाइट की संपीडन सामर्थ्य सामान्यतः 100 N/mm² से 250 N/mm² के बीच होती है, जो इसे भारी इंजीनियरिंग कार्यों (जैसे बांध, पुल के पियर्स) के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 89 (Q441 - Q445)
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Q441: कंक्रीट या सीमेंट के जलयोजन (Hydration) के दौरान सबसे अधिक ऊष्मा (Heat of hydration) किस बोग्स कंपाउंड (Bogue's Compound) से निकलती है?
- A) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- B) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S)
- ✅ C) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) (सही उत्तर)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) पानी के साथ सबसे तेज प्रतिक्रिया करता है और इसके जलयोजन से सबसे अधिक ऊष्मा (लगभग 865 J/g) उत्पन्न होती है। यही कारण है कि यह कंक्रीट के फ्लैश सेट (तुरंत जमने) के लिए भी जिम्मेदार होता है। कम ऊष्मा वाले सीमेंट (Low Heat Cement) में C3A की मात्रा बहुत कम कर दी जाती है।
ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) पानी के साथ सबसे तेज प्रतिक्रिया करता है और इसके जलयोजन से सबसे अधिक ऊष्मा (लगभग 865 J/g) उत्पन्न होती है। यही कारण है कि यह कंक्रीट के फ्लैश सेट (तुरंत जमने) के लिए भी जिम्मेदार होता है। कम ऊष्मा वाले सीमेंट (Low Heat Cement) में C3A की मात्रा बहुत कम कर दी जाती है।
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Q442: कंक्रीट को सांचे में बिछाने (Placing) के तुरंत बाद 'वाइब्रेटर' (Vibrator) का उपयोग करने का मुख्य कारण क्या है?
- A) कंक्रीट की सतह को चिकना करना
- ✅ B) कंक्रीट में से फंसी हुई हवा (Trapped air / Voids) को बाहर निकालना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट को जल्दी सुखाना
- D) सीमेंट और पानी को मिलाना
💡 डिटेल Explanation:
वाइब्रेटर का उपयोग कंक्रीट के कॉम्पैक्शन (Compaction) के लिए किया जाता है। जब कंक्रीट को डाला जाता है, तो उसके अंदर हवा के बुलबुले (Air voids) फंस जाते हैं जो कंक्रीट की मजबूती को काफी कम कर सकते हैं। वाइब्रेटर इन बुलबुलों को सतह पर लाकर बाहर निकाल देता है, जिससे कंक्रीट सघन (Dense) और अत्यधिक मजबूत बनती है।
वाइब्रेटर का उपयोग कंक्रीट के कॉम्पैक्शन (Compaction) के लिए किया जाता है। जब कंक्रीट को डाला जाता है, तो उसके अंदर हवा के बुलबुले (Air voids) फंस जाते हैं जो कंक्रीट की मजबूती को काफी कम कर सकते हैं। वाइब्रेटर इन बुलबुलों को सतह पर लाकर बाहर निकाल देता है, जिससे कंक्रीट सघन (Dense) और अत्यधिक मजबूत बनती है।
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Q443: इमारती लकड़ी (Timber) में 'कप शेक' (Cup Shake) नामक दोष की क्या पहचान है?
- A) दरारें जो केंद्र (Pith) से बाहर की ओर जाती हैं
- B) दरारें जो बाहर से केंद्र की ओर आती हैं
- ✅ C) दरारें जो 'वार्षिक वलयों' (Annual rings) के बीच या उनके समानांतर घुमावदार (Curved) होती हैं (सही उत्तर)
- D) लकड़ी का लंबाई में ऐंठ जाना
💡 डिटेल Explanation:
कप शेक (Cup Shake) वे घुमावदार दरारें होती हैं जो एक वार्षिक वलय (Annual ring) को दूसरे से आंशिक रूप से अलग करती हैं, जिससे यह कप के आकार जैसी दिखती हैं। यह अत्यधिक तेज हवाओं या असमान वृद्धि के कारण होता है। जब यह दरार वलय को पूरी तरह (गोलाई में) अलग कर देती है, तो इसे 'रिंग शेक' (Ring Shake) कहते हैं।
कप शेक (Cup Shake) वे घुमावदार दरारें होती हैं जो एक वार्षिक वलय (Annual ring) को दूसरे से आंशिक रूप से अलग करती हैं, जिससे यह कप के आकार जैसी दिखती हैं। यह अत्यधिक तेज हवाओं या असमान वृद्धि के कारण होता है। जब यह दरार वलय को पूरी तरह (गोलाई में) अलग कर देती है, तो इसे 'रिंग शेक' (Ring Shake) कहते हैं।
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Q444: उच्च गुणवत्ता वाले 'इनेमल पेंट' (Enamel Paint) को बनाने के लिए पिगमेंट (रंग) को किसमें मिलाया जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- B) तारपीन का तेल (Turpentine)
- C) पानी (Water)
- ✅ D) वार्निश (Varnish) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
इनेमल पेंट एक बहुत ही उच्च गुणवत्ता वाला और टिकाऊ पेंट है जो सूखने के बाद अत्यंत कठोर, चमकदार (Glossy) और चिकनी फिल्म बनाता है। इसे बनाने के लिए पिगमेंट (जैसे सफेद सीसा या जिंक) को सीधे तेल के बजाय 'वार्निश' (आमतौर पर ऑयल वार्निश) में मिलाया जाता है। इसका उपयोग अक्सर दरवाजों, खिड़कियों और धातु की सतहों पर होता है।
इनेमल पेंट एक बहुत ही उच्च गुणवत्ता वाला और टिकाऊ पेंट है जो सूखने के बाद अत्यंत कठोर, चमकदार (Glossy) और चिकनी फिल्म बनाता है। इसे बनाने के लिए पिगमेंट (जैसे सफेद सीसा या जिंक) को सीधे तेल के बजाय 'वार्निश' (आमतौर पर ऑयल वार्निश) में मिलाया जाता है। इसका उपयोग अक्सर दरवाजों, खिड़कियों और धातु की सतहों पर होता है।
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Q445: 445 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: ईंट की चिनाई में 'किंग क्लोजर' (King Closer) कैसे प्राप्त किया जाता है?
- A) ईंट को लंबाई में आधा काटकर
- B) ईंट को चौड़ाई में आधा काटकर
- ✅ C) ईंट के एक सिरे (Header) के मध्य से लेकर उसकी लंबाई (Stretcher) के मध्य तक तिरछा काटकर त्रिकोणीय हिस्सा अलग करना (सही उत्तर)
- D) ईंट के केवल एक कोने को हल्का सा गोल करके
💡 डिटेल Explanation:
जब ईंट के एक सिरे (Header Face) के मध्य बिंदु (Center) से लेकर उसकी लंबी साइड (Stretcher Face) के मध्य बिंदु तक एक तिरछा कट लगाकर एक तिकोना हिस्सा निकाल दिया जाता है, तो बची हुई ईंट को 'किंग क्लोजर' (King Closer) कहते हैं। इसका उपयोग दीवारों के कोनों या जंक्शन पर बॉन्ड तोड़ने और मजबूती बनाए रखने के लिए होता है।
जब ईंट के एक सिरे (Header Face) के मध्य बिंदु (Center) से लेकर उसकी लंबी साइड (Stretcher Face) के मध्य बिंदु तक एक तिरछा कट लगाकर एक तिकोना हिस्सा निकाल दिया जाता है, तो बची हुई ईंट को 'किंग क्लोजर' (King Closer) कहते हैं। इसका उपयोग दीवारों के कोनों या जंक्शन पर बॉन्ड तोड़ने और मजबूती बनाए रखने के लिए होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 90 (Q446 - Q450)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q446: कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) मापने के लिए 'वी-बी कंसिस्टोमीटर' (Vee-Bee Consistometer) परीक्षण किस प्रकार की कंक्रीट के लिए सबसे उपयुक्त है?
- A) अत्यधिक सुकार्यता वाली (High workability)
- B) मध्यम सुकार्यता वाली (Medium workability)
- ✅ C) सूखी और कम सुकार्यता (Low to very low workability) वाली (सही उत्तर)
- D) बहने वाली (Flowing) कंक्रीट
💡 डिटेल Explanation:
वी-बी (Vee-Bee) परीक्षण कंक्रीट की सुकार्यता मापने का एक अत्यंत संवेदनशील तरीका है। जब कंक्रीट बहुत सूखी (Stiff) होती है और उसका स्लंप मान (Slump value) शून्य या बहुत कम होता है, तब स्लंप टेस्ट काम नहीं आता। ऐसे में वाइब्रेशन द्वारा कंक्रीट का आकार बदलने में लगने वाले समय (Vee-Bee degree in seconds) को मापा जाता है।
वी-बी (Vee-Bee) परीक्षण कंक्रीट की सुकार्यता मापने का एक अत्यंत संवेदनशील तरीका है। जब कंक्रीट बहुत सूखी (Stiff) होती है और उसका स्लंप मान (Slump value) शून्य या बहुत कम होता है, तब स्लंप टेस्ट काम नहीं आता। ऐसे में वाइब्रेशन द्वारा कंक्रीट का आकार बदलने में लगने वाले समय (Vee-Bee degree in seconds) को मापा जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam
Q447: ईंट की चिनाई में, ईंट का वह टुकड़ा जिसका एक सिरा उसकी पूरी चौड़ाई (Width) में 45° से 60° के कोण (Angle) पर काटा जाता है, क्या कहलाता है?
- A) क्वीन क्लोजर (Queen Closer)
- B) किंग क्लोजर (King Closer)
- ✅ C) मायटर्ड क्लोजर (Mitred Closer) (सही उत्तर)
- D) बेवेल्ड क्लोजर (Bevelled Closer)
💡 डिटेल Explanation:
जब किसी ईंट के एक सिरे (Header) को उसकी चौड़ाई के आर-पार 45 से 60 डिग्री के तिरछे कोण पर काटा जाता है, तो उसे 'मायटर्ड क्लोजर' (Mitred Closer) कहते हैं। इसका उपयोग अक्सर दीवार के उन कोनों (Corners) पर किया जाता है जहाँ दीवारें समकोण (90°) के अलावा किसी अन्य कोण पर मिलती हैं।
जब किसी ईंट के एक सिरे (Header) को उसकी चौड़ाई के आर-पार 45 से 60 डिग्री के तिरछे कोण पर काटा जाता है, तो उसे 'मायटर्ड क्लोजर' (Mitred Closer) कहते हैं। इसका उपयोग अक्सर दीवार के उन कोनों (Corners) पर किया जाता है जहाँ दीवारें समकोण (90°) के अलावा किसी अन्य कोण पर मिलती हैं।
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Q448: रेलवे स्लीपर (Railway sleepers) और लकड़ी के खंभों को सड़ने और दीमक से बचाने के लिए सबसे उत्कृष्ट परिरक्षक (Preservative) किसे माना जाता है?
- A) तारपीन का तेल (Turpentine Oil)
- B) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- C) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish)
- ✅ D) क्रिओसोट तेल (Creosote Oil) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
क्रिओसोट तेल (Creosote Oil) कोल टार (Coal tar) के आसवन (Distillation) से प्राप्त होता है। यह एक अत्यंत विषैला और तीखी गंध वाला काला तेल है, जो लकड़ी को नमी, फफूंदी, और दीमक से असाधारण सुरक्षा प्रदान करता है। इसकी खराब गंध और काले रंग के कारण इसे घर के अंदर (Interior) उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि रेलवे स्लीपरों और टेलीफोन के खंभों में इस्तेमाल किया जाता है।
क्रिओसोट तेल (Creosote Oil) कोल टार (Coal tar) के आसवन (Distillation) से प्राप्त होता है। यह एक अत्यंत विषैला और तीखी गंध वाला काला तेल है, जो लकड़ी को नमी, फफूंदी, और दीमक से असाधारण सुरक्षा प्रदान करता है। इसकी खराब गंध और काले रंग के कारण इसे घर के अंदर (Interior) उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि रेलवे स्लीपरों और टेलीफोन के खंभों में इस्तेमाल किया जाता है।
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Q449: यदि पेंट को किसी ऊर्ध्वाधर (Vertical) या ढलान वाली सतह पर बहुत मोटी परत में लगाया जाए, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण पेंट के नीचे की ओर बहकर मोटी रेखाएं बनाने के दोष को क्या कहते हैं?
- A) फ्लैकिंग (Flaking)
- ✅ B) सैगिंग (Sagging) (सही उत्तर)
- C) चॉकिंग (Chalking)
- D) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
💡 डिटेल Explanation:
सैगिंग (Sagging) तब होता है जब पेंट बहुत गाढ़ा होता है और उसे खड़ी सतह (Vertical surface) पर अत्यधिक मोटी परत में लगा दिया जाता है। पेंट सूखने से पहले ही अपने वजन और गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर खिसकने या लटकने लगता है, जिससे सतह पर भद्दी लहरें या रेखाएं बन जाती हैं।
सैगिंग (Sagging) तब होता है जब पेंट बहुत गाढ़ा होता है और उसे खड़ी सतह (Vertical surface) पर अत्यधिक मोटी परत में लगा दिया जाता है। पेंट सूखने से पहले ही अपने वजन और गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर खिसकने या लटकने लगता है, जिससे सतह पर भद्दी लहरें या रेखाएं बन जाती हैं।
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Q450: 450 MCQ का महा-पड़ाव पार! 🎉 प्रश्न: भवन निर्माण में 'स्लेट' (Slate) पत्थर का सबसे उत्कृष्ट और प्रमुख उपयोग किस कार्य के लिए किया जाता है?
- A) कंक्रीट की गिट्टी (Aggregate) के लिए
- ✅ B) ढलान वाली छतें (Roofing tiles) बनाने के लिए (सही उत्तर)
- C) भारी पुलों के खंभे (Piers) बनाने के लिए
- D) सड़क का आधार (Road base) बनाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
स्लेट (Slate) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic rock) है जिसमें एक बहुत ही विशिष्ट गुण होता है जिसे 'क्लीवेज' (Cleavage) कहते हैं। इस गुण के कारण स्लेट को बहुत ही पतली, समतल और जलरोधी चादरों (Sheets/Tiles) में आसानी से तोड़ा जा सकता है। इसी वजह से पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान वाली छतों (Roofing) के लिए यह सबसे बेहतरीन सामग्री मानी जाती है।
स्लेट (Slate) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic rock) है जिसमें एक बहुत ही विशिष्ट गुण होता है जिसे 'क्लीवेज' (Cleavage) कहते हैं। इस गुण के कारण स्लेट को बहुत ही पतली, समतल और जलरोधी चादरों (Sheets/Tiles) में आसानी से तोड़ा जा सकता है। इसी वजह से पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान वाली छतों (Roofing) के लिए यह सबसे बेहतरीन सामग्री मानी जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 91 (Q451 - Q455)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, DMRC JE
Q451: कंक्रीट निर्माण में सामान्य RCC कार्यों (जैसे स्लैब, बीम और कॉलम) के लिए 'स्लंप' (Slump) का अनुशंसित मान कितना होता है?
- A) 25 - 50 mm
- ✅ B) 50 - 100 mm (सही उत्तर)
- C) 100 - 150 mm
- D) 150 - 200 mm
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के अनुसार, सामान्य RCC (प्रबलित कंक्रीट) कार्यों के लिए 'मध्यम सुकार्यता' (Medium Workability) की आवश्यकता होती है, जिसके लिए स्लंप मान 50 से 100 mm के बीच रखा जाता है। भारी मास कंक्रीट (Mass concrete) के लिए यह 25-50 mm और पंप की जाने वाली कंक्रीट (Pumped concrete) के लिए 100-150 mm होता है।
IS 456 के अनुसार, सामान्य RCC (प्रबलित कंक्रीट) कार्यों के लिए 'मध्यम सुकार्यता' (Medium Workability) की आवश्यकता होती है, जिसके लिए स्लंप मान 50 से 100 mm के बीच रखा जाता है। भारी मास कंक्रीट (Mass concrete) के लिए यह 25-50 mm और पंप की जाने वाली कंक्रीट (Pumped concrete) के लिए 100-150 mm होता है।
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Q452: एक मानक आकार की पकी हुई 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (Standard First Class Brick) का औसत वजन लगभग कितना होता है?
- A) 1.5 से 2.0 kg
- ✅ B) 2.75 से 3.0 kg (सही उत्तर)
- C) 3.5 से 4.0 kg
- D) 4.5 से 5.0 kg
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी गुणवत्ता वाली पकी हुई मानक ईंट (Standard modular brick: 19x9x9 cm) का वजन आमतौर पर 2.75 kg से 3.0 kg (या 27.5 N से 30 N) के बीच होता है। ईंट का वजन उसके घनत्व (Density) को दर्शाता है, जो सामान्यतः 1800 से 1920 kg/m³ के बीच होता है। अत्यधिक हल्की ईंटें कमजोर होती हैं।
एक अच्छी गुणवत्ता वाली पकी हुई मानक ईंट (Standard modular brick: 19x9x9 cm) का वजन आमतौर पर 2.75 kg से 3.0 kg (या 27.5 N से 30 N) के बीच होता है। ईंट का वजन उसके घनत्व (Density) को दर्शाता है, जो सामान्यतः 1800 से 1920 kg/m³ के बीच होता है। अत्यधिक हल्की ईंटें कमजोर होती हैं।
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Q453: बाजार में व्यावसायिक रूप से 'प्लाईवुड' (Plywood) को मुख्य रूप से किस आधार पर निर्दिष्ट (Specified) किया जाता है?
- A) इसके वजन (Weight) द्वारा
- B) इसके आयतन (Volume) द्वारा
- ✅ C) इसकी मोटाई (Thickness) द्वारा (सही उत्तर)
- D) इसमें प्रयुक्त गोंद के प्रकार द्वारा
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड को हमेशा उसकी 'मोटाई' (Thickness) के आधार पर निर्दिष्ट और बेचा जाता है। यह बाजार में विभिन्न मोटाइयों जैसे 3 mm, 4 mm, 6 mm, 12 mm, 18 mm और 25 mm आदि में उपलब्ध होता है। इसे बनाने के लिए हमेशा विषम (Odd) संख्या में विनियर (Veneers) की परतों (जैसे 3, 5, 7) का उपयोग किया जाता है ताकि तनाव संतुलित रहे।
प्लाईवुड को हमेशा उसकी 'मोटाई' (Thickness) के आधार पर निर्दिष्ट और बेचा जाता है। यह बाजार में विभिन्न मोटाइयों जैसे 3 mm, 4 mm, 6 mm, 12 mm, 18 mm और 25 mm आदि में उपलब्ध होता है। इसे बनाने के लिए हमेशा विषम (Odd) संख्या में विनियर (Veneers) की परतों (जैसे 3, 5, 7) का उपयोग किया जाता है ताकि तनाव संतुलित रहे।
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Q454: लोहे और स्टील की सतहों (Iron works) को जंग (Rust) से बचाने के लिए 'प्राइमर कोट' (Primer coat) के रूप में किस बेस का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है?
- A) व्हाइट लेड (White Lead)
- ✅ B) रेड लेड (Red Lead) (सही उत्तर)
- C) जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide)
- D) लिथोपोन (Lithopone)
💡 डिटेल Explanation:
लोहे और इस्पात (Steel) की सतहों के लिए 'रेड लेड' (Red Lead) सबसे बेहतरीन बेस और प्राइमर माना जाता है। यह लोहे की सतह पर एक अत्यंत मजबूत, संक्षारण-रोधी (Anti-corrosive) परत बनाता है जो उसे जंग लगने से बचाता है। इसके विपरीत, लकड़ी के कार्यों (Wood works) के लिए 'व्हाइट लेड' (White Lead) का उपयोग प्राइमर के रूप में किया जाता है।
लोहे और इस्पात (Steel) की सतहों के लिए 'रेड लेड' (Red Lead) सबसे बेहतरीन बेस और प्राइमर माना जाता है। यह लोहे की सतह पर एक अत्यंत मजबूत, संक्षारण-रोधी (Anti-corrosive) परत बनाता है जो उसे जंग लगने से बचाता है। इसके विपरीत, लकड़ी के कार्यों (Wood works) के लिए 'व्हाइट लेड' (White Lead) का उपयोग प्राइमर के रूप में किया जाता है।
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Q455: 455 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भवन निर्माण पत्थरों के परीक्षण में 'स्मिथ टेस्ट' (Smith's Test) का उपयोग क्या पता लगाने के लिए किया जाता है?
- A) पत्थर की कठोरता (Hardness)
- B) पत्थर का जल अवशोषण (Water Absorption)
- ✅ C) पत्थर में घुलनशील मिट्टी या कीचड़ की उपस्थिति (Presence of soluble muddy/earthy matter) (सही उत्तर)
- D) पत्थर की संपीडन सामर्थ्य
💡 डिटेल Explanation:
स्मिथ टेस्ट (Smith's Test) में पत्थर के कुछ टुकड़ों को साफ पानी से भरे गिलास में डाला जाता है और अच्छी तरह हिलाया जाता है। यदि एक घंटे बाद पानी गंदला (Dirty/Cloudy) हो जाता है, तो इसका मतलब है कि पत्थर में बहुत अधिक मिट्टी (Earthy matter) या घुलनशील खनिज मौजूद हैं। ऐसे पत्थर मौसम की मार नहीं झेल सकते और कम टिकाऊ होते हैं।
स्मिथ टेस्ट (Smith's Test) में पत्थर के कुछ टुकड़ों को साफ पानी से भरे गिलास में डाला जाता है और अच्छी तरह हिलाया जाता है। यदि एक घंटे बाद पानी गंदला (Dirty/Cloudy) हो जाता है, तो इसका मतलब है कि पत्थर में बहुत अधिक मिट्टी (Earthy matter) या घुलनशील खनिज मौजूद हैं। ऐसे पत्थर मौसम की मार नहीं झेल सकते और कम टिकाऊ होते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 92 (Q456 - Q460)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q456: समुद्री जल (Sea water) या सल्फेट युक्त मिट्टी में कंक्रीट निर्माण के लिए किस प्रकार के सीमेंट का उपयोग सबसे अच्छा माना जाता है?
- A) रैपिड हार्डनिंग सीमेंट
- ✅ B) सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट (Sulphate Resisting Cement) (सही उत्तर)
- C) क्विक सेटिंग सीमेंट
- D) वाइट सीमेंट
💡 डिटेल Explanation:
समुद्री जल और कुछ प्रकार की मिट्टी में सल्फेट्स (Sulphates) होते हैं जो साधारण सीमेंट (OPC) में मौजूद C3A के साथ प्रतिक्रिया करके कंक्रीट में फैलाव और दरारें पैदा करते हैं। इसे 'सल्फेट अटैक' कहते हैं। इससे बचने के लिए सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट का उपयोग किया जाता है, जिसमें C3A की मात्रा 5% से कम रखी जाती है।
समुद्री जल और कुछ प्रकार की मिट्टी में सल्फेट्स (Sulphates) होते हैं जो साधारण सीमेंट (OPC) में मौजूद C3A के साथ प्रतिक्रिया करके कंक्रीट में फैलाव और दरारें पैदा करते हैं। इसे 'सल्फेट अटैक' कहते हैं। इससे बचने के लिए सल्फेट रेजिस्टिंग सीमेंट का उपयोग किया जाता है, जिसमें C3A की मात्रा 5% से कम रखी जाती है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam
Q457: भारतीय मानक (IS 1077) के अनुसार, एक 'सामान्य पकी हुई ईंट' (Common Burnt Clay Brick) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Minimum Compressive Strength) कितनी होनी चाहिए?
- ✅ A) 3.5 N/mm² (35 kg/cm²) (सही उत्तर)
- B) 5.5 N/mm² (55 kg/cm²)
- C) 7.5 N/mm² (75 kg/cm²)
- D) 10.5 N/mm² (105 kg/cm²)
💡 डिटेल Explanation:
भवन निर्माण में उपयोग होने वाली किसी भी पकी हुई मिट्टी की ईंट की न्यूनतम क्रशिंग स्ट्रेंथ 3.5 N/mm² से कम नहीं होनी चाहिए। इससे कम सामर्थ्य वाली ईंटों को चिनाई कार्यों (Masonry work) के लिए अयोग्य माना जाता है। (प्रथम श्रेणी की ईंट के लिए यह 10.5 N/mm² होती है)।
भवन निर्माण में उपयोग होने वाली किसी भी पकी हुई मिट्टी की ईंट की न्यूनतम क्रशिंग स्ट्रेंथ 3.5 N/mm² से कम नहीं होनी चाहिए। इससे कम सामर्थ्य वाली ईंटों को चिनाई कार्यों (Masonry work) के लिए अयोग्य माना जाता है। (प्रथम श्रेणी की ईंट के लिए यह 10.5 N/mm² होती है)।
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Q458: इमारती लकड़ी को सुखाने (Seasoning) के दौरान, असमान सिकुड़न के कारण लकड़ी के तख्ते (Board) का उसकी 'चौड़ाई' (Width) की दिशा में मुड़ जाना क्या कहलाता है?
- A) बोइंग (Bowing)
- ✅ B) कपिंग (Cupping) (सही उत्तर)
- C) ट्विस्टिंग (Twisting)
- D) स्प्रिंगिंग (Springing)
💡 डिटेल Explanation:
जब लकड़ी का बोर्ड अपनी चौड़ाई (Transverse direction) के आर-पार सिकुड़कर एक कप या प्याली के आकार में मुड़ जाता है, तो इस दोष को 'कपिंग' (Cupping) कहते हैं। वहीं, यदि यह अपनी लंबाई (Longitudinally) के अनुसार मुड़ता है, तो उसे 'बोइंग' (Bowing) कहा जाता है।
जब लकड़ी का बोर्ड अपनी चौड़ाई (Transverse direction) के आर-पार सिकुड़कर एक कप या प्याली के आकार में मुड़ जाता है, तो इस दोष को 'कपिंग' (Cupping) कहते हैं। वहीं, यदि यह अपनी लंबाई (Longitudinally) के अनुसार मुड़ता है, तो उसे 'बोइंग' (Bowing) कहा जाता है।
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Q459: पेंटिंग कार्य में सतह पर सबसे पहले 'प्राइमर' (Primer coat) लगाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) पेंट को चमकदार बनाना
- B) पेंट का रंग निखारना
- ✅ C) सतह के छिद्रों को भरना और पेंट को सतह से मजबूती से चिपकाए रखना (Adhesion) (सही उत्तर)
- D) पेंट को पतला करना
💡 डिटेल Explanation:
प्राइमर (Primer) का मुख्य काम सतह (लकड़ी, धातु या प्लास्टर) के सूक्ष्म छिद्रों (Pores) को सील करना है ताकि सतह बाद में लगाए गए पेंट के तेल को न सोखे। इसके अलावा, यह सतह और पेंट की परतों के बीच एक बेहतरीन पकड़ (Adhesion / Bond) बनाता है, जिससे पेंट की उम्र बढ़ जाती है।
प्राइमर (Primer) का मुख्य काम सतह (लकड़ी, धातु या प्लास्टर) के सूक्ष्म छिद्रों (Pores) को सील करना है ताकि सतह बाद में लगाए गए पेंट के तेल को न सोखे। इसके अलावा, यह सतह और पेंट की परतों के बीच एक बेहतरीन पकड़ (Adhesion / Bond) बनाता है, जिससे पेंट की उम्र बढ़ जाती है।
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Q460: 460 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: सड़क निर्माण (Road construction) में पत्थरों के आपस में रगड़ खाने से होने वाले घिसाव (Mutual wear and tear) को मापने के लिए कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) इम्पैक्ट टेस्ट (Impact Test)
- ✅ B) एट्रिशन टेस्ट / डेवाल टेस्ट (Attrition Test / Deval's Test) (सही उत्तर)
- C) लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट (Abrasion Test)
- D) क्रशिंग टेस्ट (Crushing Test)
💡 डिटेल Explanation:
एट्रिशन टेस्ट (Attrition Test), जिसे डेवाल परीक्षण भी कहते हैं, में पत्थरों के नमूनों को एक बंद सिलेंडर में घुमाया जाता है जिससे वे एक-दूसरे से रगड़ खाते हैं (Mutual rubbing)। यह एब्रेशन टेस्ट से अलग है, क्योंकि एब्रेशन टेस्ट में पत्थरों को स्टील की गेंदों (Steel balls) के साथ रगड़ा जाता है। यह परीक्षण सड़क की गिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए महत्वपूर्ण है।
एट्रिशन टेस्ट (Attrition Test), जिसे डेवाल परीक्षण भी कहते हैं, में पत्थरों के नमूनों को एक बंद सिलेंडर में घुमाया जाता है जिससे वे एक-दूसरे से रगड़ खाते हैं (Mutual rubbing)। यह एब्रेशन टेस्ट से अलग है, क्योंकि एब्रेशन टेस्ट में पत्थरों को स्टील की गेंदों (Steel balls) के साथ रगड़ा जाता है। यह परीक्षण सड़क की गिट्टी की गुणवत्ता जांचने के लिए महत्वपूर्ण है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 93 (Q461 - Q465)
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Q461: कंक्रीट का 'पॉइसन अनुपात' (Poisson's ratio) सामान्यतः किस सीमा (Range) के बीच होता है?
- ✅ A) 0.10 से 0.20 (सही उत्तर)
- B) 0.25 से 0.33
- C) 0.35 से 0.45
- D) 0.50
💡 डिटेल Explanation:
पॉइसन अनुपात किसी सामग्री के अनुप्रस्थ विकृति (Lateral strain) और अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal strain) का अनुपात होता है। कंक्रीट के लिए यह मान सामान्यतः 0.10 से 0.20 के बीच माना जाता है। उच्च सामर्थ्य वाली (High strength) कंक्रीट के लिए यह मान कम (0.1) और कमजोर कंक्रीट के लिए अधिक (0.2) होता है।
पॉइसन अनुपात किसी सामग्री के अनुप्रस्थ विकृति (Lateral strain) और अनुदैर्ध्य विकृति (Longitudinal strain) का अनुपात होता है। कंक्रीट के लिए यह मान सामान्यतः 0.10 से 0.20 के बीच माना जाता है। उच्च सामर्थ्य वाली (High strength) कंक्रीट के लिए यह मान कम (0.1) और कमजोर कंक्रीट के लिए अधिक (0.2) होता है।
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Q462: भारतीय मानकों (IS 3495) के अनुसार, ईंटों में 'एफ्लोरेसेंस' (Efflorescence - लोना) की मात्रा यदि ईंट के खुले क्षेत्र के 10% से 50% हिस्से को कवर करती है (बिना पाउडर बने), तो इसे किस श्रेणी में रखा जाता है?
- A) Slight (हल्का)
- ✅ B) Moderate (मध्यम) (सही उत्तर)
- C) Heavy (भारी)
- D) Serious (गंभीर)
💡 डिटेल Explanation:
एफ्लोरेसेंस की श्रेणियाँ इस प्रकार हैं:
• Nil: शून्य (0%)
• Slight (हल्का): 10% से कम क्षेत्र
• Moderate (मध्यम): 10% से 50% के बीच
• Heavy (भारी): 50% से अधिक (लेकिन ईंट पाउडर नहीं बनती)
• Serious (गंभीर): जब ईंट की सतह नमक के कारण छिलने/पाउडर बनने लगे।
एफ्लोरेसेंस की श्रेणियाँ इस प्रकार हैं:
• Nil: शून्य (0%)
• Slight (हल्का): 10% से कम क्षेत्र
• Moderate (मध्यम): 10% से 50% के बीच
• Heavy (भारी): 50% से अधिक (लेकिन ईंट पाउडर नहीं बनती)
• Serious (गंभीर): जब ईंट की सतह नमक के कारण छिलने/पाउडर बनने लगे।
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Q463: प्लाइवुड (Plywood) के निर्माण में, लकड़ी की परतों (Veneers) को एक-दूसरे के ऊपर चिपकाते समय उनके रेशों (Grains) की दिशा कैसे रखी जाती है?
- A) सभी परतों के रेशे एक ही दिशा में (समानांतर) रखे जाते हैं
- ✅ B) एक परत के रेशे दूसरी परत के समकोण (Right angles) पर रखे जाते हैं (सही उत्तर)
- C) 45 डिग्री के कोण पर रखे जाते हैं
- D) बिना किसी निश्चित दिशा के बेतरतीब ढंग से रखे जाते हैं
💡 डिटेल Explanation:
प्लाइवुड बनाने की इस तकनीक को 'क्रॉस-ग्रेनिंग' (Cross-graining) कहा जाता है। इसमें हर अगली परत (Veneer) के रेशों को पिछली परत के रेशों के ठीक 90° (समकोण) पर चिपकाया जाता है। इसी संरचना के कारण प्लाइवुड में सिकुड़ने या फटने की प्रवृत्ति (Tendency to split) खत्म हो जाती है और यह हर दिशा में समान रूप से मजबूत होता है।
प्लाइवुड बनाने की इस तकनीक को 'क्रॉस-ग्रेनिंग' (Cross-graining) कहा जाता है। इसमें हर अगली परत (Veneer) के रेशों को पिछली परत के रेशों के ठीक 90° (समकोण) पर चिपकाया जाता है। इसी संरचना के कारण प्लाइवुड में सिकुड़ने या फटने की प्रवृत्ति (Tendency to split) खत्म हो जाती है और यह हर दिशा में समान रूप से मजबूत होता है।
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Q464: नई प्लास्टर की गई दीवारों या ताजे कंक्रीट पर तुरंत ऑयल पेंट करने से बचने की सलाह क्यों दी जाती है?
- A) पेंट बहुत देर से सूखता है
- ✅ B) सतह के क्षार (Alkalis) और पेंट के तेल के बीच प्रतिक्रिया (Saponification) के कारण पेंट खराब हो जाता है (सही उत्तर)
- C) सतह बहुत अधिक पेंट सोख लेती है
- D) पेंट का रंग गहरा हो जाता है
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट प्लास्टर और कंक्रीट में मुक्त क्षार (Free Alkalis) और नमी होती है। जब इन पर अलसी के तेल (Linseed oil) वाला पेंट लगाया जाता है, तो तेल और क्षार मिलकर साबुन (Soap) बना लेते हैं। इस रासायनिक प्रक्रिया को सैपोनिफिकेशन (Saponification) कहते हैं, जो पेंट की परत को पूरी तरह गला कर नष्ट कर देता है। इसलिए सतह को 3-6 महीने तक सूखने देना चाहिए।
सीमेंट प्लास्टर और कंक्रीट में मुक्त क्षार (Free Alkalis) और नमी होती है। जब इन पर अलसी के तेल (Linseed oil) वाला पेंट लगाया जाता है, तो तेल और क्षार मिलकर साबुन (Soap) बना लेते हैं। इस रासायनिक प्रक्रिया को सैपोनिफिकेशन (Saponification) कहते हैं, जो पेंट की परत को पूरी तरह गला कर नष्ट कर देता है। इसलिए सतह को 3-6 महीने तक सूखने देना चाहिए।
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Q465: 465 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: 'क्वार्टजाइट' (Quartzite) जो भवन निर्माण में उपयोग होने वाला एक अत्यंत कठोर पत्थर है, भूवैज्ञानिक रूप से किस प्रकार की चट्टान है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous Rock)
- B) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
- ✅ C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) (सही उत्तर)
- D) रासायनिक चट्टान (Chemical Rock)
💡 डिटेल Explanation:
क्वार्टजाइट (Quartzite) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण अवसादी चट्टान 'सैंडस्टोन' (बलुआ पत्थर) पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी और दबाव (Heat and pressure) पड़ने से होता है। यह रासायनिक रूप से सिलिसियस (Siliceous) होता है और प्रकृति में पाए जाने वाले सबसे कठोर और टिकाऊ पत्थरों में से एक है।
क्वार्टजाइट (Quartzite) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण अवसादी चट्टान 'सैंडस्टोन' (बलुआ पत्थर) पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी और दबाव (Heat and pressure) पड़ने से होता है। यह रासायनिक रूप से सिलिसियस (Siliceous) होता है और प्रकृति में पाए जाने वाले सबसे कठोर और टिकाऊ पत्थरों में से एक है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 94 (Q466 - Q470)
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Q466: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) सामान्यतः कितना होता है?
- A) 1.44
- B) 2.65
- ✅ C) 3.15 (सही उत्तर)
- D) 3.80
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) पानी के घनत्व के सापेक्ष सीमेंट का घनत्व होता है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह मान 3.15 होता है। इस परीक्षण को प्रयोगशाला में 'ली चेटेलियर फ्लास्क' (Le Chatelier Flask) और मिट्टी के तेल (Kerosene) का उपयोग करके किया जाता है, क्योंकि सीमेंट पानी के साथ प्रतिक्रिया करता है लेकिन मिट्टी के तेल के साथ नहीं।
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) पानी के घनत्व के सापेक्ष सीमेंट का घनत्व होता है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह मान 3.15 होता है। इस परीक्षण को प्रयोगशाला में 'ली चेटेलियर फ्लास्क' (Le Chatelier Flask) और मिट्टी के तेल (Kerosene) का उपयोग करके किया जाता है, क्योंकि सीमेंट पानी के साथ प्रतिक्रिया करता है लेकिन मिट्टी के तेल के साथ नहीं।
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Q467: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में उपयोग किए जाने वाले मोर्टार (मसाले) के जोड़ की 'मानक मोटाई' (Standard thickness of mortar joint) कितनी मानी जाती है?
- A) 5 mm
- ✅ B) 10 mm (सही उत्तर)
- C) 15 mm
- D) 20 mm
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की चिनाई की मजबूती और एकरूपता बनाए रखने के लिए मोर्टार की मोटाई महत्वपूर्ण है। भारतीय मानकों के अनुसार, क्षैतिज (Horizontal) और ऊर्ध्वाधर (Vertical) दोनों जोड़ों के लिए मोर्टार की मानक मोटाई 10 mm (लगभग 1 cm) मानी जाती है। इसी कारण 19x9x9 cm की मॉड्यूलर ईंट, मोर्टार के साथ 20x10x10 cm का स्थान (Nominal size) घेरती है।
ईंट की चिनाई की मजबूती और एकरूपता बनाए रखने के लिए मोर्टार की मोटाई महत्वपूर्ण है। भारतीय मानकों के अनुसार, क्षैतिज (Horizontal) और ऊर्ध्वाधर (Vertical) दोनों जोड़ों के लिए मोर्टार की मानक मोटाई 10 mm (लगभग 1 cm) मानी जाती है। इसी कारण 19x9x9 cm की मॉड्यूलर ईंट, मोर्टार के साथ 20x10x10 cm का स्थान (Nominal size) घेरती है।
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Q468: इमारती लकड़ी (Timber) में 'वॉर्पिंग' (Warping) दोष का मुख्य अर्थ क्या है?
- A) लकड़ी का रंग उड़ जाना
- ✅ B) लकड़ी का अपनी मूल आकृति से विकृत (Distort) या टेढ़ा-मेढ़ा हो जाना (सही उत्तर)
- C) लकड़ी में दीमक लग जाना
- D) लकड़ी का पूरी तरह से सिकुड़ जाना
💡 डिटेल Explanation:
वॉर्पिंग (Warping) लकड़ी के उस दोष को कहते हैं जिसमें लकड़ी का तख्ता या टुकड़ा अपनी मूल समतल (Flat) आकृति खोकर टेढ़ा-मेढ़ा या मुड़ा हुआ हो जाता है। यह आमतौर पर 'खराब और असमान सीजनिंग' (Improper seasoning) के कारण होता है, जहाँ लकड़ी के विभिन्न हिस्सों से नमी असमान रूप से सूखती है। बोइंग (Bowing), कपिंग (Cupping), और ट्विस्टिंग (Twisting) इसी वॉर्पिंग के प्रकार हैं।
वॉर्पिंग (Warping) लकड़ी के उस दोष को कहते हैं जिसमें लकड़ी का तख्ता या टुकड़ा अपनी मूल समतल (Flat) आकृति खोकर टेढ़ा-मेढ़ा या मुड़ा हुआ हो जाता है। यह आमतौर पर 'खराब और असमान सीजनिंग' (Improper seasoning) के कारण होता है, जहाँ लकड़ी के विभिन्न हिस्सों से नमी असमान रूप से सूखती है। बोइंग (Bowing), कपिंग (Cupping), और ट्विस्टिंग (Twisting) इसी वॉर्पिंग के प्रकार हैं।
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Q469: लोहे की सतहों (Iron surfaces) पर पेंट करने से पहले 'स्केल' (Scale) और पुरानी जंग (Rust) को हटाने के लिए किस उपकरण का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है?
- A) सैंडपेपर (Sandpaper)
- ✅ B) वायर ब्रश (Wire Brush) (सही उत्तर)
- C) सूती कपड़ा (Cotton Cloth)
- D) पुट्टी नाइफ (Putty Knife)
💡 डिटेल Explanation:
पेंटिंग से पहले धातु की सतह की तैयारी (Surface preparation) बहुत महत्वपूर्ण है। लोहे पर मौजूद मिल स्केल (Mill scale), पुरानी पपड़ीदार जंग और गंदगी को खुरच कर हटाने के लिए वायर ब्रश (Wire Brush) सबसे प्रभावी उपकरण है। यदि सतह को ठीक से साफ किए बिना पेंट किया गया, तो पेंट जल्दी पपड़ी बनकर (Flaking) झड़ जाएगा।
पेंटिंग से पहले धातु की सतह की तैयारी (Surface preparation) बहुत महत्वपूर्ण है। लोहे पर मौजूद मिल स्केल (Mill scale), पुरानी पपड़ीदार जंग और गंदगी को खुरच कर हटाने के लिए वायर ब्रश (Wire Brush) सबसे प्रभावी उपकरण है। यदि सतह को ठीक से साफ किए बिना पेंट किया गया, तो पेंट जल्दी पपड़ी बनकर (Flaking) झड़ जाएगा।
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Q470: 470 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: रासायनिक वर्गीकरण (Chemical Classification) के आधार पर 'मार्बल' (Marble - संगमरमर) किस प्रकार की चट्टान की श्रेणी में आता है?
- A) सिलिसियस चट्टान (Siliceous Rock)
- B) आर्गिलेशियस चट्टान (Argillaceous Rock)
- ✅ C) कैल्केरियस चट्टान (Calcareous Rock) (सही उत्तर)
- D) कार्बोनेसियस चट्टान (Carbonaceous Rock)
💡 डिटेल Explanation:
रासायनिक संरचना के अनुसार, वे चट्टानें जिनका मुख्य घटक चूना (Lime / Calcium Carbonate) होता है, उन्हें कैल्केरियस चट्टानें (Calcareous rocks) कहा जाता है। मार्बल (संगमरमर) और लाइमस्टोन (चूना पत्थर) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यद्यपि भूवैज्ञानिक रूप से मार्बल एक 'कायांतरित' (Metamorphic) चट्टान है, लेकिन रासायनिक रूप से यह कैल्केरियस श्रेणी में आता है।
रासायनिक संरचना के अनुसार, वे चट्टानें जिनका मुख्य घटक चूना (Lime / Calcium Carbonate) होता है, उन्हें कैल्केरियस चट्टानें (Calcareous rocks) कहा जाता है। मार्बल (संगमरमर) और लाइमस्टोन (चूना पत्थर) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यद्यपि भूवैज्ञानिक रूप से मार्बल एक 'कायांतरित' (Metamorphic) चट्टान है, लेकिन रासायनिक रूप से यह कैल्केरियस श्रेणी में आता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 95 (Q471 - Q475)
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Q471: कंक्रीट का 'स्लंप टेस्ट' (Slump Test) करने के लिए उपयोग किए जाने वाले मानक 'स्लंप कोन' (Slump Cone) की ऊँचाई (Height) कितनी होती है?
- A) 10 cm
- B) 20 cm
- ✅ C) 30 cm (सही उत्तर)
- D) 40 cm
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्लंप कोन का आकार एक छिन्नक (Frustum of a cone) जैसा होता है। इसके मानक आयाम हैं: ऊपरी व्यास 10 cm (100 mm), निचला व्यास 20 cm (200 mm), और ऊँचाई 30 cm (300 mm)।
कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्लंप कोन का आकार एक छिन्नक (Frustum of a cone) जैसा होता है। इसके मानक आयाम हैं: ऊपरी व्यास 10 cm (100 mm), निचला व्यास 20 cm (200 mm), और ऊँचाई 30 cm (300 mm)।
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Q472: भवन निर्माण में 'खोखली ईंटों' (Hollow Bricks / Cavity Bricks) का उपयोग करने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) दीवार का वजन बढ़ाना
- ✅ B) ध्वनि और ऊष्मारोधी (Sound and Thermal Insulation) प्रभाव उत्पन्न करना (सही उत्तर)
- C) नींव को अधिक मजबूत बनाना
- D) केवल सजावटी स्वरूप (Decorative look) देना
💡 डिटेल Explanation:
खोखली ईंटों के अंदर हवा फंसी (Trapped air) होती है। चूँकि हवा ऊष्मा (Heat) और ध्वनि (Sound) की एक बहुत खराब सुचालक (Bad conductor) है, इसलिए ये ईंटें बेहतरीन ऊष्मारोधी और ध्वनिरोधी (Insulation) गुण प्रदान करती हैं। ये गर्मियों में कमरों को ठंडा और सर्दियों में गर्म रखती हैं, साथ ही दीवार का कुल वजन (Dead load) भी कम करती हैं।
खोखली ईंटों के अंदर हवा फंसी (Trapped air) होती है। चूँकि हवा ऊष्मा (Heat) और ध्वनि (Sound) की एक बहुत खराब सुचालक (Bad conductor) है, इसलिए ये ईंटें बेहतरीन ऊष्मारोधी और ध्वनिरोधी (Insulation) गुण प्रदान करती हैं। ये गर्मियों में कमरों को ठंडा और सर्दियों में गर्म रखती हैं, साथ ही दीवार का कुल वजन (Dead load) भी कम करती हैं।
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Q473: प्लाइवुड बनाने के लिए लकड़ी के लट्ठों (Logs) से पतली परतें (Veneer) छीलने की सबसे आम और व्यावसायिक विधि कौन सी है?
- A) स्लाइसिंग (Slicing)
- B) सॉइंग (Sawing)
- ✅ C) रोटरी कटिंग (Rotary Cutting) (सही उत्तर)
- D) चॉपिंग (Chopping)
💡 डिटेल Explanation:
प्लाइवुड के निर्माण में लगभग 90% विनियर (Veneer) 'रोटरी कटिंग' विधि से प्राप्त किए जाते हैं। इस विधि में लकड़ी के लट्ठे (Log) को एक खराद (Lathe) मशीन पर घुमाया जाता है और एक तेज धार वाले ब्लेड को उसके खिलाफ दबाया जाता है, जिससे लकड़ी की एक पतली, निरंतर चादर (Continuous sheet) छिलकर बाहर आ जाती है, जैसे कि किसी पेंसिल को शार्पनर से छीलना।
प्लाइवुड के निर्माण में लगभग 90% विनियर (Veneer) 'रोटरी कटिंग' विधि से प्राप्त किए जाते हैं। इस विधि में लकड़ी के लट्ठे (Log) को एक खराद (Lathe) मशीन पर घुमाया जाता है और एक तेज धार वाले ब्लेड को उसके खिलाफ दबाया जाता है, जिससे लकड़ी की एक पतली, निरंतर चादर (Continuous sheet) छिलकर बाहर आ जाती है, जैसे कि किसी पेंसिल को शार्पनर से छीलना।
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Q474: 'स्पिरिट वार्निश' (Spirit Varnish) जिसे फ्रेंच पॉलिश भी कहा जाता है, में सॉल्वेंट (Solvent) या थिनर के रूप में मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- B) तारपीन का तेल (Turpentine Oil)
- ✅ C) मिथाइलेटेड स्पिरिट या अल्कोहल (Methylated Spirit / Alcohol) (सही उत्तर)
- D) पानी (Water)
💡 डिटेल Explanation:
स्पिरिट वार्निश में नरम रेजिन (जैसे शेलैक - Shellac) को मिथाइलेटेड स्पिरिट या अल्कोहल में घोला जाता है। क्योंकि अल्कोहल बहुत तेजी से वाष्पित (Evaporate) हो जाता है, यह वार्निश बहुत जल्दी सूखती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से लकड़ी के महंगे फर्नीचर पर 'फ्रेंच पॉलिश' करने के लिए किया जाता है ताकि प्राकृतिक लकड़ी के रेशे (Grains) स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
स्पिरिट वार्निश में नरम रेजिन (जैसे शेलैक - Shellac) को मिथाइलेटेड स्पिरिट या अल्कोहल में घोला जाता है। क्योंकि अल्कोहल बहुत तेजी से वाष्पित (Evaporate) हो जाता है, यह वार्निश बहुत जल्दी सूखती है। इसका उपयोग मुख्य रूप से लकड़ी के महंगे फर्नीचर पर 'फ्रेंच पॉलिश' करने के लिए किया जाता है ताकि प्राकृतिक लकड़ी के रेशे (Grains) स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
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Q475: 475 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भूवैज्ञानिक (Geological) वर्गीकरण के अनुसार, 'नीस' (Gneiss) किस प्रकार की चट्टान का उदाहरण है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous Rock)
- B) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
- ✅ C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) (सही उत्तर)
- D) स्ट्रैटिफाइड चट्टान (Stratified Rock)
💡 डिटेल Explanation:
नीस (Gneiss) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण मुख्य रूप से 'ग्रेनाइट' (एक आग्नेय चट्टान) पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी (Heat) और दबाव (Pressure) पड़ने के कारण होता है। इसमें खनिजों की स्पष्ट धारियाँ (Banded structure) दिखाई देती हैं। इसका उपयोग भारी इंजीनियरिंग कार्यों और स्ट्रीट-पेविंग में किया जाता है।
नीस (Gneiss) एक कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock) है। इसका निर्माण मुख्य रूप से 'ग्रेनाइट' (एक आग्नेय चट्टान) पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी (Heat) और दबाव (Pressure) पड़ने के कारण होता है। इसमें खनिजों की स्पष्ट धारियाँ (Banded structure) दिखाई देती हैं। इसका उपयोग भारी इंजीनियरिंग कार्यों और स्ट्रीट-पेविंग में किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 96 (Q476 - Q480)
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Q476: भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, 'रैपिड हार्डनिंग सीमेंट' (Rapid Hardening Cement) का 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) कम से कम कितना होना चाहिए?
- A) 5 मिनट
- B) 15 मिनट
- ✅ C) 30 मिनट (सही उत्तर)
- D) 60 मिनट
💡 डिटेल Explanation:
यह एक बहुत ही सामान्य 'ट्रिक' प्रश्न है। यद्यपि रैपिड हार्डनिंग सीमेंट बहुत तेजी से 'ताकत' (Strength) प्राप्त करता है (इसकी 1 दिन की ताकत OPC के 3 दिन के बराबर होती है), लेकिन इसका जमाव काल (Setting Time) साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के बिल्कुल समान होता है। अर्थात् इसका प्रारंभिक जमाव काल न्यूनतम 30 मिनट और अंतिम जमाव काल अधिकतम 10 घंटे (600 मिनट) होता है।
यह एक बहुत ही सामान्य 'ट्रिक' प्रश्न है। यद्यपि रैपिड हार्डनिंग सीमेंट बहुत तेजी से 'ताकत' (Strength) प्राप्त करता है (इसकी 1 दिन की ताकत OPC के 3 दिन के बराबर होती है), लेकिन इसका जमाव काल (Setting Time) साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के बिल्कुल समान होता है। अर्थात् इसका प्रारंभिक जमाव काल न्यूनतम 30 मिनट और अंतिम जमाव काल अधिकतम 10 घंटे (600 मिनट) होता है।
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Q477: कंक्रीट की सड़कों (Pavements) और क्षैतिज स्लैब (Horizontal slabs) की 'तराई' (Curing) के लिए सबसे उपयुक्त और प्रभावी विधि कौन सी है?
- A) पानी का छिड़काव (Spraying water)
- B) गीली बोरियां रखना (Wet gunny bags)
- ✅ C) पोंडिंग विधि (Ponding Method - क्यारियां बनाकर पानी भरना) (सही उत्तर)
- D) स्टीम क्यूरिंग (Steam curing)
💡 डिटेल Explanation:
समतल और क्षैतिज सतहों (जैसे छत के स्लैब और फर्श/सड़क) की तराई के लिए 'पोंडिंग' (Ponding) सबसे अच्छी विधि है। इसमें कंक्रीट की सतह पर मिट्टी (Clay) की छोटी-छोटी मेड़ें या क्यारियां (Bunds) बनाकर उनमें पानी भर दिया जाता है। इससे कंक्रीट को लगातार और भरपूर नमी मिलती रहती है।
समतल और क्षैतिज सतहों (जैसे छत के स्लैब और फर्श/सड़क) की तराई के लिए 'पोंडिंग' (Ponding) सबसे अच्छी विधि है। इसमें कंक्रीट की सतह पर मिट्टी (Clay) की छोटी-छोटी मेड़ें या क्यारियां (Bunds) बनाकर उनमें पानी भर दिया जाता है। इससे कंक्रीट को लगातार और भरपूर नमी मिलती रहती है।
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Q478: इमारती लकड़ी (Timber) में तेज़ हवाओं (High winds) या किसी भारी झटके के कारण लकड़ी के तंतुओं (Fibers) के दबने या कुचलने से उत्पन्न होने वाले दोष को क्या कहते हैं?
- A) नॉट्स (Knots)
- B) शेक्स (Shakes)
- ✅ C) अपसेट्स (Upsets / Ruptures) (सही उत्तर)
- D) बरल (Burls)
💡 डिटेल Explanation:
अपसेट्स (Upsets) या रप्चर्स लकड़ी के रेशों (Fibers) का एक दोष है। जब युवा पेड़ पर बहुत तेज आंधी-तूफान (Severe winds) का सामना करना पड़ता है या पेड़ को काटते समय उसे अनुचित तरीके से गिराया जाता है, तो झटके के कारण तने के रेशे एक-दूसरे पर दबकर कुचल (Crush) जाते हैं। यह लकड़ी की मजबूती को गंभीर रूप से कम करता है।
अपसेट्स (Upsets) या रप्चर्स लकड़ी के रेशों (Fibers) का एक दोष है। जब युवा पेड़ पर बहुत तेज आंधी-तूफान (Severe winds) का सामना करना पड़ता है या पेड़ को काटते समय उसे अनुचित तरीके से गिराया जाता है, तो झटके के कारण तने के रेशे एक-दूसरे पर दबकर कुचल (Crush) जाते हैं। यह लकड़ी की मजबूती को गंभीर रूप से कम करता है।
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Q479: पेंट की गई सतह पर पेंट के सूखने के बाद उसकी 'चमक' (Gloss) का खत्म हो जाना और सतह पर 'धुंधले धब्बे' (Dull patches) बन जाने के दोष को क्या कहते हैं?
- A) सैगिंग (Sagging)
- ✅ B) ब्लूमिंग (Blooming) (सही उत्तर)
- C) फ्लैकिंग (Flaking)
- D) रिंकलिंग (Wrinkling)
💡 डिटेल Explanation:
ब्लूमिंग (Blooming) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट की सतह अपनी चमक खो देती है और उस पर बादलों जैसे धुंधले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह मुख्य रूप से पेंट के सूखते समय खराब वेंटिलेशन (अपर्याप्त हवा), नमी (Dampness) या सतह पर पानी के वाष्पीकरण के कारण उत्पन्न होता है।
ब्लूमिंग (Blooming) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट की सतह अपनी चमक खो देती है और उस पर बादलों जैसे धुंधले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह मुख्य रूप से पेंट के सूखते समय खराब वेंटिलेशन (अपर्याप्त हवा), नमी (Dampness) या सतह पर पानी के वाष्पीकरण के कारण उत्पन्न होता है।
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Q480: 480 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: 'फायर ब्रिक्स' (Fire Bricks / Refractory Bricks) का उपयोग मुख्य रूप से किस निर्माण में किया जाता है?
- A) भवनों की सजावटी (Decorative) दीवारों में
- B) पानी की टंकियों और सीवर लाइनों में
- ✅ C) भट्ठियों (Furnaces), ओवन और चिमनियों के अस्तर (Lining) में (सही उत्तर)
- D) सामान्य फर्श (Flooring) बनाने में
💡 डिटेल Explanation:
फायर ब्रिक्स या 'अपवर्तक ईंटें' (Refractory Bricks) विशेष प्रकार की 'फायर क्ले' (Fire clay) से बनाई जाती हैं, जिसमें सिलिका और एल्युमिना की मात्रा अधिक होती है। ये बिना पिघले या टूटे अत्यधिक उच्च तापमान (1700°C तक) को सहन कर सकती हैं। इसलिए इनका उपयोग औद्योगिक भट्ठियों (Furnaces) और चिमनियों के अंदरूनी अस्तर (Lining) बनाने के लिए किया जाता है।
फायर ब्रिक्स या 'अपवर्तक ईंटें' (Refractory Bricks) विशेष प्रकार की 'फायर क्ले' (Fire clay) से बनाई जाती हैं, जिसमें सिलिका और एल्युमिना की मात्रा अधिक होती है। ये बिना पिघले या टूटे अत्यधिक उच्च तापमान (1700°C तक) को सहन कर सकती हैं। इसलिए इनका उपयोग औद्योगिक भट्ठियों (Furnaces) और चिमनियों के अंदरूनी अस्तर (Lining) बनाने के लिए किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 97 (Q481 - Q485)
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Q481: कंक्रीट निर्माण में उपयोग होने वाले 'महीन बालू' (Fine Sand) का 'फाइननेस मॉड्यूलस' (Fineness Modulus) सामान्यतः किस सीमा के बीच होता है?
- ✅ A) 2.2 से 2.6 (सही उत्तर)
- B) 2.6 से 2.9
- C) 2.9 से 3.2
- D) 3.5 से 4.0
💡 डिटेल Explanation:
फाइननेस मॉड्यूलस (FM) एग्रीगेट (गिट्टी/बालू) के औसत आकार को दर्शाता है। महीन बालू (Fine sand) के लिए यह मान 2.2 से 2.6 होता है। मध्यम बालू (Medium sand) के लिए 2.6 से 2.9, और मोटी बालू (Coarse sand) के लिए 2.9 से 3.2 होता है। कंक्रीट के लिए 3.2 से अधिक FM वाली बालू अनुपयुक्त मानी जाती है।
फाइननेस मॉड्यूलस (FM) एग्रीगेट (गिट्टी/बालू) के औसत आकार को दर्शाता है। महीन बालू (Fine sand) के लिए यह मान 2.2 से 2.6 होता है। मध्यम बालू (Medium sand) के लिए 2.6 से 2.9, और मोटी बालू (Coarse sand) के लिए 2.9 से 3.2 होता है। कंक्रीट के लिए 3.2 से अधिक FM वाली बालू अनुपयुक्त मानी जाती है।
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Q482: एक अच्छी ईंट की मिट्टी (Good Brick Earth) में 'सिलिका' (Silica - बालू) की आदर्श मात्रा कितने प्रतिशत होनी चाहिए?
- A) 20% से 30%
- B) 30% से 40%
- ✅ C) 50% से 60% (सही उत्तर)
- D) 70% से 80%
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी का सबसे प्रमुख घटक सिलिका (50-60%) होता है। यह ईंट को उसका आकार बनाए रखने में मदद करता है और सूखने या पकाने के दौरान उसे सिकुड़ने, फटने और मुड़ने (Warping) से रोकता है। यदि सिलिका की मात्रा अधिक हो जाए, तो ईंट भंगुर (Brittle) हो जाती है और आसानी से टूट जाती है।
ईंट की मिट्टी का सबसे प्रमुख घटक सिलिका (50-60%) होता है। यह ईंट को उसका आकार बनाए रखने में मदद करता है और सूखने या पकाने के दौरान उसे सिकुड़ने, फटने और मुड़ने (Warping) से रोकता है। यदि सिलिका की मात्रा अधिक हो जाए, तो ईंट भंगुर (Brittle) हो जाती है और आसानी से टूट जाती है।
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Q483: इमारती लकड़ी (Timber) में 'रिंड गॉल' (Rind Gall) नामक दोष किस कारण उत्पन्न होता है?
- ✅ A) पेड़ की शाखा (Branch) के अनुचित तरीके से कटने या टूटने पर वहां छाल की असामान्य वृद्धि के कारण (सही उत्तर)
- B) लकड़ी में दीमक लगने के कारण
- C) लकड़ी के अचानक सूखने के कारण
- D) फफूंदी के हमले के कारण
💡 डिटेल Explanation:
जब पेड़ के बढ़ते समय उसकी कोई शाखा टूट जाती है या अनुचित तरीके से काट दी जाती है, तो उस घाव को भरने के लिए पेड़ वहाँ अतिरिक्त छाल (Bark) और लकड़ी उगाने लगता है। इस कारण तने पर एक असामान्य सूजन (Swelling) या गांठ बन जाती है, जिसे 'रिंड गॉल' (Rind Gall) कहते हैं। यह लकड़ी को कमजोर बनाता है।
जब पेड़ के बढ़ते समय उसकी कोई शाखा टूट जाती है या अनुचित तरीके से काट दी जाती है, तो उस घाव को भरने के लिए पेड़ वहाँ अतिरिक्त छाल (Bark) और लकड़ी उगाने लगता है। इस कारण तने पर एक असामान्य सूजन (Swelling) या गांठ बन जाती है, जिसे 'रिंड गॉल' (Rind Gall) कहते हैं। यह लकड़ी को कमजोर बनाता है।
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Q484: एल्युमिनियम पेंट (Aluminium Paint) में 'वाहन' (Vehicle / Binder) के रूप में मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- B) पानी (Water)
- ✅ C) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish / Oil Varnish) (सही उत्तर)
- D) तारपीन का तेल (Turpentine)
💡 डिटेल Explanation:
एल्युमिनियम पेंट में बहुत ही बारीक एल्युमिनियम पाउडर को पिगमेंट और बेस (दोनों) के रूप में उपयोग किया जाता है। इस पाउडर को सतह पर मजबूती से चिपकाने और फैलाने के लिए इसे स्पिरिट वार्निश (या कभी-कभी ऑयल वार्निश) में निलंबित (Suspended) किया जाता है। यह पेंट गर्मी को परावर्तित (Reflect) करने के लिए जाना जाता है।
एल्युमिनियम पेंट में बहुत ही बारीक एल्युमिनियम पाउडर को पिगमेंट और बेस (दोनों) के रूप में उपयोग किया जाता है। इस पाउडर को सतह पर मजबूती से चिपकाने और फैलाने के लिए इसे स्पिरिट वार्निश (या कभी-कभी ऑयल वार्निश) में निलंबित (Suspended) किया जाता है। यह पेंट गर्मी को परावर्तित (Reflect) करने के लिए जाना जाता है।
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Q485: 485 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: 'मोह्स स्केल' (Mohs Scale) के अनुसार 'क्वार्ट्ज' (Quartz) पत्थर की कठोरता (Hardness) संख्या क्या है?
- A) 5
- B) 6
- ✅ C) 7 (सही उत्तर)
- D) 10
💡 डिटेल Explanation:
मोह्स स्केल 1 से 10 तक खनिजों की कठोरता मापता है (1=Talc, 10=Diamond)। क्वार्ट्ज (Quartz) की कठोरता 7 होती है, जिसका अर्थ है कि यह कांच को आसानी से खरोंच सकता है। ग्रेनाइट और क्वार्टजाइट जैसे मजबूत भवन निर्माण पत्थरों में क्वार्ट्ज मुख्य रूप से मौजूद होता है, जिससे वे अत्यधिक कठोर हो जाते हैं।
मोह्स स्केल 1 से 10 तक खनिजों की कठोरता मापता है (1=Talc, 10=Diamond)। क्वार्ट्ज (Quartz) की कठोरता 7 होती है, जिसका अर्थ है कि यह कांच को आसानी से खरोंच सकता है। ग्रेनाइट और क्वार्टजाइट जैसे मजबूत भवन निर्माण पत्थरों में क्वार्ट्ज मुख्य रूप से मौजूद होता है, जिससे वे अत्यधिक कठोर हो जाते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 98 (Q486 - Q490)
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Q486: भारतीय मानक (IS 456:2000) के अनुसार, 'समुद्री जल' (Sea water) के सीधे संपर्क में आने वाले RCC (प्रबलित कंक्रीट) कार्यों के लिए कंक्रीट का न्यूनतम ग्रेड (Minimum Grade) क्या होना चाहिए?
- A) M20
- B) M25
- ✅ C) M30 (सही उत्तर)
- D) M40
💡 डिटेल Explanation:
समुद्री जल अत्यधिक आक्रामक (Severe exposure condition) होता है क्योंकि इसमें क्लोराइड और सल्फेट होते हैं जो कंक्रीट और अंदर के सरिये (Steel) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। IS 456 के अनुसार, समुद्री जल के संपर्क वाले RCC कार्यों (Severe condition) के लिए कम से कम M30 ग्रेड की कंक्रीट का उपयोग करना अनिवार्य है।
समुद्री जल अत्यधिक आक्रामक (Severe exposure condition) होता है क्योंकि इसमें क्लोराइड और सल्फेट होते हैं जो कंक्रीट और अंदर के सरिये (Steel) को नुकसान पहुंचा सकते हैं। IS 456 के अनुसार, समुद्री जल के संपर्क वाले RCC कार्यों (Severe condition) के लिए कम से कम M30 ग्रेड की कंक्रीट का उपयोग करना अनिवार्य है।
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Q487: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में 'इंग्लिश बॉन्ड' (English Bond) की मुख्य विशेषता क्या होती है?
- A) एक ही परत (Course) में हेडर और स्ट्रेचर बारी-बारी से रखे जाते हैं
- ✅ B) एक ही दीवार में हेडर और स्ट्रेचर की एकांतर परतें (Alternate courses) होती हैं (सही उत्तर)
- C) दीवार में केवल स्ट्रेचर ईंटें इस्तेमाल होती हैं
- D) ईंटों को तिरछा (Diagonally) रखा जाता है
💡 डिटेल Explanation:
इंग्लिश बॉन्ड (English Bond) सभी ईंट चिनाई बॉन्डों में सबसे मजबूत माना जाता है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसमें एक पूरी परत (Course) सिर्फ 'हेडर' ईंटों की होती है और उसके ठीक ऊपर वाली परत सिर्फ 'स्ट्रेचर' ईंटों की होती है। यही क्रम (Alternate courses) पूरी दीवार में दोहराया जाता है।
इंग्लिश बॉन्ड (English Bond) सभी ईंट चिनाई बॉन्डों में सबसे मजबूत माना जाता है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसमें एक पूरी परत (Course) सिर्फ 'हेडर' ईंटों की होती है और उसके ठीक ऊपर वाली परत सिर्फ 'स्ट्रेचर' ईंटों की होती है। यही क्रम (Alternate courses) पूरी दीवार में दोहराया जाता है।
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Q488: सस्ती और साधारण लकड़ी के ऊपर एक बहुत पतली और उच्च गुणवत्ता वाली सजावटी लकड़ी (Decorative wood) की परत चिपकाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
- A) पॉलिशिंग (Polishing)
- B) वार्निशिंग (Varnishing)
- ✅ C) विनियरिंग (Veneering) (सही उत्तर)
- D) लैमिनेटिंग (Laminating)
💡 डिटेल Explanation:
विनियरिंग (Veneering) वह प्रक्रिया है जिसमें बहुत महंगी और सुंदर रेशों वाली लकड़ी (जैसे टीक या शीशम) की पतली चादर (Veneer - 0.4 mm से 6 mm) को एक सस्ती और साधारण लकड़ी (जैसे पाइन या प्लाईवुड) की सतह पर गोंद से चिपका दिया जाता है। इससे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर का लुक मिल जाता है।
विनियरिंग (Veneering) वह प्रक्रिया है जिसमें बहुत महंगी और सुंदर रेशों वाली लकड़ी (जैसे टीक या शीशम) की पतली चादर (Veneer - 0.4 mm से 6 mm) को एक सस्ती और साधारण लकड़ी (जैसे पाइन या प्लाईवुड) की सतह पर गोंद से चिपका दिया जाता है। इससे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले फर्नीचर का लुक मिल जाता है।
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Q489: पेंट बनाने में 'एक्सटेंडर' (Extender) या बेस एडल्टरेंट (जैसे बेरियम सल्फेट या चॉक) मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) पेंट को जल्दी सुखाना
- ✅ B) पेंट का आयतन (Volume) बढ़ाना और उसकी लागत (Cost) कम करना (सही उत्तर)
- C) पेंट का रंग बदलना
- D) पेंट को जलरोधी बनाना
💡 डिटेल Explanation:
पेंट के असली बेस (जैसे वाइट लेड या जिंक ऑक्साइड) काफी महंगे होते हैं। पेंट का आयतन (Volume/Bulk) बढ़ाने और उसे सस्ता बनाने के लिए उसमें कुछ सस्ते सफेद पाउडर मिलाए जाते हैं जिन्हें 'एक्सटेंडर्स' (Extenders) कहते हैं। बेरियम सल्फेट, चॉक (Whiting), और सिलिका इसके आम उदाहरण हैं। हालांकि, इनकी अधिक मात्रा पेंट की गुणवत्ता को गिरा देती है।
पेंट के असली बेस (जैसे वाइट लेड या जिंक ऑक्साइड) काफी महंगे होते हैं। पेंट का आयतन (Volume/Bulk) बढ़ाने और उसे सस्ता बनाने के लिए उसमें कुछ सस्ते सफेद पाउडर मिलाए जाते हैं जिन्हें 'एक्सटेंडर्स' (Extenders) कहते हैं। बेरियम सल्फेट, चॉक (Whiting), और सिलिका इसके आम उदाहरण हैं। हालांकि, इनकी अधिक मात्रा पेंट की गुणवत्ता को गिरा देती है।
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Q490: 490 MCQ का पड़ाव पार! प्रश्न: निम्नलिखित में से किस भवन निर्माण पत्थर की 'अग्नि प्रतिरोधक क्षमता' (Fire Resistance) सबसे अधिक होती है?
- A) ग्रेनाइट (Granite)
- ✅ B) सघन बलुआ पत्थर (Compact Sandstone) (सही उत्तर)
- C) लाइमस्टोन (Limestone)
- D) मार्बल (Marble)
💡 डिटेल Explanation:
यद्यपि ग्रेनाइट बहुत मजबूत होता है, लेकिन आग लगने पर यह जल्दी चटक जाता है क्योंकि इसमें मौजूद क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार और माइका अलग-अलग दरों पर फैलते हैं। चूना पत्थर (Limestone) आग में कैल्साइन (चूने में बदल) हो जाता है। आग का प्रतिरोध करने के लिए सघन बलुआ पत्थर (Compact Sandstone) सबसे बेहतरीन है, जो उच्च तापमान पर भी स्थिर रहता है।
यद्यपि ग्रेनाइट बहुत मजबूत होता है, लेकिन आग लगने पर यह जल्दी चटक जाता है क्योंकि इसमें मौजूद क्वार्ट्ज, फेल्डस्पार और माइका अलग-अलग दरों पर फैलते हैं। चूना पत्थर (Limestone) आग में कैल्साइन (चूने में बदल) हो जाता है। आग का प्रतिरोध करने के लिए सघन बलुआ पत्थर (Compact Sandstone) सबसे बेहतरीन है, जो उच्च तापमान पर भी स्थिर रहता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 99 (Q491 - Q495)
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Q491: भारतीय मानक (IS Code) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'अंतिम जमाव काल' (Final Setting Time) अधिकतम कितना होना चाहिए?
- A) 30 मिनट
- B) 60 मिनट
- ✅ C) 600 मिनट (10 घंटे) (सही उत्तर)
- D) 1440 मिनट (24 घंटे)
💡 डिटेल Explanation:
अंतिम जमाव काल (Final Setting Time) वह समय है जब सीमेंट पूरी तरह से जम जाता है और उस पर विकाट सुई (Vicat needle) का कोई निशान नहीं पड़ता। OPC (साधारण पोर्टलैंड सीमेंट) और PPC दोनों के लिए यह समय अधिकतम 10 घंटे (600 मिनट) निर्धारित किया गया है।
अंतिम जमाव काल (Final Setting Time) वह समय है जब सीमेंट पूरी तरह से जम जाता है और उस पर विकाट सुई (Vicat needle) का कोई निशान नहीं पड़ता। OPC (साधारण पोर्टलैंड सीमेंट) और PPC दोनों के लिए यह समय अधिकतम 10 घंटे (600 मिनट) निर्धारित किया गया है।
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Q492: ईंटों को भट्ठे में पकाते समय, यदि गर्म ईंटों पर अचानक बारिश का पानी गिर जाए, तो ईंटों का आकार बिगड़ जाता है। इस दोष को क्या कहते हैं?
- ✅ A) चफ्स (Chuffs) (सही उत्तर)
- B) ब्लोटिंग (Bloating)
- C) लैमिनेशन (Lamination)
- D) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
💡 डिटेल Explanation:
पकाने (Burning) के दौरान जब ईंटें बहुत गर्म होती हैं और उन पर अचानक बारिश का पानी गिर जाता है, तो थर्मल शॉक (Thermal shock) के कारण ईंट की सतह चटक जाती है और उसका आकार विकृत हो जाता है। ईंटों के इस दोष को 'चफ्स' (Chuffs) कहा जाता है।
पकाने (Burning) के दौरान जब ईंटें बहुत गर्म होती हैं और उन पर अचानक बारिश का पानी गिर जाता है, तो थर्मल शॉक (Thermal shock) के कारण ईंट की सतह चटक जाती है और उसका आकार विकृत हो जाता है। ईंटों के इस दोष को 'चफ्स' (Chuffs) कहा जाता है।
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Q493: निम्नलिखित में से कौन सा एक 'अंतर्जात वृक्ष' (Endogenous Tree) का उदाहरण है, जिसकी वृद्धि बाहर की बजाय अंदर की ओर होती है?
- A) सागौन (Teak)
- B) साल (Sal)
- ✅ C) बांस (Bamboo) (सही उत्तर)
- D) चीड़ (Pine)
💡 डिटेल Explanation:
वृक्षों को उनके बढ़ने के तरीके के आधार पर दो भागों में बांटा जाता है। बहिर्जात (Exogenous) वृक्ष बाहर की ओर छल्ले (Rings) बनाकर बढ़ते हैं (जैसे टीक, साल, देवदार)। वहीं अंतर्जात (Endogenous) वृक्ष अंदर की ओर बढ़ते हैं और इनके तने में रेशों का एक अनुदैर्ध्य (Longitudinal) द्रव्यमान होता है। बांस (Bamboo), ताड़ (Palm) और बेंत (Cane) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
वृक्षों को उनके बढ़ने के तरीके के आधार पर दो भागों में बांटा जाता है। बहिर्जात (Exogenous) वृक्ष बाहर की ओर छल्ले (Rings) बनाकर बढ़ते हैं (जैसे टीक, साल, देवदार)। वहीं अंतर्जात (Endogenous) वृक्ष अंदर की ओर बढ़ते हैं और इनके तने में रेशों का एक अनुदैर्ध्य (Longitudinal) द्रव्यमान होता है। बांस (Bamboo), ताड़ (Palm) और बेंत (Cane) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
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Q494: निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाला 'स्नोसेम' (Snowcem) वास्तव में क्या है?
- A) एक प्रकार का ऑयल पेंट
- B) एक प्रकार का डिस्टेंपर
- ✅ C) एक वाटरप्रूफ सीमेंट पेंट (Waterproof Cement Paint) (सही उत्तर)
- D) एक इनेमल पेंट
💡 डिटेल Explanation:
स्नोसेम (Snowcem) बाजार में उपलब्ध सीमेंट पेंट का एक बहुत ही लोकप्रिय ब्रांड है। यह मूल रूप से एक वाटरप्रूफ सीमेंट पेंट होता है जिसका बेस 'सफेद सीमेंट' (White Cement) होता है। इसे पानी में मिलाकर विशेष रूप से बाहरी ईंट या प्लास्टर वाली दीवारों पर मौसम की मार से बचाने और सुंदरता के लिए लगाया जाता है।
स्नोसेम (Snowcem) बाजार में उपलब्ध सीमेंट पेंट का एक बहुत ही लोकप्रिय ब्रांड है। यह मूल रूप से एक वाटरप्रूफ सीमेंट पेंट होता है जिसका बेस 'सफेद सीमेंट' (White Cement) होता है। इसे पानी में मिलाकर विशेष रूप से बाहरी ईंट या प्लास्टर वाली दीवारों पर मौसम की मार से बचाने और सुंदरता के लिए लगाया जाता है।
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Q495: भूवैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार 'डोलराइट' (Dolerite) किस प्रकार की आग्नेय चट्टान का उदाहरण है, जो पृथ्वी की सतह के बहुत करीब (उथली गहराई में) ठंडी होती है?
- A) प्लूटोनिक आग्नेय चट्टान (Plutonic Igneous)
- B) ज्वालामुखीय आग्नेय चट्टान (Volcanic Igneous)
- ✅ C) हाइपाबिसल आग्नेय चट्टान (Hypabyssal Igneous Rock) (सही उत्तर)
- D) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
💡 डिटेल Explanation:
आग्नेय चट्टानें मैग्मा के ठंडे होने की गहराई के आधार पर तीन प्रकार की होती हैं: 1. प्लूटोनिक (बहुत गहराई में - जैसे ग्रेनाइट), 2. ज्वालामुखीय (सतह पर आकर - जैसे बेसाल्ट), और 3. हाइपाबिसल (उथली गहराई/Shallow depth में)। डोलराइट (Dolerite) इसी हाइपाबिसल चट्टान का प्रमुख उदाहरण है।
आग्नेय चट्टानें मैग्मा के ठंडे होने की गहराई के आधार पर तीन प्रकार की होती हैं: 1. प्लूटोनिक (बहुत गहराई में - जैसे ग्रेनाइट), 2. ज्वालामुखीय (सतह पर आकर - जैसे बेसाल्ट), और 3. हाइपाबिसल (उथली गहराई/Shallow depth में)। डोलराइट (Dolerite) इसी हाइपाबिसल चट्टान का प्रमुख उदाहरण है।
🏆 बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - महा-पड़ाव: भाग 100 (Q496 - Q500) 🏆
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Q496: कंक्रीट के मिश्रण में 'कैल्शियम क्लोराइड' (CaCl₂) मिलाने का मुख्य प्रभाव क्या होता है?
- A) यह कंक्रीट के जमने को धीमा कर देता है (Retarder)
- ✅ B) यह एक त्वरक (Accelerator) के रूप में कार्य करता है और कंक्रीट को जल्दी जमाता है (सही उत्तर)
- C) यह कंक्रीट में हवा के बुलबुले बनाता है
- D) यह कंक्रीट का घनत्व कम कर देता है
💡 डिटेल Explanation:
कैल्शियम क्लोराइड (CaCl₂) कंक्रीट में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला त्वरक (Accelerator) है। यह सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की दर को तेज कर देता है, जिससे कंक्रीट बहुत जल्दी सेट हो जाती है और शुरुआती ताकत प्राप्त कर लेती है। इसका उपयोग अक्सर ठंडे मौसम में कंक्रीट ढालने के लिए किया जाता है।
कैल्शियम क्लोराइड (CaCl₂) कंक्रीट में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला त्वरक (Accelerator) है। यह सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की दर को तेज कर देता है, जिससे कंक्रीट बहुत जल्दी सेट हो जाती है और शुरुआती ताकत प्राप्त कर लेती है। इसका उपयोग अक्सर ठंडे मौसम में कंक्रीट ढालने के लिए किया जाता है।
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Q497: ईंट की चिनाई में वह कौन सा 'बॉन्ड' (Bond) है जिसमें प्रत्येक रद्दे (Course) में एक हेडर (Header) और एक स्ट्रेचर (Stretcher) ईंट बारी-बारी (Alternately) से रखी जाती है?
- A) इंग्लिश बॉन्ड (English Bond)
- ✅ B) फ्लेमिश बॉन्ड (Flemish Bond) (सही उत्तर)
- C) हेडर बॉन्ड (Header Bond)
- D) स्ट्रेचर बॉन्ड (Stretcher Bond)
💡 डिटेल Explanation:
फ्लेमिश बॉन्ड (Flemish Bond) अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस बॉन्ड की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें एक ही क्षैतिज परत (Course) में ईंटें बारी-बारी से हेडर, फिर स्ट्रेचर, फिर हेडर के क्रम में लगाई जाती हैं। (ध्यान दें: इंग्लिश बॉन्ड में एक पूरी परत हेडर की और उसके ऊपर की पूरी परत स्ट्रेचर की होती है)।
फ्लेमिश बॉन्ड (Flemish Bond) अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है। इस बॉन्ड की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें एक ही क्षैतिज परत (Course) में ईंटें बारी-बारी से हेडर, फिर स्ट्रेचर, फिर हेडर के क्रम में लगाई जाती हैं। (ध्यान दें: इंग्लिश बॉन्ड में एक पूरी परत हेडर की और उसके ऊपर की पूरी परत स्ट्रेचर की होती है)।
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Q498: वृक्षों के वर्गीकरण में, 'हार्डवुड' (Hardwood - कठोर लकड़ी) प्रदान करने वाले पेड़ों की पत्तियों की सामान्य विशेषता क्या होती है?
- A) उनकी पत्तियां सुई जैसी (Needle-like) होती हैं
- ✅ B) उनकी पत्तियां चौड़ी (Broad leaves) होती हैं (सही उत्तर)
- C) उनमें पत्तियां नहीं होती, केवल कांटे होते हैं
- D) उनकी पत्तियां शल्क (Scaly) जैसी होती हैं
💡 डिटेल Explanation:
बहिर्जात (Exogenous) वृक्षों को दो भागों में बांटा जाता है: कोनिफर (Conifers) और डेसिडुआस (Deciduous)। कोनिफर सदाबहार होते हैं, इनकी पत्तियां सुई जैसी (Needle-like) होती हैं और ये सॉफ्टवुड देते हैं (जैसे देवदार, चीड़)। इसके विपरीत डेसिडुआस वृक्ष पतझड़ वाले होते हैं, इनकी पत्तियां चौड़ी (Broad) होती हैं और ये हार्डवुड (जैसे टीक, साल, ओक) देते हैं।
बहिर्जात (Exogenous) वृक्षों को दो भागों में बांटा जाता है: कोनिफर (Conifers) और डेसिडुआस (Deciduous)। कोनिफर सदाबहार होते हैं, इनकी पत्तियां सुई जैसी (Needle-like) होती हैं और ये सॉफ्टवुड देते हैं (जैसे देवदार, चीड़)। इसके विपरीत डेसिडुआस वृक्ष पतझड़ वाले होते हैं, इनकी पत्तियां चौड़ी (Broad) होती हैं और ये हार्डवुड (जैसे टीक, साल, ओक) देते हैं।
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Q499: भवन निर्माण में 'डिस्टेंपर' (Distemper) का उपयोग मुख्य रूप से किन सतहों पर किया जाता है?
- A) बाहरी कंक्रीट की दीवारों पर जो बारिश के संपर्क में हों
- B) लोहे और स्टील के दरवाजों पर
- C) लकड़ी के महंगे फर्नीचर पर
- ✅ D) प्लास्टर की गई आंतरिक दीवारों (Interior walls) पर जो मौसम के सीधे संपर्क में न हों (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर (Distemper) एक पानी आधारित (Water-based) पेंट है। क्योंकि यह पूरी तरह से जलरोधी (Waterproof) नहीं होता है और बारिश से धुल सकता है, इसलिए इसका उपयोग केवल प्लास्टर की गई आंतरिक दीवारों और छतों (Ceilings) पर किया जाता है जो बाहरी मौसम (Weather) के सीधे संपर्क में नहीं आती हैं।
डिस्टेंपर (Distemper) एक पानी आधारित (Water-based) पेंट है। क्योंकि यह पूरी तरह से जलरोधी (Waterproof) नहीं होता है और बारिश से धुल सकता है, इसलिए इसका उपयोग केवल प्लास्टर की गई आंतरिक दीवारों और छतों (Ceilings) पर किया जाता है जो बाहरी मौसम (Weather) के सीधे संपर्क में नहीं आती हैं।
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Q500: 🌟 500 प्रश्नों का महा-पड़ाव पूरा! 🌟 प्रश्न: इंजीनियरिंग कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले 'अच्छे भवन निर्माण पत्थरों' (Good building stones) का 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) सामान्यतः किस सीमा के बीच होना चाहिए?
- A) 1.5 से 2.0
- B) 2.0 से 2.4
- ✅ C) 2.4 से 2.8 (या 2.5 से 3.0) (सही उत्तर)
- D) 3.5 से 4.0
💡 डिटेल Explanation:
किसी भी पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) उसके घनत्व और वजन को दर्शाता है। भारी पत्थर अधिक सघन (Dense) और कम छिद्रपूर्ण (Less porous) होते हैं, इसलिए वे अधिक मजबूत होते हैं। एक अच्छे और भारी भवन निर्माण पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व 2.4 से 2.8 (आदर्श रूप से 2.5 से 3.0 के बीच) होना चाहिए। 2.4 से कम विशिष्ट गुरुत्व वाले पत्थर कमजोर माने जाते हैं।
किसी भी पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) उसके घनत्व और वजन को दर्शाता है। भारी पत्थर अधिक सघन (Dense) और कम छिद्रपूर्ण (Less porous) होते हैं, इसलिए वे अधिक मजबूत होते हैं। एक अच्छे और भारी भवन निर्माण पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व 2.4 से 2.8 (आदर्श रूप से 2.5 से 3.0 के बीच) होना चाहिए। 2.4 से कम विशिष्ट गुरुत्व वाले पत्थर कमजोर माने जाते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 101 (Q501 - Q505)
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Q501: सीमेंट में मौजूद बोग्स कंपाउंड 'डाईकैल्शियम सिलिकेट' (C2S) का मुख्य कार्य क्या है?
- A) प्रारंभिक सामर्थ्य (Early strength) देना
- B) त्वरित जमाव (Flash set) का कारण बनना
- ✅ C) सीमेंट को अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength) प्रदान करना (सही उत्तर)
- D) जलयोजन की ऊष्मा (Heat of hydration) बढ़ाना
💡 डिटेल Explanation:
डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S) पानी के साथ बहुत धीमी गति से प्रतिक्रिया करता है। यह 7 से 14 दिनों के बाद अपनी ताकत दिखाना शुरू करता है और कंक्रीट को एक वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार ताकत देता रहता है। इसलिए, कंक्रीट की अंतिम सामर्थ्य (Ultimate Strength) मुख्य रूप से C2S के कारण ही होती है।
डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S) पानी के साथ बहुत धीमी गति से प्रतिक्रिया करता है। यह 7 से 14 दिनों के बाद अपनी ताकत दिखाना शुरू करता है और कंक्रीट को एक वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार ताकत देता रहता है। इसलिए, कंक्रीट की अंतिम सामर्थ्य (Ultimate Strength) मुख्य रूप से C2S के कारण ही होती है।
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Q502: यदि ईंट बनाने वाली मिट्टी में 'सिलिका' (Silica) की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाए, तो ईंट पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- A) ईंट बहुत कठोर हो जाएगी
- B) ईंट सिकुड़ कर टेढ़ी हो जाएगी
- C) ईंट भट्ठे में पिघल जाएगी
- ✅ D) ईंट अपनी सुसंजन क्षमता (Cohesion) खो देगी और भंगुर (Brittle) हो जाएगी (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में सिलिका 50% से 60% के बीच होना चाहिए। यदि यह मात्रा इससे अधिक हो जाती है, तो मिट्टी के कणों के बीच आपसी पकड़ (Cohesion) कमजोर हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, ईंट अत्यधिक भुरभुरी (Porous) और भंगुर (Brittle) हो जाती है, जो आसानी से टूट सकती है।
एक अच्छी ईंट की मिट्टी में सिलिका 50% से 60% के बीच होना चाहिए। यदि यह मात्रा इससे अधिक हो जाती है, तो मिट्टी के कणों के बीच आपसी पकड़ (Cohesion) कमजोर हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, ईंट अत्यधिक भुरभुरी (Porous) और भंगुर (Brittle) हो जाती है, जो आसानी से टूट सकती है।
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Q503: किसी वृक्ष के तने (Trunk) के बिल्कुल मध्य भाग (Central core) को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
- A) हार्टवुड (Heartwood)
- B) सैपवुड (Sapwood)
- ✅ C) मज्जा (Pith / Medulla) (सही उत्तर)
- D) कैम्बियम लेयर (Cambium layer)
💡 डिटेल Explanation:
वृक्ष के तने का सबसे भीतरी और केंद्रीय हिस्सा 'मज्जा' (Pith) या 'मेडुला' कहलाता है। यह पौधे के शुरुआती जीवन में पोषण प्रदान करता है। जैसे-जैसे पेड़ पुराना होता है, पिथ सूखकर डार्क रंग का हो जाता है और मृत (Dead) कोशिकाओं में बदल जाता है, जिसके चारों ओर हार्टवुड का निर्माण होता है।
वृक्ष के तने का सबसे भीतरी और केंद्रीय हिस्सा 'मज्जा' (Pith) या 'मेडुला' कहलाता है। यह पौधे के शुरुआती जीवन में पोषण प्रदान करता है। जैसे-जैसे पेड़ पुराना होता है, पिथ सूखकर डार्क रंग का हो जाता है और मृत (Dead) कोशिकाओं में बदल जाता है, जिसके चारों ओर हार्टवुड का निर्माण होता है।
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Q504: ऑयल पेंट को पतला करने और उसे सतह पर आसानी से फैलने योग्य बनाने के लिए 'थिनर' (Thinner) के रूप में सबसे अधिक किसका उपयोग किया जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- ✅ B) तारपीन का तेल (Turpentine Oil) (सही उत्तर)
- C) पानी (Water)
- D) कोपल (Copal)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट में थिनर (या सॉल्वेंट) का मुख्य कार्य पेंट की गाढ़ी स्थिरता (Viscosity) को कम करना है ताकि ब्रश से पेंट करना आसान हो जाए। ऑयल पेंट के लिए तारपीन का तेल (Turpentine) सबसे आम थिनर है। यह बहुत वाष्पशील (Volatile) होता है, जो सतह पर पेंट लगाने के बाद हवा में उड़ जाता है।
पेंट में थिनर (या सॉल्वेंट) का मुख्य कार्य पेंट की गाढ़ी स्थिरता (Viscosity) को कम करना है ताकि ब्रश से पेंट करना आसान हो जाए। ऑयल पेंट के लिए तारपीन का तेल (Turpentine) सबसे आम थिनर है। यह बहुत वाष्पशील (Volatile) होता है, जो सतह पर पेंट लगाने के बाद हवा में उड़ जाता है।
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Q505: 505 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थर की 'चिमड़पन' या झटके सहने की क्षमता (Toughness) मापने के लिए कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) क्रशिंग टेस्ट (Crushing Test)
- B) एट्रिशन टेस्ट (Attrition Test)
- ✅ C) इम्पैक्ट टेस्ट (Impact Test) (सही उत्तर)
- D) एब्रेशन टेस्ट (Abrasion Test)
💡 डिटेल Explanation:
सड़क पर चलते हुए वाहनों के पहियों से पत्थरों को लगातार झटके (Impact/Shocks) लगते हैं। पत्थर झटके के कारण टूटे नहीं, इसके लिए उसकी कठोरता (Toughness) की जांच की जाती है। यह जांच इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन (Impact Test) द्वारा की जाती है, जिसमें पत्थर के नमूने पर एक निश्चित ऊंचाई से बार-बार हथौड़ा (Hammer) गिराया जाता है।
सड़क पर चलते हुए वाहनों के पहियों से पत्थरों को लगातार झटके (Impact/Shocks) लगते हैं। पत्थर झटके के कारण टूटे नहीं, इसके लिए उसकी कठोरता (Toughness) की जांच की जाती है। यह जांच इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन (Impact Test) द्वारा की जाती है, जिसमें पत्थर के नमूने पर एक निश्चित ऊंचाई से बार-बार हथौड़ा (Hammer) गिराया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 102 (Q506 - Q510)
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Q506: सीमेंट में स्वतंत्र चूने (Free Lime) के कारण होने वाले फैलाव या 'निर्दोषता' (Soundness) को मापने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) विकाट उपकरण (Vicat Apparatus)
- ✅ B) ली-चेटेलियर उपकरण (Le-Chatelier Apparatus) (सही उत्तर)
- C) ब्लेंस एयर परमीबिलिटी उपकरण
- D) स्लंप कोन (Slump Cone)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट जमने के बाद फूलना (Expand) नहीं चाहिए, इस गुण को 'Soundness' कहते हैं। यदि सीमेंट में बिना बुझा हुआ चूना (Free Lime) बच जाता है, तो वह बाद में पानी के साथ मिलकर फैलता है। इसे मापने के लिए ली-चेटेलियर (Le-Chatelier) उपकरण का उपयोग किया जाता है। OPC के लिए इसका विस्तार (Expansion) 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
सीमेंट जमने के बाद फूलना (Expand) नहीं चाहिए, इस गुण को 'Soundness' कहते हैं। यदि सीमेंट में बिना बुझा हुआ चूना (Free Lime) बच जाता है, तो वह बाद में पानी के साथ मिलकर फैलता है। इसे मापने के लिए ली-चेटेलियर (Le-Chatelier) उपकरण का उपयोग किया जाता है। OPC के लिए इसका विस्तार (Expansion) 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
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Q507: भारतीय मानक (IS 1077) के अनुसार, एक मानक 'मॉड्यूलर ईंट' (Modular Brick) का वास्तविक आकार (बिना मोर्टार के) क्या होता है?
- ✅ A) 19 cm × 9 cm × 9 cm (सही उत्तर)
- B) 20 cm × 10 cm × 10 cm
- C) 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm
- D) 19 cm × 19 cm × 9 cm
💡 डिटेल Explanation:
भारत में उपयोग की जाने वाली मानक मॉड्यूलर ईंट का वास्तविक आकार (Actual size) 19 cm (लंबाई) × 9 cm (चौड़ाई) × 9 cm (ऊंचाई) होता है। जब चिनाई की जाती है, तो इसमें 1 cm मोटा मोर्टार (मसाला) जोड़ा जाता है, जिसके बाद इसका नाममात्र आकार (Nominal size) 20 cm × 10 cm × 10 cm हो जाता है।
भारत में उपयोग की जाने वाली मानक मॉड्यूलर ईंट का वास्तविक आकार (Actual size) 19 cm (लंबाई) × 9 cm (चौड़ाई) × 9 cm (ऊंचाई) होता है। जब चिनाई की जाती है, तो इसमें 1 cm मोटा मोर्टार (मसाला) जोड़ा जाता है, जिसके बाद इसका नाममात्र आकार (Nominal size) 20 cm × 10 cm × 10 cm हो जाता है।
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Q508: इमारती लकड़ी (Timber) में 'कैम्बियम परत' (Cambium Layer) कहाँ स्थित होती है?
- A) पिथ (Pith) और हार्टवुड (Heartwood) के बीच
- ✅ B) सैपवुड (Sapwood) और इनर बार्क (Inner Bark) के बीच (सही उत्तर)
- C) हार्टवुड (Heartwood) और सैपवुड (Sapwood) के बीच
- D) आउटर बार्क (Outer Bark) के बिल्कुल बाहर
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ के तने के क्रॉस-सेक्शन में, कैम्बियम परत (Cambium Layer) सैपवुड (Sapwood) और भीतरी छाल (Inner Bark) के बीच मौजूद रसदार (Sap) परत होती है। यह परत ही पेड़ के तने की चौड़ाई बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती है, क्योंकि यहीं नई कोशिकाएं बनती हैं जो बाद में सैपवुड में बदल जाती हैं।
पेड़ के तने के क्रॉस-सेक्शन में, कैम्बियम परत (Cambium Layer) सैपवुड (Sapwood) और भीतरी छाल (Inner Bark) के बीच मौजूद रसदार (Sap) परत होती है। यह परत ही पेड़ के तने की चौड़ाई बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती है, क्योंकि यहीं नई कोशिकाएं बनती हैं जो बाद में सैपवुड में बदल जाती हैं।
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Q509: अब्राम के नियम (Abram's Law) के अनुसार, कंक्रीट में 'जल-सीमेंट अनुपात' (Water-Cement Ratio) बढ़ने पर कंक्रीट की संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) सामर्थ्य बढ़ जाती है
- ✅ B) सामर्थ्य घट जाती है (सही उत्तर)
- C) सामर्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
- D) पहले बढ़ती है फिर घटती है
💡 डिटेल Explanation:
अब्राम का नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि (पूर्ण रूप से कॉम्पैक्ट की गई कंक्रीट के लिए) कंक्रीट की ताकत केवल उसके जल-सीमेंट अनुपात (w/c ratio) पर निर्भर करती है। जल-सीमेंट अनुपात जितना अधिक होगा (यानी जितना अधिक पानी मिलाया जाएगा), कंक्रीट की ताकत उतनी ही कम हो जाएगी। पानी कंक्रीट को सुकार्य (Workable) बनाता है लेकिन ताकत घटाता है।
अब्राम का नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि (पूर्ण रूप से कॉम्पैक्ट की गई कंक्रीट के लिए) कंक्रीट की ताकत केवल उसके जल-सीमेंट अनुपात (w/c ratio) पर निर्भर करती है। जल-सीमेंट अनुपात जितना अधिक होगा (यानी जितना अधिक पानी मिलाया जाएगा), कंक्रीट की ताकत उतनी ही कम हो जाएगी। पानी कंक्रीट को सुकार्य (Workable) बनाता है लेकिन ताकत घटाता है।
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Q510: 510 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: 'शेल' (Shale) एक अवसादी चट्टान है। अत्यधिक गर्मी और दबाव (Metamorphism) के कारण यह किस कायांतरित (Metamorphic) चट्टान में बदल जाती है?
- A) मार्बल (Marble)
- B) क्वार्टजाइट (Quartzite)
- C) नीस (Gneiss)
- ✅ D) स्लेट (Slate) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
जब अवसादी चट्टान शेल (Shale) या मडस्टोन पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक तापमान और दबाव पड़ता है, तो इसके खनिज पुनर्गठित (Recrystallize) होकर स्लेट (Slate) नामक एक मजबूत कायांतरित चट्टान बनाते हैं। (अन्य उदाहरण: लाइमस्टोन से मार्बल, सैंडस्टोन से क्वार्टजाइट और ग्रेनाइट से नीस बनता है)।
जब अवसादी चट्टान शेल (Shale) या मडस्टोन पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक तापमान और दबाव पड़ता है, तो इसके खनिज पुनर्गठित (Recrystallize) होकर स्लेट (Slate) नामक एक मजबूत कायांतरित चट्टान बनाते हैं। (अन्य उदाहरण: लाइमस्टोन से मार्बल, सैंडस्टोन से क्वार्टजाइट और ग्रेनाइट से नीस बनता है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 103 (Q511 - Q515)
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Q511: निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाला 'प्लास्टर ऑफ पेरिस' (Plaster of Paris) मुख्य रूप से किसे गर्म करके (Calcining) प्राप्त किया जाता है?
- A) चूना पत्थर (Limestone)
- B) बॉक्साइट (Bauxite)
- ✅ C) जिप्सम (Gypsum) (सही उत्तर)
- D) मार्बल (Marble)
💡 डिटेल Explanation:
प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक नाम 'कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट' (CaSO₄·½H₂O) है। इसे जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को लगभग 150°C तापमान पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है, जिससे जिप्सम अपने पानी के अणुओं का तीन-चौथाई हिस्सा खो देता है। इसमें पानी मिलाने पर यह 5-10 मिनट में ही कठोर होकर वापस जिप्सम बन जाता है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक नाम 'कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट' (CaSO₄·½H₂O) है। इसे जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को लगभग 150°C तापमान पर गर्म करके प्राप्त किया जाता है, जिससे जिप्सम अपने पानी के अणुओं का तीन-चौथाई हिस्सा खो देता है। इसमें पानी मिलाने पर यह 5-10 मिनट में ही कठोर होकर वापस जिप्सम बन जाता है।
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Q512: भारतीय मानकों (IS Code) के अनुसार, एक 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (First Class Brick) का जल अवशोषण (Water absorption) 24 घंटे ठंडे पानी में डुबोने पर उसके सूखे वजन के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 10%
- B) 15%
- ✅ C) 20% (सही उत्तर)
- D) 25%
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की गुणवत्ता का एक प्रमुख सूचक उसका जल अवशोषण होता है। आईएस कोड के अनुसार, प्रथम श्रेणी की ईंट (First Class Brick) के लिए यह अधिकतम 20%, द्वितीय श्रेणी की ईंट के लिए अधिकतम 22%, और तृतीय श्रेणी की ईंट के लिए अधिकतम 25% होना चाहिए। अत्यधिक पानी सोखने वाली ईंटें कमजोर होती हैं।
ईंट की गुणवत्ता का एक प्रमुख सूचक उसका जल अवशोषण होता है। आईएस कोड के अनुसार, प्रथम श्रेणी की ईंट (First Class Brick) के लिए यह अधिकतम 20%, द्वितीय श्रेणी की ईंट के लिए अधिकतम 22%, और तृतीय श्रेणी की ईंट के लिए अधिकतम 25% होना चाहिए। अत्यधिक पानी सोखने वाली ईंटें कमजोर होती हैं।
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Q513: ब्लेंस एयर परमीबिलिटी टेस्ट (Blaine's Air Permeability Test) के अनुसार, 'साधारण पोर्टलैंड सीमेंट' (OPC) का न्यूनतम विशिष्ट सतह क्षेत्रफल (Specific Surface Area) कितना होना चाहिए?
- A) 1500 cm²/gm
- ✅ B) 2250 cm²/gm (सही उत्तर)
- C) 3000 cm²/gm
- D) 3250 cm²/gm
💡 डिटेल Explanation:
विशिष्ट सतह क्षेत्रफल (Specific Surface Area) सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) को दर्शाता है। यह 1 ग्राम सीमेंट के सभी कणों का कुल सतह क्षेत्रफल होता है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह न्यूनतम 2250 cm²/gm (या 225 m²/kg) होना चाहिए। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) के लिए यह मान 3250 cm²/gm होता है (चूंकि वह अधिक महीन होता है)।
विशिष्ट सतह क्षेत्रफल (Specific Surface Area) सीमेंट की सूक्ष्मता (Fineness) को दर्शाता है। यह 1 ग्राम सीमेंट के सभी कणों का कुल सतह क्षेत्रफल होता है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह न्यूनतम 2250 cm²/gm (या 225 m²/kg) होना चाहिए। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) के लिए यह मान 3250 cm²/gm होता है (चूंकि वह अधिक महीन होता है)।
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Q514: लकड़ी (Timber) को जंगल से प्राप्त मूल गोल लट्ठों (Logs) से चीरकर व्यावसायिक आकारों (Commercial sizes) जैसे तख्ते (Planks) या बैटन में बदलने की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
- A) सीजनिंग (Seasoning)
- B) प्रिजर्वेशन (Preservation)
- ✅ C) कन्वर्जन (Conversion) (सही उत्तर)
- D) ड्रेसिंग (Dressing)
💡 डिटेल Explanation:
जंगल से काटे गए पेड़ों के तने को आरा मशीन (Sawmill) की मदद से आवश्यकतानुसार अलग-अलग आकारों (जैसे बोर्ड, प्लैंक, बैटन) में काटने और चीरने की प्रक्रिया को 'कन्वर्जन' (Conversion) कहा जाता है। इसके लिए साधारण या क्वार्टर सॉइंग जैसी विभिन्न कटाई विधियों का उपयोग किया जाता है।
जंगल से काटे गए पेड़ों के तने को आरा मशीन (Sawmill) की मदद से आवश्यकतानुसार अलग-अलग आकारों (जैसे बोर्ड, प्लैंक, बैटन) में काटने और चीरने की प्रक्रिया को 'कन्वर्जन' (Conversion) कहा जाता है। इसके लिए साधारण या क्वार्टर सॉइंग जैसी विभिन्न कटाई विधियों का उपयोग किया जाता है।
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Q515: पेंटिंग में खराब पकड़ (Poor Adhesion) के कारण पेंट की परत (Film) का सतह से पपड़ी बनकर झड़ने या अलग होने के दोष को क्या कहते हैं?
- A) चॉकिंग (Chalking)
- B) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
- ✅ C) फ्लैकिंग / पीलिंग (Flaking / Peeling) (सही उत्तर)
- D) सैगिंग (Sagging)
💡 डिटेल Explanation:
जब पेंट अपनी पकड़ (Adhesion) खो देता है, तो वह छोटी-छोटी पपड़ियों (Flakes) के रूप में सतह से अलग होकर गिरने लगता है। इस दोष को फ्लैकिंग (Flaking) या पीलिंग कहा जाता है। यह आमतौर पर तब होता है जब पेंट करने से पहले सतह को ठीक से साफ (धूल/ग्रीस रहित) नहीं किया गया हो या प्राइमर का इस्तेमाल न किया गया हो।
जब पेंट अपनी पकड़ (Adhesion) खो देता है, तो वह छोटी-छोटी पपड़ियों (Flakes) के रूप में सतह से अलग होकर गिरने लगता है। इस दोष को फ्लैकिंग (Flaking) या पीलिंग कहा जाता है। यह आमतौर पर तब होता है जब पेंट करने से पहले सतह को ठीक से साफ (धूल/ग्रीस रहित) नहीं किया गया हो या प्राइमर का इस्तेमाल न किया गया हो।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 104 (Q516 - Q520)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q516: कंक्रीट के मिश्रण में 'रिटार्डर' (Retarder) मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) कंक्रीट की अंतिम ताकत को बढ़ाना
- ✅ B) कंक्रीट के जमाव काल (Setting time) को बढ़ाना या धीमा करना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट को बहुत जल्दी जमाना
- D) कंक्रीट में पानी की आवश्यकता को कम करना
💡 डिटेल Explanation:
गर्म मौसम में कंक्रीट बहुत जल्दी जमने लगती है। रिटार्डर्स (Retarders) ऐसे रासायनिक मिश्रण होते हैं जो सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की दर को धीमा कर देते हैं, जिससे कंक्रीट का जमाव काल (Setting time) बढ़ जाता है और उसे साइट तक पहुँचाने या बिछाने के लिए अधिक समय मिल जाता है। जिप्सम और चीनी (Sugar) इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।
गर्म मौसम में कंक्रीट बहुत जल्दी जमने लगती है। रिटार्डर्स (Retarders) ऐसे रासायनिक मिश्रण होते हैं जो सीमेंट के जलयोजन (Hydration) की दर को धीमा कर देते हैं, जिससे कंक्रीट का जमाव काल (Setting time) बढ़ जाता है और उसे साइट तक पहुँचाने या बिछाने के लिए अधिक समय मिल जाता है। जिप्सम और चीनी (Sugar) इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।
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Q517: ईंट की चिनाई में, लगातार ऊर्ध्वाधर जोड़ों (Continuous vertical joints) से बचने के लिए ईंटों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ाने (Overlapping) की व्यवस्था को क्या कहते हैं?
- A) फ्रॉगिंग (Frogging)
- B) कोपिंग (Coping)
- C) कॉरबेलिंग (Corbelling)
- ✅ D) बॉन्डिंग (Bonding) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
यदि ईंट की चिनाई में ऊर्ध्वाधर जोड़ (Vertical joints) एक ही सीध में आ जाएं, तो दीवार कमजोर हो जाती है और आसानी से फट सकती है। इसे रोकने के लिए ईंटों को इस तरह से व्यवस्थित (Overlap) किया जाता है कि जोड़ एक सीध में न आएं। ईंटों को इस तरह से सजाने की कला को ही 'बॉन्डिंग' (Bonding) कहा जाता है (जैसे इंग्लिश बॉन्ड, फ्लेमिश बॉन्ड)।
यदि ईंट की चिनाई में ऊर्ध्वाधर जोड़ (Vertical joints) एक ही सीध में आ जाएं, तो दीवार कमजोर हो जाती है और आसानी से फट सकती है। इसे रोकने के लिए ईंटों को इस तरह से व्यवस्थित (Overlap) किया जाता है कि जोड़ एक सीध में न आएं। ईंटों को इस तरह से सजाने की कला को ही 'बॉन्डिंग' (Bonding) कहा जाता है (जैसे इंग्लिश बॉन्ड, फ्लेमिश बॉन्ड)।
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Q518: सड़क निर्माण और भराव में उपयोग होने वाला 'मुरम' (Moorum) मुख्य रूप से किस चट्टान के विघटन (Disintegration) से बनता है?
- A) ग्रेनाइट (Granite)
- B) बेसाल्ट (Basalt)
- ✅ C) लेटराइट (Laterite) (सही उत्तर)
- D) सैंडस्टोन (Sandstone)
💡 डिटेल Explanation:
मुरम (Moorum) लाल/भूरे रंग का दानेदार पदार्थ है जिसका उपयोग मिट्टी के रास्तों और सड़कों के आधार (Base) के रूप में किया जाता है। यह मुख्य रूप से 'लेटराइट' (Laterite) चट्टान के अपक्षय (Weathering) और विघटन से बनता है। इसमें आयरन ऑक्साइड की प्रचुरता होती है, जिसके कारण इसका रंग लाल होता है।
मुरम (Moorum) लाल/भूरे रंग का दानेदार पदार्थ है जिसका उपयोग मिट्टी के रास्तों और सड़कों के आधार (Base) के रूप में किया जाता है। यह मुख्य रूप से 'लेटराइट' (Laterite) चट्टान के अपक्षय (Weathering) और विघटन से बनता है। इसमें आयरन ऑक्साइड की प्रचुरता होती है, जिसके कारण इसका रंग लाल होता है।
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Q519: कंक्रीट में 'प्लास्टिसाइज़र' (Plasticizer) नामक रासायनिक मिश्रण (Admixture) का उपयोग क्यों किया जाता है?
- ✅ A) पानी की मात्रा बढ़ाए बिना कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) बढ़ाने के लिए (सही उत्तर)
- B) कंक्रीट में हवा के बुलबुले (Air voids) बनाने के लिए
- C) कंक्रीट को तुरंत जमाने (Flash Set) के लिए
- D) कंक्रीट की ताकत को कम करने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट में अधिक पानी मिलाने से वह सुकार्य (Workable) तो हो जाती है, लेकिन उसकी ताकत (Strength) कम हो जाती है। प्लास्टिसाइज़र (Plasticizer) या 'वाटर-रिड्यूसिंग एडमिक्सचर' ऐसे रसायन हैं जो पानी की मात्रा को बढ़ाए बिना (या पानी को कम करके भी) कंक्रीट को अत्यधिक बहने योग्य और सुकार्य बना देते हैं। इससे ताकत से समझौता किए बिना काम करना आसान हो जाता है।
कंक्रीट में अधिक पानी मिलाने से वह सुकार्य (Workable) तो हो जाती है, लेकिन उसकी ताकत (Strength) कम हो जाती है। प्लास्टिसाइज़र (Plasticizer) या 'वाटर-रिड्यूसिंग एडमिक्सचर' ऐसे रसायन हैं जो पानी की मात्रा को बढ़ाए बिना (या पानी को कम करके भी) कंक्रीट को अत्यधिक बहने योग्य और सुकार्य बना देते हैं। इससे ताकत से समझौता किए बिना काम करना आसान हो जाता है।
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Q520: 520 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पोर्टलैंड पोज़ोलाना सीमेंट (PPC) में 'फ्लाई ऐश' (Fly Ash) मिलाने का सबसे प्रमुख इंजीनियरिंग लाभ क्या है?
- A) कंक्रीट की शुरुआती ताकत (Early strength) बहुत तेजी से बढ़ती है
- ✅ B) जलयोजन की ऊष्मा (Heat of hydration) कम होती है और रासायनिक हमलों (जैसे सल्फेट अटैक) के प्रति प्रतिरोध बढ़ता है (सही उत्तर)
- C) सीमेंट का रंग पूरी तरह सफेद हो जाता है
- D) सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) बढ़ जाता है
💡 डिटेल Explanation:
फ्लाई ऐश (Fly Ash) एक पोज़ोलानिक पदार्थ है। जब इसे सीमेंट (OPC) में मिलाया जाता है, तो यह सीमेंट के जलयोजन से निकलने वाले अतिरिक्त चूने (Free lime) के साथ प्रतिक्रिया करता है। इससे न केवल जलयोजन की ऊष्मा (Heat) कम होती है (जिससे दरारें नहीं पड़तीं), बल्कि कंक्रीट सल्फेट्स और क्लोराइड्स जैसे रासायनिक हमलों के प्रति भी अधिक प्रतिरोधी (Resistant) हो जाती है।
फ्लाई ऐश (Fly Ash) एक पोज़ोलानिक पदार्थ है। जब इसे सीमेंट (OPC) में मिलाया जाता है, तो यह सीमेंट के जलयोजन से निकलने वाले अतिरिक्त चूने (Free lime) के साथ प्रतिक्रिया करता है। इससे न केवल जलयोजन की ऊष्मा (Heat) कम होती है (जिससे दरारें नहीं पड़तीं), बल्कि कंक्रीट सल्फेट्स और क्लोराइड्स जैसे रासायनिक हमलों के प्रति भी अधिक प्रतिरोधी (Resistant) हो जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 105 (Q521 - Q525)
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Q521: कंक्रीट की 'तनन सामर्थ्य' (Tensile Strength) ज्ञात करने के लिए प्रयोगशाला में सामान्यतः कौन सा परीक्षण (Test) किया जाता है?
- A) डायरेक्ट टेन्साइल टेस्ट (Direct Tensile Test)
- ✅ B) स्प्लिट सिलेंडर टेस्ट (Split Cylinder Test) (सही उत्तर)
- C) स्लंप टेस्ट (Slump Test)
- D) फ्लेक्सुरल टेस्ट (Flexural Test)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट पर सीधे तौर पर खिंचाव (Direct tension) लगाना मुश्किल होता है। इसलिए, कंक्रीट की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) मापने के लिए स्प्लिट सिलेंडर टेस्ट (Split Cylinder Test) सबसे आम और अप्रत्यक्ष (Indirect) विधि है। इसमें एक कंक्रीट सिलेंडर को क्षैतिज रूप से रखकर उस पर तब तक दबाव डाला जाता है जब तक कि वह बीच से दो हिस्सों में फट (Split) न जाए।
कंक्रीट पर सीधे तौर पर खिंचाव (Direct tension) लगाना मुश्किल होता है। इसलिए, कंक्रीट की तनन सामर्थ्य (Tensile strength) मापने के लिए स्प्लिट सिलेंडर टेस्ट (Split Cylinder Test) सबसे आम और अप्रत्यक्ष (Indirect) विधि है। इसमें एक कंक्रीट सिलेंडर को क्षैतिज रूप से रखकर उस पर तब तक दबाव डाला जाता है जब तक कि वह बीच से दो हिस्सों में फट (Split) न जाए।
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Q522: भारत में चिनाई के लिए उपयोग की जाने वाली एक पारंपरिक (Non-modular/Traditional) ईंट का मानक आकार सामान्यतः क्या होता है?
- A) 19 cm × 9 cm × 9 cm
- B) 20 cm × 10 cm × 10 cm
- ✅ C) 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm (सही उत्तर)
- D) 25 cm × 12 cm × 8 cm
💡 डिटेल Explanation:
भारत में 'मॉड्यूलर ईंट' का आकार 19×9×9 cm होता है। लेकिन अधिकांश पारंपरिक या गैर-मॉड्यूलर ईंटों (Traditional Bricks) का आकार इंच में 9" × 4.5" × 3" होता है, जिसे सेंटीमीटर में 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm लिखा जाता है। फील्ड में चिनाई के काम में आज भी इसी आकार का सबसे ज्यादा उपयोग होता है।
भारत में 'मॉड्यूलर ईंट' का आकार 19×9×9 cm होता है। लेकिन अधिकांश पारंपरिक या गैर-मॉड्यूलर ईंटों (Traditional Bricks) का आकार इंच में 9" × 4.5" × 3" होता है, जिसे सेंटीमीटर में 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm लिखा जाता है। फील्ड में चिनाई के काम में आज भी इसी आकार का सबसे ज्यादा उपयोग होता है।
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Q523: इमारती लकड़ी (Timber) को सुखाते समय वह बिंदु जहाँ लकड़ी के छिद्रों (Cavities) का सारा स्वतंत्र पानी (Free water) सूख जाता है, लेकिन कोशिका भित्तियाँ (Cell walls) अभी भी पानी से संतृप्त (Saturated) होती हैं, क्या कहलाता है?
- A) इक्विलिब्रियम मॉइस्चर कंटेंट (EMC)
- ✅ B) फाइबर सैचुरेशन पॉइंट (Fiber Saturation Point) (सही उत्तर)
- C) श्रिंकेज लिमिट (Shrinkage Limit)
- D) ड्राई पॉइंट (Dry Point)
💡 डिटेल Explanation:
इसे फाइबर सैचुरेशन पॉइंट (Fiber Saturation Point - FSP) कहते हैं। यह लकड़ी के सुखाने की प्रक्रिया में एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है। FSP तक पहुँचने तक लकड़ी सिकुड़ती नहीं है। लेकिन जैसे ही नमी इस बिंदु (लगभग 25-30% नमी) से नीचे जाती है, कोशिका भित्तियों से पानी निकलने लगता है और लकड़ी सिकुड़ने (Shrink) लगती है।
इसे फाइबर सैचुरेशन पॉइंट (Fiber Saturation Point - FSP) कहते हैं। यह लकड़ी के सुखाने की प्रक्रिया में एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है। FSP तक पहुँचने तक लकड़ी सिकुड़ती नहीं है। लेकिन जैसे ही नमी इस बिंदु (लगभग 25-30% नमी) से नीचे जाती है, कोशिका भित्तियों से पानी निकलने लगता है और लकड़ी सिकुड़ने (Shrink) लगती है।
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Q524: लकड़ी के कार्यों (Wood works) के लिए उपयोग किए जाने वाले पेंट में 'व्हाइट लेड' (White Lead) मुख्य रूप से किस घटक के रूप में कार्य करता है?
- A) वाहन (Vehicle)
- B) थिनर (Thinner)
- ✅ C) बेस (Base) (सही उत्तर)
- D) ड्रायर (Drier)
💡 डिटेल Explanation:
व्हाइट लेड (White Lead) पेंट का एक उत्कृष्ट बेस (Base) है। बेस वह मुख्य ठोस पदार्थ है जो पेंट की परत (Film) को मोटाई और मजबूती देता है और सतह को छुपाने (Opacity) का काम करता है। व्हाइट लेड का उपयोग विशेष रूप से लकड़ी के कार्यों (Wooden works) के लिए प्राइमर और पेंट में किया जाता है, जबकि लोहे के लिए रेड लेड (Red Lead) का उपयोग होता है।
व्हाइट लेड (White Lead) पेंट का एक उत्कृष्ट बेस (Base) है। बेस वह मुख्य ठोस पदार्थ है जो पेंट की परत (Film) को मोटाई और मजबूती देता है और सतह को छुपाने (Opacity) का काम करता है। व्हाइट लेड का उपयोग विशेष रूप से लकड़ी के कार्यों (Wooden works) के लिए प्राइमर और पेंट में किया जाता है, जबकि लोहे के लिए रेड लेड (Red Lead) का उपयोग होता है।
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Q525: 525 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: खदानों (Quarries) में कठोर चट्टानों (Hard rocks) को तोड़ने या ब्लास्ट करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला विस्फोटक (Explosive) कौन सा है?
- A) गन पाउडर (Gun powder)
- ✅ B) डायनामाइट (Dynamite) (सही उत्तर)
- C) कॉर्डाइट (Cordite)
- D) नाइट्रो-सेल्युलोज (Nitro-cellulose)
💡 डिटेल Explanation:
कठोर चट्टानों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) के उत्खनन (Quarrying) के लिए डायनामाइट (Dynamite) सबसे प्रभावी और आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला उच्च-विस्फोटक है। नरम चट्टानों को तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग पाउडर या गन पाउडर का उपयोग किया जा सकता है।
कठोर चट्टानों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) के उत्खनन (Quarrying) के लिए डायनामाइट (Dynamite) सबसे प्रभावी और आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला उच्च-विस्फोटक है। नरम चट्टानों को तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग पाउडर या गन पाउडर का उपयोग किया जा सकता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 106 (Q526 - Q530)
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Q526: पोर्टलैंड सीमेंट के निर्माण में सबसे मुख्य कच्चा माल 'चूना' (Lime - CaO) होता है। इसकी आदर्श मात्रा सीमेंट में लगभग कितने प्रतिशत होनी चाहिए?
- A) 20% - 30%
- B) 30% - 40%
- ✅ C) 60% - 67% (सही उत्तर)
- D) 80% - 90%
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में सबसे प्रमुख और सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला घटक चूना (Lime - CaO) होता है, जिसकी मात्रा 60% से 67% (औसत 62%) होती है। यह सीमेंट को ताकत देता है और उसे साउंड (निर्दोष) बनाता है। यदि चूने की मात्रा बहुत अधिक हो जाए, तो सीमेंट का विस्तार (Expansion) होने लगता है और वह दरक जाता है।
सीमेंट में सबसे प्रमुख और सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला घटक चूना (Lime - CaO) होता है, जिसकी मात्रा 60% से 67% (औसत 62%) होती है। यह सीमेंट को ताकत देता है और उसे साउंड (निर्दोष) बनाता है। यदि चूने की मात्रा बहुत अधिक हो जाए, तो सीमेंट का विस्तार (Expansion) होने लगता है और वह दरक जाता है।
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Q527: पकी हुई ईंट का विशिष्ट 'गहरा लाल रंग' (Cherry red color) मिट्टी में मौजूद किस घटक के कारण आता है?
- A) सिलिका (Silica)
- B) एल्युमिना (Alumina)
- C) मैग्नीशिया (Magnesia)
- ✅ D) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) की मात्रा 5% से 6% होती है। जब ईंट को भट्ठे में पकाया जाता है, तो आयरन ऑक्साइड के ऑक्सीकरण (Oxidation) के कारण ही ईंट को उसका सुंदर और आकर्षक लाल रंग (Cherry red tint) मिलता है। यह ईंट को हल्की कठोरता भी प्रदान करता है।
ईंट की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) की मात्रा 5% से 6% होती है। जब ईंट को भट्ठे में पकाया जाता है, तो आयरन ऑक्साइड के ऑक्सीकरण (Oxidation) के कारण ही ईंट को उसका सुंदर और आकर्षक लाल रंग (Cherry red tint) मिलता है। यह ईंट को हल्की कठोरता भी प्रदान करता है।
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Q528: प्राकृतिक लकड़ी की तुलना में, प्लाइवुड (Plywood) के रेशों (Grains) की व्यवस्था के कारण इसकी मजबूती किस दिशा में होती है?
- A) केवल रेशों के समानांतर (Parallel to grains) अधिकतम होती है
- B) केवल रेशों के लंबवत (Perpendicular to grains) अधिकतम होती है
- ✅ C) सभी दिशाओं में समान (Equal strength in all directions) होती है (सही उत्तर)
- D) इसकी कोई संरचनात्मक मजबूती नहीं होती
💡 डिटेल Explanation:
प्राकृतिक लकड़ी की मजबूती दिशा पर निर्भर करती है (Anisotropic)। लेकिन प्लाइवुड बनाते समय प्रत्येक परत (Veneer) के रेशों को एक-दूसरे के समकोण (Right Angles) पर चिपकाया जाता है। इस क्रॉस-ग्रेनिंग (Cross-graining) संरचना के कारण प्लाइवुड सभी दिशाओं में समान रूप से मजबूत हो जाता है।
प्राकृतिक लकड़ी की मजबूती दिशा पर निर्भर करती है (Anisotropic)। लेकिन प्लाइवुड बनाते समय प्रत्येक परत (Veneer) के रेशों को एक-दूसरे के समकोण (Right Angles) पर चिपकाया जाता है। इस क्रॉस-ग्रेनिंग (Cross-graining) संरचना के कारण प्लाइवुड सभी दिशाओं में समान रूप से मजबूत हो जाता है।
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Q529: पेंट में प्रयुक्त होने वाला 'अलसी का तेल' (Linseed Oil) मुख्य रूप से किस श्रेणी के घटक में आता है?
- A) बेस (Base)
- B) थिनर (Thinner)
- C) ड्रायर (Drier)
- ✅ D) वाहन या बाइंडर (Vehicle / Binder) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
अलसी का तेल (Linseed Oil) पेंट में सबसे आम वाहन (Vehicle) या बाइंडर है। यह एक तरल पदार्थ है जो पेंट के सभी घटकों (बेस, पिगमेंट आदि) को आपस में बांधे रखता है और पेंट को ब्रश से सतह पर फैलाने में मदद करता है। हवा के संपर्क में आने पर यह ऑक्सीकृत होकर एक कठोर फिल्म बनाता है।
अलसी का तेल (Linseed Oil) पेंट में सबसे आम वाहन (Vehicle) या बाइंडर है। यह एक तरल पदार्थ है जो पेंट के सभी घटकों (बेस, पिगमेंट आदि) को आपस में बांधे रखता है और पेंट को ब्रश से सतह पर फैलाने में मदद करता है। हवा के संपर्क में आने पर यह ऑक्सीकृत होकर एक कठोर फिल्म बनाता है।
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Q530: 530 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: कंक्रीट को सांचे में बिछाने (Placing) के बाद, जलयोजन (Hydration) की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए कंक्रीट को एक निश्चित अवधि तक नम (Moist) रखने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
- ✅ A) क्यूरिंग / तराई (Curing) (सही उत्तर)
- B) कॉम्पैक्शन (Compaction)
- C) ब्लीडिंग (Bleeding)
- D) सेग्रीगेशन (Segregation)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट और पानी के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया (Hydration) के लिए लगातार नमी की आवश्यकता होती है। कंक्रीट के जमने के बाद उसे सूखने और चटकने से बचाने, तथा उसे अपनी अधिकतम ताकत तक पहुँचाने के लिए सतह पर पानी डालकर उसे नम बनाए रखने की प्रक्रिया को तराई (Curing) कहते हैं। सामान्य कंक्रीट के लिए यह 7-14 दिनों तक की जाती है।
सीमेंट और पानी के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया (Hydration) के लिए लगातार नमी की आवश्यकता होती है। कंक्रीट के जमने के बाद उसे सूखने और चटकने से बचाने, तथा उसे अपनी अधिकतम ताकत तक पहुँचाने के लिए सतह पर पानी डालकर उसे नम बनाए रखने की प्रक्रिया को तराई (Curing) कहते हैं। सामान्य कंक्रीट के लिए यह 7-14 दिनों तक की जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 107 (Q531 - Q535)
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Q531: कंक्रीट को मिलाते (Mixing) या ले जाते (Transporting) समय, कंक्रीट के मिश्रण से 'मोटी गिट्टी' (Coarse Aggregates) का अलग हो जाना क्या कहलाता है?
- A) ब्लीडिंग (Bleeding)
- ✅ B) सेग्रीगेशन (Segregation - पृथक्करण) (सही उत्तर)
- C) लैटेंस (Laitance)
- D) श्रिंकेज (Shrinkage)
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई (1.5 मीटर से अधिक) से गिराया जाता है या उसे बहुत अधिक वाइब्रेट किया जाता है, तो भारी कण (मोटी गिट्टी) सीमेंट पेस्ट से अलग होकर नीचे बैठ जाते हैं। इस दोष को 'सेग्रीगेशन' (Segregation) कहते हैं, जिससे कंक्रीट बहुत कमजोर और भुरभुरी (Honeycombed) हो जाती है।
जब कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई (1.5 मीटर से अधिक) से गिराया जाता है या उसे बहुत अधिक वाइब्रेट किया जाता है, तो भारी कण (मोटी गिट्टी) सीमेंट पेस्ट से अलग होकर नीचे बैठ जाते हैं। इस दोष को 'सेग्रीगेशन' (Segregation) कहते हैं, जिससे कंक्रीट बहुत कमजोर और भुरभुरी (Honeycombed) हो जाती है।
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Q532: ईंट की चिनाई में, यदि किसी ईंट को इस प्रकार रखा जाए कि उसकी सबसे लंबी भुजा (Length) दीवार के सामने (Face of the wall) के समानांतर हो, तो उसे क्या कहते हैं?
- A) हेडर (Header)
- ✅ B) स्ट्रेचर (Stretcher) (सही उत्तर)
- C) क्लोजर (Closer)
- D) बैट (Bat)
💡 डिटेल Explanation:
दीवार के सामने से देखने पर यदि ईंट का लंबा वाला हिस्सा (जैसे मानक ईंट का 19 cm × 9 cm वाला भाग) दिखाई देता है, तो उसे 'स्ट्रेचर' (Stretcher) कहते हैं। यदि ईंट का छोटा वाला सिरा (9 cm × 9 cm) दिखाई देता है, तो उसे 'हेडर' (Header) कहते हैं। आधा ईंट की मोटाई (Half-brick thick) वाली दीवारें केवल स्ट्रेचर बॉन्ड में बनाई जाती हैं।
दीवार के सामने से देखने पर यदि ईंट का लंबा वाला हिस्सा (जैसे मानक ईंट का 19 cm × 9 cm वाला भाग) दिखाई देता है, तो उसे 'स्ट्रेचर' (Stretcher) कहते हैं। यदि ईंट का छोटा वाला सिरा (9 cm × 9 cm) दिखाई देता है, तो उसे 'हेडर' (Header) कहते हैं। आधा ईंट की मोटाई (Half-brick thick) वाली दीवारें केवल स्ट्रेचर बॉन्ड में बनाई जाती हैं।
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Q533: किसी वृक्ष के तने में मौजूद 'हार्टवुड' (Heartwood) का मुख्य कार्य (Function) क्या होता है?
- A) जड़ों से पत्तियों तक पानी और रस (Sap) पहुँचाना
- B) पेड़ के लिए भोजन का भंडारण करना
- ✅ C) पेड़ को यांत्रिक सहारा (Mechanical support) और दृढ़ता प्रदान करना (सही उत्तर)
- D) पेड़ की छाल को सुरक्षित रखना
💡 डिटेल Explanation:
हार्टवुड (Heartwood) पेड़ के तने का अंदरूनी, गहरा और मृत (Dead) हिस्सा होता है। यह पेड़ के विकास (Growth) या रस ले जाने में कोई भाग नहीं लेता। इसका एकमात्र कार्य पेड़ को मजबूत यांत्रिक सहारा (Rigidity and support) देना है। निर्माण कार्यों (Engineering purpose) के लिए यही हार्टवुड सबसे उपयोगी और टिकाऊ लकड़ी मानी जाती है।
हार्टवुड (Heartwood) पेड़ के तने का अंदरूनी, गहरा और मृत (Dead) हिस्सा होता है। यह पेड़ के विकास (Growth) या रस ले जाने में कोई भाग नहीं लेता। इसका एकमात्र कार्य पेड़ को मजबूत यांत्रिक सहारा (Rigidity and support) देना है। निर्माण कार्यों (Engineering purpose) के लिए यही हार्टवुड सबसे उपयोगी और टिकाऊ लकड़ी मानी जाती है।
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Q534: यदि पेंट की गई सतह को हाथ से रगड़ने पर पेंट एक पाउडर (Powder) की तरह हाथ में लग जाए, तो पेंट के इस दोष को क्या कहते हैं?
- ✅ A) चॉकिंग (Chalking) (सही उत्तर)
- B) फ्लैकिंग (Flaking)
- C) ब्लूमिंग (Blooming)
- D) ब्लिस्टरिंग (Blistering)
💡 डिटेल Explanation:
चॉकिंग (Chalking) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट की फिल्म धीरे-धीरे नष्ट होकर एक महीन पाउडर में बदल जाती है। यह मुख्य रूप से पेंट में तेल (Vehicle) की कमी के कारण, या पेंट की गई सतह पर अत्यधिक धूप और खराब मौसम के प्रभाव के कारण होता है। प्राइमर में पर्याप्त तेल न होने पर दीवार पेंट का सारा तेल सोख लेती है, जिससे चॉकिंग होती है।
चॉकिंग (Chalking) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट की फिल्म धीरे-धीरे नष्ट होकर एक महीन पाउडर में बदल जाती है। यह मुख्य रूप से पेंट में तेल (Vehicle) की कमी के कारण, या पेंट की गई सतह पर अत्यधिक धूप और खराब मौसम के प्रभाव के कारण होता है। प्राइमर में पर्याप्त तेल न होने पर दीवार पेंट का सारा तेल सोख लेती है, जिससे चॉकिंग होती है।
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Q535: 535 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्मी और दबाव (Metamorphism) के कारण 'चूना पत्थर' (Limestone) किस कायांतरित (Metamorphic) चट्टान में परिवर्तित हो जाता है?
- A) क्वार्टजाइट (Quartzite)
- B) स्लेट (Slate)
- ✅ C) मार्बल / संगमरमर (Marble) (सही उत्तर)
- D) नीस (Gneiss)
💡 डिटेल Explanation:
चूना पत्थर (Limestone) एक अवसादी चट्टान है। जब इस पर भूवैज्ञानिक दबाव और उच्च तापमान पड़ता है, तो इसके अंदर मौजूद कैल्शियम कार्बोनेट के क्रिस्टल पुनर्गठित (Recrystallize) हो जाते हैं और यह मार्बल (Marble) नामक एक सुंदर और कठोर कायांतरित चट्टान का रूप ले लेता है।
चूना पत्थर (Limestone) एक अवसादी चट्टान है। जब इस पर भूवैज्ञानिक दबाव और उच्च तापमान पड़ता है, तो इसके अंदर मौजूद कैल्शियम कार्बोनेट के क्रिस्टल पुनर्गठित (Recrystallize) हो जाते हैं और यह मार्बल (Marble) नामक एक सुंदर और कठोर कायांतरित चट्टान का रूप ले लेता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 108 (Q536 - Q540)
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Q536: भारी और विशाल कंक्रीट संरचनाओं (Mass concrete structures) जैसे कि 'बड़े बांधों' (Dams) के निर्माण के लिए किस विशेष प्रकार के सीमेंट का उपयोग किया जाता है?
- A) रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC)
- B) क्विक सेटिंग सीमेंट
- ✅ C) लो हीट पोर्टलैंड सीमेंट (Low Heat Portland Cement) (सही उत्तर)
- D) हाई एल्युमिना सीमेंट (HAC)
💡 डिटेल Explanation:
बड़े बांधों जैसे मास कंक्रीट कार्यों में, जलयोजन की ऊष्मा (Heat of hydration) कंक्रीट के अंदर फंसी रह सकती है, जिससे भयंकर दरारें (Cracks) पड़ सकती हैं। इससे बचने के लिए लो हीट सीमेंट (Low Heat Cement) का उपयोग किया जाता है, जिसमें ऊष्मा उत्पन्न करने वाले यौगिकों (जैसे C3A और C3S) की मात्रा कम कर दी जाती है और C2S की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
बड़े बांधों जैसे मास कंक्रीट कार्यों में, जलयोजन की ऊष्मा (Heat of hydration) कंक्रीट के अंदर फंसी रह सकती है, जिससे भयंकर दरारें (Cracks) पड़ सकती हैं। इससे बचने के लिए लो हीट सीमेंट (Low Heat Cement) का उपयोग किया जाता है, जिसमें ऊष्मा उत्पन्न करने वाले यौगिकों (जैसे C3A और C3S) की मात्रा कम कर दी जाती है और C2S की मात्रा बढ़ा दी जाती है।
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Q537: ईंटों को पकाने (Burning of Bricks) के लिए उपयोग किए जाने वाले 'बुल ट्रेंच क्लिन' (Bull's Trench Kiln) की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?
- ✅ A) यह एक 'निरंतर' (Continuous) भट्ठा है, जिसमें ईंटें पकाने का काम साल भर चलता रहता है (सही उत्तर)
- B) यह एक 'आंतरायिक' (Intermittent) भट्ठा है, जिसे हर बार ठंडा करना पड़ता है
- C) इसमें ईंटों को पकाने के लिए केवल लकड़ी का उपयोग होता है
- D) यह बहुत कम मात्रा में ईंटें पकाने के लिए उपयोग होता है
💡 डिटेल Explanation:
भारत में ईंटें पकाने के लिए बुल ट्रेंच क्लिन (Bull's Trench Kiln) का सबसे अधिक उपयोग होता है। यह एक निरंतर (Continuous) प्रक्रिया वाला भट्ठा है। इसका मतलब है कि इसके एक हिस्से में ईंटें पकाई जा रही होती हैं, दूसरे हिस्से में ठंडी हो रही होती हैं, और तीसरे हिस्से से पकी हुई ईंटें निकाली जा रही होती हैं। इससे ईंधनों की भारी बचत होती है।
भारत में ईंटें पकाने के लिए बुल ट्रेंच क्लिन (Bull's Trench Kiln) का सबसे अधिक उपयोग होता है। यह एक निरंतर (Continuous) प्रक्रिया वाला भट्ठा है। इसका मतलब है कि इसके एक हिस्से में ईंटें पकाई जा रही होती हैं, दूसरे हिस्से में ठंडी हो रही होती हैं, और तीसरे हिस्से से पकी हुई ईंटें निकाली जा रही होती हैं। इससे ईंधनों की भारी बचत होती है।
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Q538: इमारती लकड़ी (Timber) प्रदान करने वाले वृक्षों में, निम्नलिखित में से कौन सा वृक्ष 'सॉफ्टवुड' (Softwood - मुलायम लकड़ी) का एक प्रमुख उदाहरण है?
- A) सागौन (Teak)
- B) साल (Sal)
- C) शीशम (Shisham)
- ✅ D) देवदार / चीड़ (Deodar / Pine) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
सॉफ्टवुड (मुलायम लकड़ी) 'कोनिफर' (Conifers) यानी शंकुधारी वृक्षों से प्राप्त होती है, जिनकी पत्तियां सुई (Needle) जैसी होती हैं और जो सदाबहार होते हैं। देवदार (Deodar), चीड़ (Pine), और कैल (Kail) सॉफ्टवुड के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। दूसरी ओर, सागौन, साल, ओक और शीशम पर्णपाती (Deciduous) वृक्ष हैं जो 'हार्डवुड' देते हैं।
सॉफ्टवुड (मुलायम लकड़ी) 'कोनिफर' (Conifers) यानी शंकुधारी वृक्षों से प्राप्त होती है, जिनकी पत्तियां सुई (Needle) जैसी होती हैं और जो सदाबहार होते हैं। देवदार (Deodar), चीड़ (Pine), और कैल (Kail) सॉफ्टवुड के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। दूसरी ओर, सागौन, साल, ओक और शीशम पर्णपाती (Deciduous) वृक्ष हैं जो 'हार्डवुड' देते हैं।
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Q539: लोहे के पाइपों, पानी के नीचे (Underwater) की संरचनाओं और औद्योगिक शेड को भारी जंग (Corrosion) से बचाने के लिए किस विशेष प्रकार के पेंट का उपयोग किया जाता है?
- ✅ A) बिटुमिनस पेंट (Bituminous Paint) (सही उत्तर)
- B) एल्युमिनियम पेंट (Aluminium Paint)
- C) डिस्टेंपर (Distemper)
- D) सेल्युलोज पेंट (Cellulose Paint)
💡 डिटेल Explanation:
बिटुमिनस पेंट (Bituminous Paint) डामर (Asphalt) या बिटुमेन को किसी वाष्पशील विलायक (Solvent) में घोलकर बनाया जाता है। यह सूखने पर काले रंग की एक बहुत ही सख्त, जलरोधी (Waterproof) और जंग-रोधी परत बनाता है। इसी कारण इसका उपयोग भूमिगत (Underground) लोहे के पाइपों और पानी के संपर्क में रहने वाले स्टील के कार्यों पर बहुतायत से किया जाता है।
बिटुमिनस पेंट (Bituminous Paint) डामर (Asphalt) या बिटुमेन को किसी वाष्पशील विलायक (Solvent) में घोलकर बनाया जाता है। यह सूखने पर काले रंग की एक बहुत ही सख्त, जलरोधी (Waterproof) और जंग-रोधी परत बनाता है। इसी कारण इसका उपयोग भूमिगत (Underground) लोहे के पाइपों और पानी के संपर्क में रहने वाले स्टील के कार्यों पर बहुतायत से किया जाता है।
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Q540: 540 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पत्थर की खदान (Quarrying of stones) में, 'वेजिंग' (Wedging) विधि का उपयोग मुख्य रूप से किस प्रकार की चट्टानों को निकालने के लिए किया जाता है?
- A) अत्यधिक कठोर और सघन चट्टानें (ग्रेनाइट)
- ✅ B) परतदार और नरम चट्टानें (Stratified / Sedimentary rocks जैसे स्लेट, सैंडस्टोन) (सही उत्तर)
- C) ज्वालामुखीय चट्टानें (बेसाल्ट)
- D) पानी के नीचे मौजूद चट्टानें
💡 डिटेल Explanation:
वेजिंग (Wedging) एक हाथ से की जाने वाली उत्खनन (Quarrying) विधि है। इसमें चट्टान की दरारों (Fissures/Cleavage) में स्टील की कीलें (Wedges) और पिन हथौड़े से ठोकी जाती हैं। यह विधि परतदार चट्टानों (Stratified rocks) के लिए बहुत उपयुक्त है, क्योंकि वे अपनी परतों के समानांतर आसानी से फट (Split) जाती हैं। कठोर चट्टानों के लिए ब्लास्टिंग (Blasting) की आवश्यकता होती है।
वेजिंग (Wedging) एक हाथ से की जाने वाली उत्खनन (Quarrying) विधि है। इसमें चट्टान की दरारों (Fissures/Cleavage) में स्टील की कीलें (Wedges) और पिन हथौड़े से ठोकी जाती हैं। यह विधि परतदार चट्टानों (Stratified rocks) के लिए बहुत उपयुक्त है, क्योंकि वे अपनी परतों के समानांतर आसानी से फट (Split) जाती हैं। कठोर चट्टानों के लिए ब्लास्टिंग (Blasting) की आवश्यकता होती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 109 (Q541 - Q545)
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Q541: कंक्रीट निर्माण में 'लैटेंस' (Laitance) नामक दोष क्या होता है?
- A) कंक्रीट का सिकुड़ना
- ✅ B) कंक्रीट की सतह पर पानी, सीमेंट और महीन कणों की एक कमजोर परत का जमा होना (सही उत्तर)
- C) मोटी गिट्टी का नीचे बैठना
- D) कंक्रीट में दरारें पड़ना
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट में ब्लीडिंग (Bleeding) होती है या उसे बहुत अधिक वाइब्रेट किया जाता है, तो पानी के साथ सीमेंट और महीन बालू के कण सतह पर आ जाते हैं और एक दूधिया (Milky), कमजोर परत बना लेते हैं। इसे ही 'लैटेंस' (Laitance) कहते हैं। यदि इसके ऊपर कंक्रीट की दूसरी परत डालनी हो, तो पहले इस लैटेंस को तार वाले ब्रश से हटाना अनिवार्य होता है।
जब कंक्रीट में ब्लीडिंग (Bleeding) होती है या उसे बहुत अधिक वाइब्रेट किया जाता है, तो पानी के साथ सीमेंट और महीन बालू के कण सतह पर आ जाते हैं और एक दूधिया (Milky), कमजोर परत बना लेते हैं। इसे ही 'लैटेंस' (Laitance) कहते हैं। यदि इसके ऊपर कंक्रीट की दूसरी परत डालनी हो, तो पहले इस लैटेंस को तार वाले ब्रश से हटाना अनिवार्य होता है।
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Q542: ईंट बनाने वाली मिट्टी में 'चूने के कंकड़' (Limestone nodules) की उपस्थिति के कारण ईंट में कौन सा दोष उत्पन्न होता है?
- A) चफ्स (Chuffs)
- B) ब्लोटिंग (Bloating)
- ✅ C) स्पॉलिंग / ब्लोइंग (Spalling / Blowing of bricks) (सही उत्तर)
- D) एफ्लोरेसेंस (Efflorescence)
💡 डिटेल Explanation:
यदि मिट्टी में चूने के बड़े टुकड़े या कंकड़ रह जाते हैं, तो भट्ठे में पकाने पर वे अनबुझे चूने (Quick lime) में बदल जाते हैं। बाद में जब ईंट पानी या हवा की नमी के संपर्क में आती है, तो यह चूना पानी सोखकर फैलता है, जिससे ईंट के टुकड़े छिटक कर टूट जाते हैं। इस दोष को Spalling या Blowing कहा जाता है।
यदि मिट्टी में चूने के बड़े टुकड़े या कंकड़ रह जाते हैं, तो भट्ठे में पकाने पर वे अनबुझे चूने (Quick lime) में बदल जाते हैं। बाद में जब ईंट पानी या हवा की नमी के संपर्क में आती है, तो यह चूना पानी सोखकर फैलता है, जिससे ईंट के टुकड़े छिटक कर टूट जाते हैं। इस दोष को Spalling या Blowing कहा जाता है।
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Q543: इमारती लकड़ी (Timber) में 'फॉक्सीनेस' (Foxiness) दोष क्या होता है?
- A) लकड़ी का टेढ़ा हो जाना
- ✅ B) अति-परिपक्वता (Over-maturity) या खराब वेंटिलेशन के कारण लकड़ी में लाल या पीले रंग के धब्बों का पड़ जाना (सही उत्तर)
- C) दीमक द्वारा लकड़ी का खाया जाना
- D) लकड़ी के रेशों का टूट जाना
💡 डिटेल Explanation:
फॉक्सीनेस (Foxiness) लकड़ी का एक ऐसा दोष है जिसमें फफूंदी (Fungus) की शुरुआत या पेड़ के अत्यधिक पुराना होने (Over-maturity) के कारण लकड़ी पर पीले या लाल रंग के दाग/धब्बे पड़ जाते हैं। यह आमतौर पर तब भी होता है जब कटी हुई लकड़ी को बिना हवादार (Poorly ventilated) जगह पर स्टोर किया जाता है।
फॉक्सीनेस (Foxiness) लकड़ी का एक ऐसा दोष है जिसमें फफूंदी (Fungus) की शुरुआत या पेड़ के अत्यधिक पुराना होने (Over-maturity) के कारण लकड़ी पर पीले या लाल रंग के दाग/धब्बे पड़ जाते हैं। यह आमतौर पर तब भी होता है जब कटी हुई लकड़ी को बिना हवादार (Poorly ventilated) जगह पर स्टोर किया जाता है।
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Q544: भवन निर्माण में उपयोग होने वाले 'डिस्टेंपर' (Distemper) पेंट में 'बेस' (Base) के रूप में मुख्य रूप से किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
- A) व्हाइट लेड
- B) रेड लेड
- ✅ C) चॉक / व्हाइटिंग (Chalk / Whiting) (सही उत्तर)
- D) जिंक ऑक्साइड
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर एक सस्ता और लोकप्रिय पानी आधारित पेंट है। इसका मुख्य बेस चॉक (Whiting / Chalk powder) होता है। इसमें वाहन (Vehicle) के रूप में पानी और बाइंडर (चिपकाने वाले पदार्थ) के रूप में गोंद (Size) या कैसिइन मिलाया जाता है। इसका इस्तेमाल केवल अंदरूनी प्लास्टर वाली दीवारों पर किया जाता है।
डिस्टेंपर एक सस्ता और लोकप्रिय पानी आधारित पेंट है। इसका मुख्य बेस चॉक (Whiting / Chalk powder) होता है। इसमें वाहन (Vehicle) के रूप में पानी और बाइंडर (चिपकाने वाले पदार्थ) के रूप में गोंद (Size) या कैसिइन मिलाया जाता है। इसका इस्तेमाल केवल अंदरूनी प्लास्टर वाली दीवारों पर किया जाता है।
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Q545: भूवैज्ञानिक वर्गीकरण (Geological Classification) के अनुसार 'बलुआ पत्थर' (Sandstone) किस प्रकार की चट्टान है?
- A) आग्नेय चट्टान (Igneous Rock)
- ✅ B) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock) (सही उत्तर)
- C) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock)
- D) ज्वालामुखीय चट्टान (Volcanic Rock)
💡 डिटेल Explanation:
सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) एक अवसादी चट्टान (Sedimentary rock) है। यह क्वार्ट्ज या रेत के कणों (Sand grains) के पानी या हवा द्वारा ढोकर सदियों तक एक जगह परत-दर-परत जमा होने और प्राकृतिक सीमेंटिंग पदार्थों (जैसे सिलिका या आयरन ऑक्साइड) द्वारा आपस में जुड़ने (Compaction) से बनती है। भारत में लाल किला (Red Fort) इसी लाल बलुआ पत्थर से बना है।
सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) एक अवसादी चट्टान (Sedimentary rock) है। यह क्वार्ट्ज या रेत के कणों (Sand grains) के पानी या हवा द्वारा ढोकर सदियों तक एक जगह परत-दर-परत जमा होने और प्राकृतिक सीमेंटिंग पदार्थों (जैसे सिलिका या आयरन ऑक्साइड) द्वारा आपस में जुड़ने (Compaction) से बनती है। भारत में लाल किला (Red Fort) इसी लाल बलुआ पत्थर से बना है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 110 (Q546 - Q550)
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Q546: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के 'ली-चेटेलियर परीक्षण' (Le-Chatelier test) में, उपकरण के दोनों इंडिकेटर पॉइंटर्स के बीच का विस्तार (Expansion) किससे अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 5 mm
- ✅ B) 10 mm (सही उत्तर)
- C) 15 mm
- D) 20 mm
💡 डिटेल Explanation:
ली-चेटेलियर परीक्षण सीमेंट की 'निर्दोषता' (Soundness) मापने के लिए किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सीमेंट में बहुत अधिक मुक्त चूना (Free lime) तो नहीं है। भारतीय मानकों के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए उबलते पानी में 3 घंटे के परीक्षण के बाद पॉइंटर्स के बीच का फैलाव 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
ली-चेटेलियर परीक्षण सीमेंट की 'निर्दोषता' (Soundness) मापने के लिए किया जाता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सीमेंट में बहुत अधिक मुक्त चूना (Free lime) तो नहीं है। भारतीय मानकों के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए उबलते पानी में 3 घंटे के परीक्षण के बाद पॉइंटर्स के बीच का फैलाव 10 mm से अधिक नहीं होना चाहिए।
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Q547: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में 'क्वाइन' (Quoin) शब्द से क्या तात्पर्य है?
- ✅ A) दीवार का बाहरी कोना (Exterior corner of a wall) (सही उत्तर)
- B) दो दीवारों के बीच का जोड़
- C) खिड़की के ऊपर की मेहराब
- D) दीवार का सबसे निचला रद्दा
💡 डिटेल Explanation:
किसी भी दीवार का जो बाहरी कोना (Exterior angle/corner) होता है, उसे चिनाई की तकनीकी भाषा में 'क्वाइन' (Quoin) कहा जाता है। क्वाइन पर लगाई जाने वाली ईंटों को बहुत सावधानी से चुना जाता है और सीधा रखा जाता है ताकि दीवार का कोना साहुल (Plumb) में सीधा और मजबूत रहे।
किसी भी दीवार का जो बाहरी कोना (Exterior angle/corner) होता है, उसे चिनाई की तकनीकी भाषा में 'क्वाइन' (Quoin) कहा जाता है। क्वाइन पर लगाई जाने वाली ईंटों को बहुत सावधानी से चुना जाता है और सीधा रखा जाता है ताकि दीवार का कोना साहुल (Plumb) में सीधा और मजबूत रहे।
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Q548: वृक्ष के तने में हार्टवुड (Heartwood) और भीतरी छाल के बीच स्थित 'सैपवुड' (Sapwood) का दूसरा तकनीकी नाम क्या है?
- A) पिथ (Pith)
- ✅ B) अल्बर्नम (Alburnum) (सही उत्तर)
- C) कैम्बियम (Cambium)
- D) ड्यूरामेन (Duramen)
💡 डिटेल Explanation:
सैपवुड पेड़ का वह बाहरी, हल्के रंग का जीवित हिस्सा है जो जड़ों से पत्तियों तक रस (Sap) और नमी पहुँचाता है। इसका दूसरा नाम 'अल्बर्नम' (Alburnum) है। यह इमारती काम के लिए अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इसमें नमी और रस होता है। (ध्यान दें: हार्टवुड का तकनीकी नाम 'ड्यूरामेन' - Duramen होता है)।
सैपवुड पेड़ का वह बाहरी, हल्के रंग का जीवित हिस्सा है जो जड़ों से पत्तियों तक रस (Sap) और नमी पहुँचाता है। इसका दूसरा नाम 'अल्बर्नम' (Alburnum) है। यह इमारती काम के लिए अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इसमें नमी और रस होता है। (ध्यान दें: हार्टवुड का तकनीकी नाम 'ड्यूरामेन' - Duramen होता है)।
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Q549: जलरोधी (Waterproofing) कार्यों में इस्तेमाल होने वाले 'बिटुमेन' (Bitumen) और 'डामर' (Asphalt) को घोलने के लिए किस विलायक (Solvent) का उपयोग किया जाता है?
- A) पानी
- B) तारपीन का तेल
- ✅ C) कार्बन डाइसल्फाइड (Carbon Disulphide) (सही उत्तर)
- D) अलसी का तेल
💡 डिटेल Explanation:
बिटुमेन और एस्फाल्ट पेट्रोलियम से प्राप्त होने वाले हाइड्रोकार्बन हैं जो पानी में पूरी तरह अघुलनशील (Insoluble) होते हैं। लेकिन ये 'कार्बन डाइसल्फाइड' (Carbon Disulphide), नेफ्था और अन्य पेट्रोलियम सॉल्वेंट्स में पूरी तरह घुल जाते हैं। इस गुण का उपयोग बिटुमिनस पेंट और इमल्शन बनाने में किया जाता है।
बिटुमेन और एस्फाल्ट पेट्रोलियम से प्राप्त होने वाले हाइड्रोकार्बन हैं जो पानी में पूरी तरह अघुलनशील (Insoluble) होते हैं। लेकिन ये 'कार्बन डाइसल्फाइड' (Carbon Disulphide), नेफ्था और अन्य पेट्रोलियम सॉल्वेंट्स में पूरी तरह घुल जाते हैं। इस गुण का उपयोग बिटुमिनस पेंट और इमल्शन बनाने में किया जाता है।
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Q550: 🌟 550 MCQ का शानदार माइलस्टोन! 🌟 प्रश्न: सीमेंट की 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) का परीक्षण करने के लिए बनाए गए मोर्टार (मसाले) क्यूब में 'सीमेंट और मानक बालू' (Cement : Standard Sand) का अनुपात क्या रखा जाता है?
- A) 1:1
- B) 1:2
- ✅ C) 1:3 (सही उत्तर)
- D) 1:4
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट की ताकत को सीधे केवल सीमेंट से नहीं मापा जाता क्योंकि वह सिकुड़कर चटक सकता है। इसके लिए 'एन्नोर बालू' (Ennore Sand - भारतीय मानक बालू) और सीमेंट को 1:3 के अनुपात (1 भाग सीमेंट : 3 भाग बालू) में मिलाकर 70.6 mm आकार के मोर्टार क्यूब्स बनाए जाते हैं। इन क्यूब्स को पानी में रखकर 3, 7 और 28 दिनों के बाद कम्प्रेशन टेस्टिंग मशीन (CTM) में जांचा जाता है।
सीमेंट की ताकत को सीधे केवल सीमेंट से नहीं मापा जाता क्योंकि वह सिकुड़कर चटक सकता है। इसके लिए 'एन्नोर बालू' (Ennore Sand - भारतीय मानक बालू) और सीमेंट को 1:3 के अनुपात (1 भाग सीमेंट : 3 भाग बालू) में मिलाकर 70.6 mm आकार के मोर्टार क्यूब्स बनाए जाते हैं। इन क्यूब्स को पानी में रखकर 3, 7 और 28 दिनों के बाद कम्प्रेशन टेस्टिंग मशीन (CTM) में जांचा जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 111 (Q551 - Q555)
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Q551: भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, कंक्रीट की 'फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ' (Flexural strength) या बेंडिंग में तनन सामर्थ्य की गणना करने का सूत्र क्या है?
- A) fcr = 0.5 √fck
- ✅ B) fcr = 0.7 √fck (सही उत्तर)
- C) fcr = 5000 √fck
- D) fcr = 0.87 fck
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट मुख्य रूप से संपीड़न (Compression) में मजबूत होती है, लेकिन बेंडिंग (मोड़ने) के दौरान इसमें तनाव (Tension) भी आता है। इसे फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ या 'रप्चर का मापांक' (Modulus of Rupture) कहा जाता है। IS 456 के अनुसार इसकी गणना 0.7 √fck सूत्र द्वारा की जाती है (जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की अभिलाक्षणिक संपीडन सामर्थ्य है)।
कंक्रीट मुख्य रूप से संपीड़न (Compression) में मजबूत होती है, लेकिन बेंडिंग (मोड़ने) के दौरान इसमें तनाव (Tension) भी आता है। इसे फ्लेक्सुरल स्ट्रेंथ या 'रप्चर का मापांक' (Modulus of Rupture) कहा जाता है। IS 456 के अनुसार इसकी गणना 0.7 √fck सूत्र द्वारा की जाती है (जहाँ fck कंक्रीट की 28 दिन की अभिलाक्षणिक संपीडन सामर्थ्य है)।
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Q552: ईंटों के प्रकार में 'झामा ईंट' (Jhama Brick) की मुख्य विशेषता क्या होती है?
- A) यह कच्ची और बिना पकी हुई ईंट होती है
- ✅ B) यह अत्यधिक पकी हुई (Overburnt) ईंट होती है जिसका आकार पिघलकर टेढ़ा-मेढ़ा हो जाता है (सही उत्तर)
- C) यह मशीन द्वारा बनाई गई एकदम चिकनी ईंट होती है
- D) यह खोखली (Hollow) ईंट होती है
💡 डिटेल Explanation:
भट्ठे में जो ईंटें आग के बहुत करीब होती हैं, वे आवश्यकता से अधिक पक जाती हैं। इस अत्यधिक ताप (Overburning) के कारण वे पिघलकर अपना आकार खो देती हैं और टेढ़ी-मेढ़ी (Distorted) हो जाती हैं। इन्हें ही झामा ईंट (Jhama Bricks) कहते हैं। ये बहुत अधिक कठोर होती हैं और इनका उपयोग चिनाई के बजाय सड़क की गिट्टी (Aggregate) के रूप में या नींव के फर्श में किया जाता है।
भट्ठे में जो ईंटें आग के बहुत करीब होती हैं, वे आवश्यकता से अधिक पक जाती हैं। इस अत्यधिक ताप (Overburning) के कारण वे पिघलकर अपना आकार खो देती हैं और टेढ़ी-मेढ़ी (Distorted) हो जाती हैं। इन्हें ही झामा ईंट (Jhama Bricks) कहते हैं। ये बहुत अधिक कठोर होती हैं और इनका उपयोग चिनाई के बजाय सड़क की गिट्टी (Aggregate) के रूप में या नींव के फर्श में किया जाता है।
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Q553: इमारती लकड़ी (Timber) को आग से बचाने (Fire Resistance बढ़ाने) के लिए सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी रासायनिक प्रक्रिया कौन सी है?
- A) बाउचरिंग (Boucherie Process)
- B) बेटेल की प्रक्रिया (Bethell's Process)
- ✅ C) सर एबेल की प्रक्रिया (Sir Abel's Process) (सही उत्तर)
- D) क्रिओसोटिंग (Creosoting)
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी को आग-प्रतिरोधी (Fire Retardant) बनाने के लिए सर एबेल की प्रक्रिया (Sir Abel's Process) का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में लकड़ी पर पहले सोडियम सिलिकेट (Sodium Silicate) का घोल लगाया जाता है और उसके सूखने के बाद फैट-लाइम (Fat Lime) का लेप किया जाता है। यह लकड़ी के ऊपर एक सुरक्षित परत बना देता है जो आग को फैलने से रोकती है।
लकड़ी को आग-प्रतिरोधी (Fire Retardant) बनाने के लिए सर एबेल की प्रक्रिया (Sir Abel's Process) का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में लकड़ी पर पहले सोडियम सिलिकेट (Sodium Silicate) का घोल लगाया जाता है और उसके सूखने के बाद फैट-लाइम (Fat Lime) का लेप किया जाता है। यह लकड़ी के ऊपर एक सुरक्षित परत बना देता है जो आग को फैलने से रोकती है।
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Q554: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के 1 बोरे (Bag) का मानक वजन 50 किलोग्राम होता है। इस 50 kg सीमेंट का आयतन (Volume) लगभग कितना होता है?
- A) 0.0247 m³ (24.7 लीटर)
- ✅ B) 0.0347 m³ (34.7 लीटर) (सही उत्तर)
- C) 0.0447 m³ (44.7 लीटर)
- D) 0.0547 m³ (54.7 लीटर)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का थोक घनत्व (Bulk Density) सामान्यतः 1440 kg/m³ माना जाता है।
1 बोरी का आयतन = (1 बोरी का वजन) / (सीमेंट का घनत्व)
आयतन = 50 / 1440 = 0.0347 m³। इसे लीटर में बदलने पर यह लगभग 34.7 लीटर होता है (1 m³ = 1000 लीटर)।
सीमेंट का थोक घनत्व (Bulk Density) सामान्यतः 1440 kg/m³ माना जाता है।
1 बोरी का आयतन = (1 बोरी का वजन) / (सीमेंट का घनत्व)
आयतन = 50 / 1440 = 0.0347 m³। इसे लीटर में बदलने पर यह लगभग 34.7 लीटर होता है (1 m³ = 1000 लीटर)।
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Q555: 555 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: कंक्रीट तकनीक में, 'वाटर-सीमेंट रेश्यो' (Water-Cement Ratio) का प्रसिद्ध सिद्धांत (Law) सबसे पहले किसने दिया था?
- A) कार्ल टेरजाघी (Karl Terzaghi)
- ✅ B) डफ ए. अब्राम (Duff A. Abrams) (सही उत्तर)
- C) आइजैक न्यूटन (Isaac Newton)
- D) हेनरी डार्सी (Henry Darcy)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की ताकत और पानी के अनुपात के बीच का संबंध 1918 में डफ ए. अब्राम (Duff A. Abrams) द्वारा खोजा गया था। इसे 'अब्राम का नियम' (Abram's Law) कहते हैं। इसके अनुसार, यदि कंक्रीट पूरी तरह से कॉम्पैक्टेड है, तो उसकी ताकत पूरी तरह से उसके वाटर-सीमेंट रेश्यो पर निर्भर करती है (रेश्यो जितना कम, ताकत उतनी ज्यादा)।
कंक्रीट की ताकत और पानी के अनुपात के बीच का संबंध 1918 में डफ ए. अब्राम (Duff A. Abrams) द्वारा खोजा गया था। इसे 'अब्राम का नियम' (Abram's Law) कहते हैं। इसके अनुसार, यदि कंक्रीट पूरी तरह से कॉम्पैक्टेड है, तो उसकी ताकत पूरी तरह से उसके वाटर-सीमेंट रेश्यो पर निर्भर करती है (रेश्यो जितना कम, ताकत उतनी ज्यादा)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 112 (Q556 - Q560)
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Q556: ईंट की चिनाई (Brick masonry) करने से पहले सूखी ईंटों को पानी में अच्छी तरह भिगोना (Soaking in water) क्यों आवश्यक माना जाता है?
- A) ताकि ईंट का वजन बढ़ जाए
- B) ताकि ईंटों का रंग निखर कर सामने आए
- ✅ C) ताकि ईंटें मोर्टार (मसाले) में मौजूद पानी को न सोखें (सही उत्तर)
- D) ताकि ईंटें नरम हो जाएं और काटना आसान हो
💡 डिटेल Explanation:
पकी हुई सूखी ईंटें बहुत अधिक पानी सोखने (Water absorbing) वाली होती हैं। यदि इन्हें बिना भिगोए सीधा सीमेंट-मोर्टार के साथ लगाया जाए, तो वे मोर्टार से उसका पानी सोख लेंगी। इससे मोर्टार सूख जाएगा, उसमें सीमेंट का जलयोजन (Hydration) ठीक से नहीं हो पाएगा, और चिनाई का जोड़ (Bond) बेहद कमजोर हो जाएगा।
पकी हुई सूखी ईंटें बहुत अधिक पानी सोखने (Water absorbing) वाली होती हैं। यदि इन्हें बिना भिगोए सीधा सीमेंट-मोर्टार के साथ लगाया जाए, तो वे मोर्टार से उसका पानी सोख लेंगी। इससे मोर्टार सूख जाएगा, उसमें सीमेंट का जलयोजन (Hydration) ठीक से नहीं हो पाएगा, और चिनाई का जोड़ (Bond) बेहद कमजोर हो जाएगा।
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Q557: किसी एग्रीगेट (गिट्टी या बालू) के परीक्षण में, 'फाइननेस मॉड्यूलस' (Fineness Modulus - FM) की अधिक वैल्यू (Higher value) क्या दर्शाती है?
- A) एग्रीगेट के कण बहुत महीन (Finer) हैं
- ✅ B) एग्रीगेट के कण मोटे (Coarser) हैं (सही उत्तर)
- C) एग्रीगेट में बहुत अधिक नमी है
- D) एग्रीगेट कंक्रीट के लिए बिल्कुल अयोग्य है
💡 डिटेल Explanation:
फाइननेस मॉड्यूलस (FM) यह बताता है कि किसी सामग्री (गिट्टी/रेत) का औसत आकार क्या है। यह एक अनुक्रमानुपाती (Direct) संबंध है: FM का मान जितना अधिक होगा, सामग्री उतनी ही मोटी (Coarse) होगी। (उदाहरण: महीन बालू का FM 2.2-2.6 होता है, जबकि मोटी गिट्टी का FM 6.0 से 8.5 के बीच होता है)।
फाइननेस मॉड्यूलस (FM) यह बताता है कि किसी सामग्री (गिट्टी/रेत) का औसत आकार क्या है। यह एक अनुक्रमानुपाती (Direct) संबंध है: FM का मान जितना अधिक होगा, सामग्री उतनी ही मोटी (Coarse) होगी। (उदाहरण: महीन बालू का FM 2.2-2.6 होता है, जबकि मोटी गिट्टी का FM 6.0 से 8.5 के बीच होता है)।
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Q558: पानी पर आधारित 'डिस्टेंपर' (Distemper) पेंट में 'वाहन' (Vehicle / Solvent) के रूप में मुख्य रूप से किसका उपयोग किया जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- ✅ B) पानी (Water) (सही उत्तर)
- C) तारपीन का तेल (Turpentine)
- D) स्पिरिट (Spirit)
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर एक 'वाटर पेंट' (Water paint) है। इसे तैयार करने के लिए चॉक पाउडर (Whiting) को बेस के रूप में और गोंद/कैसिइन को बाइंडर के रूप में लिया जाता है। इसे पतला करने और सतह पर फैलाने योग्य बनाने के लिए विलायक या वाहन के रूप में केवल पानी (Water) का उपयोग किया जाता है। इसलिए इसे ऑयल पेंट की तुलना में बहुत सस्ता माना जाता है।
डिस्टेंपर एक 'वाटर पेंट' (Water paint) है। इसे तैयार करने के लिए चॉक पाउडर (Whiting) को बेस के रूप में और गोंद/कैसिइन को बाइंडर के रूप में लिया जाता है। इसे पतला करने और सतह पर फैलाने योग्य बनाने के लिए विलायक या वाहन के रूप में केवल पानी (Water) का उपयोग किया जाता है। इसलिए इसे ऑयल पेंट की तुलना में बहुत सस्ता माना जाता है।
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Q559: कंक्रीट को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पाइप के माध्यम से 'पंप' (Pumping of concrete) करने के लिए, कंक्रीट का अनुशंसित स्लंप मान (Slump Value) कितना होना चाहिए?
- A) 25 mm से 50 mm
- B) 50 mm से 100 mm
- ✅ C) 100 mm से 150 mm (सही उत्तर)
- D) 150 mm से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
पंप की जाने वाली कंक्रीट (Pumped concrete) को पाइपों के माध्यम से घर्षण (Friction) के बिना बहना चाहिए, जिसके लिए इसकी सुकार्यता (Workability) अधिक होनी चाहिए। IS 456 के अनुसार, पंप कंक्रीट के लिए 'उच्च सुकार्यता' (High workability) की आवश्यकता होती है, जिसका स्लंप मान 100 mm से 150 mm के बीच होता है।
पंप की जाने वाली कंक्रीट (Pumped concrete) को पाइपों के माध्यम से घर्षण (Friction) के बिना बहना चाहिए, जिसके लिए इसकी सुकार्यता (Workability) अधिक होनी चाहिए। IS 456 के अनुसार, पंप कंक्रीट के लिए 'उच्च सुकार्यता' (High workability) की आवश्यकता होती है, जिसका स्लंप मान 100 mm से 150 mm के बीच होता है।
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Q560: 560 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: सड़क निर्माण और वॉटरप्रूफिंग में उपयोग होने वाले 'बिटुमेन' (Bitumen) और 'टार' (Tar) के बीच मुख्य उत्पत्ति (Origin) का अंतर क्या है?
- A) दोनों ही पेट्रोलियम से प्राप्त होते हैं
- B) दोनों ही कोयले से प्राप्त होते हैं
- ✅ C) बिटुमेन 'पेट्रोलियम' के आसवन से मिलता है, जबकि टार 'कोयले या लकड़ी' के विनाशकारी आसवन से मिलता है (सही उत्तर)
- D) बिटुमेन एक प्राकृतिक पत्थर है और टार एक तरल है
💡 डिटेल Explanation:
यद्यपि दोनों दिखने में काले और चिपचिपे होते हैं, लेकिन उनका स्रोत अलग है। बिटुमेन (Bitumen) कच्चे पेट्रोलियम तेल के आंशिक आसवन (Fractional Distillation) का अंतिम अवशेष है। वहीं, टार (Tar) कोयले (Coal) या लकड़ी के विनाशकारी आसवन (Destructive Distillation) से बनाया जाता है। टार में बिटुमेन की तुलना में अधिक मौसम प्रतिरोधक क्षमता होती है।
यद्यपि दोनों दिखने में काले और चिपचिपे होते हैं, लेकिन उनका स्रोत अलग है। बिटुमेन (Bitumen) कच्चे पेट्रोलियम तेल के आंशिक आसवन (Fractional Distillation) का अंतिम अवशेष है। वहीं, टार (Tar) कोयले (Coal) या लकड़ी के विनाशकारी आसवन (Destructive Distillation) से बनाया जाता है। टार में बिटुमेन की तुलना में अधिक मौसम प्रतिरोधक क्षमता होती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 113 (Q561 - Q565)
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Q561: कंक्रीट संरचनाओं में कंक्रीट के धीरे-धीरे और निरंतर समय-आश्रित विरूपण (Time-dependent deformation) को क्या कहा जाता है, जो निरंतर लोडिंग (Sustained load) के कारण होता है?
- A) श्रिंकेज (Shrinkage - सिकुड़न)
- ✅ B) क्रीप (Creep - मंद विरूपण) (सही उत्तर)
- C) इलास्टिसिटी (Elasticity)
- D) सेग्रीगेशन (Segregation)
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट पर एक स्थायी या निरंतर भार (जैसे संरचना का खुद का वजन या डेड लोड) लंबे समय तक लगा रहता है, तो बिना भार बढ़ाए भी कंक्रीट में समय के साथ धीरे-धीरे झुकाव या विरूपण आने लगता है। इस गुण या घटना को 'क्रीप' (Creep) कहा जाता है। यह तापमान, नमी और लोडिंग के समय कंक्रीट की उम्र पर निर्भर करता है।
जब कंक्रीट पर एक स्थायी या निरंतर भार (जैसे संरचना का खुद का वजन या डेड लोड) लंबे समय तक लगा रहता है, तो बिना भार बढ़ाए भी कंक्रीट में समय के साथ धीरे-धीरे झुकाव या विरूपण आने लगता है। इस गुण या घटना को 'क्रीप' (Creep) कहा जाता है। यह तापमान, नमी और लोडिंग के समय कंक्रीट की उम्र पर निर्भर करता है।
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Q562: ईंट निर्माण की किस प्रक्रिया में, सांचे से निकाली गई गीली ईंटों को भट्ठे में पकाने से पहले खुली हवा या शेड में सुखाया (Drying) क्यों जाता है?
- A) ताकि ईंटों की रासायनिक संरचना बदल सके
- B) ईंटों को सुंदर लाल रंग देने के लिए
- ✅ C) ताकि भट्ठे में जाने पर अत्यधिक गर्मी के कारण ईंटें अचानक चटकें या फटें नहीं (सही उत्तर)
- D) ताकि ईंटों की सुघट्यता बढ़ सके
💡 डिटेल Explanation:
गीली ईंटों में लगभग 7% से 30% तक नमी होती है। यदि इन ईंटों को सीधे भट्ठे (Kiln) में पकाया जाए, तो उच्च तापमान के कारण अंदर का पानी बहुत तेजी से भाप बनकर बाहर निकलने की कोशिश करेगा, जिससे ईंटें अंदर से खोखली हो जाएंगी, मुड़ जाएंगी या पूरी तरह फट जाएंगी। सुखाने से मुक्त पानी धीरे-धीरे बाहर निकल जाता है।
गीली ईंटों में लगभग 7% से 30% तक नमी होती है। यदि इन ईंटों को सीधे भट्ठे (Kiln) में पकाया जाए, तो उच्च तापमान के कारण अंदर का पानी बहुत तेजी से भाप बनकर बाहर निकलने की कोशिश करेगा, जिससे ईंटें अंदर से खोखली हो जाएंगी, मुड़ जाएंगी या पूरी तरह फट जाएंगी। सुखाने से मुक्त पानी धीरे-धीरे बाहर निकल जाता है।
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Q563: इमारती लकड़ी (Timber) में वार्षिक वलयों (Annual rings) के आर-पार तने के बाहरी हिस्से (Sapwood) से शुरू होकर अंदर की ओर जाने वाली रेडियल दरारों को क्या कहते हैं?
- A) हार्ट शेक (Heart Shake)
- B) कप शेक (Cup Shake)
- ✅ C) स्टार शेक (Star Shake) (सही उत्तर)
- D) रिंग शेक (Ring Shake)
💡 डिटेल Explanation:
स्टार शेक (Star Shake) वे दरारें होती हैं जो पेड़ की बाहरी छाल (Bark) और सैपवुड से शुरू होकर अंदर की तरफ बढ़ती हैं। ये दरारें बाहर की ओर अधिक चौड़ी और अंदर की तरफ पतली होती हैं, जिससे लकड़ी का क्रॉस-सेक्शन एक तारे (Star) जैसा दिखने लगता है। यह गंभीर पाले (Severe frost) या अत्यधिक गर्मी के कारण उत्पन्न होता है।
स्टार शेक (Star Shake) वे दरारें होती हैं जो पेड़ की बाहरी छाल (Bark) और सैपवुड से शुरू होकर अंदर की तरफ बढ़ती हैं। ये दरारें बाहर की ओर अधिक चौड़ी और अंदर की तरफ पतली होती हैं, जिससे लकड़ी का क्रॉस-सेक्शन एक तारे (Star) जैसा दिखने लगता है। यह गंभीर पाले (Severe frost) या अत्यधिक गर्मी के कारण उत्पन्न होता है।
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Q564: पिघले हुए सेल्युलोज नाइट्रेट या रेजिन को किसी अत्यधिक वाष्पशील विलायक (Volatile solvent) में घोलकर बनाए जाने वाले बहुत तेजी से सूखने वाले आधुनिक पेंट को क्या कहा जाता है?
- A) इनेमल पेंट (Enamel Paint)
- B) प्लास्टिक इमल्शन पेंट
- ✅ C) सेल्युलोज पेंट / लैकर (Cellulose Paint / Lacquer) (सही उत्तर)
- D) बिटुमिनस पेंट
💡 डिटेल Explanation:
सेल्युलोज पेंट (Cellulose Paint) या नाइट्रोसेल्युलोज लैकर बहुत ही तेजी से हवा में सूखने वाले पेंट होते हैं। इनमें प्रयुक्त सॉल्वेंट सतह पर लगाते ही कुछ ही मिनटों में उड़ जाता है और पीछे एक अत्यधिक चिकनी, कठोर और चमकदार परत छोड़ता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से कारों (Automobiles), हवाई जहाजों और महंगे गैजेट्स की पेंटिंग के लिए किया जाता है।
सेल्युलोज पेंट (Cellulose Paint) या नाइट्रोसेल्युलोज लैकर बहुत ही तेजी से हवा में सूखने वाले पेंट होते हैं। इनमें प्रयुक्त सॉल्वेंट सतह पर लगाते ही कुछ ही मिनटों में उड़ जाता है और पीछे एक अत्यधिक चिकनी, कठोर और चमकदार परत छोड़ता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से कारों (Automobiles), हवाई जहाजों और महंगे गैजेट्स की पेंटिंग के लिए किया जाता है।
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Q565: 565 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: रासायनिक वर्गीकरण के आधार पर 'लेटराइट' (Laterite) पत्थर मुख्य रूप से किस श्रेणी के अंतर्गत आता है?
- A) सिलिसियस चट्टान (Siliceous Rock)
- ✅ B) आर्गिलेशियस चट्टान (Argillaceous Rock) (सही उत्तर)
- C) कैल्केरियस चट्टान (Calcareous Rock)
- D) आग्नेय चट्टान
💡 डिटेल Explanation:
रासायनिक वर्गीकरण के अनुसार, वे चट्टानें जिनका मुख्य घटक मिट्टी या एल्युमिना (Clay / Alumina) होता है, उन्हें आर्गिलेशियस (Argillaceous) चट्टानें कहा जाता है। लेटराइट (Laterite) और स्लेट (Slate) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। लेटराइट पत्थर हवा के संपर्क में आने पर बहुत कठोर हो जाता है, और इसमें आयरन ऑक्साइड की अधिकता के कारण यह लाल रंग का दिखता है।
रासायनिक वर्गीकरण के अनुसार, वे चट्टानें जिनका मुख्य घटक मिट्टी या एल्युमिना (Clay / Alumina) होता है, उन्हें आर्गिलेशियस (Argillaceous) चट्टानें कहा जाता है। लेटराइट (Laterite) और स्लेट (Slate) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। लेटराइट पत्थर हवा के संपर्क में आने पर बहुत कठोर हो जाता है, और इसमें आयरन ऑक्साइड की अधिकता के कारण यह लाल रंग का दिखता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 114 (Q566 - Q570)
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Q566: पोर्टलैंड सीमेंट में रासायनिक संरचना के संतुलन के लिए 'लाइम सैचुरेशन फैक्टर' (Lime Saturation Factor - LSF) का मान आई.एस. कोड के अनुसार किस सीमा के बीच होना चाहिए?
- A) 0.40 से 0.65
- ✅ B) 0.66 से 1.02 (सही उत्तर)
- C) 1.05 से 1.50
- D) 1.51 से 2.00
💡 डिटेल Explanation:
लाइम सैचुरेशन फैक्टर (LSF) सीमेंट में चूने (Lime) का सिलिका, एल्युमिना और आयरन ऑक्साइड के साथ अनुपात होता है। भारतीय मानक (IS 269) के अनुसार, सीमेंट की गुणवत्ता और स्थिरता बनाए रखने के लिए LSF का मान 0.66 से कम नहीं और 1.02 से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह 1.02 से अधिक होता है, तो मुक्त चूना (Free lime) बढ़ने से सीमेंट असुरक्षित हो जाता है।
लाइम सैचुरेशन फैक्टर (LSF) सीमेंट में चूने (Lime) का सिलिका, एल्युमिना और आयरन ऑक्साइड के साथ अनुपात होता है। भारतीय मानक (IS 269) के अनुसार, सीमेंट की गुणवत्ता और स्थिरता बनाए रखने के लिए LSF का मान 0.66 से कम नहीं और 1.02 से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह 1.02 से अधिक होता है, तो मुक्त चूना (Free lime) बढ़ने से सीमेंट असुरक्षित हो जाता है।
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Q567: ईंट की चिनाई में 'फ्लाइंग शोरिंग' (Flying Shoring) का उपयोग मुख्य रूप से किस स्थिति में किया जाता है?
- A) बहुत ऊंची और अकेली खड़ी दीवार को सहारा देने के लिए
- ✅ B) दो पास-पास स्थित इमारतों की दीवारों को आपस में सहारा देने के लिए जब उनके बीच की एक इमारत को गिराया जा रहा हो (सही उत्तर)
- C) जमीन के नीचे गहराई में नींव खोदते समय सहारा देने के लिए
- D) केवल मेहराब बनाने के लिए अस्थाई फ्रेमवर्क के रूप में
💡 डिटेल Explanation:
शोरिंग (Shoring) कमजोर संरचनाओं को अस्थाई सहारा देने की एक विधि है। फ्लाइंग शोरिंग (Flying Shoring) या 'हॉरिजॉन्टल शोरिंग' का उपयोग तब किया जाता है जब दो समानांतर दीवारें पास-पास (दूरी 9 मीटर से कम) हों। इस सहारे का कोई भी हिस्सा जमीन को नहीं छूता, बल्कि यह हवा में क्षैतिज रूप से दोनों दीवारों के बीच फंसाया जाता है।
शोरिंग (Shoring) कमजोर संरचनाओं को अस्थाई सहारा देने की एक विधि है। फ्लाइंग शोरिंग (Flying Shoring) या 'हॉरिजॉन्टल शोरिंग' का उपयोग तब किया जाता है जब दो समानांतर दीवारें पास-पास (दूरी 9 मीटर से कम) हों। इस सहारे का कोई भी हिस्सा जमीन को नहीं छूता, बल्कि यह हवा में क्षैतिज रूप से दोनों दीवारों के बीच फंसाया जाता है।
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Q568: इमारती लकड़ी (Timber) में 'वेट रॉट' (Wet Rot) और 'ड्राई रॉट' (Dry Rot) मूल रूप से किस प्रकार के जैविक एजेंटों के कारण होने वाले दोष हैं?
- A) बैक्टीरिया (Bacteria)
- B) कीड़े और दीमक (Insects / Termites)
- ✅ C) फफूंदी या कवक (Fungi) (सही उत्तर)
- D) शैवाल (Algae)
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी का सड़ना या गलना (Rotting) हमेशा विशिष्ट फफूंदी या कवक (Fungi) के हमलों के कारण होता है। फफूंदी लकड़ी के मुख्य घटक सेल्युलोज और लिग्निन को अपना भोजन बनाती है जिससे लकड़ी अपनी पूरी मजबूती खो देती है। ड्राई रॉट बंद सीलन वाली जगहों पर होता है और वेट रॉट बार-बार भीगने-सूखने वाली जगहों पर होता है।
लकड़ी का सड़ना या गलना (Rotting) हमेशा विशिष्ट फफूंदी या कवक (Fungi) के हमलों के कारण होता है। फफूंदी लकड़ी के मुख्य घटक सेल्युलोज और लिग्निन को अपना भोजन बनाती है जिससे लकड़ी अपनी पूरी मजबूती खो देती है। ड्राई रॉट बंद सीलन वाली जगहों पर होता है और वेट रॉट बार-बार भीगने-सूखने वाली जगहों पर होता है।
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Q569: कंक्रीट तकनीक में, ताज़ा मिश्रित कंक्रीट की उस क्षमता को क्या कहते हैं जिसके कारण वह बिना किसी आंतरिक अलगाव (Segregation) के आसानी से बिछाई और कॉम्पैक्ट की जा सकती है?
- A) कंसिस्टेंसी (Consistency)
- B) ड्यूरेबिलिटी (Durability - टिकाऊपन)
- ✅ C) वर्कएबिलिटी (Workability - सुकार्यता) (सही उत्तर)
- D) कंप्रेसिबिलिटी (Compressibility)
💡 डिटेल Explanation:
सुकार्यता (Workability) कंक्रीट का वह महत्वपूर्ण गुण है जो यह दर्शाता है कि उस कंक्रीट के साथ काम करना (मिलाना, ढोना, बिछाना और कुटाई करना) कितना आसान है और इस दौरान आंतरिक घर्षण पर कितनी उपयोगी ऊर्जा खर्च होती है। इसे स्लंप टेस्ट या कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट द्वारा मापा जाता है।
सुकार्यता (Workability) कंक्रीट का वह महत्वपूर्ण गुण है जो यह दर्शाता है कि उस कंक्रीट के साथ काम करना (मिलाना, ढोना, बिछाना और कुटाई करना) कितना आसान है और इस दौरान आंतरिक घर्षण पर कितनी उपयोगी ऊर्जा खर्च होती है। इसे स्लंप टेस्ट या कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट द्वारा मापा जाता है।
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Q570: 570 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: किस प्रकार के चूने (Lime) का उपयोग पानी के नीचे (Underwater construction) या सीलन वाले स्थानों पर प्लास्टर और चिनाई के लिए सर्वोत्तम माना जाता है?
- A) फैट लाइम (Fat Lime - शुद्ध चूना)
- ✅ B) हाइड्रोलिक लाइम (Hydraulic Lime - जलीय चूना) (सही उत्तर)
- C) क्विक लाइम (Quick Lime)
- D) पुअर लाइम (Poor Lime)
💡 डिटेल Explanation:
हाइड्रोलिक लाइम (Hydraulic Lime) में 5% से 30% तक क्ले या मिट्टी (Clay) की अशुद्धि होती है। इस क्ले की उपस्थिति के कारण इस चूने में एक विशेष गुण होता है कि यह पानी के अंदर भी या हवा की अनुपस्थिति में भी कठोर होकर जम सकता है। इसलिए इसका उपयोग पुलों के पियर्स, बांधों या पानी के भीतर के निर्माण कार्यों में मोर्टार के रूप में किया जाता है।
हाइड्रोलिक लाइम (Hydraulic Lime) में 5% से 30% तक क्ले या मिट्टी (Clay) की अशुद्धि होती है। इस क्ले की उपस्थिति के कारण इस चूने में एक विशेष गुण होता है कि यह पानी के अंदर भी या हवा की अनुपस्थिति में भी कठोर होकर जम सकता है। इसलिए इसका उपयोग पुलों के पियर्स, बांधों या पानी के भीतर के निर्माण कार्यों में मोर्टार के रूप में किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 115 (Q571 - Q575)
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Q571: IS कोड के अनुसार, 'रैपिड हार्डनिंग पोर्टलैंड सीमेंट' (RHPC) का न्यूनतम विशिष्ट सतह क्षेत्रफल (Specific Surface Area) कितना होना चाहिए?
- A) 2250 cm²/gm
- ✅ B) 3250 cm²/gm (सही उत्तर)
- C) 3000 cm²/gm
- D) 4000 cm²/gm
💡 डिटेल Explanation:
रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHPC) को साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) की तुलना में बहुत अधिक बारीक पीसा जाता है ताकि यह पानी के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करे और जल्दी ताकत (Early strength) पकड़ सके। OPC का न्यूनतम विशिष्ट सतह क्षेत्रफल 2250 cm²/gm होता है, जबकि RHPC के लिए यह 3250 cm²/gm होता है।
रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHPC) को साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) की तुलना में बहुत अधिक बारीक पीसा जाता है ताकि यह पानी के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करे और जल्दी ताकत (Early strength) पकड़ सके। OPC का न्यूनतम विशिष्ट सतह क्षेत्रफल 2250 cm²/gm होता है, जबकि RHPC के लिए यह 3250 cm²/gm होता है।
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Q572: मोर्टार (मसाले) के साथ एक मानक 'मॉड्यूलर ईंट' (Modular Brick) का नाममात्र आकार (Nominal size) क्या माना जाता है?
- A) 19 cm × 9 cm × 9 cm
- ✅ B) 20 cm × 10 cm × 10 cm (सही उत्तर)
- C) 20 cm × 9 cm × 9 cm
- D) 23 cm × 11.4 cm × 7.6 cm
💡 डिटेल Explanation:
मॉड्यूलर ईंट का 'वास्तविक आकार' (Actual size) 19 cm × 9 cm × 9 cm होता है। लेकिन चिनाई (Masonry) की गणना करते समय ईंट के चारों ओर लगाए जाने वाले 1 cm मोटे मोर्टार (मसाले) को भी शामिल किया जाता है। मोर्टार जोड़ने के बाद ईंट का जो आकार बनता है, उसे 'नाममात्र आकार' (Nominal size) कहते हैं, जो 20 cm × 10 cm × 10 cm होता है।
मॉड्यूलर ईंट का 'वास्तविक आकार' (Actual size) 19 cm × 9 cm × 9 cm होता है। लेकिन चिनाई (Masonry) की गणना करते समय ईंट के चारों ओर लगाए जाने वाले 1 cm मोटे मोर्टार (मसाले) को भी शामिल किया जाता है। मोर्टार जोड़ने के बाद ईंट का जो आकार बनता है, उसे 'नाममात्र आकार' (Nominal size) कहते हैं, जो 20 cm × 10 cm × 10 cm होता है।
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Q573: इमारती लकड़ी (Timber) का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) और अन्य गुण सामान्यतः कितनी नमी (Moisture content) पर मापे और निर्दिष्ट किए जाते हैं?
- A) 0% (पूरी तरह सूखी)
- B) 5%
- ✅ C) 12% (सही उत्तर)
- D) 20%
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी के गुण (जैसे वजन, मजबूती, आयतन) उसमें मौजूद नमी के साथ बहुत अधिक बदलते हैं। इसलिए एकरूपता बनाए रखने के लिए, भारतीय मानकों के अनुसार इमारती लकड़ी के सभी भौतिक और यांत्रिक गुणों का परीक्षण और उनकी रेटिंग एक मानक नमी स्तर (Standard moisture content) 12% पर की जाती है।
लकड़ी के गुण (जैसे वजन, मजबूती, आयतन) उसमें मौजूद नमी के साथ बहुत अधिक बदलते हैं। इसलिए एकरूपता बनाए रखने के लिए, भारतीय मानकों के अनुसार इमारती लकड़ी के सभी भौतिक और यांत्रिक गुणों का परीक्षण और उनकी रेटिंग एक मानक नमी स्तर (Standard moisture content) 12% पर की जाती है।
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Q574: IS 456:2000 के अनुसार, कंक्रीट के 'प्रत्यास्थता मापांक' (Modulus of Elasticity - Ec) की गणना के लिए कौन सा सूत्र उपयोग किया जाता है?
- ✅ A) Ec = 5000 √fck (सही उत्तर)
- B) Ec = 5700 √fck
- C) Ec = 0.7 √fck
- D) Ec = 500 √fck
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट का प्रत्यास्थता मापांक (Modulus of Elasticity) उसकी कठोरता और विकृति (Deformation) के प्रति प्रतिरोध को मापता है। नवीनतम IS 456:2000 के अनुसार इसकी गणना Ec = 5000 √fck सूत्र से की जाती है (जहाँ fck कंक्रीट का 28 दिन का ग्रेड है)। पुराने IS 456:1978 में यह सूत्र 5700 √fck हुआ करता था।
कंक्रीट का प्रत्यास्थता मापांक (Modulus of Elasticity) उसकी कठोरता और विकृति (Deformation) के प्रति प्रतिरोध को मापता है। नवीनतम IS 456:2000 के अनुसार इसकी गणना Ec = 5000 √fck सूत्र से की जाती है (जहाँ fck कंक्रीट का 28 दिन का ग्रेड है)। पुराने IS 456:1978 में यह सूत्र 5700 √fck हुआ करता था।
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Q575: 575 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: वह चट्टान जिसकी कोई निश्चित क्रिस्टलीय संरचना या आकार नहीं होता है (जैसे ज्वालामुखीय कांच), उसे भूवैज्ञानिक रूप से क्या कहा जाता है?
- A) स्ट्रैटिफाइड चट्टान (Stratified rock)
- B) अन-स्ट्रैटिफाइड चट्टान (Un-stratified rock)
- ✅ C) अक्रिस्टलीय या एमोर्फस चट्टान (Amorphous / Non-crystalline rock) (सही उत्तर)
- D) फोलिएटेड चट्टान (Foliated rock)
💡 डिटेल Explanation:
वे चट्टानें जो ज्वालामुखी के फटने पर पिघले हुए मैग्मा (Lava) के हवा के संपर्क में आकर बहुत तेजी से ठंडे होने के कारण बनती हैं, उनमें कणों को क्रिस्टल का आकार लेने का समय नहीं मिल पाता। ऐसी बिना निश्चित क्रिस्टल संरचना वाली चट्टानों को अक्रिस्टलीय (Amorphous) कहते हैं। प्यूमिस (Pumice) और ओब्सीडियन इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।
वे चट्टानें जो ज्वालामुखी के फटने पर पिघले हुए मैग्मा (Lava) के हवा के संपर्क में आकर बहुत तेजी से ठंडे होने के कारण बनती हैं, उनमें कणों को क्रिस्टल का आकार लेने का समय नहीं मिल पाता। ऐसी बिना निश्चित क्रिस्टल संरचना वाली चट्टानों को अक्रिस्टलीय (Amorphous) कहते हैं। प्यूमिस (Pumice) और ओब्सीडियन इसके बेहतरीन उदाहरण हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 116 (Q576 - Q580)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q576: लकड़ी के महंगे फर्नीचर को चमकदार बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली 'फ्रेंच पॉलिश' (French Polish) तकनीकी रूप से किस प्रकार के वार्निश का एक उदाहरण है?
- A) ऑयल वार्निश (Oil Varnish)
- ✅ B) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish) (सही उत्तर)
- C) वाटर वार्निश (Water Varnish)
- D) एस्फाल्ट वार्निश (Asphalt Varnish)
💡 डिटेल Explanation:
फ्रेंच पॉलिश कोई पेंट नहीं बल्कि एक 'स्पिरिट वार्निश' (Spirit Varnish) है। इसे शेलैक (Shellac) नामक एक नरम प्राकृतिक रेजिन को मिथाइलेटेड स्पिरिट (अल्कोहल) में घोलकर बनाया जाता है। जब इसे लकड़ी पर लगाया जाता है, तो अल्कोहल उड़ जाता है और लकड़ी पर शेलैक की एक बहुत ही पतली और चमकदार परत बच जाती है।
फ्रेंच पॉलिश कोई पेंट नहीं बल्कि एक 'स्पिरिट वार्निश' (Spirit Varnish) है। इसे शेलैक (Shellac) नामक एक नरम प्राकृतिक रेजिन को मिथाइलेटेड स्पिरिट (अल्कोहल) में घोलकर बनाया जाता है। जब इसे लकड़ी पर लगाया जाता है, तो अल्कोहल उड़ जाता है और लकड़ी पर शेलैक की एक बहुत ही पतली और चमकदार परत बच जाती है।
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Q577: सीमेंट के निर्माण में, क्लिंकर (Clinker) को पीसते समय उसमें 2% से 3% 'जिप्सम' (Gypsum) क्यों मिलाया जाता है?
- A) सीमेंट का रंग निखारने के लिए
- B) सीमेंट को पानी में घुलनशील बनाने के लिए
- ✅ C) त्वरित जमाव (Flash Setting) को रोकने और प्रारंभिक जमाव काल को बढ़ाने के लिए (सही उत्तर)
- D) सीमेंट की अंतिम सामर्थ्य बढ़ाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट के क्लिंकर में मौजूद C3A (ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट) पानी के संपर्क में आते ही तुरंत प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट तुरंत जम (Flash set) सकती है। जिप्सम एक 'रिटार्डर' (Retarder) के रूप में कार्य करता है और इस त्वरित जमाव को रोकता है, जिससे कंक्रीट को मिलाने और बिछाने के लिए पर्याप्त समय (कम से कम 30 मिनट) मिल जाता है।
सीमेंट के क्लिंकर में मौजूद C3A (ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट) पानी के संपर्क में आते ही तुरंत प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट तुरंत जम (Flash set) सकती है। जिप्सम एक 'रिटार्डर' (Retarder) के रूप में कार्य करता है और इस त्वरित जमाव को रोकता है, जिससे कंक्रीट को मिलाने और बिछाने के लिए पर्याप्त समय (कम से कम 30 मिनट) मिल जाता है।
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Q578: इमारती लकड़ी (Timber) में, सुखाने (Seasoning) के दौरान यदि लकड़ी की बाहरी परतें अंदरूनी परतों की तुलना में अधिक तेजी से सूख कर सख्त हो जाती हैं, तो इस दोष को क्या कहते हैं?
- ✅ A) केस हार्डनिंग (Case Hardening) (सही उत्तर)
- B) फॉक्सीनेस (Foxiness)
- C) अपसेट (Upset)
- D) रॉट (Rot)
💡 डिटेल Explanation:
जब लकड़ी को किल्न (भट्ठे) में बहुत तेजी से या ऊंचे तापमान पर सुखाया जाता है, तो लकड़ी की बाहरी सतह नमी खोकर जल्दी सूख और सिकुड़ कर सख्त हो जाती है (एक खोल या केस बना लेती है), जबकि अंदरूनी हिस्से में नमी फंसी रह जाती है। इस दोष को 'केस हार्डनिंग' (Case Hardening) कहते हैं। जब अंदर का हिस्सा सूखने की कोशिश करता है तो लकड़ी अंदर से फट (Honeycombing) सकती है।
जब लकड़ी को किल्न (भट्ठे) में बहुत तेजी से या ऊंचे तापमान पर सुखाया जाता है, तो लकड़ी की बाहरी सतह नमी खोकर जल्दी सूख और सिकुड़ कर सख्त हो जाती है (एक खोल या केस बना लेती है), जबकि अंदरूनी हिस्से में नमी फंसी रह जाती है। इस दोष को 'केस हार्डनिंग' (Case Hardening) कहते हैं। जब अंदर का हिस्सा सूखने की कोशिश करता है तो लकड़ी अंदर से फट (Honeycombing) सकती है।
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Q579: ईंटों में 'लोना' या नमक के धब्बे (Efflorescence) की जांच करने के लिए, ईंट को डिस्टिल्ड पानी से भरी डिश में कितने समय तक डुबो कर रखा जाता है?
- A) 1 घंटे तक
- ✅ B) 24 घंटे तक (या जब तक पानी वाष्पित न हो जाए) (सही उत्तर)
- C) 7 दिनों तक
- D) 15 मिनट तक
💡 डिटेल Explanation:
एफ्लोरेसेंस परीक्षण (IS 3495) में ईंट को एक उथली डिश में रखा जाता है जिसमें 25 मिमी (2.5 सेमी) तक डिस्टिल्ड वाटर भरा होता है। ईंट इस पानी को केशिकत्व (Capillary action) द्वारा सोखती है और पानी कमरे के तापमान पर वाष्पित होता है। इस प्रक्रिया में लगभग 24 घंटे या उससे अधिक का समय लगता है। पानी उड़ने के बाद ईंट की सतह पर नमक के सफेद धब्बों की जांच की जाती है।
एफ्लोरेसेंस परीक्षण (IS 3495) में ईंट को एक उथली डिश में रखा जाता है जिसमें 25 मिमी (2.5 सेमी) तक डिस्टिल्ड वाटर भरा होता है। ईंट इस पानी को केशिकत्व (Capillary action) द्वारा सोखती है और पानी कमरे के तापमान पर वाष्पित होता है। इस प्रक्रिया में लगभग 24 घंटे या उससे अधिक का समय लगता है। पानी उड़ने के बाद ईंट की सतह पर नमक के सफेद धब्बों की जांच की जाती है।
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Q580: 580 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भारी और विशाल कंक्रीट संरचनाओं (Mass Concrete) जैसे कि बड़े बांधों के निर्माण के लिए, कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) या स्लंप मान (Slump Value) कितना होना चाहिए?
- A) बहुत अधिक (100 - 150 mm)
- B) मध्यम (50 - 100 mm)
- ✅ C) कम (25 - 50 mm) (सही उत्तर)
- D) शून्य (0 - 25 mm)
💡 डिटेल Explanation:
मास कंक्रीट (Mass concrete) कार्यों में सरिये (Reinforcement) का जाल नहीं होता और न ही कंक्रीट को पाइपों में पंप करना पड़ता है। वहां भारी मशीनरी और वाइब्रेटर का उपयोग करके कंक्रीट की कुटाई (Compaction) की जाती है। इसलिए, ऐसी संरचनाओं के लिए कम सुकार्यता (Low workability) की आवश्यकता होती है, जिसका स्लंप मान 25 mm से 50 mm के बीच रखा जाता है।
मास कंक्रीट (Mass concrete) कार्यों में सरिये (Reinforcement) का जाल नहीं होता और न ही कंक्रीट को पाइपों में पंप करना पड़ता है। वहां भारी मशीनरी और वाइब्रेटर का उपयोग करके कंक्रीट की कुटाई (Compaction) की जाती है। इसलिए, ऐसी संरचनाओं के लिए कम सुकार्यता (Low workability) की आवश्यकता होती है, जिसका स्लंप मान 25 mm से 50 mm के बीच रखा जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 117 (Q581 - Q585)
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Q581: कंक्रीट में सीमेंट के 'पूर्ण जलयोजन' (Complete Hydration) के लिए, सीमेंट के वजन के अनुसार लगभग कितने प्रतिशत पानी की आवश्यकता होती है?
- A) 10% - 15%
- B) 20% - 25%
- ✅ C) 38% - 40% (सही उत्तर)
- D) 50% - 60%
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट के पूर्ण रासायनिक जलयोजन (Chemical hydration) के लिए सीमेंट के वजन का लगभग 23% पानी आवश्यक होता है। इसके अलावा, सीमेंट के 'जेल छिद्रों' (Gel pores) को भरने के लिए लगभग 15% पानी की अतिरिक्त आवश्यकता होती है। इस प्रकार, पूर्ण जलयोजन के लिए कुल 38% (23% + 15%) पानी की आवश्यकता होती है।
सीमेंट के पूर्ण रासायनिक जलयोजन (Chemical hydration) के लिए सीमेंट के वजन का लगभग 23% पानी आवश्यक होता है। इसके अलावा, सीमेंट के 'जेल छिद्रों' (Gel pores) को भरने के लिए लगभग 15% पानी की अतिरिक्त आवश्यकता होती है। इस प्रकार, पूर्ण जलयोजन के लिए कुल 38% (23% + 15%) पानी की आवश्यकता होती है।
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Q582: भारतीय मानकों (IS 1077) के अनुसार एक 'प्रथम श्रेणी की ईंट' (First Class Brick) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य (Minimum Compressive Strength) कितनी होनी चाहिए?
- A) 3.5 N/mm² (35 kg/cm²)
- B) 7.0 N/mm² (70 kg/cm²)
- ✅ C) 10.5 N/mm² (105 kg/cm²) (सही उत्तर)
- D) 14.0 N/mm² (140 kg/cm²)
💡 डिटेल Explanation:
आईएस कोड के अनुसार, भवन निर्माण ईंटों को उनकी सामर्थ्य के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। एक प्रथम श्रेणी (First Class) ईंट की न्यूनतम क्रशिंग स्ट्रेंथ 10.5 N/mm² होनी चाहिए। द्वितीय श्रेणी (Second Class) के लिए यह 7.0 N/mm² और सामान्य ईंट के लिए 3.5 N/mm² होती है।
आईएस कोड के अनुसार, भवन निर्माण ईंटों को उनकी सामर्थ्य के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। एक प्रथम श्रेणी (First Class) ईंट की न्यूनतम क्रशिंग स्ट्रेंथ 10.5 N/mm² होनी चाहिए। द्वितीय श्रेणी (Second Class) के लिए यह 7.0 N/mm² और सामान्य ईंट के लिए 3.5 N/mm² होती है।
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Q583: लकड़ी (Timber) के संरक्षण के लिए उपयोग की जाने वाली 'बेटेल की प्रक्रिया' (Bethell's Process) में क्या किया जाता है?
- A) लकड़ी को उबलते पानी में डुबोया जाता है
- B) लकड़ी पर केवल ब्रश से क्रिओसोट पेंट किया जाता है
- ✅ C) एक बंद लोहे के सिलेंडर में दबाव (Pressure) के तहत लकड़ी में क्रिओसोट तेल (Creosote) भरा जाता है (सही उत्तर)
- D) लकड़ी को धुएं में सुखाया जाता है
💡 डिटेल Explanation:
बेटेल की प्रक्रिया (Bethell's Process) को 'फुल-सेल प्रक्रिया' भी कहते हैं। इस विधि में लकड़ी को एक बड़े एयरटाइट सिलेंडर में रखा जाता है। पहले वैक्यूम बनाकर लकड़ी के छिद्रों से हवा निकाली जाती है, और फिर उच्च दबाव (Pressure) के तहत क्रिओसोट तेल को लकड़ी के रेशों के अंदर तक इंजेक्ट किया जाता है। यह रेलवे स्लीपरों के लिए सबसे अच्छी विधि है।
बेटेल की प्रक्रिया (Bethell's Process) को 'फुल-सेल प्रक्रिया' भी कहते हैं। इस विधि में लकड़ी को एक बड़े एयरटाइट सिलेंडर में रखा जाता है। पहले वैक्यूम बनाकर लकड़ी के छिद्रों से हवा निकाली जाती है, और फिर उच्च दबाव (Pressure) के तहत क्रिओसोट तेल को लकड़ी के रेशों के अंदर तक इंजेक्ट किया जाता है। यह रेलवे स्लीपरों के लिए सबसे अच्छी विधि है।
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Q584: पेंट निर्माण में 'जिंक ऑक्साइड' (Zinc Oxide) या वाइट जिंक का उपयोग मुख्य रूप से किस घटक के रूप में किया जाता है?
- A) वाहन (Vehicle)
- ✅ B) बेस (Base) (सही उत्तर)
- C) ड्रायर (Drier)
- D) थिनर (Thinner)
💡 डिटेल Explanation:
व्हाइट लेड और रेड लेड की तरह, जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide) भी पेंट का एक बहुत अच्छा बेस (Base) है। बेस पेंट की मुख्य बॉडी बनाता है। वाइट लेड स्वास्थ्य के लिए जहरीला (Toxic) होता है, इसलिए आजकल उसके स्थान पर जिंक ऑक्साइड (वाइट जिंक) का अधिक उपयोग किया जाता है, जो विषैला नहीं होता और वातावरण के सल्फर से काला भी नहीं पड़ता।
व्हाइट लेड और रेड लेड की तरह, जिंक ऑक्साइड (Zinc Oxide) भी पेंट का एक बहुत अच्छा बेस (Base) है। बेस पेंट की मुख्य बॉडी बनाता है। वाइट लेड स्वास्थ्य के लिए जहरीला (Toxic) होता है, इसलिए आजकल उसके स्थान पर जिंक ऑक्साइड (वाइट जिंक) का अधिक उपयोग किया जाता है, जो विषैला नहीं होता और वातावरण के सल्फर से काला भी नहीं पड़ता।
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Q585: प्राकृतिक चट्टानों की परतों से पत्थर (Stones) को काटकर या ब्लास्ट करके बाहर निकालने की प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
- A) माइनिंग (Mining)
- B) ड्रेसिंग (Dressing)
- C) सीजनिंग (Seasoning)
- ✅ D) उत्खनन / क्वेरींग (Quarrying) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
जमीन की सतह पर या उथली गहराई (Shallow depth) में मौजूद प्राकृतिक चट्टानों से भवन निर्माण पत्थरों को निकालने की क्रिया को क्वेरींग (Quarrying) या उत्खनन कहते हैं। यह माइनिंग (खनन) से अलग है, क्योंकि माइनिंग बहुत गहराई में सुरंग बनाकर खनिजों को निकालने के लिए की जाती है।
जमीन की सतह पर या उथली गहराई (Shallow depth) में मौजूद प्राकृतिक चट्टानों से भवन निर्माण पत्थरों को निकालने की क्रिया को क्वेरींग (Quarrying) या उत्खनन कहते हैं। यह माइनिंग (खनन) से अलग है, क्योंकि माइनिंग बहुत गहराई में सुरंग बनाकर खनिजों को निकालने के लिए की जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 118 (Q586 - Q590)
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Q586: कंक्रीट तैयार करते समय सीमेंट, बालू (Fine aggregate) और गिट्टी (Coarse aggregate) को सही और सटीक मात्रा में तौलने या नापने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
- A) मिक्सिंग (Mixing)
- ✅ B) बैचिंग (Batching) (सही उत्तर)
- C) ब्लेंडिंग (Blending)
- D) क्योरिंग (Curing)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट का मिक्स डिजाइन तैयार करने के बाद, साइट पर मशीन या मिक्सर में सामग्री डालने से पहले उसे नापने (Measuring) की प्रक्रिया को 'बैचिंग' (Batching) कहा जाता है। यह दो प्रकार की होती है: वॉल्यूम बैचिंग (आयतन के आधार पर) और वेट बैचिंग (वजन के आधार पर)। गुणवत्ता के लिए हमेशा 'वेट बैचिंग' (Weigh batching) की सलाह दी जाती है।
कंक्रीट का मिक्स डिजाइन तैयार करने के बाद, साइट पर मशीन या मिक्सर में सामग्री डालने से पहले उसे नापने (Measuring) की प्रक्रिया को 'बैचिंग' (Batching) कहा जाता है। यह दो प्रकार की होती है: वॉल्यूम बैचिंग (आयतन के आधार पर) और वेट बैचिंग (वजन के आधार पर)। गुणवत्ता के लिए हमेशा 'वेट बैचिंग' (Weigh batching) की सलाह दी जाती है।
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Q587: ईंट की चिनाई में, यदि ईंट को इस प्रकार रखा जाए कि उसका सबसे छोटा सिरा (End face) दीवार के सामने (Face of the wall) दिखाई दे, तो उस ईंट को क्या कहते हैं?
- A) स्ट्रेचर (Stretcher)
- ✅ B) हेडर (Header) (सही उत्तर)
- C) बैट (Bat)
- D) क्लोजर (Closer)
💡 डिटेल Explanation:
मानक ईंट में तीन आयाम होते हैं (लंबाई × चौड़ाई × ऊंचाई)। जब ईंट को दीवार में ऐसे रखा जाता है कि देखने वाले को केवल उसका चौड़ाई × ऊंचाई (9 cm × 9 cm) वाला छोटा सिरा दिखाई दे और उसकी लंबाई दीवार की मोटाई के अंदर चली जाए, तो उसे 'हेडर' (Header) कहते हैं। एक ईंट (One-brick) मोटी दीवार बनाने के लिए हेडर का उपयोग आवश्यक है।
मानक ईंट में तीन आयाम होते हैं (लंबाई × चौड़ाई × ऊंचाई)। जब ईंट को दीवार में ऐसे रखा जाता है कि देखने वाले को केवल उसका चौड़ाई × ऊंचाई (9 cm × 9 cm) वाला छोटा सिरा दिखाई दे और उसकी लंबाई दीवार की मोटाई के अंदर चली जाए, तो उसे 'हेडर' (Header) कहते हैं। एक ईंट (One-brick) मोटी दीवार बनाने के लिए हेडर का उपयोग आवश्यक है।
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Q588: भारतीय मानक (IS 456:2000) के अनुसार, कंक्रीट मिलाने (Mixing) और तराई (Curing) के लिए उपयोग किए जाने वाले पानी का 'pH मान' किससे कम नहीं होना चाहिए?
- A) 4.5
- ✅ B) 6.0 (सही उत्तर)
- C) 7.0
- D) 8.5
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट में उपयोग होने वाला पानी साफ़ और अशुद्धियों से मुक्त होना चाहिए। IS 456 स्पष्ट रूप से कहता है कि पानी बहुत अधिक अम्लीय (Acidic) नहीं होना चाहिए, इसलिए इसका pH मान 6.0 से कम नहीं होना चाहिए। अम्लीय पानी कंक्रीट के अंदर मौजूद लोहे के सरियों (Steel reinforcement) में जंग (Corrosion) लगा सकता है।
कंक्रीट में उपयोग होने वाला पानी साफ़ और अशुद्धियों से मुक्त होना चाहिए। IS 456 स्पष्ट रूप से कहता है कि पानी बहुत अधिक अम्लीय (Acidic) नहीं होना चाहिए, इसलिए इसका pH मान 6.0 से कम नहीं होना चाहिए। अम्लीय पानी कंक्रीट के अंदर मौजूद लोहे के सरियों (Steel reinforcement) में जंग (Corrosion) लगा सकता है।
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Q589: इमारती लकड़ी (Timber) के परीक्षणों में, लकड़ी में 'नमी की मात्रा' (Moisture Content) की गणना हमेशा किस वजन के प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जाती है?
- A) लकड़ी के कुल ताजे वजन के आधार पर
- ✅ B) लकड़ी के ओवन-सूखे वजन (Oven-dry weight) के आधार पर (सही उत्तर)
- C) लकड़ी के आयतन (Volume) के आधार पर
- D) हवा में सूखी लकड़ी के वजन के आधार पर
💡 डिटेल Explanation:
इंजीनियरिंग परीक्षणों में, लकड़ी की नमी की मात्रा की गणना हमेशा उसके ओवन-सूखे वजन (Oven-dry weight) को आधार मानकर की जाती है।
सूत्र: % Moisture = [(Wet Weight - Oven Dry Weight) / Oven Dry Weight] × 100.
इंजीनियरिंग परीक्षणों में, लकड़ी की नमी की मात्रा की गणना हमेशा उसके ओवन-सूखे वजन (Oven-dry weight) को आधार मानकर की जाती है।
सूत्र: % Moisture = [(Wet Weight - Oven Dry Weight) / Oven Dry Weight] × 100.
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Q590: 590 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भवन निर्माण में प्लिंथ स्तर (Plinth level) पर लगाए जाने वाले 'DPC' (Damp Proof Course - सीलन रोक रद्दा) का मापन (Measurement) सामान्यतः किस इकाई में किया जाता है?
- A) क्यूबिक मीटर (Cubic meter - m³)
- B) रनिंग मीटर (Running meter - m)
- ✅ C) स्क्वायर मीटर (Square meter - m²) (सही उत्तर)
- D) किलोग्राम (Kilogram - kg)
💡 डिटेल Explanation:
DPC (Damp Proof Course) आमतौर पर प्लिंथ स्तर पर 2.5 सेमी से 4 सेमी मोटी एक जलरोधी परत (जैसे बिटुमेन या रिच कंक्रीट) होती है जो सीलन को दीवारों में ऊपर चढ़ने से रोकती है। चूँकि DPC की मोटाई (Thickness) पहले से ही निर्दिष्ट (Specified) और निश्चित होती है, इसलिए एस्टीमेटिंग में इसका मापन केवल लंबाई और चौड़ाई के आधार पर स्क्वायर मीटर (m²) में किया जाता है।
DPC (Damp Proof Course) आमतौर पर प्लिंथ स्तर पर 2.5 सेमी से 4 सेमी मोटी एक जलरोधी परत (जैसे बिटुमेन या रिच कंक्रीट) होती है जो सीलन को दीवारों में ऊपर चढ़ने से रोकती है। चूँकि DPC की मोटाई (Thickness) पहले से ही निर्दिष्ट (Specified) और निश्चित होती है, इसलिए एस्टीमेटिंग में इसका मापन केवल लंबाई और चौड़ाई के आधार पर स्क्वायर मीटर (m²) में किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 119 (Q591 - Q595)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q591: कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) के परीक्षण में, यदि 'कॉम्पैक्टिंग फैक्टर' (Compacting Factor) का मान 0.85 है, तो यह किस प्रकार की कंक्रीट को दर्शाता है?
- A) अत्यधिक सुकार्य (High Workability)
- B) मध्यम सुकार्य (Medium Workability)
- ✅ C) कम सुकार्य (Low Workability) (सही उत्तर)
- D) अत्यंत कम सुकार्य (Very Low Workability)
💡 डिटेल Explanation:
कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट का उपयोग मुख्य रूप से कम सुकार्य कंक्रीट के लिए किया जाता है। IS कोड के अनुसार:
• 0.75 से 0.80 = बहुत कम सुकार्यता (सड़क निर्माण के लिए)
• 0.85 = कम सुकार्यता (Mass concrete के लिए)
• 0.92 = मध्यम सुकार्यता (सामान्य RCC के लिए)
• 0.95 से अधिक = उच्च सुकार्यता।
कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट का उपयोग मुख्य रूप से कम सुकार्य कंक्रीट के लिए किया जाता है। IS कोड के अनुसार:
• 0.75 से 0.80 = बहुत कम सुकार्यता (सड़क निर्माण के लिए)
• 0.85 = कम सुकार्यता (Mass concrete के लिए)
• 0.92 = मध्यम सुकार्यता (सामान्य RCC के लिए)
• 0.95 से अधिक = उच्च सुकार्यता।
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Q592: ईंट के ऊपरी हिस्से में बनाए जाने वाले 'फ्रॉग' (Frog) की सामान्य गहराई (Depth) कितनी रखी जाती है?
- A) 2 mm से 5 mm
- ✅ B) 10 mm से 20 mm (सही उत्तर)
- C) 25 mm से 30 mm
- D) 35 mm से 40 mm
💡 डिटेल Explanation:
फ्रॉग (Frog) ईंट की सतह पर छोड़ा गया एक गड्ढा होता है जो मोर्टार के लिए 'की जॉइंट' (Key joint) का काम करता है। भारतीय मानकों के अनुसार, फ्रॉग का मानक आकार 10 cm × 4 cm होता है और इसकी गहराई (Depth) 1 cm से 2 cm (अर्थात 10 mm से 20 mm) के बीच रखी जाती है।
फ्रॉग (Frog) ईंट की सतह पर छोड़ा गया एक गड्ढा होता है जो मोर्टार के लिए 'की जॉइंट' (Key joint) का काम करता है। भारतीय मानकों के अनुसार, फ्रॉग का मानक आकार 10 cm × 4 cm होता है और इसकी गहराई (Depth) 1 cm से 2 cm (अर्थात 10 mm से 20 mm) के बीच रखी जाती है।
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Q593: पोर्टलैंड सीमेंट में मौजूद किस बोग्स यौगिक (Bogue's Compound) का 'सीमेंटिंग मूल्य' (Cementing value / Strength contribution) सबसे कम या नगण्य होता है?
- A) C3S (ट्राईकैल्शियम सिलिकेट)
- B) C2S (डाईकैल्शियम सिलिकेट)
- C) C3A (ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट)
- ✅ D) C4AF (टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में C4AF (Tetracalcium Aluminoferrite) लगभग 8-14% की मात्रा में होता है। यह पानी के साथ बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है लेकिन कंक्रीट की ताकत (Strength) या जमाव (Setting) में इसका कोई खास योगदान नहीं होता है। इसका सीमेंटिंग मूल्य (Cementing value) सभी चारों यौगिकों में सबसे खराब माना जाता है।
सीमेंट में C4AF (Tetracalcium Aluminoferrite) लगभग 8-14% की मात्रा में होता है। यह पानी के साथ बहुत तेजी से प्रतिक्रिया करता है लेकिन कंक्रीट की ताकत (Strength) या जमाव (Setting) में इसका कोई खास योगदान नहीं होता है। इसका सीमेंटिंग मूल्य (Cementing value) सभी चारों यौगिकों में सबसे खराब माना जाता है।
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Q594: इमारती लकड़ी (Timber) को 'ड्राई रॉट' (Dry Rot - सूखी सड़ांध) से बचाने के लिए सबसे प्रभावी निवारक उपाय क्या है?
- A) लकड़ी को लगातार पानी में डुबो कर रखना
- ✅ B) लकड़ी के चारों ओर हवा का उचित संचार (Well ventilation) सुनिश्चित करना (सही उत्तर)
- C) लकड़ी को सीधी धूप में रखना
- D) लकड़ी पर चूने का लेप लगाना
💡 डिटेल Explanation:
ड्राई रॉट एक फफूंदी (Fungi) के कारण होता है जो ऐसी जगहों पर पनपती है जहाँ सीलन (Dampness) होती है और हवा का प्रवाह (Ventilation) बिल्कुल नहीं होता। इसे रोकने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका यह है कि लकड़ी को ऐसी जगह लगाया या स्टोर किया जाए जहाँ ताजी हवा का उचित संचार (Free circulation of air) हो सके।
ड्राई रॉट एक फफूंदी (Fungi) के कारण होता है जो ऐसी जगहों पर पनपती है जहाँ सीलन (Dampness) होती है और हवा का प्रवाह (Ventilation) बिल्कुल नहीं होता। इसे रोकने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका यह है कि लकड़ी को ऐसी जगह लगाया या स्टोर किया जाए जहाँ ताजी हवा का उचित संचार (Free circulation of air) हो सके।
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Q595: 595 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पेंट निर्माण में उपयोग होने वाला सबसे आम थिनर 'तारपीन का तेल' (Turpentine Oil) प्राकृतिक रूप से किस स्रोत से प्राप्त किया जाता है?
- A) पेट्रोलियम के आसवन (Distillation) से
- B) कोयले (Coal) से
- ✅ C) चीड़ (Pine) के पेड़ों से निकलने वाले राल (Resin) से (सही उत्तर)
- D) अलसी (Flax) के बीजों से
💡 डिटेल Explanation:
तारपीन का तेल (Turpentine) एक अत्यंत वाष्पशील (Volatile) विलायक है। यह मुख्य रूप से शंकुधारी पेड़ों (विशेषकर Pine / चीड़ के पेड़ों) से निकलने वाले प्राकृतिक राल (Resin / Sap) के आसवन से प्राप्त किया जाता है। दूसरी ओर, अलसी का तेल (Linseed oil) अलसी के बीजों से निकाला जाता है।
तारपीन का तेल (Turpentine) एक अत्यंत वाष्पशील (Volatile) विलायक है। यह मुख्य रूप से शंकुधारी पेड़ों (विशेषकर Pine / चीड़ के पेड़ों) से निकलने वाले प्राकृतिक राल (Resin / Sap) के आसवन से प्राप्त किया जाता है। दूसरी ओर, अलसी का तेल (Linseed oil) अलसी के बीजों से निकाला जाता है।
🏆 बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - महा-पड़ाव: भाग 120 (Q596 - Q600) 🏆
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Q596: भवन निर्माण पत्थरों के परीक्षण में 'एसिड टेस्ट' (Acid Test) का मुख्य उद्देश्य क्या पता लगाना होता है?
- A) पत्थर की संपीडन सामर्थ्य
- B) पत्थर की कठोरता
- ✅ C) पत्थर का 'मौसम प्रतिरोध' (Weather Resistance) और कैल्शियम कार्बोनेट की उपस्थिति (सही उत्तर)
- D) पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व
💡 डिटेल Explanation:
एसिड टेस्ट में पत्थर के नमूने को हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) या सल्फ्यूरिक एसिड के घोल में 7 दिनों तक रखा जाता है। यदि पत्थर के किनारे और सतह धुंधली या खुरदरी हो जाती है, तो इसका मतलब है कि उसमें कैल्शियम कार्बोनेट (चूना) मौजूद है। ऐसे पत्थर अम्लीय वर्षा (Acid rain) और खराब मौसम (Weathering) का सामना नहीं कर सकते और बाहरी निर्माण के लिए अयोग्य माने जाते हैं।
एसिड टेस्ट में पत्थर के नमूने को हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) या सल्फ्यूरिक एसिड के घोल में 7 दिनों तक रखा जाता है। यदि पत्थर के किनारे और सतह धुंधली या खुरदरी हो जाती है, तो इसका मतलब है कि उसमें कैल्शियम कार्बोनेट (चूना) मौजूद है। ऐसे पत्थर अम्लीय वर्षा (Acid rain) और खराब मौसम (Weathering) का सामना नहीं कर सकते और बाहरी निर्माण के लिए अयोग्य माने जाते हैं।
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Q597: भारतीय मानकों (IS 1077) के अनुसार, एक 'दूसरी श्रेणी की ईंट' (Second Class Brick) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य कितनी होनी चाहिए?
- A) 3.5 N/mm² (35 kg/cm²)
- ✅ B) 7.0 N/mm² (70 kg/cm²) (सही उत्तर)
- C) 10.5 N/mm² (105 kg/cm²)
- D) 14.0 N/mm² (140 kg/cm²)
💡 डिटेल Explanation:
आईएस कोड के अनुसार ईंटों का वर्गीकरण उनकी न्यूनतम क्रशिंग स्ट्रेंथ (Compressive Strength) पर आधारित है।
• प्रथम श्रेणी: 10.5 N/mm²
• द्वितीय श्रेणी: 7.0 N/mm²
• सामान्य (Common): 3.5 N/mm²
द्वितीय श्रेणी की ईंटों का उपयोग प्लास्टर की जाने वाली अंदरूनी दीवारों में किया जाता है।
आईएस कोड के अनुसार ईंटों का वर्गीकरण उनकी न्यूनतम क्रशिंग स्ट्रेंथ (Compressive Strength) पर आधारित है।
• प्रथम श्रेणी: 10.5 N/mm²
• द्वितीय श्रेणी: 7.0 N/mm²
• सामान्य (Common): 3.5 N/mm²
द्वितीय श्रेणी की ईंटों का उपयोग प्लास्टर की जाने वाली अंदरूनी दीवारों में किया जाता है।
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Q598: प्रीकास्ट कंक्रीट (Precast concrete) उत्पादों के निर्माण में कंक्रीट को बहुत तेजी से ताकत (Strength) प्रदान करने के लिए 'तराई' (Curing) की कौन सी विधि उपयोग की जाती है?
- A) पोंडिंग विधि (Ponding)
- B) पानी का छिड़काव (Sprinkling)
- C) मेम्ब्रेन क्यूरिंग (Membrane curing)
- ✅ D) भाप द्वारा तराई (Steam Curing) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
प्रीकास्ट कारखानों में सांचों (Moulds) को जल्दी खाली करने के लिए कंक्रीट का तेजी से ताकत पकड़ना जरूरी होता है। इसके लिए भाप द्वारा तराई (Steam Curing) का उपयोग किया जाता है। भाप से उच्च तापमान और 100% नमी एक साथ मिलती है, जिससे जलयोजन (Hydration) की दर कई गुना तेज हो जाती है और कंक्रीट 24 घंटे में ही अपनी 7 दिन की ताकत प्राप्त कर लेती है।
प्रीकास्ट कारखानों में सांचों (Moulds) को जल्दी खाली करने के लिए कंक्रीट का तेजी से ताकत पकड़ना जरूरी होता है। इसके लिए भाप द्वारा तराई (Steam Curing) का उपयोग किया जाता है। भाप से उच्च तापमान और 100% नमी एक साथ मिलती है, जिससे जलयोजन (Hydration) की दर कई गुना तेज हो जाती है और कंक्रीट 24 घंटे में ही अपनी 7 दिन की ताकत प्राप्त कर लेती है।
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Q599: व्यावसायिक रूप से उपलब्ध 'प्लाइवुड' (Plywood) के संदर्भ में '3-प्लाई' (3-Ply) शब्द का क्या अर्थ है?
- A) यह 3 अलग-अलग पेड़ों की लकड़ी से बना है
- B) इसकी मोटाई 3 इंच है
- ✅ C) यह लकड़ी की 3 पतली परतों (Veneers) को आपस में चिपका कर बनाया गया है (सही उत्तर)
- D) इसकी उम्र 3 साल है
💡 डिटेल Explanation:
प्लाइवुड में 'प्लाई' (Ply) का अर्थ विनियर (Veneer) की एक 'परत' (Layer) होता है। 3-प्लाई का अर्थ है कि इसमें लकड़ी की 3 परतें हैं जिन्हें एक-दूसरे के रेशों (Grains) के समकोण पर चिपकाया गया है। प्लाइवुड हमेशा विषम (Odd) संख्या की परतों में (जैसे 3, 5, 7, 9) बनाया जाता है ताकि दोनों तरफ का तनाव संतुलित (Balanced) रहे।
प्लाइवुड में 'प्लाई' (Ply) का अर्थ विनियर (Veneer) की एक 'परत' (Layer) होता है। 3-प्लाई का अर्थ है कि इसमें लकड़ी की 3 परतें हैं जिन्हें एक-दूसरे के रेशों (Grains) के समकोण पर चिपकाया गया है। प्लाइवुड हमेशा विषम (Odd) संख्या की परतों में (जैसे 3, 5, 7, 9) बनाया जाता है ताकि दोनों तरफ का तनाव संतुलित (Balanced) रहे।
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Q600: 🌟 600 MCQ का शानदार महा-पड़ाव! 🌟 प्रश्न: पोर्टलैंड सीमेंट के निर्माण के दौरान, 'रोटरी भट्ठे' (Rotary Kiln) के बर्निंग ज़ोन (Burning Zone) में अधिकतम तापमान लगभग कितना रखा जाता है ताकि रासायनिक संयोजन से क्लिंकर बन सके?
- A) 500°C - 700°C
- B) 900°C - 1100°C
- ✅ C) 1400°C - 1500°C (सही उत्तर)
- D) 2000°C - 2200°C
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट बनाने के लिए चूने और क्ले (मिट्टी) के मिश्रण को एक लंबे रोटरी भट्ठे (Rotary Kiln) में पकाया जाता है। इसके सबसे गर्म हिस्से जिसे 'बर्निंग ज़ोन' (Burning Zone) कहते हैं, का तापमान 1400°C से 1500°C के बीच रखा जाता है। इस अत्यधिक उच्च तापमान पर ही सामग्री आंशिक रूप से पिघलकर (Fusion) आपस में रासायनिक प्रतिक्रिया करती है और कंकड़ जैसे 'क्लिंकर' (Clinker) में बदल जाती है।
सीमेंट बनाने के लिए चूने और क्ले (मिट्टी) के मिश्रण को एक लंबे रोटरी भट्ठे (Rotary Kiln) में पकाया जाता है। इसके सबसे गर्म हिस्से जिसे 'बर्निंग ज़ोन' (Burning Zone) कहते हैं, का तापमान 1400°C से 1500°C के बीच रखा जाता है। इस अत्यधिक उच्च तापमान पर ही सामग्री आंशिक रूप से पिघलकर (Fusion) आपस में रासायनिक प्रतिक्रिया करती है और कंकड़ जैसे 'क्लिंकर' (Clinker) में बदल जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 121 (Q601 - Q605)
Q601: कंक्रीट का वह गुण क्या है जिसके कारण वह अपनी प्लास्टिक अवस्था में बाहरी या आंतरिक ताकतों के कारण आकार में बदलाव का विरोध करती है?
- A) वर्कएबिलिटी (Workability)
- ✅ B) कोहेसन (Cohesion) (सही उत्तर)
- C) ब्लीडिंग (Bleeding)
- D) सेग्रीगेशन (Segregation)
💡 डिटेल Explanation:
कोहेसन (Cohesion) कंक्रीट के घटकों (सीमेंट, बालू, पानी) के आपस में चिपके रहने की क्षमता है। यह गुण कंक्रीट के सेग्रीगेशन (अलगाव) को रोकता है और मिश्रण को एक साथ बनाए रखता है।
कोहेसन (Cohesion) कंक्रीट के घटकों (सीमेंट, बालू, पानी) के आपस में चिपके रहने की क्षमता है। यह गुण कंक्रीट के सेग्रीगेशन (अलगाव) को रोकता है और मिश्रण को एक साथ बनाए रखता है।
Q602: भट्ठे में पकाई गई ईंटों के लिए 'सबसे उपयुक्त तापमान' की सीमा क्या होती है?
- A) 500°C - 700°C
- ✅ B) 900°C - 1200°C (सही उत्तर)
- C) 1300°C - 1500°C
- D) 1500°C से अधिक
💡 डिटेल Explanation:
ईंटों को पकाने के लिए भट्ठे का तापमान 900°C से 1200°C के बीच रखा जाता है। इस तापमान पर मिट्टी के कण आपस में फ्यूज होकर ईंट को मजबूती और कठोरता प्रदान करते हैं।
ईंटों को पकाने के लिए भट्ठे का तापमान 900°C से 1200°C के बीच रखा जाता है। इस तापमान पर मिट्टी के कण आपस में फ्यूज होकर ईंट को मजबूती और कठोरता प्रदान करते हैं।
Q603: इमारती लकड़ी को जल प्रतिरोधी बनाने और दीमक से बचाने के लिए उपयोग की जाने वाली 'कोल टार' (Coal Tar) आधारित उपचार विधि क्या कहलाती है?
- A) पेंटिंग
- ✅ B) टारिंग (Tarring) (सही उत्तर)
- C) चारिंग (Charring)
- D) वार्निशिंग
💡 डिटेल Explanation:
टारिंग में लकड़ी की सतह पर गर्म कोल टार की एक परत लगाई जाती है। यह नमी को लकड़ी में जाने से रोकता है और दीमक/कवक से सुरक्षा प्रदान करता है। इसका उपयोग अक्सर बिजली के खंभों (Poles) के निचले सिरे पर किया जाता है।
टारिंग में लकड़ी की सतह पर गर्म कोल टार की एक परत लगाई जाती है। यह नमी को लकड़ी में जाने से रोकता है और दीमक/कवक से सुरक्षा प्रदान करता है। इसका उपयोग अक्सर बिजली के खंभों (Poles) के निचले सिरे पर किया जाता है।
Q604: पेंट के सूखने के समय को कम करने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'ड्रायर' (Drier) के रूप में किसका उपयोग होता है?
- A) लिथार्ज (Litharge)
- ✅ B) उपरोक्त सभी (सही उत्तर)
- C) मैंगनीज डाइऑक्साइड
- D) कोबाल्ट सल्फेट
💡 डिटेल Explanation:
ड्रायर्स का उपयोग ऑयल पेंट के ऑक्सीकरण (Oxidation) और सूखने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जाता है। लिथार्ज, रेड लेड, मैंगनीज और कोबाल्ट के यौगिक प्रमुख ड्रायर्स हैं।
ड्रायर्स का उपयोग ऑयल पेंट के ऑक्सीकरण (Oxidation) और सूखने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जाता है। लिथार्ज, रेड लेड, मैंगनीज और कोबाल्ट के यौगिक प्रमुख ड्रायर्स हैं।
Q605: कंक्रीट को पंप करने के दौरान पाइप में घर्षण (Friction) कम करने के लिए कंक्रीट में किस प्रकार के एडमिक्सचर का उपयोग करना चाहिए?
- ✅ A) प्लास्टिसाइज़र (Plasticizer) (सही उत्तर)
- B) एक्सीलरेटर (Accelerator)
- C) रिटार्डर (Retarder)
- D) एयर-एंट्रेनिंग एजेंट
💡 डिटेल Explanation:
प्लास्टिसाइज़र कंक्रीट की तरलता (Flowability) को बिना अतिरिक्त पानी के बढ़ाता है। इससे पाइप के अंदर घर्षण कम हो जाता है, जिससे कंक्रीट आसानी से और कम ऊर्जा के साथ पंप की जा सकती है।
प्लास्टिसाइज़र कंक्रीट की तरलता (Flowability) को बिना अतिरिक्त पानी के बढ़ाता है। इससे पाइप के अंदर घर्षण कम हो जाता है, जिससे कंक्रीट आसानी से और कम ऊर्जा के साथ पंप की जा सकती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 114 (Q606 - Q610)
Q606: सामान्य भवन निर्माण के लिए 'पत्थर की खदान' (Quarrying) की सबसे सस्ती और सरल विधि कौन सी है?
- A) ब्लास्टिंग (Blasting)
- ✅ B) वेजिंग (Wedging) (सही उत्तर)
- C) चेनलिंग (Channeling)
- D) हीटिंग (Heating)
💡 डिटेल Explanation:
वेजिंग विधि के लिए किसी महंगे विस्फोटक या मशीन की आवश्यकता नहीं होती, केवल हथौड़े और कीलों (Wedges) का उपयोग किया जाता है। इसलिए यह कम लागत वाले और छोटे स्तर के निर्माण कार्यों के लिए सबसे सस्ती विधि है।
वेजिंग विधि के लिए किसी महंगे विस्फोटक या मशीन की आवश्यकता नहीं होती, केवल हथौड़े और कीलों (Wedges) का उपयोग किया जाता है। इसलिए यह कम लागत वाले और छोटे स्तर के निर्माण कार्यों के लिए सबसे सस्ती विधि है।
Q607: कंक्रीट में 'एयर-एंट्रेनिंग एडमिक्सचर' (Air-Entraining Admixture) का उपयोग करने का मुख्य लाभ क्या है?
- A) कंक्रीट की मजबूती बढ़ाना
- ✅ B) कंक्रीट की 'फ्रीज-थॉ' (Freeze-Thaw) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट के जमने की गति बढ़ाना
- D) कंक्रीट में नमी रोकना
💡 डिटेल Explanation:
ठंडे देशों में कंक्रीट के अंदर का पानी जमने पर फैलता है (फ्रीज-थॉ), जिससे दरारें आती हैं। एयर-एंट्रेनिंग एडमिक्सचर कंक्रीट में सूक्ष्म हवा के बुलबुले पैदा करते हैं, जो पानी के जमने पर होने वाले प्रसार के लिए खाली जगह प्रदान करते हैं, जिससे दरारें नहीं पड़तीं।
ठंडे देशों में कंक्रीट के अंदर का पानी जमने पर फैलता है (फ्रीज-थॉ), जिससे दरारें आती हैं। एयर-एंट्रेनिंग एडमिक्सचर कंक्रीट में सूक्ष्म हवा के बुलबुले पैदा करते हैं, जो पानी के जमने पर होने वाले प्रसार के लिए खाली जगह प्रदान करते हैं, जिससे दरारें नहीं पड़तीं।
Q608: 'फ्लेमिश बॉन्ड' (Flemish Bond) का सबसे बड़ा नुकसान क्या है?
- A) यह सुंदर नहीं है
- ✅ B) इसमें इंग्लिश बॉन्ड की तुलना में मजबूती कम होती है (सही उत्तर)
- C) यह बहुत महंगा है
- D) इसे बनाना बहुत कठिन है
💡 डिटेल Explanation:
फ्लेमिश बॉन्ड दिखने में बहुत आकर्षक (सुंदर) है, लेकिन इसमें 'थ्रू-बॉन्ड' (Through bond) की कमी होती है। इंग्लिश बॉन्ड की तुलना में यह कम मजबूत होता है क्योंकि इसमें ईंटें पूरी गहराई तक इंटरलॉक (Interlock) नहीं होतीं।
फ्लेमिश बॉन्ड दिखने में बहुत आकर्षक (सुंदर) है, लेकिन इसमें 'थ्रू-बॉन्ड' (Through bond) की कमी होती है। इंग्लिश बॉन्ड की तुलना में यह कम मजबूत होता है क्योंकि इसमें ईंटें पूरी गहराई तक इंटरलॉक (Interlock) नहीं होतीं।
Q609: पेंट की गई सतह के सूखने के बाद उस पर 'सिकुड़न' (Shrinkage) के कारण छोटी-छोटी दरारें (Fine cracks) पड़ जाना क्या कहलाता है?
- ✅ A) क्रैकिंग / क्रैज़िंग (Cracking / Crazing) (सही उत्तर)
- B) सैगिंग (Sagging)
- C) चॉकिंग (Chalking)
- D) ब्लूमिंग (Blooming)
💡 डिटेल Explanation:
जब पेंट की निचली परत ऊपर की परत की तुलना में अधिक तेजी से सूखती है, या पेंट की परत अत्यधिक मोटी होती है, तो सूखने के बाद सिकुड़न (Shrinkage) के कारण सतह पर मकड़ी के जाले जैसी महीन दरारें पड़ जाती हैं। इसे ही क्रैकिंग (Cracking) या क्रैज़िंग (Crazing) कहते हैं।
जब पेंट की निचली परत ऊपर की परत की तुलना में अधिक तेजी से सूखती है, या पेंट की परत अत्यधिक मोटी होती है, तो सूखने के बाद सिकुड़न (Shrinkage) के कारण सतह पर मकड़ी के जाले जैसी महीन दरारें पड़ जाती हैं। इसे ही क्रैकिंग (Cracking) या क्रैज़िंग (Crazing) कहते हैं।
Q610: 🌟 610 MCQ का माइलस्टोन! 🌟 प्रश्न: सीमेंट के लिए 'इनिशियल सेटिंग टाइम' (Initial Setting Time) के परीक्षण में उपयोग की जाने वाली विकाट सुई (Vicat needle) का आकार क्या होता है?
- ✅ A) 1 mm² का चौकोर आकार (Square needle) (सही उत्तर)
- B) 5 mm का वृत्ताकार व्यास
- C) 10 mm का वृत्ताकार व्यास
- D) 0.5 mm की सुई
💡 डिटेल Explanation:
प्रारंभिक जमाव काल (Initial Setting Time) मापने के लिए विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का उपयोग होता है। इसमें एक 1 mm x 1 mm (1 mm²) के चौकोर सिरे वाली सुई का प्रयोग किया जाता है। जब यह सुई सीमेंट पेस्ट में गहराई तक नहीं जा पाती, तो वह समय 'इनिशियल सेटिंग टाइम' कहलाता है।
प्रारंभिक जमाव काल (Initial Setting Time) मापने के लिए विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) का उपयोग होता है। इसमें एक 1 mm x 1 mm (1 mm²) के चौकोर सिरे वाली सुई का प्रयोग किया जाता है। जब यह सुई सीमेंट पेस्ट में गहराई तक नहीं जा पाती, तो वह समय 'इनिशियल सेटिंग टाइम' कहलाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 121 (Q611 - Q615)
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Q611: सीमेंट की 'मानक सघनता' (Standard Consistency) परीक्षण के लिए विकाट उपकरण (Vicat Apparatus) में उपयोग होने वाले प्लंजर (Plunger) का आयाम क्या होता है?
- A) 1 mm व्यास और 50 mm लंबाई
- B) 5 mm व्यास और 40 mm लंबाई
- ✅ C) 10 mm व्यास और 50 mm लंबाई (सही उत्तर)
- D) 10 mm व्यास और 40 mm लंबाई
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट पेस्ट की मानक सघनता (वह नमी जिस पर विकाट प्लंजर सांचे के निचले सिरे से 5-7 mm की ऊंचाई तक ही रुक जाए) मापने के लिए 10 mm व्यास और 50 mm लंबे नौन-पोरस पॉलिश किए गए प्लंजर का उपयोग किया जाता है। (ध्यान दें: प्रारंभिक जमाव काल के लिए 1 mm² की चौकोर सुई का उपयोग किया जाता है)।
सीमेंट पेस्ट की मानक सघनता (वह नमी जिस पर विकाट प्लंजर सांचे के निचले सिरे से 5-7 mm की ऊंचाई तक ही रुक जाए) मापने के लिए 10 mm व्यास और 50 mm लंबे नौन-पोरस पॉलिश किए गए प्लंजर का उपयोग किया जाता है। (ध्यान दें: प्रारंभिक जमाव काल के लिए 1 mm² की चौकोर सुई का उपयोग किया जाता है)।
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Q612: ईंट निर्माण में प्रयुक्त होने वाली मिट्टी में 'एल्युमिना' (Alumina - Clay) की अत्यधिक मात्रा (Excess) होने पर ईंट पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है?
- A) ईंट भट्ठे में अत्यधिक तापमान पर पिघल जाती है
- ✅ B) ईंट सूखने और पकने के दौरान बहुत अधिक सिकुड़ती है और टेढ़ी-मेढ़ी (Warping and Cracking) हो जाती है (सही उत्तर)
- C) ईंट अत्यधिक भंगुर (Brittle) हो जाती है
- D) ईंट का लाल रंग पूरी तरह सफेद हो जाता है
💡 डिटेल Explanation:
एल्युमिना (20-30%) ईंट की मिट्टी को सुघट्यता (Plasticity) देता है ताकि उसे आसानी से विभिन्न सांचों में ढाला जा सके। लेकिन यदि एल्युमिना की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाए, तो ईंट सूखने और पकने के दौरान बहुत अधिक आयतन खोती है जिससे उसमें भयंकर दरारें (Cracks) पड़ जाती हैं और वह सिकुड़कर विकृत (Warp) हो जाती है।
एल्युमिना (20-30%) ईंट की मिट्टी को सुघट्यता (Plasticity) देता है ताकि उसे आसानी से विभिन्न सांचों में ढाला जा सके। लेकिन यदि एल्युमिना की मात्रा आवश्यकता से अधिक हो जाए, तो ईंट सूखने और पकने के दौरान बहुत अधिक आयतन खोती है जिससे उसमें भयंकर दरारें (Cracks) पड़ जाती हैं और वह सिकुड़कर विकृत (Warp) हो जाती है।
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Q613: इमारती लकड़ी (Timber) में 'गांठ' या 'नॉट' (Knot) नामक दोष का मुख्य कारण क्या होता है?
- A) फफूंदी (Fungi) का तीव्र हमला होना
- B) पेड़ों की असमान सीजनिंग (Seasoning) होना
- ✅ C) पेड़ की कटी या टूटी हुई शाखा का आधार (Base of a broken branch) मुख्य तने के अंदर दबा रह जाना (सही उत्तर)
- D) पेड़ की छाल का अत्यधिक मोटा होना
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ के बढ़ते समय यदि उसकी कोई शाखा (Branch) टूट जाती है या काट दी जाती है, तो पेड़ का तना लगातार बढ़ता रहता है और उस कटी हुई शाखा के बचे हुए हिस्से (आधार) को अपने लकड़ी के तंतुओं के अंदर पूरी तरह घेर लेता है। लकड़ी की चिराई करने पर यह हिस्सा एक गहरे रंग की गोल या अंडाकार अत्यंत कठोर 'गांठ' (Knot) के रूप में दिखाई देता है, जो लकड़ी की निरंतरता और सामर्थ्य को तोड़ता है।
पेड़ के बढ़ते समय यदि उसकी कोई शाखा (Branch) टूट जाती है या काट दी जाती है, तो पेड़ का तना लगातार बढ़ता रहता है और उस कटी हुई शाखा के बचे हुए हिस्से (आधार) को अपने लकड़ी के तंतुओं के अंदर पूरी तरह घेर लेता है। लकड़ी की चिराई करने पर यह हिस्सा एक गहरे रंग की गोल या अंडाकार अत्यंत कठोर 'गांठ' (Knot) के रूप में दिखाई देता है, जो लकड़ी की निरंतरता और सामर्थ्य को तोड़ता है।
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Q614: पेंट की गई सतह पर नमी (Moisture) या पानी की भाप फंस जाने के कारण पेंट की परत पर छोटे-छोटे 'बुलबुले' या फोड़े (Blisters) बन जाने के दोष को क्या कहते हैं?
- A) एलीगेटरिंग (Alligatoring)
- ✅ B) ब्लिस्टरिंग (Blistering) (सही उत्तर)
- C) चॉकिंग (Chalking)
- D) फ्लैकिंग (Flaking)
💡 डिटेल Explanation:
ब्लिस्टरिंग (Blistering) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट फिल्म के नीचे नमी या गैस फंसी रह जाती है। धूप की गर्मी से जब यह नमी अंदर ही अंदर वाष्पित होकर फैलती है, तो पेंट की परत को सतह से अलग धकेलती है, जिससे सतह पर बदसूरत बुलबुले या फफोले दिखाई देने लगते हैं। यह ताजे प्लास्टर पर तुरंत पेंट करने से होता है।
ब्लिस्टरिंग (Blistering) पेंट का वह दोष है जिसमें पेंट फिल्म के नीचे नमी या गैस फंसी रह जाती है। धूप की गर्मी से जब यह नमी अंदर ही अंदर वाष्पित होकर फैलती है, तो पेंट की परत को सतह से अलग धकेलती है, जिससे सतह पर बदसूरत बुलबुले या फफोले दिखाई देने लगते हैं। यह ताजे प्लास्टर पर तुरंत पेंट करने से होता है।
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Q615: भूवैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, 'बेसाल्ट और ट्रैप' (Basalt and Trap) किस प्रकार की चट्टानें हैं, जिनका उपयोग रेलवे बैलास्ट और सड़क निर्माण में बहुतायत से होता है?
- A) प्लूटोनिक आग्नेय चट्टान (Plutonic Igneous)
- ✅ B) ज्वालामुखीय आग्नेय चट्टान (Volcanic Igneous Rock) (सही उत्तर)
- C) अवसादी चट्टान (Sedimentary Rock)
- D) कायांतरित चट्टान (Metamorphic Rock)
💡 डिटेल Explanation:
बेसाल्ट और ट्रैप बाहरी या ज्वालामुखीय आग्नेय चट्टानें (Volcanic Igneous Rocks) हैं, जो पृथ्वी की सतह पर पिघले हुए लावे (Lava) के अत्यधिक तेजी से ठंडे होने से बनती हैं। तेजी से ठंडे होने के कारण इनकी संरचना बहुत घनी, सूक्ष्म कणों वाली (Fine grained) और छिद्ररहित होती है। ये पत्थर अत्यधिक कठोर और मजबूत होते हैं, जिससे ये सड़क धातु (Road metal) के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
बेसाल्ट और ट्रैप बाहरी या ज्वालामुखीय आग्नेय चट्टानें (Volcanic Igneous Rocks) हैं, जो पृथ्वी की सतह पर पिघले हुए लावे (Lava) के अत्यधिक तेजी से ठंडे होने से बनती हैं। तेजी से ठंडे होने के कारण इनकी संरचना बहुत घनी, सूक्ष्म कणों वाली (Fine grained) और छिद्ररहित होती है। ये पत्थर अत्यधिक कठोर और मजबूत होते हैं, जिससे ये सड़क धातु (Road metal) के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 122 (Q616 - Q620)
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Q616: 'सफेद पोर्टलैंड सीमेंट' (White Portland Cement) के निर्माण में कच्चे माल से किस घटक को पूरी तरह हटा दिया जाता है या न्यूनतम (0.5% से कम) रखा जाता है?
- A) सिलिका (Silica)
- B) एल्युमिना (Alumina)
- ✅ C) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) (सही उत्तर)
- D) जिप्सम (Gypsum)
💡 डिटेल Explanation:
साधारण सीमेंट का विशिष्ट धूसर या ग्रे रंग मुख्य रूप से आरण ऑक्साइड (Fe₂O₃) और क्रोमियम/मैंगनीज की उपस्थिति के कारण होता है। शुद्ध सफेद सीमेंट बनाने के लिए आयरन ऑक्साइड की मात्रा को 1% से भी कम (आदर्श रूप से 0.5% से कम) रखा जाता है। इसके ईंधन के रूप में कोयले के बजाय तेल या गैस का उपयोग भट्ठे में किया जाता है ताकि कालिख न जमे।
साधारण सीमेंट का विशिष्ट धूसर या ग्रे रंग मुख्य रूप से आरण ऑक्साइड (Fe₂O₃) और क्रोमियम/मैंगनीज की उपस्थिति के कारण होता है। शुद्ध सफेद सीमेंट बनाने के लिए आयरन ऑक्साइड की मात्रा को 1% से भी कम (आदर्श रूप से 0.5% से कम) रखा जाता है। इसके ईंधन के रूप में कोयले के बजाय तेल या गैस का उपयोग भट्ठे में किया जाता है ताकि कालिख न जमे।
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Q617: बालू या रेत में नमी (Moisture) के कारण उसके आयतन में होने वाली अत्यधिक वृद्धि को क्या कहा जाता है, जो सामान्यतः 4% से 5% नमी पर अधिकतम होती है?
- A) सेग्रीगेशन (Segregation)
- ✅ B) बल्किंग ऑफ सैंड (Bulking of Sand) (सही उत्तर)
- C) ब्लीडिंग (Bleeding)
- D) हनीकॉम्बिंग (Honeycombing)
💡 डिटेल Explanation:
जब सूखी बालू में थोड़ा सा पानी (4-5%) मिलता है, तो प्रत्येक बालू के कण के चारों ओर पानी की एक बहुत ही पतली परत (Moisture film) बन जाती है। सतह तनाव (Surface tension) के कारण यह फिल्म कणों को एक-दूसरे से दूर धकेलती है, जिससे बालू का कुल आयतन 20% से 30% तक बढ़ जाता है। इसे बल्किंग ऑफ सैंड (Bulking of sand) कहते हैं। पानी की मात्रा 10% से अधिक होने पर यह फिल्म टूट जाती है और आयतन पुनः सामान्य हो जाता है।
जब सूखी बालू में थोड़ा सा पानी (4-5%) मिलता है, तो प्रत्येक बालू के कण के चारों ओर पानी की एक बहुत ही पतली परत (Moisture film) बन जाती है। सतह तनाव (Surface tension) के कारण यह फिल्म कणों को एक-दूसरे से दूर धकेलती है, जिससे बालू का कुल आयतन 20% से 30% तक बढ़ जाता है। इसे बल्किंग ऑफ सैंड (Bulking of sand) कहते हैं। पानी की मात्रा 10% से अधिक होने पर यह फिल्म टूट जाती है और आयतन पुनः सामान्य हो जाता है।
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Q618: कंक्रीट की गुणवत्ता, आंतरिक खोखलेपन (Voids) और कंक्रीट की एकरूपता की जांच करने के लिए की जाने वाली एक प्रमुख 'गैर-विनाशकारी परीक्षण' (Non-Destructive Test - NDT) विधि कौन सी है?
- A) कंप्रेसिव क्रशिंग टेस्ट (Crushing Test)
- B) स्प्लिट टेन्साइल टेस्ट (Split Tensile Test)
- ✅ C) अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी टेस्ट (Ultrasonic Pulse Velocity Test) (सही उत्तर)
- D) कोर एक्सट्रैक्शन टेस्ट (Core Extraction Test)
💡 डिटेल Explanation:
अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी (UPV) टेस्ट एक गैर-विनाशकारी (NDT) परीक्षण है, जिसका अर्थ है कि कंक्रीट संरचना को तोड़े बिना उसकी जांच की जाती है। इसमें कंक्रीट के आर-पार उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। यदि कंक्रीट घनी और ठोस है, तो तरंगों की गति बहुत तेज (4.5 km/sec से अधिक = Excellent) होती है। यदि अंदर दरारें या खोखलापन है, तो गति धीमी हो जाती है।
अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी (UPV) टेस्ट एक गैर-विनाशकारी (NDT) परीक्षण है, जिसका अर्थ है कि कंक्रीट संरचना को तोड़े बिना उसकी जांच की जाती है। इसमें कंक्रीट के आर-पार उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगें भेजी जाती हैं। यदि कंक्रीट घनी और ठोस है, तो तरंगों की गति बहुत तेज (4.5 km/sec से अधिक = Excellent) होती है। यदि अंदर दरारें या खोखलापन है, तो गति धीमी हो जाती है।
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Q619: बिना बुझे चूने (Quick Lime - CaO) में पानी मिलाने पर होने वाली तीव्र रासायनिक प्रतिक्रिया, जिसमें भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है और चूना पाउडर में बदल जाता है, क्या कहलाती है?
- A) कैल्सिनेशन (Calcination)
- ✅ B) स्लेकिंग (Slaking - चूना बुझाना) (सही उत्तर)
- C) कार्बोनेशन (Carbonation)
- D) हाइड्रेशन (Hydration)
💡 डिटेल Explanation:
क्विक लाइम (कैल्शियम ऑक्साइड - CaO) पत्थर के रूप में होता है। जब इसमें पानी मिलाया जाता है, तो यह अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) रासायनिक प्रतिक्रिया करता है जिससे पानी उबलने लगता है और चूना फूलकर तड़कते हुए बारीक पाउडर 'बुझे हुए चूने' [Calcium Hydroxide - Ca(OH)₂] में बदल जाता है। इस क्रिया को स्लेकिंग (Slaking) कहते हैं और इस दौरान चूने का आयतन 2 से 2.5 गुना तक बढ़ जाता है।
क्विक लाइम (कैल्शियम ऑक्साइड - CaO) पत्थर के रूप में होता है। जब इसमें पानी मिलाया जाता है, तो यह अत्यधिक ऊष्माक्षेपी (Exothermic) रासायनिक प्रतिक्रिया करता है जिससे पानी उबलने लगता है और चूना फूलकर तड़कते हुए बारीक पाउडर 'बुझे हुए चूने' [Calcium Hydroxide - Ca(OH)₂] में बदल जाता है। इस क्रिया को स्लेकिंग (Slaking) कहते हैं और इस दौरान चूने का आयतन 2 से 2.5 गुना तक बढ़ जाता है।
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Q620: 620 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: जिप्सम (Gypsum) का सही रासायनिक नाम और सूत्र (Chemical Formula) निम्नलिखित में से कौन सा है?
- A) कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃)
- ✅ B) कैल्शियम सल्फेट डाईहाइड्रेट (CaSO₄·2H₂O) (सही उत्तर)
- C) कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (CaSO₄·½H₂O)
- D) कैल्शियम सल्फेट निर्जलीय (CaSO₄)
💡 डिटेल Explanation:
जिप्सम प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण सल्फेट खनिज है जिसका रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट डाईहाइड्रेट (CaSO₄·2H₂O) है। सीमेंट में यह सेटिंग टाइम को नियंत्रित करने (बढ़ाने) के लिए मिलाया जाता है। (ध्यान दें: विकल्प C में दिया गया CaSO₄·½H₂O प्लास्टर ऑफ पेरिस अर्थात् POP का सूत्र है)।
जिप्सम प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण सल्फेट खनिज है जिसका रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट डाईहाइड्रेट (CaSO₄·2H₂O) है। सीमेंट में यह सेटिंग टाइम को नियंत्रित करने (बढ़ाने) के लिए मिलाया जाता है। (ध्यान दें: विकल्प C में दिया गया CaSO₄·½H₂O प्लास्टर ऑफ पेरिस अर्थात् POP का सूत्र है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 123 (Q621 - Q625)
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Q621: कंक्रीट की तराई (Curing) के लिए ऊर्ध्वाधर सतहों (Vertical surfaces जैसे कॉलम और रिटेनिंग वॉल) पर निम्नलिखित में से कौन सी विधि सबसे उपयुक्त मानी जाती है?
- A) पोंडिंग विधि (Ponding Method)
- ✅ B) गीली बोरियां लपेटना (Wrapping with wet gunny bags) (सही उत्तर)
- C) पानी में डुबोकर रखना (Immersion)
- D) स्टीम क्यूरिंग (Steam curing)
💡 डिटेल Explanation:
ऊर्ध्वाधर (Vertical) सतहों पर पानी टिक नहीं पाता है, इसलिए पोंडिंग (क्यारियां बनाकर पानी भरना) विधि वहां काम नहीं करती। ऐसी सतहों को नम रखने के लिए जूट की बोरियों (Gunny bags) या हेसियन क्लॉथ को कॉलम या दीवार के चारों ओर लपेट दिया जाता है और उन पर समय-समय पर पानी छिड़का जाता है ताकि नमी बनी रहे।
ऊर्ध्वाधर (Vertical) सतहों पर पानी टिक नहीं पाता है, इसलिए पोंडिंग (क्यारियां बनाकर पानी भरना) विधि वहां काम नहीं करती। ऐसी सतहों को नम रखने के लिए जूट की बोरियों (Gunny bags) या हेसियन क्लॉथ को कॉलम या दीवार के चारों ओर लपेट दिया जाता है और उन पर समय-समय पर पानी छिड़का जाता है ताकि नमी बनी रहे।
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Q622: ईंट की चिनाई (Brick Masonry) में 'क्वीन क्लोजर' (Queen Closer) कैसे प्राप्त किया जाता है?
- A) ईंट को उसकी चौड़ाई के अनुदिश (Transversely) आधा काटकर
- ✅ B) ईंट को उसकी लंबाई के अनुदिश (Longitudinally) दो बराबर भागों में काटकर (सही उत्तर)
- C) ईंट के कोने को 45° पर तिरछा काटकर
- D) ईंट का एक-चौथाई हिस्सा काटकर
💡 डिटेल Explanation:
जब एक पूरी ईंट को उसकी लंबाई की दिशा में (बीचों-बीच से) काटा जाता है, तो प्राप्त होने वाले प्रत्येक आधे टुकड़े को क्वीन क्लोजर (Queen Closer) कहते हैं। इसकी लंबाई पूरी ईंट के बराबर होती है, लेकिन चौड़ाई आधी रह जाती है। इसका उपयोग दीवार के कोनों (Quoins) पर ऊर्ध्वाधर जोड़ों को टूटने (Bondिंग) से बचाने के लिए हेडर के तुरंत बाद किया जाता है।
जब एक पूरी ईंट को उसकी लंबाई की दिशा में (बीचों-बीच से) काटा जाता है, तो प्राप्त होने वाले प्रत्येक आधे टुकड़े को क्वीन क्लोजर (Queen Closer) कहते हैं। इसकी लंबाई पूरी ईंट के बराबर होती है, लेकिन चौड़ाई आधी रह जाती है। इसका उपयोग दीवार के कोनों (Quoins) पर ऊर्ध्वाधर जोड़ों को टूटने (Bondिंग) से बचाने के लिए हेडर के तुरंत बाद किया जाता है।
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Q623: भारतीय मानक (IS 269) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) में 'मैग्नीशिया' (Magnesia - MgO) की मात्रा अधिकतम कितने प्रतिशत तक सीमित होनी चाहिए?
- A) 1%
- B) 2%
- ✅ C) 6% (सही उत्तर)
- D) 10%
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में मैग्नीशिया (MgO) रंग और कठोरता प्रदान करता है। हालाँकि, यदि इसकी मात्रा 6% से अधिक हो जाती है, तो यह कंक्रीट को 'अस्वस्थ' (Unsound) बना देता है। मुक्त चूने की तरह, अत्यधिक मैग्नीशिया भी जलयोजन के बाद बहुत अधिक फैलता है, जिससे कंक्रीट में भयंकर दरारें पड़ सकती हैं। इसे ऑटोक्लेव (Autoclave) टेस्ट द्वारा जांचा जाता है।
सीमेंट में मैग्नीशिया (MgO) रंग और कठोरता प्रदान करता है। हालाँकि, यदि इसकी मात्रा 6% से अधिक हो जाती है, तो यह कंक्रीट को 'अस्वस्थ' (Unsound) बना देता है। मुक्त चूने की तरह, अत्यधिक मैग्नीशिया भी जलयोजन के बाद बहुत अधिक फैलता है, जिससे कंक्रीट में भयंकर दरारें पड़ सकती हैं। इसे ऑटोक्लेव (Autoclave) टेस्ट द्वारा जांचा जाता है।
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Q624: प्लाइवुड (Plywood) के निर्माण में, लकड़ी की पतली परतों (Veneers) को आपस में मजबूती से चिपकाने के लिए औद्योगिक स्तर पर किस 'गोंद' (Adhesive) का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है?
- ✅ A) फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड या यूरिया फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन (सही उत्तर)
- B) एनिमल ग्लू (Animal Glue)
- C) रबर आधारित गोंद (Rubber adhesive)
- D) सोडियम सिलिकेट (Sodium silicate)
💡 डिटेल Explanation:
प्लाइवुड की ताकत पूरी तरह से उसके एडहेसिव (गोंद) पर निर्भर करती है। आधुनिक प्लाइवुड निर्माण में सिंथेटिक रेजिन, विशेष रूप से फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड (Phenol Formaldehyde - PF) और यूरिया फॉर्मेल्डिहाइड (UF) का उपयोग किया जाता है। PF रेजिन से चिपकाया गया प्लाइवुड अत्यधिक जलरोधी (Boiling Water Proof - BWP) होता है और समुद्री कार्यों में उपयोग होता है।
प्लाइवुड की ताकत पूरी तरह से उसके एडहेसिव (गोंद) पर निर्भर करती है। आधुनिक प्लाइवुड निर्माण में सिंथेटिक रेजिन, विशेष रूप से फिनोल फॉर्मेल्डिहाइड (Phenol Formaldehyde - PF) और यूरिया फॉर्मेल्डिहाइड (UF) का उपयोग किया जाता है। PF रेजिन से चिपकाया गया प्लाइवुड अत्यधिक जलरोधी (Boiling Water Proof - BWP) होता है और समुद्री कार्यों में उपयोग होता है।
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Q625: 625 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले एग्रीगेट्स (गिट्टी) की 'घिसाव प्रतिरोधक क्षमता' (Wear and tear resistance) मापने के लिए कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) इम्पैक्ट टेस्ट (Impact Test)
- B) क्रशिंग टेस्ट (Crushing Test)
- ✅ C) लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट (Los Angeles Abrasion Test) (सही उत्तर)
- D) साउंडनेस टेस्ट (Soundness Test)
💡 डिटेल Explanation:
सड़क पर वाहनों के टायरों के कारण पत्थर घिसते हैं। इस घिसाव (Abrasion) के प्रति पत्थर की कठोरता (Hardness) मापने के लिए लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट किया जाता है। इस मशीन में गिट्टी को लोहे की गेंदों (Abrasive charges) के साथ एक ड्रम में घुमाया जाता है। अच्छे सड़क एग्रीगेट के लिए एब्रेशन वैल्यू 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
सड़क पर वाहनों के टायरों के कारण पत्थर घिसते हैं। इस घिसाव (Abrasion) के प्रति पत्थर की कठोरता (Hardness) मापने के लिए लॉस एंजिल्स एब्रेशन टेस्ट किया जाता है। इस मशीन में गिट्टी को लोहे की गेंदों (Abrasive charges) के साथ एक ड्रम में घुमाया जाता है। अच्छे सड़क एग्रीगेट के लिए एब्रेशन वैल्यू 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 124 (Q626 - Q630)
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Q626: कंक्रीट निर्माण में, सीमेंट और पानी को मिलाने पर उनके बीच होने वाली 'ऊष्माक्षेपी' (Exothermic) रासायनिक प्रतिक्रिया को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
- A) कैल्सिनेशन (Calcination)
- ✅ B) जलयोजन या हाइड्रेशन (Hydration) (सही उत्तर)
- C) स्लेकिंग (Slaking)
- D) हाइड्रोलिसिस (Hydrolysis)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट एक जलीय (Hydraulic) बाइंडर है। जब सीमेंट में पानी मिलाया जाता है, तो इसके बोग्स यौगिक (C3S, C2S आदि) पानी के साथ मिलकर एक जटिल रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे एक मजबूत जेल (C-S-H Gel) बनता है और भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है। इस पूरी प्रक्रिया को हाइड्रेशन (Hydration) कहा जाता है।
सीमेंट एक जलीय (Hydraulic) बाइंडर है। जब सीमेंट में पानी मिलाया जाता है, तो इसके बोग्स यौगिक (C3S, C2S आदि) पानी के साथ मिलकर एक जटिल रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे एक मजबूत जेल (C-S-H Gel) बनता है और भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है। इस पूरी प्रक्रिया को हाइड्रेशन (Hydration) कहा जाता है।
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Q627: ऑयल पेंट में 'ड्रायर' (Drier) की मात्रा का उपयोग बहुत सीमित (प्रतिबंधित) क्यों रखा जाता है (सामान्यतः 8-10% से कम)?
- ✅ A) क्योंकि अधिक ड्रायर पेंट की परत को कठोर बनाकर छिलने (Flaking) और खराब होने का कारण बनता है (सही उत्तर)
- B) क्योंकि यह पेंट का रंग पूरी तरह बदल देता है
- C) क्योंकि यह पेंट को जमने से रोकता है
- D) क्योंकि ड्रायर बहुत महँगे होते हैं
💡 डिटेल Explanation:
ड्रायर (जैसे लिथार्ज या रेड लेड) पेंट में ऑक्सीकरण को तेज करके उसे जल्दी सुखाते हैं। लेकिन यदि इसे 8% से अधिक मिला दिया जाए, तो पेंट फिल्म अत्यधिक कठोर और भंगुर (Brittle) हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पेंट की लोच (Elasticity) खत्म हो जाती है और वह पपड़ी बनकर झड़ने (Flaking) लगता है।
ड्रायर (जैसे लिथार्ज या रेड लेड) पेंट में ऑक्सीकरण को तेज करके उसे जल्दी सुखाते हैं। लेकिन यदि इसे 8% से अधिक मिला दिया जाए, तो पेंट फिल्म अत्यधिक कठोर और भंगुर (Brittle) हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप पेंट की लोच (Elasticity) खत्म हो जाती है और वह पपड़ी बनकर झड़ने (Flaking) लगता है।
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Q628: सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले 'बिटुमेन' (Bitumen) की कठोरता (Hardness) या ग्रेड निर्धारित करने के लिए मुख्य रूप से कौन सा परीक्षण किया जाता है?
- A) फ्लैश और फायर पॉइंट टेस्ट
- B) डक्टिलिटी टेस्ट (Ductility test)
- ✅ C) पेनेट्रेशन टेस्ट (Penetration Test) (सही उत्तर)
- D) विस्कोसिटी टेस्ट (Viscosity test)
💡 डिटेल Explanation:
बिटुमेन की कठोरता मापने के लिए पेनेट्रेशन टेस्ट (Penetration Test) किया जाता है। इसमें एक मानक सुई (100 ग्राम भार के साथ) को 25°C तापमान पर 5 सेकंड के लिए बिटुमेन के नमूने में धंसने दिया जाता है। जितना सुई अंदर जाएगी (0.1 mm की इकाइयों में मापा जाता है), बिटुमेन उतना ही नरम होगा। इसी के आधार पर बिटुमेन को 80/100 या 60/70 जैसे ग्रेड दिए जाते हैं।
बिटुमेन की कठोरता मापने के लिए पेनेट्रेशन टेस्ट (Penetration Test) किया जाता है। इसमें एक मानक सुई (100 ग्राम भार के साथ) को 25°C तापमान पर 5 सेकंड के लिए बिटुमेन के नमूने में धंसने दिया जाता है। जितना सुई अंदर जाएगी (0.1 mm की इकाइयों में मापा जाता है), बिटुमेन उतना ही नरम होगा। इसी के आधार पर बिटुमेन को 80/100 या 60/70 जैसे ग्रेड दिए जाते हैं।
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Q629: ईंटों को बड़े पैमाने पर पकाने के लिए उपयोग किया जाने वाला 'हॉफमैन का भट्ठा' (Hoffman's Kiln) किस प्रकार का भट्ठा है?
- ✅ A) यह एक 'निरंतर' (Continuous) भट्ठा है (सही उत्तर)
- B) यह एक 'आंतरायिक' (Intermittent) भट्ठा है
- C) यह केवल कच्चे कोयले से चलता है
- D) यह एक अस्थाई (Temporary) भट्ठा है जिसे क्लैंप (Clamp) कहते हैं
💡 डिटेल Explanation:
बुल ट्रेंच क्लिन (Bull's Trench Kiln) की तरह हॉफमैन का भट्ठा (Hoffman's Kiln) भी एक निरंतर (Continuous) भट्ठा है। इसका अर्थ है कि इसमें एक ही समय में ईंटें लोड करने, पकाने, ठंडी करने और अनलोड करने की प्रक्रिया अलग-अलग चैंबरों में बिना रुके चलती रहती है। हॉफमैन का भट्ठा एक स्थायी वृत्ताकार (Circular) संरचना होती है।
बुल ट्रेंच क्लिन (Bull's Trench Kiln) की तरह हॉफमैन का भट्ठा (Hoffman's Kiln) भी एक निरंतर (Continuous) भट्ठा है। इसका अर्थ है कि इसमें एक ही समय में ईंटें लोड करने, पकाने, ठंडी करने और अनलोड करने की प्रक्रिया अलग-अलग चैंबरों में बिना रुके चलती रहती है। हॉफमैन का भट्ठा एक स्थायी वृत्ताकार (Circular) संरचना होती है।
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Q630: 630 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: कंक्रीट में 'सुपर-प्लास्टिसाइज़र' (Super-plasticizers) का उपयोग करके कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) को समान रखते हुए पानी की मात्रा (Water demand) को लगभग कितने प्रतिशत तक कम किया जा सकता है?
- A) 2% से 5%
- B) 5% से 10%
- ✅ C) 20% से 30% (सही उत्तर)
- D) 40% से 50%
💡 डिटेल Explanation:
प्लास्टिसाइज़र पानी की आवश्यकता को केवल 10% तक कम कर सकते हैं। लेकिन सुपर-प्लास्टिसाइज़र (Super-plasticizers) उच्च श्रेणी के रसायन हैं जो सीमेंट के कणों को बहुत प्रभावी ढंग से फैलाते हैं। इनके उपयोग से पानी की मांग में 20% से 30% तक की भारी कमी की जा सकती है, जिससे बहुत कम w/c अनुपात पर भी अत्यंत उच्च सामर्थ्य (High strength) वाली सुकार्य कंक्रीट प्राप्त होती है।
प्लास्टिसाइज़र पानी की आवश्यकता को केवल 10% तक कम कर सकते हैं। लेकिन सुपर-प्लास्टिसाइज़र (Super-plasticizers) उच्च श्रेणी के रसायन हैं जो सीमेंट के कणों को बहुत प्रभावी ढंग से फैलाते हैं। इनके उपयोग से पानी की मांग में 20% से 30% तक की भारी कमी की जा सकती है, जिससे बहुत कम w/c अनुपात पर भी अत्यंत उच्च सामर्थ्य (High strength) वाली सुकार्य कंक्रीट प्राप्त होती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 125 (Q631 - Q635)
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Q631: ईंट निर्माण की प्रक्रिया में मिट्टी को गूंथने (Tempering of clay) के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- A) हॉफमैन भट्ठा (Hoffman's Kiln)
- B) पैलेट बोर्ड (Pallet Board)
- ✅ C) पग मिल (Pug Mill) (सही उत्तर)
- D) बुल ट्रेंच (Bull's Trench)
💡 डिटेल Explanation:
ईंट बनाने के लिए मिट्टी को तैयार करने की अंतिम प्रक्रिया को 'टेम्परिंग' (Tempering) कहते हैं। इसमें मिट्टी में सही मात्रा में पानी मिलाकर उसे एक समान और सुघट्य (Plastic) बनाया जाता है। बड़े पैमाने पर ईंटों के निर्माण के लिए मिट्टी को गूंथने का यह कार्य पग मिल (Pug Mill) नामक मशीन में किया जाता है।
ईंट बनाने के लिए मिट्टी को तैयार करने की अंतिम प्रक्रिया को 'टेम्परिंग' (Tempering) कहते हैं। इसमें मिट्टी में सही मात्रा में पानी मिलाकर उसे एक समान और सुघट्य (Plastic) बनाया जाता है। बड़े पैमाने पर ईंटों के निर्माण के लिए मिट्टी को गूंथने का यह कार्य पग मिल (Pug Mill) नामक मशीन में किया जाता है।
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Q632: कंक्रीट की 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) का परीक्षण करने के लिए उपयोग किए जाने वाले मानक कंक्रीट क्यूब (Standard Concrete Cube) का आकार क्या होता है?
- A) 100 mm × 100 mm × 100 mm
- ✅ B) 150 mm × 150 mm × 150 mm (सही उत्तर)
- C) 70.6 mm × 70.6 mm × 70.6 mm
- D) 200 mm × 200 mm × 200 mm
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की ताकत (Grade) की जांच करने के लिए भारतीय मानकों (IS 456) के अनुसार 150 mm (15 cm) भुजा वाले क्यूब का उपयोग किया जाता है। (ध्यान दें: 70.6 mm का क्यूब केवल 'सीमेंट मोर्टार' की ताकत मापने के लिए उपयोग किया जाता है, कंक्रीट के लिए नहीं)।
कंक्रीट की ताकत (Grade) की जांच करने के लिए भारतीय मानकों (IS 456) के अनुसार 150 mm (15 cm) भुजा वाले क्यूब का उपयोग किया जाता है। (ध्यान दें: 70.6 mm का क्यूब केवल 'सीमेंट मोर्टार' की ताकत मापने के लिए उपयोग किया जाता है, कंक्रीट के लिए नहीं)।
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Q633: किसी भी जीवित वृक्ष (Tree) की 'आयु' (Age) का सटीक अनुमान लगाने के लिए उसके तने (Trunk) में क्या गिना जाता है?
- A) छाल की मोटाई (Thickness of bark)
- B) मज्जा का व्यास (Diameter of pith)
- ✅ C) वार्षिक वलयों की संख्या (Number of annual rings) (सही उत्तर)
- D) पेड़ की कुल ऊंचाई (Height of tree)
💡 डिटेल Explanation:
बहिर्जात (Exogenous) पेड़ बाहर की तरफ बढ़ते हुए हर साल लकड़ी की एक नई परत बनाते हैं, जिसे क्रॉस-सेक्शन काटने पर छल्लों (Rings) के रूप में देखा जा सकता है। इन्हें वार्षिक वलय (Annual Rings) कहते हैं। एक वलय का मतलब पेड़ की एक साल की वृद्धि होता है, इसलिए इन वलयों को गिनकर पेड़ की सटीक उम्र का पता लगाया जाता है।
बहिर्जात (Exogenous) पेड़ बाहर की तरफ बढ़ते हुए हर साल लकड़ी की एक नई परत बनाते हैं, जिसे क्रॉस-सेक्शन काटने पर छल्लों (Rings) के रूप में देखा जा सकता है। इन्हें वार्षिक वलय (Annual Rings) कहते हैं। एक वलय का मतलब पेड़ की एक साल की वृद्धि होता है, इसलिए इन वलयों को गिनकर पेड़ की सटीक उम्र का पता लगाया जाता है।
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Q634: इंजीनियरिंग निर्माण कार्यों के लिए 'अच्छे भवन निर्माण पत्थर' (Good Building Stone) की न्यूनतम 'क्रशिंग स्ट्रेंथ' (Crushing Strength) किससे कम नहीं होनी चाहिए?
- A) 10 N/mm²
- B) 50 N/mm²
- ✅ C) 100 N/mm² (सही उत्तर)
- D) 200 N/mm²
💡 डिटेल Explanation:
भारी इंजीनियरिंग निर्माण कार्यों (जैसे पुलों के पियर्स, बड़े बांध, और मजबूत दीवारें) के लिए उपयोग किए जाने वाले एक अच्छे पत्थर की क्रशिंग स्ट्रेंथ या संपीडन सामर्थ्य 100 N/mm² (या 1000 kg/cm²) से अधिक होनी चाहिए। ग्रेनाइट और क्वार्टजाइट जैसे पत्थरों की स्ट्रेंथ इससे भी काफी अधिक होती है।
भारी इंजीनियरिंग निर्माण कार्यों (जैसे पुलों के पियर्स, बड़े बांध, और मजबूत दीवारें) के लिए उपयोग किए जाने वाले एक अच्छे पत्थर की क्रशिंग स्ट्रेंथ या संपीडन सामर्थ्य 100 N/mm² (या 1000 kg/cm²) से अधिक होनी चाहिए। ग्रेनाइट और क्वार्टजाइट जैसे पत्थरों की स्ट्रेंथ इससे भी काफी अधिक होती है।
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Q635: 635 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: लकड़ी के सतह को चमकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'वार्निश' (Varnish) का मुख्य घटक क्या होता है?
- A) व्हाइट लेड (White lead)
- ✅ B) रेजिन (Resin) (सही उत्तर)
- C) डिस्टेंपर (Distemper)
- D) एल्युमिनियम पाउडर (Aluminium powder)
💡 डिटेल Explanation:
पेंट के विपरीत, वार्निश में कोई पिगमेंट (रंग) या अपारदर्शी बेस नहीं होता। यह एक पारदर्शी घोल होता है जिसे मुख्य रूप से रेजिन (Resinous substances जैसे कोपल, शेलैक, मैस्टिक) को किसी विलायक (अल्कोहल या तेल) में घोलकर बनाया जाता है। सूखने पर यह लकड़ी पर एक कठोर, पारदर्शी और चमकदार फिल्म बनाता है।
पेंट के विपरीत, वार्निश में कोई पिगमेंट (रंग) या अपारदर्शी बेस नहीं होता। यह एक पारदर्शी घोल होता है जिसे मुख्य रूप से रेजिन (Resinous substances जैसे कोपल, शेलैक, मैस्टिक) को किसी विलायक (अल्कोहल या तेल) में घोलकर बनाया जाता है। सूखने पर यह लकड़ी पर एक कठोर, पारदर्शी और चमकदार फिल्म बनाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 126 (Q636 - Q640)
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Q636: सामान्यतः कंक्रीट की 'तनन सामर्थ्य' (Tensile Strength) उसकी 'संपीडन सामर्थ्य' (Compressive Strength) का लगभग कितने प्रतिशत होती है?
- ✅ A) 10% से 15% (सही उत्तर)
- B) 25% से 30%
- C) 40% से 50%
- D) 70% से 80%
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट संपीडन (दबाव) सहने में बहुत मजबूत होती है, लेकिन खिंचाव (Tension) में यह बेहद कमजोर होती है। कंक्रीट की तनन सामर्थ्य सामान्यतः उसकी संपीडन सामर्थ्य का केवल 10% से 15% (औसतन 1/10वां हिस्सा) ही होती है। यही कारण है कि कंक्रीट में खिंचाव वाले क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए स्टील (RCC) का उपयोग किया जाता है।
कंक्रीट संपीडन (दबाव) सहने में बहुत मजबूत होती है, लेकिन खिंचाव (Tension) में यह बेहद कमजोर होती है। कंक्रीट की तनन सामर्थ्य सामान्यतः उसकी संपीडन सामर्थ्य का केवल 10% से 15% (औसतन 1/10वां हिस्सा) ही होती है। यही कारण है कि कंक्रीट में खिंचाव वाले क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए स्टील (RCC) का उपयोग किया जाता है।
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Q637: छतों (Roofs) और इमारतों के प्लिंथ स्तर पर पानी के रिसाव को रोकने के लिए उपयोग किया जाने वाला 'बिटुमेन फेल्ट' (Bitumen Felt) मूल रूप से क्या है?
- A) एक प्रकार का तरल पेंट
- ✅ B) एक लचीली वॉटरप्रूफिंग मेम्ब्रेन (शीश या रोल) (सही उत्तर)
- C) एक प्रकार का कंक्रीट एडमिक्सचर
- D) एक प्रकार की ईंट
💡 डिटेल Explanation:
बिटुमेन फेल्ट (Bitumen Felt) फाइबर, जूट या सिंथेटिक बेस से बनी एक चादर या रोल (Membrane) होती है, जिसे बिटुमेन के साथ कोटेड किया जाता है। इसे गर्म करके या चिपका कर छतों (Roofing) और बेसमेंट में सीलन-रोधी परत (Damp Proof Course - DPC) के रूप में बिछाया जाता है ताकि पानी अंदर न रिस सके।
बिटुमेन फेल्ट (Bitumen Felt) फाइबर, जूट या सिंथेटिक बेस से बनी एक चादर या रोल (Membrane) होती है, जिसे बिटुमेन के साथ कोटेड किया जाता है। इसे गर्म करके या चिपका कर छतों (Roofing) और बेसमेंट में सीलन-रोधी परत (Damp Proof Course - DPC) के रूप में बिछाया जाता है ताकि पानी अंदर न रिस सके।
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Q638: सीमेंट की प्रयोगशाला जांच के दौरान 'विकाट उपकरण' (Vicat Apparatus) का उपयोग निम्नलिखित में से क्या ज्ञात करने के लिए किया जाता है?
- A) केवल प्रारंभिक जमाव काल (Initial Setting Time)
- B) केवल अंतिम जमाव काल (Final Setting Time)
- C) केवल मानक सघनता (Standard Consistency)
- ✅ D) उपरोक्त सभी (All of the above) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
विकाट उपकरण सीमेंट परीक्षण का सबसे बहुमुखी (Versatile) उपकरण है। इसमें प्लंजर (Plunger) का उपयोग करके 'मानक सघनता' निकाली जाती है। 1 mm वर्गाकार सुई का उपयोग 'प्रारंभिक जमाव काल' के लिए, और 5 mm व्यास की कॉलर वाली सुई का उपयोग 'अंतिम जमाव काल' ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
विकाट उपकरण सीमेंट परीक्षण का सबसे बहुमुखी (Versatile) उपकरण है। इसमें प्लंजर (Plunger) का उपयोग करके 'मानक सघनता' निकाली जाती है। 1 mm वर्गाकार सुई का उपयोग 'प्रारंभिक जमाव काल' के लिए, और 5 mm व्यास की कॉलर वाली सुई का उपयोग 'अंतिम जमाव काल' ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
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Q639: ताजी कटी हुई लकड़ी (Timber) को निर्माण कार्यों में उपयोग करने से पहले उसकी 'सीजनिंग' (Seasoning) करने का सबसे प्राथमिक उद्देश्य क्या होता है?
- A) लकड़ी का वजन बढ़ाना
- ✅ B) लकड़ी के भीतर मौजूद नमी (Moisture/Sap) को एक सुरक्षित स्तर तक सुखाना (सही उत्तर)
- C) लकड़ी के रंग को गहरा करना
- D) लकड़ी को आसानी से काटने योग्य बनाना
💡 डिटेल Explanation:
ताजी कटी लकड़ी में उसके वजन का 50% से 100% तक पानी या रस (Sap) हो सकता है। यदि इसे बिना सुखाए इस्तेमाल किया गया, तो यह सिकुड़ कर टेढ़ी हो जाएगी और इसमें आसानी से फफूंदी लग जाएगी। सीजनिंग (Seasoning) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा लकड़ी को धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से सुखाकर उसकी नमी को 12-15% तक लाया जाता है।
ताजी कटी लकड़ी में उसके वजन का 50% से 100% तक पानी या रस (Sap) हो सकता है। यदि इसे बिना सुखाए इस्तेमाल किया गया, तो यह सिकुड़ कर टेढ़ी हो जाएगी और इसमें आसानी से फफूंदी लग जाएगी। सीजनिंग (Seasoning) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा लकड़ी को धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से सुखाकर उसकी नमी को 12-15% तक लाया जाता है।
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Q640: 640 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: कंक्रीट संरचनाओं में सुदृढीकरण (Reinforcement) के रूप में केवल 'स्टील' (Steel) का ही उपयोग सबसे अधिक क्यों किया जाता है, जबकि अन्य धातुएं भी उपलब्ध हैं?
- A) क्योंकि स्टील कंक्रीट के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता
- B) क्योंकि स्टील सबसे सस्ती धातु है
- ✅ C) क्योंकि कंक्रीट और स्टील का 'तापीय विस्तार गुणांक' (Coefficient of Thermal Expansion) लगभग एक समान होता है (सही उत्तर)
- D) क्योंकि स्टील का घनत्व कंक्रीट के बराबर होता है
💡 डिटेल Explanation:
यह RCC का सबसे बुनियादी सिद्धांत है। स्टील और कंक्रीट दोनों का तापीय विस्तार गुणांक (Coefficient of Thermal Expansion - α) लगभग 12 × 10⁻⁶ /°C होता है। इसका मतलब है कि गर्मी या सर्दी के कारण दोनों एक ही दर से फैलते और सिकुड़ते हैं। यदि ये अलग-अलग होते, तो तापमान बदलने पर इनके बीच का जोड़ (Bond) टूट जाता और कंक्रीट में दरारें आ जातीं।
यह RCC का सबसे बुनियादी सिद्धांत है। स्टील और कंक्रीट दोनों का तापीय विस्तार गुणांक (Coefficient of Thermal Expansion - α) लगभग 12 × 10⁻⁶ /°C होता है। इसका मतलब है कि गर्मी या सर्दी के कारण दोनों एक ही दर से फैलते और सिकुड़ते हैं। यदि ये अलग-अलग होते, तो तापमान बदलने पर इनके बीच का जोड़ (Bond) टूट जाता और कंक्रीट में दरारें आ जातीं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 127 (Q641 - Q645)
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Q641: सीमेंट में 'निर्दोषता' (Soundness) का परीक्षण करने के लिए 'ऑटोक्लेव परीक्षण' (Autoclave Test) क्यों किया जाता है?
- A) केवल मुक्त चूने (Free Lime) के कारण होने वाले फैलाव को मापने के लिए
- B) केवल मैग्नीशिया (Magnesia) के कारण होने वाले फैलाव को मापने के लिए
- ✅ C) चूना और मैग्नीशिया दोनों के कारण होने वाले फैलाव को मापने के लिए (सही उत्तर)
- D) सीमेंट के प्रारंभिक जमाव काल को मापने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में साउंडनेस (आयतन में स्थिरता) दो खनिजों की अधिकता के कारण कम होती है: मुक्त चूना और मैग्नीशिया। 'ली-चेटेलियर' परीक्षण केवल मुक्त चूने के कारण होने वाले विस्तार को मापता है, जबकि 'ऑटोक्लेव' (Autoclave) परीक्षण चूना और मैग्नीशिया दोनों के कारण होने वाले विस्तार (Expansion) के प्रति संवेदनशील होता है।
सीमेंट में साउंडनेस (आयतन में स्थिरता) दो खनिजों की अधिकता के कारण कम होती है: मुक्त चूना और मैग्नीशिया। 'ली-चेटेलियर' परीक्षण केवल मुक्त चूने के कारण होने वाले विस्तार को मापता है, जबकि 'ऑटोक्लेव' (Autoclave) परीक्षण चूना और मैग्नीशिया दोनों के कारण होने वाले विस्तार (Expansion) के प्रति संवेदनशील होता है।
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Q642: इमारती लकड़ी (Timber) में 'बर्ल' (Burl / Excrescence) नामक दोष किस कारण उत्पन्न होता है?
- A) फफूंदी के हमले के कारण
- B) दीमक के कारण
- ✅ C) पेड़ के तने पर किसी चोट (Injury) या झटके के कारण असामान्य वृद्धि से (सही उत्तर)
- D) लकड़ी के अनुचित तरीके से सूखने के कारण
💡 डिटेल Explanation:
जब बढ़ते हुए पेड़ के तने (Trunk) को कोई गहरी चोट लगती है या झटका लगता है, तो पेड़ उस घाव को भरने के लिए वहां असामान्य रूप से नई लकड़ी उगाने लगता है। इसके कारण पेड़ के तने पर एक बड़ी गांठ या उभार बन जाता है, जिसे 'बर्ल' (Burl) या Excrescence कहा जाता है।
जब बढ़ते हुए पेड़ के तने (Trunk) को कोई गहरी चोट लगती है या झटका लगता है, तो पेड़ उस घाव को भरने के लिए वहां असामान्य रूप से नई लकड़ी उगाने लगता है। इसके कारण पेड़ के तने पर एक बड़ी गांठ या उभार बन जाता है, जिसे 'बर्ल' (Burl) या Excrescence कहा जाता है।
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Q643: ईंट की चिनाई में 'बुलनोज़ ईंट' (Bullnose Brick) का उपयोग मुख्य रूप से किस लिए किया जाता है?
- A) दीवार की मोटाई बढ़ाने के लिए
- ✅ B) दीवार के तीखे कोनों (Sharp Corners) को गोल (Round off) करने के लिए (सही उत्तर)
- C) सजावटी मेहराब (Arches) बनाने के लिए
- D) नींव को मजबूत करने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
बुलनोज़ ईंट (Bullnose Brick) वह विशेष ईंट है जिसका एक या अधिक किनारे (Edges) तीखे (Sharp) होने के बजाय गोल (Rounded) बनाए जाते हैं। इसका उपयोग आमतौर पर दीवारों के कोनों, खिड़की के फ्रेम (Sills), और सीढ़ियों के किनारों पर किया जाता है ताकि तीखे कोनों से चोट न लगे और दीवार सुंदर दिखे।
बुलनोज़ ईंट (Bullnose Brick) वह विशेष ईंट है जिसका एक या अधिक किनारे (Edges) तीखे (Sharp) होने के बजाय गोल (Rounded) बनाए जाते हैं। इसका उपयोग आमतौर पर दीवारों के कोनों, खिड़की के फ्रेम (Sills), और सीढ़ियों के किनारों पर किया जाता है ताकि तीखे कोनों से चोट न लगे और दीवार सुंदर दिखे।
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Q644: डिस्टेंपर (Distemper) और अन्य पानी-आधारित पेंट में 'वाहन' (Vehicle) के रूप में पानी का उपयोग होता है, लेकिन 'बाइंडर' (Binder) के रूप में किसे मिलाया जाता है?
- A) अलसी का तेल (Linseed Oil)
- B) तारपीन (Turpentine)
- ✅ C) गोंद (Size / Glue) या कैसिइन (सही उत्तर)
- D) वार्निश (Varnish)
💡 डिटेल Explanation:
डिस्टेंपर में पानी का उपयोग उसे तरल बनाने (Solvent) के लिए किया जाता है। लेकिन चॉक पाउडर (बेस) और पिगमेंट को दीवार की सतह से चिपकाए रखने के लिए एक बाइंडर की आवश्यकता होती है। इसके लिए गोंद (Glue / Size) या दूध के प्रोटीन से बने कैसिइन (Casein) का उपयोग किया जाता है।
डिस्टेंपर में पानी का उपयोग उसे तरल बनाने (Solvent) के लिए किया जाता है। लेकिन चॉक पाउडर (बेस) और पिगमेंट को दीवार की सतह से चिपकाए रखने के लिए एक बाइंडर की आवश्यकता होती है। इसके लिए गोंद (Glue / Size) या दूध के प्रोटीन से बने कैसिइन (Casein) का उपयोग किया जाता है।
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Q645: सड़क के फुटपाथों (Pavements) में उपयोग किए जाने वाले पत्थर की 'कठोरता' (Hardness / Resistance to wear) मापने के लिए कौन सी मशीन उपयोग की जाती है?
- A) इम्पैक्ट टेस्टिंग मशीन (Impact Testing Machine)
- ✅ B) डोरी की परीक्षण मशीन (Dorry's Testing Machine) (सही उत्तर)
- C) डेवाल की मशीन (Deval's Machine)
- D) लॉस एंजिल्स मशीन (Los Angeles Machine)
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर की सतह की कठोरता (घिसाव के प्रति प्रतिरोध) मापने के लिए डोरी की परीक्षण मशीन (Dorry's Testing Machine) का उपयोग किया जाता है। इसमें पत्थर के बेलनाकार नमूने को एक घूमती हुई स्टील की डिस्क के विरुद्ध रगड़ा जाता है, जिसमें बालू का उपयोग अपघर्षक (Abrasive) के रूप में किया जाता है। अच्छी सड़क सामग्री के लिए कठोरता गुणांक 17 से अधिक होना चाहिए।
पत्थर की सतह की कठोरता (घिसाव के प्रति प्रतिरोध) मापने के लिए डोरी की परीक्षण मशीन (Dorry's Testing Machine) का उपयोग किया जाता है। इसमें पत्थर के बेलनाकार नमूने को एक घूमती हुई स्टील की डिस्क के विरुद्ध रगड़ा जाता है, जिसमें बालू का उपयोग अपघर्षक (Abrasive) के रूप में किया जाता है। अच्छी सड़क सामग्री के लिए कठोरता गुणांक 17 से अधिक होना चाहिए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 128 (Q646 - Q650)
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Q646: IS 456 के अनुसार, प्रबलित कंक्रीट (RCC) कार्यों में 'मोटी गिट्टी' (Coarse Aggregate) का अधिकतम आकार संरचनात्मक सदस्य (Structural member) की न्यूनतम मोटाई के कितने हिस्से से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 1/2
- B) 1/3
- ✅ C) 1/4 (एक-चौथाई) (सही उत्तर)
- D) 1/5
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट को सरियों (Reinforcements) के बीच से आसानी से बहने और अच्छी तरह से कॉम्पैक्ट होने के लिए गिट्टी का आकार सीमित रखा जाता है। IS 456 के अनुसार, एग्रीगेट का अधिकतम आकार सदस्य की न्यूनतम मोटाई के एक-चौथाई (1/4th) से अधिक नहीं होना चाहिए। सामान्य RCC कार्यों के लिए 20 mm आकार की गिट्टी का उपयोग किया जाता है।
कंक्रीट को सरियों (Reinforcements) के बीच से आसानी से बहने और अच्छी तरह से कॉम्पैक्ट होने के लिए गिट्टी का आकार सीमित रखा जाता है। IS 456 के अनुसार, एग्रीगेट का अधिकतम आकार सदस्य की न्यूनतम मोटाई के एक-चौथाई (1/4th) से अधिक नहीं होना चाहिए। सामान्य RCC कार्यों के लिए 20 mm आकार की गिट्टी का उपयोग किया जाता है।
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Q647: सीमेंट के जलयोजन (Hydration) के दौरान, निम्नलिखित में से कौन सा यौगिक पानी के साथ सबसे पहले प्रतिक्रिया करता है और त्वरित जमाव (Flash Set) का कारण बन सकता है?
- ✅ A) ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) (सही उत्तर)
- B) ट्राईकैल्शियम सिलिकेट (C3S)
- C) डाईकैल्शियम सिलिकेट (C2S)
- D) टेट्राकैल्शियम एल्युमिनोफेराइट (C4AF)
💡 डिटेल Explanation:
बोग्स कंपाउंड्स में से ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) पानी के प्रति सबसे अधिक प्रतिक्रियाशील (Reactive) होता है। यह 24 घंटे के भीतर भारी मात्रा में ऊष्मा (Heat of hydration) छोड़ता है और यदि सीमेंट में जिप्सम न मिलाया जाए, तो यह कंक्रीट को मिलाते ही तुरंत जमा (Flash Set) सकता है।
बोग्स कंपाउंड्स में से ट्राईकैल्शियम एल्युमिनेट (C3A) पानी के प्रति सबसे अधिक प्रतिक्रियाशील (Reactive) होता है। यह 24 घंटे के भीतर भारी मात्रा में ऊष्मा (Heat of hydration) छोड़ता है और यदि सीमेंट में जिप्सम न मिलाया जाए, तो यह कंक्रीट को मिलाते ही तुरंत जमा (Flash Set) सकता है।
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Q648: फैट लाइम (Fat Lime) से बने चूने के मोर्टार में 'सुर्खी' (Surkhi - पकी हुई ईंट का बारीक चूर्ण) मिलाने का सबसे मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A) मोर्टार को सफेद रंग देना
- ✅ B) मोर्टार को 'जल-गुण' (Hydraulicity) प्रदान करना ताकि वह सीलन में या पानी के भीतर भी जम सके (सही उत्तर)
- C) मोर्टार को बहुत जल्दी सुखाना
- D) मोर्टार की लागत को कम करना
💡 डिटेल Explanation:
फैट लाइम केवल हवा (कार्बन डाइऑक्साइड) की उपस्थिति में जमता है और पानी के अंदर घुल जाता है। सुर्खी (Surkhi) एक उत्कृष्ट पोज़ोलानिक पदार्थ है। जब इसे फैट लाइम में बालू के स्थान पर मिलाया जाता है, तो यह चूने को जलीय गुण (Hydraulicity) प्रदान करता है, जिससे मोर्टार पानी के नीचे (Underwater) भी बहुत मजबूती से जम सकता है।
फैट लाइम केवल हवा (कार्बन डाइऑक्साइड) की उपस्थिति में जमता है और पानी के अंदर घुल जाता है। सुर्खी (Surkhi) एक उत्कृष्ट पोज़ोलानिक पदार्थ है। जब इसे फैट लाइम में बालू के स्थान पर मिलाया जाता है, तो यह चूने को जलीय गुण (Hydraulicity) प्रदान करता है, जिससे मोर्टार पानी के नीचे (Underwater) भी बहुत मजबूती से जम सकता है।
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Q649: लकड़ी में वे दरारें जो पेड़ के केंद्र (Pith) से शुरू होकर बाहर (Sapwood) की ओर जाती हैं और जो मध्य में चौड़ी तथा बाहर की ओर संकरी (Narrow) होती हैं, क्या कहलाती हैं?
- A) स्टार शेक्स (Star Shakes)
- ✅ B) हार्ट शेक्स (Heart Shakes) (सही उत्तर)
- C) कप शेक्स (Cup Shakes)
- D) रिंग शेक्स (Ring Shakes)
💡 डिटेल Explanation:
हार्ट शेक्स (Heart Shakes) लकड़ी का वह दोष है जिसमें दरारें सबसे पुराने हिस्से (मज्जा या Pith) से शुरू होती हैं। चूँकि अंदर की लकड़ी सबसे पुरानी होती है, इसलिए वह अधिक सूखकर सिकुड़ती है, जिससे दरारें केंद्र में चौड़ी और बाहर की तरफ पतली होती हैं। (इसके ठीक विपरीत दरारों को 'स्टार शेक' कहा जाता है)।
हार्ट शेक्स (Heart Shakes) लकड़ी का वह दोष है जिसमें दरारें सबसे पुराने हिस्से (मज्जा या Pith) से शुरू होती हैं। चूँकि अंदर की लकड़ी सबसे पुरानी होती है, इसलिए वह अधिक सूखकर सिकुड़ती है, जिससे दरारें केंद्र में चौड़ी और बाहर की तरफ पतली होती हैं। (इसके ठीक विपरीत दरारों को 'स्टार शेक' कहा जाता है)।
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Q650: 🌟 650 MCQ का शानदार महा-पड़ाव! 🌟 प्रश्न: कंक्रीट मिक्स डिज़ाइन (IS 10262) में 'लक्ष्य माध्य सामर्थ्य' (Target Mean Strength - fcm) की गणना का सूत्र क्या है? (जहाँ fck अभिलाक्षणिक सामर्थ्य और S मानक विचलन है)
- A) fcm = fck + 1.00 S
- ✅ B) fcm = fck + 1.65 S (सही उत्तर)
- C) fcm = fck + 2.00 S
- D) fcm = fck - 1.65 S
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट बनाते समय हम हमेशा उसकी अभिलाक्षणिक सामर्थ्य (fck) से थोड़ी अधिक ताकत का लक्ष्य लेकर चलते हैं ताकि गुणवत्ता में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव होने पर भी कंक्रीट फेल न हो। इसे 'टारगेट मीन स्ट्रेंथ' (fcm) कहते हैं। सांख्यिकीय नियंत्रण (Statistical quality control) के अनुसार, इसका सूत्र fcm = fck + 1.65 S होता है।
कंक्रीट बनाते समय हम हमेशा उसकी अभिलाक्षणिक सामर्थ्य (fck) से थोड़ी अधिक ताकत का लक्ष्य लेकर चलते हैं ताकि गुणवत्ता में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव होने पर भी कंक्रीट फेल न हो। इसे 'टारगेट मीन स्ट्रेंथ' (fcm) कहते हैं। सांख्यिकीय नियंत्रण (Statistical quality control) के अनुसार, इसका सूत्र fcm = fck + 1.65 S होता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 129 (Q651 - Q655)
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Q651: भवन निर्माण में उपयोग होने वाले 'सीमेंट मोर्टार' (मसाले) में सीमेंट के साथ बालू (Sand) मिलाने का सबसे मुख्य तकनीकी उद्देश्य क्या है?
- A) मोर्टार की ताकत को बढ़ाना
- ✅ B) मोर्टार के सूखने पर होने वाली सिकुड़न (Shrinkage) को रोकना (सही उत्तर)
- C) मोर्टार को जल्दी सुखाना
- D) मोर्टार को पूर्णतः जलरोधी (Waterproof) बनाना
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट जब पानी के साथ मिलकर जमता है, तो वह बहुत अधिक सिकुड़ता (Shrink) है, जिससे उसमें दरारें (Cracks) पड़ सकती हैं। बालू (Sand) एक निष्क्रिय सामग्री (Inert material) है जो सिकुड़ती नहीं है। इसे मिलाने से मोर्टार का आयतन (Volume) बढ़ता है और सूखने के दौरान होने वाली सिकुड़न (Shrinkage) और दरारें रुक जाती हैं।
सीमेंट जब पानी के साथ मिलकर जमता है, तो वह बहुत अधिक सिकुड़ता (Shrink) है, जिससे उसमें दरारें (Cracks) पड़ सकती हैं। बालू (Sand) एक निष्क्रिय सामग्री (Inert material) है जो सिकुड़ती नहीं है। इसे मिलाने से मोर्टार का आयतन (Volume) बढ़ता है और सूखने के दौरान होने वाली सिकुड़न (Shrinkage) और दरारें रुक जाती हैं।
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Q652: साधारण कंक्रीट (OPC) को पानी मिलाने के बाद अधिकतम कितने समय के भीतर उसके अंतिम स्थान पर बिछा (Placed) और कॉम्पैक्ट कर देना चाहिए?
- A) 10 मिनट
- ✅ B) 30 मिनट (सही उत्तर)
- C) 60 मिनट
- D) 120 मिनट
💡 डिटेल Explanation:
साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का प्रारंभिक जमाव काल (Initial Setting Time) 30 मिनट होता है। इसका अर्थ है कि पानी मिलाने के 30 मिनट बाद सीमेंट अपनी सुघट्यता (Plasticity) खोना शुरू कर देता है। इसलिए कंक्रीट को मिलाने (Mixing), ले जाने (Transporting) और बिछाने (Placing) का पूरा काम 30 मिनट के भीतर पूरा हो जाना चाहिए।
साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का प्रारंभिक जमाव काल (Initial Setting Time) 30 मिनट होता है। इसका अर्थ है कि पानी मिलाने के 30 मिनट बाद सीमेंट अपनी सुघट्यता (Plasticity) खोना शुरू कर देता है। इसलिए कंक्रीट को मिलाने (Mixing), ले जाने (Transporting) और बिछाने (Placing) का पूरा काम 30 मिनट के भीतर पूरा हो जाना चाहिए।
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Q653: लकड़ी के दरवाजों या खिड़कियों के शीशे (Glass panes) फिक्स करने और दरारें भरने के लिए इस्तेमाल होने वाली 'पुट्टी' (Putty) किन दो चीजों का मिश्रण होती है?
- A) सफेद सीमेंट और पानी
- B) जिप्सम पाउडर और वार्निश
- ✅ C) चॉक पाउडर (Whiting) और कच्चा अलसी का तेल (Raw Linseed Oil) (सही उत्तर)
- D) प्लास्टर ऑफ पेरिस और तारपीन का तेल
💡 डिटेल Explanation:
ग्लेजिंग पुट्टी (Glazing Putty) का उपयोग शीशों को लकड़ी या धातु के फ्रेम में फिक्स करने के लिए किया जाता है। यह शुद्ध चॉक पाउडर (Whiting) को कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed Oil) के साथ गूंथ कर बनाई जाती है। यह शुरुआत में बहुत नरम होती है लेकिन हवा के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे बहुत कठोर हो जाती है।
ग्लेजिंग पुट्टी (Glazing Putty) का उपयोग शीशों को लकड़ी या धातु के फ्रेम में फिक्स करने के लिए किया जाता है। यह शुद्ध चॉक पाउडर (Whiting) को कच्चे अलसी के तेल (Raw Linseed Oil) के साथ गूंथ कर बनाई जाती है। यह शुरुआत में बहुत नरम होती है लेकिन हवा के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे बहुत कठोर हो जाती है।
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Q654: लोहे (Iron) को जंग लगने (Corrosion) से बचाने के लिए उस पर 'गैल्वनाइजिंग' (Galvanizing) की प्रक्रिया की जाती है। इस प्रक्रिया में लोहे पर किस धातु की परत चढ़ाई जाती है?
- A) एल्युमिनियम (Aluminium)
- ✅ B) जिंक / जस्ता (Zinc) (सही उत्तर)
- C) क्रोमियम (Chromium)
- D) टिन (Tin)
💡 डिटेल Explanation:
गैल्वनाइजिंग (Galvanizing) एक अत्यधिक प्रभावी एंटी-कोर्सिव (Anti-corrosive) प्रक्रिया है। इसमें लोहे या स्टील के टुकड़ों को पिघले हुए जिंक (जस्ता) के स्नान में डुबोया जाता है। जिंक लोहे के साथ प्रतिक्रिया करके एक मजबूत सुरक्षात्मक परत बना लेता है, जिससे हवा और नमी लोहे तक नहीं पहुँच पाती और जंग नहीं लगता।
गैल्वनाइजिंग (Galvanizing) एक अत्यधिक प्रभावी एंटी-कोर्सिव (Anti-corrosive) प्रक्रिया है। इसमें लोहे या स्टील के टुकड़ों को पिघले हुए जिंक (जस्ता) के स्नान में डुबोया जाता है। जिंक लोहे के साथ प्रतिक्रिया करके एक मजबूत सुरक्षात्मक परत बना लेता है, जिससे हवा और नमी लोहे तक नहीं पहुँच पाती और जंग नहीं लगता।
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Q655: 655 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: सीमेंट के बोग्स यौगिकों (Bogue's Compounds) में 'ट्राईकैल्शियम सिलिकेट' (C3S) कंक्रीट में किस गुण के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है?
- A) त्वरित जमाव (Flash Setting) के लिए
- ✅ B) शुरुआती सामर्थ्य (Early Strength / 7 days strength) के लिए (सही उत्तर)
- C) अंतिम सामर्थ्य (Ultimate strength - 1 साल बाद) के लिए
- D) कंक्रीट को जलरोधी बनाने के लिए
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट में C3S की मात्रा लगभग 30% से 50% होती है। यह पानी के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट को शुरुआती दिनों (1 से 7 दिन) में तेजी से सामर्थ्य (Early Strength) प्रदान करता है। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट में C3S की मात्रा जानबूझकर बढ़ा दी जाती है ताकि कंक्रीट जल्दी ताकत प्राप्त कर सके। (अंतिम ताकत C2S के कारण होती है)।
सीमेंट में C3S की मात्रा लगभग 30% से 50% होती है। यह पानी के साथ तेजी से प्रतिक्रिया करता है और कंक्रीट को शुरुआती दिनों (1 से 7 दिन) में तेजी से सामर्थ्य (Early Strength) प्रदान करता है। रैपिड हार्डनिंग सीमेंट में C3S की मात्रा जानबूझकर बढ़ा दी जाती है ताकि कंक्रीट जल्दी ताकत प्राप्त कर सके। (अंतिम ताकत C2S के कारण होती है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 130 (Q656 - Q660)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q656: कंक्रीट की सुकार्यता मापने के लिए किए जाने वाले 'स्लंप टेस्ट' (Slump Test) में, स्लंप कोन को कंक्रीट से कितनी बराबर परतों (Layers) में भरा जाता है?
- A) 2 परतों में
- B) 3 परतों में
- ✅ C) 4 परतों में (सही उत्तर)
- D) 5 परतों में
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानकों (IS 1199) के अनुसार, स्लंप कोन (Slump Cone) को 4 बराबर ऊँचाई की परतों (Layers) में कंक्रीट से भरा जाता है। प्रत्येक परत को भरने के बाद 16 mm व्यास वाली मानक 'टैम्पिंग रॉड' (Tamping rod) से 25 बार समान रूप से कूट (Tamp) कर कॉम्पैक्ट किया जाता है।
भारतीय मानकों (IS 1199) के अनुसार, स्लंप कोन (Slump Cone) को 4 बराबर ऊँचाई की परतों (Layers) में कंक्रीट से भरा जाता है। प्रत्येक परत को भरने के बाद 16 mm व्यास वाली मानक 'टैम्पिंग रॉड' (Tamping rod) से 25 बार समान रूप से कूट (Tamp) कर कॉम्पैक्ट किया जाता है।
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Q657: खदान (Quarry) से ताजे निकाले गए पत्थर (Freshly quarried stone) में मौजूद प्राकृतिक नमी को तकनीकी भाषा में क्या कहा जाता है?
- A) स्टोन वाटर (Stone Water)
- ✅ B) क्वारी सैप (Quarry Sap) (सही उत्तर)
- C) रॉक मॉइस्चर (Rock Moisture)
- D) मिनरल जूस (Mineral Juice)
💡 डिटेल Explanation:
जब पत्थर को खदान से तुरंत बाहर निकाला जाता है, तो उसमें जमीन के अंदर की प्राकृतिक नमी मौजूद होती है जिसे 'क्वारी सैप' (Quarry Sap) कहा जाता है। इस नमी के कारण ताजा पत्थर नरम होता है और उसे मनचाहे आकार में काटना (Dressing) बहुत आसान होता है। सूखने के बाद पत्थर कठोर हो जाता है।
जब पत्थर को खदान से तुरंत बाहर निकाला जाता है, तो उसमें जमीन के अंदर की प्राकृतिक नमी मौजूद होती है जिसे 'क्वारी सैप' (Quarry Sap) कहा जाता है। इस नमी के कारण ताजा पत्थर नरम होता है और उसे मनचाहे आकार में काटना (Dressing) बहुत आसान होता है। सूखने के बाद पत्थर कठोर हो जाता है।
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Q658: इमारती लकड़ी (Timber) में, बार-बार गीला होने और सूखने (Alternate wetting and drying) के कारण लकड़ी का सड़कर नष्ट हो जाना किस दोष के नाम से जाना जाता है?
- A) ड्राई रॉट (Dry Rot)
- ✅ B) वेट रॉट (Wet Rot) (सही उत्तर)
- C) ब्लू स्टेन (Blue Stain)
- D) केस हार्डनिंग (Case Hardening)
💡 डिटेल Explanation:
जब लकड़ी बाहरी मौसम में होती है और बार-बार बारिश से भीगती है और धूप से सूखती है, तो उसमें एक विशेष प्रकार की फफूंदी (Fungi) लग जाती है जो लकड़ी को भूरे रंग के सड़े हुए पाउडर में बदल देती है। इस दोष को वेट रॉट (Wet Rot) कहा जाता है। (ड्राई रॉट बंद सीलन वाली जगहों पर बिना वेंटिलेशन के होता है)।
जब लकड़ी बाहरी मौसम में होती है और बार-बार बारिश से भीगती है और धूप से सूखती है, तो उसमें एक विशेष प्रकार की फफूंदी (Fungi) लग जाती है जो लकड़ी को भूरे रंग के सड़े हुए पाउडर में बदल देती है। इस दोष को वेट रॉट (Wet Rot) कहा जाता है। (ड्राई रॉट बंद सीलन वाली जगहों पर बिना वेंटिलेशन के होता है)।
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Q659: ईंट की चिनाई में 'एफ्लोरेसेंस' (Efflorescence - लोना या नमक के सफेद धब्बे) मुख्य रूप से ईंट की मिट्टी में किसकी उपस्थिति के कारण होता है?
- A) आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide)
- B) सिलिका (Silica)
- ✅ C) एल्कलीज या घुलनशील क्षारीय लवण (Alkalis / Soluble Salts) (सही उत्तर)
- D) एल्युमिना (Alumina)
💡 डिटेल Explanation:
यदि ईंट बनाने वाली मिट्टी में घुलनशील क्षार (Alkalis) जैसे सोडियम और पोटैशियम के सल्फेट अधिक मात्रा में हों, तो चिनाई के बाद जब ईंट सूखती है, तो ये लवण पानी के साथ सतह पर आ जाते हैं और वाष्पीकरण के बाद सतह पर एक भद्दा सफेद पाउडर छोड़ देते हैं। इसे ही एफ्लोरेसेंस (Efflorescence) कहा जाता है।
यदि ईंट बनाने वाली मिट्टी में घुलनशील क्षार (Alkalis) जैसे सोडियम और पोटैशियम के सल्फेट अधिक मात्रा में हों, तो चिनाई के बाद जब ईंट सूखती है, तो ये लवण पानी के साथ सतह पर आ जाते हैं और वाष्पीकरण के बाद सतह पर एक भद्दा सफेद पाउडर छोड़ देते हैं। इसे ही एफ्लोरेसेंस (Efflorescence) कहा जाता है।
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Q660: 660 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, 'M20' ग्रेड कंक्रीट के लिए सीमेंट, बालू (Fine Aggregate) और गिट्टी (Coarse Aggregate) का मानक नाममात्र अनुपात (Nominal Mix Ratio) क्या है?
- A) 1 : 2 : 4
- ✅ B) 1 : 1.5 : 3 (सही उत्तर)
- C) 1 : 3 : 6
- D) 1 : 1 : 2
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट के विभिन्न ग्रेड्स के लिए मानक अनुपात (Cement : Sand : Aggregate) इस प्रकार हैं:
• M10 = 1 : 3 : 6
• M15 = 1 : 2 : 4
• M20 = 1 : 1.5 : 3
• M25 = 1 : 1 : 2
M20 कंक्रीट का अर्थ है कि 28 दिनों के बाद इसकी संपीडन सामर्थ्य 20 N/mm² होगी। यह सामान्य RCC कार्यों के लिए सबसे कम अनुशंसित ग्रेड है।
कंक्रीट के विभिन्न ग्रेड्स के लिए मानक अनुपात (Cement : Sand : Aggregate) इस प्रकार हैं:
• M10 = 1 : 3 : 6
• M15 = 1 : 2 : 4
• M20 = 1 : 1.5 : 3
• M25 = 1 : 1 : 2
M20 कंक्रीट का अर्थ है कि 28 दिनों के बाद इसकी संपीडन सामर्थ्य 20 N/mm² होगी। यह सामान्य RCC कार्यों के लिए सबसे कम अनुशंसित ग्रेड है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 131 (Q661 - Q665)
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Q661: ताजी बिछाई गई कंक्रीट में, भारी कणों के नीचे बैठने के कारण पानी और सीमेंट के पेस्ट का सतह पर अलग होकर तैरने लगना क्या कहलाता है?
- A) सेग्रीगेशन (Segregation)
- ✅ B) ब्लीडिंग (Bleeding) (सही उत्तर)
- C) लैटेंस (Laitance)
- D) क्रैज़िंग (Crazing)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट में आवश्यकता से अधिक पानी मिलाने या अत्यधिक कुटाई (Over-vibration) करने से गिट्टी (भारी कण) नीचे बैठ जाती है और पानी सीमेंट के साथ सतह पर आ जाता है। इस प्रक्रिया को ब्लीडिंग (Bleeding) कहते हैं। ब्लीडिंग के कारण ही सतह पर जो कमजोर दूधिया परत बनती है, उसे 'लैटेंस' (Laitance) कहा जाता है।
कंक्रीट में आवश्यकता से अधिक पानी मिलाने या अत्यधिक कुटाई (Over-vibration) करने से गिट्टी (भारी कण) नीचे बैठ जाती है और पानी सीमेंट के साथ सतह पर आ जाता है। इस प्रक्रिया को ब्लीडिंग (Bleeding) कहते हैं। ब्लीडिंग के कारण ही सतह पर जो कमजोर दूधिया परत बनती है, उसे 'लैटेंस' (Laitance) कहा जाता है।
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Q662: भारत में सीमेंट की प्रयोगशाला जांच (जैसे संपीडन सामर्थ्य परीक्षण) के लिए उपयोग की जाने वाली 'मानक बालू' (Standard Sand) मुख्य रूप से कहाँ से प्राप्त की जाती है?
- ✅ A) एन्नोर, तमिलनाडु (Ennore, Tamil Nadu) (सही उत्तर)
- B) बीकानेर, राजस्थान (Bikaner, Rajasthan)
- C) कच्छ, राजस्थान (Kutch, Rajasthan)
- D) चिल्का, गुजरात (Chilka, Gujarat)
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय मानक (IS 650) के अनुसार, सीमेंट मोर्टार क्यूब्स बनाने के लिए 'एन्नोर बालू' (Ennore Sand) का उपयोग किया जाता है। यह चेन्नई के पास एन्नोर नामक स्थान से प्राप्त होती है। यह बालू शुद्ध क्वार्ट्ज की होती है और इसके कणों का आकार अत्यधिक सटीक और 3 अलग-अलग ग्रेड्स में मानकीकृत (Standardized) होता है।
भारतीय मानक (IS 650) के अनुसार, सीमेंट मोर्टार क्यूब्स बनाने के लिए 'एन्नोर बालू' (Ennore Sand) का उपयोग किया जाता है। यह चेन्नई के पास एन्नोर नामक स्थान से प्राप्त होती है। यह बालू शुद्ध क्वार्ट्ज की होती है और इसके कणों का आकार अत्यधिक सटीक और 3 अलग-अलग ग्रेड्स में मानकीकृत (Standardized) होता है।
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Q663: लकड़ी को सुखाने (Seasoning of Timber) की वह कौन सी विधि है जो सबसे तेज है और जिसमें लकड़ी के फफूंदी (Fungi) लगने का कोई खतरा नहीं होता?
- A) एयर सीजनिंग (Air Seasoning)
- B) वाटर सीजनिंग (Water Seasoning)
- ✅ C) किल्न सीजनिंग (Kiln Seasoning - भट्ठे में सुखाना) (सही उत्तर)
- D) केमिकल सीजनिंग (Chemical Seasoning)
💡 डिटेल Explanation:
किल्न सीजनिंग (Kiln Seasoning) लकड़ी सुखाने की एक कृत्रिम (Artificial) और सबसे तेज विधि है। इसमें लकड़ी को एक बंद ओवन या भट्ठे में उच्च तापमान पर सुखाया जाता है। तापमान अधिक होने के कारण फफूंदी और कीड़े-मकोड़े पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं और लकड़ी कुछ ही दिनों में पूरी तरह सूख जाती है, जबकि प्राकृतिक हवा में सुखाने में महीनों लग जाते हैं।
किल्न सीजनिंग (Kiln Seasoning) लकड़ी सुखाने की एक कृत्रिम (Artificial) और सबसे तेज विधि है। इसमें लकड़ी को एक बंद ओवन या भट्ठे में उच्च तापमान पर सुखाया जाता है। तापमान अधिक होने के कारण फफूंदी और कीड़े-मकोड़े पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं और लकड़ी कुछ ही दिनों में पूरी तरह सूख जाती है, जबकि प्राकृतिक हवा में सुखाने में महीनों लग जाते हैं।
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Q664: ईंट बनाने वाली मिट्टी (Brick Earth) में 'एल्युमिना' (Alumina / Clay) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) ईंट को लाल रंग प्रदान करना
- ✅ B) मिट्टी को सुघट्यता (Plasticity) प्रदान करना ताकि उसे सांचे में ढाला जा सके (सही उत्तर)
- C) ईंट को सिकुड़ने से रोकना
- D) ईंट का वजन कम करना
💡 डिटेल Explanation:
अच्छी ईंट की मिट्टी में एल्युमिना की मात्रा 20% से 30% होनी चाहिए। इसका मुख्य काम मिट्टी को सुघट्यता या प्लास्टिसिटी (Plasticity) देना है। इसी गुण के कारण गीली मिट्टी को बिना टूटे किसी भी आकार (सांचे) में ढाला जा सकता है। (नोट: ईंट को सिकुड़ने से रोकने का काम 'सिलिका' करता है)।
अच्छी ईंट की मिट्टी में एल्युमिना की मात्रा 20% से 30% होनी चाहिए। इसका मुख्य काम मिट्टी को सुघट्यता या प्लास्टिसिटी (Plasticity) देना है। इसी गुण के कारण गीली मिट्टी को बिना टूटे किसी भी आकार (सांचे) में ढाला जा सकता है। (नोट: ईंट को सिकुड़ने से रोकने का काम 'सिलिका' करता है)।
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Q665: 665 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भारी संरचनाओं जैसे 'रिटेनिंग वॉल' (Retaining Wall) और पुलों के पियर्स के निर्माण के लिए किस प्रकार के पत्थर का चयन किया जाना चाहिए?
- ✅ A) भारी और अधिक विशिष्ट गुरुत्व (High Specific Gravity) वाले पत्थर (सही उत्तर)
- B) हल्के और कम विशिष्ट गुरुत्व वाले पत्थर
- C) अत्यधिक छिद्रपूर्ण (Porous) पत्थर
- D) नरम अवसादी (Soft sedimentary) पत्थर
💡 डिटेल Explanation:
रिटेनिंग वॉल, पुलों के खंभे (Piers) और बांध (Dams) जैसी संरचनाओं को अपनी स्थिरता (Stability) बनाए रखने के लिए अत्यधिक वजन (Dead load) की आवश्यकता होती है ताकि वे पानी या मिट्टी के भारी दबाव को सह सकें। इसलिए इनके लिए भारी और उच्च विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity 2.8 से अधिक) वाले पत्थरों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) का उपयोग किया जाता है।
रिटेनिंग वॉल, पुलों के खंभे (Piers) और बांध (Dams) जैसी संरचनाओं को अपनी स्थिरता (Stability) बनाए रखने के लिए अत्यधिक वजन (Dead load) की आवश्यकता होती है ताकि वे पानी या मिट्टी के भारी दबाव को सह सकें। इसलिए इनके लिए भारी और उच्च विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity 2.8 से अधिक) वाले पत्थरों (जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट) का उपयोग किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 132 (Q666 - Q670)
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Q666: अत्यधिक सल्फेट वाले वातावरण या रासायनिक कारखानों में निर्माण के लिए 'हाई एल्युमिना सीमेंट' (High Alumina Cement - HAC) का उपयोग किया जाता है। इसे बनाने के लिए चूना पत्थर के साथ मुख्य रूप से किसे पिघलाया (Fused) जाता है?
- A) जिप्सम (Gypsum)
- ✅ B) बॉक्साइट (Bauxite) (सही उत्तर)
- C) सुरखी (Surkhi)
- D) फ्लाई ऐश (Fly Ash)
💡 डिटेल Explanation:
हाई एल्युमिना सीमेंट (HAC) साधारण सीमेंट से बिल्कुल अलग होता है। इसे बनाने के लिए चूना पत्थर (Limestone) और एल्युमिनियम के अयस्क 'बॉक्साइट' (Bauxite - 40% तक) के मिश्रण को अत्यधिक उच्च तापमान पर पिघलाया जाता है। यह सल्फेट और अम्लीय हमलों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है और बहुत तेजी से ताकत (1 दिन में OPC की 28 दिन के बराबर) प्राप्त करता है।
हाई एल्युमिना सीमेंट (HAC) साधारण सीमेंट से बिल्कुल अलग होता है। इसे बनाने के लिए चूना पत्थर (Limestone) और एल्युमिनियम के अयस्क 'बॉक्साइट' (Bauxite - 40% तक) के मिश्रण को अत्यधिक उच्च तापमान पर पिघलाया जाता है। यह सल्फेट और अम्लीय हमलों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है और बहुत तेजी से ताकत (1 दिन में OPC की 28 दिन के बराबर) प्राप्त करता है।
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Q667: सभी प्रकार के वार्निशों (Varnishes) में सबसे टिकाऊ (Most durable) और कठोर वार्निश कौन सा माना जाता है, जिसका उपयोग अक्सर बाहरी सतहों पर किया जाता है?
- A) स्पिरिट वार्निश (Spirit Varnish)
- B) वाटर वार्निश (Water Varnish)
- ✅ C) कोपल वार्निश / ऑयल वार्निश (Copal / Oil Varnish) (सही उत्तर)
- D) टर्पेंटाइन वार्निश (Turpentine Varnish)
💡 डिटेल Explanation:
ऑयल वार्निश (Oil Varnish) को कठोर रेजिन (जैसे कोपल - Copal या एम्बर) को उबलते हुए अलसी के तेल (Linseed oil) में घोलकर बनाया जाता है। यह सूखने में समय लेता है (लगभग 24 घंटे) लेकिन सूखने के बाद यह सभी वार्निशों में सबसे अधिक टिकाऊ, कठोर और मौसम-प्रतिरोधी फिल्म बनाता है।
ऑयल वार्निश (Oil Varnish) को कठोर रेजिन (जैसे कोपल - Copal या एम्बर) को उबलते हुए अलसी के तेल (Linseed oil) में घोलकर बनाया जाता है। यह सूखने में समय लेता है (लगभग 24 घंटे) लेकिन सूखने के बाद यह सभी वार्निशों में सबसे अधिक टिकाऊ, कठोर और मौसम-प्रतिरोधी फिल्म बनाता है।
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Q668: भारतीय मानकों के अनुसार 'द्वितीय श्रेणी की ईंट' (Second Class Brick) को 24 घंटे ठंडे पानी में डुबोने पर उसका 'जल अवशोषण' (Water Absorption) उसके सूखे वजन के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 15%
- B) 20%
- ✅ C) 22% (सही उत्तर)
- D) 25%
💡 डिटेल Explanation:
ईंटों का जल अवशोषण उनकी सरंध्रता (Porosity) और मजबूती दर्शाता है। आईएस कोड के अनुसार:
• प्रथम श्रेणी (First Class) की ईंट = 20% से अधिक नहीं
• द्वितीय श्रेणी (Second Class) की ईंट = 22% से अधिक नहीं
• तृतीय श्रेणी (Third Class) की ईंट = 25% से अधिक नहीं।
ईंटों का जल अवशोषण उनकी सरंध्रता (Porosity) और मजबूती दर्शाता है। आईएस कोड के अनुसार:
• प्रथम श्रेणी (First Class) की ईंट = 20% से अधिक नहीं
• द्वितीय श्रेणी (Second Class) की ईंट = 22% से अधिक नहीं
• तृतीय श्रेणी (Third Class) की ईंट = 25% से अधिक नहीं।
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Q669: भारत में निर्माण कार्यों के लिए उपयोग की जाने वाली अच्छी तरह से सुखाई गई (Well-seasoned) 'इमारती लकड़ी' में नमी की मात्रा (Moisture Content) सामान्यतः कितने प्रतिशत तक सीमित की जाती है?
- A) 2% से 5%
- ✅ B) 10% से 12% (सही उत्तर)
- C) 15% से 20%
- D) 25% से 30%
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी को 0% नमी तक सुखाना संभव नहीं है क्योंकि वह हवा से वापस नमी सोख लेगी। भारत के मौसम के अनुसार, सीजनिंग के बाद इमारती लकड़ी में 10% से 12% (अधिकतम 15% तक) नमी छोड़ी जाती है, जिसे इक्विलिब्रियम मॉइस्चर कंटेंट (EMC) कहते हैं। इस स्तर पर लकड़ी स्थिर (Stable) रहती है और उसमें सड़न या सिकुड़न नहीं होती।
लकड़ी को 0% नमी तक सुखाना संभव नहीं है क्योंकि वह हवा से वापस नमी सोख लेगी। भारत के मौसम के अनुसार, सीजनिंग के बाद इमारती लकड़ी में 10% से 12% (अधिकतम 15% तक) नमी छोड़ी जाती है, जिसे इक्विलिब्रियम मॉइस्चर कंटेंट (EMC) कहते हैं। इस स्तर पर लकड़ी स्थिर (Stable) रहती है और उसमें सड़न या सिकुड़न नहीं होती।
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Q670: 670 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: IS 456:2000 के अनुसार, प्रबलित कंक्रीट (RCC) संरचनाओं (Structural members) के लिए उपयोग की जाने वाली कंक्रीट का 'न्यूनतम ग्रेड' (Minimum Grade) क्या होना चाहिए?
- A) M10
- B) M15
- ✅ C) M20 (सही उत्तर)
- D) M25
💡 डिटेल Explanation:
पुराने IS 456:1978 कोड के अनुसार RCC के लिए न्यूनतम ग्रेड M15 था। लेकिन नवीनतम संशोधित कोड IS 456:2000 के अनुसार, किसी भी प्रबलित कंक्रीट (RCC) कार्य (जैसे स्लैब, बीम, कॉलम) के लिए कंक्रीट का न्यूनतम ग्रेड M20 (1:1.5:3 अनुपात) होना अनिवार्य है। M10 या M15 का उपयोग केवल PCC (बिना सरिये के कंक्रीट) और पीसीसी बेड के लिए किया जाता है।
पुराने IS 456:1978 कोड के अनुसार RCC के लिए न्यूनतम ग्रेड M15 था। लेकिन नवीनतम संशोधित कोड IS 456:2000 के अनुसार, किसी भी प्रबलित कंक्रीट (RCC) कार्य (जैसे स्लैब, बीम, कॉलम) के लिए कंक्रीट का न्यूनतम ग्रेड M20 (1:1.5:3 अनुपात) होना अनिवार्य है। M10 या M15 का उपयोग केवल PCC (बिना सरिये के कंक्रीट) और पीसीसी बेड के लिए किया जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 133 (Q671 - Q675)
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Q671: इमारती लकड़ी (Timber) के वर्गीकरण में, 'पर्णपाती वृक्ष' (Deciduous trees) आमतौर पर किस प्रकार की लकड़ी प्रदान करते हैं?
- ✅ A) हार्डवुड (Hardwood - कठोर लकड़ी) (सही उत्तर)
- B) सॉफ्टवुड (Softwood - मुलायम लकड़ी)
- C) प्लाईवुड (Plywood)
- D) एमडीएफ (MDF)
💡 डिटेल Explanation:
पर्णपाती (Deciduous) पेड़ वे होते हैं जो शरद ऋतु में अपनी चौड़ी पत्तियां (Broad leaves) गिरा देते हैं। ये पेड़ बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जिसके कारण इनकी लकड़ी अत्यधिक सघन, मजबूत और भारी होती है, जिसे हार्डवुड (Hardwood) कहा जाता है। सागौन (Teak), साल, ओक और शीशम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
पर्णपाती (Deciduous) पेड़ वे होते हैं जो शरद ऋतु में अपनी चौड़ी पत्तियां (Broad leaves) गिरा देते हैं। ये पेड़ बहुत धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जिसके कारण इनकी लकड़ी अत्यधिक सघन, मजबूत और भारी होती है, जिसे हार्डवुड (Hardwood) कहा जाता है। सागौन (Teak), साल, ओक और शीशम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
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Q672: भारतीय मानकों के अनुसार, भवन निर्माण के लिए उपयुक्त एक 'अच्छे पत्थर' (Good Building Stone) का जल अवशोषण (Water Absorption) उसके सूखे वजन के कितने प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए?
- A) 2%
- ✅ B) 5% (सही उत्तर)
- C) 10%
- D) 20%
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर जितना कम पानी सोखेगा, वह उतना ही अधिक कठोर, सघन (Dense) और टिकाऊ होगा। एक उत्कृष्ट भवन निर्माण पत्थर का जल अवशोषण 24 घंटे पानी में डुबाने के बाद उसके कुल सूखे वजन के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह 10% से अधिक है, तो पत्थर को खराब माना जाता है और निर्माण में खारिज कर दिया जाता है।
पत्थर जितना कम पानी सोखेगा, वह उतना ही अधिक कठोर, सघन (Dense) और टिकाऊ होगा। एक उत्कृष्ट भवन निर्माण पत्थर का जल अवशोषण 24 घंटे पानी में डुबाने के बाद उसके कुल सूखे वजन के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि यह 10% से अधिक है, तो पत्थर को खराब माना जाता है और निर्माण में खारिज कर दिया जाता है।
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Q673: औद्योगिक संरचनाओं और भारी लोडिंग वाले क्षेत्रों में उपयोग की जाने वाली 'हैवी ड्यूटी ईंटों' (Heavy Duty Bricks) की न्यूनतम संपीडन सामर्थ्य कितनी होनी चाहिए?
- A) 10.5 N/mm²
- B) 25.0 N/mm²
- ✅ C) 40.0 N/mm² (सही उत्तर)
- D) 75.0 N/mm²
💡 डिटेल Explanation:
सामान्य चिनाई के लिए प्रथम श्रेणी की ईंट की ताकत 10.5 N/mm² होती है। लेकिन विशेष रूप से पुलों के पियर्स या औद्योगिक फर्शों के लिए जहां बहुत अधिक दबाव होता है, हैवी ड्यूटी ईंटों (Heavy Duty Bricks) का उपयोग किया जाता है। इनकी संपीडन सामर्थ्य (IS 2180 के अनुसार) 40 N/mm² (लगभग 400 kg/cm²) से कम नहीं होनी चाहिए।
सामान्य चिनाई के लिए प्रथम श्रेणी की ईंट की ताकत 10.5 N/mm² होती है। लेकिन विशेष रूप से पुलों के पियर्स या औद्योगिक फर्शों के लिए जहां बहुत अधिक दबाव होता है, हैवी ड्यूटी ईंटों (Heavy Duty Bricks) का उपयोग किया जाता है। इनकी संपीडन सामर्थ्य (IS 2180 के अनुसार) 40 N/mm² (लगभग 400 kg/cm²) से कम नहीं होनी चाहिए।
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Q674: निर्माण सामग्री की गणना करते समय, 'साधारण पोर्टलैंड सीमेंट' (OPC) का मानक 'थोक घनत्व' (Bulk Density) कितना माना जाता है?
- A) 1000 kg/m³
- B) 1200 kg/m³
- ✅ C) 1440 kg/m³ (सही उत्तर)
- D) 2400 kg/m³
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) 3.15 होता है, जिसका अर्थ है कि बिना हवा के यह पानी से 3.15 गुना भारी है। लेकिन सीमेंट एक पाउडर है जिसके कणों के बीच हवा (Voids) होती है। हवा सहित इसके वजन को थोक घनत्व (Bulk Density) कहते हैं, जो मानक रूप से 1440 kg/m³ माना जाता है। इसी आधार पर 50 kg के एक बैग का आयतन 0.0347 m³ निकाला जाता है।
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) 3.15 होता है, जिसका अर्थ है कि बिना हवा के यह पानी से 3.15 गुना भारी है। लेकिन सीमेंट एक पाउडर है जिसके कणों के बीच हवा (Voids) होती है। हवा सहित इसके वजन को थोक घनत्व (Bulk Density) कहते हैं, जो मानक रूप से 1440 kg/m³ माना जाता है। इसी आधार पर 50 kg के एक बैग का आयतन 0.0347 m³ निकाला जाता है।
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Q675: 675 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: प्रयोगशाला में सीमेंट की 'सूक्ष्मता' (Fineness) मापने के लिए 'छलनी परीक्षण' (Sieve Test) के अलावा कौन सा अधिक सटीक परीक्षण उपयोग किया जाता है?
- A) ली-चेटेलियर परीक्षण (Le-Chatelier Test)
- B) विकाट परीक्षण (Vicat Test)
- ✅ C) ब्लेंस एयर परमीबिलिटी टेस्ट (Blaine's Air Permeability Test) (सही उत्तर)
- D) लॉस एंजिल्स परीक्षण (Los Angeles Test)
💡 डिटेल Explanation:
छलनी परीक्षण (90-माइक्रोन सीव) सीमेंट की सूक्ष्मता मापने का एक पुराना तरीका है। आधुनिक और अधिक सटीक विधि ब्लेंस एयर परमीबिलिटी टेस्ट है। यह उपकरण सीमेंट के 'विशिष्ट सतह क्षेत्रफल' (Specific Surface Area) को मापता है (जैसे OPC के लिए 2250 cm²/g)। यह इस सिद्धांत पर काम करता है कि हवा के प्रवाह में सीमेंट के कणों द्वारा उत्पन्न प्रतिरोध उनकी सूक्ष्मता पर निर्भर करता है।
छलनी परीक्षण (90-माइक्रोन सीव) सीमेंट की सूक्ष्मता मापने का एक पुराना तरीका है। आधुनिक और अधिक सटीक विधि ब्लेंस एयर परमीबिलिटी टेस्ट है। यह उपकरण सीमेंट के 'विशिष्ट सतह क्षेत्रफल' (Specific Surface Area) को मापता है (जैसे OPC के लिए 2250 cm²/g)। यह इस सिद्धांत पर काम करता है कि हवा के प्रवाह में सीमेंट के कणों द्वारा उत्पन्न प्रतिरोध उनकी सूक्ष्मता पर निर्भर करता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 134 (Q676 - Q680)
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Q676: कंक्रीट निर्माण में 'PCC' (Plain Cement Concrete - बिना सरिये वाली कंक्रीट) और 'RCC' (Reinforced Cement Concrete) का मानक घनत्व (Density) क्रमशः कितना होता है?
- A) PCC: 2000 kg/m³, RCC: 2200 kg/m³
- ✅ B) PCC: 2400 kg/m³, RCC: 2500 kg/m³ (सही उत्तर)
- C) PCC: 2500 kg/m³, RCC: 2800 kg/m³
- D) PCC: 1440 kg/m³, RCC: 2400 kg/m³
💡 डिटेल Explanation:
लोड गणना (Dead load calculation) के लिए IS 456 के अनुसार सादी कंक्रीट (PCC) का घनत्व 2400 kg/m³ (या 24 kN/m³) माना जाता है। जब कंक्रीट में स्टील का सरिया (Reinforcement) डाला जाता है, तो स्टील के भारीपन (7850 kg/m³) के कारण कंक्रीट का औसत घनत्व बढ़कर 2500 kg/m³ (या 25 kN/m³) हो जाता है।
लोड गणना (Dead load calculation) के लिए IS 456 के अनुसार सादी कंक्रीट (PCC) का घनत्व 2400 kg/m³ (या 24 kN/m³) माना जाता है। जब कंक्रीट में स्टील का सरिया (Reinforcement) डाला जाता है, तो स्टील के भारीपन (7850 kg/m³) के कारण कंक्रीट का औसत घनत्व बढ़कर 2500 kg/m³ (या 25 kN/m³) हो जाता है।
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Q677: पेंट की गई सतह पर 'एलीगेटरिंग' (Alligatoring) नामक दोष तब उत्पन्न होता है जब सतह पर:
- A) नमी के कारण बुलबुले (Blisters) बन जाएं
- ✅ B) मगरमच्छ की खाल जैसी बड़ी और चौड़ी दरारें पड़ जाएं (सही उत्तर)
- C) पेंट पाउडर बनकर गिरने लगे
- D) पेंट के रंग फीके पड़ जाएं
💡 डिटेल Explanation:
एलीगेटरिंग (Alligatoring) क्रैकिंग का एक चरम रूप है। यह तब होता है जब एक नरम अंडरकोट (नीचे की परत) के ऊपर एक बहुत कठोर टॉपकोट (Hard topcoat) लगा दिया जाता है। तापमान बदलने पर दोनों परतें अलग-अलग दर से फैलती/सिकुड़ती हैं, जिससे टॉपकोट फट जाता है और मगरमच्छ की खाल (Alligator skin) जैसा पैटर्न बन जाता है।
एलीगेटरिंग (Alligatoring) क्रैकिंग का एक चरम रूप है। यह तब होता है जब एक नरम अंडरकोट (नीचे की परत) के ऊपर एक बहुत कठोर टॉपकोट (Hard topcoat) लगा दिया जाता है। तापमान बदलने पर दोनों परतें अलग-अलग दर से फैलती/सिकुड़ती हैं, जिससे टॉपकोट फट जाता है और मगरमच्छ की खाल (Alligator skin) जैसा पैटर्न बन जाता है।
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Q678: 'खेल के सामान' (Sports goods) जैसे क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक और टेनिस रैकेट बनाने के लिए निम्नलिखित में से किस लकड़ी का उपयोग सर्वोत्तम माना जाता है?
- A) सागौन (Teak)
- B) साल (Sal)
- ✅ C) शहतूत (Mulberry) या विलो (Willow) (सही उत्तर)
- D) चीड़ (Pine)
💡 डिटेल Explanation:
खेल के सामान बनाने के लिए ऐसी लकड़ी की आवश्यकता होती है जो झटके (Shock / Impact) को आसानी से सोख सके, हल्की हो और मुड़ने पर आसानी से न टूटे (लचीली हो)। इसके लिए शहतूत (Mulberry) और विलो (Willow - विशेषकर कश्मीर विलो क्रिकेट बैट के लिए) की लकड़ी दुनिया भर में सबसे प्रसिद्ध है।
खेल के सामान बनाने के लिए ऐसी लकड़ी की आवश्यकता होती है जो झटके (Shock / Impact) को आसानी से सोख सके, हल्की हो और मुड़ने पर आसानी से न टूटे (लचीली हो)। इसके लिए शहतूत (Mulberry) और विलो (Willow - विशेषकर कश्मीर विलो क्रिकेट बैट के लिए) की लकड़ी दुनिया भर में सबसे प्रसिद्ध है।
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Q679: ईंट की चिनाई में, यदि किसी पूरी ईंट को उसकी लंबाई के आर-पार (Transversely / Across the width) काट दिया जाए, तो प्राप्त होने वाले टुकड़े को क्या कहा जाता है?
- A) क्लोजर (Closer)
- ✅ B) बैट (Bat) (सही उत्तर)
- C) स्क्विंट (Squint)
- D) कॉरबेल (Corbel)
💡 डिटेल Explanation:
जब ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर काटा जाता है, तो उसे 'क्लोजर' कहते हैं। लेकिन जब ईंट को चौड़ाई के आर-पार (Transversely) काटा जाता है, तो उस टुकड़े को 'बैट' (Bat) कहते हैं। यदि ईंट को ठीक बीच से काटा जाए तो वह 'हाफ बैट' (Half bat) कहलाता है, और यदि एक-चौथाई काटा जाए तो 'थ्री-क्वार्टर बैट' (3/4 Bat) कहलाता है।
जब ईंट को उसकी लंबाई के समानांतर काटा जाता है, तो उसे 'क्लोजर' कहते हैं। लेकिन जब ईंट को चौड़ाई के आर-पार (Transversely) काटा जाता है, तो उस टुकड़े को 'बैट' (Bat) कहते हैं। यदि ईंट को ठीक बीच से काटा जाए तो वह 'हाफ बैट' (Half bat) कहलाता है, और यदि एक-चौथाई काटा जाए तो 'थ्री-क्वार्टर बैट' (3/4 Bat) कहलाता है।
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Q680: 680 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, सामान्य मौसम की स्थिति में 'साधारण पोर्टलैंड सीमेंट' (OPC) से बने कंक्रीट की तराई (Curing) की 'न्यूनतम अवधि' कितनी होनी चाहिए?
- A) 3 दिन
- ✅ B) 7 दिन (सही उत्तर)
- C) 14 दिन
- D) 28 दिन
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के क्लॉज़ 13.5.1 के अनुसार, सामान्य मौसम (Normal weather conditions) में साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए कम से कम 7 दिनों तक लगातार तराई (Curing) करना अनिवार्य है। हालाँकि, यदि मौसम बहुत गर्म या शुष्क (Hot and dry) है, या यदि कंक्रीट में मिनरल एडमिक्सचर (जैसे फ्लाई ऐश) मिलाया गया है, तो यह अवधि बढ़ाकर न्यूनतम 10 से 14 दिन कर दी जाती है।
IS 456 के क्लॉज़ 13.5.1 के अनुसार, सामान्य मौसम (Normal weather conditions) में साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए कम से कम 7 दिनों तक लगातार तराई (Curing) करना अनिवार्य है। हालाँकि, यदि मौसम बहुत गर्म या शुष्क (Hot and dry) है, या यदि कंक्रीट में मिनरल एडमिक्सचर (जैसे फ्लाई ऐश) मिलाया गया है, तो यह अवधि बढ़ाकर न्यूनतम 10 से 14 दिन कर दी जाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 135 (Q681 - Q685)
Q681: सीमेंट के 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) के परीक्षण में विकाट उपकरण की सुई का सीमेंट पेस्ट के पेंदे (Bottom) से कितना ऊपर रुकना 'प्रारंभिक जमाव' माना जाता है?
- A) 1-2 mm
- ✅ B) 5-7 mm (सही उत्तर)
- C) 10-12 mm
- D) सुई पेंदे को स्पर्श करनी चाहिए
💡 डिटेल Explanation:
प्रारंभिक जमाव काल वह समय है जब सीमेंट पेस्ट इतना गाढ़ा हो जाता है कि 1 mm² की सुई सांचे के नीचे से 5 mm से 7 mm के बीच रुक जाती है। इसका अर्थ है कि सीमेंट अपनी सुघट्यता खोने लगा है।
प्रारंभिक जमाव काल वह समय है जब सीमेंट पेस्ट इतना गाढ़ा हो जाता है कि 1 mm² की सुई सांचे के नीचे से 5 mm से 7 mm के बीच रुक जाती है। इसका अर्थ है कि सीमेंट अपनी सुघट्यता खोने लगा है।
Q682: ईंट की चिनाई में 'कॉर्बेलिंग' (Corbelling) का उपयोग मुख्य रूप से किस निर्माण कार्य में किया जाता है?
- A) दीवार को सीधा रखने के लिए
- B) नीव को मजबूत बनाने के लिए
- ✅ C) चिनाई को धीरे-धीरे बाहर की ओर उभारने (Projecting) के लिए (सही उत्तर)
- D) केवल सजावट के लिए
💡 डिटेल Explanation:
कॉर्बेलिंग ईंट की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें प्रत्येक ईंट को अपने नीचे वाली ईंट से थोड़ा आगे बाहर की ओर निकाला जाता है। इसका उपयोग छज्जे (Cornice), मेहराब (Arch) या चिमनी के आधार को सहारा देने के लिए किया जाता है।
कॉर्बेलिंग ईंट की एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें प्रत्येक ईंट को अपने नीचे वाली ईंट से थोड़ा आगे बाहर की ओर निकाला जाता है। इसका उपयोग छज्जे (Cornice), मेहराब (Arch) या चिमनी के आधार को सहारा देने के लिए किया जाता है।
Q683: इमारती लकड़ी (Timber) को खराब करने वाले 'दीमक' (Termites) के प्रति सबसे अधिक प्राकृतिक प्रतिरोध (Natural Resistance) किस लकड़ी में होता है?
- A) देवदार
- B) चीड़
- ✅ C) सागौन (Teak) (सही उत्तर)
- D) सफेदा (Eucalyptus)
💡 डिटेल Explanation:
सागौन (Teak) की लकड़ी में प्राकृतिक तेल और रसायनों की मात्रा अधिक होती है, जो इसे दीमक और फफूंदी के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोधी (Resistant) बनाते हैं। इसीलिए सागौन के फर्नीचर को सबसे अधिक टिकाऊ और महंगा माना जाता है।
सागौन (Teak) की लकड़ी में प्राकृतिक तेल और रसायनों की मात्रा अधिक होती है, जो इसे दीमक और फफूंदी के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोधी (Resistant) बनाते हैं। इसीलिए सागौन के फर्नीचर को सबसे अधिक टिकाऊ और महंगा माना जाता है।
Q684: निम्नलिखित में से किस रंग के पेंट में 'सीसा' (Lead) युक्त पिगमेंट का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है?
- ✅ A) वाइट लेड पेंट (White Lead Paint) (सही उत्तर)
- B) एल्युमिनियम पेंट
- C) डिस्टेंपर
- D) प्लास्टिक इमल्शन पेंट
💡 डिटेल Explanation:
'वाइट लेड' (White Lead) एक पारंपरिक बेस है, लेकिन इसमें मौजूद सीसा (Lead) एक विषाक्त पदार्थ है। यह श्वास या त्वचा के माध्यम से शरीर में जाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए आजकल वाइट लेड पेंट पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है और जिंक ऑक्साइड जैसे गैर-विषाक्त विकल्प अपनाए जा रहे हैं।
'वाइट लेड' (White Lead) एक पारंपरिक बेस है, लेकिन इसमें मौजूद सीसा (Lead) एक विषाक्त पदार्थ है। यह श्वास या त्वचा के माध्यम से शरीर में जाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए आजकल वाइट लेड पेंट पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है और जिंक ऑक्साइड जैसे गैर-विषाक्त विकल्प अपनाए जा रहे हैं।
Q685: पत्थरों के 'कठोरता परीक्षण' (Hardness Test) में, 'डोरी की मशीन' (Dorry's Machine) का परिणाम किस रूप में व्यक्त किया जाता है?
- ✅ A) कठोरता गुणांक (Coefficient of Hardness) (सही उत्तर)
- B) संपीडन सामर्थ्य (N/mm²)
- C) जल अवशोषण प्रतिशत
- D) आपेक्षिक घनत्व
💡 डिटेल Explanation:
डोरी मशीन में घिसने वाले नुकसान (Loss in weight) के आधार पर कठोरता गुणांक निकाला जाता है। सूत्र: कठोरता गुणांक = 20 - (Loss in weight in grams / 3)। यह मान जितना अधिक होगा, पत्थर उतना ही कठोर होगा।
डोरी मशीन में घिसने वाले नुकसान (Loss in weight) के आधार पर कठोरता गुणांक निकाला जाता है। सूत्र: कठोरता गुणांक = 20 - (Loss in weight in grams / 3)। यह मान जितना अधिक होगा, पत्थर उतना ही कठोर होगा।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 136 (Q686 - Q690)
Q686: साधारण कंक्रीट के लिए 'कंक्रीट का आदर्श जल-सीमेंट अनुपात' (W/C ratio) सामान्यतः किस रेंज में रखा जाता है?
- A) 0.25 - 0.35
- ✅ B) 0.40 - 0.60 (सही उत्तर)
- C) 0.65 - 0.80
- D) 0.90 - 1.0
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की ताकत और सुकार्यता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए, सामान्य RCC कार्यों के लिए वाटर-सीमेंट अनुपात 0.40 से 0.60 के बीच रखा जाता है। यदि यह 0.60 से अधिक होता है, तो कंक्रीट कमजोर हो जाती है और उसमें दरारें पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
कंक्रीट की ताकत और सुकार्यता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए, सामान्य RCC कार्यों के लिए वाटर-सीमेंट अनुपात 0.40 से 0.60 के बीच रखा जाता है। यदि यह 0.60 से अधिक होता है, तो कंक्रीट कमजोर हो जाती है और उसमें दरारें पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
Q687: ईंट चिनाई में 'किंग क्लोजर' (King Closer) का उपयोग करने से दीवार की मजबूती पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- A) दीवार कमजोर हो जाती है
- B) यह मजबूती को प्रभावित नहीं करता
- ✅ C) यह दीवार के कोनों को मजबूती से जोड़ता है और बॉन्ड बनाए रखता है (सही उत्तर)
- D) यह केवल ईंटों को बचाने के लिए उपयोग होता है
💡 डिटेल Explanation:
किंग क्लोजर का उपयोग ईंट के बॉन्ड (जैसे इंग्लिश बॉन्ड) को सही रखने के लिए किया जाता है ताकि ईंटों के लंबवत जोड़ (Vertical joints) एक सीध में न आएं। यह दीवार के कोनों पर मजबूती प्रदान करता है।
किंग क्लोजर का उपयोग ईंट के बॉन्ड (जैसे इंग्लिश बॉन्ड) को सही रखने के लिए किया जाता है ताकि ईंटों के लंबवत जोड़ (Vertical joints) एक सीध में न आएं। यह दीवार के कोनों पर मजबूती प्रदान करता है।
Q688: 'सैपवुड' (Sapwood) का वह कौन सा भाग है जो पेड़ के तने में नई लकड़ी के रूप में लगातार विकसित होता रहता है?
- A) हार्टवुड
- ✅ B) कैम्बियम लेयर (Cambium Layer) (सही उत्तर)
- C) पिथ
- D) आउटर बार्क
💡 डिटेल Explanation:
कैम्बियम परत (Cambium Layer) तने के चारों ओर की वह सक्रिय परत है जहाँ कोशिका विभाजन होता है। यह परत हर साल बाहर की ओर नई लकड़ी (सैपवुड) और अंदर की ओर नई छाल बनाती है।
कैम्बियम परत (Cambium Layer) तने के चारों ओर की वह सक्रिय परत है जहाँ कोशिका विभाजन होता है। यह परत हर साल बाहर की ओर नई लकड़ी (सैपवुड) और अंदर की ओर नई छाल बनाती है।
Q689: पेंट में प्रयुक्त होने वाला 'ड्रायर' (Drier) मुख्य रूप से कौन सी प्रक्रिया तेज करता है?
- A) पेंट का रंग गहरा करना
- ✅ B) पेंट के सूखने की प्रक्रिया (Oxidation / Drying) (सही उत्तर)
- C) पेंट को पतला करना
- D) पेंट को वॉटरप्रूफ बनाना
💡 डिटेल Explanation:
ऑयल पेंट हवा के संपर्क में आने पर तेल के ऑक्सीकरण (Oxidation) से सूखते हैं। ड्रायर्स (जैसे कोबाल्ट, मैंगनीज) इस प्रक्रिया में उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करते हैं और सूखने के समय को कम कर देते हैं।
ऑयल पेंट हवा के संपर्क में आने पर तेल के ऑक्सीकरण (Oxidation) से सूखते हैं। ड्रायर्स (जैसे कोबाल्ट, मैंगनीज) इस प्रक्रिया में उत्प्रेरक (Catalyst) के रूप में कार्य करते हैं और सूखने के समय को कम कर देते हैं।
Q690: 690 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: ईंट के परीक्षणों में 'क्रशिंग स्ट्रेंथ' (Compressive Strength) की जांच करने के लिए ईंट को किस स्थिति में रखा जाता है?
- A) खड़ी स्थिति में (On edge)
- ✅ B) सपाट स्थिति में (Flat, so that load is applied on frog) (सही उत्तर)
- C) तिरछी स्थिति में (Diagonally)
- D) किसी भी स्थिति में
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की क्रशिंग स्ट्रेंथ मापने के लिए उसे पहले 24 घंटे पानी में डुबोया जाता है। फिर उसे टेस्टिंग मशीन में इस तरह रखा जाता है कि उसका 'फ्रॉग' (गड्ढा) वाला हिस्सा ऊपर की तरफ हो और उस पर समान रूप से भार (Load) डाला जाए। फ्रॉग को सीमेंट मोर्टार से भरकर समतल करना आवश्यक है ताकि भार का वितरण समान हो।
ईंट की क्रशिंग स्ट्रेंथ मापने के लिए उसे पहले 24 घंटे पानी में डुबोया जाता है। फिर उसे टेस्टिंग मशीन में इस तरह रखा जाता है कि उसका 'फ्रॉग' (गड्ढा) वाला हिस्सा ऊपर की तरफ हो और उस पर समान रूप से भार (Load) डाला जाए। फ्रॉग को सीमेंट मोर्टार से भरकर समतल करना आवश्यक है ताकि भार का वितरण समान हो।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 137 (Q691 - Q695)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q691: कंक्रीट मिश्रण में 'जल-सीमेंट अनुपात' (Water-Cement Ratio) कम करने का सबसे सीधा और सकारात्मक प्रभाव किस पर पड़ता है?
- A) कंक्रीट की सुकार्यता (Workability) बढ़ जाती है
- ✅ B) कंक्रीट की संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength) बढ़ जाती है (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट का सिकुड़ना (Shrinkage) बढ़ जाता है
- D) कंक्रीट का वजन कम हो जाता है
💡 डिटेल Explanation:
अब्राम के नियम (Abram's Law) के अनुसार, कंक्रीट की ताकत केवल उसके जल-सीमेंट अनुपात पर निर्भर करती है। जल-सीमेंट अनुपात जितना कम होगा, कंक्रीट की ताकत उतनी ही अधिक होगी। हालांकि, बहुत कम पानी मिलाने से सुकार्यता (Workability) कम हो सकती है, जिसे प्लास्टिसाइज़र मिलाकर ठीक किया जाता है।
अब्राम के नियम (Abram's Law) के अनुसार, कंक्रीट की ताकत केवल उसके जल-सीमेंट अनुपात पर निर्भर करती है। जल-सीमेंट अनुपात जितना कम होगा, कंक्रीट की ताकत उतनी ही अधिक होगी। हालांकि, बहुत कम पानी मिलाने से सुकार्यता (Workability) कम हो सकती है, जिसे प्लास्टिसाइज़र मिलाकर ठीक किया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam
Q692: ईंट की चिनाई में 'हाफ बैट' (Half Bat) से क्या तात्पर्य है?
- A) ईंट को उसकी लंबाई के अनुदिश (Longitudinally) आधा काटना
- ✅ B) ईंट को उसकी चौड़ाई के आर-पार (Transversely) ठीक बीच से आधा काटना (सही उत्तर)
- C) ईंट का केवल एक कोना काटना
- D) ईंट का 1/4 हिस्सा काटना
💡 डिटेल Explanation:
जब पूरी ईंट को उसकी चौड़ाई के आर-पार (Transversely) दो बराबर हिस्सों में काटा जाता है, तो प्राप्त प्रत्येक टुकड़े को 'हाफ बैट' (Half Bat) कहा जाता है। (यदि ईंट को लंबाई के अनुदिश आधा काटा जाए, तो उसे 'क्वीन क्लोजर' कहा जाता है)।
जब पूरी ईंट को उसकी चौड़ाई के आर-पार (Transversely) दो बराबर हिस्सों में काटा जाता है, तो प्राप्त प्रत्येक टुकड़े को 'हाफ बैट' (Half Bat) कहा जाता है। (यदि ईंट को लंबाई के अनुदिश आधा काटा जाए, तो उसे 'क्वीन क्लोजर' कहा जाता है)।
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Q693: 'प्लाईवुड' (Plywood) के निर्माण में, तनाव को संतुलित करने और उसे मुड़ने (Warping) से रोकने के लिए लकड़ी की परतों (Veneers) की संख्या हमेशा कैसी रखी जाती है?
- A) हमेशा सम (Even) संख्या में (जैसे 2, 4, 6)
- ✅ B) हमेशा विषम (Odd) संख्या में (जैसे 3, 5, 7) (सही उत्तर)
- C) हमेशा 10 से अधिक
- D) सम या विषम कोई भी हो सकती है
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड हमेशा विषम (Odd) संख्या की परतों (जैसे 3-प्लाई, 5-प्लाई, 7-प्लाई) में बनाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मध्य परत (Core) के दोनों ओर समान संख्या में परतें हों। यह सममिति (Symmetry) लकड़ी के सिकुड़ने और फैलने से उत्पन्न होने वाले तनाव को संतुलित करती है, जिससे प्लाईवुड टेढ़ा (Warp) नहीं होता।
प्लाईवुड हमेशा विषम (Odd) संख्या की परतों (जैसे 3-प्लाई, 5-प्लाई, 7-प्लाई) में बनाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मध्य परत (Core) के दोनों ओर समान संख्या में परतें हों। यह सममिति (Symmetry) लकड़ी के सिकुड़ने और फैलने से उत्पन्न होने वाले तनाव को संतुलित करती है, जिससे प्लाईवुड टेढ़ा (Warp) नहीं होता।
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Q694: दरवाजे और खिड़कियों के फ्रेम में लगने वाली लकड़ी की सबसे बड़ी दुश्मन 'सफेद चींटियों' (White Ants) को तकनीकी रूप से क्या कहा जाता है?
- A) बीटल (Beetles)
- B) मरीन बोरर (Marine Borers)
- ✅ C) दीमक (Termites) (सही उत्तर)
- D) फंगी (Fungi)
💡 डिटेल Explanation:
दीमक (Termites) को आम बोलचाल में 'सफेद चींटियां' (White Ants) कहा जाता है। ये लकड़ी के सेल्युलोज को खाती हैं और लकड़ी को अंदर ही अंदर पूरी तरह से खोखला कर देती हैं। दीमक से बचाव के लिए इमारती लकड़ी पर क्रिओसोट तेल (Creosote) या एंटी-टर्माइट रसायनों का उपचार किया जाता है।
दीमक (Termites) को आम बोलचाल में 'सफेद चींटियां' (White Ants) कहा जाता है। ये लकड़ी के सेल्युलोज को खाती हैं और लकड़ी को अंदर ही अंदर पूरी तरह से खोखला कर देती हैं। दीमक से बचाव के लिए इमारती लकड़ी पर क्रिओसोट तेल (Creosote) या एंटी-टर्माइट रसायनों का उपचार किया जाता है।
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Q695: प्रयोगशाला में सीमेंट का 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) निर्धारित करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?
- ✅ A) ली-चेटेलियर फ्लास्क (Le Chatelier's Flask) (सही उत्तर)
- B) विकाट उपकरण (Vicat Apparatus)
- C) ब्लेंस उपकरण (Blaine's Apparatus)
- D) पिक्नोमीटर (Pycnometer)
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (आमतौर पर 3.15) मापने के लिए ली-चेटेलियर फ्लास्क (Le Chatelier's Flask) का उपयोग किया जाता है। इस परीक्षण में पानी की जगह मिट्टी के तेल (Kerosene) या नेफ्था का उपयोग किया जाता है, क्योंकि सीमेंट पानी के साथ तुरंत प्रतिक्रिया (Hydration) कर लेता है, लेकिन मिट्टी के तेल के साथ नहीं।
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (आमतौर पर 3.15) मापने के लिए ली-चेटेलियर फ्लास्क (Le Chatelier's Flask) का उपयोग किया जाता है। इस परीक्षण में पानी की जगह मिट्टी के तेल (Kerosene) या नेफ्था का उपयोग किया जाता है, क्योंकि सीमेंट पानी के साथ तुरंत प्रतिक्रिया (Hydration) कर लेता है, लेकिन मिट्टी के तेल के साथ नहीं।
🏆 बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - महा-पड़ाव: भाग 138 (Q696 - Q700) 🏆
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q696: निर्माण स्थल (Construction site) पर, 1 घन मीटर (1 m³) आयतन में 50 किलोग्राम वाले सीमेंट के कितने बैग (Bags) आते हैं?
- A) 20 बैग
- B) 25.5 बैग
- ✅ C) 28.8 बैग (लगभग 30 बैग) (सही उत्तर)
- D) 34.5 बैग
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का थोक घनत्व 1440 kg/m³ होता है। एक सीमेंट बैग का वजन 50 kg होता है।
1 बैग का आयतन = 50 / 1440 = 0.0347 m³.
इसलिए, 1 घन मीटर (1 m³) में बैगों की संख्या = 1 / 0.0347 = 28.8 बैग। निर्माण अनुमानों में इसे अक्सर राउंड फिगर में लिया जाता है।
सीमेंट का थोक घनत्व 1440 kg/m³ होता है। एक सीमेंट बैग का वजन 50 kg होता है।
1 बैग का आयतन = 50 / 1440 = 0.0347 m³.
इसलिए, 1 घन मीटर (1 m³) में बैगों की संख्या = 1 / 0.0347 = 28.8 बैग। निर्माण अनुमानों में इसे अक्सर राउंड फिगर में लिया जाता है।
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Q697: चूना पत्थर को भट्ठे में पकाने के बाद प्राप्त होने वाले शुद्ध और 'बिना बुझे चूने' (Quick Lime) का रासायनिक सूत्र (Chemical formula) क्या है?
- A) CaCO₃
- ✅ B) CaO (कैल्शियम ऑक्साइड) (सही उत्तर)
- C) Ca(OH)₂
- D) CaSO₄
💡 डिटेल Explanation:
जब चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट - CaCO₃) को लगभग 900°C पर पकाया जाता है (Calcination), तो उसमें से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस निकल जाती है। पीछे जो बचता है वह कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) होता है, जिसे 'क्विक लाइम' या बिना बुझा चूना कहा जाता है।
जब चूना पत्थर (कैल्शियम कार्बोनेट - CaCO₃) को लगभग 900°C पर पकाया जाता है (Calcination), तो उसमें से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस निकल जाती है। पीछे जो बचता है वह कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) होता है, जिसे 'क्विक लाइम' या बिना बुझा चूना कहा जाता है।
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Q698: ताजी कटी हुई लकड़ी (Timber) की 'सीजनिंग' (Seasoning) करने का सबसे प्राथमिक और मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- A) लकड़ी का वजन और घनत्व बढ़ाना
- B) लकड़ी के प्राकृतिक रंग को बदलना
- ✅ C) लकड़ी के भीतर मौजूद नमी (Moisture/Sap) को एक सुरक्षित स्तर तक कम करना (सही उत्तर)
- D) लकड़ी को आसानी से पेंट करने योग्य बनाना
💡 डिटेल Explanation:
पेड़ को काटने के बाद उसमें बहुत अधिक रस (Sap) और पानी होता है। सीजनिंग वह नियंत्रित प्रक्रिया है जिससे इस नमी को 10-15% तक सुखाया जाता है। ऐसा करने से लकड़ी सिकुड़ती नहीं है, उसमें फफूंदी नहीं लगती, और उसका वजन कम होने के साथ-साथ मजबूती (Strength) बढ़ जाती है।
पेड़ को काटने के बाद उसमें बहुत अधिक रस (Sap) और पानी होता है। सीजनिंग वह नियंत्रित प्रक्रिया है जिससे इस नमी को 10-15% तक सुखाया जाता है। ऐसा करने से लकड़ी सिकुड़ती नहीं है, उसमें फफूंदी नहीं लगती, और उसका वजन कम होने के साथ-साथ मजबूती (Strength) बढ़ जाती है।
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Q699: पेंट (Paint) के घटकों में, 'पिगमेंट' (Pigment) मिलाने का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) पेंट को जल्दी सुखाना
- B) पेंट को पतला (Thin) करके फैलने में मदद करना
- ✅ C) पेंट को मनचाहा रंग (Color) और अपारदर्शिता (Opacity) प्रदान करना (सही उत्तर)
- D) पेंट को जलरोधी (Waterproof) बनाना
💡 डिटेल Explanation:
पेंट का बेस (Base) आमतौर पर सफेद होता है। पेंट को उसका विशिष्ट रंग (Color) देने के लिए उसमें पिगमेंट्स (Pigments) मिलाए जाते हैं। पिगमेंट्स बारीक पिसे हुए पाउडर होते हैं जो रंग देने के साथ-साथ पेंट की परत को अपारदर्शी (Opaque) बनाते हैं, जिससे पुरानी सतह पूरी तरह छिप जाती है।
पेंट का बेस (Base) आमतौर पर सफेद होता है। पेंट को उसका विशिष्ट रंग (Color) देने के लिए उसमें पिगमेंट्स (Pigments) मिलाए जाते हैं। पिगमेंट्स बारीक पिसे हुए पाउडर होते हैं जो रंग देने के साथ-साथ पेंट की परत को अपारदर्शी (Opaque) बनाते हैं, जिससे पुरानी सतह पूरी तरह छिप जाती है।
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Q700: 🌟 700 MCQ का महा-पड़ाव पूरा! 🌟 प्रश्न: साइट पर ताजी कंक्रीट बिछाने के बाद उसकी 'तराई' (Curing of Concrete) करने का सही समय कब शुरू होता है?
- A) कंक्रीट बिछाने के तुरंत बाद
- ✅ B) कंक्रीट के 'प्रारंभिक जमाव' (Initial Setting) के बाद, जब सतह इतनी कठोर हो जाए कि पानी से खराब न हो (सही उत्तर)
- C) कंक्रीट के अंतिम जमाव (Final Setting - 10 घंटे) के बाद
- D) कंक्रीट बिछाने के 24 घंटे बाद
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट बिछाने के तुरंत बाद पानी डालने से सीमेंट बह सकता है। इसलिए तराई (Curing) तब शुरू की जाती है जब कंक्रीट की सतह से अतिरिक्त पानी (Bleeding water) सूख जाए और कंक्रीट प्रारंभिक जमाव (Initial setting) प्राप्त कर ले, ताकि पानी का हल्का छिड़काव सतह को नुकसान न पहुंचाए।
कंक्रीट बिछाने के तुरंत बाद पानी डालने से सीमेंट बह सकता है। इसलिए तराई (Curing) तब शुरू की जाती है जब कंक्रीट की सतह से अतिरिक्त पानी (Bleeding water) सूख जाए और कंक्रीट प्रारंभिक जमाव (Initial setting) प्राप्त कर ले, ताकि पानी का हल्का छिड़काव सतह को नुकसान न पहुंचाए।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 139 (Q701 - Q705)
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Q701: निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग होने वाले 'साधारण पोर्टलैंड सीमेंट' (OPC) का मानक 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) सामान्यतः कितना होता है?
- A) 2.65
- B) 2.80
- ✅ C) 3.15 (सही उत्तर)
- D) 3.50
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) यह दर्शाता है कि वह पानी की तुलना में कितना भारी है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट के लिए यह मान 3.15 होता है। इसकी जांच 'ली-चेटेलियर फ्लास्क' (Le Chatelier's Flask) का उपयोग करके मिट्टी के तेल (Kerosene) की मदद से की जाती है।
सीमेंट का विशिष्ट गुरुत्व (Specific Gravity) यह दर्शाता है कि वह पानी की तुलना में कितना भारी है। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट के लिए यह मान 3.15 होता है। इसकी जांच 'ली-चेटेलियर फ्लास्क' (Le Chatelier's Flask) का उपयोग करके मिट्टी के तेल (Kerosene) की मदद से की जाती है।
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Q702: एक अच्छी ईंट बनाने वाली मिट्टी (Brick Earth) में 'सिलिका' (Silica - Sand) की आदर्श मात्रा (Percentage) कितनी होनी चाहिए?
- A) 20% से 30%
- B) 30% से 40%
- ✅ C) 50% से 60% (सही उत्तर)
- D) 70% से 80%
💡 डिटेल Explanation:
ईंट की मिट्टी का सबसे बड़ा हिस्सा सिलिका (50-60%) होता है। यह ईंट को सिकुड़ने, दरकने (Cracking) और टेढ़ा होने (Warping) से रोकता है, साथ ही ईंट को उसका आकार (Shape) बनाए रखने में मदद करता है। यदि यह बहुत अधिक हो जाए तो ईंट भंगुर (Brittle) हो जाती है।
ईंट की मिट्टी का सबसे बड़ा हिस्सा सिलिका (50-60%) होता है। यह ईंट को सिकुड़ने, दरकने (Cracking) और टेढ़ा होने (Warping) से रोकता है, साथ ही ईंट को उसका आकार (Shape) बनाए रखने में मदद करता है। यदि यह बहुत अधिक हो जाए तो ईंट भंगुर (Brittle) हो जाती है।
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Q703: इमारती लकड़ी (Timber) में प्राकृतिक बलों के कारण होने वाला 'अपसेट' (Upset) नामक दोष किस वजह से उत्पन्न होता है?
- A) अत्यधिक धूप के कारण छाल का फटना
- ✅ B) तेज हवाओं (Wind) या अनुचित कटाई के कारण लकड़ी के रेशों (Fibers) का कुचल जाना (सही उत्तर)
- C) दीमक द्वारा रेशों को खाना
- D) फफूंदी के कारण लकड़ी का सड़ना
💡 डिटेल Explanation:
जब युवा पेड़ को तेज आंधियों (Wind) या तूफानों का सामना करना पड़ता है, या जब पेड़ को काटते समय वह झटके से गिरता है, तो उसके तने के अंदर के रेशे (Fibers) कुचल कर टूट जाते हैं। लकड़ी के अनुदैर्ध्य (Longitudinal) रेशों के इस तरह कुचल जाने के दोष को 'अपसेट' (Upset) कहा जाता है।
जब युवा पेड़ को तेज आंधियों (Wind) या तूफानों का सामना करना पड़ता है, या जब पेड़ को काटते समय वह झटके से गिरता है, तो उसके तने के अंदर के रेशे (Fibers) कुचल कर टूट जाते हैं। लकड़ी के अनुदैर्ध्य (Longitudinal) रेशों के इस तरह कुचल जाने के दोष को 'अपसेट' (Upset) कहा जाता है।
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Q704: 'अत्यंत कम सुकार्यता' (Very Low Workability) वाली कंक्रीट (जैसे रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट) की सुकार्यता मापने के लिए कौन सा परीक्षण सबसे अधिक उपयुक्त और सटीक होता है?
- A) स्लंप टेस्ट (Slump Test)
- B) कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट
- ✅ C) वी-बी कंसिस्टोमीटर टेस्ट (Vee-Bee Consistometer Test) (सही उत्तर)
- D) फ्लो टेबल टेस्ट
💡 डिटेल Explanation:
सूखी और अत्यंत कठोर (Stiff / Very low workability) कंक्रीट के लिए स्लंप टेस्ट 'शून्य स्लंप' दिखाता है। ऐसी कंक्रीट के लिए वी-बी कंसिस्टोमीटर (Vee-Bee) परीक्षण किया जाता है, जिसमें कंक्रीट को वाइब्रेट करके शंक्वाकार (Conical) से बेलनाकार (Cylindrical) आकार में बदलने में लगने वाले समय (Vee-Bee Seconds) को मापा जाता है।
सूखी और अत्यंत कठोर (Stiff / Very low workability) कंक्रीट के लिए स्लंप टेस्ट 'शून्य स्लंप' दिखाता है। ऐसी कंक्रीट के लिए वी-बी कंसिस्टोमीटर (Vee-Bee) परीक्षण किया जाता है, जिसमें कंक्रीट को वाइब्रेट करके शंक्वाकार (Conical) से बेलनाकार (Cylindrical) आकार में बदलने में लगने वाले समय (Vee-Bee Seconds) को मापा जाता है।
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Q705: 705 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पेंट उद्योग में 'लिथोपोन' (Lithopone) नामक सामग्री का उपयोग मुख्य रूप से किस घटक के रूप में किया जाता है?
- ✅ A) बेस (Base) (सही उत्तर)
- B) वाहन (Vehicle)
- C) थिनर (Thinner)
- D) ड्रायर (Drier)
💡 डिटेल Explanation:
लिथोपोन (Lithopone) बेरियम सल्फेट और जिंक सल्फाइड का एक मिश्रण है। व्हाइट लेड और जिंक ऑक्साइड की तरह, इसका उपयोग भी पेंट में एक सफेद बेस (Base) के रूप में किया जाता है। यह काफी सस्ता होता है लेकिन इसका उपयोग केवल अंदरूनी (Interior) पेंटिंग के लिए किया जाता है क्योंकि यह सूरज की रोशनी में रंग बदल देता है।
लिथोपोन (Lithopone) बेरियम सल्फेट और जिंक सल्फाइड का एक मिश्रण है। व्हाइट लेड और जिंक ऑक्साइड की तरह, इसका उपयोग भी पेंट में एक सफेद बेस (Base) के रूप में किया जाता है। यह काफी सस्ता होता है लेकिन इसका उपयोग केवल अंदरूनी (Interior) पेंटिंग के लिए किया जाता है क्योंकि यह सूरज की रोशनी में रंग बदल देता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 140 (Q706 - Q710)
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Q706: भारतीय मानकों (IS 269) के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) किसी भी स्थिति में किससे कम नहीं होना चाहिए?
- A) 10 मिनट
- ✅ B) 30 मिनट (सही उत्तर)
- C) 60 मिनट
- D) 600 मिनट
💡 डिटेल Explanation:
प्रारंभिक जमाव काल वह न्यूनतम समय है जब तक कंक्रीट अपनी सुघट्यता (Plasticity) बनाए रखती है। OPC के लिए यह कम से कम 30 मिनट होना चाहिए ताकि कंक्रीट को मिलाने, ढोने और सांचे में बिछाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। (इसका अंतिम जमाव काल 600 मिनट या 10 घंटे होता है)।
प्रारंभिक जमाव काल वह न्यूनतम समय है जब तक कंक्रीट अपनी सुघट्यता (Plasticity) बनाए रखती है। OPC के लिए यह कम से कम 30 मिनट होना चाहिए ताकि कंक्रीट को मिलाने, ढोने और सांचे में बिछाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। (इसका अंतिम जमाव काल 600 मिनट या 10 घंटे होता है)।
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Q707: इंजीनियरिंग कार्यों के लिए उपयुक्त एक 'अच्छे भवन निर्माण पत्थर' (Good Building Stone) का 'विशिष्ट गुरुत्व' (Specific Gravity) सामान्यतः किससे अधिक होना चाहिए?
- A) 1.5
- B) 2.0
- C) 2.4
- ✅ D) 2.7 (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व जितना अधिक होगा, पत्थर उतना ही अधिक सघन (Dense), भारी और मजबूत होगा। भवन निर्माण (जैसे चिनाई, नींव, दीवार) के लिए एक अच्छे पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व 2.7 से अधिक होना चाहिए। (ग्रेनाइट और बेसाल्ट का विशिष्ट गुरुत्व 2.6 से 2.9 के बीच होता है)।
पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व जितना अधिक होगा, पत्थर उतना ही अधिक सघन (Dense), भारी और मजबूत होगा। भवन निर्माण (जैसे चिनाई, नींव, दीवार) के लिए एक अच्छे पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व 2.7 से अधिक होना चाहिए। (ग्रेनाइट और बेसाल्ट का विशिष्ट गुरुत्व 2.6 से 2.9 के बीच होता है)।
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Q708: व्यावसायिक बाजार में 'प्लाईवुड' (Plywood) के बोर्ड्स को किस मुख्य आधार पर निर्दिष्ट (Specified) या बेचा जाता है?
- A) प्लाईवुड के वजन के आधार पर
- ✅ B) प्लाईवुड की मोटाई (Thickness) के आधार पर (सही उत्तर)
- C) परतों (Veneers) की संख्या के आधार पर
- D) प्लाईवुड के आयतन (Volume) के आधार पर
💡 डिटेल Explanation:
बाजार में प्लाईवुड को मुख्य रूप से उसकी मोटाई (Thickness) के आधार पर पहचाना और बेचा जाता है, जैसे कि 3 mm, 4 mm, 6 mm, 12 mm, 18 mm आदि मोटाई का प्लाईवुड। लकड़ी के प्रकार (जैसे टीक, कमर्शियल) और ग्रेड (BWR, MR) का भी महत्व होता है, लेकिन प्राथमिक विशिष्टता मोटाई ही है।
बाजार में प्लाईवुड को मुख्य रूप से उसकी मोटाई (Thickness) के आधार पर पहचाना और बेचा जाता है, जैसे कि 3 mm, 4 mm, 6 mm, 12 mm, 18 mm आदि मोटाई का प्लाईवुड। लकड़ी के प्रकार (जैसे टीक, कमर्शियल) और ग्रेड (BWR, MR) का भी महत्व होता है, लेकिन प्राथमिक विशिष्टता मोटाई ही है।
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Q709: ठंडे मौसम (Cold weather) में कंक्रीट की जलयोजन प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। ऐसे मौसम में कंक्रीट के जमने की गति को बढ़ाने के लिए किस 'एक्सीलरेटर' (Accelerator) का सबसे ज्यादा उपयोग होता है?
- A) जिप्सम (Gypsum)
- ✅ B) कैल्शियम क्लोराइड (Calcium Chloride - CaCl₂) (सही उत्तर)
- C) चीनी (Sugar)
- D) जिंक ऑक्साइड
💡 डिटेल Explanation:
ठंडे तापमान पर कंक्रीट कई दिनों तक नहीं जमती। कैल्शियम क्लोराइड (CaCl₂) एक बहुत प्रसिद्ध एक्सीलरेटर (त्वरक) है। इसे सीमेंट के वजन के 2% तक मिलाने से जलयोजन की गति तेज हो जाती है, गर्मी उत्पन्न होती है, और कंक्रीट जल्दी जम जाती है। (जिप्सम और चीनी इसके विपरीत 'रिटार्डर' का काम करते हैं)।
ठंडे तापमान पर कंक्रीट कई दिनों तक नहीं जमती। कैल्शियम क्लोराइड (CaCl₂) एक बहुत प्रसिद्ध एक्सीलरेटर (त्वरक) है। इसे सीमेंट के वजन के 2% तक मिलाने से जलयोजन की गति तेज हो जाती है, गर्मी उत्पन्न होती है, और कंक्रीट जल्दी जम जाती है। (जिप्सम और चीनी इसके विपरीत 'रिटार्डर' का काम करते हैं)।
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Q710: 710 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: ईंट या पत्थर की चिनाई में, ईंटों के बाहरी जोड़ों (Joints) को मौसम के प्रभाव (Rain/Frost) से बचाने और दीवार को सुंदर बनाने के लिए सीमेंट मोर्टार से भरने और फिनिश करने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
- A) प्लास्टरिंग (Plastering)
- B) ग्रोटिंग (Grouting)
- ✅ C) पॉइंटिंग (Pointing) (सही उत्तर)
- D) कोपिंग (Coping)
💡 डिटेल Explanation:
चिनाई के बाद, बाहरी जोड़ों (Joints) को 12-20 mm की गहराई तक खुरच कर निकाल दिया जाता है, और फिर उनमें उच्च गुणवत्ता वाला सीमेंट-बालू मोर्टार (आमतौर पर 1:2 या 1:3 अनुपात में) भरकर एक विशेष आकार (V-shaped, Flush, Weathered) दिया जाता है। इस प्रक्रिया को पॉइंटिंग (Pointing) या 'टीप करना' कहा जाता है।
चिनाई के बाद, बाहरी जोड़ों (Joints) को 12-20 mm की गहराई तक खुरच कर निकाल दिया जाता है, और फिर उनमें उच्च गुणवत्ता वाला सीमेंट-बालू मोर्टार (आमतौर पर 1:2 या 1:3 अनुपात में) भरकर एक विशेष आकार (V-shaped, Flush, Weathered) दिया जाता है। इस प्रक्रिया को पॉइंटिंग (Pointing) या 'टीप करना' कहा जाता है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 141 (Q711 - Q715)
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Q711: भारत में 'ब्रॉड गेज' (Broad Gauge) रेलवे ट्रैक के लिए उपयोग किए जाने वाले लकड़ी के स्लीपर (Wooden Sleeper) का मानक आकार क्या होता है?
- A) 200 cm × 20 cm × 10 cm
- B) 250 cm × 25 cm × 15 cm
- ✅ C) 275 cm × 25 cm × 13 cm (सही उत्तर)
- D) 300 cm × 30 cm × 15 cm
💡 डिटेल Explanation:
भारतीय रेलवे में ब्रॉड गेज (BG) के लिए लकड़ी के स्लीपर का मानक आकार 2.75 m × 25 cm × 13 cm निर्धारित है। मीटर गेज (MG) के लिए यह 1.83 m × 20 cm × 11 cm और नैरो गेज (NG) के लिए 1.5 m × 15 cm × 10 cm होता है। इसके लिए साल (Sal) और देवदार जैसी टिकाऊ लकड़ी का उपयोग किया जाता है।
भारतीय रेलवे में ब्रॉड गेज (BG) के लिए लकड़ी के स्लीपर का मानक आकार 2.75 m × 25 cm × 13 cm निर्धारित है। मीटर गेज (MG) के लिए यह 1.83 m × 20 cm × 11 cm और नैरो गेज (NG) के लिए 1.5 m × 15 cm × 10 cm होता है। इसके लिए साल (Sal) और देवदार जैसी टिकाऊ लकड़ी का उपयोग किया जाता है।
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Q712: कंक्रीट को बिछाते समय (Placing), 'सेग्रीगेशन' (Segregation) से बचने के लिए भारतीय मानकों के अनुसार कंक्रीट को अधिकतम कितनी ऊंचाई से गिराने की अनुमति दी जाती है?
- A) 0.5 मीटर
- B) 1.0 मीटर
- ✅ C) 1.5 मीटर (सही उत्तर)
- D) 2.0 मीटर
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के क्लॉज़ 13.2 के अनुसार, कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से फेंकने पर उसमें मौजूद भारी गिट्टी (Coarse aggregates) नीचे बैठ जाती है और सीमेंट-पानी अलग हो जाता है। इस अलगाव (Segregation) को रोकने के लिए, कंक्रीट गिराने की 'अधिकतम अनुमत ऊंचाई' 1.5 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
IS 456 के क्लॉज़ 13.2 के अनुसार, कंक्रीट को बहुत अधिक ऊंचाई से फेंकने पर उसमें मौजूद भारी गिट्टी (Coarse aggregates) नीचे बैठ जाती है और सीमेंट-पानी अलग हो जाता है। इस अलगाव (Segregation) को रोकने के लिए, कंक्रीट गिराने की 'अधिकतम अनुमत ऊंचाई' 1.5 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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Q713: पेंट निर्माण में 'एक्सटेंडर' (Extender) या 'अडल्टरेंट' (Adulterant) सामग्री मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
- ✅ A) पेंट का आयतन (Volume) बढ़ाना और उसकी लागत (Cost) कम करना (सही उत्तर)
- B) पेंट को जल्दी सुखाना
- C) पेंट का रंग निखारना
- D) पेंट को वॉटरप्रूफ बनाना
💡 डिटेल Explanation:
एक्सटेंडर्स सस्ते सफेद पाउडर (जैसे बेरियम सल्फेट, जिप्सम, सिलिका) होते हैं जिनमें रंग देने की क्षमता बहुत कम होती है। इन्हें पेंट के महंगे बेस (जैसे जिंक ऑक्साइड) के साथ इसलिए मिलाया जाता है ताकि पेंट का कुल आयतन और वजन बढ़ जाए और पेंट सस्ता हो जाए। यह पेंट की फिल्म को दरार पड़ने से भी बचाता है।
एक्सटेंडर्स सस्ते सफेद पाउडर (जैसे बेरियम सल्फेट, जिप्सम, सिलिका) होते हैं जिनमें रंग देने की क्षमता बहुत कम होती है। इन्हें पेंट के महंगे बेस (जैसे जिंक ऑक्साइड) के साथ इसलिए मिलाया जाता है ताकि पेंट का कुल आयतन और वजन बढ़ जाए और पेंट सस्ता हो जाए। यह पेंट की फिल्म को दरार पड़ने से भी बचाता है।
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Q714: ईंट बनाने वाली मिट्टी (Brick Earth) में 'चूने' (Lime) की 5% से कम की उचित मात्रा का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) ईंट को सुघट्यता (Plasticity) देना
- ✅ B) भट्ठे में पकाने के दौरान यह सिलिका को पिघलने (Fuse) में मदद करता है और कणों को बांधता है (सही उत्तर)
- C) ईंट को सिकुड़ने से रोकना
- D) ईंट को लाल रंग प्रदान करना
💡 डिटेल Explanation:
चूना (Lime) ईंट की मिट्टी में एक गालक या फ्लक्स (Flux) के रूप में कार्य करता है। ईंट को जब भट्ठे में पकाया जाता है, तो चूना सिलिका को कम तापमान पर पिघलने में मदद करता है। पिघला हुआ सिलिका मिट्टी के अन्य कणों को आपस में मजबूती से बांध लेता है, जिससे ईंट ठोस और मजबूत बनती है।
चूना (Lime) ईंट की मिट्टी में एक गालक या फ्लक्स (Flux) के रूप में कार्य करता है। ईंट को जब भट्ठे में पकाया जाता है, तो चूना सिलिका को कम तापमान पर पिघलने में मदद करता है। पिघला हुआ सिलिका मिट्टी के अन्य कणों को आपस में मजबूती से बांध लेता है, जिससे ईंट ठोस और मजबूत बनती है।
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Q715: 715 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) की तुलना में 'रैपिड हार्डनिंग सीमेंट' (Rapid Hardening Cement - RHC) का 'प्रारंभिक जमाव काल' (Initial Setting Time) कितना होता है?
- A) 5 मिनट
- B) 10 मिनट
- ✅ C) OPC के समान ही (न्यूनतम 30 मिनट) (सही उत्तर)
- D) 60 मिनट
💡 डिटेल Explanation:
रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) का अर्थ है "तेजी से ताकत पकड़ने वाला सीमेंट", न कि "तेजी से जमने (Quick Setting) वाला"। इसलिए RHC को भी मिलाने और बिछाने के लिए पर्याप्त समय चाहिए। इसका प्रारंभिक जमाव काल न्यूनतम 30 मिनट और अंतिम जमाव काल अधिकतम 10 घंटे होता है, जो बिल्कुल OPC के समान ही है।
रैपिड हार्डनिंग सीमेंट (RHC) का अर्थ है "तेजी से ताकत पकड़ने वाला सीमेंट", न कि "तेजी से जमने (Quick Setting) वाला"। इसलिए RHC को भी मिलाने और बिछाने के लिए पर्याप्त समय चाहिए। इसका प्रारंभिक जमाव काल न्यूनतम 30 मिनट और अंतिम जमाव काल अधिकतम 10 घंटे होता है, जो बिल्कुल OPC के समान ही है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 142 (Q716 - Q720)
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Q716: सीलन-रोक रद्दे (Damp Proof Course - DPC) के रूप में फर्श और छतों में उपयोग के लिए निम्नलिखित में से कौन सा प्राकृतिक पत्थर सबसे उपयुक्त है?
- A) संगमरमर (Marble)
- B) बलुआ पत्थर (Sandstone)
- C) ग्रेनाइट (Granite)
- ✅ D) स्लेट (Slate) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
स्लेट (Slate) एक कायांतरित (Metamorphic) चट्टान है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से जलरोधी (Non-porous/Impervious) होती है और इसे बहुत पतली परतों (Sheets) में काटा जा सकता है। इन्हीं गुणों के कारण इसका उपयोग छतों की टाइलों और सीलन रोकने के लिए DPC में किया जाता है।
स्लेट (Slate) एक कायांतरित (Metamorphic) चट्टान है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से जलरोधी (Non-porous/Impervious) होती है और इसे बहुत पतली परतों (Sheets) में काटा जा सकता है। इन्हीं गुणों के कारण इसका उपयोग छतों की टाइलों और सीलन रोकने के लिए DPC में किया जाता है।
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Q717: औद्योगिक स्तर पर 'प्लाइवुड' बनाने के लिए लकड़ी के लट्ठों से छीलकर निकाली जाने वाली पतली परतों (Veneers) की मोटाई सामान्यतः कितनी होती है?
- A) 0.1 mm से 0.3 mm
- ✅ B) 0.4 mm से 6 mm (सही उत्तर)
- C) 8 mm से 12 mm
- D) 15 mm से 20 mm
💡 डिटेल Explanation:
लकड़ी के बड़े बेलनाकार लट्ठों (Logs) को एक रोटरी मशीन पर घुमाकर बहुत पतली चादरें छीली जाती हैं जिन्हें विनियर (Veneers) कहा जाता है। इनकी मोटाई सामान्यतः 0.4 mm से 6 mm के बीच होती है। इन्हीं विनियर्स को गोंद लगाकर और प्रेस करके प्लाइवुड के बोर्ड बनाए जाते हैं।
लकड़ी के बड़े बेलनाकार लट्ठों (Logs) को एक रोटरी मशीन पर घुमाकर बहुत पतली चादरें छीली जाती हैं जिन्हें विनियर (Veneers) कहा जाता है। इनकी मोटाई सामान्यतः 0.4 mm से 6 mm के बीच होती है। इन्हीं विनियर्स को गोंद लगाकर और प्रेस करके प्लाइवुड के बोर्ड बनाए जाते हैं।
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Q718: कंक्रीट की सुकार्यता मापने वाले 'स्लंप परीक्षण' (Slump Test) में, यदि कंक्रीट का मापा गया 'स्लंप' 50 mm से 100 mm के बीच है, तो कंक्रीट की सुकार्यता कैसी मानी जाएगी?
- A) बहुत कम (Very Low)
- B) कम (Low)
- ✅ C) मध्यम (Medium) (सही उत्तर)
- D) उच्च (High)
💡 डिटेल Explanation:
IS 456 के अनुसार कंक्रीट की सुकार्यता का वर्गीकरण:
• 25 - 50 mm: Low Workability (मास कंक्रीट के लिए)
• 50 - 100 mm: Medium Workability (सामान्य RCC बीम, स्लैब, और कॉलम के लिए)
• 100 - 150 mm: High Workability (पंपिंग और ट्रेंच के लिए)।
IS 456 के अनुसार कंक्रीट की सुकार्यता का वर्गीकरण:
• 25 - 50 mm: Low Workability (मास कंक्रीट के लिए)
• 50 - 100 mm: Medium Workability (सामान्य RCC बीम, स्लैब, और कॉलम के लिए)
• 100 - 150 mm: High Workability (पंपिंग और ट्रेंच के लिए)।
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Q719: 'पोर्टलैंड पोज़ोलाना सीमेंट' (PPC) का न्यूनतम विशिष्ट सतह क्षेत्रफल (Specific Surface Area) ब्लेंस परीक्षण के अनुसार कितना होना चाहिए?
- A) 2250 cm²/g
- ✅ B) 3000 cm²/g (सही उत्तर)
- C) 3250 cm²/g
- D) 4000 cm²/g
💡 डिटेल Explanation:
PPC (Portland Pozzolana Cement) में फ्लाई ऐश मिलाया जाता है और इसे OPC की तुलना में अधिक बारीक पीसा जाता है। IS कोड के अनुसार, OPC का विशिष्ट सतह क्षेत्रफल 2250 cm²/g होता है, जबकि PPC के लिए यह न्यूनतम 3000 cm²/g होना अनिवार्य है। (रैपिड हार्डनिंग के लिए 3250 cm²/g)।
PPC (Portland Pozzolana Cement) में फ्लाई ऐश मिलाया जाता है और इसे OPC की तुलना में अधिक बारीक पीसा जाता है। IS कोड के अनुसार, OPC का विशिष्ट सतह क्षेत्रफल 2250 cm²/g होता है, जबकि PPC के लिए यह न्यूनतम 3000 cm²/g होना अनिवार्य है। (रैपिड हार्डनिंग के लिए 3250 cm²/g)।
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Q720: 720 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: पत्थर की चिनाई (Stone Masonry) का वह प्रकार जिसमें पत्थरों को बिना किसी विशेष आकार में काटे या बहुत कम ड्रेसिंग के साथ अनियमित रूप से चिना जाता है, क्या कहलाता है?
- A) ऐशलर चिनाई (Ashlar Masonry)
- ✅ B) रबल चिनाई (Rubble Masonry) (सही उत्तर)
- C) ड्राई चिनाई (Dry Masonry)
- D) विनियर चिनाई (Veneer Masonry)
💡 डिटेल Explanation:
पत्थर की चिनाई मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। जब पत्थरों को खदान से निकालकर सीधे (बिना ड्रेसिंग के या हथौड़े से थोड़ी सी छंटाई करके) दीवार में लगा दिया जाता है, तो उसे 'रबल चिनाई' (Rubble Masonry) कहते हैं। यह सस्ती होती है और इसमें पत्थर अनियमित आकार के होते हैं। इसके विपरीत, पूरी तरह से चौकोर काटे गए पत्थरों की चिनाई 'ऐशलर चिनाई' (Ashlar Masonry) कहलाती है।
पत्थर की चिनाई मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है। जब पत्थरों को खदान से निकालकर सीधे (बिना ड्रेसिंग के या हथौड़े से थोड़ी सी छंटाई करके) दीवार में लगा दिया जाता है, तो उसे 'रबल चिनाई' (Rubble Masonry) कहते हैं। यह सस्ती होती है और इसमें पत्थर अनियमित आकार के होते हैं। इसके विपरीत, पूरी तरह से चौकोर काटे गए पत्थरों की चिनाई 'ऐशलर चिनाई' (Ashlar Masonry) कहलाती है।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 143 (Q721 - Q725)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q721: कंक्रीट मिश्रण के लिए, IS 456 के अनुसार 'हल्की' (Mild) पर्यावरणीय जोखिम स्थिति (Exposure condition) के लिए अधिकतम जल-सीमेंट अनुपात (Water-Cement Ratio) कितना अनुशंसित है?
- A) 0.40
- B) 0.45
- C) 0.50
- ✅ D) 0.55 (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट की टिकाऊपन (Durability) सुनिश्चित करने के लिए IS 456 ने अलग-अलग वातावरण (Mild, Moderate, Severe, Very Severe, Extreme) के लिए अधिकतम जल-सीमेंट अनुपात निर्धारित किए हैं। सामान्य कंक्रीट कार्यों यानी 'Mild' एक्सपोज़र के लिए अधिकतम w/c अनुपात 0.55 रखा जाता है। Severe (कठोर) स्थितियों के लिए यह 0.45 तक कम कर दिया जाता है।
कंक्रीट की टिकाऊपन (Durability) सुनिश्चित करने के लिए IS 456 ने अलग-अलग वातावरण (Mild, Moderate, Severe, Very Severe, Extreme) के लिए अधिकतम जल-सीमेंट अनुपात निर्धारित किए हैं। सामान्य कंक्रीट कार्यों यानी 'Mild' एक्सपोज़र के लिए अधिकतम w/c अनुपात 0.55 रखा जाता है। Severe (कठोर) स्थितियों के लिए यह 0.45 तक कम कर दिया जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam
Q722: प्लाइवुड (Plywood) के निर्माण में, लकड़ी की विभिन्न परतों (Veneers) को एक-दूसरे के ऊपर किस कोण (Angle) पर रखकर चिपकाया जाता है?
- A) 30° के कोण पर
- B) 45° के कोण पर
- ✅ C) 90° (समकोण / Right Angles) पर (सही उत्तर)
- D) 180° के कोण पर (समानांतर)
💡 डिटेल Explanation:
प्लाईवुड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सभी दिशाओं में समान रूप से मजबूत होता है और मुड़ता (Warp) नहीं है। यह इसलिए संभव हो पाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक अगली परत (Veneer) के रेशों (Grains) को पिछली परत के रेशों के ठीक समकोण (90°) पर रखा जाता है। इस व्यवस्था को 'क्रॉस-ग्रेनिंग' (Cross-graining) कहा जाता है।
प्लाईवुड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सभी दिशाओं में समान रूप से मजबूत होता है और मुड़ता (Warp) नहीं है। यह इसलिए संभव हो पाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक अगली परत (Veneer) के रेशों (Grains) को पिछली परत के रेशों के ठीक समकोण (90°) पर रखा जाता है। इस व्यवस्था को 'क्रॉस-ग्रेनिंग' (Cross-graining) कहा जाता है।
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Q723: ईंट की चिनाई में, यदि किसी ईंट का एक कोना (Corner) इस प्रकार काटा जाए कि उसकी आधी लंबाई और आधी चौड़ाई कट जाए, तो उस कटी हुई ईंट को क्या कहते हैं?
- A) क्वीन क्लोजर (Queen Closer)
- ✅ B) किंग क्लोजर (King Closer) (सही उत्तर)
- C) हाफ बैट (Half Bat)
- D) बेवेल्ड क्लोजर (Beveled Closer)
💡 डिटेल Explanation:
किंग क्लोजर (King Closer) बनाने के लिए ईंट के एक सिरे के मध्य बिंदु (Middle of width) से लेकर उसके दूसरे सिरे के मध्य बिंदु (Middle of length) तक एक तिरछी लाइन पर ईंट को काटा जाता है। इससे ईंट का एक तिकोना हिस्सा निकल जाता है। इसका उपयोग दीवार के कोनों पर जोड़ों को एक सीध में आने से रोकने के लिए किया जाता है।
किंग क्लोजर (King Closer) बनाने के लिए ईंट के एक सिरे के मध्य बिंदु (Middle of width) से लेकर उसके दूसरे सिरे के मध्य बिंदु (Middle of length) तक एक तिरछी लाइन पर ईंट को काटा जाता है। इससे ईंट का एक तिकोना हिस्सा निकल जाता है। इसका उपयोग दीवार के कोनों पर जोड़ों को एक सीध में आने से रोकने के लिए किया जाता है।
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Q724: पेंट के निर्माण में 'थिनर' (Thinner) या विलायक (Solvent) का मुख्य कार्य क्या होता है?
- A) पेंट को रंग देना
- B) पेंट को जल्दी सुखाना
- ✅ C) पेंट की श्यानता (Viscosity) को कम करके उसे पतला और आसानी से फैलाने योग्य बनाना (सही उत्तर)
- D) पेंट को वॉटरप्रूफ बनाना
💡 डिटेल Explanation:
ऑयल पेंट में बेस और व्हीकल (अलसी का तेल) मिलने से पेंट बहुत गाढ़ा हो जाता है, जिसे ब्रश से लगाना मुश्किल होता है। थिनर (जैसे तारपीन का तेल) इस गाढ़ेपन (Viscosity) को कम कर देता है। यह अत्यधिक वाष्पशील (Volatile) होता है, इसलिए सतह पर पेंट लगाते ही यह हवा में उड़ जाता है और पेंट की मजबूत परत पीछे रह जाती है।
ऑयल पेंट में बेस और व्हीकल (अलसी का तेल) मिलने से पेंट बहुत गाढ़ा हो जाता है, जिसे ब्रश से लगाना मुश्किल होता है। थिनर (जैसे तारपीन का तेल) इस गाढ़ेपन (Viscosity) को कम कर देता है। यह अत्यधिक वाष्पशील (Volatile) होता है, इसलिए सतह पर पेंट लगाते ही यह हवा में उड़ जाता है और पेंट की मजबूत परत पीछे रह जाती है।
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Q725: साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) की 'मानक सघनता' (Standard Consistency) के लिए आवश्यक पानी की मात्रा सामान्यतः सीमेंट के वजन का लगभग कितना प्रतिशत होती है?
- A) 10% - 15%
- B) 15% - 20%
- ✅ C) 25% - 30% (सही उत्तर)
- D) 40% - 50%
💡 डिटेल Explanation:
मानक सघनता (Standard Consistency - P) पानी की वह न्यूनतम मात्रा है जो सीमेंट को एक मानक पेस्ट (जिसमें विकाट प्लंजर नीचे से 5-7 mm ऊपर रुक जाए) में बदलने के लिए आवश्यक होती है। ताजे OPC के लिए यह मात्रा सामान्यतः 25% से 30% के बीच होती है। जमाव काल और निर्दोषता (Soundness) के परीक्षण इसी 'P' के आधार पर किए जाते हैं।
मानक सघनता (Standard Consistency - P) पानी की वह न्यूनतम मात्रा है जो सीमेंट को एक मानक पेस्ट (जिसमें विकाट प्लंजर नीचे से 5-7 mm ऊपर रुक जाए) में बदलने के लिए आवश्यक होती है। ताजे OPC के लिए यह मात्रा सामान्यतः 25% से 30% के बीच होती है। जमाव काल और निर्दोषता (Soundness) के परीक्षण इसी 'P' के आधार पर किए जाते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 144 (Q726 - Q730)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q726: भवन निर्माण पत्थरों के लिए किए जाने वाले 'स्मिथ परीक्षण' (Smith's Test) का मुख्य उद्देश्य क्या पता लगाना होता है?
- A) पत्थर की कठोरता
- B) पत्थर का जल अवशोषण
- ✅ C) पत्थर में मौजूद घुलनशील मिट्टी या अशुद्धियों (Soluble earthy/clayey matter) की उपस्थिति (सही उत्तर)
- D) पत्थर का विशिष्ट गुरुत्व
💡 डिटेल Explanation:
स्मिथ टेस्ट (Smith's Test) में पत्थर के कुछ टुकड़ों को साफ पानी से भरे गिलास में डाला जाता है और जोर से हिलाया जाता है। यदि पानी गंदा (Muddy/Turbid) हो जाता है, तो इसका अर्थ है कि पत्थर में बहुत अधिक घुलनशील मिट्टी मौजूद है, जो पत्थर को कमजोर बनाती है और वह निर्माण के लिए अयोग्य है।
स्मिथ टेस्ट (Smith's Test) में पत्थर के कुछ टुकड़ों को साफ पानी से भरे गिलास में डाला जाता है और जोर से हिलाया जाता है। यदि पानी गंदा (Muddy/Turbid) हो जाता है, तो इसका अर्थ है कि पत्थर में बहुत अधिक घुलनशील मिट्टी मौजूद है, जो पत्थर को कमजोर बनाती है और वह निर्माण के लिए अयोग्य है।
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Q727: अत्यधिक उच्च सुकार्यता (Very High Workability) वाली बहने योग्य कंक्रीट (Flowing concrete) की सुकार्यता मापने के लिए कौन सा परीक्षण सबसे उपयुक्त है?
- A) स्लंप टेस्ट (Slump Test)
- B) कॉम्पैक्टिंग फैक्टर टेस्ट
- C) वी-बी टेस्ट (Vee-Bee Test)
- ✅ D) फ्लो टेबल टेस्ट (Flow Table Test) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
जब कंक्रीट में बहुत अधिक पानी या सुपर-प्लास्टिसाइज़र मिलाया जाता है, तो स्लंप टेस्ट में वह पूरी तरह ढह (Collapse Slump) जाती है, जिससे सही रीडिंग नहीं मिलती। ऐसी अत्यधिक बहने वाली कंक्रीट की सुकार्यता मापने के लिए फ्लो टेबल टेस्ट (Flow Table Test) किया जाता है, जहाँ कंक्रीट के फैलाव (Spread) का प्रतिशत मापा जाता है।
जब कंक्रीट में बहुत अधिक पानी या सुपर-प्लास्टिसाइज़र मिलाया जाता है, तो स्लंप टेस्ट में वह पूरी तरह ढह (Collapse Slump) जाती है, जिससे सही रीडिंग नहीं मिलती। ऐसी अत्यधिक बहने वाली कंक्रीट की सुकार्यता मापने के लिए फ्लो टेबल टेस्ट (Flow Table Test) किया जाता है, जहाँ कंक्रीट के फैलाव (Spread) का प्रतिशत मापा जाता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2015 & 2018, RRB JE, UKPSC JE
Q728: भारतीय मानक आकार की एक मानक मॉड्यूलर ईंट (19 cm × 9 cm × 9 cm) का औसत वजन (Average weight) लगभग कितना होता है?
- A) 1.5 से 2.0 kg
- B) 2.0 से 2.5 kg
- ✅ C) 3.0 से 3.5 kg (सही उत्तर)
- D) 4.5 से 5.0 kg
💡 डिटेल Explanation:
एक अच्छी तरह से पकी हुई मानक भारतीय ईंट का सामान्य वजन लगभग 3.0 से 3.5 किलोग्राम के बीच होता है। ईंट का घनत्व सामान्यतः 1800 से 2000 kg/m³ के बीच माना जाता है। इसी वजन के आधार पर दीवारों का डेड लोड (Dead load) गिना जाता है।
एक अच्छी तरह से पकी हुई मानक भारतीय ईंट का सामान्य वजन लगभग 3.0 से 3.5 किलोग्राम के बीच होता है। ईंट का घनत्व सामान्यतः 1800 से 2000 kg/m³ के बीच माना जाता है। इसी वजन के आधार पर दीवारों का डेड लोड (Dead load) गिना जाता है।
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Q729: इमारती लकड़ी (Timber) में, पेड़ की छाल (Bark) के क्षतिग्रस्त होने या कटने के बाद, उसके ऊपर लकड़ी की नई परतों के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण उत्पन्न होने वाले दोष को क्या कहते हैं?
- A) नॉट (Knot)
- ✅ B) रिंड गॉल (Rind Gall) (सही उत्तर)
- C) अपसेट (Upset)
- D) फॉक्सीनेस (Foxiness)
💡 डिटेल Explanation:
जब किसी बढ़ते हुए पेड़ की किसी टहनी को गलत तरीके से काट दिया जाता है और उसकी छाल (Rind) हट जाती है, तो पेड़ उस घाव को ढकने के लिए वहां बहुत तेजी से नई लकड़ी (Sapwood) उगाता है, जिससे तने पर एक प्रकार की सूजन या गांठ बन जाती है। इस दोष को रिंड गॉल (Rind Gall) कहा जाता है, जो लकड़ी को उस स्थान पर कमजोर बना देता है।
जब किसी बढ़ते हुए पेड़ की किसी टहनी को गलत तरीके से काट दिया जाता है और उसकी छाल (Rind) हट जाती है, तो पेड़ उस घाव को ढकने के लिए वहां बहुत तेजी से नई लकड़ी (Sapwood) उगाता है, जिससे तने पर एक प्रकार की सूजन या गांठ बन जाती है। इस दोष को रिंड गॉल (Rind Gall) कहा जाता है, जो लकड़ी को उस स्थान पर कमजोर बना देता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q730: 730 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: भारतीय मानकों के अनुसार, साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) का 'अंतिम जमाव काल' (Final Setting Time) अधिकतम कितना होना चाहिए?
- A) 30 मिनट
- B) 60 मिनट
- ✅ C) 600 मिनट (10 घंटे) (सही उत्तर)
- D) 1440 मिनट (24 घंटे)
💡 डिटेल Explanation:
अंतिम जमाव काल वह समय है जब सीमेंट पूरी तरह से जम जाता है और उस पर विकाट उपकरण की सुई कोई निशान (Impression) नहीं छोड़ पाती। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह समय अधिकतम 10 घंटे (यानी 600 मिनट) होता है। इस समय के बाद ही कंक्रीट से सांचे या फॉर्मवर्क (Formwork) हटाए जा सकते हैं।
अंतिम जमाव काल वह समय है जब सीमेंट पूरी तरह से जम जाता है और उस पर विकाट उपकरण की सुई कोई निशान (Impression) नहीं छोड़ पाती। साधारण पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के लिए यह समय अधिकतम 10 घंटे (यानी 600 मिनट) होता है। इस समय के बाद ही कंक्रीट से सांचे या फॉर्मवर्क (Formwork) हटाए जा सकते हैं।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 145 (Q731 - Q735)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q731: भारतीय मानकों (IS 12600) के अनुसार, 'लो हीट पोर्टलैंड सीमेंट' (Low Heat Cement) का न्यूनतम 'विशिष्ट सतह क्षेत्रफल' (Specific Surface Area) कितना होना चाहिए?
- A) 2250 cm²/g
- B) 3000 cm²/g
- ✅ C) 3200 cm²/g (सही उत्तर)
- D) 4000 cm²/g
💡 डिटेल Explanation:
लो हीट सीमेंट का उपयोग बड़े बांधों जैसे मास कंक्रीट कार्यों में किया जाता है ताकि जलयोजन की ऊष्मा कम निकले। ऊष्मा को नियंत्रित करने के लिए इसे साधारण सीमेंट (2250 cm²/g) की तुलना में अधिक बारीक पीसा जाता है। इसका न्यूनतम विशिष्ट सतह क्षेत्रफल 3200 cm²/g होता है।
लो हीट सीमेंट का उपयोग बड़े बांधों जैसे मास कंक्रीट कार्यों में किया जाता है ताकि जलयोजन की ऊष्मा कम निकले। ऊष्मा को नियंत्रित करने के लिए इसे साधारण सीमेंट (2250 cm²/g) की तुलना में अधिक बारीक पीसा जाता है। इसका न्यूनतम विशिष्ट सतह क्षेत्रफल 3200 cm²/g होता है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2016, UPSSSC JE 2018, MP Vyapam
Q732: ईंटों को पकाने की वह सबसे प्राचीन और 'अस्थाई' (Temporary) विधि कौन सी है जिसमें ईंटों और ईंधन को परतों में जमाकर खुले में पकाया जाता है?
- ✅ A) क्लैंप बर्निंग (Clamp Burning / पजावा) (सही उत्तर)
- B) बुल ट्रेंच भट्ठा (Bull's Trench Kiln)
- C) हॉफमैन भट्ठा (Hoffman's Kiln)
- D) टनल भट्ठा (Tunnel Kiln)
💡 डिटेल Explanation:
क्लैंप (Clamp) या पजावा ईंटें पकाने का एक पारंपरिक और अस्थाई तरीका है। इसमें जमीन पर कच्ची ईंटों और ईंधन (जैसे उपले, लकड़ी, घास) की एक के ऊपर एक परतें बिछाकर आग लगा दी जाती है। यह छोटे पैमाने पर काम आता है, लेकिन इसमें बहुत सारी ईंटें खराब (Overburnt या Underburnt) हो जाती हैं और प्रदूषण भी अधिक होता है।
क्लैंप (Clamp) या पजावा ईंटें पकाने का एक पारंपरिक और अस्थाई तरीका है। इसमें जमीन पर कच्ची ईंटों और ईंधन (जैसे उपले, लकड़ी, घास) की एक के ऊपर एक परतें बिछाकर आग लगा दी जाती है। यह छोटे पैमाने पर काम आता है, लेकिन इसमें बहुत सारी ईंटें खराब (Overburnt या Underburnt) हो जाती हैं और प्रदूषण भी अधिक होता है।
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Q733: कठोर मौसम (जैसे भारी बारिश, पाला, फ्रीज-थॉ) का सफलतापूर्वक सामना करने और बिना क्षय हुए लंबे समय तक सुरक्षित रहने की कंक्रीट की क्षमता को क्या कहते हैं?
- A) सुकार्यता (Workability)
- B) संपीडन सामर्थ्य (Compressive Strength)
- ✅ C) टिकाऊपन या स्थायित्व (Durability) (सही उत्तर)
- D) पारगम्यता (Permeability)
💡 डिटेल Explanation:
टिकाऊपन (Durability) कंक्रीट का वह गुण है जिसके द्वारा यह मौसम के गंभीर प्रभावों (Weathering action), रासायनिक हमलों और घिसाव का विरोध करती है। एक उच्च सामर्थ्य (Strength) वाली कंक्रीट आवश्यक नहीं कि टिकाऊ भी हो, टिकाऊपन के लिए कंक्रीट का अत्यधिक सघन (Dense) और कम पारगम्य (Low permeability) होना सबसे जरूरी है।
टिकाऊपन (Durability) कंक्रीट का वह गुण है जिसके द्वारा यह मौसम के गंभीर प्रभावों (Weathering action), रासायनिक हमलों और घिसाव का विरोध करती है। एक उच्च सामर्थ्य (Strength) वाली कंक्रीट आवश्यक नहीं कि टिकाऊ भी हो, टिकाऊपन के लिए कंक्रीट का अत्यधिक सघन (Dense) और कम पारगम्य (Low permeability) होना सबसे जरूरी है।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, LMRC JE, RRB JE
Q734: लकड़ी की उन प्रजातियों को क्या कहा जाता है जो विशेष रूप से खारे पानी (Sea water) में लकड़ी के ढांचों को अंदर ही अंदर खाकर खोखला कर देते हैं?
- A) दीमक (Termites)
- B) बीटल (Beetles)
- C) फफूंदी (Fungi)
- ✅ D) मरीन बोरर्स (Marine Borers) (सही उत्तर)
💡 डिटेल Explanation:
मरीन बोरर्स (Marine Borers) समुद्री कीड़े होते हैं जो खारे पानी में डूबी हुई लकड़ी (जैसे बंदरगाह के पियर्स और नाव के तख्ते) में छेद करके उसे छलनी बना देते हैं। दीमक और बीटल जमीन पर मौजूद लकड़ी को नुकसान पहुँचाते हैं।
मरीन बोरर्स (Marine Borers) समुद्री कीड़े होते हैं जो खारे पानी में डूबी हुई लकड़ी (जैसे बंदरगाह के पियर्स और नाव के तख्ते) में छेद करके उसे छलनी बना देते हैं। दीमक और बीटल जमीन पर मौजूद लकड़ी को नुकसान पहुँचाते हैं।
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2018, UPSSSC JE 2016, RRB JE
Q735: 735 MCQ का माइलस्टोन! प्रश्न: लोहे और इस्पात (Steel) की संरचनाओं को जंग लगने (Corrosion) से बचाने के लिए 'प्राइमर' (Primer) के रूप में सबसे अधिक किस पेंट का उपयोग किया जाता है?
- A) वाइट लेड पेंट
- ✅ B) रेड लेड पेंट (Red Lead Paint) (सही उत्तर)
- C) डिस्टेंपर
- D) एल्युमिनियम पेंट
💡 डिटेल Explanation:
रेड लेड (Red Lead - Pb₃O₄) का उपयोग लोहे के स्ट्रक्चर्स के लिए प्राइमर के रूप में व्यापक रूप से किया जाता है। यह लोहे की सतह पर बहुत अच्छी तरह चिपकता है और एक जंग-रोधी (Anti-corrosive) परत बनाता है। (ध्यान दें: वाइट लेड का उपयोग लकड़ी के लिए किया जाता है)।
रेड लेड (Red Lead - Pb₃O₄) का उपयोग लोहे के स्ट्रक्चर्स के लिए प्राइमर के रूप में व्यापक रूप से किया जाता है। यह लोहे की सतह पर बहुत अच्छी तरह चिपकता है और एक जंग-रोधी (Anti-corrosive) परत बनाता है। (ध्यान दें: वाइट लेड का उपयोग लकड़ी के लिए किया जाता है)।
बिल्डिंग मटेरियल (750 MCQ सीरीज़) - भाग 146 (Q736 - Q740)
📌 Exam Tags: SSC JE 2017 & 2019, UPPCL JE 2018, DMRC JE
Q736: अत्यधिक कठोर और टिकाऊ पत्थर 'क्वार्टजाइट' (Quartzite) किस प्राकृतिक चट्टान के कायांतरण (Metamorphism) से बनता है?
- A) चूना पत्थर (Limestone)
- ✅ B) बलुआ पत्थर (Sandstone) (सही उत्तर)
- C) ग्रेनाइट (Granite)
- D) शेल (Shale)
💡 डिटेल Explanation:
जब अवसादी चट्टान बलुआ पत्थर (Sandstone) पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक उच्च तापमान और दबाव पड़ता है, तो इसके सिलिका कण पिघलकर क्रिस्टलीय रूप ले लेते हैं। इस कायांतरित चट्टान को क्वार्टजाइट (Quartzite) कहते हैं, जो मूल बलुआ पत्थर से कहीं अधिक कठोर और मजबूत होता है। (चूना पत्थर से संगमरमर और शेल से स्लेट बनता है)।
जब अवसादी चट्टान बलुआ पत्थर (Sandstone) पर पृथ्वी के अंदर अत्यधिक उच्च तापमान और दबाव पड़ता है, तो इसके सिलिका कण पिघलकर क्रिस्टलीय रूप ले लेते हैं। इस कायांतरित चट्टान को क्वार्टजाइट (Quartzite) कहते हैं, जो मूल बलुआ पत्थर से कहीं अधिक कठोर और मजबूत होता है। (चूना पत्थर से संगमरमर और शेल से स्लेट बनता है)।
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Q737: प्रबलित कंक्रीट (RCC) में उपयोग होने वाले स्टील के सरियों को 'जंग' (Corrosion) से बचाने के लिए कंक्रीट का pH मान कैसा होना चाहिए?
- A) अम्लीय (Acidic, pH < 7)
- B) तटस्थ (Neutral, pH = 7)
- ✅ C) अत्यधिक क्षारीय (Highly Alkaline, pH 12-13) (सही उत्तर)
- D) pH का जंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता
💡 डिटेल Explanation:
सीमेंट के जलयोजन के दौरान कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड बनता है, जो कंक्रीट के अंदर के वातावरण को अत्यधिक क्षारीय (Alkaline, pH 12-13 के आसपास) बना देता है। यह क्षारीय वातावरण स्टील के चारों ओर एक 'सुरक्षात्मक फिल्म' बनाता है जो जंग (Rusting) को रोकता है। यदि हवा की CO₂ के कारण यह pH 9 से नीचे गिर जाए (Carbonation), तो स्टील में जंग लगना शुरू हो जाता है।
सीमेंट के जलयोजन के दौरान कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड बनता है, जो कंक्रीट के अंदर के वातावरण को अत्यधिक क्षारीय (Alkaline, pH 12-13 के आसपास) बना देता है। यह क्षारीय वातावरण स्टील के चारों ओर एक 'सुरक्षात्मक फिल्म' बनाता है जो जंग (Rusting) को रोकता है। यदि हवा की CO₂ के कारण यह pH 9 से नीचे गिर जाए (Carbonation), तो स्टील में जंग लगना शुरू हो जाता है।
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Q738: डामर (Asphalt) जो प्राकृतिक रूप से कुछ चूना पत्थर या बलुआ पत्थर की चट्टानों के छिद्रों में भरा हुआ पाया जाता है, उसे क्या कहा जाता है?
- A) बिटुमेन (Bitumen)
- B) लेक एस्फाल्ट (Lake Asphalt)
- ✅ C) रॉक एस्फाल्ट (Rock Asphalt) (सही उत्तर)
- D) मास्टिक एस्फाल्ट (Mastic Asphalt)
💡 डिटेल Explanation:
डामर या एस्फाल्ट प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों हो सकता है। प्राकृतिक एस्फाल्ट जब चट्टानों (विशेषकर चूना पत्थर या सैंडस्टोन) के छिद्रों में 10% से 15% की मात्रा में जमा हुआ मिलता है, तो उसे 'रॉक एस्फाल्ट' (Rock Asphalt) कहा जाता है। इसे पीसकर गर्म करने के बाद सीधे सड़क की सतह पर उपयोग किया जाता है।
डामर या एस्फाल्ट प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों हो सकता है। प्राकृतिक एस्फाल्ट जब चट्टानों (विशेषकर चूना पत्थर या सैंडस्टोन) के छिद्रों में 10% से 15% की मात्रा में जमा हुआ मिलता है, तो उसे 'रॉक एस्फाल्ट' (Rock Asphalt) कहा जाता है। इसे पीसकर गर्म करने के बाद सीधे सड़क की सतह पर उपयोग किया जाता है।
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Q739: कंक्रीट मिश्रण में यदि पानी की मात्रा (Water content) आवश्यकता से अधिक बढ़ा दी जाए, तो कंक्रीट पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- A) ताकत (Strength) और सुकार्यता (Workability) दोनों बढ़ेंगी
- B) ताकत और सुकार्यता दोनों घटेंगी
- ✅ C) सुकार्यता (Workability) बढ़ेगी, लेकिन ताकत (Strength) काफी घट जाएगी (सही उत्तर)
- D) केवल रंग में परिवर्तन होगा
💡 डिटेल Explanation:
कंक्रीट में अधिक पानी मिलाने से वह बहुत आसानी से बहने लगती है (अर्थात सुकार्यता या Workability बढ़ जाती है)। लेकिन अतिरिक्त पानी कंक्रीट के जमने के बाद वाष्पित होकर खोखले छिद्र (Voids) छोड़ देता है। इससे कंक्रीट की सघनता और ताकत (Strength) में भारी गिरावट आती है।
कंक्रीट में अधिक पानी मिलाने से वह बहुत आसानी से बहने लगती है (अर्थात सुकार्यता या Workability बढ़ जाती है)। लेकिन अतिरिक्त पानी कंक्रीट के जमने के बाद वाष्पित होकर खोखले छिद्र (Voids) छोड़ देता है। इससे कंक्रीट की सघनता और ताकत (Strength) में भारी गिरावट आती है।
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Q740: 🌟 740 MCQ का माइलस्टोन! 🌟 प्रश्न: भारतीय मानक (IS 456) के अनुसार, 'M25' ग्रेड कंक्रीट के लिए सीमेंट, बालू और गिट्टी का मानक नाममात्र अनुपात (Nominal Mix) क्या माना जाता है?
- A) 1 : 2 : 4
- B) 1 : 1.5 : 3
- ✅ C) 1 : 1 : 2 (सही उत्तर)
- D) 1 : 3 : 6
💡 डिटेल Explanation:
सामान्य निर्माण कार्यों के लिए IS 456 में मानक अनुपात दिए गए हैं:
• M15 = 1 : 2 : 4
• M20 = 1 : 1.5 : 3
• M25 = 1 : 1 : 2
M25 से ऊपर के ग्रेड्स (जैसे M30, M40) के लिए फिक्स अनुपात काम नहीं करते, उनके लिए कंक्रीट का 'डिज़ाइन मिक्स' (Design Mix) तैयार करना अनिवार्य होता है।
सामान्य निर्माण कार्यों के लिए IS 456 में मानक अनुपात दिए गए हैं:
• M15 = 1 : 2 : 4
• M20 = 1 : 1.5 : 3
• M25 = 1 : 1 : 2
M25 से ऊपर के ग्रेड्स (जैसे M30, M40) के लिए फिक्स अनुपात काम नहीं करते, उनके लिए कंक्रीट का 'डिज़ाइन मिक्स' (Design Mix) तैयार करना अनिवार्य होता है।
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